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महुआ_घटवारिन_कहानी_के_लेखन_सुझाव.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:08अज्छ कि इस गेहन समीख्षा में हम मब वहवा गध्वारिन की लोग कता पर चर्चा कर रही हैं।
  2. 0:08–0:19जो परमाड नदी कि तट्पर गती एक यूवा लग्की के अदम्या साहस, उसके प्रेम और और एक ख्रूर विष्वाजगात की बहुत ही मार्में गाता है।
  3. 0:19–0:21एक बहुत ही शक्तिशाली कहानी है ये
  4. 0:21–0:22बिलकुल
  5. 0:22–0:24तो बिना समय विर्थ किये
  6. 0:24–0:30आए इस कहानी को और देख प्रभाव शाली बनाने के तरीकों पद्धियान के अंद्रित करते हैं
  7. 0:30–0:31एक दम सही
  8. 0:31–0:33इस रच्ना की जो नीव है
  9. 0:33–0:34वो बहुत मस्वुत है
  10. 0:34–0:35है
  11. 0:35–0:38इस में कलासिक लोग कता की वुसारी सक्ती मोजुद है,
  12. 0:38–0:40जो पात्ध को बान सक्ती है.
  13. 0:40–0:43लेकिन कहानी कहने की कलाके स्थर पर,
  14. 0:43–0:46हम इसके प्रभाव को कही गुना बड़ा सक्ते हैं.
  15. 0:46–0:49तु चली, सब से पहले पहले बिन्दूपर आते हैं.
  16. 0:49–0:54कहानी का चर्मोट कर्ष और महुवा का अन्तिम निरनें बहुत थेजी से गड़ित होता है
  17. 0:54–0:59जिस से पात्ख को उसकी अन्तुरेक उतल पुतल से जुरने का पर्याप्त समें नहीं मिल पाता
  18. 0:59–1:02नुट से मैं जितना समच पारहा हूं
  19. 1:02–1:05यह तर किये है कि अद्याय च्याय और सात में
  20. 1:05–1:10जैसे ही महूवा को ये खोफनाक सच्चाय पता चलती है कि उसे बेच दिया गया है
  21. 1:10–1:13और वो क्रूर व्यापारी उसकी वर बड़ता है
  22. 1:13–1:17हा तो महूवा तुरन्त पलड़कर उफन्ती परमाना नदी में कुईजाती है
  23. 1:17–1:19बिल्कुल, एक जटके में.
  24. 1:19–1:22वैं तो, ये बहुत सपष्ट रूप से प्रस्टूट किया आगया है.
  25. 1:22–1:24लेकिन मैं सुच्छ रहूँ कि,
  26. 1:24–1:26क्या हम ने जबात पर विचार किया है,
  27. 1:26–1:28कि इतने तब गतना करम से,
  28. 1:28–1:31इस पूरे दिष्षका जो बावनात्मक वजन है,
  29. 1:31–1:32वो खम होजाता है?
  30. 1:32–1:38मतलब आप खेर आप वें कि गटना से लेकर उसके आत्मबलिदान तक का जो बडलाव है
  31. 1:38–1:39वो बहुत थेज है
  32. 1:39–1:40बलकल
  33. 1:40–1:43जब किसी चरित्र के साथ इतना बड़ा दोखा होता है
  34. 1:43–1:46तो उसका इस तरहें एकी सेक्टन में प्रतिक्रिया देना
  35. 1:46–1:50अवे उसके मनोविग्यान से तोडा दूर कर देता है
  36. 1:50–1:52अव, मैं आपकी बाथ समझ रही हूं
  37. 1:52–1:56लेकिन अगर मैं यहां थोडा लेखख की नजर्ये से सोचूं
  38. 1:56–1:58तो थो यह यह यह यह यह यह थार्थ वादी नहीं हैं?
  39. 1:58–1:59कैसे?
  40. 1:59–2:02मेरा मतलब है, जब आप आप पर अचानक पुई ख़त्रा आता है,
  41. 2:02–2:05तो अईन्सान बिना सोचे समचे बस रियाक्त करता है,
  42. 2:05–2:09जिसे हम फाइट या फ्लाइट रिस्पोंस कैते हैं.
  43. 2:09–2:10हाँ, वो तो है.
  44. 2:10–2:13उसवक त सोचने का समए किस के पास होता है.
  45. 2:13–2:15अगर बड़़क तोर पर हम असल जिन्गी नहीं जी रहें हैं
  46. 2:15–2:17हमें अगर अनुबहो पड़ रहें हैं
  47. 2:17–2:19अगर मतलब मनोवेग यानिक स्थर पर अप खेरें
  48. 2:19–2:21अगर जब कोई वेक्ती गेरे सद्मे में होता है
  49. 2:21–2:23तो उसके लिए समये कुछ पलो किले दिमा हो जाता है
  50. 2:23–2:27जब कोई आगात होता है, तो पलग जबखते हो जाता है
  51. 2:27–2:27बलक्कोल
  52. 2:27–2:31लेकिन एक पाटख के तोर पर, हमसल जिन्दिगी नहीं जी रहें
  53. 2:31–2:33हमें अपनुबाव पड रहें
  54. 2:33–2:35आच्छा मतलब मनोवेग यानिक सटर पर अप खेहरें
  55. 2:35–2:38अग, जब कोई वेक्ती गेरे सद्मे में होता है,
  56. 2:38–2:41तो उसके ले समय कुछ पलो किले दिमा हो जाता है.
