MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

गरीबन_बाबा_कथाक_मार्मिक_समीक्षा.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.784735)
Duration
9:50
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:05आई हम सब सगजेंद्र ताकुरक गरीबन बाबा कताक समिक्षा कर रहल जी,
  2. 0:05–0:14जते एक ता निर्दोष दोभी अनजाने में भेल भूल का कारन दैवी कोप का शिकारबह म्रत्यो के प्राप्त करे ची,
  3. 0:14–0:17आ अंत तद रक्षक देवता बनी जाए चे.
  4. 0:17–0:20आई बहुत मार्मिक कता आचे
  5. 0:20–0:24इक दम तप्रस्तुत कता क एक तपाग समभावना
  6. 0:24–0:30दैवी, कोपर, मानवी, भूलक, भीचक, असन्तुलन के आऔर गहीर का विष्लेषित कर अब ची.
  7. 0:30–1:00अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ�
  8. 1:00–1:03वह ने गरीबन तबस आपन काज कर आल चल
  9. 1:03–1:07सत्ते कहल यह इगधन करम बहुत सपष्ट रूप सराखल गे लची
  10. 1:07–1:10वह मुदा की चु खडकी रहल आची आते
  11. 1:10–1:15देखो, हमर इशोच वची जे की अनजाने मे भेल भूल
  12. 1:15–1:18इते एक पैग दंडक भीज के कथा करी
  13. 1:18–1:22तीवर मने आख कहवा करत थे जल्द भाजी बहुगेल
  14. 1:22–1:26आग दम मने कता बहुत तेजी सा अन जाने मे भेल आस्पर्स सा सोजे देवी दोरा बान्दिन पथेबाक निन्ने दरी पहुची जाईते
  15. 1:26–1:28ओ, हो, हम भूज लाओ।
  16. 1:28–1:32भी बादिन पथे बाक निदने दरी पहुची जाईते
  17. 1:32–1:34अहो, हम भूज लाओ।
  18. 1:34–1:36आई ता हूँ देविक आन्तरिक द्वंद
  19. 1:36–1:40या औई द्रम्हान्दिय नियमक दाशनिक गेराएक अबहाव आची
  20. 1:40–1:42जकर कारने एक ता निर्दोष मनुष्षिके
  21. 1:42–1:47जगर कारने एक ता निर्दोश मनुश्षी के एहन भ्यंकर दन्द बेटल
  22. 1:47–1:51आख खारन छी भूलत अ अनजाने मे भेल चल, कुन जानी भुचके कते खेल ने गेल चल
  23. 1:51–1:55एक दम सही, इसंकरमद तनी जल्दबाजी मे भेल बुजाई तची
  24. 1:55–1:58ते एकर थीक के ना केल जासके तची?
  25. 1:58–1:59तची तची जाव यह ची
  26. 1:59–2:01जे देविक निरने लेबाक प्रक्रिया
  27. 2:01–2:04वा उही पवित्र पीडिक नेपठे मेरहल ब्रम्हांडय महतो में
  28. 2:04–2:06किच आर परत जोडल जाए.
  29. 2:06–2:09परत जोडल जाए, मैंने उकर और विस्तार देल जाए?
  30. 2:09–2:39आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  31. 2:39–2:45माने जकन पैर लागल तकेवल दूरी नहीं उडल कोनो अद्द्दिश्य उडल तुटल.
  32. 2:45–2:52एक दाम जाही से इग लागाई जे देवी के आहन कषोर कदम उठावे ले बाद्द्यबार रहल आची.
  33. 2:52–2:55इब बहुत सुन्दर द्दिश्य भहो सकतची.
  34. 2:55–3:04आद्दोसर विकल्प यहो आची जे आद्दर्बार में बादिन प्रथेबाशे पुर्व कोनो चोटसन समवाद वा हिच की चाहत दिखावल जाए.
