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बहुरा_गोढ़िन_आ_नटुआ_दयालक_तांत्रिक_युद्ध.m4a

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Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.915702)
Duration
1:52
Source
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  1. 0:00–0:07नमश्कार य आच्छी भहुरा गोडिन अननतुवा डयाल के प्राछीन गाताक एक तवरिट साराश्च.
  2. 0:07–0:15कमला बलान नदी के तट्पर पस्रल, तन्त्र विद्या, प्रेम, अब बलीदानक य अछ्ट्यंत रोचक मैत्ली लोग कता,
  3. 0:15–0:17अम्रा सब के बुजव्यात अच्छी
  4. 0:17–0:21जे जादू अप प्रेमक रस्ता कतिक खटरनाग भहसकत अच्छी
  5. 0:21–0:25पहल बात बहुरा गोडिनक जादू की असादारन शक्ती
  6. 0:25–0:29उग काम्रूप शेत्रसा, एहन, तन्त्र सीके नच्लिन
  7. 0:29–0:31जे क्रोद में लोग के सुग्गा बनाके
  8. 0:31–0:33अपन पिंजरा मे पोसले चलहीन
  9. 0:33–0:35अबहरोड के राज्कुमार दयाल
  10. 0:35–0:37वूनर भेटी से प्रेम के कारन
  11. 0:37–0:39नटूवा माने नरतक
  12. 0:39–0:41अट्टान्त्रिक बनी गिला
  13. 0:41–0:43तनिक सोचु जा आहा के सासु
  14. 0:43–0:45एटेक शक्तिषाली होइत
  15. 0:45–0:47जे क्रोध मे आहा के सुगगा बना द्यत
  16. 0:47–0:52ता आहा की करब, दो सर बात नतुवा दयालक भयानक तान्तरिक संगर्ष,
  17. 0:52–0:58बूजु जे बहुरा अपन जादू के प्रभाउसां रस्ताक कमला नदी के दारे सुखादे लन,
  18. 0:58–1:02एक राकाट्वाग लेल दयाल द्यान अशरीर के गुप्त उर्जा,
  19. 1:02–1:05जेना आग्या चक्रके जाग्रत करे वाली
  20. 1:05–1:07उग्र तन्त्रिक विद्या प्राप्त्ते लन.
  21. 1:07–1:11सच कहुता, इकोनो राज्कुमारक मात्र जिद नीच्जल,
  22. 1:11–1:14बनकी प्रेम के पाबाक लेल, लडल गेल,
  23. 1:14–1:16एक तक हतरनाक अद्यात्मिक युद्च्छल.
  24. 1:16–1:19अन्त्मे प्रेम अजीवनक परम अदला बडली
  25. 1:19–1:25विवाग के समय कमला नदी के तटट पर नटूवा के ओकर अपन शिष्च दूखा से मारी देलन
  26. 1:25–1:28अन्नटूवाग प्रान नदी के बली चडिगेल
  27. 1:28–1:31तकर बाद एक ता पैक जादुगर नी आबी
  28. 1:31–1:43उई दोकेबाश शिष्षक बली दे कर नटूवा के पुनर जीवन देलन, अव आही कहूँ, कि एहन न्याय के हम पून न्याय कही सकत ची, चति एकर जीवन बचाबाक लेल दोसरक बली देल जाए.
  29. 1:43–1:52खेर, इग़ कता हमरा सब के याध दियावे तची, जे जजदी प्रेम अतन्त्रिक तक्राहित हो तची, उते न्याय अपन कधोर रस्ता स्वरम चूनी ले तची.

Plain text

नमश्कार य आच्छी भहुरा गोडिन अननतुवा डयाल के प्राछीन गाताक एक तवरिट साराश्च. कमला बलान नदी के तट्पर पस्रल, तन्त्र विद्या, प्रेम, अब बलीदानक य अछ्ट्यंत रोचक मैत्ली लोग कता, अम्रा सब के बुजव्यात अच्छी जे जादू अप प्रेमक रस्ता कतिक खटरनाग भहसकत अच्छी पहल बात बहुरा गोडिनक जादू की असादारन शक्ती उग काम्रूप शेत्रसा, एहन, तन्त्र सीके नच्लिन जे क्रोद में लोग के सुग्गा बनाके अपन पिंजरा मे पोसले चलहीन अबहरोड के राज्कुमार दयाल वूनर भेटी से प्रेम के कारन नटूवा माने नरतक अट्टान्त्रिक बनी गिला तनिक सोचु जा आहा के सासु एटेक शक्तिषाली होइत जे क्रोध मे आहा के सुगगा बना द्यत ता आहा की करब, दो सर बात नतुवा दयालक भयानक तान्तरिक संगर्ष, बूजु जे बहुरा अपन जादू के प्रभाउसां रस्ताक कमला नदी के दारे सुखादे लन, एक राकाट्वाग लेल दयाल द्यान अशरीर के गुप्त उर्जा, जेना आग्या चक्रके जाग्रत करे वाली उग्र तन्त्रिक विद्या प्राप्त्ते लन. सच कहुता, इकोनो राज्कुमारक मात्र जिद नीच्जल, बनकी प्रेम के पाबाक लेल, लडल गेल, एक तक हतरनाक अद्यात्मिक युद्च्छल. अन्त्मे प्रेम अजीवनक परम अदला बडली विवाग के समय कमला नदी के तटट पर नटूवा के ओकर अपन शिष्च दूखा से मारी देलन अन्नटूवाग प्रान नदी के बली चडिगेल तकर बाद एक ता पैक जादुगर नी आबी उई दोकेबाश शिष्षक बली दे कर नटूवा के पुनर जीवन देलन, अव आही कहूँ, कि एहन न्याय के हम पून न्याय कही सकत ची, चति एकर जीवन बचाबाक लेल दोसरक बली देल जाए. खेर, इग़ कता हमरा सब के याध दियावे तची, जे जजदी प्रेम अतन्त्रिक तक्राहित हो तची, उते न्याय अपन कधोर रस्ता स्वरम चूनी ले तची.

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