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वर्णमाला_शिक्षा___अंकिता.mp4

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:10नमस्कार, आई हम्रा साब यह बद गजबूक विष्याए पर चर्चा करव, गजजंद्र ताकुर जिक लिखल एक ता पोठी आची, वरन्माला शिक्षा अंग्टा.
  2. 0:10–0:15आब, यह कोनो सादारन औ आ ए रत्वा किताब नहीं ची,
  3. 0:15–0:18इएक्ता पिता और पुत्रिक भीच के साजक तहल्बाक एक्ता
  4. 0:18–0:20मनोरन्जक यात्राक मत्ध्ध्यम सों
  5. 0:20–0:24मेत्फली वर्न्माला सीख्बाक बिल्कुल नव प्रेज्ग ची.
  6. 0:24–0:28आउ देखे ची, जि कोना गाँक रस्ताप तहले तहलेद बच्चाके
  7. 0:28–0:31सम्पूर्न वर्न्माला सिखावल जासके ची.
  8. 0:31–0:35मदूबनी पेंटिंग से प्रेरेत इचित्र सब दिखक इबुजनाई भूल है दे,
  9. 0:35–0:38जे इँ मात्र एक ता बच्चक चित्र कता आची.
  10. 0:38–0:43वास्तव में, इएक ता बहुत नीक से गड़ल गेल ध्वन्यात्मक यात्र आची,
  11. 0:58–1:04पूरान जे रत्बाक प्रनाली चले तक्रा क्हतम करव आएक तक गतिशील अद्द्यनक अनुबभ्तईयर करव.
  12. 1:04–1:09माने एही पूत्थिक प्रतिक अद्द्याय एक तविष्ष्ट अक्षर वर्गस जोडल चे.
  13. 1:09–1:17और गज़बक भात एए आचे, जे कचो नवा सीखल जाएत चे, उक्रा तुरन्त प्रश्नुत्रक माध्द्यम सा संगे संग जाचल सोगजाएत चे.
  14. 1:17–1:20इआपने आप में एक ता पोडन यात्रा जगा आचे.
  15. 1:20–1:24तकताक शुर्वात होगत ची अवर्गक स्वर्वार्ण्सर.
  16. 1:24–1:28जखन अंकिता आ उकर पिता अपन साज कर तहलना है श़ूग कर अच्छती
  17. 1:28–1:32तर रस्ता में हुंका सब किछु खास वातावरनी परिस्तिती सब येटे च्छनी.
  18. 1:32–1:35इह यह यान के यात्रा कपहल कदम अची,
  19. 1:35–1:40जटे शब्दा आ आपन आस्पास कपरेवेश दोनो बहुत नीक से एकाखार भाजाईत अची.
  20. 1:40–1:44आप तहलेत काल रस्ता में हुनका सब के नव शब्दावली भेटेचन है,
  21. 1:44–1:47जिना अगिन वान, जैकर मतल भेल जंगलक आगी,
  22. 1:47–1:51अखखज माने नहीं जलल जाडी, आव अकर दखर,
  23. 1:51–1:54जेकर प्रेोग हम्रा सब जंग फुडक लेल करेच छी.
  24. 1:54–1:57इकोनो सादारन शब्दक नीरस सुची नहें आची,
  25. 1:57–2:01बलकी कताक बीच-बीच में, एही जटेल आप्टेट शेत्रे शब्द सबके,
  26. 2:01–2:03इते स्वबावेक रुप सराखल गे लची,
  27. 2:03–2:07जे बिना कोनो भोजग इसानी सामोन में भेसी जाए तची.
  28. 2:07–2:11इही आमुर्त आज्यामित्या अकार अक्चित्र सब्दद्यान्द्या
  29. 2:11–2:14एकर उप्योग पद्द बुद्द्धिमानी सकाल गेल आची
  30. 2:14–2:18जगन मस्तिष्क कोनो नव भाशाई जानकारी के समझ रहल होगताची
  31. 2:18–2:20तक हन इद्रिश्ष्यद्यान के केंद्रित राखबा में
  32. 2:20–2:22बहुत पैग भूमिकानि बोईता ची.
