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अंकिताक_संग_मैथिली_वर्णमालाक_रसमय_यात्रा.m4a
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- 0:00–0:06अगर पहिल पन्ना से लएक अन्तिम पन्ना दरी रडी जाओ, कारन इब हविश्ष्ख लेल बहुत आवष्ष्ख आची.
- 0:06–0:11भारी बर्क्म दिक्शनरी कोनो वेक्तिक हाथ में दहरा देल जाए.
- 0:11–0:16ता जाही बाशा सा हूंका कोनो पोर्व परिज़े नहीं होए.
- 0:16–0:20बलक्ल एक दम अजनवी बाशा अद्खन कहल जाए
- 0:20–0:24जे एकर पहिल पन्ना से लएक अंतिम पन्ना दरी रडी जाओ
- 0:24–0:27कारन, इब हविश्षक लेल बहुत आवष्ष्ष्ख आजी
- 0:27–0:30उता कोनो भी वयस्क व्यक्तिक लेल से हो,
- 0:30–0:34मैंने, बहुत नीरस आए एक तरा से असमबव जगा लागत
- 0:34–0:36एक दम असमबव लागत
- 0:36–0:39मुदा, जो हम सब गमविरता से विचार करी,
- 0:39–0:43तुम सब आपन चार पाज वर्षक बच्चक संगे प्राया यहे करे चीना?
- 0:43–0:46आप, एक दम सही दीशा में जारयल ची आप.
- 0:46–0:50मने जखनुक्र वरन मालाक पारमपर एक पोठी दھराए का,
- 0:50–0:53असे अनार, असे आम रटबाक किल बादि किल जाचे,
- 0:53–0:59तो उकर चोर चोर चीन मस्तिष्क लेल उएक ता अग्याड दिक्षनरी रत्बाक समानी होईता ची.
- 0:59–1:00बलकुल होईता ची.
- 1:00–1:01कारन दिख हो.
- 1:01–1:08बच्च्याक मस्तिष्क कोनो खाली सलेट ता नहीं जी उईपर कोरी तत्थ्थ्या लिक देल जाए आउ याद कर लित.
- 1:08–1:09अग!
- 1:09–1:13माना मस्तिषक कविकास लाको वर्ष क्रम् में बहल अचे
- 1:13–1:18और इविकास माने तत्फ्यव वकुरो सुची रत्बा के लिल नहीं
- 1:18–1:24बलकी अनुबव, कत्ठा आ आपन चारू कातक परीवेष से जुदबा के लिल बहल अचे
- 1:24–1:27जेक्रा हम संदरभवा कुन्तेक्स्ट कहें चे
- 1:27–1:29हाँ, कुन्तेक्स्ट
- 1:29–1:31सादारन तेया लोक मानी लेट चतीन
- 1:31–1:34जे किचु नव सिखबाक अर्ठ आचे
- 1:34–1:38बारी बरकं पोती, रटब, अब बहत रास मान्सिक तनाव
- 1:38–1:42मुदा शिक्षा जकन कोनो साख्षात अनबवव से जुडजाईता चे
- 1:42–1:45तकनो भोज ने रही जाईता चे
- 1:45–1:49आमस्तिष को ही जानकारी के बहुत सहज्ता सो ग्रेंग कर लेता चे
- 1:49–1:50आई यहे कारना चे
- 1:50–1:54जे आई हम सब जे गहीर विष्लिषन करवा जारोहल ची
- 1:54–1:59उ शिक्षाक एही मनोवे ज्यानिक पक्ष्के उगारी का सामने राक्ध.
- 1:59–2:01बहुत रास नव बाज सामने आप आबाए चे आए.
- 2:01–2:02एक दम.
- 2:02–2:05ता आई हमर सब के विशाय आची,
- 2:05–2:06गजें़र ताकृवर द्वारा रचित,
- 2:06–2:08बाल उपन्यास,
- 2:08–2:10वरन माला शिक्षा अंकिता.
- 2:10–2:14इविदे ही पत्रिकाक अंतर्गत प्रकाषिद भेल अचे
- 2:14–2:17आएकर ISBA नम्बर से हो दर्ज अची
- 2:17–2:21जे प्रमानित करेट अचे जे इखुनु सादारन प्रयास नही आची
- 2:21–2:25बलकी एक ता गंभीर सहिथ देक आ अकाद्मिक काज देक
- 2:25–2:28मुता मैं, नाम सजेहन बुजहाई तो ची,
- 2:28–2:33इक नो सादारन अ आ ए ए रटाभे वाला नीरस पोती नहीं आचे.
- 2:33–2:37इ अंकिता आ अकर पिता के एक ता साजकर तहलनी,
- 2:37–2:39यानी एक ता सहथ यात्रा कता थेक.
- 2:39–2:41या एक अर सब से रोचक बात आचे.
- 2:41–2:44अदूनु गोते बस ताल रहन च्हती
- 2:44–2:48आईही यात्राक माद्यम सब मेठली वर्ण माला
- 2:48–2:50मने अस लेका होदरी सीक्छे बाक
- 2:50–2:53एक ता अदबूत आप रचनात्मक प्रयास के लिए ला ची
- 2:53–2:56जिना कोनो बच्चा के कलवा औशदी ख्वाबेत काल
- 2:56–2:59अखरा मिठाएक भीच में उका का दिल जाएच है, नहीं?
- 2:59–3:01रहा रहा बिलकोल
- 3:01–3:04तीक ताने इपोति, नीरस वरन्माला रत्बा काज के
- 3:04–3:08एक ता सुन्दर कताक चाशनी में लपेटी का प्रस्थूत करे ताचे
- 3:08–3:14दिको आईही पोथिक विषलेशन करे तकाल जे बात हमर द्यान सबसे भेशी खीचलक
- 3:14–3:18उई आचे जे एते वनमाला केवल अख्षर ज्यान नहीं आची
- 3:18–3:22एक टा गतना करमक मने एक ता पुरा श्टोरी लाईन के हिसा आचे
- 3:22–3:24बिना स्तोरी लाईनक तबच्चा उभी जाएत?
- 3:24–3:25एक दम उभी जाएत.
- 3:25–3:27विग्यानी प्रमानित कर चुकल अचे
- 3:27–3:29बिना सन्दर भग देलगिल जानकारी
- 3:29–3:32मस्तिष्कक शोट्टम मेमरी में किचु काल लिल
- 3:32–3:33रही तजाएत जे
- 3:33–3:35उगरा बाद साफ इलकुल
- 3:35–3:38तव एप उठी के जे मुख्य मिशन अचे
- 3:38–3:40उगे आच जे शिक्षाक प्रक्रिया के
- 3:40–3:43एक तए एहन सहथ यात्राक रूप देल जाए
- 3:43–3:46जदे बच्चा के इबहान दरी नहीं होए
- 3:46–3:49एक ता एहन सहज यात्राक रूब तेल जाए,
- 3:49–3:51जदे बच्चा के इभान दरी नहीं होए,
- 3:51–3:54जो किच पडी रहलाचे वो कुन तेयारी करो रहलाचे.
- 3:54–3:58इजे अनुबहव आदारित शिक्षाक बात हां कहली,
- 3:58–4:00उक्रा एही कता का आरंभ से ही,
- 4:00–4:02बच्च्ट रूपन देखाल जासकता ची
- 4:02–4:06खदाख श्रवात बहुत स्वाबविक दंष होई तची
- 4:06–4:08याज़ याज़ चानज का समया ची
- 4:08–4:12याज़ चानज का समय अंगिता आपन पिताख संगे तहल बाले बाहर निकले तची
- 4:12–4:15एह ते समय के अकादारून कहल गेल जे
- 4:15–4:17मैं आसमान्या
- 4:17–4:18रस्ता में चलत-चलत
- 4:19–4:21बच्चाक जी स्वाबहविक प्रव्रती होई चे
- 4:21–4:23वोकर पेर दुखा जाई तचे
- 4:23–4:25वो अवाच यान थाकेल भोजाई तचे
- 4:25–4:27देखदम भाल सुलब जित्रन अचे
- 4:27–4:27भिल्कुल
- 4:28–4:30फिर वोकर चंचलता देखू
- 4:30–4:35उएक ता लाल्ली मने मिठाई देखाई तची, अज़िद करी तची जे उक्रा उहे चाही.
