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गरीबन_बाबाक_अमर_गाथा.mp4

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:07नमस्कार, आएक एहे खास प्रस्तूती मेहम सब एक्ता बहुत मर्मस्पर्षी आ अद्बूत मेठली लोक कता के विष्लेषन करब.
  2. 0:07–0:11एक कता अची गरीब भाबाग. एी मात्रेक्ता सादारन कता नहीं अची,
  3. 0:11–0:20बल की एक्ता एहन्गाता ची, जे दूखद खतना, भ्यंकर शाप, आ अंतता एक्ता समवुदायक प्रायश्चित तक माध्धिमस से आमरता बहतिता ची.
  4. 0:20–0:27तच्छलो, बिना देरी केने, मूल श्रोच सन निकालल तत्धे कादार पर एस समपुन व्रत्तान्त के ग़राई से बुची.
  5. 0:27–0:31मुद्दम मुखि कता दिस बड़ावासे पहले तनिक विचार करी,
  6. 0:31–0:34कोना एकता चोर सन अन्जान में भहल गलती,
  7. 0:34–0:39इकता सद्धरन गाँक पहल्वान के सदाके लिल आमर रक्षक बनादे चेक
  8. 0:39–0:43जीवन में कखनो काल, जेक्रा हम सब बहुत मामुली बात मानी लेएच्छी
  9. 0:43–0:46उकर परिनाम कते एक विशाल बहुसकेज आची
  10. 0:46–0:48इकता उकरे एकदम जीवन तोदारन आची
  11. 0:48–0:52कतھक आरम होईता ची एक ता बहुत सादारन दिनचर्या सें
  12. 0:52–0:55कमला नदी कात में बसल अजी उदरा गाम
  13. 0:55–0:58उईट्हाम तींता परम मित्र रहे चला
  14. 0:58–1:01बरम ठाकृर, गासी यादव, अगरी बन दोभी
  15. 1:01–1:05इटीनो संगी गामवक अख्राहा में कुष्ति लडे चला
  16. 1:05–1:12अदिन रात आपन पहल्वानिक अब्यास करे चला इंगुंकर एक्दम सादारन आसुखद दिनचर्या चेल.
  17. 1:12–1:16आब एते अख्राहाक अर्थ भूजब बहुत जरूरी याच.
  18. 1:16–1:20अख्राहा कोनु सादारन कुष्टी लडबाक माथी नहे हूँच्छेक.
  19. 1:20–1:29इएक्ता पारमपरिक मेदानच जटे गावक लोक आपन शरीरिक बल बड़ावे चथी, आज समाज में एक्ता भाईचारक निरमान कर इच्छती.
  20. 1:29–1:34गरीबन ने के लेल से हो इ अख्राहा हूंकर जीवनक एक ता बहुत मुख्ध्य हिस्च्छल,
  21. 1:34–1:38जते अ पूरन लगन से आपन कलाक अप्यास करे चला.
  22. 1:38–1:45ताम भेल की, के एही अख्राहा क छीक लग में कमला माएक एक ता बहुत पवित्र पीरी चले.
  23. 1:45–1:53एक दिन जों गरीवन कुस्तिक अवियास में मगन चला, तकुन हुनकर पैर अन्जान सुन्जान में उई पवित्र पीरी में लागी गेले.
  24. 1:53–2:00एकुनो जानी भूजी का कैल गेल अप्राद एक दम निचल, बलकी खेलक दून में भेल बस एक डानायास पर्ष्ष्षल.
  25. 2:00–2:08वो आप देवदाक यक ता बहुत पविट्र पूजा आस्थल या चबुत्रा, यो अस्थान अची जगरा गाम कलोक असीम श्थास देख है चाती.
  26. 2:08–2:14बहलही गरीबन कर कोनो खराब विचार नहीं चेल, वो आप अप अचानक पविट्रता एते क अदिक चल,
  27. 2:14–2:16उगर उद्यान उखराद बिचार नहीं चेल,
  28. 2:16–2:18मुदा उई अस्थानक पवित्रता एते क अदिक चल,
  29. 2:18–2:21जे एक ता अजान अस्पर्स के सोज्च्छामा योग निमानल गेल,
  30. 2:21–2:23इए एक ता एहन असावदानी चल,
  31. 2:23–2:26जे कर मोल सच्मुज बहुत बारी हो में अला चेल.
