MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
छेछन_महाराज_की_वीरगाथा.mp4
Timestamped machine output
- 0:00–0:04मित्ला की लोक सम्रितियो में कई महान योद्धाउं की कहानिया दरज हैं,
- 0:04–0:09लेकिन आज हम जिस महाकावे गाता को खंगालने वाले हैं, वो बिलकुल अलग हैं.
- 0:09–0:15आज हम बात करेंगे दोम समुदाय के लोग देवता अदम में सहसी चेचन महाराज की,
- 0:15–0:21ये स्र्फ एक कहानी नहीं है, ये शक्ती, सम्मान और गेरे प्रेम का एक अईसा अबबत अख्यान है,
- 0:21–0:24जिसे सुनकर आज भी रुंक्ते कहडे हो जाते हैं.
- 0:24–0:27चल ये इस दिल्चस् सफर की शुवात करते हैं.
- 0:27–0:30अब जरा सोची ए, आखिर वो क्या चीज हो सकती है,
- 0:30–0:33तो किसी इन्सान को एक अईक अईक जंगली जान्वर
- 0:33–0:36और एक अईक अईक खुंकार सर्दार से बड़ने पर मजबोर कर दे
- 0:36–0:38जिने आज तक कोई नहीं हारा पाया
- 0:38–0:41मतलब इस असमबभ़ से लगने वाले महासंग्राम के अंप में
- 0:41–0:45असा क्या चिपा ता, जिसे पाना किसी योद्धा का सबसे बड़ा सबना हो सकता ता.
- 0:45–0:48आए इस रहेस से की तहेतक चलते हैं.
- 0:48–0:50हमारी इस कहानी की श्रवात होती है,
- 0:50–0:52एक असी भ्यानक ललकार से,
- 0:52–0:56जिसकी गूंज ने पूरे अलाके में तहल का मचा दिया था.
- 0:56–1:03तो होता कुछ यू है, एक दिन चेचन महराज कि साति सैदापृर गाँं से बास की तोक्रिया बेचकर लोटते हैं.
- 1:03–1:07वो आते ही एक भेहत खोफनाक और रोमानचक खबर सूनाते हैं.
- 1:07–1:14वो बताते हैं कि सैदापूर के बेहत ताकत्वर दोम सर्दार मानिक चन ने अपने गाँके भीचो-बीच एक विशाल डंका रख्वा दिया है.
- 1:14–1:21और सच मानिए ये कोई आम डंका नहीं था, बलकी ये खुले आम मोथ को बलावा देने वाली एक सिदी चुनाती ती.
- 1:21–1:28और इस चुनाती की शर्थ शर्थ इतनी ख़ोग नाग थी के सुनकर ही किसीके पिसीने चुडजाएं
- 1:28–1:30सर्दार मानिक्चन्ट का सीदा सा इलान ता
- 1:30–1:32जो भी इस दंके पर चोट करेगा
- 1:32–1:35उसे सब से पहले उनके बिहर्द खुंक्हार पाल्त। सूर
- 1:35–1:37चतिया से अपनी जान बचानी होगी
- 1:37–1:39अगर किस्मच से वो बच्चकया
- 1:39–1:42तो उसे खुद महाबली मानेक चन्ट से कुष्ती लडनी होगी
- 1:42–1:45और जो इस पूरी आगनी परिक्ष्षा को पार कर लेगा
- 1:45–1:49उसे एनाम में मिलेगी मानेक चन्ट की बहन पन्मा
- 1:49–1:51यानी सीधे सीधे शादी का प्रस्ताव
- 1:51–1:55सुची है, इस शर्थ का खोव्फ कितना ज्यादा रहा होगा.
- 1:55–2:00इक तरव आस पास के गाँ में लोग देशत के मारे फुस्फुसा कर इसके बाटे कर रहे थे,
- 2:00–2:05और दूस्री तरव सहीदापूर पर इस ललकार की काली च्या मन्डा रही थी.
- 2:05–2:07मुका तो बगड़ बड़ा था,
- 2:07–2:10लेकिन आज तक किसी में इतनी हिम्मत नहीं हुइ ती,
- 2:10–2:12कि जाकर उस दंके पर चोट कर सके.