  35. 3:04–3:11औहो जीना देवी स्वेम विचार कर थी जे यी मानम निर्दोशा ची मुदा नियमत नियमा ची.
  36. 3:11–3:20सत्यकाली ए, बस यि स्पष्ट केल जाए, जे यि सुज्याओ समस्या समदानक अनेक समबावित उपायमसद किचु मात्र आची.
  37. 3:20–3:24आप, लेक्ख अपन अनुसार से हो कर सकेच्छती.
  38. 3:24–3:25एक दम.
  39. 3:25–3:30ता आब कताक भावनात्मक प्रवाहके और भेसी प्रभाव्शाली बनावाक लेल,
  40. 3:30–3:36कन्याक विलाप आत्माक प्रवेशक दिश्यमे गत्यात्मक विस्तारक अवषकता आची.
  41. 3:36–3:41आप, आप, अही भाग का बात कर रहल ची, जटे आत्मा गुईम का आईत आची.
  42. 3:41–4:11आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  43. 4:11–4:13तुर्द्त, मैंने आहा कहे ची, जे तुर्थ बोगेल.
  44. 4:13–4:15आह, एक दम तेजी सब.
  45. 4:15–4:18एते रहस्य और रहोकिक वजन स्तापित करबाक,
  46. 4:18–4:22जे एक ता उत्क्रिष्त अफसर चल से गमा दिल गेल अच्ये.
  47. 4:22–4:25मैंने, दिष्य में गती बहुत तेज अच्यी,
  48. 4:25–4:29एते रहस्ये और गलोकिक वजन स्तापित करबाक,
  49. 4:29–4:33जे एक ता उतक्रिष्ट अफसर चल से गमा दिल गेल ऐच्छे.
  50. 4:33–4:36माने, दिश्ये में गती बहुत देज अची,
  51. 4:36–4:38जाई से उ गलोकिक प्रबाव नहीं आवी रहाग लग ची.
  52. 4:38–4:41ता आअ की सुजाव अची एक रालेल?
  53. 4:41–4:50दिखो, सुजाव बहुत सीथा आची, कन्याक प्रार्थना आब भगता मे आत्माक प्रवेश क्मद्यः कताक गती के तनी दिमा करल जाए.
  54. 4:50–4:55दिमा करल जाए जाए सपात्ख उएक्षन के महसुस कर सके.
  55. 4:55–4:57इक्द मात्मा कपन वेथा कहीवाक पूर्ब
  56. 4:57–5:01एक ता रहस्यमया अगगमभीव वातावरन का निर्मान काल जाए
  57. 5:01–5:06तई वातावरन के ना बनाल जासके तची कोनो तोस उदारन?
  58. 5:06–5:09आ, वातावरन के चित्रन काल जासके तची
  59. 5:09–5:13जेना प्रार्त्ना काल में कमला दारक जलस्तर का अचानक बडलब
  60. 5:13–5:18ओह, माने प्रक्रती से हो उई दुख में शामिल भार रहला चे
  61. 5:18–5:23आ, वा तेज हवा कब बहवब सुरु भाय जाय जे गाज पात के जगज होरी जाय
  62. 5:23–5:26ए तब बहुत रोमान्चक लागत सुन्भा में
  63. 5:26–5:32आएकर अतिरिक्त गामक लोकक प्रारम्म, ब्रहम, ब्हाई अज्चर्यके देखाउल जासके तची.
  64. 5:32–5:37जखन बखता अचानक गरीबन कप परिचित स्वर में भाजब सुरू करओई तची,
  65. 5:38–5:41तखन लोकक जे प्रतिक्रिया हैत, उतब बहुत डरावना हैत.
  66. 5:41–5:45सत्या कहलीے, उबहाई के सबद में उतारा बावष्षक अची.
  67. 5:45–5:48आप, श्रोता के याद दिलावल जाए,
  68. 5:48–5:50जे ईमात्र किचु द्रिष्तान तची,
  69. 5:50–5:53अलेखख अपन रच्नात्मकता के अनुसार,
  70. 5:53–5:55इकाजकर सकत चती.
