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महुआ_घटवारिनक_गाथा.mp4

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:05नमस्कार, आए हम सब गजिंद्र ताकृर अक्लिखल एक ता बहुत मर्मसपरषी कताक विष्लेषन करव.
  2. 0:05–0:09इग खता चे परमान नदीक किनार पर गुजेत महुवा गत्वारिनक,
  3. 0:09–0:12एक ता एहन्त रास्ती पून मुदा आमर प्रेमक गाता,
  4. 0:12–0:16जे कख्रो जग्जोरी सकईत चै, इकोनो सादारन गपना ही चै,
  5. 0:16–0:23इक इक ता गरीभ, विवष कन्याक, अपन प्रेम अ स्वाभिमानक लेल देलगेल प्रानक अहुतिक साएक्ष्ठ थेक,
  6. 0:23–0:27ता आओ, बिना कोनो देरी के, एही कता गेराई में प्रवेश करी.
  7. 0:27–0:57तराज़िक इटावनी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज
  8. 0:57–1:03अपना उबवावा एक पविट्र अविवष्ता से नहीं जाए ता इपविट्रता हुँगर व्यक्तितवक सबसे अन्मोल आबहुषन चल.
  9. 1:03–1:08मुदा जदे महुवा एतिक पविट्र अविष्ता साभभरल चल.
  10. 1:08–1:12बाज्री नहीं बलकी हुंकर सतित्वा और अदिग चरित्र चल
  11. 1:12–1:17एह रहुंग। जे कोनो प्रलोबहन वो विवष्ता से नहीं डोलिच चल
  12. 1:17–1:22सच कहल जाए तए पवित्रता हुंकर व्यक्तित्वक सब से अन्मोल आबूशन चल
  13. 1:22–1:30उद्याँ ज़े महुवा एतिक पवित्र असतित्व साभरल चलिये, हुंकर गर का वाथावरन उत्बे बेशी विशाक्त चलिये.
  14. 1:30–1:38इविशम्ता देखवा योग्या चे. बाप, गानजेरी, अशराभी, नशामे दूबल, अपन कोनो करतव्यक भान नहीं.
  15. 1:38–1:43अम्माय, उ सत्माय चली, नज्री चोर, स्वार्ती और एक्द मम्ता विहीन.
  16. 1:43–1:46आईईविशम्ता कारन महुवाक सोला बरखके उमेर में,
  17. 1:46–1:49उ गर एक्ता यातनागरे बनी गेल चले,
  18. 1:49–1:53जते हुंकर व्यावखख वा भविश्ष्ष्ख चिन्ता कक्रू चलेन है.
  19. 1:53–1:59एह संगर्षक्बीज सावन भादोक उही अन्हार रात में एक ता भयानक संकेद भिटाइत चे
  20. 1:59–2:04इह उही गतनाक शुवाच चे जटे एक ता बहुत क्रूर श़्यान्त्र रचल जाइत चे
  21. 2:04–2:07गाथ पर एक ता अपरच्चित व्यक्ती उत्रल चल
  22. 2:07–2:13आसत्माए आपन लोब आप आईसा में अन्नार भखे महुवाके रातेग बखफत में
  23. 2:13–2:16अख्रा ते लगईबाक बहाने पथेबाक योजना बने लग.
  24. 2:16–2:18महुवा कतमपी जाए नहीं चाह चली.
  25. 2:18–2:22उनका भीत्रस सकोनो अनिष्टक बयंकर शंका बहरूट्षल.
  26. 2:22–2:26नों चटा किकिये नहीं माडला, पोसला एही दिन कहातेर.
  27. 2:26–2:31इपान्ती महुवाक हिरिदै विदारक विष्वास कहात के प्रकत करएच चे.
  28. 2:31–2:33कल्पना करु उही असहायपनक.
  29. 2:33–2:37जगन उक्रा विवष कै कै यात्रा पर पथावल जारोल चल,
  30. 2:37–2:42तक्हनोकर मून में इविलाप उठल जे जे जे एही दिनकलिल पूसने रहती,
  31. 2:42–2:45तजन मैं ते नों चटा कमारी की एक नहीं देलनी.