  57. 2:41–2:44मस्तिष कुस नहीं और भ्यानक जानकारी को,
  58. 2:44–2:45प्रोसेस करने में समय लेता है.
  59. 2:45–2:49तो लेक्हक की यहां कमजोरी यह है,
  60. 2:49–2:52कि उन्होंने आक्श्छन की गती को तो पकड लिया,
  61. 2:52–2:55लेकिन उस आक्श्छन के पीछे के सद्मे को नहीं.
  62. 2:55–2:56एक दम सही.
  63. 2:56–3:00महूवा का अपनी सोतेली मादवारा भेचे जाने का सच जाननना,
  64. 3:00–3:02उसका तुट्ता विष्वास.
  65. 3:02–3:04और और फिर आप मभलीदान का फैस्ला.
  66. 3:04–3:10ये सब पन्नोपर इतनी जल्दी होता है, कि हम बस खटना को दूर से गटते हूए देखते हैं.
  67. 3:10–3:13वही तो हम उसे महुवा के नजर्ये से जी नहीं पाते.
  68. 3:13–3:18दूर से देखें तो वो एक सेकिन का दमाका है, वस दो गाडिया तक्राएं और बात कतन.
  69. 3:18–3:19बिलकु.
  70. 3:19–3:23अबही लेक्खग हमे उस अकसेख्टेंग का, CCTV-Footage दिखारें,
  71. 3:23–3:25लेकिन जो व्यक्ति कार के अंदर है,
  72. 3:25–3:29उसके लिए वो एक सेक्टिएं बहुत लंभा होता है.
  73. 3:29–3:32हरे वाग, क्या शान्दार आनालगी है?
  74. 3:32–3:35उसे शीषे के तुटने की आबाज सुनाई देती है,
  75. 3:35–3:37साम ने आती गाडी की हेडलाइट्ती है
  76. 3:37–3:40हमें CCTV फुटेज नहीं चाही एं
  77. 3:40–3:44हमें महुवा के साथ उस नाव की द्राइविंग सीट पर बेट्चना है
  78. 3:44–3:45बलकोल यही बात है
  79. 3:45–3:48और इस कमजोरी को दूर करने के लिए
  80. 3:48–3:49मेरा सुजाव यह है
  81. 3:49–3:55की महुवा के चलांग लगाने से टीक पहले के खषनो की गती को दीमा करें.
  82. 3:55–3:57मतलब, पेसिंग को स्लोडाूं करें?
  83. 3:57–4:04आप, उसके मन में चल रहें अंप्रदवंद और भाहरी भ्यानक स्तिती के भीच के तनाव को विस्तार से अबारें.
  84. 4:04–4:06ताकि ये सर्फ एक गटना ना लगे?
  85. 4:06–4:07एक दम!
  86. 4:07–4:10बलके एक बहुत फीज़ सोथ समचकर लिया गया
  87. 4:10–4:11सहसिक निरने लगे
  88. 4:11–4:13तो इसकी कोई तो सुदारन
  89. 4:13–4:16मतलब, हम उस एक माएक्रो सेकन को खीचकर
  90. 4:16–4:18एक पुरा दिष्चे कैसे बना सकते हैं
  91. 4:18–4:22अगर हम सेंसरी दीटेल्स का इस्तिमाल करें, तो ये तनाव को बड़ाएगा.
  92. 4:22–4:24इन्डीो से जुडे विव्रन.
  93. 4:24–4:31आँ, जैसे मान लीजीए, कुदने से टीक पहले के चन्द पलो में, महुवा के द्रिष्टी से नाव के माहाल कावरनन करें.
  94. 4:31–4:35जैसे सावन बादो की राथ की वो तन्दी हवा.
  95. 4:35–4:38बिलकल, जो उसके रोंक्ते कडे कर रही है.
  96. 4:38–4:42पर्मानदी की उफन्ती लेजरों की अवाज, जो नाव के तक्तों से तक्रा रही है
  97. 4:42–4:45और नाव पर खडे उस क्रूर व्यापारी का चेहरा
  98. 4:45–4:51एक दम सही ये बाहरी विव्रन महुवा के भीतर के उस जमेहुए दर को दरशाइंगे
  99. 4:51–4:57बवहत ही जीवन्त चित्र प्रस्थ। करता है ये बाहर का शोर और अंदर का सन्नाता
  100. 4:57–4:59और एक और तरीका ये है कि जब वो स्थिर हो जाती है
  101. 4:59–5:02मतलब शान्त हो कर अपना निनने लेए होती है
  102. 5:02–5:08तब उसके मन में, मूरंग में बटे अपने प्रेमी की एक अंतिम स्मिरती कुणदिती हूँई दिखाएं
  103. 5:08–5:15जो उसे यह कतूर निनने लेने की प्रेडना देती है की अपना सम्मान कोने से बैटर यह उफनती नदी
  104. 5:15–5:19ये बहुत ही गेरा विचार है, वो अब वो सरफ एक पीडिता नहीं रहीं.
  105. 5:19–5:22वो अपनी किस्मत का फैसला खुद कर रही है.