  71. 5:55–5:58एक दम सही, इत बस किचु उपायचे.
  72. 5:58–6:00अगर प्रभाब उत्मे बेसी गहीर होई तची
  73. 6:00–6:02आब हम्रा लागगे तची
  74. 6:02–6:04हम सब कतख अंतिम हिस्सावी रहल ची
  75. 6:04–6:06आप, उस सामूहिक प्रैश्चित वला हिस्सा
  76. 6:06–6:08आप, सामूहिक प्रैश्चित गहतना के
  77. 6:08–6:10केवल बहईक परिनामक बडला में
  78. 6:10–6:25अद्र बवाईक परिनामक बद्ला में गहीर नेटिक जागरन कर रूप में प्रस्तुत किनाई कताक मुल सन्देश के आवर सचक्त कर सकत अची
  79. 6:25–6:27इक तब बहुत पएख बिन्दु अची
  80. 6:27–6:32वो उगर बाद वो बी समुदाय कमलादार मे कुद कल लहास ताकी लेत अची असंखार करे तची.
  81. 6:32–6:37एक दम ता यहा कताक जे इ मोड अची उख्रा आहा किना देखाएची.
  82. 6:37–6:46आम इद तारकिपत अची मुदा की समुदाय दवारा इख्काज केवल लगाज प्रद लगाज.
  83. 6:46–6:52ये गदम ता यहा कथाक जे इ मोड अची उक्रा आहा किना देखाएची
  84. 6:52–6:59आम इद तारकिप्त अची मुदा की समवुदाई दवारा इग काज केभल आपन भद्थी बचेबाक सवार्थ संकायल गेल चल
  85. 6:59–7:02या एहे में कोनो नैतिग विजैसे हो अची
  86. 7:02–7:06यादे पी इस्वबहावी कची, मुदा इ न्याय, समान, आम्रित व्यक्ते प्रती, मानवी सम्विदनाजा का मुल विष्यक प्रभाव के तनी कमजोर कदेताची.
  87. 7:07–7:11एक दम सत्या, इगठाक उज के कम कै रहल अच्यन.
  88. 7:11–7:41यग दोभी समुदायक प्रेरना के केवल जीविका चिन्बाक बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बह�
  89. 7:41–7:45अदाहनाक लेल दोभी समवडायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जाएग.
  90. 7:45–7:49अदाहनाक लेल दोभी समवडायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जाएग.
  91. 7:49–7:53अदाहनाक लेल दोभी समवडायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जाएग.
  92. 7:53–8:02अख्रा सब के यी अहिसास हो बाख चाही, जे उसब अनजाने में जे अप्राद कडे लक्हन, उ मानवताक विरुद अची.
  93. 8:02–8:06तएकर लेल कोनो समवाद या द्रिष्ष कहन हो बाख चाही.
  94. 8:06–8:11अ, उदाहनाक लेल दोभी समवदायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जासके तची,
  95. 8:11–8:17जतेई कोनो वयोव्रिद दोभी लहास का अनादरक अद्यात्मिक भोजक अहसास कराबे.
  96. 8:17–8:23औरे वा, माने कोनो व्रिद दोभी बजदा, जे ए हमर आत्माक भोज अची.
  97. 8:23–8:29आप जाही से रहुंकर कार ये बवयक बडला रहुड़े परिवर्टन का परिणाम लागए.
  98. 8:29–8:31इत बहुत गेर प्रभाव चोडद.
  99. 8:31–8:36अख्वा जे दोभी अग्यान्तावश लहासके सहतारी देनचल,
  100. 8:36–8:41अखर विशेश रूक से नदी में खोज करत अपश्चाताप कर दिख हाँल जासके तची
  101. 8:41–8:48अखर अखर आखिन सक्धनोर आश्रमा याचना एह द्रषी के बहुत भावुक बनादित
  102. 8:48–8:55इक्दम फेरा सा ऐई इस्पस्ट कायल जाए, जे सुदारक के लेल इ किचु गिनल चुनल तरीका आचे.
