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बगिया_का_पेड़_और_डायन_का_जाल.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:09अगर हम सोचें की दुनिया का सबसे बड़ा खत्रा क्या है, तो अखसर हमारे दिमाग में क्या आता है,
  2. 0:09–0:17कोई हत्यार बन, दूष्मन, कोई भ्यानक प्रक्रतिक, आप्दा, या फिर अप्ट्र इन्ट्नेट पर बआट्ठा कोई शातिर हैकर.
  3. 0:17–0:47बल आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ
  4. 0:47–0:52अपने अपने बाद करने लें जो इसी दरावने सच को उजागर करता है
  5. 0:52–0:59ये गजेंदर तोकुर दोरा रचित एक बेहत दिलचस्प मेठिली कता है
  6. 0:59–1:05जिसका शीर्षक है बगीयाक गाच यानी बगीयाका पेड
  7. 1:05–1:11अर मैं शोटाऊं को बतादूं की ये कता प्रठम मेठली पाखषेक इपत्रिका विदेह में प्रकाषित हूँई ती
  8. 1:11–1:14और ये कोई आम कहानी नहीं है
  9. 1:14–1:15बिलकुन नहीं
  10. 1:15–1:18हम यहां एक एसी कहानी के पन्नो में उतरने वाले है
  11. 1:18–1:20जो बहली सुन्ने में एक लोग कथा लकती हो
  12. 1:35–1:39की ये महर्ज जादू तोने या परीों की कहानी नहीं है
  13. 1:39–1:44मडला हम अकसर लोग कतावों को बच्छों के मनोरंजन तक सिमथ कर देते हैं
  14. 1:44–1:50लेकिन अटिहासिक रुप से देखा जाए, तो ये कहानीय समाज को बड़े खतरों के प्रती सचेट करने कि ले गडी जाती जाती थे
  15. 2:05–2:09तो अईन्सान का दिमा कुट को बचाने के ले किस द़ा सकता है?
  16. 2:09–2:12तो चली, कहानी की नीव से शुरू करते हैं.
  17. 2:12–2:18पूरी कहानी का जो केंदर है ना वो एक बहुत ही जादूए और मासुम सद्द्रष्चे है.
  18. 2:18–2:21एक गरीब, लेकिन बहुत इखुशाग रबुद्दिका.
  19. 2:21–2:26याने बवड़चा है, उसकी माँ उसे खाने के लिए बग्या देती है.
  20. 2:26–2:31और बग्या जो लुग नहीं जानते, चावल के आटे से बना एक पारमपरेक न वोड़ स्वादिष्ट विएंजन होता है.
  21. 2:31–2:36तो वो बच्चा उसे खाने के बजाए केप में जाके भो देता है.
  22. 2:36–2:39और वहां इक चमतकार होता है
  23. 2:39–2:42उस जगागपर एक बग्याग गाचुगाता है
  24. 2:42–2:47मतलब उस पेडपर पल के जगग ताजी और मीटी बग्या लगने लकती है
  25. 2:47–2:48क्या बात है
  26. 2:48–2:51और उस बच्चे का सबसे पसंदीदा काम है
  27. 2:51–2:54उस पेडपर चरना और बग्या तोडकर काना
  28. 2:54–3:00मतलब, ये द्रिष्च आपने आपने सुरक्षा और मासुम्यत का प्रतीक लकता है.
  29. 3:00–3:03लिकिन लोग कतावों कि सरष्नाही कुछ यह आईसी होती है,
  30. 3:03–3:07कि लिए इस सुरक्ष्च दून्या का ब्रम बहुत जल्दी तोर देती है.
  31. 3:07–3:12कुकि ज़हां कुछ अच्छा या जादूई होता है, वहां किसी ना किसी की बूरी नजर तो ज़ोर परती है.
  32. 3:12–3:14अं। और यहां भी वही होता है.
  33. 3:14–3:20आँ. इस मासुमयत पर एक एसी नजर परती है, जो पूरी तरा से विनाशकारी है.
  34. 3:20–3:25एक दायन जिसे अन्सानी मास काने की तीव्र लाल्सा है
  35. 3:25–3:28इस कता में अन्सानी मास को मसुवा कहा गया है
  36. 3:28–3:29बापरे
  37. 3:29–3:32और उसकी नजर उस हरिष्ट पुष्ट बच्छे पर पर परती है
  38. 3:32–3:36अब दायन किलिए वो बच्चा कोई अप अन्सान नहीं है
  39. 3:36–3:40बलकी महज एक शिकार है, उसकी बूक मिताने का बस एक सादन.
  40. 3:40–3:44और यही से कहानी का अस्ली मनोवेग्याने खेल शूरू होता है.
  41. 3:44–3:48मतलब ज़र शोच ये अगर वो एक शकतिशाली डायन है,
  42. 3:48–3:51तो वो सीदे जाकर बच्छे पर जबट्टा मार सकती ती,
  43. 3:51–3:53उसे जबर्दस्ती पकर सकती थी है ना?
  44. 3:53–3:55बिल्कोल उसके पास ताकत की कोई कमी नहीं ती
  45. 3:55–3:57लेकिन वो एसा नहीं करती
  46. 3:57–3:59वो जो तरीका अपनाती है
  47. 3:59–4:02उसे अगर हम आजके साएबर सुरक्षा के नजर्ये से देखें
  48. 4:02–4:04तो वो बिल्कोल एक सोचल एंजिनेरिंग
  49. 4:04–4:08या विशिँँ श्काम की तरा काम करती हैं
  50. 4:08–4:10ये बहुत फी चाटीक अनलोगी है
  51. 4:10–4:13कुकी श्कामर्स अकसर अपके कमपुटर को हैक नहीं करते
  52. 4:13–4:15वे आपको हैक करते हैं
  53. 4:15–4:19मीचे आती है और बहुत फी मीची असाहाए सी आवाज में
  54. 4:19–4:22उस बच्चे से बगीया माँगती है
  55. 4:22–4:26ये हेर्फेर का या मैनेपिलेशन का पहला चरन है,
  56. 4:26–4:29सहनबूती बखोरना और इक जुटा सम्वन्द स्तापित करना.
  57. 4:29–4:32जब कोई आप से बहुत विनम्रता से कुछ मांगता है,
  58. 4:32–4:36तो हमारा मानव सबहावी यसा है की हम मदद करने किले प्रिरिथ हो जाते है.
  59. 4:36–4:39और वो बच्चा भी मदध करने को तगयार हो जाता है
  60. 4:40–4:43पू पेड से बगया तोड़कर उसे हाथ में देने लकता है
  61. 4:44–4:47लिकिन तभी डायन एक अजीपसा नियम बना देती है
  62. 4:47–4:50वो कहती है कि नहीं नहीं हाथ से मद दो
  63. 4:50–4:52ये हताईन होड़ाएगा
  64. 4:52–4:53हताईन?