  106. 5:22–5:23बलकोल.
  107. 5:23–5:23अब देखे,
  108. 5:23–5:27कलीमाख्स को हम चाहे जितनाभी स्लो मोऊशन में दिखालें,
  109. 5:27–5:29उसका पुरा असर तब तक नहीं होगा,
  110. 5:29–5:34जब तक हम उस नाव पर मोजुद अन्ये लोगों से जुडाओ महसूस नहीं करते.
  111. 5:34–5:35सहीं कहा अपने?
  112. 5:35–5:37और यही से हमारा अगला बिंदू उबरता है.
  113. 5:37–5:44कहानी के कुछ साहायक पात्रों की प्रेरनाय और उनकी प्रिष्ट भूमी कापी सतहीं प्रतीत होती है.
  114. 5:44–5:48जो मुख्य कत्हा के अंतर नहित संगरष को सीमित करती है
  115. 5:48–6:18विश्ड़े बिन्दू से जुडटे हुए में कहुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  116. 6:18–6:48तो उग़ाना बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र �
  117. 6:48–6:51या ज़ासी कहानियो मे भी तो सोतेली मा सरफ भूरी होती है
  118. 6:51–6:56या हम एक सीदी सादी लोक कता को बहुत ज़ादा जटिल तो नहीं बनारे है
  119. 6:56–6:58ये एक बहुती प्रासंगिग बहुस है
  120. 6:58–7:02ये सच है कि परमपर एक लोक कताएं अकसर काले और सपेद में काम करती है
  121. 7:02–7:05अदनिक पातक का दिमाग, स्वाबावेक रूप से क्यूं तलाशता है?
  122. 7:06–7:08की वो विलन बूरी क्यु है?
  123. 7:09–7:13बिलकुल, जब खलनायक केवल दूष्ट होने किले दूष्ट होते है,
  124. 7:14–7:16तो वे दराउने नहीं लकते, विबस बनाव्टी लकते है.
  125. 7:16–7:20बिल्कुल! जब खलनाय केवल दूष्ट होने किल दूष्ट होते हैं
  126. 7:20–7:21तो वे द्राउने नहीं लकते
  127. 7:21–7:23विबस बनाव्टी लकते हैं
  128. 7:23–7:26और प्रेमी के मामले मे भी यही बात लागू होती है
  129. 7:26–7:29आप! जब प्रेमी केवल एक आमुर्थ कलपना होता है
  130. 7:29–7:33तो पातक उसके च्चिन जाने का वो दर्द महसुस नहीं कर पाता.
  131. 7:33–7:36तो इसका उपाई क्या है? सुजाव क्या है आप अप के पास?
  132. 7:36–7:41मेरे सुजाव यह है कि विरोदियों और प्रेमी की प्रिरनाो में थोडी भारी की जोडें.
  133. 7:41–7:45ये स्पष्ट करें कि सोतेली माने यह सा भयाना कदम क्यो उठाया?
  134. 7:45–7:50और वो कोंसी विष्ट बात थी, जिसने प्रेमी को महुवा किलिए जीवन का एक मात्र सहरा बना दिया?
  135. 7:50–7:51एक दम सही.
  136. 7:51–7:55तो इस किलिए कोई थो सुदारन, चलिये पहले सोतेली मां की बात करते है.
  137. 7:55–7:59सो तेली माके संदरभ में एक पंक्ती जोडी जासकती है
  138. 7:59–8:03जहां वो महुवा के शराभी और गंजीडी पिता के कारन
  139. 8:03–8:05गर में च्याई भूख्मरी को कोसती है
  140. 8:05–8:08अच्छा मडल वो हुद को सही तेरानी की कोशिष करे है
  141. 8:08–8:14अगर अपनी क्रुर्ता को गरीभी की मजबूरी का नाम देकर सही तेराने की कोशिष करती है
  142. 8:14–8:17ये तो कहानी के नजरये को ही बड़ल देता है
  143. 8:17–8:20इस से वो उसकी क्रुर्ता को सही नहीं तेरा रहा
  144. 8:20–8:23बल कि उसे एक बहयानक तरक दे रहा है
  145. 8:23–8:23बलकुल
  146. 8:23–8:28और जब बुराई के पीछे कुई आँजा तर्क होता है जिसे हम समच सकते हैं
  147. 8:28–8:30तो वो बुराई और भी जाद खोफनाक हो जाती है
  148. 8:30–8:33किकि तब पाटक सुचने पर मजबोर हो जाता है
  149. 8:33–8:36कि भी भूखमरी अनसान को इस हद्टक ले जासकती है
  150. 8:36–8:42वही तो, इसे वो राटो राथ एक तिपकल विलन्न से एक बहुती स्वारती,
  151. 8:42–8:43लेकिन अस्ली अन्सान में बडल जाती है.
  152. 8:43–8:46बहुत खुब, आप प्रेमी के मामले पर आते है,
  153. 8:46–8:49नोट्स में उसे बसे एक नाम कितरा पेष की आगया है.
  154. 8:49–8:52आम, ये बहुत ही आंगूरत है.