  33. 2:22–2:24इक तक गजब क संयोजन आची,
  34. 2:24–2:28जो शिक्षा और कला दूनो के एक संगे जोडि देटा ची.
  35. 2:28–2:32आब अद्याइनक संग संग स्मरन शक्ती कक जाच से होता जरूरी आचे.
  36. 2:48–2:50अग्टर अची अगिन्वान
  37. 2:50–2:55मुख्यबात यए जी एही तरक जी तुरंद दोराव अपरिक्षन हुई तच्छे
  38. 2:55–2:58अख्रा सम्म वस्तिष्क में इण नव मेठिली शब्दावली
  39. 2:58–3:00स्थाई रूप सब बैस जाई तच्छी
  40. 3:00–3:06बच्च्छा सबक्लेल कोनो नवची सिबा की बहुत कारगर और वेग्यानिक तरीका मानल जाएत ची.
  41. 3:06–3:14केर जिना जिना एटहलनाय आगाम बड़ेत ची अंकिता ठाकी कग एक ता गाच्चाख चाहुर में विश्राम करेत ची.
  42. 3:14–3:25इज विश्रामक समयाची उक्रा बहुत चतुराई से आ आ आ जेहिना स्वरक आगाक जतिल द्वनी सब के प्रस्तुत कर्वाक लेल प्रयोक कायल केल आची.
  43. 3:25–3:31जाएसा कताक गती से हो नहीं तूते और शिक्षाक क्रम से हो बनल रहे.
  44. 3:31–3:35मुदा चाहुरक कात में एक टक्खत्रासे हूँ चूपालाची उडखुस्सी
  45. 3:35–3:41इक टा विशाक्त नोचनी वाला लगती आचे जे गाँव गर रक्रस्ता कात में पावल जाई तची
  46. 3:41–3:44पिता अंकिता के न एक रासर सावदान करए चती
  47. 3:44–3:48यहे बाता गवाहा थी, जे द्वन्यात्मक, कताक, माद्ध्यमसद,
  48. 3:48–3:51हम्डा सबख, जिस संस्क्रतिक पारिस्तित की आची,
  49. 3:51–3:53उक्रा कोना सुरक्षित राखाल जा रहा लगा लगा लगा आची,
  50. 3:53–3:56यी सच में बहुत प्रेना दाया का ची.
  51. 3:56–4:03हात हे एक एक अमुर्त चित्रन देखो, एक अस्पष्ट करे तची जे पोठी कते एक कलपना शीलिता सर देजान केल गल गल अच्छे.
  52. 4:03–4:08इजटिल भाशाक पाट सवक भीच में मस्तिष्ट के एक ता विज्वल पलेट ट्लींजर,
  53. 4:08–4:11माने, इक ता चोट्सन मानसिक विश्राम दैताई तची,
  54. 4:11–4:14जैसा अद्यना कोनो भोजन नहीं भुजाई तची.
  55. 4:14–4:16एही चोट्सन विश्रामक बाद,
  56. 4:16–4:18यात्रा खेट कात दिस मुडेत ची.
  57. 4:18–4:21इतेऊस स्वर वन पाचा चुटी जैताची.
  58. 4:21–4:24अखव वर्गक विशन्जनक शुर्वात बहुजाई तची
  59. 4:24–4:26द्रिष्ष बदली रहल थची
  60. 4:26–4:29अ संगे संगे शब्दक समूह सो हो नव आवी रहल थची
  61. 4:29–4:32इजे क्रिषिक प्रिष्ट भूम्या चे
  62. 4:32–4:34उ नव शब्द सब के एक द्वन्त कर देट ची
  63. 4:34–4:39जिना, अगर्बा, कदेज्मान, कदबा, अकम्रसारी
  64. 4:39–4:44इबाशा के हम्रा सबक ग्रामीन जीवन आग्व्षिक संगे बद्गनिष्त्ता से बान द्रहलाचे
  65. 4:44–4:50इसब शब्द, खेट खलिहानक, एक ता सक्षात चित्र हम्रा सबक मोन में खिछी देटाची
  66. 4:50–4:59आप फेर सा एक भेर बोद परिक्षनक समय भोगेल, मचान पर सतरकतासा जे पहरा दोरहल चति, उही रक्बार के की कहल जाएत छी.