  32. 2:45–2:48इए असहाय पन आपीडाक चरम स्तीती छे.
  33. 2:48–2:51महुवक मन एसमे कतव खंदित आद्डरल चल,
  34. 2:51–2:57उकर सहज है यान मान लगा जासकत चे, इद्रिश वो ही मानसिक उतल पुतल के दर्षावे चे,
  35. 2:57–3:03जकन महुवा अपन अनिच्छाक बादो विवश भाका क गात कर रस्तापर आगाम बड़ी रहल चली.
  36. 3:03–3:10उनकर भीट्रक खन्दित वस्था आब बाहरक ओडरावना अनहार रातिक इद्वन्द बहुथ सजीव अबभयंकर चे.
  37. 3:10–3:15मुदा एही भयानक यात्राक भीच एक तचोट सन आशक किरन सोबे चे.
  38. 3:15–3:19रस्ता में महुवाक भेट अपन सकी फूल्मती सोएक चेक.
  39. 3:19–3:49पूल्मती उक्रा दाद्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्�
  40. 3:49–3:53अज़्ाँ स्म्रती वर्त्मान रातिक भ्यानक यद्ठार्च्सं इक्डम भिन्नच्याई
  41. 3:53–3:56आर महुवाक उदास हर्दे में एक्टा सहस्प्रदान करेच्टेः
  42. 3:56–4:01इस्म्रिति हुँँगा जीवन्क उगी उदेश्षक मोन पारेच्छे, जेकरा लेल उजी वीरहल चली.
  43. 4:01–4:09आब एही गटना क्रम्पर नजर दिया, इगत्तिक तेजी सा एक तब भ्यानक धोखा दिस पड़ाइत गेल.
  44. 4:09–4:13पहले, हरकाराक गुप्त सन्देश माएक कान में कहल गेल.
  45. 4:13–4:18तकर बाद महुवा के एक ता अप परीचिट सिपाही के संग हाथ पर पथावल गेल,
  46. 4:18–4:21जक्रा महुवा निर्दोश भावस मानी लेने.
  47. 4:21–4:27और अंतता नाव पर अचानक उभ्यानक सक्तिक एहसाच.
  48. 4:27–4:33इस सबता एतेक तेजी सबहल, जकर कलपना महुवा स्वपन मेभे से हो नहीं केने चली एँ.
  49. 4:33–4:38नाव पर पहुचते इस सिपाही किक्ता कटोन गूशना, सबता पएस चुका देल गेल अची,
  50. 4:38–4:40कोनो मागनी में ना लाजा रहल ची,
  51. 4:40–4:43इगव महुवा के हर्दैके भेदी गेल,
  52. 4:43–4:46इवकर नियती क्रूर्तम मोडषल,
  53. 4:46–4:50बुजो जि सतमाइ वुक्रा चन्द पैसक्लेल बेच देने चली,
  54. 4:50–4:54इमात्रित्वाक विष्वास्गातक चरम सीमा चल,
  55. 4:54–4:58महुवा आप स्वतन्द्रे नहीं केवल एक ता खरीदल गेल वस्तूके रूप में चली.
  56. 4:58–5:02जकन महुवा के ये पूरन विश्वास गाध भूजल भेल,
  57. 5:02–5:05जे उक्रा केवल एक ता वस्तूक जका बेची देल गेल च्या,
  58. 5:05–5:07तकन हूंकर प्रतिक्रिया देख्वा योग्छ है.
  59. 5:24–5:26महुवा अदिनता स्विकार नहीं के लनही,
  60. 5:26–5:30उवापन सतित्व, अपन आत्मा, अपन प्रेमक रक्षा के लेल,
  61. 5:30–5:33अपन प्रानक आहुती देबाक निरने लेलनही,
  62. 5:33–5:35एक तक्रूर सथागरक बन्दी बन्बास नीक,
  63. 5:36–5:38उजल समादी लेब उचित भुजलनी.
  64. 5:38–5:43इआमर भलिदान उक्राएक्ता सादारन लग्की इस्स, लोक देविक रूप में स्तापित कदिलक,
  65. 5:43–5:50परमानदीक किनार पर महुवा की बलिदान आजुभ दिन्दरी एक्ता सास्क्रतिक द्ध्वरोहर के रूप में आमर चे.