  65. 4:53–4:55मतलब हाथ से चुने कारन अपवित्र होगाएगा
  66. 4:55–4:56हाथ
  67. 4:56–4:58तो बच्चा थोडा सुचता है
  68. 4:58–5:00और कहता है
  69. 5:00–5:02कि थीक है मैं इसे तुमहरे सिर्पर रग देता हों
  70. 5:02–5:06तो डायन तुरनत एक और नियम गर देती है
  71. 5:06–5:07कि सिर्पर मत्रख हों
  72. 5:07–5:09मताईन होगाएगा
  73. 5:09–5:10मतलब
  74. 5:10–5:12वो लगतार बच्चे के हर लोगिकल समादान को
  75. 5:12–5:15किसीना किसी मनगननत नियम से खरिज कर रही है
  76. 5:15–5:16बलकोल
  77. 5:16–5:19वो एक जूथी समस्या पेडा करती है
  78. 5:19–5:23और फिर खुदी उसका सबसे आसान समादान भी पेष कर देती है
  79. 5:23–5:25वो अपना बोरा खोल कहती है कि औरे
  80. 5:25–5:27तुम बस जुक्कर इस बोरे में डाल दो?
  81. 5:28–5:30इस पूरी प्रक्या को समजना बहुत दिल्चस्प है.
  82. 5:30–5:35कठामे ये बात बहुत पूश्ट्रूँप से बताई गे एक बच्चे को अपनी माग की चितामनी याद थ फी.
  83. 5:35–5:38आप, उसे पता था कि टगो से सावदान रहना है.
  84. 5:38–5:40बिल्कुल वो मान्सिक रूप से सतर्क था
  85. 5:40–5:42लेकिन फिर भी वी जाल मे प्हस जाता हैं
  86. 5:42–5:45इसका कारवन यहे के दायन ने उसके तर्क पर हम्ला नहीं किया
  87. 5:45–5:49उसके तिस्जिन मेकिंट प्रोस्स्स में संग्यानात्मक बार
  88. 5:49–6:19जिसे न कोगनेटिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्
  89. 6:19–6:21समाजिक उल्जन कھर देते हैं
  90. 6:21–6:23कि आपका सारा द्यान बस उसुल्जन को सुल्जाने में लग जाता है
  91. 6:23–6:27और जैसी आप उनकी सुजाएगेई प्रक्रिया को फोलो करते है
  92. 6:27–6:30जैसे इस कहानी में बोरे में जुखकर बगया डालना
  93. 6:30–6:32तो आप उनके जाल में आजाते है
  94. 6:32–6:37बिल्कुल, उस एक पल की समाजिक उल्जन के सामने बच्चे की सारी चतूराई हार जाती है.
  95. 6:37–6:42जैसे ही वो जुकता है, डायन पूरती से उसे बोरे में बन कर लेती है.
  96. 6:42–6:48ये सच में दरावना है के खैसे हमारे अपने सामाजिक शिष्टचार ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकते हैं
  97. 6:48–6:52लेकिन ये बच्चा हार मानने वालो मैसे नहीं है
  98. 6:52–6:56दायन उसे बोरे में बनद कर के अपने गर की अर निकल परती हैं
  99. 6:56–6:57और रस्ते में क्या हुता है?
  100. 6:57–6:59रास्ते में डायन थग जाती हैं
  101. 6:59–7:02और एक पेड की चाँ में बोरा रक्कर सोजाती हैं
  102. 7:02–7:04अब यहां बच्चे के पास बहुत खम समः हैं
  103. 7:04–7:07वो बोरे के अंद रोने यह गब राशने के बजाएं
  104. 7:07–7:09वं वं खं खंग
  105. 7:09–7:11किसी तारा बार निकलता हैं
  106. 7:11–7:13लेकिन वो सर्ब भाखता नहीं है
  107. 7:13–7:15और यह उसकी सबसे बड़ी खासियत है
  108. 7:15–7:15आप
  109. 7:15–7:17वो एक ऐसी तरकीब निकालता है
  110. 7:17–7:19जो उसकी कुषागरता
  111. 7:19–7:21उसके दिमाख का सबसे बड़ा प्रमाण है
  112. 7:21–7:23वो उस बोरे में
  113. 7:23–7:24गीली मिट्टी
  114. 7:24–7:25पत्धर
  115. 7:25–7:26और कांटे बहर देता है
  116. 7:26–7:30और वो भी बिल्कुल अपने शरीर के वजन के बराभर
  117. 7:30–7:32इसे कहते हैं प्रेज़न्स अप माइन्ट
  118. 7:32–7:35यानी तुरन्त निरने लेने की अजादारन्शन्ता
  119. 7:35–7:38वो बहुत अच्छे से जानता है कि अगर वो स्वर्व बाग गया
  120. 7:38–7:40और बोरा हलका होगया
  121. 7:40–7:42तो दायन्त तुरन तुटज़ाएगी और उसका पीचा करेगी
  122. 7:42–7:45आँ वो तुड़न् समच जाएगी कि शिकार गायब है
  123. 7:45–7:48इसली वोपने दुष्मन के लिए एक ओ़ ब्रहम पैदा कर रहा है
  124. 7:48–7:51वो दायन् के दिमाख को वही जानकारी फीट कर रहा है
  125. 7:51–7:54जिसकी दायंको उमीद है, यहनी बोरे कबारी पन.
  126. 7:54–8:24और दायन का ब्रहम देखे ये सीन लोग कता का सबसे हास्से पूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  127. 8:24–8:26मुझे यह एक बाज समजनी आती.
  128. 8:26–8:26क्या?
  129. 8:26–8:28कुई अईन्सान अतना अद्धा कैसे उसकता है.
  130. 8:28–8:31मेरे मतलबे वो बोरा उठाकर चल रही है,
  131. 8:31–8:34उसे गीली मिटी और काटों का अहसास रहा है,
  132. 8:34–8:38तो किसी बी तरह से अन्सान के शरीर जैसा तो महसुस नहीं होता.
  133. 8:38–8:45क्या अत्ती आत्मविष्वास और एहंकार, ही बूरे एरादे वाले लोगों को इतना बेवकूफ बना दिता है,
  134. 8:45–8:48के वे एक बार बोरा खोलकर देखने की जेहमत भी नहीं उठाते?
  135. 8:48–8:51इसे हम सर्फ बेवकूफी नहीं कैसकते.
  136. 8:51–8:54मनोविग्यान में बहुत्टी मस्वूथ सिद्दान्त है,
  137. 8:54–8:57जिसे क्कन्फमेशन भायस या पुष्टी करन पुर्वागरे कैतें.
  138. 8:57–8:58अच्छ, वो क्या होता है?
  139. 8:58–9:02हमारा दिमाग अखसर वास्टविक्ता को वैसे नहीं देक्ता जैसी वो सच्छ मे है,
  140. 9:02–9:04उसका अपनी रिस्ता है या काडटे चुपते हैं
  141. 9:04–9:06तो टेकनिकल ये खद्रे के संके थे
  142. 9:06–9:07विस्संगत्या थी
  143. 9:07–9:08लेकिन
  144. 9:08–9:11उसका दिमाग इन चीजों को अपनी जीट के सबूत के तोर पर
  145. 9:11–9:13दोबारा लिग देता है
  146. 9:13–9:15मतलब उसका दिमाग उसके खेहरा है कि
  147. 9:15–9:17तो ये उसकी जीत है.