  103. 8:55–9:03आआ, मुख्छि लक्ष इया ची, जे समुदायक काजके बहयक सतस उठा क, नैतिक्ता क शिक्धर दरी लेल जाए.
  104. 9:03–9:05सत्ते कहलिया
  105. 9:05–9:10ता संख्शेप में कही सकत ची, जे समीख्शा का मुख्छे बिन्दु सब ची,
  106. 9:10–9:13देवी दंद कर तारकिक्ता में गेराई लावब,
  107. 9:13–9:17अलोकिक द्रिष्षबक गती के रहस्यमय बनावब,
  108. 9:17–9:23असामोइक प्राएश्चित के बहाएक बदला नैतिक जागरड करूप मिस थापिद करब
  109. 9:23–9:27एक दम यी तीन बदलाव कता के एक ता नव उचाए देत
  110. 9:27–9:36ता हम श्रोता सब से आगरह करब, जे एह इस पष्ट अकार ये सादख सुजाव सब अपन सामगरी में लागु कर थी
  111. 9:36–9:41हम्रा विश्वास अची, जे इ सुजहाव हुनका सब लेल बहुत प्योगी सिद्धहाईत.
  112. 9:41–9:49अन्त में, अहा सब के आमन्त्रित करद ची, जे अपन सुद्दारल गेल काज के आवर समिक्षाक लेल फेरस पथाव.
  113. 9:49–9:51आई लिल बसित्टबे.

Plain text

आई हम सब सगजेंद्र ताकुरक गरीबन बाबा कताक समिक्षा कर रहल जी, जते एक ता निर्दोष दोभी अनजाने में भेल भूल का कारन दैवी कोप का शिकारबह म्रत्यो के प्राप्त करे ची, आ अंत तद रक्षक देवता बनी जाए चे. आई बहुत मार्मिक कता आचे इक दम तप्रस्तुत कता क एक तपाग समभावना दैवी, कोपर, मानवी, भूलक, भीचक, असन्तुलन के आऔर गहीर का विष्लेषित कर अब ची. अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ� वह ने गरीबन तबस आपन काज कर आल चल सत्ते कहल यह इगधन करम बहुत सपष्ट रूप सराखल गे लची वह मुदा की चु खडकी रहल आची आते देखो, हमर इशोच वची जे की अनजाने मे भेल भूल इते एक पैग दंडक भीज के कथा करी तीवर मने आख कहवा करत थे जल्द भाजी बहुगेल आग दम मने कता बहुत तेजी सा अन जाने मे भेल आस्पर्स सा सोजे देवी दोरा बान्दिन पथेबाक निन्ने दरी पहुची जाईते ओ, हो, हम भूज लाओ। भी बादिन पथे बाक निदने दरी पहुची जाईते अहो, हम भूज लाओ। आई ता हूँ देविक आन्तरिक द्वंद या औई द्रम्हान्दिय नियमक दाशनिक गेराएक अबहाव आची जकर कारने एक ता निर्दोष मनुष्षिके जगर कारने एक ता निर्दोश मनुश्षी के एहन भ्यंकर दन्द बेटल आख खारन छी भूलत अ अनजाने मे भेल चल, कुन जानी भुचके कते खेल ने गेल चल एक दम सही, इसंकरमद तनी जल्दबाजी मे भेल बुजाई तची ते एकर थीक के ना केल जासके तची? तची तची जाव यह ची जे देविक निरने लेबाक प्रक्रिया वा उही पवित्र पीडिक नेपठे मेरहल ब्रम्हांडय महतो में किच आर परत जोडल जाए. परत जोडल जाए, मैंने उकर और विस्तार देल जाए? आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ माने जकन पैर लागल तकेवल दूरी नहीं उडल कोनो अद्द्दिश्य उडल तुटल. एक दाम जाही से इग लागाई जे देवी के