- 2:12–2:16लेकिन चेचन महराज किसी आम मिठी के नहीं बने थे,
- 2:16–2:18इन खफना कफवाओं से दरने की बजाए,
- 2:18–2:19उनहुने तै किया,
- 2:19–2:22कि अब अपनी ताकत को आज्माने का वक्त आगया है
- 2:23–2:26पर सीदे जाकद दंका बजा देना इतना असान भी नहीं ता
- 2:26–2:31इसके लिए चेचन महराज एक बहेद खास और रहेस से मैं अनुश्ठान करते हैं
- 2:31–2:35सब से पहले वआपना भारी बरकं पाच पसेरी का कत उटाटाते हैं
- 2:49–3:19उगँगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग�
- 3:19–3:22आप आप आप आप विश्वास और चहरे पर एक अजीप सतेज
- 3:22–3:25जब सर्दार मानिक चंद उस जानवर को हमले का इशारा करते है,
- 3:25–3:27तो पता ही होता है.
- 3:27–3:30अपनी क्रुर्ता के लिये मशुर वो खुंकार जानवर
- 3:30–3:32चेचन की उस दिव याबह को देककर ही
- 3:32–4:02अगर बद्यादा पर बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्
- 4:02–4:10जिस चोट्या को कोई हरा नहीं सका था, वो बस एक वार में खत्म, जान्वर का काम तमाम हो चुका अगद.
- 4:10–4:16अब बारी थी हुद दोम सरदार मानेक चंद की, अब महाभली सरदार खुद अखाडे में उतरते हैं.
- 4:16–4:22देक्ते ही देक्ते ये च्नाउती एक रोंक्ते कडे कर देने वाले महाखाविये कुष्ती मैच में बड़जाती है.
- 4:22–4:25हाजारो दर्ष्खों की भीर् साज्स लिठा में देक्रेही दी.
- 4:25–4:29अखाडे की दूल के भीज तो महान योद्धाऊ की ताकत,
- 4:29–4:33उनका हुनर और उनका जुनुन आपस में तक्रार आथा.
- 4:33–4:35कोई भी हार मानने को तटयार नहीं ता.
- 4:35–4:39लेकिन अकिर में चेचन महराज अपनी असीं ताकत से
- 4:39–4:41मानिक चंद को जमीन पर देमारते है.
- 4:41–4:45उनो ले वो कर दिखाया था, जो आज तक नाममकिन माना जाता ता.
- 4:45–4:49इस एक जीटने चेचन महराज को हमेशा-हमेशा किलिए
- 4:49–4:53मित्ला के इतिहास का सबसे महान और अजे योध्धा बना दिया.
- 4:53–4:57दूल से बहरे उस अखाडे में मिली इस अटिहासिक जीट के बाद
- 4:57–5:02एक भेहद, कुबसुरत और अप्रत्याशित शान्तीच हाजाती है.
- 5:02–5:15अगर इस पूरी गटना पर गवर किया जाए, तो देखिए ये सब कितनी तेजी से हुए, पहले डंके पर चोट, फिर कुंकार जान्वर का अंथ, उसके बाद महाभली सरदार को दूल चताना, और अंप में एक पक्का वादा निभाना.
- 5:15–5:45सब से दिल्च्यस बात यह तो भी वागागा तो बागा वो बागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वा
- 5:45–5:47सच्छे प्रेम और एक पर्वार के रूप में मिला.
- 5:47–5:52लेकिन जरा रूकिए, अगर अख़्ा अग़्ा है कि कहानी खुषी-खुषी यही खात्म हो जाती है,
- 5:52–5:59तो आगे एक बड़ा ट्रिस्ट है, क्योंकी छेचन की इस नहीं नवेली शान्ती पर तुरन्ती ग्रहें लगने वाल अगता.
- 5:59–6:03मैदान में अचानक एक आँसा नया प्रतिदुन्दी आद्भंदी आद्भागता है,
- 6:03–6:09जिसके चलने बर से सच्झ्मुज दर्ती काम्ने लकती है, एक विशाल काई बेकाबू हाती.