  148. 9:17–9:17बलकुल.
  149. 9:17–9:19जब बोरे से पानी रिस्ता है
  150. 9:19–9:20या काटे चुपते है,
  151. 9:20–9:23तो टेकनेकल ये खत्रे के संके थे,
  152. 9:23–9:24विस्संगत्या थी.
  153. 9:24–9:25लेकिन,
  154. 9:25–9:28उसका दिमाग एन चीजों को अपनी जीत के सबूथ के तोर पर
  155. 9:28–9:29दोबारा लिग देता है.
  156. 9:29–9:34मतलब उसका दिमाग उस्से कहेरा है कि दिख हो तुमार शिकार तुमसे कितना दरा हूए है
  157. 9:34–9:35वो अंदर पड़ब फ़ारा है
  158. 9:35–10:05अगर बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा ब�
  159. 10:05–10:08वो अपनी भेटी के साद बहुत उच्साह से भोरा कोलती है
  160. 10:08–10:10ये सोचकर के अंदर ताजा शिकार है
  161. 10:11–10:15लेकिन अंदर से स्व गीली मिट्टी, पत्धर और काटे निकलते है
  162. 10:15–10:18दायंग का सारा गहमंट पल बहर में तुट जाता है
  163. 10:18–10:20ये उसके लिए किवल एक शिकार कोने की बात नहीं ती
  164. 10:20–10:24ये उसके एहंकार पर एक बहुत बडी चोट थी
  165. 10:24–10:26एक चोटे से बच्चे ने एक खुंकार डायन को
  166. 10:26–10:28उसी के खेल में माध दे दी थी
  167. 10:28–10:34और व्म यही से कहानी अदिक जटूल और डार कोजाती है
  168. 10:34–10:37अग, क्योंकी क्रोदिड डायन रार नहीं मानती
  169. 10:37–10:41बिलकोल, वो अपनी रननीती बडलती है, बेश बडलती है
  170. 10:41–10:44और फिर से उसी बग्या गाच के पास पहुज जाती है
  171. 10:44–10:48अब यहां आकर कहानी का एक एसा मोडाता है, तोडा अजीब लगता है
  172. 10:48–10:50और इसे पचाना भी मुष्किल है
  173. 10:50–10:51यसे क्यो?
  174. 10:51–10:53क्यों कि बच्चा पेडपर है
  175. 10:53–10:55वो पुरानी गटना को बहुला नहीं है
  176. 10:55–10:59जब डयन भेश बदल कर आती है तो बच्चा उसे पहचान लेता है
  177. 10:59–11:00वो साव साव केता है
  178. 11:00–11:02तो में वही तहगिन बुडिया हो
  179. 11:02–11:06उसे पता है कि ये वही डायन है जिस ने उसे मारने की कोशिष की ती
  180. 11:06–11:12तेटी बागजुत दायन कस्मों का एसा जाल बूनती है कि वो दुबारा बोरे में कैध होगाता है
  181. 11:12–11:14मतलब ये कैसे समबव है?
  182. 11:14–11:16एक बर कोई भाल भाल बचा हो,
  183. 11:16–11:18वो दुबारा उसी चाल में कैसे पहस्टषता है?
  184. 11:18–11:20क्या बच्चा अचानक से बेव्कूफ होगया?
  185. 11:20–11:22ने बच्चा बेव्कूफ नहीं हुए है.
  186. 11:22–11:27यहां कता मानव समाज की एक बहुत ही गेरी कमजोरी को उजागर करती है,
  187. 11:27–11:32जिसे हम अठोरेती बायस और सामाजिक संसकारो का दबाओ के सकते हैं.
  188. 11:32–11:35अठोरेती बायस थोड़ा समजाए एक.
  189. 11:35–11:42समाज में हम ने कस्मो, वादो, और विश्वास दिलाने की प्रक्रीया को एक बहुत उचा दरजा दिया है.
  190. 11:42–11:49जब कोई विक्ती, विषेशकर कोई बड़ा या सत्तादारी विक्ती पूरी द्रिद्दा के साथ जुटी कस्मे कहाता है,
  191. 11:49–11:52तो वो हमारे तारकिग दिमाग को पंगू कर देता है.
  192. 11:52–11:56मतलब जब डायन बहुत जोर देकर कस्में कहाने लगी,
  193. 11:56–11:59तो बच्छे के दिमाग में ये बात हावी हो गगी,
  194. 11:59–12:03की कोई इतना बड़ा जुट इतने विष्वास के सात कैसे बोल सकता है.
  195. 12:03–12:04तीक यही बात है.
  196. 12:05–12:07हम इसे आजके समाज मे भी दिकते हैं.
  197. 12:07–12:10कई बार लोग जानते हैं कि सामने वाला व्यक्ती
  198. 12:10–12:11पहले भी दूका दे चुका है.
  199. 12:12–12:15लेकिन जब व्यक्ती रोकर, कस्मेख हाकर विष्वास दिलाता है,
  200. 12:16–12:17तो लोक फिर से फँज जाते हैं.
  201. 12:17–12:19आई ये तो बहुत आम बात ये
  202. 12:19–12:22इक बच्चा चवे वू कितना भी चतृर क्यूना हो
  203. 12:22–12:24समाजिक बंदनो से अच्वूता नहीं होता
  204. 12:24–12:27दायन इस भार उसकी इसी कमजोरी
  205. 12:27–12:29उसके उसी संकोच का फ़ाईदा उठाया
  206. 12:29–12:31और इस भार दायन इस कोई गलती नहीं की
  207. 12:31–12:32बिलकुल
  208. 12:32–12:34उस्ट्टे अपनी पिछली हार से सबबक लिया था
  209. 12:34–12:36वो रास्ते में कही नी रुकी
  210. 12:36–12:38उस्टे आएंकार में आखर कोई ब्रेक नहीं लिया
  211. 12:38–12:41वो सीदे बोडे को लेकर अपने गर पोडी
  212. 12:41–12:43और ये वो बिन्दू है
  213. 12:43–12:46ज़हां कहानी अपना रूप पूरी तरहां से बड़ल लेती है
  214. 12:46–12:46सच में
  215. 12:46–12:50अप तक जो कहानी एक चाला की और भाग दोड की
  216. 12:50–12:52लोग कता लग रेए थी
  217. 12:52–12:54वो आचानक से बहुर दाख और
  218. 12:54–12:56खफनाख हो जाती है
  219. 12:56–12:58दायन सीदे गर पहचती है
  220. 12:58–13:01बोरे को अपनी बेटी के पास चोडती है
  221. 13:01–13:02और खुद नहाने चली जाती है
  222. 13:02–13:05अप सूछी ए, बोरे के अंदर वो चतृर बच्च्चा है
  223. 13:05–13:09जो जानता है कि कुछी देर में उसे काटकर पकाया जाने वाला है
  224. 13:09–13:12और बाहर दायन की अनजान बेटी है
  225. 13:12–13:16यही पर अस्तित्व की लडाई जिसे हम सरवावल अन्स्टिंक तहते हैं
  226. 13:16–13:19वो अपने सबसे चरम रूप में सामने आती हैं
  227. 13:19–13:21जब जीवान और म्रित्त्यो का सबाल हो,
  228. 13:21–13:24तो अईनसान का दिमाग उन नेटिक सीमाव को लांग जाता है,
  229. 13:24–13:27जिनकी समाने जीवन में कलपना भी नहीं की जासकती.
