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छेछन_महराज_आ_पच्चीस_किलोक_कत्ता.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:09आ, कल्पना करू, एक ता एहन गामक, जते विवाह के लेल कुनो समान न दहेजवा माने कुन्डली काविषकता नहीं हो.
  2. 0:09–0:19एकर बडलाम में, शर्त यहो, जे एक ता कुखार, दूसो पाव्ण्ड के जंगली सुगर के बिना कुनो अस्त्रक खाली हाते चीरे परत.
  3. 0:19–0:26बाप्रे, सूनिते मात्र आंग सिहर जाएत ची, यी तो एक द्वं क्रूर सन्सार के दिशजकल अगल.
  4. 0:26–0:33बलकुल, और ये एक ता एहन आदिम सन्सार अची, जते शारीरिक शकती के वल दिखावे लेल नही चे,
  5. 0:33–0:37यी समाज में जिन्दा रहभाकर एक मात्र गयरन्ती ची,
  6. 0:37–0:41अगदाम, जदे दोम लोग देवता चेचन महराज का गाता जीवित होगी तची.
  7. 0:41–0:46आई की गंवीर चर्चा, वगख हु अनवेशन एही विशैपर आची.
  8. 0:46–0:52एक दम जते दोम लोग देवता चेचन महराज का गाता जीवित होगी तची
  9. 0:52–0:57आएकी गंभीर चर्चा वख हु अनवेशन एही विशैपर अची
  10. 0:57–1:04जकन हमी कताक पन्ना पलडत हूँ तब हमरा लागल जिना हमेक ता मनोवे ग्यानिक रन भूमी में प्रवेश कर अची
  11. 1:04–1:34आईईजी पच्छिस किलोक आस्ट्र वा सुगर सर लडबाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग ब
  12. 1:34–1:38अखरा कोन अतिश्योक्ती माना पैक भूल हैते
  13. 1:38–1:43अच्छा, तई बास्तव में तत्कालीन समाजक यतार्थ चल
  14. 1:43–1:48भिल्ल्कुड, जकन कोन लोग कता एक सुख्ष्म विवरन दैई तची
  15. 1:48–1:51अखर उदेशे केभल मनुरंजन नही होई चे
  16. 1:51–1:56दों समद्वायक भीत्रक, समाजिक सन्रचना, सम्मान, अशक्ती सन्तुलनक,
  17. 1:56–1:58एक ता जटिल चित्र प्रस्थ।
  18. 1:58–2:02माने, कोना एक ता योद्धाक उदै होई ता ची,
  19. 2:02–2:05अक कोना उकर आंकार, उकर पतनक कारन बने ता ची.
  20. 2:05–2:08तचालु इी रहस्यमए गथाक शुर्वात करेट ची
  21. 2:08–2:12आप याप शहीदापृर गामक द्रिष्य सा सुर्वात होगी तची
  22. 2:12–2:19एक तम शहीदापृर गाँ में चेचेनुक संगी साती बास कर तोकरी अ पत्या भेची का अवेच्छती
  23. 2:19–2:24उसब चेचन के दोम सर्दार मानिक चन्दक विषय में बतवई चती
  24. 2:24–2:27उही मानिक चन्दक जे दंका चल, उम्मुक आकर्षन चल
  25. 2:27–2:32शर्ट एचल, जे दंका पर चोट करबाक अथ है ची
  26. 2:32–2:35जे आहां के पहले मानिक चन्दक पोसुवा
  27. 2:35–2:38मुदा बहुत ब्यंकर जंगली सुगर स लड़ी परत,
  28. 2:38–2:40उकर नाम चल चत्या.
  29. 2:40–2:42आ उक्रा हरे लाग बाद की?
  30. 2:42–2:45तकन मानिक चंद सा दंगल लड़ी परत,
  31. 2:45–2:48आजा उत्यो विज़यी बहागे लहू,
  32. 2:48–2:54तकन पुरस्कार स्वरूप मानिक चंदक बैन पन्मा सविवाहक अदिकार भेटत.
  33. 2:54–2:57इत त, सच्मे कोनो प्राषीन कालक अखाडा जका जगे,
  34. 2:57–3:00जते जीवन आम्रित्युक दाई। लागल अचे.
  35. 3:00–3:04हम्राती बिलकुल कोनो आदूनिक विटियो गेम जका लागल.
  36. 3:04–3:12माने, पहिल लेवल में चत्या नामक बोस के हराओ, दोसर लेवल में मानिक चंदक के, आ अन्त में राज कुमारी से विवाहा.
  37. 3:12–3:15आ, एक दम सती कुपमा आचे ही.
  38. 3:15–3:18मुदा, रह मरेक्ता प्रष्न ची.
  39. 3:18–3:25विवाह कलेल इस सुबगर सा लड़बाक विछित्र स्वर्ट के पाचू आखेर की तर्ख भोसके तची?
  40. 3:25–3:28की इस के वल क्रूर्ता का प्रदर्षन चल?
  41. 3:28–3:30नहीं नहीं इस क्रूर्ता नहीं चल.