- 6:09–6:14अप सवाल ये उट्ता है के एक आम अन्सान चाहे वो कितना भी ताकत वर क्यो नहो,
- 6:14–6:20एक विशाल काई हाती की दर्ती रिला देने वाले ताकत का सामना कैसे कर सकता है?
- 6:20–6:25अम चेचन महराज को इस नै असमबव से लगने वाले संकड के सामने खडा चोड रहे हैं.
- 6:26–6:31लेकिन यह में सुचने पर मजबोर ज़ोर करता है, कि अई अनसान की हिमवत की आकर सीमा क्या है.
- 6:31–6:36मित्हिला की लोग कताव में साहस की और कितनी परते चिपी है.
- 6:36–6:43ये एक आँसा विचार है, तो किसी को भी इस महान गाता के अगले अद्ध्याय के लिए पूरी तरह से बेकरार कर देगा.
Plain text
मित्ला की लोक सम्रितियो में कई महान योद्धाउं की कहानिया दरज हैं, लेकिन आज हम जिस महाकावे गाता को खंगालने वाले हैं, वो बिलकुल अलग हैं. आज हम बात करेंगे दोम समुदाय के लोग देवता अदम में सहसी चेचन महाराज की, ये स्र्फ एक कहानी नहीं है, ये शक्ती, सम्मान और गेरे प्रेम का एक अईसा अबबत अख्यान है, जिसे सुनकर आज भी रुंक्ते कहडे हो जाते हैं. चल ये इस दिल्चस् सफर की शुवात करते हैं. अब जरा सोची ए, आखिर वो क्या चीज हो सकती है, तो किसी इन्सान को एक अईक अईक जंगली जान्वर और एक अईक अईक खुंकार सर्दार से बड़ने पर मजबोर कर दे जिने आज तक कोई नहीं हारा पाया मतलब इस असमबभ़ से लगने वाले महासंग्राम के अंप में असा क्या चिपा ता, जिसे पाना किसी योद्धा का सबसे बड़ा सबना हो सकता ता. आए इस रहेस से की तहेतक चलते हैं. हमारी इस कहानी की श्रवात होती है, एक असी भ्यानक ललकार से, जिसकी गूंज ने पूरे अलाके में तहल का मचा दिया था. तो होता कुछ यू है, एक दिन चेचन महराज कि साति सैदापृर गाँं से बास की तोक्रिया बेचकर लोटते हैं. वो आते ही एक भेहत खोफनाक और रोमानचक खबर सूनाते हैं. वो बताते हैं कि सैदापूर के बेहत ताकत्वर दोम सर्दार मानिक चन ने अपने गाँके भीचो-बीच एक विशाल डंका रख्वा दिया है. और सच मानिए ये कोई आम डंका नहीं था, बलकी ये खुले आम मोथ को बलावा देने वाली एक सिदी चुनाती ती. और इस चुनाती की शर्थ शर्थ इतनी ख़ोग नाग थी के सुनकर ही किसीके पिसीने चुडजाएं सर्दार मानिक्चन्ट का सीदा सा इलान ता जो भी इस दंके पर चोट करेगा उसे सब से पहले उनके बिहर्द खुंक्हार पाल्त। सूर चतिया से अपनी जान बचानी होगी अगर किस्मच से वो बच्चकया तो उसे खुद महाबली मानेक चन्ट से कुष्ती लडनी होगी और जो इस पूरी आगनी परिक्ष्षा को पार कर लेगा उसे एनाम में मिलेगी मानेक चन्ट की बहन पन्मा यानी सीधे सीधे शादी का प्रस्ताव सुची है, इस शर्थ का खोव्फ कितना ज्यादा रहा होगा. इक तरव आस पास के गाँ में लोग देशत के मारे फुस्फुसा कर इसके बाटे कर रहे थे, और दूस्री तरव सहीदापूर पर इस ललकार की काली च्या मन्डा रही थी. मुका तो बगड़ बड़ा था, लेकिन आज तक किसी में इतनी हिम्मत नहीं हुइ ती, कि जाकर उस दंके पर चोट कर सके. लेकिन चेचन महराज किसी आम मिठी के नहीं बने थे, इन खफना कफवाओं से