- 4:35–4:40पिता मना करे चती जे अकर दखर मने फाल तु चीज नहीं कहु.
- 4:40–4:42इता हर गर के कहानी आचे.
- 4:42–4:48रागु बधाला पर उसब भून जाकूर में लागल आगे देखाई चतिन,
- 4:48–4:51जखरा पिता अगिन्वान कही चतिन
- 4:51–4:53और जे गाछ नहीं जर लची
- 4:53–4:55उक्रा अखच खाल गल अची
- 4:55–4:58इसब दिश्षत बहुज जीवन्त अची
- 4:58–5:02मुदा, हमरा एक ता पाएग विसंगती बुचाए तचे
- 5:02–5:04विसंगती? उखुना?
- 5:04–5:06मने, हमर इस वची रहाल ची
- 5:06–5:16जि अकादारों, अवाच, अकर दखर, अगिन वान, अखखज, इस भ इते क बारी बरकम, तेट अ किचु हद्दरी क्लिष्ट शब्द ची.
- 5:16–5:20राद, सादरन बोल चाल में कम प्रयोग होई तची.
- 5:20–5:24तजा रहम कुनो चार पाच वरस के बच्चा के वरन माला सिखार रहल ची,
- 5:36–5:44बच्चा के एक्ता कताक लालच दध का वास्तों मुक्रा एक्ता कतिन शब्द कोश रटाबेलन पसाने रहल ची.
- 5:44–5:51एक रासत बच्चा दिखब्रहमित मने कन्फुस भहुज बहुज भहुज के तचे.
- 5:51–5:55दिक्हु इस सन्दे प्रथम न्रिष्ट्या बहुत उचित लगे तची
- 5:55–5:59आप राया हा बहुत राश शिक्षा विद्से हो यहा तर्क देच्छत्छी
- 5:59–6:02जे बच्चाके एक दंज़ सरल से सरल चीज दिल जाए
- 6:02–6:05मुदाया दे यस संज्यानात्मक मनो विग्यान मने
- 6:05–6:09कोगनेटिः साइकलोघगी का एक ता बहुत सुख्ष्म सिद्धान्त काज कोर रहा लगची
- 6:09–6:10आच्छा
- 6:10–6:12उसिद्धान्त की कहेत आची
- 6:12–6:16हम सब मान लेच छे जे बच्चाक्मस्तिष्क जटिल्ता के नहीं समजी सके तची
- 6:16–6:23जखन की वास्तव में बचाक मस्तिषक, कतिन वा सरल शब्दक भीचक भेद जाने ते नहीं आची.
- 6:23–6:26ओ, माने उख्रा लेल सब शब्द बराभर आची.
- 6:26–6:31बलकल, उख्रा लेल आम आगिन वान दूनु नव ध्वनी मात्र आची.
- 6:31–6:37समस्या शब्दक जटिल्ता में नहीं आची, बुजेलिय, समस्या संदर्व का अबहाव में आची.
- 6:37–6:45मतलब आईहा को कहा बची जे बच्चा लेल कोनो शब्द भारी वहल्का नहोगे तची, मात्र परिचित वह अपरिचित होगे तची.
- 6:45–6:46इक्दम सही पगल लूहा
- 6:46–6:49जखन अंकिता जंगल में लागल आगी के साख्षाद
- 6:49–6:51अपन आखी से देख़े तची
- 6:51–6:54तचन उकर मस्तिष्कक जे एमिक्डला आची
- 6:54–6:56एमिक्डला एकी होई तची
- 6:56–6:58इमस्तिष्कक उहिस्सा चैई
- 6:58–7:01जि बहावना आ उत्टेजना के निंट्रित करे तच्छे
- 7:02–7:04तच्छन अ आगी देखा तच्छे
- 7:04–7:06उकर इमिक्डला सक्रीए ब हो जाए तच्छे
- 7:07–7:09आगीक गर्मी, दूवाक गन्द
- 7:09–7:11अव विशाल द्रिष्छ
- 7:11–7:14इस सब मिली का एक ता प्रासंगेख स्म्रिती
- 7:14–7:17यानी अप्सोडिक मेमरी का निर्मान करे थाची
- 7:17–7:18अच्छा
- 7:18–7:21माने उपुडा द्रिष्च दिमाग में चबी जाई थाची
- 7:21–7:26अद्तक्हन जगन पिताओ कर अगिन्वान कही च्छतिन
- 7:26–7:30तो उशब्द मात्र एक ता रट्बाक समगरी नोर रही जाई थाची
- 7:30–7:34उवह उही समपूरन अनबवक एक टा लेबल बनी जाई तची
- 7:34–7:41मस्तिषक एह शब्द के वही द्रिष्ष्ट्च्संगे जोड कब हिप्पो कैमपस में सुरक्षिट का लेई तची
- 7:41–7:44तई फसाएब वह कन्फुज करव नहीं थिक
- 7:44–7:49बलकी ग्यान के सीथा सनायु तन्त्र, नर्वस सिस्तम का अनुबव से जोडब थी.
- 7:49–7:53इजे प्रासंग एक सम्रितिक बात आहा कहली ए, इवास्तों में बहुत तार्कि का ची.
- 7:53–7:58माने रटबाग बद्ला में जखन कोनो शब्द द्रिष्ष सामने हुई तची,
- 7:58–8:01तो उस्मरन शक्ती में गेराई से पवेज जाईता ची.
- 8:01–8:05एक दम जना आगु चली का हम कता में देखेची,
- 8:05–8:08अंकिता ताकी का उक्रु आसन में बएस जाईता.
- 8:08–8:12उक्रा उखी भिख्षी माने बेचैनी लागे लगे चे,
- 8:12–8:15उका पात में उका पतंग देखेटा.
- 8:15–8:17आओ उगुस्सी वला प्रसंग?
- 8:17–8:22दिलकुल. पिता उक्रा उगुसी से बच्वाक सलादे चाती
- 8:22–8:25उविशाक्त लत्ती जक्रा चूवे सा नोचनी होए चे
- 8:25–8:28इसब कत दक जीवन्त द्रिष्ट आची
- 8:28–8:31जक्रन बच्चा उगुसी क्नोचनी कलपना करत
- 8:31–8:33तो उश्वद जीवन भरी नहीं भीसरत.
- 8:33–8:34कहीो नहीं भीसरत.
- 8:34–8:38आई ही पोती है कि ता और गंभीर मनोवे ज्यानिक पक्ष छ़ची
- 8:38–8:40जे करा हम एते रेख हंकित करे चाब.
- 8:40–8:41आब दो.
- 8:41–8:45प्रतेक अद्याय का अंत में जे प्रश्नोथर देल गेल आची
- 8:45–8:47उ मात्र पन्ना ब्र्वाक लेल
- 8:47–8:50वा कोनो परमपरा निर्वाह करवाक लेल नहीं आची
- 8:50–8:52जेना अप्रश्न आची समय कहनचल
- 8:52–8:54आउतर अची अकादारुन
- 8:54–8:56वा बच्चाक नाम की ची
- 8:56–8:57उतर अची अंकिता
- 8:57–8:59एकर बात करवल ची आजा
- 8:59–9:00आजा यहे
- 9:00–9:03इप्रश्नोत्र मनो विज्यानक सक्क्री अस्मरन,
- 9:03–9:06जगरा अंग्रेजी में अक्तिव रिकोल कहेता ची,
- 9:06–9:08अकरेक उत्क्रष्ट उदाहरन अची.