  66. 5:50–6:00अन्त में इविश्लेशन एही विचारु तेजक प्रष्नक संध समाप्त होई चे, आजुक समाज आईन गहन आ आमर भलिदान के केना मोंपाडे चे, आशम्मान देचचे.
  67. 6:00–6:05महुवा खट्वारिन्नक एगाता मात्र एक्टा प्राषीन कता नहीं चे,
  68. 6:05–6:08बलक परमान नदीक किनार पर गुंजित ओ लोक गीच चे,
  69. 6:08–6:13जे आजो उकर अदम्मय साहस, प्रेम आपवित्रता की नमन करेच्छे.
  70. 6:13–6:18इगठा हमरा सब के सवबिमान कप्रती चिन्तन करवाक लेल प्रेरिद करेचे
  71. 6:18–6:21अनिष्छित रूपसे एकर गेह्राई में बहुत किछ चुपल चे
  72. 6:21–6:24जकर विषे में आए जान्बाक इच्छा जाग्रित होएचे.

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नमस्कार, आए हम सब गजिंद्र ताकृर अक्लिखल एक ता बहुत मर्मसपरषी कताक विष्लेषन करव. इग खता चे परमान नदीक किनार पर गुजेत महुवा गत्वारिनक, एक ता एहन्त रास्ती पून मुदा आमर प्रेमक गाता, जे कख्रो जग्जोरी सकईत चै, इकोनो सादारन गपना ही चै, इक इक ता गरीभ, विवष कन्याक, अपन प्रेम अ स्वाभिमानक लेल देलगेल प्रानक अहुतिक साएक्ष्ठ थेक, ता आओ, बिना कोनो देरी के, एही कता गेराई में प्रवेश करी. तराज़िक इटावनी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज़ी तराज अपना उबवावा एक पविट्र अविवष्ता से नहीं जाए ता इपविट्रता हुँगर व्यक्तितवक सबसे अन्मोल आबहुषन चल. मुदा जदे महुवा एतिक पविट्र अविष्ता साभभरल चल. बाज्री नहीं बलकी हुंकर सतित्वा और अदिग चरित्र चल एह रहुंग। जे कोनो प्रलोबहन वो विवष्ता से नहीं डोलिच चल सच कहल जाए तए पवित्रता हुंकर व्यक्तित्वक सब से अन्मोल आबूशन चल उद्याँ ज़े महुवा एतिक पवित्र असतित्व साभरल चलिये, हुंकर गर का वाथावरन उत्बे बेशी विशाक्त चलिये. इविशम्ता देखवा योग्या चे. बाप, गानजेरी, अशराभी, नशामे दूबल, अपन कोनो करतव्यक भान नहीं. अम्माय, उ सत्माय चली, नज्री चोर, स्वार्ती और एक्द मम्ता विहीन. आईईविशम्ता कारन महुवाक सोला बरखके उमेर में, उ गर एक्ता यातनागरे बनी गेल चले, जते हुंकर व्यावखख वा भविश्ष्ष्ख चिन्ता कक्रू चलेन है. एह संगर्षक्बीज सावन भादोक उही अन्हार रात में एक ता भयानक संकेद भिटाइत चे इह उही गतनाक शुवाच चे जटे एक ता बहुत क्रूर श़्यान्त्र रचल जाइत चे गाथ पर एक ता अपरच्चित व्यक्ती उत्रल चल आसत्माए आपन लोब आप आईसा में अन्नार भखे महुवाके रातेग बखफत में अख्रा ते लगईबाक बहाने पथेबाक योजना बने लग. महुवा कतमपी जाए नहीं चाह चली. उनका भीत्रस सकोनो अनिष्टक बयंकर शंका बहरूट्षल. नों चटा किकिये नहीं माडला, पोसला एही दिन कहातेर. इपान्ती महुवाक हिरिदै विदारक विष्वास कहात के प्रकत करएच चे. कल्पना करु उही असहायपनक. जगन उक्रा विवष कै कै यात्रा पर पथावल जारोल चल, तक्हनोकर मून में इविलाप उठल जे जे जे एही दिनकलिल पूसने रहती, तजन मैं