  155. 8:52–8:57आई ये कुछ वयसली है के मैं कहुं मुझे गर की बहुत याद अर आई रही है
  156. 8:57–9:00ये सुनकर आपको शाएद फुडी सहान बुती हो
  157. 9:00–9:01आई समाने सी बात है
  158. 9:01–9:07लेकिन अगर मैं कहुं मुझे अपने गर के उस पुराने गिसे हूए नीले सोफे की याद आर आई रही है
  159. 9:07–9:13ज़हां बेटकर में शाम को चाई पीती ती, तो वो द्रिष्य आप टिमाग में चब जाता है.
  160. 9:13–9:17या बहतरीं तुलना की है आपने, स्पैसिफिटिटी से ही भहावनाई जन्व लेती हैं.
  161. 9:17–9:20तो हम प्रेमी के चरित्र कि सात या क्या कर सकते है?
  162. 9:20–9:24केवल ये कहने के बजाए की महूवा उसकी प्रतिक्षा कर रही है,
  163. 9:24–9:27उनके भीच होई किसी पुरानी मुलाकात का कोई विषिष्ट समवाज जोडें.
  164. 9:27–9:28जैसे की?
  165. 9:28–9:33जैसे प्रेमी दॉरारा महूवा को मुरेंग के किसी सुरक्षिद गर का सपना दिखाना.
  166. 9:33–9:35शाब आद बवावाने सर्फ अग़ाने जान नहीं गवाई
  167. 9:35–9:37बलकी उस पेड के नीचे बनने वाले उस चोते से गर का सबना बी नदी में दूब गया
  168. 9:37–9:39ये नुकसान को बवाद वेक्तिगद बना देता है
  169. 9:39–9:40इक्डम
  170. 9:40–9:41बहुत ही बड़्या बिंदू है ये
  171. 9:41–9:45तो पाटख को महसुस होगा की महुवाने सरफ अपनी जान नहीं गवाई
  172. 9:45–9:49बलकी उस पेड के नीचे बनने वाले उस चोते से गर का सबना भी नदी में दूब गया
  173. 9:49–9:52ये नुकसान को बवाथ व्यक्तिगद बना देता है
  174. 9:52–9:53एक दम
  175. 9:53–9:55बहुत ही बड़्या बिन्दू है ये
  176. 9:55–9:55इक्दम.
  177. 9:55–9:57बहुत्ती बड्या बिन्दू है ये.
  178. 9:57–10:01अब आई ये हम तीस्रे और अन्तिम मुख्य बिन्दू की और बडटे है.
  179. 10:01–10:04जो की कहानी का एक बहुत बडा मोड है.
  180. 10:04–10:08अन्तिम द्रिष्च में चोटे सिपाही का अचानक हिरदाय परिवर्तन
  181. 10:08–10:10अर महुवा के लिए उसका नदी में कुदना
  182. 10:10–10:13कहानी में एक अप्रत्याशित लिकन
  183. 10:13–10:15कमस थापित मोर लाता है
  184. 10:15–10:17आई ये हम इस खन्द पर करीब से नजर डालें
  185. 10:17–10:19जहाँ व्यापारी का चोटा सिपाही
  186. 10:19–10:23महुवा को बचाने के लिए अचानक नदी में कुद परता है
  187. 10:23–10:26आप पुरी यात्रा के दोरान वो एक दम खामोच था.
  188. 10:26–10:28ये बहुत इदिल्चस्प है.
  189. 10:28–10:30लिकिन क्या इसका कोई विकल्प हो सकता है?
  190. 10:30–10:34ज़से क्या इसके लिए पहले से कुई संकेट या फोर्षेडो इंदिये गयत है?
  191. 10:34–10:40सچ कहुं तो मेरे नोट्स के हिसाब से, कहानी के बिलकुल अन्त में हमें बताया जाता है,
  192. 10:40–10:43कि छोटा सिपाही महुवा से गुप्त रुब से प्रेम करने लगा था.
  193. 10:43–10:47और इसलिये वो उसके पीछे उफनती नदी में कुछ जाता है.
  194. 10:47–10:53आप जो की इस से पहले के पूरे सफर में इस सिपाही की बहावनाउ का कोई जिकर नहीं है
  195. 10:53–10:58इसलिये ये बहुत बडाँ बलिदान अचानक और थोड़ा आस्वाबाविक लकता है
  196. 10:58–11:02कहानी कहने की कला में एक नियम है कि पाटक को हेरान करे
  197. 11:02–11:05लेकिन उस हरानी के बाज जब पाटक पीचे मुडकर देके,
  198. 11:05–11:08तो उसे लगना चाहीए की इसके सनकेट तो शुएजे ही मुजुद थे.
  199. 11:08–11:10मैंने ही दियान नहीं दिया.
  200. 11:10–11:14वही तो. बिना तयारी के आया कोई भी मोड नाटकी नहीं,
  201. 11:14–11:15बलकी बनावडी लखता है.
  202. 11:15–11:19अगर हम पहले से ही हिंट दे देदेंगे कि ये सिपाही अच्छा इन्सान है,
  203. 11:19–11:22तो क्या कहानी का सस्पैंस कहतम नहीं होजाएगा?
  204. 11:22–11:26नहीं, फोर शेडूईं का मतलब रहेस्ट्ये कोलना नहीं है,
  205. 11:26–11:29इसका मतलब है, उस रहेस्ट्ये की जमीन तभीर करना.