  42. 3:30–3:36इवास्तव में योगे तमक उतर जीविता, मने सरवाईवल अब तफ्टेस्ट का समाजिक रूप ची.
  43. 3:36–3:41प्राची नादिवासी वो सीमान्त क्रित समाज में नियाले वो पुलिस्ता नहीं चल नहीं?
  44. 3:41–3:44आँ, उते ता बाहु बल ही नियाए चल.
  45. 3:44–3:46बिल्कुल, मानिक चंद सर्दार चला,
  46. 3:46–3:50तहुंका उपर आपन कभीला आब भैईनक सुरक्षाक दाईत छल.
  47. 3:51–3:53सुगर उही पाश्विक शक्तिक प्रतीक चल,
  48. 3:53–3:57जग्रा निंट्रित करव समान्य मानवक बस का बात नहीं अचे.
  49. 3:57–4:01मने, उो इदेखध चाहत चला है जे,
  50. 4:01–4:07उनकर होभे वाला बहेनोई में, मरित्तिव रूपी भाएको के वष्पे करबाक सहस अचीवा नहीं.
  51. 4:07–4:11एक दम सही. दंका एते केवल वाद दे यंप्र नहीं?
  52. 4:11–4:14एक ता वेदहमिक उदबहोषना चल.
  53. 4:14–4:20दंका बजेवाक मतलप समपुन समाजक सोजा आपन प्रान के बाजी लगा यभ
  54. 4:20–4:23बापरे, यटे एक ता क्धरनाक अगनी परिक्षाचल
  55. 4:23–4:26आ यटे आबी कदाख सब से रोचक मोडवे देखेद
  56. 4:26–4:31मने दंका पर चोट करा से पूर्व चेचन महराज की तईयारी
  57. 4:31–4:34आँ उ तग्यारी बहुत मेत उपूरन आची
  58. 4:34–4:36उएक ता बूडी सा आगी मागी
  59. 4:36–4:39चिल्लम में मेदनी फुल भरी कप पीवे च्ठें
  60. 4:39–4:42एक रा पीभलाग बाद हुंकर शरी रा आतमा
  61. 4:42–4:45अद्मा जिना एक ता अलगस्तर पर पहजजाईता ची
  62. 4:46–4:48एकरा बादे उप्पून नियन्त्रन मेरहेत
  63. 4:49–4:50दंका पर चोट करे चा दिन
  64. 4:51–4:53इप बहुत विचारनी आ बिन्दू अची
  65. 4:53–4:56आ, कारड एकरा पडी का हम्रा लागल जे
  66. 4:56–4:58की इप खेवल एक ता नशा चल
  67. 4:58–5:04कि उ दर्द के सुन्न कर्बाक लेल, वड़र भगाबाक लेल, कुनो मादग द्रव्ये लेले लेले नहीं?
  68. 5:04–5:10दिखो, जग हम्रा सब एक रा केवल नशा मानी लेप, तब इब बहुत उतला विष्लिषन है ते
  69. 5:10–5:13नशा मनुश्ष्चके निंट्रन लगा तेचे
  70. 5:13–5:16मुदा चेचन पुल निंट्रन में चतिन
  71. 5:16–5:18इवास्तू में यक ता अनुश्टान चल
  72. 5:18–5:19अनुश्टान?
  73. 5:19–5:22मने कोनो मान्सिक तयारीक प्रक्रिया
  74. 5:22–5:25आ, नूरो सायंस का द्रिष्टिकून से बुचू
  75. 5:25–5:33ता जगन कोनो मनुश्छ म्रिट्ट्ट्यो भायसा गरसित होई ता मस्तिष्क का आमिक डाला सक्रियब होजाएच्छे.
  76. 5:33–5:36इज्च्की चाहत पएदा करी ताछी.
  77. 5:36–5:40अ, आ युद्दे में इज्च्की चाहत माने सीदा म्रिट्ट्ट्यो.
  78. 5:40–5:48बिल्कुल मेदनी फुल को उचिलम समववता एक ता एहन, रासाईनिक वा मनोविग्यानिक उप्रे रक्च्छल,
  79. 5:48–5:55जे उई भाये कंद्रक के सुन्नक दैच्छल, उकर बाद मस्तिषक केवल लक्षापर कंद्रिद बाजाएच्छे.
  80. 5:55–6:03अरे वाज, माने उआपन दर अक कमजोरी त्यागी का पून रूपें एक ता शिकारी चेतना में प्रवेश कर अला चला.
  81. 6:03–6:06एक दम, यी एक ता ट्रन्जिशन चल.
