MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
मिथिला_के_योद्धा_छेछन_महाराज_का_अहंकार.m4a
Timestamped machine output
- 0:00–0:06बलकुल कलपना की जी, मान लीजे की, दूनिया का सब से अजे योद्धा, जमीन पर भेबस पडा है.
- 0:06–0:12और उसके आंकू के तीक सामने एक विशाल काय राथी कड़ा है.
- 0:12–0:15बलकुल, लेकिन लेकिन वो राथी उसे कुछलने की कोषिष्च नहीं कर रहा है.
- 0:15–0:20उसे अपनी सुन्द से उसी योद्धा की पच्छीस किलो की बारी बरकं तलवार उताए है
- 0:20–0:25अपना बारी पैर उस तलवार पर तिका दिया है
- 0:25–0:29मतला एक जरासी हरकत और खेल खतम
- 0:29–0:29एक दम खतम
- 0:29–0:31कोई कितना भी अजे क्यों नहो
- 0:31–0:33इस पल में उपुरी तरे से लाचार है
- 0:33–0:39तो आजकी हमारी इस गेहन चर्चा का विषे, मित्फिला के एक आजके ही योददा के बारे में हैं.
- 0:39–0:42एक आजके योददा जिसे किसी इनसान ने नहीं,
- 0:42–0:48बलके उसके अपने ही एहंकार, और प्रक्रती की एक विषाल शकती ने दूल चताए.
- 0:48–0:53अग, जलिये से तोड़ा विस्तार से समफते हैं, आजके हमारे श्रोथ बहुत ही अबबद हैं,
- 0:53–0:59विषे श्रुब से गजिंद्र ताकुर दवारा विदे, इपत्रिका में प्राचित एक प्राचीन लेक.
- 0:59–1:01बिलकुल, विदे अपत्रिका का वो लेक.
- 1:01–1:08तो ये नोट्स के माद्यम से हम मितला के दोमलोग देवता चेचन महराज के कता का विषलेशन कर रहे हैं.
- 1:08–1:12और मैं बतादु ये सरफ एक पुरानी वीर्गाता नहीं है.
- 1:12–1:13बलकल नहीं.
- 1:13–1:16जब मैंन न स्रूतो को गेराई से पडा तो मुझे अजा अस वा के
- 1:17–1:20ये कहानी असल में शक्ती की राजनी ती
- 1:20–1:21समाजिक सम्मान
- 1:21–1:23और उस मनोवे ग्यानिक तक्राओ का दस्तावेज है
- 1:23–1:26जाए अनसान खुद अपनी ही ताकत का शिकार हो जाता है
- 1:26–1:29देखे लोग कत्ठाऊं की खास्यत ही यही होती.
- 1:29–1:33सतापर देखने से तो वे बस बल और प्रेम की कहानिया लकती है.
- 1:33–1:37लेकिन अगर अगर उंके सांस्क्रतिक और अतिहास्सिक तानेबाने को समजें,
- 1:37–1:40तो वे तत्कालीन समाज की न्याई विवस्ता,
- 1:40–2:10अर कभीलाई नियोमों का पुरा कच्च्च्च्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्
- 2:10–2:40अगर दोग बादा आप बादा आप पर प्रदाई बादा आप प्रदाई प्रदाई बादा आप प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदा�
- 2:40–2:41मिनी बोस को हराना परता है.
- 2:41–2:42मिनी बोस.
- 2:42–2:43हा, और यहां मिनी बोस है,
- 2:43–2:46मानिक चन्ट का खुंखार पाल्तु सुर,
- 2:46–2:46चतिया.
- 2:46–2:47औरे बाप्रे.
- 2:47–2:49जो चतिया को हराएगा,
- 2:49–2:50वही मानिक चन्ट से लडेगा.
- 2:50–2:52और जो मानिक चन्ट को हराएगा,
- 2:52–2:54उसे उसकी बहन,
- 2:54–2:56पन्मा से विवाह का दिकार मिलेगा
- 2:56–2:57अग
- 2:57–2:59लिकिन मुझे एक बाज समज निया आई
- 2:59–3:02मतलब अगर मानिखचा नित्ता बड़ा और शक्तिषाली सर्दार था
- 3:02–3:04तो उसने अखाडे में शेएर, बाग
- 3:04–3:06या भालु जैसे किसी
- 3:06–3:09एकसी शाही जानवर को क्यो निरख्खा
- 3:09–3:11आप ये सवाल उठना लाजमी है
- 3:11–3:13इक सूर से लडने की श्वर्त कुछ अजीब नहीं लकती
- 3:13–3:15क्या चट्या सरफ एक जानवर है
- 3:15–3:18या किसी बडी मूनोविग यानेक बादा कप्रतीक है
- 3:18–3:21यहां जो बात सब से अदेक आकरषिट करती है
- 3:21–3:24वो है उस जान्वर की असल प्रक्रती
- 3:24–3:28देखे, शेर या बाग सुन्ने में बहुत राजसी लगते हैं
- 3:28–3:31लेकिन अगर हम एक जंगली सूर
- 3:31–3:34या खुंकार वराह की शारिरिक सं़चना को देखें
- 3:34–3:37तो ये सवाल कुद बखुत कच्तम हो जाएगा
- 3:37–3:39यह आप यह खाँ से उस में?
