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चौहड़मल_आ_रेशमाक_कथामे_जादू_आ_यथार्थ.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:06आए हमर सबख्बिमर्शक केंद्र आजे, गजंद्र ताकृर के चवहर्ण्मल आरेश्मा,
  2. 0:06–0:12जे मुकामा गात के जाती पाती अ संगर्ष पर आदारित एक ता दुकान्त प्रेम कता आचे.
  3. 0:12–0:21आप बाखिर कत्हाक अंतिम बाग में, जादूई तत्व आँ कत्होर समाजे प्यधार्त के भीच का संतुलन आरो नीक बहसकेच छे.
  4. 0:21–0:29एक दम सही कहलू, मने, शुरुवाती अद्याय सब में जना एक से चोड़ हरी देखी, तटोन बहुत याधार्त वादी आचे.
  5. 0:29–0:31उते कोनु फेंतसी नहीं आचे?
  6. 0:31–0:31बलकुल नहीं
  7. 0:31–0:34परिवेश पूरनता सामनती व्यवस्ता
  8. 0:34–0:37जमीनी स्थरक ध्वन्द पर आदारी दचे
  9. 0:37–0:40एक्दम, लेखक जे सनसार गडले चेती
  10. 0:40–0:43उकर नियम बहुत इसपष्ट आचे
  11. 0:43–0:48मैंने चोबवल एक ता गरीब दूसाद भोनेहार चे जे कुस्ती लड़ाय तचे
  12. 0:48–0:50उकर पसीना एक दम भोते कचे
  13. 0:50–0:53आख़, उप पूरन रूपे शरीरिक संगर शे
  14. 0:53–0:55आदो सर देस रेश्मा आचे
  15. 0:55–0:59जे एक ता दनी भूमिहार ब्रम्वर्ध बेटी आचे
  16. 0:59–1:03दूनुक भीच का प्रेम जगन समाजेक सोजा आवेत छे
  17. 1:03–1:05उते कोनो जादुक छ़ीना गूमाईत छे
  18. 1:05–1:07जि सब किछ तीक कर दिये.
  19. 1:07–1:11उजली ए, मने रेश्मा पर पहरा लगा देल जाई चे
  20. 1:11–1:15हींसक अक्रमण होईता चे, हत्यारा पताओल जाई चे
  21. 1:15–1:18इसब्ता एक दम माटिक संजुल यदार्त वाद अच्छे
  22. 1:18–1:22पाथक औही गंभीर्ता के महसुस करे चे
  23. 1:22–1:25मुदा समस्या तक्हन अबईत चे
  24. 1:25–1:31जक्हन अद्याए सात में कता अचानक एकता अप्रत्याशित मोड लेए टचे
  25. 1:31–1:35अग, रामसक्वाला जे प्रसंग अची उक्रा के ही रहल चे है?
  26. 1:35–1:36आप, एक दम.
  27. 1:36–1:42रेश्मा के पहरा से बाहर निकालबा के लेल उकर सक्वी, रामसक्वी जादुक प्रयोग करे चे.
  28. 1:42–1:45उ रेश्मा के अद्रिष्षे कर देत चे.
  29. 1:45–1:50मने पहरेदार सवक आएक्ध सोजासो उ हवाक जोकाजा का निकलीजट अचे
  30. 1:50–1:54इह उ कमजोरी अचे जग्रा हम रेख हांकित कोर रहल ची
  31. 1:54–2:00राम सक्छिक जादुक प्रवेश एही कथोर सामाजिक यतार्थ वादी कताग लेल
  32. 2:00–2:03आप पुड़ तया असंगत लगए तचे
  33. 2:03–2:04अहू
  34. 2:04–2:07इआसंगती एही कारन से अची
  35. 2:07–2:11जे कताक मूल संगर्ष बहुत्तिक और जातिगत आचे
  36. 2:11–2:16जाही में जादूक लेल कोनो स्थान पहल से नहीं बनाओल गेल चल
  37. 2:16–2:17बुजली एई
  38. 2:17–2:47इप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आ� आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  39. 2:47–2:53जखन हा एहन सन्सार दिखार हल ची, जदे सामनती शक्ती इते क्रूर आचे,
  40. 2:53–2:59तकन अचानक से एक ता जादूई समडान आभी जे बास, कताक गमभिरता हलका बहुजाई तची.