  230. 13:27–13:29और वो बच्चा यही करता है.
  231. 13:29–13:31वो किसी तरा बोरे से बहार निकलता है.
  232. 13:31–13:34डायन की बीटी उसे देकके रहान रहे जाती है.
  233. 13:34–13:37वो बच्चे के गने और सुंदर बालों को देकती है,
  234. 13:37–13:40जिने कठा में जाता बला कहा गया है
  235. 13:40–13:41गने और सुंदर भाल
  236. 13:41–13:43दायन की बेटी अग्यानी है
  237. 13:43–13:46और उसके अंदरे एक अलक तरहे का लालगच है
  238. 13:46–13:47सुंदरता का लालगच
  239. 13:47–13:50वो पुछती है के उसके बाल यतने सुंदर कैसे हैं
  240. 13:50–13:52और उसके खुटके बाल आजे क्यो नहीं है
  241. 13:52–13:57अब यहां बच्च्चा ज़वाब देता है वो च्टूराई की सारी हदे पार कर देता है
  242. 13:57–14:00बभी बभी ब्यानक जूट बोलता है वो
  243. 14:00–14:00बलकुल
  244. 14:00–14:03वो कहता है कि उसकी माने उसका सर उख़ड
  245. 14:03–14:07यहनी उखली मेरक्कर समाथ यहनी मुसल से खुटा था
  246. 14:07–14:37अगर उपने बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद
  247. 14:37–14:45ये अट्यंद हिंसक है, मतलब एक छोटा बच्चा जो कहानी की श्रूवात में स्वर्फ आपनी माखी दीवृई बग्या कहारा था,
  248. 14:45–14:49वो इतना क्रूर कैसे हो सकता है कि किसी के सिर्पर मुसल से वार कर दें.
  249. 14:49–15:19यह रहांगाड़ तो बज़्ाई बाद्टाई तो बज़्ाई प्रज़्ाई प्रज़्ाई प्रज़्ाई तो बज़्ाई प्रज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो ब�
  250. 15:19–15:23यान बचाने पर आता है, तो वह किसी भी कथोर सीमा तक जासकता है.
  251. 15:24–15:29सरवाईवल की स्तिती में, बुद्दी और क्रुर्ता के बीज की रेखा बहुत धूंडली हो जाती है.
  252. 15:30–15:33बच्चा ये समच चुका ता की टायन के परिवार में दैया नहीं है.
  253. 15:33–15:39इसलिये उसने शिकारी की कमजोडी यानी उसकी बेटी के लालच को ही अपना हत्यार बना लिया.
  254. 15:39–15:42और बच्चा वहां से अपनी जान बचाकगर निकल जाता है.
  255. 15:42–15:48लिकिन कहानी का सब से बहयानक और रुंक्ते कड़े कर देने वाला मोर तो आब आता है.
  256. 15:48–15:51दायन पोखरे यानी तालाप से नहाकर लोडती है
  257. 15:51–15:54उसे बिलकल अंदाजा नहीं है कि गर में क्या होचुका है
  258. 15:54–15:57उसे लगता है कि उसके बेटी ने बच्चे को पका लिया होगा
  259. 15:57–16:02हाँ, वो अनजाने में बच्चे के दवारा तगीर किया आप फोजन काने बैट जाती है
  260. 16:02–16:05जो वास्तव में उसी की बेटी का मास था
  261. 16:05–16:07सहिते और लोक कताव में
  262. 16:07–16:10इसे पौटिक जस्तिस या करमो का फल कहा जाता है
  263. 16:10–16:14लेकिन ये उसका सबसे चरम और अंद्खार मैं रूप है
  264. 16:14–16:18दायन्ज दिस भूख और लालगच के कारन दूसरो के बच्छो को काती दी
  265. 16:18–16:22उसी बूक ने अंततता उसे अपने ही बच्च्छे को खाने पर मजबूर कर दिया
  266. 16:22–16:26लेकिन यहा एक अईसा विवरन है, जो सच्मे दिमाग सुन्न कर देता है
  267. 16:26–16:30जब दायन खाना शुरू करती है, तो वहां एक भिल्ली आती है
  268. 16:30–16:36अर वो भिली कोई सादारन आवाज नहीं लिकालती वो सपष्ट्रूब से चेतावनी देती है
  269. 16:36–16:41म्याँ आपन दिया अपने कहाँ म्याँ
  270. 16:41–16:43मतलप अपनी ही बेटी को खुद खारेईएँ
  271. 16:43–16:44आँ
  272. 16:44–16:47ये द्रिष्य क्या है क्या जानवर भी कहानी में कोई भूमिका निभार है
  273. 16:47–16:51ये पूरी कत्ह कदा कद सबसे शक्तिषाली और प्रतिकात्मक्ष़ है
  274. 16:51–16:56ये द्रिष्य पशु ज्यान बनाम मानविय अग्यान को प्रस्त॥ करता है
  275. 16:56–16:59बिल्ली यहां प्रक्रती की उस आवाज का प्रतीक है
  276. 17:00–17:02जो वास्त्विक्ता को बिना किसी फिल्टर के देकती है
  277. 17:02–17:03आनिमल इंस्टिंक्त
  278. 17:03–17:04बिलकोल
  279. 17:04–17:08जानवरो की सहज प्रवित्ती उस सत्ते को तुरंद भांप लेती है
  280. 17:08–17:11जिसे इनसान का एहंकार और भ्रम नहीं देख बाता
  281. 17:11–17:14बिल्ली सपच्त रूप से सच बोल रही है
  282. 17:14–17:17लेकिन दायन उस चेकानी को समजी नही पाती
  283. 17:17–17:20वो आहिंकार और लालच में इतनी आन्दी है,
  284. 17:20–17:24कि उसे लकता है कि बिल्ली मास का तुक्डा मांग रही है.
  285. 17:24–17:27वो बिल्ली को मास का एक तुक्डा फेंके देती है.
  286. 17:27–17:30और बिल्ली उस मास को चूती तक नहीं है.
  287. 17:30–17:30बाप रे.
  288. 17:30–17:33ये दायन के पतन का सबसे बड़ा संकेत है.
  289. 17:33–17:40जान्वर भी उस्मास को खाने से प्यदेटा है, जिसे दायन अपने अग्ज्यान और भूख में बड़े चाओ से खारे है.
  290. 17:40–17:49अपनी लाल्सा में अदा हो जाता है, तो वो प्रक्रिति के सबस्प्ष्ट इशारों को भी अपनी सुविदान उसार गलत समच लेता है.
  291. 17:49–17:54दायन अपनी भूक और गमन द में उस आवास को अन सुना कर देती हैं.