  82. 6:06–6:09ये ता उहीना अच्छी जना आदनिक खिलाडी,
  83. 6:09–6:12खेल से पहले एक अशुन्ने किस थिती में जाए चती,
  84. 6:25–6:27तुरन्त देखा पडेताची
  85. 6:27–6:29जगन युद्ध शुरु भोत आची
  86. 6:29–6:31तट्चत्या सुगर चेचनाक निरभाईता देख का
  87. 6:32–6:33स्वायम दरा जाएचे
  88. 6:33–6:36इद्रिश्या सच्मे रोंटा ताटाडागा देताची
  89. 6:36–6:37बलकल
  90. 6:37–6:40चेचनोकर दूनु पाजुक पैर पक्री का
  91. 6:40–6:42उक्रा हाते चीर देते थे थी
  92. 6:42–6:45पच्च्स किलोक कता उठेबा वाला मनुष्छ
  93. 6:45–6:47खाली हाते सुगर पाडी देते थी
  94. 6:47–6:49गजब का शक्ती चल हूनाक
  95. 6:49–6:51मुदा हम्राई सूने का आश्वरे भिल
  96. 6:51–6:54जिक कोनु मनुष्छक उर्जा एतिक प्रकर बहुज
  97. 6:54–7:00जँंगली जान्वर उकर देख कर दराजाई जान्वर तो कोनो तरक नहीं भुजाई च्याई
  98. 7:00–7:02आख प्रश्न बहुत गंभीर अच्छी
  99. 7:02–7:05एकर उत्तर पशु मनो विच्णान में बेटे तची
  100. 7:05–7:09पशु संसार में समवाद शब्दसा नहीं गंद और उर्जा से होई तची
  101. 7:09–7:11अखार उखर गंद सुंग कबूजी जाए तची जे इस शिकार अची.
  102. 7:11–7:13अखार उखर गंद सुंग कबूजी जाए तची जे इस शिकार अची.
  103. 7:13–7:15अखार उखर गंद सुँग कबूजी जाए तची जे इस शिकार अची.
  104. 7:15–7:17अगर अद्रेनालीन हर्मोन बनेतची
  105. 7:17–7:20जानवर उकर गंद सुंग कबूजी जाईतची
  106. 7:20–7:21जे इश शिकार अची
  107. 7:21–7:22अग
  108. 7:22–7:25माने चेचन मेदिनी फुल पीभा लक बाद
  109. 7:25–7:27बिलकुल तरल नहीं चला
  110. 7:27–7:29तो गंद है आई लही नहीं
  111. 7:29–7:31उगर सही पक्डल हूँ आहा
  112. 7:31–7:34उनकर शरीज सा शिकार का गंद नहीं आभी रहाल चल
  113. 7:34–7:36आखी मे कोनो हीच्की चाहत नहीं चल
  114. 7:36–7:40सुगर उही आदम मे आत्मा विष्वास के महसुस कल लग
  115. 7:40–7:43आब भूजीगेल जे इश्खारी आची आहार नहीं
  116. 7:43–7:50विश्लेशन्त पूरा द्रिष्टिकों बद्ली देलक, मुदध एक्रा बाद के खतना कताके एक तर नव्दिशा मिलजा जाएते ची.
  117. 7:50–7:54सुगर के वद भेला के बाद मानिक चन्संच दंगल होगते ची.
  118. 7:54–7:57आव, अई ते परनाम बिलक्ल अलग होगते ची.
  119. 7:57–8:04इक दम, चेचन मानिक चन्त के केवल बजारी का मने पतक का पराजित करे चे थिन.
  120. 8:04–8:10सुगर के अट्तिन्त क्रूर्ता से भाडी दिल गल, मुदे मानिक चन्त के कोनो गमभीर चोट नहीं पहुषावल गल.
  121. 8:10–8:15आँ सब से रोचाग बाज्जे हार लाग बादोद मानिक चन दूखी नहीं प्रसन न हो इच्छाती
  122. 8:15–8:18हाँ, इवरा लेल बहुत द्याना कर सक चल
  123. 8:18–8:22एक ता शक्तीषाली सर्दार अपना हार पर प्रसन न की एक अची
  124. 8:22–8:27इतकोनो बहुत सक्त ससुर्व साला दूरा लेल गेल अंटर्व्युजे का लागल
  125. 8:27–8:57आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, �
  126. 8:57–8:59अगर दिलजाबावला सर्वोच सम्मान चिल
  127. 8:59–9:02एते य शक्ती विद्वन सक नहीं
  128. 9:02–9:04बलकी नव सम्वंदक सर्जक बन्गेला
  129. 9:04–9:06एक दम सही कहला हूँ
  130. 9:06–9:09तजा अम्रा सब पारमपरी कताख डहाचा देखी
  131. 9:09–9:12तजा एते आबी का कता समाप्त भोजा बचाही
  132. 9:12–9:16बवज़ा बक चाही नायक के पूरस्कार भेट गेल, खूशी-खूशी विवाह बहुगेल
  133. 9:16–9:19मुदा लोक कता इतेक सरल नहें होई तची
  134. 9:19–9:24बलकल नहीं, कता क असली मनो वैग्यानेक रूप आब देखाई बतची
  135. 9:24–9:29विवाहक बाद चेचन आब केवल योद्धा नहीं ग्रिहस्त बनी गेला
  136. 9:29–9:34मुदा की एका योद्धा अचानक अपन हिंसक प्रवरती के बंद का सकएत अची
  137. 9:34–9:35कता कनुसारतन नहीं
  138. 9:35–9:39आप, उई यादवक लोक बेवता क्रिषनराम का बस भिट्टी
  139. 9:39–9:42मैंे बास का गाची सा बिना अनमती बास काटे लगला है
  140. 9:43–9:47इवूंका एक ता नव अब बहुत शक्तिशाली विरोदिक सोजा ताड कदेलव
  141. 9:47–9:49इप रसंग बहुत गेरा ची
  142. 9:50–9:51हमरो इई सोचबापर विवषके लेक
  143. 9:52–9:53जिज शान्तिपून जीवन जीभे
  144. 9:53–9:56इक ता योद्दालेल एते कद्धिन किया होई तची
  145. 9:56–9:59मने, आक्ष्छन रीरो के गर्ट बेट गल
  146. 9:59–10:02मुदा उश्शान्ती से तरकारी ने की नी सकै तची
  147. 10:02–10:04उनका उत्योब यवाद चाही
  148. 10:04–10:09इमानव मनोविद्यान असमाजिक यतार्ठक कद्वन्द ची
  149. 10:09–10:14दोम समथा एक जीविका बास कषमागरी बनेवा पर निरभर चील
  150. 10:14–10:17तब बास काटबा हुनक आर्थिक आविषकता चल
  151. 10:17–10:19मुदा क्रिश्नाराम से मिना अनुमती लेबा
  152. 10:19–10:20इतो पम्गाले बा बहलने?