  206. 11:29–11:33उस्ब्वाईउटिए की जमीन के दोरान इस यूवा सिपाही की साहनुबूती
  207. 11:33–11:37यो उसके बीटर चल रहे द्वंदू को पहले ही स्थापित करें
  208. 11:37–11:42ताकी अंत में उसका बलिदान सोब्विक अर कहानी के मूल स्वर की अनुरुप लगे
  209. 11:42–11:44तो तो तो तो सुदारन हो सकते है?
  210. 11:44–11:48आप ज़ेसे जब महुवा को जबबरदस्ती नावव पर लया जाता है,
  211. 11:48–11:49जो के अद्धया है पाच में है?
  212. 11:49–11:51आप उस समय वो दरी हुई है.
  213. 11:51–12:21या वो बज़ाई पाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बा
  214. 12:21–12:26अद्याय च्ये में जब बड़ा सबाही महुवा से पत्वार चीनता है
  215. 12:26–12:29या व्यापारी महुवा को अपने पास बटाने की कोशिष करता है
  216. 12:29–12:31तब ये द्वंद कैसे बड़ सकता है
  217. 12:31–12:34तब चवते सबाही को व्यापारी को रोकने का एक हलका
  218. 12:34–13:04अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्�
  219. 13:04–13:08अगदम, इस से उस द्रिष्ष्टी गेराई कई गुना बर जाएगी.
  220. 13:08–13:12वागगग, ये बडलाव इस लोक कता को एक अलगी स्टर पर लेजाएंगे.
  221. 13:12–13:13बलकु लेजाएंगे?
  222. 13:13–13:19तो जल्ये अब आज की इस समिक्षा का संक्षेप में निशकर्ष निकालते है,
  223. 13:19–13:24इस याज आम बवावा के मनोविग्यान को उभारना है और सेंसरी दीटेल्स जोडने है.
  224. 13:24–13:29बिलकोल. तुस्रा सोतेली मा और प्रेमी के पात्रो को थोडी अग्राई देना.
  225. 13:29–13:35सब से पहले, चर्मोद कर्ष से टीक पहले की गती को दीमा कर के तनाव बडाना.
  226. 13:35–13:37आप, वो कार अकस्टिडन्वाली बाद,
  227. 13:37–13:42जाँ हमें महुवा के मनोविच्यान को उभारना है और सेंसरी दीटेल्स जोडने है.
  228. 13:42–13:43बिल्कोल.
  229. 13:43–13:47तुस्रा सोतेली मा और प्रेमी के पात्रों को थोडी और गेड़ाई देना
  230. 13:47–13:49ताकी वो सिझ क्यरे केचर न लगे
  231. 13:49–13:51बलकी उनकी प्रेरनाए सपष्ट हो
  232. 13:51–13:55गरीदी का तर्क और वो नीले सोफे वाली स्पैसेफिसिती
  233. 13:55–13:56एक दम सही
  234. 13:56–14:02अर अंत में चोटे सिपाही के हिदेपरिवर्तन के लिए कहानी में पहले से ही सुक्ष्म संकित बोना
  235. 14:02–14:05ताकि उसका बलीदान अचानक और थोपा हूँआ नलगे
  236. 14:05–14:12उस सुजावो पर काम करके अपनी कहानी के अंतिम द्रष्यो को और अदेक मार्मिक बना सकते हैं
  237. 14:12–14:16अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें
  238. 14:17–14:20अपने अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें.
  239. 14:20–14:24अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें.
  240. 14:24–14:27अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें.
  241. 14:27–14:29अज की चर्चा में बस इतना ही?
  242. 14:29–14:32बिलकुल, फिर मिलेंगे एक नहीं रच्ना के साथ

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अज्छ कि इस गेहन समीख्षा में हम मब वहवा गध्वारिन की लोग कता पर चर्चा कर रही हैं। जो परमाड नदी कि तट्पर गती एक यूवा लग्की के अदम्या साहस, उसके प्रेम और और एक ख्रूर विष्वाजगात की बहुत ही मार्में गाता है। एक बहुत ही शक्तिशाली कहानी है ये बिलकुल तो बिना समय विर्थ किये आए इस कहानी को और देख प्रभाव शाली बनाने के तरीकों पद्धियान के अंद्रित करते हैं एक दम सही इस रच्ना की जो नीव है वो बहुत मस्वुत है है इस में कलासिक लोग कता की वुसारी सक्ती मोजुद है, जो पात्ध को बान सक्ती है. लेकिन कहानी कहने की कलाके स्थर पर, हम इसके प्रभाव को कही गुना बड़ा सक्ते हैं. तु चली, सब से पहले पहले बिन्दूपर आते हैं. कहानी का चर्मोट कर्ष और महुवा का अन्तिम निरनें बहुत थेजी से गड़ित होता है जिस से पात्ख को उसकी अन्तुरेक उतल पुतल से जुरने का पर्याप्त समें नहीं मिल पाता नुट से मैं जितना समच पारहा हूं यह तर किये है कि