  41. 2:59–3:03आ, पातक तनाव कतम भहुजाई तचे, करनोक्रा लागे तचे,
  42. 3:03–3:15जब ता जादुक पर्योख सकिचु बहसके तच्ये बिल्कुल इई आचानक वेल प्रवेश एक ता एहन समदान आच्ये बाहर सद्फोपी देलगेल भुजाई तच्ये रोको रोको
  43. 3:15–3:45अपन अद्टाग बाख जाब यहाँ ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई त
  44. 3:45–3:48बीच में आचानक सा आबब गडगगे तचे
  45. 3:48–3:49एक दम
  46. 3:49–3:53जादू उही मानविय संगर्षक पीरा के कम कर दे चे
  47. 3:53–3:57ते एक रा थीक करबाक लेल आहां की सुजहावा ची
  48. 3:57–4:00एक रा समादान बहुत समान ने दंख सकई तचे
  49. 4:00–4:04जादू कब बडला में रेश्माक मानविय साहस
  50. 4:04–4:07वा यत्धार्त्वादी चातुर्यक उप्योक का इल्चाई तची
  51. 4:07–4:08जना की?
  52. 4:08–4:11जना उ कोनो पहरेदार के गूस देका
  53. 4:11–4:13वा रात्रिक अंद्राकर फाइदा उठाए का
  54. 4:13–4:15बहर निकले तची
  55. 4:15–4:17तो उकर विद्रोही सुबाव
  56. 4:17–4:18आरो निकर का सामने आवे तचे
  57. 4:18–4:25बाखिर जान लेखख, जादूक उही लोक कताश्वेली कराखवे चाहत चतिन तकन की कैल जाए.
  58. 4:25–4:31तकन उक्रक कताख शुर्वाद सही पूर्व संकेत वा फोर्शाडोंग कर रूप में स्तापित करवाख चाही.
  59. 4:31–4:36उदारनक्लेल अद्याय दूवा तीन में रामसक्खीक रहस्सेमएई शम्ताक,
  60. 4:36–4:39कोनो चोट सन्खतना पहलेन देखाओल जासके तचे.
  61. 4:39–4:43अग, माने पहले से हैं स्तापित कर दियोंग,
  62. 4:43–4:45जे ओद तन्त्र मन्त्रक जानकार आची.
  63. 4:45–4:56बलक्ल, जब पहले ही इस्तापिद भजाएत, तसातम अद्धाय में ओकर जादूक प्रयोग, पाथक के कताक नियमक विरुद्ध नहीं लागत. तकन उएक तस्वाभाविक विकास लागत.
  64. 4:56–5:02एक्दम, तक्खन दिवालक इंट पलिलेहे सद जादूई स्तापित भोजाएत.
  65. 5:02–5:07बुजलिय, अज्गन हमर सबक भात रेश्मक साहस्क बहरहल अची,
  66. 5:07–5:12तक कताक अंत में उही सक्रिय नाइकाक जे परिनती होई तची,
  67. 5:12–5:14उक्रो चर्चा करभ आवश्यक अची.
  68. 5:14–5:24आ, रेश्मक अंतिम परिनती के मान राख्वाक निरनै, कताक सशक्त नाएका के चरित्र चित्रनक समग्र प्रभाव के किचो हद्धरी कम करे तच्छे.
  69. 5:24–5:30मैंने सुरुसा देकी तर रेश्मा कोनो सादारान दरल सहमल इस्त्रीता चेने,
  70. 5:30–5:34उ एक्दम सक्रीया अची मैंने कताक अपने सावागा बडवे तची.
  71. 5:34–5:39एक्दम, उ स्वायम आगा आबिक चोहर मल के प्रेम प्रस्ताव देटची.
  72. 5:39–5:53आजक्हन उकर बाप तोल पर आक्रमण करे तची तो उ तल्वारक सोजा थाड ब होजाई तची आब बाप के विवष्कोड़े तची जे रक्तपात ने होई उआपने भागिक निर्माता स्वयम बनबाख प्रयास करे तची.
  73. 5:53–5:55अगर साभ भ्वनात्नक रूप सा जुड़े तची
  74. 5:55–5:59मुदा अद्याय दस में जखन कलूवा सिपाही अचानक अबआइ तची
  75. 5:59–6:01और लेश्माक अपहरन का लेटची तची
  76. 6:01–6:03तचन गती बडली जाए तची
  77. 6:03–6:06चोहर्मल यूद करेट वीर गती प्राथ करेटची
  78. 6:06–6:36अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
  79. 6:36–6:39विद्रोही इस्त्रिक स्वर के कंतता दबाद देताची?