- 3:39–3:42एक जंगली सूर का जु गुद्वा कशन केंदर होता है
- 3:42–3:46यह नी सेंटर अप ग्डविटी वो बहुत नीचे होता है
- 3:46–3:48वं चाही के रही हैं
- 3:48–3:50और उसकी चम्डी बेहद मोटी होती है
- 3:50–3:53और सब से बड़ी बात वो पुरी तेहां से अप्रत्याषित
- 3:53–3:55यानी अन्प्रटिक्टबल होता है
- 3:55–3:57मतलप उसका कोई पातन नहीं होता
- 3:57–3:58बलकुल नहीं
- 3:58–4:01जब वो हम्ला करता उस में कोई रडनीती नहीं होती
- 4:01–4:04सिर्फ एक अन्दी और हिंसक उर्जा होती है
- 4:04–4:06जिसे रोकना लगभग असमबव होता है
- 4:06–4:10मदव यह सिझ ताकत का नहीं बलकी गती
- 4:10–4:12और मान्सिक संदूलन का परेखषन ता?
- 4:12–4:13बलकोल
- 4:13–4:17मानिक्चन्द अपनी बहन्मा के लिए किवल एक अज्सा पती नहीं दून्डा था
- 4:17–4:20जिसके दोले बड़े हो या जो देखने में बलवान हो
- 4:20–4:21आप वो तो कोई भी हो सकता
- 4:21–4:25उईक आसा रक्षक तून रा था जो अप्रत्याशित संकत में
- 4:25–4:30यानी उस खुखार जानवर जैसी बेकाबू उस थी ती में भी अपनी जान बचाँ सके
- 4:30–4:32रहांग तरा का एवलुशनरी फिल्टर
- 4:32–4:32बलकोल
- 4:32–4:37ये उस समय के कभीलाई या गरामीण समाज में सरवाईवल का सबसे बड़ा पैमाना था
- 4:37–4:41मानेक च्चन का यप्रन कोई एहंकार का प्रदरषन नी था
- 4:41–4:41तो वो क्या था
- 4:41–4:44वो बस आपने पर्वार की अगली पीडी के लिए
- 4:44–4:46सबसे बहतरीं जीन्स
- 4:46–4:49और सबसे शक्षम रक्षक सुनिष्चित कर रा था.
- 4:49–4:53या बात है. ये नजर्या तो इस पूरी चुनोती को एक नयाही आद्ध दे दे देता है.
- 4:53–4:56अप शिचन महराज इस चुनोती को सुईकार करते हैं
- 4:56–4:59स्रोद बताते हैं कि शिचन के पास एक कत्ता है
- 4:59–5:02ये विशेश प्रकार का बहारी हत्यार
- 5:02–5:02विशेश प्रकार का बहारी हत्यार
- 5:02–5:03विशेश बहारी हत्यार
- 5:03–5:05और ये कोई सादरन हत्यार नहीं हैं
- 5:05–5:09इसका वजन पाज पसेरी यहनी लगबक पचीस किलो बताया गया है
- 5:09–5:10पचीस किलो?
- 5:10–5:10रहा
- 5:10–5:13पचीस किलो का हत्यार कोई कैसे चला सकता है
- 5:13–5:14यह तो व्यावारे क्रुब से समबव लकता है
- 5:14–5:16यहां हमें लोग कत्ठाव के
- 5:16–5:19आती शोकती वाले हिसे
- 5:19–5:21और उसके पीच्छे के आस्ली आर्थ को समजना होगा
- 5:21–5:22मतलब?
- 5:22–5:24ये तोडा बडाच़ाडा कर बताया गया है?
- 5:24–5:27आप, पच्छीस किलो का कता शाव्व शाब्दिक ना हों
- 5:27–5:31लेकिन यह इस बात का प्रतीक है कि चेचन के पास असादारन भाहुबल ता
- 5:31–5:36अर बारी हत्यारों का एक विग्यान होता है, मोमेंटम
- 5:36–5:37अग, गतीज उर्जा
- 5:37–5:41एक बार जब वो बारी हत्यार हवामे गूम्ला शुरू करता है,
- 5:41–5:45तो उसे रोकना किसी भी ध्धाल या अनसान के बस की बात नहीं होती
- 5:45–5:46बलकल
- 5:46–5:49लेकिन यहा हत्यार केवल शारीरेक ताकत का मुधाज नहीं ता
- 5:49–5:51दंके पर चोट करने से टीक पहले
- 5:51–5:53चेचन जो करते है
- 5:53–5:56वो इस गाता का सबसे रहस्यमाई हिस्सा है
- 5:56–6:00और रहे है, वो हिस्सा मुझे बहुती दिल्चस प्लगा
- 6:00–6:02चचन दंके पर चोट करने से पहले
- 6:02–6:32अग बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा�
- 6:32–6:36लिकिन क्या ये केवल नशे के प्रवाँव में आने का तरीका था?