ते नों चटा कमारी की एक नहीं देलनी. इए असहाय पन आपीडाक चरम स्तीती छे. महुवक मन एसमे कतव खंदित आद्डरल चल, उकर सहज है यान मान लगा जासकत चे, इद्रिश वो ही मानसिक उतल पुतल के दर्षावे चे, जकन महुवा अपन अनिच्छाक बादो विवश भाका क गात कर रस्तापर आगाम बड़ी रहल चली. उनकर भीट्रक खन्दित वस्था आब बाहरक ओडरावना अनहार रातिक इद्वन्द बहुथ सजीव अबभयंकर चे. मुदा एही भयानक यात्राक भीच एक तचोट सन आशक किरन सोबे चे. रस्ता में महुवाक भेट अपन सकी फूल्मती सोएक चेक. पूल्मती उक्रा दाद्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्� अज़्ाँ स्म्रती वर्त्मान रातिक भ्यानक यद्ठार्च्सं इक्डम भिन्नच्याई आर महुवाक उदास हर्दे में एक्टा सहस्प्रदान करेच्टेः इस्म्रिति हुँँगा जीवन्क उगी उदेश्षक मोन पारेच्छे, जेकरा लेल उजी वीरहल चली. आब एही गटना क्रम्पर नजर दिया, इगत्तिक तेजी सा एक तब भ्यानक धोखा दिस पड़ाइत गेल. पहले, हरकाराक गुप्त सन्देश माएक कान में कहल गेल. तकर बाद महुवा के एक ता अप परीचिट सिपाही के संग हाथ पर पथावल गेल, जक्रा महुवा निर्दोश भावस मानी लेने. और अंतता नाव पर अचानक उभ्यानक सक्तिक एहसाच. इस सबता एतेक तेजी सबहल, जकर कलपना महुवा स्वपन मेभे से हो नहीं केने चली एँ. नाव पर पहुचते इस सिपाही किक्ता कटोन गूशना, सबता पएस चुका देल गेल अची, कोनो मागनी में ना लाजा रहल ची, इगव महुवा के हर्दैके भेदी गेल, इवकर नियती क्रूर्तम मोडषल, बुजो जि सतमाइ वुक्रा चन्द पैसक्लेल बेच देने चली, इमात्रित्वाक विष्वास्गातक चरम सीमा चल, महुवा आप स्वतन्द्रे नहीं केवल एक ता खरीदल गेल वस्तूके रूप में चली. जकन महुवा के ये पूरन विश्वास गाध भूजल भेल, जे उक्रा केवल एक ता वस्तूक जका बेची देल गेल च्या, तकन हूंकर प्रतिक्रिया देख्वा योग्छ है. महुवा अदिनता स्विकार नहीं के लनही, उवापन सतित्व, अपन आत्मा, अपन प्रेमक रक्षा के लेल, अपन प्रानक आहुती देबाक निरने लेलनही, एक तक्रूर सथागरक बन्दी बन्बास नीक, उजल समादी लेब उचित भुजलनी. इआमर भलिदान उक्राएक्ता सादारन लग्की इस्स, लोक देविक रूप में स्तापित कदिलक, परमानदीक किनार पर महुवा की बलिदान आजुभ दिन्दरी एक्ता सास्क्रतिक द्ध्वरोहर के रूप में आमर चे. अन्त में इविश्लेशन एही विचारु तेजक प्रष्नक संध समाप्त होई चे, आजुक समाज आईन गहन आ आमर भलिदान के केना मोंपाडे चे, आशम्मान देचचे. महुवा खट्वारिन्नक एगाता मात्र एक्टा प्राषीन कता नहीं चे, बलक परमान नदीक किनार पर गुंजित ओ लोक गीच चे, जे आजो उकर अदम्मय साहस, प्रेम आपवित्रता की नमन करेच्छे. इगठा हमरा सब के सवबिमान कप्रती चिन्तन करवाक लेल प्रेरिद करेचे अनिष्छित रूपसे एकर गेह्राई में बहुत किछ चुपल चे जकर विषे में आए जान्बाक इच्छा जाग्रित होएचे.

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