  67. 4:59–5:02एही तरक प्रश्नक्क्व वर्गग जे इन्व शब्दावली अची,
  68. 5:02–5:06उक्रापर पकडके मस्वूथ करे तची, आद्यान के केंद्रित राखे तची.
  69. 5:06–5:09आए एक दम सही उट्तर अची, करे जमान.
  70. 5:09–5:12इबहतरीन तरीका सा दिखा रहल ची,
  71. 5:12–5:16जिकोना पोत्ती मन में एक टछोट सन कता गडी रहल थी
  72. 5:16–5:19जाही सं ग्रामीन सतरक तक जे यवदारना आची
  73. 5:19–5:22उस्मरन में पक्का भजाई तची
  74. 5:22–5:23आग कही उ नहीं विस्रत
  75. 5:23–5:26जेना जेना गंतव्य लग आभी रहल थी
  76. 5:26–5:28उच्साह से हो बड रहल थी
  77. 5:28–5:33यात्रा आब गामक चोपर, यानी चोराहा लग पहुच गे लची
  78. 5:33–5:37और एही संगे चोवर्गग विएंजनक प्रवेश होई टची
  79. 5:37–5:40इग गता के टा बिल्ल्कुल नो मोड आची
  80. 5:40–5:43एते एंद्रिय सजुडल विव्रनक अदबूत प्रवोग भे लची
  81. 5:43–5:52चोपर, चिक्कन रस्ता, चंपाप्षुगन्द, अच्चान, इस सब आद़्िय बोद च्वद्वनी के स्म्रिति मैं बन बेत अच्छी,
  82. 5:52–5:59कोनो चीज्ग के सूइंग कर, देख कर, या महसुस कर कर, जे जुराव होई टच्छी, ओगजब कहोई टच्छी.
  83. 5:59–6:06चान्दनी रात्तिक, इआमूर ताकार, सांज के समय में आएब्रहल बद्राव के बहत नीक सा दर्षा रहल आचे.
  84. 6:06–6:13जगन चान्च्छद प्रस्थूत का यल जाए तचे, तचे अखन इद्रिश्ष्य उक्रा पूर्ण रूप सा पूरक बनवाई तचे.
  85. 6:13–6:16एक्तम सती का सुन्दर संयोजन है।
  86. 6:16–6:19आप तहल्बाक यी अंतिम चरन है।
  87. 6:19–6:22गर नस्दी कचे आ स्वभावे कचे
  88. 6:22–6:25जे अंकिता ठाकि कब भे चैन हुम लगाई तची
  89. 6:25–6:28एता एक तव वर्ग के द्वनेक प्रस्तुती होई तचे
  90. 6:28–6:30जे एही शरीरेक स्तिती सा
  91. 6:30–6:31ये गदम मेल कही ता चे.
  92. 6:32–6:35इता एक ता बद्द व्यवाहारिक आ रास से पूझ शब्द ची,
  93. 6:36–6:38तून तून, जे कोनो माता पीता जनाइत चतिन,
  94. 6:38–6:42जे बूग आ थ्खान के कारन बच्चाक, भेचेनी, भरल गप,
  95. 6:42–6:44या जे शिकाइत होई ता ची,
  96. 6:44–6:46अख्रा हम्रा सब टून्तून कहे ची
  97. 6:46–6:48लेखख तहल्वा कि अंद में
  98. 6:48–6:50स्वबहाविक ठहकानक उप्योग कई का
  99. 6:50–6:52कत्तिक नीक सा धून्निात्मक शब्दावली
  100. 6:52–6:54सिखार अल चाती
  101. 6:54–6:56इगजब का मनोव अग्यानिक समज है चे
  102. 6:56–6:59ता आब ही अंतिम समवादात्मक प्रश्न
  103. 6:59–7:04अगर पहुचला पर पिताख भने बाक वादा केलनें
  104. 7:04–7:09इप्रश्न ख़ाक अंट के द्हुन्यात्मक पाट सा बहुत सहज्तासा जोडेए तच्ये
  105. 7:09–7:13आएकर संथोष्चनक अकाईप जी मूमे पानी आने अद्तर अच्छे
  106. 7:13–7:16तखा रोटी यानी ताजा रोटी
  107. 7:16–7:21येस पष्ट करे तच्छे, जे जेना जेना शारिरिक यात्रा अपन सुंदर अंत दिस बड़ेज्छे,
  108. 7:21–7:26तहीना ध्वन्यात्मक सिक्षाक यी चरन्से हो अपन गंतव्योपर पूँछी जाई तच्छे.