दरने की बजाए, उनहुने तै किया, कि अब अपनी ताकत को आज्माने का वक्त आगया है पर सीदे जाकद दंका बजा देना इतना असान भी नहीं ता इसके लिए चेचन महराज एक बहेद खास और रहेस से मैं अनुश्ठान करते हैं सब से पहले वआपना भारी बरकं पाच पसेरी का कत उटाटाते हैं उगँगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग� आप आप आप आप विश्वास और चहरे पर एक अजीप सतेज जब सर्दार मानिक चंद उस जानवर को हमले का इशारा करते है, तो पता ही होता है. अपनी क्रुर्ता के लिये मशुर वो खुंकार जानवर चेचन की उस दिव याबह को देककर ही अगर बद्यादा पर बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद्यादा बद् जिस चोट्या को कोई हरा नहीं सका था, वो बस एक वार में खत्म, जान्वर का काम तमाम हो चुका अगद. अब बारी थी हुद दोम सरदार मानेक चंद की, अब महाभली सरदार खुद अखाडे में उतरते हैं. देक्ते ही देक्ते ये च्नाउती एक रोंक्ते कडे कर देने वाले महाखाविये कुष्ती मैच में बड़जाती है. हाजारो दर्ष्खों की भीर् साज्स लिठा में देक्रेही दी. अखाडे की दूल के भीज तो महान योद्धाऊ की ताकत, उनका हुनर और उनका जुनुन आपस में तक्रार आथा. कोई भी हार मानने को तटयार नहीं ता. लेकिन अकिर में चेचन महराज अपनी असीं ताकत से मानिक चंद को जमीन पर देमारते है. उनो ले वो कर दिखाया था, जो आज तक नाममकिन माना जाता ता. इस एक जीटने चेचन महराज को हमेशा-हमेशा किलिए मित्ला के इतिहास का सबसे महान और अजे योध्धा बना दिया. दूल से बहरे उस अखाडे में मिली इस अटिहासिक जीट के बाद एक भेहद, कुबसुरत और अप्रत्याशित शान्तीच हाजाती है. अगर इस पूरी गटना पर गवर किया जाए, तो देखिए ये सब कितनी तेजी से हुए, पहले डंके पर चोट, फिर कुंकार जान्वर का अंथ, उसके बाद महाभली सरदार को दूल चताना, और अंप में एक पक्का वादा निभाना. सब से दिल्च्यस बात यह तो भी वागागा तो बागा वो बागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वागागा वा सच्छे प्रेम और एक पर्वार के रूप में मिला. लेकिन जरा रूकिए, अगर अख़्ा अग़्ा है कि कहानी खुषी-खुषी यही खात्म हो जाती है, तो आगे एक बड़ा ट्रिस्ट है, क्योंकी छेचन की इस नहीं नवेली शान्ती पर तुरन्ती ग्रहें लगने वाल अगता. मैदान में अचानक एक आँसा नया प्रतिदुन्दी आद्भंदी आद्भागता है, जिसके चलने बर से सच्झ्मुज दर्ती काम्ने लकती है, एक विशाल काई बेकाबू हाती. अप सवाल ये उट्ता है के एक आम अन्सान चाहे वो कितना भी ताकत वर क्यो नहो, एक विशाल काई हाती की दर्ती रिला देने वाले ताकत का सामना कैसे कर सकता है? अम चेचन महराज को इस नै असमबव से लगने वाले संकड के सामने खडा चोड रहे हैं. लेकिन यह में सुचने पर मजबोर ज़ोर करता है, कि अई अनसान की हिमवत की आकर सीमा क्या है. मित्हिला की लोग कताव में साहस की और कितनी परते चिपी है. ये एक आँसा विचार है, तो किसी को भी इस महान गाता के अगले अद्ध्याय के लिए पूरी तरह से बेकरार कर देगा.