अद्याय च्याय और सात में जैसे ही महूवा को ये खोफनाक सच्चाय पता चलती है कि उसे बेच दिया गया है और वो क्रूर व्यापारी उसकी वर बड़ता है हा तो महूवा तुरन्त पलड़कर उफन्ती परमाना नदी में कुईजाती है बिल्कुल, एक जटके में. वैं तो, ये बहुत सपष्ट रूप से प्रस्टूट किया आगया है. लेकिन मैं सुच्छ रहूँ कि, क्या हम ने जबात पर विचार किया है, कि इतने तब गतना करम से, इस पूरे दिष्षका जो बावनात्मक वजन है, वो खम होजाता है? मतलब आप खेर आप वें कि गटना से लेकर उसके आत्मबलिदान तक का जो बडलाव है वो बहुत थेज है बलकल जब किसी चरित्र के साथ इतना बड़ा दोखा होता है तो उसका इस तरहें एकी सेक्टन में प्रतिक्रिया देना अवे उसके मनोविग्यान से तोडा दूर कर देता है अव, मैं आपकी बाथ समझ रही हूं लेकिन अगर मैं यहां थोडा लेखख की नजर्ये से सोचूं तो थो यह यह यह यह यह यह थार्थ वादी नहीं हैं? कैसे? मेरा मतलब है, जब आप आप पर अचानक पुई ख़त्रा आता है, तो अईन्सान बिना सोचे समचे बस रियाक्त करता है, जिसे हम फाइट या फ्लाइट रिस्पोंस कैते हैं. हाँ, वो तो है. उसवक त सोचने का समए किस के पास होता है. अगर बड़़क तोर पर हम असल जिन्गी नहीं जी रहें हैं हमें अगर अनुबहो पड़ रहें हैं अगर मतलब मनोवेग यानिक स्थर पर अप खेरें अगर जब कोई वेक्ती गेरे सद्मे में होता है तो उसके लिए समये कुछ पलो किले दिमा हो जाता है जब कोई आगात होता है, तो पलग जबखते हो जाता है बलक्कोल लेकिन एक पाटख के तोर पर, हमसल जिन्दिगी नहीं जी रहें हमें अपनुबाव पड रहें आच्छा मतलब मनोवेग यानिक सटर पर अप खेहरें अग, जब कोई वेक्ती गेरे सद्मे में होता है, तो उसके ले समय कुछ पलो किले दिमा हो जाता है. मस्तिष कुस नहीं और भ्यानक जानकारी को, प्रोसेस करने में समय लेता है. तो लेक्हक की यहां कमजोरी यह है, कि उन्होंने आक्श्छन की गती को तो पकड लिया, लेकिन उस आक्श्छन के पीछे के सद्मे को नहीं. एक दम सही. महूवा का अपनी सोतेली मादवारा भेचे जाने का सच जाननना, उसका तुट्ता विष्वास. और और फिर आप मभलीदान का फैस्ला. ये सब पन्नोपर इतनी जल्दी होता है, कि हम बस खटना को दूर से गटते हूए देखते हैं. वही तो हम उसे महुवा के नजर्ये से जी नहीं पाते. दूर से देखें तो वो एक सेकिन का दमाका है, वस दो गाडिया तक्राएं और बात कतन. बिलकु. अबही लेक्खग हमे उस अकसेख्टेंग का, CCTV-Footage दिखारें, लेकिन जो व्यक्ति कार के अंदर है, उसके लिए वो एक सेक्टिएं बहुत लंभा होता है. हरे वाग, क्या शान्दार आनालगी है? उसे शीषे के तुटने की आबाज सुनाई देती है, साम ने आती गाडी की हेडलाइट्ती है हमें CCTV फुटेज नहीं चाही एं हमें महुवा के साथ उस नाव की द्राइविंग सीट पर बेट्चना है बलकोल यही बात है और इस कमजोरी को दूर करने के लिए मेरा सुजाव यह है की महुवा के चलांग लगाने से टीक पहले के खषनो की गती को दीमा करें. मतलब, पेसिंग को स्लोडाूं करें? आप, उसके मन में चल रहें अंप्रदवंद और भाहरी भ्यानक स्तिती के भीच के तनाव को विस्तार से अबारें. ताकि ये सर्फ एक गटना ना लगे? एक दम! बलके एक बहुत फीज़ सोथ समचकर लिया गया सहसिक निरने लगे तो इसकी कोई तो सुदारन मतलब, हम उस एक माएक्रो सेकन को खीचकर एक पुरा दिष्चे कैसे बना सकते हैं अगर हम सेंसरी दीटेल्स का इस्तिमाल करें, तो ये तनाव को बड़ाएगा. इन्डीो से जुडे विव्रन. आँ, जैसे मान लीजीए, कुदने से टीक पहले के चन्द पलो में, महुवा के द्रिष्टी से नाव के माहाल कावरनन करें. जैसे सावन बादो की राथ की वो तन्दी हवा. बिलकल, जो उसके रोंक्ते कडे कर रही है. पर्मानदी की उफन्ती लेजरों की अवाज, जो नाव के तक्तों से तक्रा रही है और नाव पर खडे उस क्रूर व्यापारी का चेहरा एक दम सही ये बाहरी विव्रन महुवा के भीतर के उस जमेहुए दर को दरशाइंगे बवहत ही जीवन्त चित्र प्रस्थ। करता है ये बाहर का शोर और अंदर का सन्नाता और एक और तरीका ये है कि जब वो स्थिर हो जाती है मतलब शान्त हो कर अपना निनने लेए होती है तब उसके मन में, मूरंग में बटे अपने प्रेमी की एक अंतिम