  32. 2:26–2:56गतनाक रमा की तेजी अवाक करे वाला चल, एक सेकिन टक उ अजान सपर्ष आ खिछ काल में देविक भ्यंकर क्रोदूत पन्नभेल, तकर भाद एक ता बागनिक प्रादूर भाव आ अन्तता एक ता प्रानगात अग्ड, कि तिक कम समय में एक ता सादारन गलती एक ता लोकिक
  33. 2:56–2:59तो सोजे आदर का दर्बारस एक ता बहुंकर बागिन के अनलिएं
  34. 2:59–3:01इक वल कोनो जंगली जानवर नहीं शल
  35. 3:01–3:05इदेवी शक्तिस भरल एक ता दंद का सादंचल
  36. 3:05–3:09बस आईही शंस हैं गरीबन का बागे पुन रूपें बदलगल
  37. 3:09–3:12इए युद पहल्गा से एक दम असमान चल
  38. 3:26–3:29अई आई औईसन दूखछ छन्चल, जक्ठन अख्राहा,
  39. 3:29–3:32जे अब भ्यासक अब भाई चारा का स्थन्चल,
  40. 3:32–3:35उसोजे जीवन म्रित्युक भ्यंकर रनभूमी बन्गेल,
  41. 3:35–3:39उई अई असमान युध्ध में गरीबन बहुत साहस लडला,
  42. 3:39–3:44अब भाई चारा का स्थान चल, औ़ सोजे जीवन म्रित्युक भयंकर रनभूमी बन्गेल.
  43. 3:44–3:50उई असमान युद्ध में गरीवन बहुत साहस सलडला, मुदा अनततध अ मारलगेला.
  44. 3:50–3:54एक ता सादारन मानवक जीवनक इब रहुत दुखधनत चल.
  45. 3:54–3:59गामक, लोकक, लेल, एक गतना एक दम आस्चर ये आदुख सब ररल चलई.
  46. 3:59–4:03एक ता निर्दोश वेक्ती के एहन भयानक मिर्ट्यो भेटल.
  47. 4:03–4:07मुदा दूखक बात्मात्र एत वो ने चलई.
  48. 4:07–4:16देवी कक्रोद अत्तिक ब्यंकर चल, जे गरीवनक लहास के बिना कोनो समानक सोजे कमला नदिक दहार में फेखी दिल गल.
  49. 4:16–4:22उनकर भूथिक शरीर के विदिवा दफन या कोनो संसकार दहरी नहीं भेट सकल.
  50. 4:22–4:25आभी गाता एक ता नवा दियाए दिज जाई तची,
  51. 4:25–4:27कमला नदिक्दार में भहेत वो लहास,
  52. 4:27–4:29एक ता दोभी आगात पर पहुचल,
  53. 4:29–4:32जतः एक ता दोभी अपन दाईनिक काज में लागल चल,
  54. 4:32–4:34एक ता बहुथ सादारन द्रिष्से चल,
  55. 4:34–4:36मुदा उलहास,
  56. 4:36–4:38उई दोभी काज में अचन बने लागल.
  57. 4:39–4:40आब एते कताक,
  58. 4:40–4:43दोसर अन्जान सुन्जान मे भेल कलती हो देज
  59. 4:43–4:49उ दोभी बिना इजान ने जे इखकर लाज्श्श्यक अक्काउना मरल अची
  60. 4:49–4:52उक्रा अनादर से दोसर दिस थकेल दलक
  61. 4:52–4:54ता किव अपन काज असानी से कषके
  62. 4:54–4:57दोभीक मन में कुनु दुबहाणा नहीं चल
  63. 4:57–5:01उ कार्ज एक तम्रित वेक्ती लेल बहुत पैग अनादर चल
  64. 5:01–5:05इच्छोट सन्स्वार्त आब एक तदोसर भवपती आने वला चल
  65. 5:05–5:11इम्हर उद्रा गाँम में गरी बन कर कन्याक अज्सहनीय शोक का सीमा नही रहल
  66. 5:11–5:18अपन पतिक अकाल म्रित्यों लहासक ऐहन्दुर्दशाक समाचार सूनी उदॉकसे काईपी उठले है।
  67. 5:18–5:25उनकर आर्ठनाद बभग्वान से कैल गिल करून प्रार्ठना एही कताक तरनिंग पुईंट बने तची
  68. 5:25–5:31इहुंकर अंतिम आशाचल जे आपन पतिक नियाय लेल बवागान के शुम्री रहल चलें
  69. 5:31–5:37एही सांस्क्रितिक अवदारना में भगता का की महत्व अची से भुज़ आवश्षक अची
  70. 5:37–5:44बग्दा उ वक्ती होई तची, जकर शरीर में किछ काल का लेल कुनो देवी शकती या म्रित आत्मा प्रवेश करे तची,
  71. 5:44–5:47ताकी उ जीवित लोग सबसां समवाद कर सके.