  292. 17:54–17:57लेकिन सच कभी नकभी सामने आता ही है.
  293. 17:57–17:59जब दायन का खाना कब अतम होता है,
  294. 17:59–18:01और हकी कत उसके सामने आती है,
  295. 18:01–18:03तो उसे समझा जाता है,
  296. 18:03–18:04कि उसने क्या किया है?
  297. 18:04–18:07उगवराकर रोतेवे अपनी बेटी को पुकारती है,
  298. 18:07–18:10लेकिन उध्तर में उस चत्र बच्ची क्यावाज आती है,
  299. 18:10–18:11जो अप सुरक्षिट जगापर है.
  300. 18:11–18:15दायन का खुद का बूना हुँआ मुद्ग का जाल उसी पर भारी पड़ता है.
  301. 18:15–18:19बलकुल उसका पूरा परिवार नश्थ होटा आता है
  302. 18:19–18:22और वो बच्चा वो सुरक्षित अपने गर लोड आता है
  303. 18:22–18:24कहानी के अंठ में हम देकते है
  304. 18:24–18:28कि वो फिर से निटर होकर अपने बग्याक गाच पर चवड़कर
  305. 18:28–18:58अदिक अदिक सदर्क अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक �
  306. 18:58–19:02उज़ाँ बाद्या की वो दो बार फसा लिकिन उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी
  307. 19:02–19:06उसने अपने दर पर विजैए प्राथ की और अपने अस्तिट्व को बचाया
  308. 19:06–19:10और इसके सात ही ये कहानी एक बहुती महत्वपून सवाज़ प्रथ बाद्यागा
  309. 19:10–19:15उपर आई और सतर्क्ता किसी भी शारीरेग बल या दोखे भाजी को माद दे सकती हैं.
  310. 19:15–19:18बच्चे ने गल्तिया की वो दो बार फसा,
  311. 19:18–19:20लेकिन उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी.
  312. 19:20–19:24उसने अपने दर पर विजैए प्राप्त की और अपने अस्तिट्व को बचाया.
  313. 19:24–19:29उज़े तो इसके साथी ये कहानी एक बहुती महत्वपून सवाल बी कहडा करती है,
  314. 19:29–19:32जो में चाहुंगा के हर कोई इस पर भीचार करे.
  315. 19:32–19:36इस पूरी कठा में विनाश की ज़ में केवल एक चीज ती,
  316. 19:36–19:38अनियंत्रित लाल्सा.
  317. 19:38–19:40अप नहीं बात है.
  318. 19:40–19:42तो अगन की इनसानी मास कहने की विक्रित लाल साप
  319. 19:42–19:47और उसकी बेटी की बिना किसी महनत के सुन्दर बाल पाने की चाहत
  320. 19:47–19:51इन दोनो की च्याोंने उनके सोचने समझने की शकती को पुरी तरा कषत्म कर दिया था
  321. 19:51–19:54क्या ये संबव है के हमारे आदूनिक जीवन में भी
  322. 19:54–19:57हमारी कुچ आतार किक और आन्यन्त्रत इच्छाएं
  323. 19:57–20:00ही हमारे लिए सब से बड़े कद्रे का निरमान करती है?
  324. 20:00–20:04क्या हम अपने ही लालच के कारन, अपने ही लिए जाल नहीं बून रहे है?
  325. 20:04–20:06ये सच में सोचने वाली बात है,
  326. 20:06–20:10हम अखसर बहार की स्कमर्स और दोकेवाजन से बचने किलिए
  327. 20:10–20:12अपने कमपुटर में अंटीवाईर्स डाल लेतें
  328. 20:13–20:14अपने फोन पर पास्वर्ट लगा लेतें
  329. 20:15–20:18लेकिन हमारे अपने दिमाग के अंदर जो लालग का स्कम चल रहा है
  330. 20:18–20:20उस्छे अमे कोन बचाएगा?
  331. 20:20–20:22कोई नहीं, कोछी बचना होगा.
  332. 20:22–20:27बिलकोल, जब हम किसी चीस को पाने के लिए इतने उतावले हो जाते हैं,
  333. 20:27–20:32के हम लाल जंदियो, यानी रेट फ्लाग्स को अन्देखा कर देते हैं,
  334. 20:32–20:36तब हम भी उसी डयन या उसकी बेटी कितर विहावार कर रहे होते हैं.
  335. 20:36–20:40अद्र बग्याख काच्वाले चतूर बच्चे कितर तुरन सतर्ख हो जान जाहीए
  336. 20:40–20:44क्योंकि कभी कभी दुनिया कि सबसे कष्टरनाग जाल वही होते हैं
  337. 20:44–20:48जिन में हम अपनी मरजी से अपनी लाल्सा के कारन कदम रखते हैं
  338. 20:48–20:51अपनी लाल्सा के कारन कदम रखते हैं
  339. 20:51–20:56योंगी कभी कभी दूनिया के सबसे खदरनाग जाल वही होते हैं
  340. 20:56–21:00जिन में हम अपनी मरजी से अपनी लालसा के कारन कदम रखते हैं

Plain text

अगर हम सोचें की दुनिया का सबसे बड़ा खत्रा क्या है, तो अखसर हमारे दिमाग में क्या आता है, कोई हत्यार बन, दूष्मन, कोई भ्यानक प्रक्रतिक, आप्दा, या फिर अप्ट्र इन्ट्नेट पर बआट्ठा कोई शातिर हैकर. बल आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ अपने अपने बाद करने लें जो इसी दरावने सच को उजागर करता है ये गजेंदर तोकुर दोरा रचित एक बेहत दिलचस्प मेठिली कता है जिसका शीर्षक है बगीयाक गाच यानी बगीयाका पेड अर मैं शोटाऊं को बतादूं की ये कता प्रठम मेठली पाखषेक इपत्रिका विदेह में प्रकाषित हूँई ती और ये कोई आम कहानी नहीं है बिलकुन नहीं हम यहां एक एसी कहानी के पन्नो में उतरने वाले है जो बहली सुन्ने में एक लोग कथा लकती हो की ये महर्ज जादू तोने या परीों की कहानी नहीं है मडला हम अकसर लोग कतावों को बच्छों के मनोरंजन तक सिमथ कर देते हैं लेकिन अटिहासिक रुप से देखा जाए, तो ये कहानीय समाज को बड़े खतरों के प्रती सचेट करने कि ले गडी जाती जाती थे तो अईन्सान का दिमा कुट को बचाने के ले किस द़ा सकता है? तो चली, कहानी की नीव से शुरू करते हैं. पूरी कहानी का जो केंदर है ना वो एक बहुत ही जादूए और मासुम सद्द्रष्चे है. एक गरीब, लेकिन बहुत इखुशाग रबुद्दिका. याने बवड़चा है, उसकी माँ उसे खाने के लिए बग्या देती है. और बग्या जो लुग नहीं जानते, चावल के आटे से बना एक पारमपरेक न वोड़ स्वादिष्ट विएंजन होता है. तो वो बच्चा उसे खाने के बजाए केप में जाके भो