  80. 6:39–6:41इएक तक गंभीर द्रिष्टी कोना ची?
  81. 6:41–6:45और समबवा चे जे लेक्हकक इम वन्साय रहल होई.
  82. 6:45–6:48मुदा एक तक कताक नजरी से देखुता,
  83. 6:48–6:54जखन पात्ख कुनो पात्रक संगर्ष पर एत्तिक लंभा समएदरी नजल रखाई तच्छे,
  84. 6:54–6:59तक अगी पात्रक मान पात्खक के एक तक खाली पनक एहसास कर वही तचे?
  85. 6:59–7:03आप, इबात अची पात्खक के एक तक ख्लोजर चाही.
  86. 7:03–7:09एक दम, जगन नाए का उतिक सहासी चल, तो अकर अद्मातर मान कोन भहसकाई तची?
  87. 7:09–7:16एकर अस्पष्ट समदान इचे जे रिश्माक अन्तिम अवस्था के एक ता वैचारेक वब्हावनात्मक निशकर्ष दिल जाए.
  88. 7:16–7:21जे उकर साहस अक कताक अन्तमे बनल मन्दिर का अस्थापना से जुडल होए?
  89. 7:21–7:25बिल्क्ल जेना इ अस्पष्ट रूप सदेखायल जासकाई तच्छी,
  90. 7:25–7:30जे अपहरनक बादो अख्रा मानसिक रूप सन नहीं तोडी सकल,
  91. 7:30–7:33औ, दोसर विवास अस्पष्ट मना कदे लक.
  92. 7:33–7:37औ, आ, जीवन बहरी चोहर मलक स्मिरितिक संजीवी कदेखायल के?
  93. 7:37–7:49आई, वा इस थापित केल जासकाई तची, जे ओगरे इ आजीवन विद्रो, अनतता समाज के, उही ताम रेश्माचोर मलक मन्दिर बनेवाखले विवष केलक.
  94. 7:49–7:52अरे बाद, यी तब रहुत निक विचार अची,
  95. 7:52–7:55इपाटक के इस सन्टेश देईत अची,
  96. 7:55–7:59जे मन्दिर के निरमान वस्तुतर रेश्माक आजीवन संगर्ष्प परिनाम्चल,
  97. 7:59–8:00उकर हारने?
  98. 8:00–8:01एक दम सही,
  99. 8:01–8:03जै हम इस पष्ट कदी,
  100. 8:03–8:09जे उ मंदिर रेश्माक मोन नहीं बलकी उकर विद्रोही स्वरक अस्मारा कची,
  101. 8:09–8:13तसमपुरन रच्नाक प्रभाव कतो अदिक गहीर भोजाएत.
  102. 8:13–8:18इपाठक के उही पाठक प्रती एक ता गहीर समान सभरी देत,
  103. 8:18–8:21आउ मोन एक ता शक्तिषाली गरजन बनी जाएत.
  104. 8:21–8:51आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  105. 8:51–8:53आरो स्पष्ट बनावल जासके तच्छी
  106. 8:53–8:56इछित्र सब आपने आपने बहुत कलात्मक्षती
  107. 8:56–8:59वहे में बहुत रास, त्रिबुज, व्रेत
  108. 8:59–9:01अग किछु श्टिक फिगर देल गे लगछी
  109. 9:01–9:03मुदा समस्या ची
  110. 9:03–9:05जे भाशा एतेक सुगन्दित
  111. 9:05–9:12अलोक संस्क्रिती सजुडल अची, ता इई आदूनिक जामिती आकार किचु अलग भुजाई तची.
  112. 9:12–9:17इह मूल कमजोरी अची. समपुन सामगरी मेजे इए आमुर्त चित्र देल गाल अची.
  113. 9:17–9:21उ एह माटी का या तियासी प्रेम कताक गंविर्तक संगे सूजे नहीं जोडे तची?
  114. 9:21–9:28आ, कताची मोकामा गातक माटीक पसीनाक अच्ट्रची एक दम आमुर्त रेखा गने तक.
  115. 9:28–9:32मस्तिष्क द्रिष्य अपाट्ख के एक संगे प्रोसिस करओगी तची.
  116. 9:32–9:43जखन पाथक पडिरहलत्ची सामन्ती संगर्षक बारी में अदेखी रहलत्ची आदूनिक आमुर्त कला ता एक ता विज्वल, डिसोनेंस, वाद्द्रिश असंगती पेदा होई तची.