  109. 7:26–7:36कताक इसुखदनतची, शारे लिक रूप संग, गर पहुचनाई, वास्तब मैं, एही विष्छ्ट ध्वन्यात्मक, खंडक, सफल समापनक प्रती कची.
  110. 7:36–7:40अद्रिश्ष उब उब बडणीक जगा दर्शार है लच्छे.
  111. 7:40–7:42इजे समपून द्रिश्टि कोण आची,
  112. 7:42–7:44इप्रमानित करे तच्छे,
  113. 7:44–7:46जे रत्बाक चाट के जगा,
  114. 7:46–7:49परिवेश्य कता वाचन कते कच्कती शाडी बही सकै तच्छे.
  115. 7:49–7:51इस्सुनिष्चित करे तच्छे,
  116. 8:06–8:08जे भाशा हमरा सब बखग दुन्या के आकार दईताची,
  117. 8:08–8:13तजकन हमरा सब वर्न माला के आपन आस पासक परिवेशक कतासा अलक कर दईच्छे,
  118. 8:13–8:17तचन हमरा सब की गमाई दईच्छे, एक रापर जरुर विचार करग़ब.
  119. 8:17–8:20अपना इदाइच्ये एक रापर जरुर विचार करव.
  120. 8:20–8:26हम्रा पून विष्वास अची जे एविष्लेशन हम्रा सब कलेल बद ज्यानवर्दख रहल होएत.

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नमस्कार, आई हम्रा साब यह बद गजबूक विष्याए पर चर्चा करव, गजजंद्र ताकुर जिक लिखल एक ता पोठी आची, वरन्माला शिक्षा अंग्टा. आब, यह कोनो सादारन औ आ ए रत्वा किताब नहीं ची, इएक्ता पिता और पुत्रिक भीच के साजक तहल्बाक एक्ता मनोरन्जक यात्राक मत्ध्ध्यम सों मेत्फली वर्न्माला सीख्बाक बिल्कुल नव प्रेज्ग ची. आउ देखे ची, जि कोना गाँक रस्ताप तहले तहलेद बच्चाके सम्पूर्न वर्न्माला सिखावल जासके ची. मदूबनी पेंटिंग से प्रेरेत इचित्र सब दिखक इबुजनाई भूल है दे, जे इँ मात्र एक ता बच्चक चित्र कता आची. वास्तव में, इएक ता बहुत नीक से गड़ल गेल ध्वन्यात्मक यात्र आची, पूरान जे रत्बाक प्रनाली चले तक्रा क्हतम करव आएक तक गतिशील अद्द्यनक अनुबभ्तईयर करव. माने एही पूत्थिक प्रतिक अद्द्याय एक तविष्ष्ट अक्षर वर्गस जोडल चे. और गज़बक भात एए आचे, जे कचो नवा सीखल जाएत चे, उक्रा तुरन्त प्रश्नुत्रक माध्द्यम सा संगे संग जाचल सोगजाएत चे. इआपने आप में एक ता पोडन यात्रा जगा आचे. तकताक शुर्वात होगत ची अवर्गक स्वर्वार्ण्सर. जखन अंकिता आ उकर पिता अपन साज कर तहलना है श़ूग कर अच्छती तर रस्ता में हुंका सब किछु खास वातावरनी परिस्तिती सब येटे च्छनी. इह यह यान के यात्रा कपहल कदम अची, जटे शब्दा आ आपन आस्पास कपरेवेश दोनो बहुत नीक से एकाखार भाजाईत अची. आप तहलेत काल रस्ता में हुनका सब के नव शब्दावली भेटेचन है, जिना अगिन वान, जैकर मतल भेल जंगलक आगी, अखखज माने नहीं जलल जाडी, आव अकर दखर, जेकर प्रेोग हम्रा सब जंग फुडक लेल करेच छी. इकोनो सादारन शब्दक नीरस सुची नहें आची, बलकी कताक बीच-बीच में, एही जटेल आप्टेट शेत्रे शब्द सबके, इते स्वबावेक रुप सराखल गे लची, जे