- 9:08–9:12इज्सक्री ये अस्मरन वा अक्तिव रिकोल की हूँए तची.
- 9:12–9:14एक राद तनी विस्तार स समजाओ,
- 9:14–9:17अम्रा लागे तखी इबहुत काजक चीज आची.
- 9:17–9:19देखो, सादारन रूपेन,
- 9:19–9:22जगन हम कोनो ची सुनेट ची वा पड़ाइत ची,
- 9:22–9:27तन मस्तिषक जानकारी के निषक्री रूप सब भीतर लगल होगता ची,
- 9:27–9:28पैसिव तरीकसव.
- 9:28–9:30माने भस सुनी रहल ची.
- 9:30–9:39अग, मुदा जगन कोनो प्रष्न पुछल जाईत अची, तकन मस्तिषक के, भीतर सव ओही जानकारी के खोज कब बाहर निकाले पडे तची.
- 9:39–9:45एही निकालबाक वर रिट्रीव करबाक प्रक्रिया में मस्तिष्कक जे सनायू मार्ग ची
- 9:45–9:48नूरल पात्वेज उबहुत मजबूत बहाजाई तची
- 9:48–9:49अच्छा
- 9:49–9:53बच्चा जखन कता सुनेट ची, तन उ सन्दरभ पक्रगट ची
- 9:53–9:55अगामक अगामक द्रिश्या आबी जाईतची
- 9:55–9:58अविद्याने औही पर आदारित प्रष्नक उत्तर देई तची,
- 9:58–10:02तो उश्वद का आर्ठ अगर मस्तिष्क में पक्कभो जाई तची.
- 10:02–10:05इएक ता पुरनता वेग्यानिक पद्धि आची.
- 10:05–10:07इप्रक्रिया तबहुत रोचक आची,
- 10:07–10:09मुदा कता जकन आगु बड़े तचे,
- 10:25–10:36अगर भाज्चत्छिन, मचान पर पहरादीत, कदेरमान च्छिन, अगामक कार्खानावा लोहारक दुकान जख्डा, कमर सारी कहल गेला जी अगर चर्चा आचे.
- 10:36–10:38इज्सा हमरा बहुत नीक लागल.
- 10:38–10:42आप, फिर अनकिता चोबपर पह पहुची चन्चल भोजाई तची,
- 10:42–10:49चिक्कन बाट पर चलत, चंपा का गाच देखी चीच्याई तची, अच्चान के इजोथ में रस्ता तैक रिए तची.
- 10:49–10:56इद्रिश्ष्च्ट्रान अट्यन्त मोहक अचे, गजेंद्र ताकृगी अटे केवल शब्दक मालाने गुठी रहे लचती.
- 10:56–11:00बुज्लियो उ शब्दक माद्यम सा पूरा गामक चित्रपट्थार करहे टाए चाछाछा.
- 11:01–11:04हम आग बात बुज्रहल ची, आई चित्रपट सुंदर सो हुए चे.
- 11:05–11:08मुदा, मुदा, वास्तविकता इए चे, जे आदहनिक समय में,
- 11:08–11:38तो आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 11:38–11:41अगर शब्दावली के सिमित नहीं करो है।
- 11:41–11:44अगर बदला में अगर अदूनिक दून्याक शब्द सिखाए।
- 11:44–11:46बेसी उप्योगी नहीं होईत
- 11:46–11:51की हम बच्चा के एक ता म्रित बूत कालक बोज से नहीं लादे रहो है।
- 11:51–11:54ये तरक बहुत व्यवावारिक लगे तची
- 11:54–11:59अप्रायर आदूनिक शिक्चा प्रनाली ए, यह है मानी कचलगत अची,
- 11:59–12:03जे वे बच्चा के उतने सिक्ठाए जाए, जे वो कर रोज मर्रा के जीवन में काजावे.
- 12:03–12:09मुदा भाशा विग्यान और समाज्शास्त्र की द्रिष्टी से सोचब तए इस्तिती भिन्बुजायत.
- 12:09–12:10भिन्खोना.
- 12:10–12:14करन भाशा केवल सोचनाक आदान प्रदानक सादन माने,
- 12:14–12:15यूटिलिती नहीं अची.
- 12:15–12:18भाशा एक ता ताईम क्याप्सूल अची,
- 12:18–12:48अवाशा एक ता ता ताईम काईशूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आ
- 12:48–12:53अग, उगर उगर गाँउगाउगाउगाउगी अगी आत्मनिरभर व्यवस्ताक ज्यान से वनचित करहल ची,
- 12:53–12:57जते क्रिषिक उपकरन बनेच्छल, जते गामुक लोग बाइस का गबषषप करेच्छल.
- 12:57–12:59अग, इब आत्ता ची.
- 12:59–13:05बल की आहा उक्रा गाउक्रा उही आत्मनिरभर व्यवस्ताक ज्यान से वन्चित करहल ची
- 13:05–13:09जताए क्रिषिक उपकरन बनेट चल, जताए गामुक लोग भाईस का गबशव करेच चल.
- 13:09–13:11आ, इबात टा ची.
- 13:11–13:19जखन शेहरक बच्चा मचान पर भीसल कदेर मान शब्द सुनत तो लाजमी तोर पर पुषद जे इमचान की होई तचे.
- 13:19–13:29अद्तकन अभी बहवकक डईत्व बनेत जे उ उक्रा खेतेग, मार्टेक और राती में उगरभाद वारा फसल कर रक्षा कर बाक कता सुनोता.
- 13:29–13:31ये क्ता बहुत नवद्द्रिष्टि कोन अची.
- 13:31–13:35मतलब ये थेट शबद केवल वन्मालाने सिखा रहा लची.
- 13:35–13:43बलकी ये एक त्या उपकरन अची, जे शेहरी पीडी और हुनकर फ्रामीन जडिग भीच के तुटल पूल के फेर सबना रहा लची.
- 13:43–13:43बलकी ये एक त्या उपकरन अची, जे शेहरी पीडी और हुनकर फ्रामीन जडिग बीच के तुटल पूल के फेर सबना रहा लची.
- 13:43–13:46बलकुल यहे काज करहा लखछी
- 13:46–13:49जना कता में तोलक ताबनेवो का गाचक चर्चा आची
- 13:49–13:54गराम देवता वा कहबार अस्थान पजराय दीबख कबात आची
- 13:54–14:00आ अन्त में बुख लागला पर पिता दोरा तत्वा रोटी बनेबाक आश्वासन आवे रहा लखछी
- 14:00–14:05जै यी शब्द समाप्त बहुजात, तेकर संगे कहबार का वास्ता,
- 14:05–14:10ताबनेबो का उ गाचक चायोर, अटत्ट्वा रोटी का उ स्वाद सोब विलुक्त बहुजात.
- 14:10–14:14एक दम ते यी शब्दावली के सीमित करव नही आची,
- 14:14–14:17बल की बच्चाक साँस्क्रतिक जडी
- 14:17–14:19मने कल्च्रल रूट्स के मजबूथ करा बच्ची
- 14:20–14:22जाई गाचक जडी गहीर नी होई तेची
- 14:22–14:25उछ़ छोड छीन आनी में खसी पडे थची
- 14:25–14:26बलकुछ सही कहलीे
- 14:26–14:28आदूनिक दून्याक शब्दत बच्चा
- 14:28–14:31इस्कुल, तीवी अ इंट्रन्ट से सीके लेद,
- 14:31–14:34मुदा तत्वा रोती, अग कहबार जका शब्द,
- 14:34–14:36उक्रा केवल अपन माथी से बहेतत.