- 6:36–6:40या या ये युध्द से पहले खुद को एक मनो वेग्याने कवच पहनाने की प्रक्रिया थी?
- 6:41–6:43ये एक बहुत यी महत्वपून सवाल कभाल करता है.
- 6:44–6:45दर भगाना बहुत चोटी बात है.
- 6:45–6:47तो पिर अस्ली मक्सत क्या था?
- 6:47–6:52अगर हम इसे प्राषीन योद्धाऊं या शमन वादी परमपराँउं के चच्मे से देखें
- 6:52–6:56तो ये खुद को एक मनोवेग्याने कवच पहनाने की प्रक्रिया ही है
- 6:57–6:58मनोवेग्याने कवच
- 6:58–7:05पामने मुत खडी हो, तो आपका अपका इनसानी दमाग, आपका लोगिक आपको पीचे हदटने के लिए कहता है.
- 7:05–7:07वो तो सबहावक है, सरवावल इनस्टिंक्त.
- 7:07–7:37ये उपने बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ा
- 7:37–7:40उपने अजे सवर चटिया को चचन पर चोड दिता है
- 7:40–7:43लेकिन यहा कहानी में बहुत टीए बावजुद पूरे नियंटरन में दे
- 7:43–7:45आप नियंटरन नहीं कोया था अनोने
- 7:45–7:48ये मदहोषी नहीं फी ये एक बयाना किसम का फोकस था
- 7:48–7:51दंके की आवाज सहीदापूर में गूँचती है
- 7:51–7:53और वापसी के सारे रास्ते बन ड़ाते हैं
- 7:53–7:53बलकुल
- 7:53–7:55और इसके बाज जो होता है
- 7:55–7:57वो सच्मुच रोंग्टे कड़े कर दिने वाला है
- 7:57–8:00दंके की आवाज सुनकर मानिक चंद बहार आता है
- 8:00–8:05वो अपने अजे स्वर चटिया को चसन पर चोड देता है
- 8:05–8:08लेकिन यहा कहानी में बहुत ब्राँ मनुबैग्यानिक मुडा आता है
- 8:08–8:09वो कैसे?
- 8:09–8:12चटिया जो अप तक तना खुंकार ता
- 8:12–8:14चैचन के उस मेदिनी फुल वाले तेज
- 8:14–8:18और आत्म विश्वास को देखकर एक पल के लिए तिटख जाता है.
- 8:18–8:22जान्वर अन्सानी उर्जा को बहुत जल्दी बहांप लेते है.
- 8:22–8:23भिल्कुल.
- 8:23–8:26पन्मा और मानिक्चन चट्या को ललकारतें उसे उक्सातें.
- 8:26–8:28आखर कार सूर हमला करता है.
- 8:28–8:31और च्यचन अपनी ताकत का एसा प्रदशन करते हैं जो कलपना से परे है
- 8:31–8:32उनो ने क्या किया?
- 8:32–8:34वो अपने हत्यार का अस्तिमाली नी करते
- 8:34–8:35औरे
- 8:35–8:38वो सूर के दोनो पैर पटरते हैं और उसे भीच से चीर देते हैं
- 8:38–8:39एकी जटके में
- 8:39–8:40अजे एचट्या पराजइत
- 8:40–9:10वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 9:10–9:12उसे जमीन पर बजार दिते हैं.
- 9:12–9:16यहां कहानी वाकई बहुत दिलचस पोजाती है.
- 9:16–9:18कुकी मुझे यहां एक बड़ा जटका लगा.
- 9:18–9:19क्या वोआ?
- 9:19–9:22सोच यह उस यनसान का अजे रिकोट तूडगया,
- 9:22–9:25उसका पाल्तू जानवर मारागया, और वो खूश है.
- 9:25–9:27अग, मानिक चन खुश होता है.
- 9:28–9:30ये आज के समय के हिसाब से बहुत अजीब लगता है.
- 9:30–9:34अगर आज किसी किसी को पूरे समाज के सामने दूल चटा दे,
- 9:34–9:36तो दूशमनी पुस्तेनी हो जाती है.
- 9:36–9:39वुकि हम इसे आदूनिक इगो के नजर्ये से देख रहे है.
- 9:39–9:41तो उस्वै का नजरीया क्या था?
- 9:41–9:44उस्वै की कभीलाई समाज में व्यक्ती का एहंकार
- 9:44–9:48पूरे कभीले के अस्तित्वसे बहुत चोटा होता था.
- 9:48–9:51मानिक चन ने ये दंका इसले नी रख्खा था
- 9:51–9:53कि उसे अपनी अजेयाता का गमन्ध था.