देता है. और वहां इक चमतकार होता है उस जगागपर एक बग्याग गाचुगाता है मतलब उस पेडपर पल के जगग ताजी और मीटी बग्या लगने लकती है क्या बात है और उस बच्चे का सबसे पसंदीदा काम है उस पेडपर चरना और बग्या तोडकर काना मतलब, ये द्रिष्च आपने आपने सुरक्षा और मासुम्यत का प्रतीक लकता है. लिकिन लोग कतावों कि सरष्नाही कुछ यह आईसी होती है, कि लिए इस सुरक्ष्च दून्या का ब्रम बहुत जल्दी तोर देती है. कुकि ज़हां कुछ अच्छा या जादूई होता है, वहां किसी ना किसी की बूरी नजर तो ज़ोर परती है. अं। और यहां भी वही होता है. आँ. इस मासुमयत पर एक एसी नजर परती है, जो पूरी तरा से विनाशकारी है. एक दायन जिसे अन्सानी मास काने की तीव्र लाल्सा है इस कता में अन्सानी मास को मसुवा कहा गया है बापरे और उसकी नजर उस हरिष्ट पुष्ट बच्छे पर पर परती है अब दायन किलिए वो बच्चा कोई अप अन्सान नहीं है बलकी महज एक शिकार है, उसकी बूक मिताने का बस एक सादन. और यही से कहानी का अस्ली मनोवेग्याने खेल शूरू होता है. मतलब ज़र शोच ये अगर वो एक शकतिशाली डायन है, तो वो सीदे जाकर बच्छे पर जबट्टा मार सकती ती, उसे जबर्दस्ती पकर सकती थी है ना? बिल्कोल उसके पास ताकत की कोई कमी नहीं ती लेकिन वो एसा नहीं करती वो जो तरीका अपनाती है उसे अगर हम आजके साएबर सुरक्षा के नजर्ये से देखें तो वो बिल्कोल एक सोचल एंजिनेरिंग या विशिँँ श्काम की तरा काम करती हैं ये बहुत फी चाटीक अनलोगी है कुकी श्कामर्स अकसर अपके कमपुटर को हैक नहीं करते वे आपको हैक करते हैं मीचे आती है और बहुत फी मीची असाहाए सी आवाज में उस बच्चे से बगीया माँगती है ये हेर्फेर का या मैनेपिलेशन का पहला चरन है, सहनबूती बखोरना और इक जुटा सम्वन्द स्तापित करना. जब कोई आप से बहुत विनम्रता से कुछ मांगता है, तो हमारा मानव सबहावी यसा है की हम मदद करने किले प्रिरिथ हो जाते है. और वो बच्चा भी मदध करने को तगयार हो जाता है पू पेड से बगया तोड़कर उसे हाथ में देने लकता है लिकिन तभी डायन एक अजीपसा नियम बना देती है वो कहती है कि नहीं नहीं हाथ से मद दो ये हताईन होड़ाएगा हताईन? मतलब हाथ से चुने कारन अपवित्र होगाएगा हाथ तो बच्चा थोडा सुचता है और कहता है कि थीक है मैं इसे तुमहरे सिर्पर रग देता हों तो डायन तुरनत एक और नियम गर देती है कि सिर्पर मत्रख हों मताईन होगाएगा मतलब वो लगतार बच्चे के हर लोगिकल समादान को किसीना किसी मनगननत नियम से खरिज कर रही है बलकोल वो एक जूथी समस्या पेडा करती है और फिर खुदी उसका सबसे आसान समादान भी पेष कर देती है वो अपना बोरा खोल कहती है कि औरे तुम बस जुक्कर इस बोरे में डाल दो? इस पूरी प्रक्या को समजना बहुत दिल्चस्प है. कठामे ये बात बहुत पूश्ट्रूँप से बताई गे एक बच्चे को अपनी माग की चितामनी याद थ फी. आप, उसे पता था कि टगो से सावदान रहना है. बिल्कुल वो मान्सिक रूप से सतर्क था लेकिन फिर भी वी जाल मे प्हस जाता हैं इसका कारवन यहे के दायन ने उसके तर्क पर हम्ला नहीं किया उसके तिस्जिन मेकिंट प्रोस्स्स में संग्यानात्मक बार जिसे न कोगनेटिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड्टिड् समाजिक उल्जन कھर देते हैं कि आपका सारा द्यान बस उसुल्जन को सुल्जाने में लग जाता है और जैसी आप उनकी सुजाएगेई प्रक्रिया को फोलो करते है जैसे इस कहानी में बोरे में जुखकर बगया डालना तो आप उनके जाल में आजाते है बिल्कुल, उस एक पल की समाजिक उल्जन के सामने बच्चे की सारी चतूराई हार जाती है. जैसे ही वो जुकता है, डायन पूरती से उसे बोरे में बन कर लेती है. ये सच में दरावना है के खैसे हमारे अपने सामाजिक शिष्टचार ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकते हैं लेकिन ये बच्चा हार मानने वालो मैसे नहीं है दायन उसे बोरे में बनद कर के अपने गर की अर निकल परती हैं और रस्ते में क्या हुता है? रास्ते में डायन थग जाती हैं और एक पेड की चाँ में बोरा रक्कर सोजाती हैं अब यहां बच्चे के पास बहुत खम समः हैं वो बोरे के अंद रोने यह गब राशने के बजाएं वं वं खं खंग किसी तारा बार निकलता हैं लेकिन वो सर्ब भाखता नहीं है और यह उसकी सबसे बड़ी खासियत है आप वो एक ऐसी तरकीब निकालता है जो उसकी कुषागरता उसके दिमाख का सबसे बड़ा प्रमाण है वो उस बोरे में गीली मिट्टी पत्धर और कांटे बहर देता है और वो भी बिल्कुल अपने शरीर के वजन के बराभर इसे कहते हैं प्रेज़न्स अप माइन्ट यानी तुरन्त निरने लेने की अजादारन्शन्ता वो बहुत अच्छे से जानता है कि अगर वो स्वर्व बाग गया और बोरा हलका होगया तो दायन्त तुरन तुटज़ाएगी और उसका पीचा करेगी आँ वो तुड़न् समच जाएगी कि शिकार गायब है इसली वोपने दुष्मन के लिए एक ओ़ ब्रहम पैदा कर रहा है वो दायन् के दिमाख को वही जानकारी फीट कर रहा है जिसकी दायंको उमीद है, यहनी बोरे कबारी पन. और दायन का ब्रहम देखे ये सीन लोग कता का सबसे हास्से पूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ मुझे यह एक बाज समजनी आती. क्या? कुई अईन्सान अतना अद्धा कैसे उसकता है. मेरे मतलबे वो बोरा उठाकर चल रही है, उसे गीली मिटी और काटों का अहसास रहा है, तो किसी बी तरह से अन्सान के शरीर जैसा तो महसुस नहीं होता. क्या अत्ती आत्मविष्वास और एहंकार, ही बूरे एरादे वाले लोगों को इतना बेवकूफ बना दिता है, के वे एक बार बोरा खोलकर देखने की जेहमत भी नहीं