  72. 5:47–5:53इवानल जाई तची जे अन्याय सपीडित आत्मा, न्याय मांगबाक लेल एही मार्ख का चुनाव करे तची.
  73. 5:53–5:56अच्फन सच्मुछ रोंगता ताइने करे वाला चल.
  74. 5:56–6:02बगवाना क्रिपासा गरीबन का आत्मा एक गोटिक सरीर में प्रविष्ट भेल आव व्यक्ती भग्दा क्यलाई लागल.
  75. 6:02–6:04अबवग्दा एक ता ब्यंकर शाप देलक
  76. 6:04–6:07जब सब दोभी मिलिकः लाहाशके कमला दारस निकाली
  77. 6:07–6:09दाश संसकार नहीं करत
  78. 6:09–6:11ता दोभी सबग भध्ष्टी में कप्रडा जरी जात
  79. 6:11–6:13इशाप अस्पष्ट्रूपे एक ता विक्तिक गल्तिक लेल
  80. 6:13–6:15इदम जिवन्त वाप्सी चल.
  81. 6:15–6:18ओ भग्दा एक ता ब्यंकर शाप देलक,
  82. 6:18–6:20जब सब दोभी मिलिक्ः,
  83. 6:20–6:22लहाशके कमला दारस निकाली,
  84. 6:22–6:24दाज संसकार नहीं करत,
  85. 6:24–6:25ता दोभी सबग भध्ध्धी में,
  86. 6:25–6:27कप्रा जरी जात.
  87. 6:27–6:29इशाप अस्पष्ट रूपे,
  88. 6:29–6:33वेक्तिक गल्तिक लेल पुरा समुदायके उत्तर्दाई बनारहल चल
  89. 6:33–6:37ए बहुत पाइग च्तावनी चल, जे सामूहिक प्रयास बना
  90. 6:37–6:40इ विप्त्ती कोनु किम्ती पर नहीं तलत
  91. 6:40–6:44इ च्तावनी पूरा दोभी समुदायके जगजोरी देलग
  92. 6:44–6:48समुदायक लोक, दरें आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ
  93. 6:48–6:52अद्राल्मुदा एक जुट समुदाएक द्रिष्य आज जबन गल्ती सुदार्वाग लेल तत्पराज
  94. 6:52–6:54दाह संसकार मात्र एक ता क्रिया नहीं
  95. 6:54–6:56बलके हिंदू परम परावे
  96. 6:56–6:58आत्मा कषान्ती, असम्मान कलेल, आवश्यक अन्तिम अन्व्श्थान अच्छी
  97. 6:58–7:02समदायक द्रिष्श्य आज जबन गल्ती सुदार्वाग लेल तत्पराच
  98. 7:03–7:05दाह संसकार मात्र एक ता क्रिया नहीं
  99. 7:05–7:11बलकी हिंदू परम परामे आत्माक शानती असमान कलेल आवश्शक अंतिम अनुश्ठान अची
  100. 7:11–7:15गरिवन का बूतिक शरीर के नदी में फेकी जे असमान केल गेल चल,
  101. 7:15–7:18अक्रा दूर कर वाक एक मात्र उपायचल,
  102. 7:18–7:21जे समान पूर्वक हुंकर दाह संसकार केल जाए,
  103. 7:21–7:24ताकी हुंकर अशान्त आत्मा के मुक्ती बहिट सके.
  104. 7:24–7:26आई बहुत नीख जका दर्शावेत अचे,
  105. 7:26–7:30यही सामूहेक प्राएश्चित कर परिनाम बहुत व्यापक पहल
  106. 7:30–7:34दाह संखारक संगे शाप खदम भोगेला
  107. 7:34–7:37दोबी समुदाएक भथ्फ्टी सुरक्षित भोगेला
  108. 7:37–7:41गरीबनक अशान्त आत्मा के अंतत गहीर शान्ती भेटल
  109. 7:41–7:45वो उगे प्राएश्चित कर परिनाम बहुत व्यापक भेल
  110. 7:45–7:48दाह संसकारक संगे शाप खदम बोगेला
  111. 7:48–7:51दोभी समदाएक भध्धी सुरक्षिद भोगेला
  112. 7:51–7:56गरीबनक अशान्त आत्मा के अंतत गहीर शान्ती भेटल
  113. 7:56–7:59न्याय अस सम्मान फिरसस थापिद भेल
  114. 7:59–8:01असत से महत्वाद पूड़ बात गरीबन,
  115. 8:01–8:03जे एक ता दुखध शिकार चला,
  116. 8:03–8:07औआब एक ता औमर रक्षक करूप में स्थापिद बोगेला.