- 14:36–14:40इग ग्रामे जीवन अख्रिषिक परमपरा के नुव पीडिक स्म्रूती में,
- 14:40–14:43सुरक्षित कर्बाक एक ता बहुत सचेत प्रयास थीक
- 14:43–14:46इगव्त हमरा सोचे पर मजबूर कर रहा लगची
- 14:46–14:49जे भाशा वास्तो में कते कषक्ती राके तची
- 14:49–14:53आव जो हम इज यात्रा क्गती मने पेसिं
- 14:53–14:58अन्तिम चरन पराभी कता अपन चरम क्लीमेख्स पर पहुची रहा लची
- 14:58–15:00राती बहगे लची
- 15:00–15:03अकाश में तरेगन मने तारा चंकी रहा लची
- 15:03–15:11यात्रा में बहुत दूर आवी गेला पर आप पिताक बहुत थेज चलबा कारन अंकिता ठाएक कच्तमसाए तची
- 15:11–15:12गुस्सा करेता ची
- 15:12–15:15बच्चा चेक ताकित जीभे करत्
- 15:15–15:15बलकुल
- 15:15–15:18मुदे एते पिता अख्रापर क्रोदित नहीं होई चाती
- 15:18–15:20डाटेत नहीं चाती
- 15:20–15:24उनकर सनेहपुरन उतर सुनक अंकिताक शिकाइत
- 15:24–15:25तिरोहित
- 15:25–15:26मैं गाई बहजाता ची
- 15:26–15:29अनतत इप पऊलक
- 15:29–15:33यहनी पेदल यात्रा आपन पडाव गरग द्वार पर पूँचेत अची.
- 15:33–15:40यहते पिता आ पुत्रिक समबन्धख जि मदूरता आ सन्तूलन देखायल गे लगे लगजजब कर ची.
- 15:40–15:44इग वल एक ता कथा खिस्सा नहीं आज मुजल ये,
- 15:44–15:46बलकी इस सहानु भूतिपूरन शिक्षन
- 15:46–15:49जक्रा आमपात्तिक पेटगोगी कहत्छी
- 15:49–15:51उकर प्रती कछी
- 15:51–15:52सहानु भूतिपूरन शिक्षन?
- 15:52–15:55रहा पिता बच्चाग गती
- 15:55–15:57उकर पेस के भुजगय चती
- 15:57–15:59शिक्षन में सबसे बडा भूली होए चे
- 15:59–16:03ज़ शिक्षक चाहे चिन ज़ चात्र हुंकर गती ससीक है
- 16:03–16:07मुदा एते पिता अंकिताक �theqavat अक्रोद के भुजहे च्छती
- 16:07–16:10अ अक्रा सनेस समजवाई च्छती
- 16:10–16:13जे तेस चलास जल्दी गर पहुच का आराम भेटत
- 16:13–16:14इत बहुत निक तरीका लें
- 16:14–16:18इब्हावनात्मक सुरक्षा इमोशनल सेझ्टी
- 16:18–16:20शिक्षा लेल बहुत आवश्षेव अची
- 16:20–16:23जब बच्चा दरल रहत वत तनाव में रहत
- 16:23–16:27तम मस्तिष्ख को कोटी सोल हारमों बड़जाई तची
- 16:27–16:30जे सिख्बाक की क्प्रक्रिया के अव्रुद्द कर देताई एग
- 16:30–16:36आज ए इ गती बहवनात्मक सुरक्षा और अंतिम लक्ष्दरी पहुच्बाक बात कहली एं,
- 16:36–16:42त, आँ, हम्रा इ पुरा यात्रा कोनो आदूनिक वीटियो गेमक दिसाँन जगा लगे तची.
- 16:42–16:47वीटिट्यो गेम ये तुल्ला तनी के स्पष्ट करू बहुत रोच़प लागी रहा लागी रहा लागी
- 16:47–16:51देखू आजु कालग जे वीटियो गेम होई तची
- 16:51–16:58उकर दिजाईन एहन होईताची, जे खिलाडीक शुरूसा अंत्यदरी एक ता फ्लो स्थेट मे राखजाईताची.
- 16:58–16:59फ्लो स्थेट.
- 16:59–17:02अआ, माने, गेम में चोट-शोट चुनोती होईताची,
- 17:02–17:05मुदद खिलाडीक के यी विष्वास होईताची,
- 17:05–17:08जे जव उ गल्ती करेत तप कुनो पएक सदान ही भेटत
- 17:08–17:10ये एक ता सुरक्षित परीवेश
- 17:10–17:13सेझफ इनवाईन मेंट तू फेल होई तची
- 17:13–17:15आच्छा माने गल्ती करबाक छुट आच्छे
- 17:15–17:19भिल्कुल आज्चकन खेलाडी कुनो लेबल पार करे तची
- 17:19–17:22तदम वस्तिष्क में दोपमाइन रिलीज होगी तची
- 17:22–17:25जे उक्रा आव्र आगु खेलबाकले प्रेटिद करे तची
- 17:25–17:27रहा, दोपमाइन रिवार्ड लूप
- 17:27–17:30इग दम यह, तद एही पूठी में सो हो,
- 17:30–17:33अख्छर यान, कुनो परिक्च्छक तनाव,
- 17:33–17:35तेस्ट अंजाइती नहीं आचे.
- 17:35–17:39इई इक ता वीटिएँ गेम के अंतिम बोस लेवल पार करब जा का चे.
- 17:39–17:42जते अंत में कुनो मान्सिक दबाव नहीं आचे,
- 17:42–17:45बलकी इक ता पूरनताक अहसास आची.
- 17:45–17:48जकन यात्रा आपन प्डाव पर पहुचे थचे,
- 17:48–17:53तो अंकिता के एक भीत्रिया हर्षन, मने अनन्द भेटे तचे,
- 17:53–17:56शिक्चा एक ता दोपा मिनरजिक लूप बनी जायत थचे,
- 17:56–18:00जते सिक्नाई एक ता अनन्द दाया गतनी दी बनी गेला चे.
- 18:00–18:04वाज, यी बहुत सुन्दर अव वेग्यानिक रूपा केनालोजी आचे,
- 18:04–18:34अगर पर बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ा�
- 18:34–19:04अँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ ब�
- 19:04–19:34तब थाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद
- 19:34–19:37पोथिक जे अंतिम शिक्षक अक तिपनी आचे,
- 19:37–19:40उईकर मुल दर्षन किसे अई स्पष्ट करे तचे?
- 19:40–19:42उही तिपनी में आहिन कि आचे जे एतिक महतुपूरन आचे.
- 19:42–19:45उही में स्पष्ट रूप से लिखा लगा लगे,
- 19:45–19:48जे इपो थी एक ता टेम्पलेट मात्र आचे
- 19:48–19:51इकोनो अंतिम शब्द कोश नहीं आचे
- 19:51–19:53जक्रा पत्धर का लकीर मानी लेल जाए.
- 19:53–19:56आच्छा मने इबस इक ता उदारन आचे.
- 19:56–20:00आच्छा आबिबावक आशिक्षक लोगनी के प्रिरित करेक तचे
- 20:00–20:05जे आहां आपन बच्चाक शम्ता और गती खिसाप सा नव-नव किस्सा गडूं
- 20:05–20:09आपन चारू का तक परिवेश सा नव-शब्द उठाओ।
- 20:09–20:11आब बच्चाके शबद का बंदार दिय,
- 20:12–20:15प्रतेक बच्चाक सिख्वा गती अलग होगता ची,
- 20:15–20:18ते देर्ये होनाे बहुत आवष्यक अची
- 20:18–20:21इक ता अपन ठेड़ शिक्षन विदिय अची
- 20:21–20:23इजे तेम्पलेटक बात हैच
- 20:23–20:26इस समपून विमर्षक निशकर्ष जका अची
- 20:26–20:28इगहेर विष्लेशन के समेटेत
- 20:28–20:30इस पश्ट रूपिन भुज्याइत अची
- 20:30–20:33तची जी इस सिद्धानत केवल बच्चाक लेल ने आची?
- 20:33–20:34एक दम नाई.
- 20:34–20:35इघम नाई.