- 9:53–10:01उस्छने ये सब इस्लिये किया ता कि वो आपनी बहन के लिए, और आप रत्यक्ष्रूब से आपने समाज के लिए,
- 10:01–10:05एक आँसा रक्षक दूँज़ सके, जो उस्से भी ज्यादा ताकत्वर हो.
- 10:05–10:07आच्छ, तो रार मेव उसकी जीट ती.
- 10:07–10:13बिल्कुल, जब चेचन ने उसे जमीन पर पटका, तो मानिक चन्द का एहंकार ज़रूर तूटा होगा.
- 10:13–10:14भूरा तो लगा होगा.
- 10:14–10:19लेकिन एक बहाई और एक सर्दार के रूप में, उसकी जमिदारी पूरी होगाए.
- 10:19–10:21उसे अपना उत्तर अदिकारी मिल गया.
- 10:21–10:26उस समाज में एक योग्ये युद्धा के हाथ तो हारना अप्मान नहीं
- 10:26–10:29बलकी एक सब्ठल परीक्षन माना जाता था
- 10:29–10:31ये वाके एक बहुती परीपक वद्रिष्टिकोन है
- 10:31–10:35एक बहयानक शत्रूता कैसे पल बर में पारिवारिक बंदन में बड़जाती है
- 10:35–11:05अग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उ�
- 11:05–11:07अदर और त्रासद अद्ध्याय शुरू होता है
- 11:08–11:12देक्ये शान्ति के समय में एक योद्धा सबसे कहतर नाए स्थिती में होता है
- 11:12–11:13वो कैसे?
- 11:13–11:17जो आख्रामकता और निदरता अखाडे में उसकी ताकत फीए
- 11:17–11:21वही गोन अब एक सब्व्या और शान्त समाजिक जीवन में
- 11:21–11:23उसके लिए समस्याये कष्टी कर सकते हैं
- 11:23–11:25हैं, समाजके अपने नियम होते हैं
- 11:25–11:29भिलकुल, एक ग्रास्त्र जीवन में समजोते होते हैं,
- 11:29–11:31सीमाये होती हैं
- 11:31–11:35लेकिं छेचन का दिमाग अभी उसे योद्धमोड में अटका हूँ आता
- 11:35–11:37और यह भात कहानी में बहुत जल साविद भी हो जाती है
- 11:37–11:40दिन भीत तेहां, लेकें छेचन्ट का निदर स्वबहूनी बदलता
- 11:40–11:42वो क्या करते है के यादवों के लोग देवता
- 11:42–11:45क्रिशना राम की बास की जाडी में
- 11:45–11:47जिसे स्रोथ में बस भिट्टी कहा गया है
- 11:47–11:49अगर हम इसे व्यापक संदर्फ में देखें,
- 11:49–11:53या या ये लोग समाज में पारमपरी क अदिकारो को लेकर होने वाली एक वास्त्ट्वेग गलत्वैंगी थी
- 11:53–11:56अगर हम इस से व्यापक संदर्फ में देखें
- 11:56–12:01तो क्रिषी प्रदान समाजो में एक शेट्ट्री ये विवादों और संसादनों का बहुत महत्वात्वाता
- 12:01–12:03अद्र बास कातना कोई चोटी बात नहीं थी
- 12:03–12:04बिलकु नहीं
- 12:04–12:06बास कर बनाने से लेकर
- 12:06–12:07हत्यार बनाने
- 12:07–12:08और यहां तकके
- 12:08–12:10अंतिम संसकार तक में काम आता था
- 12:10–12:12बास्टवेग गलत्फैमी थी?
- 12:12–12:14अगर हम इसे व्यापक संदर्फ में देखें
- 12:15–12:17तो क्रिषी प्रदान समाजो में इक शेट्ट्रीः विवादों
- 12:17–12:19और संसादनों का बहुत महत्वदा.
- 12:20–12:21मदलब बास कातना कोई चोटी बात नहीं थी?
- 12:22–12:22बिलकुल नहीं.
- 12:22–12:29बास कर बनाने से लेकर, हत्यार बनाने और यहां तकके अंतिम संसकार तक में काम आता था.
- 12:29–12:32न्द, संसादन ही सत्ता है.
- 12:32–12:38सही कहा, क्रिष्ना राम की बस बिट्टी से बिना पुचे बास कातना, केवले एक चोरी नहीं ती.
- 12:38–12:41ये एक सीदाक शेट्रा दिकार का उलंगन था
- 12:41–12:42एक समवदाय के दिव्टा को चनाउती
- 12:42–12:43आआ
- 12:43–12:47चेचन को शाएद अपनी ताकत पर इतना अत्ती आत्मविष्वास हो गया था
- 12:47–12:50कि उसे लगा वो पारमपरे कदिकारो से उबपर है
- 12:50–12:53यही अट्यात्मोविस्वास अन्सान को अंदा कर देता है.
- 12:53–12:56और जब क्रिश्नाराम को इस गुस्ताकी के बारे में पता चलता है,
- 12:56–12:59तो जो प्रतिक्रीया होती है, वो भ्यानक थी.