  153. 10:20–10:25आप ख़न क्रिष्नाराम इस्थापित सत्ता अबहु स्वामित्वक प्रतीक चल आहा
  154. 10:25–10:29इदिकार क्यों रव रव लंगन चल और मनोवि ज्यानक बात करी,
  155. 10:29–10:33तजे वेक्ती जीवन भरी मारी काटकेने आची,
  156. 10:33–10:36उषान्ती कालक नियम नहीं भुजाई चे.
  157. 10:36–10:40माने, एक ता हत्फोडी लेल सब की चुख काईटी जगा होई तशे?
  158. 10:40–10:44बिल्कुल, चेचल लेल उ बस्बट्ती नीजी समपती नहीं,
  159. 10:44–10:48केवल एक ता संसादंचल, जक्रा उ आपन भल पर लोसके चला हा.
  160. 10:48–10:52योद्ख आहंकार उक्रा समाज इक सत्टाग विद्रूी बना दिच्छे.
  161. 10:52–10:55इतो बहुत कथरनाएक स्तीती बहुगे,
  162. 10:55–10:59आब एक्ता व्यक्ति का बलक तक्राव इस्तापित सत्ता से भहरहे लचे
  163. 10:59–11:02आ उसत्ता पुर्न क्रोदख संगे प्रतिकार करे तशी
  164. 11:02–11:06आ, अ कता का चर्मोद कर्ष एते से शुरू ही तची
  165. 11:06–11:11क्रिश्नाराम क्रोदिद भ्हा आपन विशाल हाती सुबरन पर च़के अबे चथीन
  166. 11:11–11:15उच्छन के आमक गाची में पन्मा कसंशुतल देखे चथीन
  167. 11:15–11:19आप द्खन जे द्रुषे गतित होई तची उ इस्टबद करे वाला चे
  168. 11:19–11:22एक दानम आप रत्याशित द्रुष्या चे हो
  169. 11:36–12:06तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो वाद्यादागा तो बवाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वा
  170. 12:06–12:09अगर आपन ताकत अखर कमजोरी बनीगेल
  171. 12:09–12:12आईते यहो भुज़ा बावष्यक अचे जे हाती
  172. 12:12–12:15मने सुब्रन केवल जानवर नहें जे
  173. 12:15–12:18सुगर चत्या अराजक्ताक प्रतीक चल
  174. 12:18–12:20जक्रा चेचन रहा देलने
  175. 12:20–12:21मुदा हाती
  176. 12:21–12:27यहो बुज़ा बावष्यक अचे जे हाती मने सुबरन केवल जान्वर नहे आचे
  177. 12:27–12:32सुगर चत्या अराजक्ताक प्रतीक चल जक्रा चेचन रहा देलने मुदा हाती
  178. 12:32–12:36हाती माने इश्वर्या शक्ती वा अनुशाशित बलक प्रतीक
  179. 12:36–12:51बलक्ल, इसन्स्तागत सत्ता अप्रत्रतिक उही आसीम बलक्प्रती कची, जकर सोजा मनुश्षके वेक्तिगत बल्भाना बोचायत ची, हाती शानत ची, मुदा अकरबार अजेय आची.
  180. 12:51–12:54इबात हम्रा बहुत ग़राई दरी प्रभाविद कर रहला ची
  181. 12:54–12:57छेचन सुतल चला, अचेट चला
  182. 12:57–13:00जे एकाग्रता दंका बजिवा काल चल
  183. 13:00–13:03उ आम के गाचीक चाहमे कतो हेरा गल चल
  184. 13:03–13:07उ मानी लेल ने जे आब हुनका कुनो चिनोती नहीद चाए तची
  185. 13:07–13:11इस सत्ता आप प्रक्रिति के सबस्त शक्ती प्रदर्षन चल.
  186. 13:11–13:13क्रिषनारामी देखा दिलने,
  187. 13:13–13:15जे योद्धा चाहे जत्तिक पैग हो,
  188. 13:15–13:19प्रक्रिति उक्रा एक चन में निष्प्रभावी कर सके तची.