- 20:35–20:38इघम ना आपासन वेस्खु लेल उत्बे प्रासंगी कची.
- 20:38–20:42हम सब जीवन कोन नकोन मुडपर किचु नव सिख्ठ तराई ची.
- 20:42–20:45चहे उ कोन नव भाशा सिखनाई हो,
- 20:45–20:48कुנו नव प्रविधि टेकनौलगी वा सुझ्वर सिक्नाई हो,
- 20:48–20:51वा अपन पेशा मे कुनो नव कोशल हसिल करब हो.
- 20:51–20:54बलकोल, सिक्नाई तजीवन बहर चलए तची.
- 20:54–20:56कुनो नव चीच सिक्बाक लेल,
- 20:56–20:58उक्रा केवल रटबाक,
- 20:58–21:00वा नीरस मैनूल पडबाक दबला,
- 21:00–21:06या उख्रा कुनो कता कुनो यात्रा वा आपन दैनिक जीवनक संदर्ब सजोडी लेल जाए,
- 21:06–21:10तम वस्तिष्क में जानकारीक अवर लोड नहीं ताची.
- 21:10–21:13ग्यान जखन अनुबहो किस्षा बनी जाए तची,
- 21:13–21:15तचन औग कही यो भिस्रएइत नहीं अची.
- 21:15–21:18इक्दम सतीक निष्कर्ष निकालनों आहा,
- 21:18–21:22संदरभ वो कोंटेक्स्टी उ जादूई तत्वाची,
- 21:22–21:25जि कोरी जानकारी के स्थाई ज्यान में बडलेत अची.
- 21:25–21:28और आई एही कारिक्रमक अंद करे तकाल,
- 21:28–21:31हमर मुन में इक तक गमभीर अ विचारो तेजक प्रष्नाई भी रहलते है
- 21:31–21:34जे हम सबक लेल सोच्बाक विषया जे
- 21:34–21:36विचारो तेजक प्रष्न उकी अचे
- 21:36–21:40प्रष्न इची जे जो भाभ देकीक सांचक एक ता सादारन तहलनी
- 21:40–21:44खेत, पतार, देखब, आपस में गप्षव करब
- 21:44–21:47पुर्न वर्न माला सिखाईबाक एक ता एहन सशक्त
- 21:47–21:49आम मनो विग्यानिक माद्धिम बनी सकेत अछी.
- 21:49–21:53तहामर सबख देनिक जीवनक आन सादारन काज़ सब हमे
- 21:53–21:55कितेक पैग समभावना नुकाए लची.
- 21:55–21:55जैना की?
- 21:55–22:03जिना बानस गर में काजकरव, सबजी भजार जेनाई, बंक काजकरव, वा अंगर में बैस कगब करव,
- 22:03–22:15की यी सब केवल सादारन काजची, वा एी रसायन शास्तर, वर्त शास्तर, अ समाच शास्तरक व्यावाहार एक प्रयोग शाला, प्रक्तिकल लेबौरेट्री अची.
- 22:15–22:18इतब बहुत गहिर बात कही दिलिया हैं?
- 22:18–22:20की हम सब आपन देनिक जीवन का
- 22:20–22:23ओई आपार समभावना का पूरा उप्योख करहल ची
- 22:23–22:28वा उक्रा केवल एक ता काज भूजी का अन्देखा कोरहल ची
- 22:28–22:31इवास्तमे एक ता गंभीर चिंतनक विषया आची
- 22:31–22:36अम सब सिक्षा के मात्र विद्ड्ड्यालै का चारी दिवालाग भितर का वस्तुमान लेलो ची
- 22:36–22:42जखन की हमर दिनचर्या के प्रतेक छोट चीन काज में एक ता पैग ग्यान नुकाल चे
- 22:42–22:45आवशकता अची केवल उही द्रिष्टी के विखसित कर बाक
- 22:45–22:52त्हिक अंकिताक पिताजका, जे एक ता सादारन तहलनी के जीवनक सबसे पैक पाथ में बडल दिलनें.
- 22:52–22:53बलकल.
- 22:53–23:02त्हि विचार हम सब कर लेल एक ता आवाहन अची जे आपन चारू का तक दून्यां के एक ता नव नजर्या सा देखवा शुरू करी.
- 23:02–23:07सादारन काज में नुकायल असादारन ज्यान के पहचान बाग प्रयास करी.
- 23:07–23:10एही गहीर विस्लेशन में आए एतबे,
- 23:10–23:14नव विशै अन नव अनवेशनक संगे पुनह गबष़ब होईत.
- 23:14–23:21तावद्धरी आपन्चारु का देखत रहूँ आज्जीवनक आही यात्रा मे जियानक अनुबहव कराइत रहूँ
Plain text
अगर पहिल पन्ना से लएक अन्तिम पन्ना दरी रडी जाओ, कारन इब हविश्ष्ख लेल बहुत आवष्ष्ख आची. भारी बर्क्म दिक्शनरी कोनो वेक्तिक हाथ में दहरा देल जाए. ता जाही बाशा सा हूंका कोनो पोर्व परिज़े नहीं होए. बलक्ल एक दम अजनवी बाशा अद्खन कहल जाए जे एकर पहिल पन्ना से लएक अंतिम पन्ना दरी रडी जाओ कारन, इब हविश्षक लेल बहुत आवष्ष्ष्ख आजी उता कोनो भी वयस्क व्यक्तिक लेल से हो, मैंने, बहुत नीरस आए एक तरा से असमबव जगा लागत एक दम असमबव लागत मुदा, जो हम सब गमविरता से विचार करी, तुम सब आपन चार पाज वर्षक बच्चक संगे प्राया यहे करे चीना? आप, एक दम सही दीशा में जारयल ची आप. मने जखनुक्र वरन मालाक पारमपर एक पोठी दھराए का, असे अनार, असे आम रटबाक किल बादि किल जाचे, तो उकर चोर चोर चीन मस्तिष्क लेल उएक ता अग्याड दिक्षनरी रत्बाक समानी होईता ची. बलकुल होईता ची. कारन दिख हो. बच्च्याक मस्तिष्क कोनो खाली सलेट ता नहीं जी उईपर कोरी तत्थ्थ्या लिक देल जाए आउ याद कर लित. अग! माना मस्तिषक कविकास लाको वर्ष क्रम् में बहल अचे और इविकास माने तत्फ्यव वकुरो सुची रत्बा के लिल नहीं बलकी अनुबव, कत्ठा आ आपन चारू कातक परीवेष से जुदबा के लिल बहल अचे जेक्रा हम संदरभवा कुन्तेक्स्ट कहें चे हाँ, कुन्तेक्स्ट सादारन तेया लोक मानी लेट चतीन जे किचु नव सिखबाक अर्ठ आचे बारी बरकं पोती, रटब, अब बहत रास मान्सिक तनाव मुदा शिक्षा जकन कोनो साख्षात अनबवव से जुडजाईता चे तकनो भोज ने रही जाईता चे आमस्तिष को ही जानकारी के बहुत सहज्ता सो ग्रेंग कर लेता चे आई यहे कारना चे जे आई हम सब जे गहीर विष्लिषन करवा जारोहल ची उ शिक्षाक एही मनोवे ज्यानिक पक्ष्के उगारी का सामने राक्ध. बहुत रास नव बाज सामने आप आबाए चे आए. एक दम. ता आई हमर सब के विशाय आची, गजें़र ताकृवर द्वारा रचित, बाल उपन्यास, वरन माला शिक्षा अंकिता. इविदे ही पत्रिकाक अंतर्गत प्रकाषिद भेल अचे आएकर ISBA नम्बर से हो दर्ज अची जे प्रमानित करेट अचे जे इखुनु सादारन प्रयास नही आची बलकी एक ता गंभीर सहिथ देक आ अकाद्मिक काज देक मुता मैं, नाम सजेहन बुजहाई तो ची, इक नो सादारन अ आ ए ए रटाभे वाला नीरस पोती नहीं आचे. इ अंकिता आ अकर पिता के एक ता साजकर