- 12:59–13:00क्रोथ तो आनाई था.
- 13:00–13:05क्रिश्नाराम क्रुदित होकर अपनी शक्तिशाली हाती सुब्रन पर सवार होकर बडला लेने आते हैं.
- 13:05–13:06सुब्रन हाती.
- 13:06–13:08अब उस समें चेचन क्या कर रहा है?
- 13:09–13:11वो किसी यूध्द के मेडान में तगयार नहीं हैं.
- 13:11–13:15वो एक आम के बागीचे में, जिसे आम कलम कहा गया है,
- 13:15–13:18अपनी पतनी पन्मा के साथ शानती से सोरा है.
- 13:18–13:22ये द्रिष्च इस पूरी गाता की सबसे बडी विडंबना है.
- 13:22–13:23विडंबना? कैसे?
- 13:23–13:28जो हीरो पहले इतना अजे ता, जिसने खुंकार सूर को चीर डाला था,
- 13:28–13:30वो ब कितना कमजोर स्तिती में है
- 13:30–13:33वो निहत्ता और सोता हुः पक्रडा गया है
- 13:33–14:03उग़ादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बा
- 14:03–14:06जिसे चेचन का हिलना दूलना भी असमबा वो जाते है
- 14:06–14:08ये बिलकुल चेक मेट है
- 14:08–14:09एक दम
- 14:09–14:11चेचन का अपना ही हत्यार
- 14:11–14:13जो उसकी ताकत का प्रतीक ता
- 14:13–14:15एक हाती दूरा उसी के खलाफे समाल की अजारा है
- 14:15–14:17इस गतना का
- 14:17–14:19अगर बजादिकात्मक अद्ध समजना वहड जरूरी है.
- 14:19–14:20वो क्या है?
- 14:20–14:22ये केवल एक शारेरेख हार नहीं है.
- 14:22–14:27ये एक संकेथ है कि प्रक्रिती या उस्छे बड़ी शक्ती के सामने मनुश्छ कबल सीमित है.
- 14:27–14:57अदियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादिया�
- 14:57–15:03अखाँ के लिए सुचना बहुत जरूरी है कि ये कहानी आज क्यो मैंने रकती है
- 15:03–15:04बिलकु।
- 15:04–15:06हम सब अपनी जिन्दगी की बोस बैटल्स लडते है
- 15:06–15:09लेकिन ये कहानी सुचने पर मजबोर करती है
- 15:09–15:12कि हम अपनी ताकतों का इस्तमाल कैसे करते है
- 15:12–15:14अगर अपनी सीमाये कैसे पहचानते?
- 15:14–15:16अगर अगर अपनी सीमाये लांगते हैं,
- 15:16–15:18तो कभी कभी हमारे अपने है अथ्यार,
- 15:18–15:20हमारे कहलाफ काम कर सकते हैं.
- 15:20–15:21सही कहा,
- 15:21–15:23शकती हासिल करना असान है,
- 15:23–15:25लेकिन उसे समभालना मुषकिल.
- 15:25–15:27लेकिन उसे समभालना मुषकिल
- 15:27–15:30और चर्चा का अंथ में एक एसे विचार के साथ करना चाथ हूँ
- 15:30–15:32जिस पर शाएद हम ने गवर नहीं किया
- 15:32–16:01उआप देखाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद ब
Plain text
बलकुल कलपना की जी, मान लीजे की, दूनिया का सब से अजे योद्धा, जमीन पर भेबस पडा है. और उसके आंकू के तीक सामने एक विशाल काय राथी कड़ा है. बलकुल, लेकिन लेकिन वो राथी उसे कुछलने की कोषिष्च नहीं कर रहा है. उसे अपनी सुन्द से उसी योद्धा की पच्छीस किलो की बारी बरकं तलवार उताए है अपना बारी पैर उस तलवार पर तिका दिया है मतला एक जरासी हरकत और खेल खतम एक दम खतम कोई कितना भी अजे क्यों नहो इस पल में उपुरी तरे से लाचार है तो आजकी हमारी इस गेहन चर्चा का विषे, मित्फिला के एक आजके ही योददा के बारे में हैं. एक आजके योददा जिसे किसी इनसान ने नहीं, बलके उसके अपने ही एहंकार, और प्रक्रती की एक विषाल शकती ने दूल चताए. अग, जलिये से तोड़ा विस्तार से समफते हैं, आजके हमारे श्रोथ बहुत ही अबबद हैं, विषे श्रुब से गजिंद्र ताकुर दवारा विदे, इपत्रिका में प्राचित एक प्राचीन लेक. बिलकुल, विदे अपत्रिका का वो लेक. तो ये नोट्स के माद्यम से हम मितला के दोमलोग देवता चेचन महराज के कता का विषलेशन कर रहे हैं. और मैं बतादु ये सरफ एक पुरानी वीर्गाता नहीं है. बलकल नहीं. जब मैंन न स्रूतो को गेराई से पडा तो मुझे अजा अस वा के ये कहानी असल में शक्ती की राजनी ती समाजिक सम्मान