  117. 8:07–8:09आजुक दिन दहरी,
  118. 8:09–8:11गरीबन बादा के,
  119. 8:11–8:14एक ता लोक देवताक रूप में पूजल जाइत छिन.
  120. 8:14–8:21गरी बनजे एक ता दुखध शिकार चला, उ भिशेश रूप से दोभी समवदायक बद्धिक रक्षक मानल जाएत छदेन.
  121. 8:21–8:29एक ता अजान भूल से शुरु भेल एक गाता अंतता भकती, प्रायस्चित आ आमरताक प्रतिक बनी केल.
  122. 8:29–8:34ता इी गात्ठा अन्तता है, एक ता बहुत महत्पून प्रश्न ताल करएता ची,
  123. 8:34–8:37कोना एक ता समुदाएक अपन गल्ती सुदार्वा की इक च्छा,
  124. 8:37–8:42एक ता क्रोद और दूखध गतना के आमर रक्छके गात्ठा में बदली दैचेग.
  125. 8:42–8:46इगे विट्विख बाद हो एक ता सकरात्मक बडलाव आनी सकेट अची
  126. 8:46–8:50एही विचारो तेजक गाताक संगे, हमर सपकी भिज्लेशन एटेबः
  127. 8:50–8:53अप विट्विट्विट्बाद हो एक ता सकरात्मक बडलाव आनी सकेट अची
  128. 8:53–8:57एही विचारो तेजग गाताक संगे हमर सपकी भिसलेशन एते बाई

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नमस्कार, आएक एहे खास प्रस्तूती मेहम सब एक्ता बहुत मर्मस्पर्षी आ अद्बूत मेठली लोक कता के विष्लेषन करब. एक कता अची गरीब भाबाग. एी मात्रेक्ता सादारन कता नहीं अची, बल की एक्ता एहन्गाता ची, जे दूखद खतना, भ्यंकर शाप, आ अंतता एक्ता समवुदायक प्रायश्चित तक माध्धिमस से आमरता बहतिता ची. तच्छलो, बिना देरी केने, मूल श्रोच सन निकालल तत्धे कादार पर एस समपुन व्रत्तान्त के ग़राई से बुची. मुद्दम मुखि कता दिस बड़ावासे पहले तनिक विचार करी, कोना एकता चोर सन अन्जान में भहल गलती, इकता सद्धरन गाँक पहल्वान के सदाके लिल आमर रक्षक बनादे चेक जीवन में कखनो काल, जेक्रा हम सब बहुत मामुली बात मानी लेएच्छी उकर परिनाम कते एक विशाल बहुसकेज आची इकता उकरे एकदम जीवन तोदारन आची कतھक आरम होईता ची एक ता बहुत सादारन दिनचर्या सें कमला नदी कात में बसल अजी उदरा गाम उईट्हाम तींता परम मित्र रहे चला बरम ठाकृर, गासी यादव, अगरी बन दोभी इटीनो संगी गामवक अख्राहा में कुष्ति लडे चला अदिन रात आपन पहल्वानिक अब्यास करे चला इंगुंकर एक्दम सादारन आसुखद दिनचर्या चेल. आब एते अख्राहाक अर्थ भूजब बहुत जरूरी याच. अख्राहा कोनु सादारन कुष्टी लडबाक माथी नहे हूँच्छेक. इएक्ता पारमपरिक मेदानच जटे गावक लोक आपन शरीरिक बल बड़ावे चथी, आज समाज में एक्ता भाईचारक निरमान कर इच्छती. गरीबन ने के लेल से हो इ अख्राहा हूंकर जीवनक एक ता बहुत मुख्ध्य हिस्च्छल, जते अ पूरन लगन से आपन कलाक अप्यास करे चला. ताम भेल की, के एही अख्राहा क छीक लग में कमला माएक एक ता बहुत पवित्र पीरी चले. एक दिन जों गरीवन कुस्तिक अवियास में मगन चला, तकुन हुनकर पैर अन्जान सुन्जान में उई पवित्र पीरी में लागी गेले. एकुनो जानी भूजी का कैल गेल अप्राद एक दम निचल, बलकी खेलक दून में भेल बस एक डानायास पर्ष्ष्षल. वो आप देवदाक यक ता बहुत पविट्र पूजा आस्थल या चबुत्रा, यो