  117. 9:43–9:46इपाथक के कताक प्रवाह सा बाहर कदे तची.
  118. 9:46–9:50हमें है इस्तितिके एक ता सत्तिक उप्मासे संबोदित करे चाहाव.
  119. 9:50–9:54योहिना भेल, जेना आहा गाम अप कोनो चोपाल पर भैइस का
  120. 9:54–9:58एक ता परमपर एक दर्द बहरल लोक जीज सूने रहल ची.
  121. 9:58–10:03मुदा मनچक सजावत एक्दम आदूनिक अबस्त्रक्त आडट से कल गेल होए.
  122. 10:03–10:06आदून एक्दम सती कुप माचे एक।
  123. 10:06–10:09दूनू आपन आपन तामपर सुन्दर आचू,
  124. 10:09–10:13मुदा दूनुक भीच जग कोनो वैचारिक पुल नहीं होए,
  125. 10:13–10:16तदर्षक अक ध्यान बद्ष्कई लगेतच्
  126. 10:16–10:18दर्षक भुजीने पवायतच,
  127. 10:18–10:19जे उ की देख्राहल अची,
  128. 10:19–10:21अ की सूनी रहाल अची,
  129. 10:21–10:23ते एक रा पाट्सक कोना जोडब?
  130. 10:23–10:25इकर समादानक लेल पाट्ध में,
  131. 10:25–10:29एही आमुर्ट द्रुष्रूप के कताक बावनात्मक,
  132. 10:29–10:33अज़्ाश्वाजिक बिन्दूसा अश्पष्ट्रूप से जोडबाख चाही
  133. 10:33–10:35मुदा उग कोना काईल जासकता ची?
  134. 10:35–10:39कोनो अमुर्त त्रिबुज के कताक माती सकोना जोडव?
  135. 10:39–10:44उदाहरन के लेल, जा कोनो चित्रमे त्रिबुज अव्रित चे,
  136. 10:44–10:47तो वरनन्ण को कोनो हिस्सा वफ्व्ट्नोट में
  137. 10:47–10:50एकर प्रतिकात्मक उलेक करल जासकतेच.
  138. 10:50–10:51जैना की?
  139. 10:51–10:54जक्हन आहा सामन्ती विवस्थाक बात करे ची
  140. 10:54–10:59तो उक्रा त्रिभुजक तीख्ष्न किनारा से जोडी सकेची
  141. 10:59–11:03जैना समाजक कतोर पदानुक्रमक उ पिरामिद
  142. 11:03–11:08जेकर चोटी पर आज्वी सिंग बैसल चती और नीचा चोहर मल पीसी रहे लची.
  143. 11:08–11:14औरे बाप, और उते जकुनो व्रित आची, तो उक्रा प्रेम के अनन्त चक्र से जोडी दियोक.
  144. 11:14–11:18एक दम, जक्शन रहा पाटख के ये भुजहा देची,
  145. 11:18–11:23तो आचानक साँ उ चित्र कता के एक ता अबहिन आंग बनी जातची.
  146. 11:23–11:25इत बहुत गहीर बादवेल.
  147. 11:25–11:27मुदा एक ता आरो विकल्प यी नहीं बहुत सकत अची
  148. 11:27–11:30जिच्त्रक साइली के बदली देल जाए.
  149. 11:30–11:33एक दम यी एक ता और सुंदर विकल्प ची.
  150. 11:33–11:39ज़ा समबव होए, तो लेखख एह जामिते एह चित्र का शैली के स्थानिया लोक कला,
  151. 11:39–11:46जैना मदूबनी वा मित्फिला पेंटिंकक याठार्थ वादी रुप में प्रस्तुट करबाक विचार कर सके च्छती.
  152. 11:46–11:51जएसे द्रिश्ष्ष्वार्पात दूनो एक ए संसक्रतिक माटी सो उप्जल बुजाए.