और उस मनोवे ग्यानिक तक्राओ का दस्तावेज है जाए अनसान खुद अपनी ही ताकत का शिकार हो जाता है देखे लोग कत्ठाऊं की खास्यत ही यही होती. सतापर देखने से तो वे बस बल और प्रेम की कहानिया लकती है. लेकिन अगर अगर उंके सांस्क्रतिक और अतिहास्सिक तानेबाने को समजें, तो वे तत्कालीन समाज की न्याई विवस्ता, अर कभीलाई नियोमों का पुरा कच्च्च्च्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट् अगर दोग बादा आप बादा आप पर प्रदाई बादा आप प्रदाई प्रदाई बादा आप प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदाई प्रदा� मिनी बोस को हराना परता है. मिनी बोस. हा, और यहां मिनी बोस है, मानिक चन्ट का खुंखार पाल्तु सुर, चतिया. औरे बाप्रे. जो चतिया को हराएगा, वही मानिक चन्ट से लडेगा. और जो मानिक चन्ट को हराएगा, उसे उसकी बहन, पन्मा से विवाह का दिकार मिलेगा अग लिकिन मुझे एक बाज समज निया आई मतलब अगर मानिखचा नित्ता बड़ा और शक्तिषाली सर्दार था तो उसने अखाडे में शेएर, बाग या भालु जैसे किसी एकसी शाही जानवर को क्यो निरख्खा आप ये सवाल उठना लाजमी है इक सूर से लडने की श्वर्त कुछ अजीब नहीं लकती क्या चट्या सरफ एक जानवर है या किसी बडी मूनोविग यानेक बादा कप्रतीक है यहां जो बात सब से अदेक आकरषिट करती है वो है उस जान्वर की असल प्रक्रती देखे, शेर या बाग सुन्ने में बहुत राजसी लगते हैं लेकिन अगर हम एक जंगली सूर या खुंकार वराह की शारिरिक सं़चना को देखें तो ये सवाल कुद बखुत कच्तम हो जाएगा यह आप यह खाँ से उस में? एक जंगली सूर का जु गुद्वा कशन केंदर होता है यह नी सेंटर अप ग्डविटी वो बहुत नीचे होता है वं चाही के रही हैं और उसकी चम्डी बेहद मोटी होती है और सब से बड़ी बात वो पुरी तेहां से अप्रत्याषित यानी अन्प्रटिक्टबल होता है मतलप उसका कोई पातन नहीं होता बलकुल नहीं जब वो हम्ला करता उस में कोई रडनीती नहीं होती सिर्फ एक अन्दी और हिंसक उर्जा होती है जिसे रोकना लगभग असमबव होता है मदव यह सिझ ताकत का नहीं बलकी गती और मान्सिक संदूलन का परेखषन ता? बलकोल मानिक्चन्द अपनी बहन्मा के लिए किवल एक अज्सा पती नहीं दून्डा था जिसके दोले बड़े हो या जो देखने में बलवान हो आप वो तो कोई भी हो सकता उईक आसा रक्षक तून रा था जो अप्रत्याशित संकत में यानी उस खुखार जानवर जैसी बेकाबू उस थी ती में भी अपनी जान बचाँ सके रहांग तरा का एवलुशनरी फिल्टर बलकोल ये उस समय के कभीलाई या गरामीण समाज में सरवाईवल का सबसे बड़ा पैमाना था मानेक च्चन का यप्रन कोई एहंकार का प्रदरषन नी था तो वो क्या था वो बस आपने पर्वार की अगली पीडी के लिए सबसे बहतरीं जीन्स और सबसे शक्षम रक्षक सुनिष्चित कर रा था. या बात है. ये नजर्या तो इस पूरी चुनोती को एक नयाही आद्ध दे दे देता है. अप शिचन महराज इस चुनोती को सुईकार करते हैं स्रोद बताते हैं कि शिचन के पास एक कत्ता है ये विशेश प्रकार का बहारी हत्यार विशेश प्रकार का बहारी हत्यार विशेश बहारी हत्यार और ये कोई सादरन हत्यार नहीं हैं इसका वजन पाज पसेरी यहनी लगबक पचीस किलो बताया गया है पचीस किलो? रहा पचीस किलो का हत्यार कोई कैसे चला सकता है यह तो व्यावारे क्रुब से समबव लकता है यहां हमें लोग कत्ठाव के आती शोकती वाले हिसे और उसके पीच्छे के आस्ली आर्थ को समजना होगा मतलब? ये तोडा बडाच़ाडा कर बताया गया है? आप, पच्छीस किलो का कता शाव्व शाब्दिक ना हों लेकिन यह इस बात का प्रतीक है कि चेचन के पास असादारन भाहुबल ता अर बारी हत्यारों का एक विग्यान होता है, मोमेंटम अग, गतीज उर्जा एक बार जब वो बारी हत्यार हवामे गूम्ला शुरू करता है, तो उसे रोकना किसी भी ध्धाल या अनसान के बस की बात नहीं होती बलकल लेकिन यहा