  189. 13:19–13:21आप सबसे कहास बात ए,
  190. 13:21–13:23जे हाती हुंका कुचले न नहीं,
  191. 13:23–13:26केवल हुंके सीमक बोद करावलगल
  192. 13:26–13:31आप, इदेखावे तची, जे एक ता योद्दाक शान्ति के समय में,
  193. 13:31–13:34सबसे बेसि सतरक रहवाक अवषकता हो इच्टाए.
  194. 13:34–13:38आधार जकन सतरकताके कथम कर दे तची,
  195. 13:38–13:40तचन अज्येताक ब्रम तुटी जाए तची.
  196. 13:40–13:44तजगन हम्रा सब इलोक गाताक सरांश निकालेची,
  197. 13:44–13:46तईईस पष्ट बहुजायतची,
  198. 13:46–13:49जे ईकेवल युद्धक विजे कतानही आची.
  199. 13:49–13:53इमानवक आहंकार अश्क्तिक अद्रिष्य सीमाक गंभीर अनवेशन आची.
  200. 13:53–13:54इक्दम सही.
  201. 13:54–13:59श्रोता लेल इबुजम अवष्षक अची, जे सफलताक शिक्धर पर पहुचला दरी,
  202. 13:59–14:04इस मरन राखभ जरूरी आची, जे कोनो नव अपरचित शक्ती,
  203. 14:04–14:08आहाक आपन सादन के आहाक विरुद प्रयोग कसके तची.
  204. 14:08–14:10इबहुत सथ्ते आची,
  205. 14:10–14:18सिनेमा में तन नायक धुशमन के हरा देतची, आ रहा पी एंटिंग भोजातची, मुदा वास्त्विक जीवन में संगर्ष निरन्तर चलेत रहेंतची.
  206. 14:18–14:21बलकुल, जीवन एत बे सरल नहीं अची.
  207. 14:21–14:24ता आए जखन हम्रा सभी चर्चा समाप्त करहल ची
  208. 14:24–14:29ता इगेरा मन्तन हम्रा सब के एक ता नव प्रष्नपर चोडी जाएत ची
  209. 14:29–14:31उम की अच्छे अप प्रष्नप?
  210. 14:31–14:35जग एक ता जेय योद्द्धाग पराजग, युध्द भूमी में नहीं
  211. 14:35–14:41बलकी शान्तिक श़ण में सुतल अवस्तामे उकर अपन अस्तृर से भूस्सकेत अची.
  212. 14:41–14:45तक की शक्तिक अस्ली परिक्षा युध जीत बामे आची,
  213. 14:45–14:49वा शक्तिक मद में अपने सूरक्षा से असावदान नहीं हूई बामे आची?
  214. 14:49–14:51बहुत गंभीर प्रश्न अची
  215. 14:51–14:57अग, की एक ता योद्धा के लेल शान्तिक समय, वास्तम युधके मेडान से बेसी कहतरनाग भहसकाई ता ची?
  216. 14:58–15:04इक ता एह प्रष्न ची जक्रापर विचार करभ आवश्षक अची, करनी मानव प्रक्रूतिक शवच्छत्ते ची.

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आ, कल्पना करू, एक ता एहन गामक, जते विवाह के लेल कुनो समान न दहेजवा माने कुन्डली काविषकता नहीं हो. एकर बडलाम में, शर्त यहो, जे एक ता कुखार, दूसो पाव्ण्ड के जंगली सुगर के बिना कुनो अस्त्रक खाली हाते चीरे परत. बाप्रे, सूनिते मात्र आंग सिहर जाएत ची, यी तो एक द्वं क्रूर सन्सार के दिशजकल अगल. बलकुल, और ये एक ता एहन आदिम सन्सार अची, जते शारीरिक शकती के वल दिखावे लेल नही चे, यी समाज में जिन्दा रहभाकर एक मात्र गयरन्ती ची, अगदाम, जदे दोम लोग देवता चेचन महराज का गाता जीवित होगी तची. आई की गंवीर चर्चा, वगख हु अनवेशन एही विशैपर आची. एक दम जते दोम लोग देवता चेचन महराज का गाता जीवित होगी तची आएकी गंभीर चर्चा वख हु अनवेशन एही विशैपर अची जकन हमी कताक पन्ना पलडत हूँ तब हमरा लागल जिना हमेक ता मनोवे ग्यानिक रन भूमी में प्रवेश कर अची आईईजी पच्छिस किलोक आस्ट्र वा सुगर सर लडबाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग ब अखरा कोन अतिश्योक्ती माना पैक भूल हैते अच्छा, तई बास्तव में तत्कालीन समाजक यतार्थ चल भिल्ल्कुड, जकन कोन लोग कता एक सुख्ष्म विवरन दैई तची अखर उदेशे केभल मनुरंजन नही होई चे दों समद्वायक भीत्रक, समाजिक सन्रचना, सम्मान, अशक्ती सन्तुलनक, एक ता जटिल चित्र