  153. 11:51–11:56आप, जगन द्रिश्ष्ष्वार्पात एक दूस्रा से समवाद करे लागागताची,
  154. 11:56–12:00तो पाटख के लेल अनुबव, केवल पदबाक नहीं जाए तची,
  155. 12:00–12:03बलकी उ उक्रा महिसुस करे लागाई ता ची
  156. 12:03–12:07आई एक ता सफल पोथिक पहचान होग ता ची
  157. 12:07–12:12जद तै कठा क हर तत्व एक दोसराक समर्ठन करे ता ची
  158. 12:12–12:16ता आउ आईक एह गंवीर चर्चा के समेटेच ची
  159. 12:16–12:20बिल्कुल, हम्रा सव तींटा मुख्य बिन्दू पर बात्के लहूं
  160. 12:20–12:27पहल एजे जादूई तत्वके अस्थान पर यतार्थ वादी मानविय साहस का प्रयोग होए
  161. 12:27–12:34वजँ जादो राखवेग अची, तो उक्रा स्ववाती अद्ध्याय से पूर्व संकेत करूप में अस्थापिट खेल जाए.
  162. 12:34–12:46अदोसर महतुपुन बिन्दूचल जे कताक अन्त में सशक्त नाइका के मुन राखवक बडल में उक्रा एक ता वैचारिक वा भावनात्मक निशकर्स देल जाए.
  163. 12:46–12:53जाए सों उकर आजीवन विद्रोही स्वभाव आम्मन्दिर स्थापनाक सार्थक्ता स्थापित भह सके.
  164. 12:53–13:05अदेसर बिन्दुछल आमुर्त चित्र सबखग एकी करन, समागरी में देलगेल जामित्ये चित्र सबके पात रूपक कमाद्यम सों कताक संगे एका कार केल जाए,
  165. 13:05–13:11जाए सों औं महज सजावद नहीं बलकी कताक गहराई के बधावे वला उपकरन बन सके.
  166. 13:11–13:18इसब्टा सुज्हाथ साण्द्रीक मुल भावना के आहत केने बिना उसकर प्रभाप के अदिक्तम करभाख लेल अच्छे.
  167. 13:18–13:23लेक्ख पहले साही एक्टा बहुत सुन्दर अम्माडि संजोडल कता गड़ेने चाते,
  168. 13:23–13:29बस इकिच्छु वेचारिक पुलक निरमाण ने एक्रा एक्टा कालजेई रच्ना बनावसके तच्छे.
  169. 13:29–13:36हमरा सवकस रोता सा आग्रह थच्छी, जे इसुज्हाव सबक अदार पर अपनही सुंदर समागरी के,
  170. 13:36–13:40आरो परिषक्रित करू आपुना समिक्षा लेल हम्रा सब लग पठाओ.
  171. 13:40–13:44आहाक कताक दिवाल बहुत मजबूत छी,
  172. 13:44–13:47बस विचार करू जे उई में कतो हवाक एट त त नहीं छी?
  173. 13:47–13:49चर्चा सुन्बाक लेल दन्नेवाद

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आए हमर सबख्बिमर्शक केंद्र आजे, गजंद्र ताकृर के चवहर्ण्मल आरेश्मा, जे मुकामा गात के जाती पाती अ संगर्ष पर आदारित एक ता दुकान्त प्रेम कता आचे. आप बाखिर कत्हाक अंतिम बाग में, जादूई तत्व आँ कत्होर समाजे प्यधार्त के भीच का संतुलन आरो नीक बहसकेच छे. एक दम सही कहलू, मने, शुरुवाती अद्याय सब में जना एक से चोड़ हरी देखी, तटोन बहुत याधार्त वादी आचे. उते कोनु फेंतसी नहीं आचे? बलकुल नहीं परिवेश पूरनता सामनती व्यवस्ता जमीनी स्थरक ध्वन्द पर आदारी दचे एक्दम, लेखक जे सनसार गडले चेती उकर नियम बहुत इसपष्ट आचे मैंने चोबवल एक ता गरीब दूसाद भोनेहार चे जे कुस्ती लड़ाय तचे उकर पसीना एक दम भोते कचे आख़, उप पूरन रूपे शरीरिक संगर शे आदो सर देस रेश्मा आचे जे एक ता दनी भूमिहार ब्रम्वर्ध बेटी आचे दूनुक भीच का प्रेम जगन समाजेक सोजा आवेत छे उते कोनो जादुक छ़ीना गूमाईत छे जि सब किछ तीक कर दिये. उजली ए, मने रेश्मा पर पहरा लगा देल जाई