बिना कोनो भोजग इसानी सामोन में भेसी जाए तची. इही आमुर्त आज्यामित्या अकार अक्चित्र सब्दद्यान्द्या एकर उप्योग पद्द बुद्द्धिमानी सकाल गेल आची जगन मस्तिष्क कोनो नव भाशाई जानकारी के समझ रहल होगताची तक हन इद्रिश्ष्यद्यान के केंद्रित राखबा में बहुत पैग भूमिकानि बोईता ची. इक तक गजब क संयोजन आची, जो शिक्षा और कला दूनो के एक संगे जोडि देटा ची. आब अद्याइनक संग संग स्मरन शक्ती कक जाच से होता जरूरी आचे. अग्टर अची अगिन्वान मुख्यबात यए जी एही तरक जी तुरंद दोराव अपरिक्षन हुई तच्छे अख्रा सम्म वस्तिष्क में इण नव मेठिली शब्दावली स्थाई रूप सब बैस जाई तच्छी बच्च्छा सबक्लेल कोनो नवची सिबा की बहुत कारगर और वेग्यानिक तरीका मानल जाएत ची. केर जिना जिना एटहलनाय आगाम बड़ेत ची अंकिता ठाकी कग एक ता गाच्चाख चाहुर में विश्राम करेत ची. इज विश्रामक समयाची उक्रा बहुत चतुराई से आ आ आ जेहिना स्वरक आगाक जतिल द्वनी सब के प्रस्तुत कर्वाक लेल प्रयोक कायल केल आची. जाएसा कताक गती से हो नहीं तूते और शिक्षाक क्रम से हो बनल रहे. मुदा चाहुरक कात में एक टक्खत्रासे हूँ चूपालाची उडखुस्सी इक टा विशाक्त नोचनी वाला लगती आचे जे गाँव गर रक्रस्ता कात में पावल जाई तची पिता अंकिता के न एक रासर सावदान करए चती यहे बाता गवाहा थी, जे द्वन्यात्मक, कताक, माद्ध्यमसद, हम्डा सबख, जिस संस्क्रतिक पारिस्तित की आची, उक्रा कोना सुरक्षित राखाल जा रहा लगा लगा लगा आची, यी सच में बहुत प्रेना दाया का ची. हात हे एक एक अमुर्त चित्रन देखो, एक अस्पष्ट करे तची जे पोठी कते एक कलपना शीलिता सर देजान केल गल गल अच्छे. इजटिल भाशाक पाट सवक भीच में मस्तिष्ट के एक ता विज्वल पलेट ट्लींजर, माने, इक ता चोट्सन मानसिक विश्राम दैताई तची, जैसा अद्यना कोनो भोजन नहीं भुजाई तची. एही चोट्सन विश्रामक बाद, यात्रा खेट कात दिस मुडेत ची. इतेऊस स्वर वन पाचा चुटी जैताची. अखव वर्गक विशन्जनक शुर्वात बहुजाई तची द्रिष्ष बदली रहल थची अ संगे संगे शब्दक समूह सो हो नव आवी रहल थची इजे क्रिषिक प्रिष्ट भूम्या चे उ नव शब्द सब के एक द्वन्त कर देट ची जिना, अगर्बा, कदेज्मान, कदबा, अकम्रसारी इबाशा के हम्रा सबक ग्रामीन जीवन आग्व्षिक संगे बद्गनिष्त्ता से बान द्रहलाचे इसब शब्द, खेट खलिहानक, एक ता सक्षात चित्र हम्रा सबक मोन में खिछी देटाची आप फेर सा एक भेर बोद परिक्षनक समय भोगेल, मचान पर सतरकतासा जे पहरा दोरहल चति, उही रक्बार के की कहल जाएत छी. एही तरक प्रश्नक्क्व वर्गग जे इन्व शब्दावली अची, उक्रापर पकडके मस्वूथ करे तची, आद्यान के केंद्रित राखे तची. आए एक दम सही उट्तर अची, करे जमान. इबहतरीन तरीका सा दिखा रहल ची, जिकोना