उठाते? इसे हम सर्फ बेवकूफी नहीं कैसकते. मनोविग्यान में बहुत्टी मस्वूथ सिद्दान्त है, जिसे क्कन्फमेशन भायस या पुष्टी करन पुर्वागरे कैतें. अच्छ, वो क्या होता है? हमारा दिमाग अखसर वास्टविक्ता को वैसे नहीं देक्ता जैसी वो सच्छ मे है, उसका अपनी रिस्ता है या काडटे चुपते हैं तो टेकनिकल ये खद्रे के संके थे विस्संगत्या थी लेकिन उसका दिमाग इन चीजों को अपनी जीट के सबूत के तोर पर दोबारा लिग देता है मतलब उसका दिमाग उसके खेहरा है कि तो ये उसकी जीत है. बलकुल. जब बोरे से पानी रिस्ता है या काटे चुपते है, तो टेकनेकल ये खत्रे के संके थे, विस्संगत्या थी. लेकिन, उसका दिमाग एन चीजों को अपनी जीत के सबूथ के तोर पर दोबारा लिग देता है. मतलब उसका दिमाग उस्से कहेरा है कि दिख हो तुमार शिकार तुमसे कितना दरा हूए है वो अंदर पड़ब फ़ारा है अगर बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा ब� वो अपनी भेटी के साद बहुत उच्साह से भोरा कोलती है ये सोचकर के अंदर ताजा शिकार है लेकिन अंदर से स्व गीली मिट्टी, पत्धर और काटे निकलते है दायंग का सारा गहमंट पल बहर में तुट जाता है ये उसके लिए किवल एक शिकार कोने की बात नहीं ती ये उसके एहंकार पर एक बहुत बडी चोट थी एक चोटे से बच्चे ने एक खुंकार डायन को उसी के खेल में माध दे दी थी और व्म यही से कहानी अदिक जटूल और डार कोजाती है अग, क्योंकी क्रोदिड डायन रार नहीं मानती बिलकोल, वो अपनी रननीती बडलती है, बेश बडलती है और फिर से उसी बग्या गाच के पास पहुज जाती है अब यहां आकर कहानी का एक एसा मोडाता है, तोडा अजीब लगता है और इसे पचाना भी मुष्किल है यसे क्यो? क्यों कि बच्चा पेडपर है वो पुरानी गटना को बहुला नहीं है जब डयन भेश बदल कर आती है तो बच्चा उसे पहचान लेता है वो साव साव केता है तो में वही तहगिन बुडिया हो उसे पता है कि ये वही डायन है जिस ने उसे मारने की कोशिष की ती तेटी बागजुत दायन कस्मों का एसा जाल बूनती है कि वो दुबारा बोरे में कैध होगाता है मतलब ये कैसे समबव है? एक बर कोई भाल भाल बचा हो, वो दुबारा उसी चाल में कैसे पहस्टषता है? क्या बच्चा अचानक से बेव्कूफ होगया? ने बच्चा बेव्कूफ नहीं हुए है. यहां कता मानव समाज की एक बहुत ही गेरी कमजोरी को उजागर करती है, जिसे हम अठोरेती बायस और सामाजिक संसकारो का दबाओ के सकते हैं. अठोरेती बायस थोड़ा समजाए एक. समाज में हम ने कस्मो, वादो, और विश्वास दिलाने की प्रक्रीया को एक बहुत उचा दरजा दिया है. जब कोई विक्ती, विषेशकर कोई बड़ा या सत्तादारी विक्ती पूरी द्रिद्दा के साथ जुटी कस्मे कहाता है, तो वो हमारे तारकिग दिमाग को पंगू कर देता है. मतलब जब डायन बहुत जोर देकर कस्में कहाने लगी, तो बच्छे के दिमाग में ये बात हावी हो गगी, की कोई इतना बड़ा जुट इतने विष्वास के सात कैसे बोल सकता है. तीक यही बात है. हम इसे आजके समाज मे भी दिकते हैं. कई बार लोग जानते हैं कि सामने वाला व्यक्ती पहले भी दूका दे चुका है. लेकिन जब व्यक्ती रोकर, कस्मेख हाकर विष्वास दिलाता है, तो लोक फिर से फँज जाते हैं. आई ये तो बहुत आम बात ये इक बच्चा चवे वू कितना भी चतृर क्यूना हो समाजिक बंदनो से अच्वूता नहीं होता दायन इस भार उसकी इसी कमजोरी उसके उसी संकोच का फ़ाईदा उठाया और इस भार दायन इस कोई गलती नहीं की बिलकुल उस्ट्टे अपनी पिछली हार से सबबक लिया था वो रास्ते में कही नी रुकी उस्टे आएंकार में आखर कोई ब्रेक नहीं लिया वो सीदे बोडे को लेकर अपने गर पोडी और ये वो बिन्दू है ज़हां कहानी अपना रूप पूरी तरहां से बड़ल लेती है सच में अप तक जो कहानी एक चाला की और भाग दोड की लोग कता लग रेए थी वो आचानक से बहुर दाख और खफनाख हो जाती है दायन सीदे गर पहचती है बोरे को अपनी बेटी के पास चोडती है और खुद नहाने चली जाती है अप सूछी ए, बोरे के अंदर वो चतृर बच्च्चा है जो जानता है कि कुछी देर में उसे काटकर पकाया जाने वाला है और बाहर दायन की अनजान बेटी है यही पर अस्तित्व की लडाई जिसे हम सरवावल अन्स्टिंक तहते हैं वो अपने सबसे चरम रूप में सामने आती हैं जब जीवान और म्रित्त्यो का सबाल हो, तो अईनसान का दिमाग उन नेटिक सीमाव को लांग जाता है, जिनकी समाने जीवन में कलपना भी नहीं की जासकती. और वो बच्चा यही करता है. वो किसी तरा बोरे से बहार निकलता है. डायन की बीटी उसे देकके रहान रहे जाती है. वो बच्चे के गने और सुंदर बालों को देकती है, जिने कठा में जाता बला कहा गया है गने और सुंदर भाल दायन की बेटी अग्यानी है और उसके अंदरे एक अलक तरहे का लालगच है सुंदरता का लालगच वो पुछती है के उसके बाल यतने सुंदर कैसे हैं और उसके खुटके बाल आजे क्यो नहीं है अब यहां बच्च्चा ज़वाब देता है वो च्टूराई की सारी हदे पार कर देता है बभी बभी ब्यानक जूट बोलता है वो बलकुल वो कहता है कि उसकी माने उसका सर उख़ड यहनी उखली मेरक्कर समाथ यहनी मुसल से खुटा था अगर उपने बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद्टा बाद ये अट्यंद हिंसक है, मतलब एक छोटा बच्चा जो कहानी की श्रूवात में स्वर्फ आपनी माखी दीवृई बग्या कहारा था, वो इतना क्रूर कैसे हो सकता है कि किसी के सिर्पर मुसल से वार कर दें. यह रहांगाड़ तो बज़्ाई बाद्टाई तो बज़्ाई प्रज़्ाई प्रज़्ाई प्रज़्ाई तो बज़्ाई प्रज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो बज़्ाई तो ब� यान