आहन कषोर कदम उठावे ले बाद्द्यबार रहल आची. इब बहुत सुन्दर द्दिश्य भहो सकतची. आद्दोसर विकल्प यहो आची जे आद्दर्बार में बादिन प्रथेबाशे पुर्व कोनो चोटसन समवाद वा हिच की चाहत दिखावल जाए. औहो जीना देवी स्वेम विचार कर थी जे यी मानम निर्दोशा ची मुदा नियमत नियमा ची. सत्यकाली ए, बस यि स्पष्ट केल जाए, जे यि सुज्याओ समस्या समदानक अनेक समबावित उपायमसद किचु मात्र आची. आप, लेक्ख अपन अनुसार से हो कर सकेच्छती. एक दम. ता आब कताक भावनात्मक प्रवाहके और भेसी प्रभाव्शाली बनावाक लेल, कन्याक विलाप आत्माक प्रवेशक दिश्यमे गत्यात्मक विस्तारक अवषकता आची. आप, आप, अही भाग का बात कर रहल ची, जटे आत्मा गुईम का आईत आची. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� तुर्द्त, मैंने आहा कहे ची, जे तुर्थ बोगेल. आह, एक दम तेजी सब. एते रहस्य और रहोकिक वजन स्तापित करबाक, जे एक ता उत्क्रिष्त अफसर चल से गमा दिल गेल अच्ये. मैंने, दिष्य में गती बहुत तेज अच्यी, एते रहस्ये और गलोकिक वजन स्तापित करबाक, जे एक ता उतक्रिष्ट अफसर चल से गमा दिल गेल ऐच्छे. माने, दिश्ये में गती बहुत देज अची, जाई से उ गलोकिक प्रबाव नहीं आवी रहाग लग ची. ता आअ की सुजाव अची एक रालेल? दिखो, सुजाव बहुत सीथा आची, कन्याक प्रार्थना आब भगता मे आत्माक प्रवेश क्मद्यः कताक गती के तनी दिमा करल जाए. दिमा करल जाए जाए सपात्ख उएक्षन के महसुस कर सके. इक्द मात्मा कपन वेथा कहीवाक पूर्ब एक ता रहस्यमया अगगमभीव वातावरन का निर्मान काल जाए तई वातावरन के ना बनाल जासके तची कोनो तोस उदारन? आ, वातावरन के चित्रन काल जासके तची जेना प्रार्त्ना काल में कमला दारक जलस्तर का अचानक बडलब ओह, माने प्रक्रती से हो उई दुख में शामिल भार रहला चे आ, वा तेज हवा कब बहवब सुरु भाय जाय जे गाज पात के जगज होरी जाय ए तब बहुत रोमान्चक लागत सुन्भा में आएकर अतिरिक्त गामक लोकक प्रारम्म, ब्रहम, ब्हाई अज्चर्यके देखाउल जासके तची. जखन बखता अचानक गरीबन कप परिचित स्वर में भाजब सुरू करओई तची, तखन लोकक जे प्रतिक्रिया हैत, उतब बहुत डरावना हैत. सत्या कहलीے, उबहाई के सबद में उतारा बावष्षक अची. आप, श्रोता के याद दिलावल जाए, जे ईमात्र किचु द्रिष्तान तची, अलेखख अपन रच्नात्मकता के अनुसार, इकाजकर सकत चती. एक दम सही, इत बस किचु उपायचे. अगर प्रभाब उत्मे बेसी गहीर होई तची आब हम्रा लागगे तची हम सब कतख अंतिम हिस्सावी रहल ची आप, उस सामूहिक प्रैश्चित वला हिस्सा आप, सामूहिक प्रैश्चित गहतना के केवल बहईक परिनामक बडला में अद्र बवाईक परिनामक बद्ला में गहीर नेटिक जागरन कर रूप में प्रस्तुत किनाई कताक मुल सन्देश के आवर सचक्त कर सकत अची इक तब बहुत