हत्यार केवल शारीरेक ताकत का मुधाज नहीं ता दंके पर चोट करने से टीक पहले चेचन जो करते है वो इस गाता का सबसे रहस्यमाई हिस्सा है और रहे है, वो हिस्सा मुझे बहुती दिल्चस प्लगा चचन दंके पर चोट करने से पहले अग बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा� लिकिन क्या ये केवल नशे के प्रवाँव में आने का तरीका था? या या ये युध्द से पहले खुद को एक मनो वेग्याने कवच पहनाने की प्रक्रिया थी? ये एक बहुत यी महत्वपून सवाल कभाल करता है. दर भगाना बहुत चोटी बात है. तो पिर अस्ली मक्सत क्या था? अगर हम इसे प्राषीन योद्धाऊं या शमन वादी परमपराँउं के चच्मे से देखें तो ये खुद को एक मनोवेग्याने कवच पहनाने की प्रक्रिया ही है मनोवेग्याने कवच पामने मुत खडी हो, तो आपका अपका इनसानी दमाग, आपका लोगिक आपको पीचे हदटने के लिए कहता है. वो तो सबहावक है, सरवावल इनस्टिंक्त. ये उपने बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ाँ बज़ा उपने अजे सवर चटिया को चचन पर चोड दिता है लेकिन यहा कहानी में बहुत टीए बावजुद पूरे नियंटरन में दे आप नियंटरन नहीं कोया था अनोने ये मदहोषी नहीं फी ये एक बयाना किसम का फोकस था दंके की आवाज सहीदापूर में गूँचती है और वापसी के सारे रास्ते बन ड़ाते हैं बलकुल और इसके बाज जो होता है वो सच्मुच रोंग्टे कड़े कर दिने वाला है दंके की आवाज सुनकर मानिक चंद बहार आता है वो अपने अजे स्वर चटिया को चसन पर चोड देता है लेकिन यहा कहानी में बहुत ब्राँ मनुबैग्यानिक मुडा आता है वो कैसे? चटिया जो अप तक तना खुंकार ता चैचन के उस मेदिनी फुल वाले तेज और आत्म विश्वास को देखकर एक पल के लिए तिटख जाता है. जान्वर अन्सानी उर्जा को बहुत जल्दी बहांप लेते है. भिल्कुल. पन्मा और मानिक्चन चट्या को ललकारतें उसे उक्सातें. आखर कार सूर हमला करता है. और च्यचन अपनी ताकत का एसा प्रदशन करते हैं जो कलपना से परे है उनो ने क्या किया? वो अपने हत्यार का अस्तिमाली नी करते औरे वो सूर के दोनो पैर पटरते हैं और उसे भीच से चीर देते हैं एकी जटके में अजे एचट्या पराजइत वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� उसे जमीन पर बजार दिते हैं. यहां कहानी वाकई बहुत दिलचस पोजाती है. कुकी मुझे यहां एक बड़ा जटका लगा. क्या वोआ? सोच यह उस यनसान का अजे रिकोट तूडगया, उसका पाल्तू जानवर मारागया, और वो खूश है. अग, मानिक चन खुश होता है. ये आज के समय के हिसाब से बहुत अजीब लगता है. अगर आज किसी किसी को पूरे समाज के सामने दूल चटा दे, तो दूशमनी पुस्तेनी हो जाती है. वुकि हम इसे आदूनिक इगो के नजर्ये से देख रहे है. तो उस्वै का नजरीया क्या था? उस्वै की कभीलाई समाज में व्यक्ती का एहंकार पूरे कभीले के अस्तित्वसे बहुत चोटा होता था. मानिक चन ने ये दंका इसले नी रख्खा था कि उसे अपनी अजेयाता का गमन्ध था. उस्छने ये सब इस्लिये किया ता कि वो आपनी बहन के लिए, और आप रत्यक्ष्रूब से आपने समाज के लिए, एक आँसा रक्षक दूँज़ सके, जो उस्से भी ज्यादा ताकत्वर हो. आच्छ, तो रार मेव उसकी जीट ती. बिल्कुल, जब चेचन ने उसे जमीन पर पटका, तो मानिक चन्द का एहंकार ज़रूर तूटा होगा. भूरा तो लगा होगा. लेकिन एक बहाई और एक सर्दार के रूप में, उसकी जमिदारी पूरी होगाए. उसे अपना उत्तर अदिकारी मिल गया. उस समाज में एक योग्ये युद्धा के हाथ तो हारना अप्मान नहीं बलकी एक सब्ठल परीक्षन माना जाता था ये वाके एक बहुती परीपक वद्रिष्टिकोन है एक बहयानक शत्रूता कैसे पल बर में पारिवारिक बंदन में बड़जाती है अग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उग, उ� अदर और त्रासद अद्ध्याय शुरू होता है देक्ये शान्ति के समय में एक योद्धा