अस्थान अची जगरा गाम कलोक असीम श्थास देख है चाती. बहलही गरीबन कर कोनो खराब विचार नहीं चेल, वो आप अप अचानक पविट्रता एते क अदिक चल, उगर उद्यान उखराद बिचार नहीं चेल, मुदा उई अस्थानक पवित्रता एते क अदिक चल, जे एक ता अजान अस्पर्स के सोज्च्छामा योग निमानल गेल, इए एक ता एहन असावदानी चल, जे कर मोल सच्मुज बहुत बारी हो में अला चेल. गतनाक रमा की तेजी अवाक करे वाला चल, एक सेकिन टक उ अजान सपर्ष आ खिछ काल में देविक भ्यंकर क्रोदूत पन्नभेल, तकर भाद एक ता बागनिक प्रादूर भाव आ अन्तता एक ता प्रानगात अग्ड, कि तिक कम समय में एक ता सादारन गलती एक ता लोकिक तो सोजे आदर का दर्बारस एक ता बहुंकर बागिन के अनलिएं इक वल कोनो जंगली जानवर नहीं शल इदेवी शक्तिस भरल एक ता दंद का सादंचल बस आईही शंस हैं गरीबन का बागे पुन रूपें बदलगल इए युद पहल्गा से एक दम असमान चल अई आई औईसन दूखछ छन्चल, जक्ठन अख्राहा, जे अब भ्यासक अब भाई चारा का स्थन्चल, उसोजे जीवन म्रित्युक भ्यंकर रनभूमी बन्गेल, उई अई असमान युध्ध में गरीबन बहुत साहस लडला, अब भाई चारा का स्थान चल, औ़ सोजे जीवन म्रित्युक भयंकर रनभूमी बन्गेल. उई असमान युद्ध में गरीवन बहुत साहस सलडला, मुदा अनततध अ मारलगेला. एक ता सादारन मानवक जीवनक इब रहुत दुखधनत चल. गामक, लोकक, लेल, एक गतना एक दम आस्चर ये आदुख सब ररल चलई. एक ता निर्दोश वेक्ती के एहन भयानक मिर्ट्यो भेटल. मुदा दूखक बात्मात्र एत वो ने चलई. देवी कक्रोद अत्तिक ब्यंकर चल, जे गरीवनक लहास के बिना कोनो समानक सोजे कमला नदिक दहार में फेखी दिल गल. उनकर भूथिक शरीर के विदिवा दफन या कोनो संसकार दहरी नहीं भेट सकल. आभी गाता एक ता नवा दियाए दिज जाई तची, कमला नदिक्दार में भहेत वो लहास, एक ता दोभी आगात पर पहुचल, जतः एक ता दोभी अपन दाईनिक काज में लागल चल, एक ता बहुथ सादारन द्रिष्से चल, मुदा उलहास, उई दोभी काज में अचन बने लागल. आब एते कताक, दोसर अन्जान सुन्जान मे भेल कलती हो देज उ दोभी बिना इजान ने जे इखकर लाज्श्श्यक अक्काउना मरल अची उक्रा अनादर से दोसर दिस थकेल दलक ता किव अपन काज असानी से कषके दोभीक मन में कुनु दुबहाणा नहीं चल उ कार्ज एक तम्रित वेक्ती लेल बहुत पैग अनादर चल इच्छोट सन्स्वार्त आब एक तदोसर भवपती आने वला चल इम्हर उद्रा गाँम में गरी बन कर कन्याक अज्सहनीय शोक का सीमा नही रहल अपन पतिक अकाल म्रित्यों लहासक ऐहन्दुर्दशाक समाचार सूनी उदॉकसे काईपी उठले है। उनकर आर्ठनाद बभग्वान से कैल गिल करून प्रार्ठना एही कताक तरनिंग पुईंट बने तची इहुंकर अंतिम आशाचल जे आपन पतिक नियाय लेल बवागान के शुम्री रहल चलें एही सांस्क्रितिक अवदारना में भगता का की महत्व अची से भुज़ आवश्षक अची बग्दा उ वक्ती होई तची, जकर शरीर में किछ काल का लेल कुनो देवी शकती या म्रित आत्मा प्रवेश करे तची, ताकी उ जीवित लोग सबसां समवाद कर सके. इवानल जाई तची जे अन्याय सपीडित आत्मा, न्याय मांगबाक लेल