पएख बिन्दु अची वो उगर बाद वो बी समुदाय कमलादार मे कुद कल लहास ताकी लेत अची असंखार करे तची. एक दम ता यहा कताक जे इ मोड अची उख्रा आहा किना देखाएची. आम इद तारकिपत अची मुदा की समुदाय दवारा इख्काज केवल लगाज प्रद लगाज. ये गदम ता यहा कथाक जे इ मोड अची उक्रा आहा किना देखाएची आम इद तारकिप्त अची मुदा की समवुदाई दवारा इग काज केभल आपन भद्थी बचेबाक सवार्थ संकायल गेल चल या एहे में कोनो नैतिग विजैसे हो अची यादे पी इस्वबहावी कची, मुदा इ न्याय, समान, आम्रित व्यक्ते प्रती, मानवी सम्विदनाजा का मुल विष्यक प्रभाव के तनी कमजोर कदेताची. एक दम सत्या, इगठाक उज के कम कै रहल अच्यन. यग दोभी समुदायक प्रेरना के केवल जीविका चिन्बाक बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बहुत बह� अदाहनाक लेल दोभी समवडायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जाएग. अदाहनाक लेल दोभी समवडायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जाएग. अदाहनाक लेल दोभी समवडायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जाएग. अख्रा सब के यी अहिसास हो बाख चाही, जे उसब अनजाने में जे अप्राद कडे लक्हन, उ मानवताक विरुद अची. तएकर लेल कोनो समवाद या द्रिष्ष कहन हो बाख चाही. अ, उदाहनाक लेल दोभी समवदायक भीच एक ता चोड समवाद जोडल जासके तची, जतेई कोनो वयोव्रिद दोभी लहास का अनादरक अद्यात्मिक भोजक अहसास कराबे. औरे वा, माने कोनो व्रिद दोभी बजदा, जे ए हमर आत्माक भोज अची. आप जाही से रहुंकर कार ये बवयक बडला रहुड़े परिवर्टन का परिणाम लागए. इत बहुत गेर प्रभाव चोडद. अख्वा जे दोभी अग्यान्तावश लहासके सहतारी देनचल, अखर विशेश रूक से नदी में खोज करत अपश्चाताप कर दिख हाँल जासके तची अखर अखर आखिन सक्धनोर आश्रमा याचना एह द्रषी के बहुत भावुक बनादित इक्दम फेरा सा ऐई इस्पस्ट कायल जाए, जे सुदारक के लेल इ किचु गिनल चुनल तरीका आचे. आआ, मुख्छि लक्ष इया ची, जे समुदायक काजके बहयक सतस उठा क, नैतिक्ता क शिक्धर दरी लेल जाए. सत्ते कहलिया ता संख्शेप में कही सकत ची, जे समीख्शा का मुख्छे बिन्दु सब ची, देवी दंद कर तारकिक्ता में गेराई लावब, अलोकिक द्रिष्षबक गती के रहस्यमय बनावब, असामोइक प्राएश्चित के बहाएक बदला नैतिक जागरड करूप मिस थापिद करब एक दम यी तीन बदलाव कता के एक ता नव उचाए देत ता हम श्रोता सब से आगरह करब, जे एह इस पष्ट अकार ये सादख सुजाव सब अपन सामगरी में लागु कर थी हम्रा विश्वास अची, जे इ सुजहाव हुनका सब लेल बहुत प्योगी सिद्धहाईत. अन्त में, अहा सब के आमन्त्रित करद ची, जे अपन सुद्दारल गेल काज के आवर समिक्षाक लेल फेरस पथाव. आई लिल बसित्टबे.

← Transcript index