सबसे कहतर नाए स्थिती में होता है वो कैसे? जो आख्रामकता और निदरता अखाडे में उसकी ताकत फीए वही गोन अब एक सब्व्या और शान्त समाजिक जीवन में उसके लिए समस्याये कष्टी कर सकते हैं हैं, समाजके अपने नियम होते हैं भिलकुल, एक ग्रास्त्र जीवन में समजोते होते हैं, सीमाये होती हैं लेकिं छेचन का दिमाग अभी उसे योद्धमोड में अटका हूँ आता और यह भात कहानी में बहुत जल साविद भी हो जाती है दिन भीत तेहां, लेकें छेचन्ट का निदर स्वबहूनी बदलता वो क्या करते है के यादवों के लोग देवता क्रिशना राम की बास की जाडी में जिसे स्रोथ में बस भिट्टी कहा गया है अगर हम इसे व्यापक संदर्फ में देखें, या या ये लोग समाज में पारमपरी क अदिकारो को लेकर होने वाली एक वास्त्ट्वेग गलत्वैंगी थी अगर हम इस से व्यापक संदर्फ में देखें तो क्रिषी प्रदान समाजो में एक शेट्ट्री ये विवादों और संसादनों का बहुत महत्वात्वाता अद्र बास कातना कोई चोटी बात नहीं थी बिलकु नहीं बास कर बनाने से लेकर हत्यार बनाने और यहां तकके अंतिम संसकार तक में काम आता था बास्टवेग गलत्फैमी थी? अगर हम इसे व्यापक संदर्फ में देखें तो क्रिषी प्रदान समाजो में इक शेट्ट्रीः विवादों और संसादनों का बहुत महत्वदा. मदलब बास कातना कोई चोटी बात नहीं थी? बिलकुल नहीं. बास कर बनाने से लेकर, हत्यार बनाने और यहां तकके अंतिम संसकार तक में काम आता था. न्द, संसादन ही सत्ता है. सही कहा, क्रिष्ना राम की बस बिट्टी से बिना पुचे बास कातना, केवले एक चोरी नहीं ती. ये एक सीदाक शेट्रा दिकार का उलंगन था एक समवदाय के दिव्टा को चनाउती आआ चेचन को शाएद अपनी ताकत पर इतना अत्ती आत्मविष्वास हो गया था कि उसे लगा वो पारमपरे कदिकारो से उबपर है यही अट्यात्मोविस्वास अन्सान को अंदा कर देता है. और जब क्रिश्नाराम को इस गुस्ताकी के बारे में पता चलता है, तो जो प्रतिक्रीया होती है, वो भ्यानक थी. क्रोथ तो आनाई था. क्रिश्नाराम क्रुदित होकर अपनी शक्तिशाली हाती सुब्रन पर सवार होकर बडला लेने आते हैं. सुब्रन हाती. अब उस समें चेचन क्या कर रहा है? वो किसी यूध्द के मेडान में तगयार नहीं हैं. वो एक आम के बागीचे में, जिसे आम कलम कहा गया है, अपनी पतनी पन्मा के साथ शानती से सोरा है. ये द्रिष्च इस पूरी गाता की सबसे बडी विडंबना है. विडंबना? कैसे? जो हीरो पहले इतना अजे ता, जिसने खुंकार सूर को चीर डाला था, वो ब कितना कमजोर स्तिती में है वो निहत्ता और सोता हुः पक्रडा गया है उग़ादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बा जिसे चेचन का हिलना दूलना भी असमबा वो जाते है ये बिलकुल चेक मेट है एक दम चेचन का अपना ही हत्यार जो उसकी ताकत का प्रतीक ता एक हाती दूरा उसी के खलाफे समाल की अजारा है इस गतना का अगर बजादिकात्मक अद्ध समजना वहड जरूरी है. वो क्या है? ये केवल एक शारेरेख हार नहीं है. ये एक संकेथ है कि प्रक्रिती या उस्छे बड़ी शक्ती के सामने मनुश्छ कबल सीमित है. अदियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादियादिया� अखाँ के लिए सुचना बहुत जरूरी है कि ये कहानी आज क्यो मैंने रकती है बिलकु। हम सब अपनी जिन्दगी की बोस बैटल्स लडते है लेकिन ये कहानी सुचने पर मजबोर करती है कि हम अपनी ताकतों का इस्तमाल कैसे करते है अगर अपनी सीमाये कैसे पहचानते? अगर अगर अपनी सीमाये लांगते हैं, तो कभी कभी हमारे अपने है अथ्यार, हमारे कहलाफ काम कर सकते हैं. सही कहा, शकती हासिल करना असान है, लेकिन उसे समभालना मुषकिल. लेकिन उसे समभालना मुषकिल और चर्चा का अंथ में एक एसे विचार के साथ करना चाथ हूँ जिस पर शाएद हम ने गवर नहीं किया उआप देखाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद ब