चे हींसक अक्रमण होईता चे, हत्यारा पताओल जाई चे इसब्ता एक दम माटिक संजुल यदार्त वाद अच्छे पाथक औही गंभीर्ता के महसुस करे चे मुदा समस्या तक्हन अबईत चे जक्हन अद्याए सात में कता अचानक एकता अप्रत्याशित मोड लेए टचे अग, रामसक्वाला जे प्रसंग अची उक्रा के ही रहल चे है? आप, एक दम. रेश्मा के पहरा से बाहर निकालबा के लेल उकर सक्वी, रामसक्वी जादुक प्रयोग करे चे. उ रेश्मा के अद्रिष्षे कर देत चे. मने पहरेदार सवक आएक्ध सोजासो उ हवाक जोकाजा का निकलीजट अचे इह उ कमजोरी अचे जग्रा हम रेख हांकित कोर रहल ची राम सक्छिक जादुक प्रवेश एही कथोर सामाजिक यतार्थ वादी कताग लेल आप पुड़ तया असंगत लगए तचे अहू इआसंगती एही कारन से अची जे कताक मूल संगर्ष बहुत्तिक और जातिगत आचे जाही में जादूक लेल कोनो स्थान पहल से नहीं बनाओल गेल चल बुजली एई इप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आ� आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ जखन हा एहन सन्सार दिखार हल ची, जदे सामनती शक्ती इते क्रूर आचे, तकन अचानक से एक ता जादूई समडान आभी जे बास, कताक गमभिरता हलका बहुजाई तची. आ, पातक तनाव कतम भहुजाई तचे, करनोक्रा लागे तचे, जब ता जादुक पर्योख सकिचु बहसके तच्ये बिल्कुल इई आचानक वेल प्रवेश एक ता एहन समदान आच्ये बाहर सद्फोपी देलगेल भुजाई तच्ये रोको रोको अपन अद्टाग बाख जाब यहाँ ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई ताई त बीच में आचानक सा आबब गडगगे तचे एक दम जादू उही मानविय संगर्षक पीरा के कम कर दे चे ते एक रा थीक करबाक लेल आहां की सुजहावा ची एक रा समादान बहुत समान ने दंख सकई तचे जादू कब बडला में रेश्माक मानविय साहस वा यत्धार्त्वादी चातुर्यक उप्योक का इल्चाई तची जना की? जना उ कोनो पहरेदार के गूस देका वा रात्रिक अंद्राकर फाइदा उठाए का बहर निकले तची तो उकर विद्रोही सुबाव आरो निकर का सामने आवे तचे बाखिर जान लेखख, जादूक उही लोक कताश्वेली कराखवे चाहत चतिन तकन की कैल जाए. तकन उक्रक कताख शुर्वाद सही पूर्व संकेत वा फोर्शाडोंग कर रूप में स्तापित करवाख चाही. उदारनक्लेल अद्याय दूवा तीन में रामसक्खीक रहस्सेमएई शम्ताक, कोनो चोट सन्खतना पहलेन देखाओल जासके तचे. अग, माने पहले से हैं स्तापित कर दियोंग, जे ओद तन्त्र मन्त्रक जानकार आची. बलक्ल, जब पहले ही इस्तापिद भजाएत, तसातम अद्धाय में ओकर जादूक प्रयोग, पाथक के कताक नियमक विरुद्ध नहीं लागत. तकन उएक तस्वाभाविक विकास लागत. एक्दम, तक्खन दिवालक इंट पलिलेहे सद जादूई स्तापित भोजाएत. बुजलिय, अज्गन हमर सबक भात रेश्मक साहस्क बहरहल अची, तक कताक अंत में उही सक्रिय नाइकाक जे परिनती होई तची, उक्रो चर्चा करभ आवश्यक अची. आ, रेश्मक अंतिम परिनती के मान राख्वाक निरनै, कताक सशक्त नाएका के चरित्र चित्रनक समग्र प्रभाव के किचो हद्धरी कम करे तच्छे. मैंने सुरुसा देकी तर रेश्मा कोनो सादारान दरल सहमल इस्त्रीता चेने, उ एक्दम सक्रीया अची मैंने कताक अपने सावागा बडवे तची. एक्दम, उ स्वायम आगा आबिक चोहर मल के प्रेम प्रस्ताव देटची. आजक्हन उकर बाप तोल पर आक्रमण