तहलनी, यानी एक ता सहथ यात्रा कता थेक. या एक अर सब से रोचक बात आचे. अदूनु गोते बस ताल रहन च्हती आईही यात्राक माद्यम सब मेठली वर्ण माला मने अस लेका होदरी सीक्छे बाक एक ता अदबूत आप रचनात्मक प्रयास के लिए ला ची जिना कोनो बच्चा के कलवा औशदी ख्वाबेत काल अखरा मिठाएक भीच में उका का दिल जाएच है, नहीं? रहा रहा बिलकोल तीक ताने इपोति, नीरस वरन्माला रत्बा काज के एक ता सुन्दर कताक चाशनी में लपेटी का प्रस्थूत करे ताचे दिको आईही पोथिक विषलेशन करे तकाल जे बात हमर द्यान सबसे भेशी खीचलक उई आचे जे एते वनमाला केवल अख्षर ज्यान नहीं आची एक टा गतना करमक मने एक ता पुरा श्टोरी लाईन के हिसा आचे बिना स्तोरी लाईनक तबच्चा उभी जाएत? एक दम उभी जाएत. विग्यानी प्रमानित कर चुकल अचे बिना सन्दर भग देलगिल जानकारी मस्तिष्कक शोट्टम मेमरी में किचु काल लिल रही तजाएत जे उगरा बाद साफ इलकुल तव एप उठी के जे मुख्य मिशन अचे उगे आच जे शिक्षाक प्रक्रिया के एक तए एहन सहथ यात्राक रूप देल जाए जदे बच्चा के इबहान दरी नहीं होए एक ता एहन सहज यात्राक रूब तेल जाए, जदे बच्चा के इभान दरी नहीं होए, जो किच पडी रहलाचे वो कुन तेयारी करो रहलाचे. इजे अनुबहव आदारित शिक्षाक बात हां कहली, उक्रा एही कता का आरंभ से ही, बच्च्ट रूपन देखाल जासकता ची खदाख श्रवात बहुत स्वाबविक दंष होई तची याज़ याज़ चानज का समया ची याज़ चानज का समय अंगिता आपन पिताख संगे तहल बाले बाहर निकले तची एह ते समय के अकादारून कहल गेल जे मैं आसमान्या रस्ता में चलत-चलत बच्चाक जी स्वाबहविक प्रव्रती होई चे वोकर पेर दुखा जाई तचे वो अवाच यान थाकेल भोजाई तचे देखदम भाल सुलब जित्रन अचे भिल्कुल फिर वोकर चंचलता देखू उएक ता लाल्ली मने मिठाई देखाई तची, अज़िद करी तची जे उक्रा उहे चाही. पिता मना करे चती जे अकर दखर मने फाल तु चीज नहीं कहु. इता हर गर के कहानी आचे. रागु बधाला पर उसब भून जाकूर में लागल आगे देखाई चतिन, जखरा पिता अगिन्वान कही चतिन और जे गाछ नहीं जर लची उक्रा अखच खाल गल अची इसब दिश्षत बहुज जीवन्त अची मुदा, हमरा एक ता पाएग विसंगती बुचाए तचे विसंगती? उखुना? मने, हमर इस वची रहाल ची जि अकादारों, अवाच, अकर दखर, अगिन वान, अखखज, इस भ इते क बारी बरकम, तेट अ किचु हद्दरी क्लिष्ट शब्द ची. राद, सादरन बोल चाल में कम प्रयोग होई तची. तजा रहम कुनो चार पाच वरस के बच्चा के वरन माला सिखार रहल ची, बच्चा के एक्ता कताक लालच दध का वास्तों मुक्रा एक्ता कतिन शब्द कोश रटाबेलन पसाने रहल ची. एक रासत बच्चा दिखब्रहमित मने कन्फुस भहुज बहुज भहुज के तचे. दिक्हु इस सन्दे प्रथम न्रिष्ट्या बहुत उचित लगे तची आप राया हा बहुत राश शिक्षा विद्से हो यहा तर्क देच्छत्छी जे बच्चाके एक दंज़ सरल से सरल चीज दिल जाए मुदाया दे यस संज्यानात्मक मनो विग्यान मने कोगनेटिः साइकलोघगी का एक ता बहुत सुख्ष्म सिद्धान्त काज कोर रहा लगची आच्छा उसिद्धान्त की कहेत आची हम सब मान लेच छे जे बच्चाक्मस्तिष्क जटिल्ता के नहीं समजी सके तची जखन की वास्तव में बचाक मस्तिषक, कतिन वा सरल शब्दक भीचक भेद जाने ते नहीं आची. ओ, माने उख्रा लेल सब शब्द बराभर आची. बलकल, उख्रा लेल आम आगिन वान दूनु नव ध्वनी मात्र आची. समस्या शब्दक जटिल्ता में नहीं आची, बुजेलिय, समस्या संदर्व का अबहाव में आची. मतलब आईहा को कहा बची जे बच्चा लेल कोनो शब्द भारी वहल्का नहोगे तची, मात्र परिचित वह अपरिचित होगे तची. इक्दम सही पगल लूहा जखन अंकिता जंगल में लागल आगी के साख्षाद अपन आखी से देख़े तची तचन उकर मस्तिष्कक जे एमिक्डला आची एमिक्डला एकी होई तची इमस्तिष्कक उहिस्सा चैई जि बहावना आ उत्टेजना के निंट्रित करे तच्छे तच्छन अ आगी देखा तच्छे उकर इमिक्डला सक्रीए ब हो जाए तच्छे आगीक गर्मी, दूवाक गन्द अव विशाल द्रिष्छ इस सब मिली का एक ता प्रासंगेख स्म्रिती यानी अप्सोडिक मेमरी का निर्मान करे थाची अच्छा माने उपुडा द्रिष्च दिमाग में चबी जाई थाची अद्तक्हन जगन पिताओ कर अगिन्वान कही च्छतिन तो उशब्द मात्र एक ता रट्बाक समगरी नोर रही जाई थाची उवह उही समपूरन अनबवक एक टा लेबल बनी जाई तची मस्तिषक एह शब्द के वही द्रिष्ष्ट्च्संगे जोड कब हिप्पो कैमपस में सुरक्षिट का लेई तची तई फसाएब वह कन्फुज करव नहीं थिक बलकी ग्यान के सीथा सनायु तन्त्र, नर्वस सिस्तम का अनुबव से जोडब थी. इजे प्रासंग एक सम्रितिक बात आहा कहली ए, इवास्तों में बहुत तार्कि का ची. माने रटबाग बद्ला में जखन कोनो शब्द द्रिष्ष सामने हुई तची, तो उस्मरन शक्ती में गेराई से पवेज जाईता ची. एक दम जना आगु चली का हम कता में देखेची, अंकिता ताकी का उक्रु आसन में बएस जाईता. उक्रा उखी भिख्षी माने बेचैनी लागे लगे चे, उका पात में उका पतंग देखेटा. आओ उगुस्सी वला प्रसंग? दिलकुल. पिता उक्रा उगुसी से बच्वाक सलादे चाती उविशाक्त लत्ती जक्रा चूवे सा नोचनी होए चे इसब कत दक जीवन्त द्रिष्ट आची जक्रन बच्चा उगुसी क्नोचनी कलपना करत तो उश्वद जीवन भरी नहीं भीसरत. कहीो नहीं भीसरत. आई ही पोती है कि ता और गंभीर मनोवे ज्यानिक पक्ष छ़ची जे करा हम एते रेख हंकित करे चाब. आब दो. प्रतेक अद्याय का अंत में जे प्रश्नोथर देल गेल आची उ मात्र पन्ना ब्र्वाक लेल वा कोनो परमपरा निर्वाह करवाक लेल नहीं आची जेना अप्रश्न आची समय कहनचल आउतर अची अकादारुन वा बच्चाक नाम की ची उतर अची अंकिता एकर