बचाने पर आता है, तो वह किसी भी कथोर सीमा तक जासकता है. सरवाईवल की स्तिती में, बुद्दी और क्रुर्ता के बीज की रेखा बहुत धूंडली हो जाती है. बच्चा ये समच चुका ता की टायन के परिवार में दैया नहीं है. इसलिये उसने शिकारी की कमजोडी यानी उसकी बेटी के लालच को ही अपना हत्यार बना लिया. और बच्चा वहां से अपनी जान बचाकगर निकल जाता है. लिकिन कहानी का सब से बहयानक और रुंक्ते कड़े कर देने वाला मोर तो आब आता है. दायन पोखरे यानी तालाप से नहाकर लोडती है उसे बिलकल अंदाजा नहीं है कि गर में क्या होचुका है उसे लगता है कि उसके बेटी ने बच्चे को पका लिया होगा हाँ, वो अनजाने में बच्चे के दवारा तगीर किया आप फोजन काने बैट जाती है जो वास्तव में उसी की बेटी का मास था सहिते और लोक कताव में इसे पौटिक जस्तिस या करमो का फल कहा जाता है लेकिन ये उसका सबसे चरम और अंद्खार मैं रूप है दायन्ज दिस भूख और लालगच के कारन दूसरो के बच्छो को काती दी उसी बूक ने अंततता उसे अपने ही बच्च्छे को खाने पर मजबूर कर दिया लेकिन यहा एक अईसा विवरन है, जो सच्मे दिमाग सुन्न कर देता है जब दायन खाना शुरू करती है, तो वहां एक भिल्ली आती है अर वो भिली कोई सादारन आवाज नहीं लिकालती वो सपष्ट्रूब से चेतावनी देती है म्याँ आपन दिया अपने कहाँ म्याँ मतलप अपनी ही बेटी को खुद खारेईएँ आँ ये द्रिष्य क्या है क्या जानवर भी कहानी में कोई भूमिका निभार है ये पूरी कत्ह कदा कद सबसे शक्तिषाली और प्रतिकात्मक्ष़ है ये द्रिष्य पशु ज्यान बनाम मानविय अग्यान को प्रस्त॥ करता है बिल्ली यहां प्रक्रती की उस आवाज का प्रतीक है जो वास्त्विक्ता को बिना किसी फिल्टर के देकती है आनिमल इंस्टिंक्त बिलकोल जानवरो की सहज प्रवित्ती उस सत्ते को तुरंद भांप लेती है जिसे इनसान का एहंकार और भ्रम नहीं देख बाता बिल्ली सपच्त रूप से सच बोल रही है लेकिन दायन उस चेकानी को समजी नही पाती वो आहिंकार और लालच में इतनी आन्दी है, कि उसे लकता है कि बिल्ली मास का तुक्डा मांग रही है. वो बिल्ली को मास का एक तुक्डा फेंके देती है. और बिल्ली उस मास को चूती तक नहीं है. बाप रे. ये दायन के पतन का सबसे बड़ा संकेत है. जान्वर भी उस्मास को खाने से प्यदेटा है, जिसे दायन अपने अग्ज्यान और भूख में बड़े चाओ से खारे है. अपनी लाल्सा में अदा हो जाता है, तो वो प्रक्रिति के सबस्प्ष्ट इशारों को भी अपनी सुविदान उसार गलत समच लेता है. दायन अपनी भूक और गमन द में उस आवास को अन सुना कर देती हैं. लेकिन सच कभी नकभी सामने आता ही है. जब दायन का खाना कब अतम होता है, और हकी कत उसके सामने आती है, तो उसे समझा जाता है, कि उसने क्या किया है? उगवराकर रोतेवे अपनी बेटी को पुकारती है, लेकिन उध्तर में उस चत्र बच्ची क्यावाज आती है, जो अप सुरक्षिट जगापर है. दायन का खुद का बूना हुँआ मुद्ग का जाल उसी पर भारी पड़ता है. बलकुल उसका पूरा परिवार नश्थ होटा आता है और वो बच्चा वो सुरक्षित अपने गर लोड आता है कहानी के अंठ में हम देकते है कि वो फिर से निटर होकर अपने बग्याक गाच पर चवड़कर अदिक अदिक सदर्क अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक अदिक � उज़ाँ बाद्या की वो दो बार फसा लिकिन उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी उसने अपने दर पर विजैए प्राथ की और अपने अस्तिट्व को बचाया और इसके सात ही ये कहानी एक बहुती महत्वपून सवाज़ प्रथ बाद्यागा उपर आई और सतर्क्ता किसी भी शारीरेग बल या दोखे भाजी को माद दे सकती हैं. बच्चे ने गल्तिया की वो दो बार फसा, लेकिन उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी. उसने अपने दर पर विजैए प्राप्त की और अपने अस्तिट्व को बचाया. उज़े तो इसके साथी ये कहानी एक बहुती महत्वपून सवाल बी कहडा करती है, जो में चाहुंगा के हर कोई इस पर भीचार करे. इस पूरी कठा में विनाश की ज़ में केवल एक चीज ती, अनियंत्रित लाल्सा. अप नहीं बात है. तो अगन की इनसानी मास कहने की विक्रित लाल साप और उसकी बेटी की बिना किसी महनत के सुन्दर बाल पाने की चाहत इन दोनो की च्याोंने उनके सोचने समझने की शकती को पुरी तरा कषत्म कर दिया था क्या ये संबव है के हमारे आदूनिक जीवन में भी हमारी कुچ आतार किक और आन्यन्त्रत इच्छाएं ही हमारे लिए सब से बड़े कद्रे का निरमान करती है? क्या हम अपने ही लालच के कारन, अपने ही लिए जाल नहीं बून रहे है? ये सच में सोचने वाली बात है, हम अखसर बहार की स्कमर्स और दोकेवाजन से बचने किलिए अपने कमपुटर में अंटीवाईर्स डाल लेतें अपने फोन पर पास्वर्ट लगा लेतें लेकिन हमारे अपने दिमाग के अंदर जो लालग का स्कम चल रहा है उस्छे अमे कोन बचाएगा? कोई नहीं, कोछी बचना होगा. बिलकोल, जब हम किसी चीस को पाने के लिए इतने उतावले हो जाते हैं, के हम लाल जंदियो, यानी रेट फ्लाग्स को अन्देखा कर देते हैं, तब हम भी उसी डयन या उसकी बेटी कितर विहावार कर रहे होते हैं. अद्र बग्याख काच्वाले चतूर बच्चे कितर तुरन सतर्ख हो जान जाहीए क्योंकि कभी कभी दुनिया कि सबसे कष्टरनाग जाल वही होते हैं जिन में हम अपनी मरजी से अपनी लाल्सा के कारन कदम रखते हैं अपनी लाल्सा के कारन कदम रखते हैं योंगी कभी कभी दूनिया के सबसे खदरनाग जाल वही होते हैं जिन में हम अपनी मरजी से अपनी लालसा के कारन कदम रखते हैं

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