स्मिरती कुणदिती हूँई दिखाएं जो उसे यह कतूर निनने लेने की प्रेडना देती है की अपना सम्मान कोने से बैटर यह उफनती नदी ये बहुत ही गेरा विचार है, वो अब वो सरफ एक पीडिता नहीं रहीं. वो अपनी किस्मत का फैसला खुद कर रही है. बलकोल. अब देखे, कलीमाख्स को हम चाहे जितनाभी स्लो मोऊशन में दिखालें, उसका पुरा असर तब तक नहीं होगा, जब तक हम उस नाव पर मोजुद अन्ये लोगों से जुडाओ महसूस नहीं करते. सहीं कहा अपने? और यही से हमारा अगला बिंदू उबरता है. कहानी के कुछ साहायक पात्रों की प्रेरनाय और उनकी प्रिष्ट भूमी कापी सतहीं प्रतीत होती है. जो मुख्य कत्हा के अंतर नहित संगरष को सीमित करती है विश्ड़े बिन्दू से जुडटे हुए में कहुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ तो उग़ाना बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र बाद्र � या ज़ासी कहानियो मे भी तो सोतेली मा सरफ भूरी होती है या हम एक सीदी सादी लोक कता को बहुत ज़ादा जटिल तो नहीं बनारे है ये एक बहुती प्रासंगिग बहुस है ये सच है कि परमपर एक लोक कताएं अकसर काले और सपेद में काम करती है अदनिक पातक का दिमाग, स्वाबावेक रूप से क्यूं तलाशता है? की वो विलन बूरी क्यु है? बिलकुल, जब खलनायक केवल दूष्ट होने किले दूष्ट होते है, तो वे दराउने नहीं लकते, विबस बनाव्टी लकते है. बिल्कुल! जब खलनाय केवल दूष्ट होने किल दूष्ट होते हैं तो वे द्राउने नहीं लकते विबस बनाव्टी लकते हैं और प्रेमी के मामले मे भी यही बात लागू होती है आप! जब प्रेमी केवल एक आमुर्थ कलपना होता है तो पातक उसके च्चिन जाने का वो दर्द महसुस नहीं कर पाता. तो इसका उपाई क्या है? सुजाव क्या है आप अप के पास? मेरे सुजाव यह है कि विरोदियों और प्रेमी की प्रिरनाो में थोडी भारी की जोडें. ये स्पष्ट करें कि सोतेली माने यह सा भयाना कदम क्यो उठाया? और वो कोंसी विष्ट बात थी, जिसने प्रेमी को महुवा किलिए जीवन का एक मात्र सहरा बना दिया? एक दम सही. तो इस किलिए कोई थो सुदारन, चलिये पहले सोतेली मां की बात करते है. सो तेली माके संदरभ में एक पंक्ती जोडी जासकती है जहां वो महुवा के शराभी और गंजीडी पिता के कारन गर में च्याई भूख्मरी को कोसती है अच्छा मडल वो हुद को सही तेरानी की कोशिष करे है अगर अपनी क्रुर्ता को गरीभी की मजबूरी का नाम देकर सही तेराने की कोशिष करती है ये तो कहानी के नजरये को ही बड़ल देता है इस से वो उसकी क्रुर्ता को सही नहीं तेरा रहा बल कि उसे एक बहयानक तरक दे रहा है बलकुल और जब बुराई के पीछे कुई आँजा तर्क होता है जिसे हम समच सकते हैं तो वो बुराई और भी जाद खोफनाक हो जाती है किकि तब पाटक सुचने पर मजबोर हो जाता है कि भी भूखमरी अनसान को इस हद्टक ले जासकती है वही तो, इसे वो राटो राथ एक तिपकल विलन्न से एक बहुती स्वारती, लेकिन अस्ली अन्सान में बडल जाती है. बहुत खुब, आप प्रेमी के मामले पर आते है, नोट्स में उसे बसे एक नाम कितरा पेष की आगया है. आम, ये बहुत ही आंगूरत है. आई ये कुछ वयसली है के मैं कहुं मुझे गर की बहुत याद अर आई रही है ये सुनकर आपको शाएद फुडी सहान बुती हो आई समाने सी बात है लेकिन अगर मैं कहुं मुझे अपने गर के उस पुराने गिसे हूए नीले सोफे की याद आर आई रही है ज़हां बेटकर में शाम को चाई पीती ती, तो वो द्रिष्य आप टिमाग में चब जाता है. या बहतरीं तुलना की है आपने, स्पैसिफिटिटी से ही भहावनाई जन्व लेती हैं. तो हम प्रेमी के चरित्र कि सात या क्या कर सकते है? केवल ये कहने के बजाए की महूवा उसकी प्रतिक्षा कर रही है, उनके भीच होई किसी पुरानी मुलाकात का कोई विषिष्ट समवाज जोडें. जैसे की? जैसे प्रेमी दॉरारा महूवा को मुरेंग के किसी सुरक्षिद गर का सपना दिखाना. शाब आद बवावाने सर्फ अग़ाने जान नहीं गवाई बलकी उस पेड के नीचे बनने वाले उस चोते से गर का सबना बी नदी में दूब गया ये नुकसान को बवाद वेक्तिगद बना देता है इक्डम बहुत ही बड़्या बिंदू है ये तो पाटख को महसुस होगा की महुवाने सरफ अपनी जान नहीं गवाई बलकी उस पेड