बात करवल ची आजा आजा यहे इप्रश्नोत्र मनो विज्यानक सक्क्री अस्मरन, जगरा अंग्रेजी में अक्तिव रिकोल कहेता ची, अकरेक उत्क्रष्ट उदाहरन अची. इज्सक्री ये अस्मरन वा अक्तिव रिकोल की हूँए तची. एक राद तनी विस्तार स समजाओ, अम्रा लागे तखी इबहुत काजक चीज आची. देखो, सादारन रूपेन, जगन हम कोनो ची सुनेट ची वा पड़ाइत ची, तन मस्तिषक जानकारी के निषक्री रूप सब भीतर लगल होगता ची, पैसिव तरीकसव. माने भस सुनी रहल ची. अग, मुदा जगन कोनो प्रष्न पुछल जाईत अची, तकन मस्तिषक के, भीतर सव ओही जानकारी के खोज कब बाहर निकाले पडे तची. एही निकालबाक वर रिट्रीव करबाक प्रक्रिया में मस्तिष्कक जे सनायू मार्ग ची नूरल पात्वेज उबहुत मजबूत बहाजाई तची अच्छा बच्चा जखन कता सुनेट ची, तन उ सन्दरभ पक्रगट ची अगामक अगामक द्रिश्या आबी जाईतची अविद्याने औही पर आदारित प्रष्नक उत्तर देई तची, तो उश्वद का आर्ठ अगर मस्तिष्क में पक्कभो जाई तची. इएक ता पुरनता वेग्यानिक पद्धि आची. इप्रक्रिया तबहुत रोचक आची, मुदा कता जकन आगु बड़े तचे, अगर भाज्चत्छिन, मचान पर पहरादीत, कदेरमान च्छिन, अगामक कार्खानावा लोहारक दुकान जख्डा, कमर सारी कहल गेला जी अगर चर्चा आचे. इज्सा हमरा बहुत नीक लागल. आप, फिर अनकिता चोबपर पह पहुची चन्चल भोजाई तची, चिक्कन बाट पर चलत, चंपा का गाच देखी चीच्याई तची, अच्चान के इजोथ में रस्ता तैक रिए तची. इद्रिश्ष्च्ट्रान अट्यन्त मोहक अचे, गजेंद्र ताकृगी अटे केवल शब्दक मालाने गुठी रहे लचती. बुज्लियो उ शब्दक माद्यम सा पूरा गामक चित्रपट्थार करहे टाए चाछाछा. हम आग बात बुज्रहल ची, आई चित्रपट सुंदर सो हुए चे. मुदा, मुदा, वास्तविकता इए चे, जे आदहनिक समय में, तो आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अगर शब्दावली के सिमित नहीं करो है। अगर बदला में अगर अदूनिक दून्याक शब्द सिखाए। बेसी उप्योगी नहीं होईत की हम बच्चा के एक ता म्रित बूत कालक बोज से नहीं लादे रहो है। ये तरक बहुत व्यवावारिक लगे तची अप्रायर आदूनिक शिक्चा प्रनाली ए, यह है मानी कचलगत अची, जे वे बच्चा के उतने सिक्ठाए जाए, जे वो कर रोज मर्रा के जीवन में काजावे. मुदा भाशा विग्यान और समाज्शास्त्र की द्रिष्टी से सोचब तए इस्तिती भिन्बुजायत. भिन्खोना. करन भाशा केवल सोचनाक आदान प्रदानक सादन माने, यूटिलिती नहीं अची. भाशा एक ता ताईम क्याप्सूल अची, अवाशा एक ता ता ताईम काईशूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आप्सूल आ अग, उगर उगर गाँउगाउगाउगाउगी अगी आत्मनिरभर व्यवस्ताक ज्यान से वनचित करहल ची, जते क्रिषिक उपकरन बनेच्छल, जते गामुक लोग बाइस का गबषषप करेच्छल. अग, इब आत्ता ची. बल की आहा उक्रा गाउक्रा उही आत्मनिरभर व्यवस्ताक ज्यान से वन्चित करहल ची जताए क्रिषिक उपकरन बनेट चल, जताए गामुक लोग भाईस का गबशव करेच चल. आ, इबात टा ची. जखन शेहरक बच्चा मचान पर भीसल कदेर मान शब्द सुनत तो लाजमी तोर पर पुषद जे इमचान की होई तचे. अद्तकन अभी बहवकक डईत्व बनेत जे उ उक्रा खेतेग, मार्टेक और राती में उगरभाद वारा फसल कर रक्षा कर बाक कता सुनोता. ये क्ता बहुत नवद्द्रिष्टि कोन अची. मतलब ये थेट शबद केवल वन्मालाने सिखा रहा लची. बलकी ये एक त्या उपकरन अची, जे शेहरी पीडी और हुनकर फ्रामीन जडिग भीच के तुटल पूल के फेर सबना रहा लची. बलकी ये एक त्या उपकरन अची, जे शेहरी पीडी और हुनकर फ्रामीन जडिग बीच के तुटल पूल के फेर सबना रहा लची. बलकुल यहे काज करहा लखछी जना कता में तोलक ताबनेवो का गाचक चर्चा आची गराम देवता वा कहबार अस्थान पजराय दीबख कबात आची आ अन्त में बुख लागला पर पिता दोरा तत्वा रोटी बनेबाक आश्वासन आवे रहा लखछी जै यी शब्द समाप्त बहुजात, तेकर संगे कहबार का वास्ता, ताबनेबो का उ गाचक चायोर, अटत्ट्वा रोटी का उ स्वाद सोब विलुक्त बहुजात. एक दम ते यी शब्दावली के सीमित करव नही आची, बल की बच्चाक साँस्क्रतिक जडी मने कल्च्रल रूट्स के मजबूथ करा बच्ची जाई गाचक जडी गहीर नी होई तेची उछ़ छोड छीन आनी में खसी पडे थची बलकुछ सही कहलीे आदूनिक दून्याक शब्दत बच्चा इस्कुल, तीवी अ इंट्रन्ट से सीके लेद, मुदा तत्वा रोती, अग कहबार जका शब्द, उक्रा केवल अपन माथी से बहेतत. इग ग्रामे जीवन अख्रिषिक परमपरा के नुव पीडिक स्म्रूती में, सुरक्षित कर्बाक एक ता बहुत सचेत प्रयास थीक इगव्त हमरा सोचे पर मजबूर कर रहा लगची जे भाशा वास्तो में कते कषक्ती राके तची आव जो हम इज यात्रा क्गती मने पेसिं अन्तिम चरन पराभी कता अपन चरम क्लीमेख्स पर पहुची रहा लची राती बहगे लची अकाश में तरेगन मने तारा चंकी रहा लची यात्रा में बहुत दूर आवी गेला पर आप पिताक बहुत थेज चलबा कारन अंकिता ठाएक कच्तमसाए तची गुस्सा करेता ची बच्चा चेक ताकित जीभे करत् बलकुल मुदे एते पिता अख्रापर क्रोदित नहीं होई चाती डाटेत नहीं चाती उनकर सनेहपुरन उतर सुनक अंकिताक शिकाइत तिरोहित मैं गाई बहजाता ची अनतत इप पऊलक यहनी पेदल यात्रा आपन पडाव गरग द्वार पर पूँचेत अची. यहते पिता आ पुत्रिक समबन्धख जि मदूरता आ सन्तूलन देखायल गे लगे लगजजब कर ची. इग वल एक ता कथा खिस्सा नहीं आज मुजल ये, बलकी इस सहानु भूतिपूरन शिक्षन जक्रा आमपात्तिक पेटगोगी कहत्छी उकर प्रती कछी सहानु भूतिपूरन शिक्षन? रहा पिता बच्चाग गती उकर पेस के भुजगय चती शिक्षन में सबसे बडा भूली होए चे ज़ शिक्षक चाहे चिन ज़ चात्र हुंकर