प्रस्थ। माने, कोना एक ता योद्धाक उदै होई ता ची, अक कोना उकर आंकार, उकर पतनक कारन बने ता ची. तचालु इी रहस्यमए गथाक शुर्वात करेट ची आप याप शहीदापृर गामक द्रिष्य सा सुर्वात होगी तची एक तम शहीदापृर गाँ में चेचेनुक संगी साती बास कर तोकरी अ पत्या भेची का अवेच्छती उसब चेचन के दोम सर्दार मानिक चन्दक विषय में बतवई चती उही मानिक चन्दक जे दंका चल, उम्मुक आकर्षन चल शर्ट एचल, जे दंका पर चोट करबाक अथ है ची जे आहां के पहले मानिक चन्दक पोसुवा मुदा बहुत ब्यंकर जंगली सुगर स लड़ी परत, उकर नाम चल चत्या. आ उक्रा हरे लाग बाद की? तकन मानिक चंद सा दंगल लड़ी परत, आजा उत्यो विज़यी बहागे लहू, तकन पुरस्कार स्वरूप मानिक चंदक बैन पन्मा सविवाहक अदिकार भेटत. इत त, सच्मे कोनो प्राषीन कालक अखाडा जका जगे, जते जीवन आम्रित्युक दाई। लागल अचे. हम्राती बिलकुल कोनो आदूनिक विटियो गेम जका लागल. माने, पहिल लेवल में चत्या नामक बोस के हराओ, दोसर लेवल में मानिक चंदक के, आ अन्त में राज कुमारी से विवाहा. आ, एक दम सती कुपमा आचे ही. मुदा, रह मरेक्ता प्रष्न ची. विवाह कलेल इस सुबगर सा लड़बाक विछित्र स्वर्ट के पाचू आखेर की तर्ख भोसके तची? की इस के वल क्रूर्ता का प्रदर्षन चल? नहीं नहीं इस क्रूर्ता नहीं चल. इवास्तव में योगे तमक उतर जीविता, मने सरवाईवल अब तफ्टेस्ट का समाजिक रूप ची. प्राची नादिवासी वो सीमान्त क्रित समाज में नियाले वो पुलिस्ता नहीं चल नहीं? आँ, उते ता बाहु बल ही नियाए चल. बिल्कुल, मानिक चंद सर्दार चला, तहुंका उपर आपन कभीला आब भैईनक सुरक्षाक दाईत छल. सुगर उही पाश्विक शक्तिक प्रतीक चल, जग्रा निंट्रित करव समान्य मानवक बस का बात नहीं अचे. मने, उो इदेखध चाहत चला है जे, उनकर होभे वाला बहेनोई में, मरित्तिव रूपी भाएको के वष्पे करबाक सहस अचीवा नहीं. एक दम सही. दंका एते केवल वाद दे यंप्र नहीं? एक ता वेदहमिक उदबहोषना चल. दंका बजेवाक मतलप समपुन समाजक सोजा आपन प्रान के बाजी लगा यभ बापरे, यटे एक ता क्धरनाक अगनी परिक्षाचल आ यटे आबी कदाख सब से रोचक मोडवे देखेद मने दंका पर चोट करा से पूर्व चेचन महराज की तईयारी आँ उ तग्यारी बहुत मेत उपूरन आची उएक ता बूडी सा आगी मागी चिल्लम में मेदनी फुल भरी कप पीवे च्ठें एक रा पीभलाग बाद हुंकर शरी रा आतमा अद्मा जिना एक ता अलगस्तर पर पहजजाईता ची एकरा बादे उप्पून नियन्त्रन मेरहेत दंका पर चोट करे चा दिन इप बहुत विचारनी आ बिन्दू अची आ, कारड एकरा पडी का हम्रा लागल जे की इप खेवल एक ता नशा चल कि उ दर्द के सुन्न कर्बाक लेल, वड़र भगाबाक लेल, कुनो मादग द्रव्ये लेले लेले नहीं? दिखो, जग हम्रा सब एक रा केवल नशा मानी लेप, तब इब बहुत उतला विष्लिषन है ते नशा मनुश्ष्चके निंट्रन लगा तेचे मुदा चेचन पुल निंट्रन में चतिन इवास्तू में यक ता अनुश्टान चल अनुश्टान? मने कोनो मान्सिक तयारीक प्रक्रिया आ, नूरो सायंस का द्रिष्टिकून से बुचू ता जगन कोनो मनुश्छ म्रिट्ट्ट्यो भायसा गरसित होई ता मस्तिष्क का आमिक डाला सक्रियब होजाएच्छे. इज्च्की चाहत पएदा करी ताछी. अ, आ युद्दे में इज्च्की चाहत माने सीदा म्रिट्ट्ट्यो. बिल्कुल मेदनी फुल को उचिलम समववता एक ता एहन, रासाईनिक वा मनोविग्यानिक उप्रे रक्च्छल, जे उई भाये कंद्रक के सुन्नक दैच्छल, उकर बाद मस्तिषक केवल लक्षापर कंद्रिद बाजाएच्छे. अरे वाज, माने उआपन दर अक कमजोरी त्यागी का पून रूपें एक ता शिकारी चेतना में प्रवेश कर अला चला. एक दम, यी एक ता ट्रन्जिशन चल. ये ता उहीना