एही मार्ख का चुनाव करे तची. अच्फन सच्मुछ रोंगता ताइने करे वाला चल. बगवाना क्रिपासा गरीबन का आत्मा एक गोटिक सरीर में प्रविष्ट भेल आव व्यक्ती भग्दा क्यलाई लागल. अबवग्दा एक ता ब्यंकर शाप देलक जब सब दोभी मिलिकः लाहाशके कमला दारस निकाली दाश संसकार नहीं करत ता दोभी सबग भध्ष्टी में कप्रडा जरी जात इशाप अस्पष्ट्रूपे एक ता विक्तिक गल्तिक लेल इदम जिवन्त वाप्सी चल. ओ भग्दा एक ता ब्यंकर शाप देलक, जब सब दोभी मिलिक्ः, लहाशके कमला दारस निकाली, दाज संसकार नहीं करत, ता दोभी सबग भध्ध्धी में, कप्रा जरी जात. इशाप अस्पष्ट रूपे, वेक्तिक गल्तिक लेल पुरा समुदायके उत्तर्दाई बनारहल चल ए बहुत पाइग च्तावनी चल, जे सामूहिक प्रयास बना इ विप्त्ती कोनु किम्ती पर नहीं तलत इ च्तावनी पूरा दोभी समुदायके जगजोरी देलग समुदायक लोक, दरें आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ अद्राल्मुदा एक जुट समुदाएक द्रिष्य आज जबन गल्ती सुदार्वाग लेल तत्पराज दाह संसकार मात्र एक ता क्रिया नहीं बलके हिंदू परम परावे आत्मा कषान्ती, असम्मान कलेल, आवश्यक अन्तिम अन्व्श्थान अच्छी समदायक द्रिष्श्य आज जबन गल्ती सुदार्वाग लेल तत्पराच दाह संसकार मात्र एक ता क्रिया नहीं बलकी हिंदू परम परामे आत्माक शानती असमान कलेल आवश्शक अंतिम अनुश्ठान अची गरिवन का बूतिक शरीर के नदी में फेकी जे असमान केल गेल चल, अक्रा दूर कर वाक एक मात्र उपायचल, जे समान पूर्वक हुंकर दाह संसकार केल जाए, ताकी हुंकर अशान्त आत्मा के मुक्ती बहिट सके. आई बहुत नीख जका दर्शावेत अचे, यही सामूहेक प्राएश्चित कर परिनाम बहुत व्यापक पहल दाह संखारक संगे शाप खदम भोगेला दोबी समुदाएक भथ्फ्टी सुरक्षित भोगेला गरीबनक अशान्त आत्मा के अंतत गहीर शान्ती भेटल वो उगे प्राएश्चित कर परिनाम बहुत व्यापक भेल दाह संसकारक संगे शाप खदम बोगेला दोभी समदाएक भध्धी सुरक्षिद भोगेला गरीबनक अशान्त आत्मा के अंतत गहीर शान्ती भेटल न्याय अस सम्मान फिरसस थापिद भेल असत से महत्वाद पूड़ बात गरीबन, जे एक ता दुखध शिकार चला, औआब एक ता औमर रक्षक करूप में स्थापिद बोगेला. आजुक दिन दहरी, गरीबन बादा के, एक ता लोक देवताक रूप में पूजल जाइत छिन. गरी बनजे एक ता दुखध शिकार चला, उ भिशेश रूप से दोभी समवदायक बद्धिक रक्षक मानल जाएत छदेन. एक ता अजान भूल से शुरु भेल एक गाता अंतता भकती, प्रायस्चित आ आमरताक प्रतिक बनी केल. ता इी गात्ठा अन्तता है, एक ता बहुत महत्पून प्रश्न ताल करएता ची, कोना एक ता समुदाएक अपन गल्ती सुदार्वा की इक च्छा, एक ता क्रोद और दूखध गतना के आमर रक्छके गात्ठा में बदली दैचेग. इगे विट्विख बाद हो एक ता सकरात्मक बडलाव आनी सकेट अची एही विचारो तेजक गाताक संगे, हमर सपकी भिज्लेशन एटेबः अप विट्विट्विट्बाद हो एक ता सकरात्मक बडलाव आनी सकेट अची एही विचारो तेजग गाताक संगे हमर सपकी भिसलेशन एते बाई

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