गती ससीक है मुदा एते पिता अंकिताक �theqavat अक्रोद के भुजहे च्छती अ अक्रा सनेस समजवाई च्छती जे तेस चलास जल्दी गर पहुच का आराम भेटत इत बहुत निक तरीका लें इब्हावनात्मक सुरक्षा इमोशनल सेझ्टी शिक्षा लेल बहुत आवश्षेव अची जब बच्चा दरल रहत वत तनाव में रहत तम मस्तिष्ख को कोटी सोल हारमों बड़जाई तची जे सिख्बाक की क्प्रक्रिया के अव्रुद्द कर देताई एग आज ए इ गती बहवनात्मक सुरक्षा और अंतिम लक्ष्दरी पहुच्बाक बात कहली एं, त, आँ, हम्रा इ पुरा यात्रा कोनो आदूनिक वीटियो गेमक दिसाँन जगा लगे तची. वीटिट्यो गेम ये तुल्ला तनी के स्पष्ट करू बहुत रोच़प लागी रहा लागी रहा लागी देखू आजु कालग जे वीटियो गेम होई तची उकर दिजाईन एहन होईताची, जे खिलाडीक शुरूसा अंत्यदरी एक ता फ्लो स्थेट मे राखजाईताची. फ्लो स्थेट. अआ, माने, गेम में चोट-शोट चुनोती होईताची, मुदद खिलाडीक के यी विष्वास होईताची, जे जव उ गल्ती करेत तप कुनो पएक सदान ही भेटत ये एक ता सुरक्षित परीवेश सेझफ इनवाईन मेंट तू फेल होई तची आच्छा माने गल्ती करबाक छुट आच्छे भिल्कुल आज्चकन खेलाडी कुनो लेबल पार करे तची तदम वस्तिष्क में दोपमाइन रिलीज होगी तची जे उक्रा आव्र आगु खेलबाकले प्रेटिद करे तची रहा, दोपमाइन रिवार्ड लूप इग दम यह, तद एही पूठी में सो हो, अख्छर यान, कुनो परिक्च्छक तनाव, तेस्ट अंजाइती नहीं आचे. इई इक ता वीटिएँ गेम के अंतिम बोस लेवल पार करब जा का चे. जते अंत में कुनो मान्सिक दबाव नहीं आचे, बलकी इक ता पूरनताक अहसास आची. जकन यात्रा आपन प्डाव पर पहुचे थचे, तो अंकिता के एक भीत्रिया हर्षन, मने अनन्द भेटे तचे, शिक्चा एक ता दोपा मिनरजिक लूप बनी जायत थचे, जते सिक्नाई एक ता अनन्द दाया गतनी दी बनी गेला चे. वाज, यी बहुत सुन्दर अव वेग्यानिक रूपा केनालोजी आचे, अगर पर बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ा� अँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ ब� तब थाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद्टाई विद पोथिक जे अंतिम शिक्षक अक तिपनी आचे, उईकर मुल दर्षन किसे अई स्पष्ट करे तचे? उही तिपनी में आहिन कि आचे जे एतिक महतुपूरन आचे. उही में स्पष्ट रूप से लिखा लगा लगे, जे इपो थी एक ता टेम्पलेट मात्र आचे इकोनो अंतिम शब्द कोश नहीं आचे जक्रा पत्धर का लकीर मानी लेल जाए. आच्छा मने इबस इक ता उदारन आचे. आच्छा आबिबावक आशिक्षक लोगनी के प्रिरित करेक तचे जे आहां आपन बच्चाक शम्ता और गती खिसाप सा नव-नव किस्सा गडूं आपन चारू का तक परिवेश सा नव-शब्द उठाओ। आब बच्चाके शबद का बंदार दिय, प्रतेक बच्चाक सिख्वा गती अलग होगता ची, ते देर्ये होनाे बहुत आवष्यक अची इक ता अपन ठेड़ शिक्षन विदिय अची इजे तेम्पलेटक बात हैच इस समपून विमर्षक निशकर्ष जका अची इगहेर विष्लेशन के समेटेत इस पश्ट रूपिन भुज्याइत अची तची जी इस सिद्धानत केवल बच्चाक लेल ने आची? एक दम नाई. इघम नाई. इघम ना आपासन वेस्खु लेल उत्बे प्रासंगी कची. हम सब जीवन कोन नकोन मुडपर किचु नव सिख्ठ तराई ची. चहे उ कोन नव भाशा सिखनाई हो, कुנו नव प्रविधि टेकनौलगी वा सुझ्वर सिक्नाई हो, वा अपन पेशा मे कुनो नव कोशल हसिल करब हो. बलकोल, सिक्नाई तजीवन बहर चलए तची. कुनो नव चीच सिक्बाक लेल, उक्रा केवल रटबाक, वा नीरस मैनूल पडबाक दबला, या उख्रा कुनो कता कुनो यात्रा वा आपन दैनिक जीवनक संदर्ब सजोडी लेल जाए, तम वस्तिष्क में जानकारीक अवर लोड नहीं ताची. ग्यान जखन अनुबहो किस्षा बनी जाए तची, तचन औग कही यो भिस्रएइत नहीं अची. इक्दम सतीक निष्कर्ष निकालनों आहा, संदरभ वो कोंटेक्स्टी उ जादूई तत्वाची, जि कोरी जानकारी के स्थाई ज्यान में बडलेत अची. और आई एही कारिक्रमक अंद करे तकाल, हमर मुन में इक तक गमभीर अ विचारो तेजक प्रष्नाई भी रहलते है जे हम सबक लेल सोच्बाक विषया जे विचारो तेजक प्रष्न उकी अचे प्रष्न इची जे जो भाभ देकीक सांचक एक ता सादारन तहलनी खेत, पतार, देखब, आपस में गप्षव करब पुर्न वर्न माला सिखाईबाक एक ता एहन सशक्त आम मनो विग्यानिक माद्धिम बनी सकेत अछी. तहामर सबख देनिक जीवनक आन सादारन काज़ सब हमे कितेक पैग समभावना नुकाए लची. जैना की? जिना बानस गर में काजकरव, सबजी भजार जेनाई, बंक काजकरव, वा अंगर में बैस कगब करव, की यी सब केवल सादारन काजची, वा एी रसायन शास्तर, वर्त शास्तर, अ समाच शास्तरक व्यावाहार एक प्रयोग शाला, प्रक्तिकल लेबौरेट्री अची. इतब बहुत गहिर बात कही दिलिया हैं? की हम सब आपन देनिक जीवन का ओई आपार समभावना का पूरा उप्योख करहल ची वा उक्रा केवल एक ता काज भूजी का अन्देखा कोरहल ची इवास्तमे एक ता गंभीर चिंतनक विषया आची अम सब सिक्षा के मात्र विद्ड्ड्यालै का चारी दिवालाग भितर का वस्तुमान लेलो ची जखन की हमर दिनचर्या के प्रतेक छोट चीन काज में एक ता पैग ग्यान नुकाल चे आवशकता अची केवल उही द्रिष्टी के विखसित कर बाक त्हिक अंकिताक पिताजका, जे एक ता सादारन तहलनी के जीवनक सबसे पैक पाथ में बडल दिलनें. बलकल. त्हि विचार हम सब कर लेल एक ता आवाहन अची जे आपन चारू का तक दून्यां के एक ता नव नजर्या सा देखवा शुरू करी. सादारन काज में नुकायल असादारन ज्यान के पहचान बाग प्रयास करी. एही गहीर विस्लेशन में आए एतबे, नव विशै अन नव अनवेशनक संगे पुनह गबष़ब होईत. तावद्धरी आपन्चारु का देखत रहूँ आज्जीवनक आही यात्रा मे जियानक अनुबहव कराइत रहूँ