अच्छी जना आदनिक खिलाडी, खेल से पहले एक अशुन्ने किस थिती में जाए चती, तुरन्त देखा पडेताची जगन युद्ध शुरु भोत आची तट्चत्या सुगर चेचनाक निरभाईता देख का स्वायम दरा जाएचे इद्रिश्या सच्मे रोंटा ताटाडागा देताची बलकल चेचनोकर दूनु पाजुक पैर पक्री का उक्रा हाते चीर देते थे थी पच्च्स किलोक कता उठेबा वाला मनुष्छ खाली हाते सुगर पाडी देते थी गजब का शक्ती चल हूनाक मुदा हम्राई सूने का आश्वरे भिल जिक कोनु मनुष्छक उर्जा एतिक प्रकर बहुज जँंगली जान्वर उकर देख कर दराजाई जान्वर तो कोनो तरक नहीं भुजाई च्याई आख प्रश्न बहुत गंभीर अच्छी एकर उत्तर पशु मनो विच्णान में बेटे तची पशु संसार में समवाद शब्दसा नहीं गंद और उर्जा से होई तची अखार उखर गंद सुंग कबूजी जाए तची जे इस शिकार अची. अखार उखर गंद सुंग कबूजी जाए तची जे इस शिकार अची. अखार उखर गंद सुँग कबूजी जाए तची जे इस शिकार अची. अगर अद्रेनालीन हर्मोन बनेतची जानवर उकर गंद सुंग कबूजी जाईतची जे इश शिकार अची अग माने चेचन मेदिनी फुल पीभा लक बाद बिलकुल तरल नहीं चला तो गंद है आई लही नहीं उगर सही पक्डल हूँ आहा उनकर शरीज सा शिकार का गंद नहीं आभी रहाल चल आखी मे कोनो हीच्की चाहत नहीं चल सुगर उही आदम मे आत्मा विष्वास के महसुस कल लग आब भूजीगेल जे इश्खारी आची आहार नहीं विश्लेशन्त पूरा द्रिष्टिकों बद्ली देलक, मुदध एक्रा बाद के खतना कताके एक तर नव्दिशा मिलजा जाएते ची. सुगर के वद भेला के बाद मानिक चन्संच दंगल होगते ची. आव, अई ते परनाम बिलक्ल अलग होगते ची. इक दम, चेचन मानिक चन्त के केवल बजारी का मने पतक का पराजित करे चे थिन. सुगर के अट्तिन्त क्रूर्ता से भाडी दिल गल, मुदे मानिक चन्त के कोनो गमभीर चोट नहीं पहुषावल गल. आँ सब से रोचाग बाज्जे हार लाग बादोद मानिक चन दूखी नहीं प्रसन न हो इच्छाती हाँ, इवरा लेल बहुत द्याना कर सक चल एक ता शक्तीषाली सर्दार अपना हार पर प्रसन न की एक अची इतकोनो बहुत सक्त ससुर्व साला दूरा लेल गेल अंटर्व्युजे का लागल आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, आ, � अगर दिलजाबावला सर्वोच सम्मान चिल एते य शक्ती विद्वन सक नहीं बलकी नव सम्वंदक सर्जक बन्गेला एक दम सही कहला हूँ तजा अम्रा सब पारमपरी कताख डहाचा देखी तजा एते आबी का कता समाप्त भोजा बचाही बवज़ा बक चाही नायक के पूरस्कार भेट गेल, खूशी-खूशी विवाह बहुगेल मुदा लोक कता इतेक सरल नहें होई तची बलकल नहीं, कता क असली मनो वैग्यानेक रूप आब देखाई बतची विवाहक बाद चेचन आब केवल योद्धा नहीं ग्रिहस्त बनी गेला मुदा की एका योद्धा अचानक अपन हिंसक प्रवरती के बंद का सकएत अची कता कनुसारतन नहीं आप, उई यादवक लोक बेवता क्रिषनराम का बस भिट्टी मैंे बास का गाची सा बिना अनमती बास काटे लगला है इवूंका एक ता नव अब बहुत शक्तिशाली विरोदिक सोजा ताड कदेलव इप रसंग बहुत गेरा ची हमरो इई सोचबापर विवषके लेक जिज शान्तिपून जीवन जीभे इक ता योद्दालेल एते कद्धिन किया होई तची मने, आक्ष्छन रीरो के गर्ट बेट गल मुदा उश्शान्ती से तरकारी ने की नी सकै तची उनका उत्योब यवाद चाही इमानव मनोविद्यान असमाजिक यतार्ठक कद्वन्द ची दोम समथा एक जीविका बास कषमागरी बनेवा पर निरभर चील तब बास काटबा हुनक आर्थिक आविषकता चल मुदा क्रिश्नाराम से मिना अनुमती लेबा इतो पम्गाले बा बहलने? आप ख़न क्रिष्नाराम इस्थापित सत्ता अबहु स्वामित्वक प्रतीक चल आहा इदिकार क्यों रव रव लंगन चल और मनोवि ज्यानक बात करी, तजे वेक्ती जीवन भरी मारी काटकेने