करे तची तो उ तल्वारक सोजा थाड ब होजाई तची आब बाप के विवष्कोड़े तची जे रक्तपात ने होई उआपने भागिक निर्माता स्वयम बनबाख प्रयास करे तची. अगर साभ भ्वनात्नक रूप सा जुड़े तची मुदा अद्याय दस में जखन कलूवा सिपाही अचानक अबआइ तची और लेश्माक अपहरन का लेटची तची तचन गती बडली जाए तची चोहर्मल यूद करेट वीर गती प्राथ करेटची अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� विद्रोही इस्त्रिक स्वर के कंतता दबाद देताची? इएक तक गंभीर द्रिष्टी कोना ची? और समबवा चे जे लेक्हकक इम वन्साय रहल होई. मुदा एक तक कताक नजरी से देखुता, जखन पात्ख कुनो पात्रक संगर्ष पर एत्तिक लंभा समएदरी नजल रखाई तच्छे, तक अगी पात्रक मान पात्खक के एक तक खाली पनक एहसास कर वही तचे? आप, इबात अची पात्खक के एक तक ख्लोजर चाही. एक दम, जगन नाए का उतिक सहासी चल, तो अकर अद्मातर मान कोन भहसकाई तची? एकर अस्पष्ट समदान इचे जे रिश्माक अन्तिम अवस्था के एक ता वैचारेक वब्हावनात्मक निशकर्ष दिल जाए. जे उकर साहस अक कताक अन्तमे बनल मन्दिर का अस्थापना से जुडल होए? बिल्क्ल जेना इ अस्पष्ट रूप सदेखायल जासकाई तच्छी, जे अपहरनक बादो अख्रा मानसिक रूप सन नहीं तोडी सकल, औ, दोसर विवास अस्पष्ट मना कदे लक. औ, आ, जीवन बहरी चोहर मलक स्मिरितिक संजीवी कदेखायल के? आई, वा इस थापित केल जासकाई तची, जे ओगरे इ आजीवन विद्रो, अनतता समाज के, उही ताम रेश्माचोर मलक मन्दिर बनेवाखले विवष केलक. अरे बाद, यी तब रहुत निक विचार अची, इपाटक के इस सन्टेश देईत अची, जे मन्दिर के निरमान वस्तुतर रेश्माक आजीवन संगर्ष्प परिनाम्चल, उकर हारने? एक दम सही, जै हम इस पष्ट कदी, जे उ मंदिर रेश्माक मोन नहीं बलकी उकर विद्रोही स्वरक अस्मारा कची, तसमपुरन रच्नाक प्रभाव कतो अदिक गहीर भोजाएत. इपाठक के उही पाठक प्रती एक ता गहीर समान सभरी देत, आउ मोन एक ता शक्तिषाली गरजन बनी जाएत. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � आरो स्पष्ट बनावल जासके तच्छी इछित्र सब आपने आपने बहुत कलात्मक्षती वहे में बहुत रास, त्रिबुज, व्रेत अग किछु श्टिक फिगर देल गे लगछी मुदा समस्या ची जे भाशा एतेक सुगन्दित अलोक संस्क्रिती सजुडल अची, ता इई आदूनिक जामिती आकार किचु अलग भुजाई तची. इह मूल कमजोरी अची. समपुन सामगरी मेजे इए आमुर्त चित्र देल गाल अची. उ एह माटी का या तियासी प्रेम कताक गंविर्तक संगे सूजे नहीं जोडे तची? आ, कताची मोकामा गातक माटीक पसीनाक अच्ट्रची एक दम आमुर्त रेखा गने तक. मस्तिष्क द्रिष्य अपाट्ख के एक संगे प्रोसिस करओगी तची. जखन पाथक पडिरहलत्ची सामन्ती संगर्षक बारी में अदेखी रहलत्ची आदूनिक आमुर्त कला ता एक ता विज्वल, डिसोनेंस, वाद्द्रिश असंगती पेदा होई तची. इपाथक के कताक प्रवाह सा बाहर कदे तची. हमें है इस्तितिके एक ता सत्तिक उप्मासे संबोदित करे चाहाव. योहिना भेल, जेना आहा गाम अप कोनो चोपाल पर भैइस का एक ता परमपर एक दर्द बहरल लोक जीज सूने रहल ची. मुदा मनچक सजावत एक्दम आदूनिक अबस्त्रक्त आडट से कल गेल होए. आदून एक्दम सती कुप माचे एक। दूनू आपन आपन तामपर सुन्दर आचू, मुदा दूनुक