के नीचे बनने वाले उस चोते से गर का सबना भी नदी में दूब गया ये नुकसान को बवाथ व्यक्तिगद बना देता है एक दम बहुत ही बड़्या बिन्दू है ये इक्दम. बहुत्ती बड्या बिन्दू है ये. अब आई ये हम तीस्रे और अन्तिम मुख्य बिन्दू की और बडटे है. जो की कहानी का एक बहुत बडा मोड है. अन्तिम द्रिष्च में चोटे सिपाही का अचानक हिरदाय परिवर्तन अर महुवा के लिए उसका नदी में कुदना कहानी में एक अप्रत्याशित लिकन कमस थापित मोर लाता है आई ये हम इस खन्द पर करीब से नजर डालें जहाँ व्यापारी का चोटा सिपाही महुवा को बचाने के लिए अचानक नदी में कुद परता है आप पुरी यात्रा के दोरान वो एक दम खामोच था. ये बहुत इदिल्चस्प है. लिकिन क्या इसका कोई विकल्प हो सकता है? ज़से क्या इसके लिए पहले से कुई संकेट या फोर्षेडो इंदिये गयत है? सچ कहुं तो मेरे नोट्स के हिसाब से, कहानी के बिलकुल अन्त में हमें बताया जाता है, कि छोटा सिपाही महुवा से गुप्त रुब से प्रेम करने लगा था. और इसलिये वो उसके पीछे उफनती नदी में कुछ जाता है. आप जो की इस से पहले के पूरे सफर में इस सिपाही की बहावनाउ का कोई जिकर नहीं है इसलिये ये बहुत बडाँ बलिदान अचानक और थोड़ा आस्वाबाविक लकता है कहानी कहने की कला में एक नियम है कि पाटक को हेरान करे लेकिन उस हरानी के बाज जब पाटक पीचे मुडकर देके, तो उसे लगना चाहीए की इसके सनकेट तो शुएजे ही मुजुद थे. मैंने ही दियान नहीं दिया. वही तो. बिना तयारी के आया कोई भी मोड नाटकी नहीं, बलकी बनावडी लखता है. अगर हम पहले से ही हिंट दे देदेंगे कि ये सिपाही अच्छा इन्सान है, तो क्या कहानी का सस्पैंस कहतम नहीं होजाएगा? नहीं, फोर शेडूईं का मतलब रहेस्ट्ये कोलना नहीं है, इसका मतलब है, उस रहेस्ट्ये की जमीन तभीर करना. उस्ब्वाईउटिए की जमीन के दोरान इस यूवा सिपाही की साहनुबूती यो उसके बीटर चल रहे द्वंदू को पहले ही स्थापित करें ताकी अंत में उसका बलिदान सोब्विक अर कहानी के मूल स्वर की अनुरुप लगे तो तो तो तो सुदारन हो सकते है? आप ज़ेसे जब महुवा को जबबरदस्ती नावव पर लया जाता है, जो के अद्धया है पाच में है? आप उस समय वो दरी हुई है. या वो बज़ाई पाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बाच बा अद्याय च्ये में जब बड़ा सबाही महुवा से पत्वार चीनता है या व्यापारी महुवा को अपने पास बटाने की कोशिष करता है तब ये द्वंद कैसे बड़ सकता है तब चवते सबाही को व्यापारी को रोकने का एक हलका अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्गा अदल्� अगदम, इस से उस द्रिष्ष्टी गेराई कई गुना बर जाएगी. वागगग, ये बडलाव इस लोक कता को एक अलगी स्टर पर लेजाएंगे. बलकु लेजाएंगे? तो जल्ये अब आज की इस समिक्षा का संक्षेप में निशकर्ष निकालते है, इस याज आम बवावा के मनोविग्यान को उभारना है और सेंसरी दीटेल्स जोडने है. बिलकोल. तुस्रा सोतेली मा और प्रेमी के पात्रो को थोडी अग्राई देना. सब से पहले, चर्मोद कर्ष से टीक पहले की गती को दीमा कर के तनाव बडाना. आप, वो कार अकस्टिडन्वाली बाद, जाँ हमें महुवा के मनोविच्यान को उभारना है और सेंसरी दीटेल्स जोडने है. बिल्कोल. तुस्रा सोतेली मा और प्रेमी के पात्रों को थोडी और गेड़ाई देना ताकी वो सिझ क्यरे केचर न लगे बलकी उनकी प्रेरनाए सपष्ट हो गरीदी का तर्क और वो नीले सोफे वाली स्पैसेफिसिती एक दम सही अर अंत में चोटे सिपाही के हिदेपरिवर्तन के लिए कहानी में पहले से ही सुक्ष्म संकित बोना ताकि उसका बलीदान अचानक और थोपा हूँआ नलगे उस सुजावो पर काम करके अपनी कहानी के अंतिम द्रष्यो को और अदेक मार्मिक बना सकते हैं अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें अपने अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें. अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें. अपने नहीं बदलावो अपनी रचना में लागु करें. अज की चर्चा में बस इतना ही? बिलकुल, फिर मिलेंगे एक नहीं रच्ना के साथ

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