पोत्ती मन में एक टछोट सन कता गडी रहल थी जाही सं ग्रामीन सतरक तक जे यवदारना आची उस्मरन में पक्का भजाई तची आग कही उ नहीं विस्रत जेना जेना गंतव्य लग आभी रहल थी उच्साह से हो बड रहल थी यात्रा आब गामक चोपर, यानी चोराहा लग पहुच गे लची और एही संगे चोवर्गग विएंजनक प्रवेश होई टची इग गता के टा बिल्ल्कुल नो मोड आची एते एंद्रिय सजुडल विव्रनक अदबूत प्रवोग भे लची चोपर, चिक्कन रस्ता, चंपाप्षुगन्द, अच्चान, इस सब आद़्िय बोद च्वद्वनी के स्म्रिति मैं बन बेत अच्छी, कोनो चीज्ग के सूइंग कर, देख कर, या महसुस कर कर, जे जुराव होई टच्छी, ओगजब कहोई टच्छी. चान्दनी रात्तिक, इआमूर ताकार, सांज के समय में आएब्रहल बद्राव के बहत नीक सा दर्षा रहल आचे. जगन चान्च्छद प्रस्थूत का यल जाए तचे, तचे अखन इद्रिश्ष्य उक्रा पूर्ण रूप सा पूरक बनवाई तचे. एक्तम सती का सुन्दर संयोजन है। आप तहल्बाक यी अंतिम चरन है। गर नस्दी कचे आ स्वभावे कचे जे अंकिता ठाकि कब भे चैन हुम लगाई तची एता एक तव वर्ग के द्वनेक प्रस्तुती होई तचे जे एही शरीरेक स्तिती सा ये गदम मेल कही ता चे. इता एक ता बद्द व्यवाहारिक आ रास से पूझ शब्द ची, तून तून, जे कोनो माता पीता जनाइत चतिन, जे बूग आ थ्खान के कारन बच्चाक, भेचेनी, भरल गप, या जे शिकाइत होई ता ची, अख्रा हम्रा सब टून्तून कहे ची लेखख तहल्वा कि अंद में स्वबहाविक ठहकानक उप्योग कई का कत्तिक नीक सा धून्निात्मक शब्दावली सिखार अल चाती इगजब का मनोव अग्यानिक समज है चे ता आब ही अंतिम समवादात्मक प्रश्न अगर पहुचला पर पिताख भने बाक वादा केलनें इप्रश्न ख़ाक अंट के द्हुन्यात्मक पाट सा बहुत सहज्तासा जोडेए तच्ये आएकर संथोष्चनक अकाईप जी मूमे पानी आने अद्तर अच्छे तखा रोटी यानी ताजा रोटी येस पष्ट करे तच्छे, जे जेना जेना शारिरिक यात्रा अपन सुंदर अंत दिस बड़ेज्छे, तहीना ध्वन्यात्मक सिक्षाक यी चरन्से हो अपन गंतव्योपर पूँछी जाई तच्छे. कताक इसुखदनतची, शारे लिक रूप संग, गर पहुचनाई, वास्तब मैं, एही विष्छ्ट ध्वन्यात्मक, खंडक, सफल समापनक प्रती कची. अद्रिश्ष उब उब बडणीक जगा दर्शार है लच्छे. इजे समपून द्रिश्टि कोण आची, इप्रमानित करे तच्छे, जे रत्बाक चाट के जगा, परिवेश्य कता वाचन कते कच्कती शाडी बही सकै तच्छे. इस्सुनिष्चित करे तच्छे, जे भाशा हमरा सब बखग दुन्या के आकार दईताची, तजकन हमरा सब वर्न माला के आपन आस पासक परिवेशक कतासा अलक कर दईच्छे, तचन हमरा सब की गमाई दईच्छे, एक रापर जरुर विचार करग़ब. अपना इदाइच्ये एक रापर जरुर विचार करव. हम्रा पून विष्वास अची जे एविष्लेशन हम्रा सब कलेल बद ज्यानवर्दख रहल होएत.

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