आची, उषान्ती कालक नियम नहीं भुजाई चे. माने, एक ता हत्फोडी लेल सब की चुख काईटी जगा होई तशे? बिल्कुल, चेचल लेल उ बस्बट्ती नीजी समपती नहीं, केवल एक ता संसादंचल, जक्रा उ आपन भल पर लोसके चला हा. योद्ख आहंकार उक्रा समाज इक सत्टाग विद्रूी बना दिच्छे. इतो बहुत कथरनाएक स्तीती बहुगे, आब एक्ता व्यक्ति का बलक तक्राव इस्तापित सत्ता से भहरहे लचे आ उसत्ता पुर्न क्रोदख संगे प्रतिकार करे तशी आ, अ कता का चर्मोद कर्ष एते से शुरू ही तची क्रिश्नाराम क्रोदिद भ्हा आपन विशाल हाती सुबरन पर च़के अबे चथीन उच्छन के आमक गाची में पन्मा कसंशुतल देखे चथीन आप द्खन जे द्रुषे गतित होई तची उ इस्टबद करे वाला चे एक दानम आप रत्याशित द्रुष्या चे हो तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो बवाद्यागा तो वाद्यादागा तो बवाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वाद्यादागा तो वा अगर आपन ताकत अखर कमजोरी बनीगेल आईते यहो भुज़ा बावष्यक अचे जे हाती मने सुब्रन केवल जानवर नहें जे सुगर चत्या अराजक्ताक प्रतीक चल जक्रा चेचन रहा देलने मुदा हाती यहो बुज़ा बावष्यक अचे जे हाती मने सुबरन केवल जान्वर नहे आचे सुगर चत्या अराजक्ताक प्रतीक चल जक्रा चेचन रहा देलने मुदा हाती हाती माने इश्वर्या शक्ती वा अनुशाशित बलक प्रतीक बलक्ल, इसन्स्तागत सत्ता अप्रत्रतिक उही आसीम बलक्प्रती कची, जकर सोजा मनुश्षके वेक्तिगत बल्भाना बोचायत ची, हाती शानत ची, मुदा अकरबार अजेय आची. इबात हम्रा बहुत ग़राई दरी प्रभाविद कर रहला ची छेचन सुतल चला, अचेट चला जे एकाग्रता दंका बजिवा काल चल उ आम के गाचीक चाहमे कतो हेरा गल चल उ मानी लेल ने जे आब हुनका कुनो चिनोती नहीद चाए तची इस सत्ता आप प्रक्रिति के सबस्त शक्ती प्रदर्षन चल. क्रिषनारामी देखा दिलने, जे योद्धा चाहे जत्तिक पैग हो, प्रक्रिति उक्रा एक चन में निष्प्रभावी कर सके तची. आप सबसे कहास बात ए, जे हाती हुंका कुचले न नहीं, केवल हुंके सीमक बोद करावलगल आप, इदेखावे तची, जे एक ता योद्दाक शान्ति के समय में, सबसे बेसि सतरक रहवाक अवषकता हो इच्टाए. आधार जकन सतरकताके कथम कर दे तची, तचन अज्येताक ब्रम तुटी जाए तची. तजगन हम्रा सब इलोक गाताक सरांश निकालेची, तईईस पष्ट बहुजायतची, जे ईकेवल युद्धक विजे कतानही आची. इमानवक आहंकार अश्क्तिक अद्रिष्य सीमाक गंभीर अनवेशन आची. इक्दम सही. श्रोता लेल इबुजम अवष्षक अची, जे सफलताक शिक्धर पर पहुचला दरी, इस मरन राखभ जरूरी आची, जे कोनो नव अपरचित शक्ती, आहाक आपन सादन के आहाक विरुद प्रयोग कसके तची. इबहुत सथ्ते आची, सिनेमा में तन नायक धुशमन के हरा देतची, आ रहा पी एंटिंग भोजातची, मुदा वास्त्विक जीवन में संगर्ष निरन्तर चलेत रहेंतची. बलकुल, जीवन एत बे सरल नहीं अची. ता आए जखन हम्रा सभी चर्चा समाप्त करहल ची ता इगेरा मन्तन हम्रा सब के एक ता नव प्रष्नपर चोडी जाएत ची उम की अच्छे अप प्रष्नप? जग एक ता जेय योद्द्धाग पराजग, युध्द भूमी में नहीं बलकी शान्तिक श़ण में सुतल अवस्तामे उकर अपन अस्तृर से भूस्सकेत अची. तक की शक्तिक अस्ली परिक्षा युध जीत बामे आची, वा शक्तिक मद में अपने सूरक्षा से असावदान नहीं हूई बामे आची? बहुत गंभीर प्रश्न अची अग, की एक ता योद्धा के लेल शान्तिक समय, वास्तम युधके मेडान से बेसी कहतरनाग भहसकाई ता ची? इक ता एह प्रष्न ची जक्रापर विचार करभ आवश्षक अची, करनी मानव प्रक्रूतिक शवच्छत्ते ची.

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