भीच जग कोनो वैचारिक पुल नहीं होए, तदर्षक अक ध्यान बद्ष्कई लगेतच् दर्षक भुजीने पवायतच, जे उ की देख्राहल अची, अ की सूनी रहाल अची, ते एक रा पाट्सक कोना जोडब? इकर समादानक लेल पाट्ध में, एही आमुर्ट द्रुष्रूप के कताक बावनात्मक, अज़्ाश्वाजिक बिन्दूसा अश्पष्ट्रूप से जोडबाख चाही मुदा उग कोना काईल जासकता ची? कोनो अमुर्त त्रिबुज के कताक माती सकोना जोडव? उदाहरन के लेल, जा कोनो चित्रमे त्रिबुज अव्रित चे, तो वरनन्ण को कोनो हिस्सा वफ्व्ट्नोट में एकर प्रतिकात्मक उलेक करल जासकतेच. जैना की? जक्हन आहा सामन्ती विवस्थाक बात करे ची तो उक्रा त्रिभुजक तीख्ष्न किनारा से जोडी सकेची जैना समाजक कतोर पदानुक्रमक उ पिरामिद जेकर चोटी पर आज्वी सिंग बैसल चती और नीचा चोहर मल पीसी रहे लची. औरे बाप, और उते जकुनो व्रित आची, तो उक्रा प्रेम के अनन्त चक्र से जोडी दियोक. एक दम, जक्शन रहा पाटख के ये भुजहा देची, तो आचानक साँ उ चित्र कता के एक ता अबहिन आंग बनी जातची. इत बहुत गहीर बादवेल. मुदा एक ता आरो विकल्प यी नहीं बहुत सकत अची जिच्त्रक साइली के बदली देल जाए. एक दम यी एक ता और सुंदर विकल्प ची. ज़ा समबव होए, तो लेखख एह जामिते एह चित्र का शैली के स्थानिया लोक कला, जैना मदूबनी वा मित्फिला पेंटिंकक याठार्थ वादी रुप में प्रस्तुट करबाक विचार कर सके च्छती. जएसे द्रिश्ष्ष्वार्पात दूनो एक ए संसक्रतिक माटी सो उप्जल बुजाए. आप, जगन द्रिश्ष्ष्वार्पात एक दूस्रा से समवाद करे लागागताची, तो पाटख के लेल अनुबव, केवल पदबाक नहीं जाए तची, बलकी उ उक्रा महिसुस करे लागाई ता ची आई एक ता सफल पोथिक पहचान होग ता ची जद तै कठा क हर तत्व एक दोसराक समर्ठन करे ता ची ता आउ आईक एह गंवीर चर्चा के समेटेच ची बिल्कुल, हम्रा सव तींटा मुख्य बिन्दू पर बात्के लहूं पहल एजे जादूई तत्वके अस्थान पर यतार्थ वादी मानविय साहस का प्रयोग होए वजँ जादो राखवेग अची, तो उक्रा स्ववाती अद्ध्याय से पूर्व संकेत करूप में अस्थापिट खेल जाए. अदोसर महतुपुन बिन्दूचल जे कताक अन्त में सशक्त नाइका के मुन राखवक बडल में उक्रा एक ता वैचारिक वा भावनात्मक निशकर्स देल जाए. जाए सों उकर आजीवन विद्रोही स्वभाव आम्मन्दिर स्थापनाक सार्थक्ता स्थापित भह सके. अदेसर बिन्दुछल आमुर्त चित्र सबखग एकी करन, समागरी में देलगेल जामित्ये चित्र सबके पात रूपक कमाद्यम सों कताक संगे एका कार केल जाए, जाए सों औं महज सजावद नहीं बलकी कताक गहराई के बधावे वला उपकरन बन सके. इसब्टा सुज्हाथ साण्द्रीक मुल भावना के आहत केने बिना उसकर प्रभाप के अदिक्तम करभाख लेल अच्छे. लेक्ख पहले साही एक्टा बहुत सुन्दर अम्माडि संजोडल कता गड़ेने चाते, बस इकिच्छु वेचारिक पुलक निरमाण ने एक्रा एक्टा कालजेई रच्ना बनावसके तच्छे. हमरा सवकस रोता सा आग्रह थच्छी, जे इसुज्हाव सबक अदार पर अपनही सुंदर समागरी के, आरो परिषक्रित करू आपुना समिक्षा लेल हम्रा सब लग पठाओ. आहाक कताक दिवाल बहुत मजबूत छी, बस विचार करू जे उई में कतो हवाक एट त त नहीं छी? चर्चा सुन्बाक लेल दन्नेवाद

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