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बहुरा_गोढ़िन_और_नटुआ_दयाल_की_गाथा.m4a
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- 0:00–0:08अख्सर जब किसी मेटिकल डाइश्टा की बात होती है तो एक खास तरा की एंजीनेरिंग जैसी सटीक्ता की उमीद की जाती है.
- 0:08–0:09आप बिल्कुल.
- 0:09–0:12बतब जैसे जब किसी इनसान की हडी तूट जाती है,
- 0:12–0:17तो एकस्रे रिबोट में वो तूटी हूँई सफेद लाईन बलकोल साव दिखाई देती हैं
- 0:17–0:18जी एक दम साव
- 0:18–0:22दोक्तर बस उस पर उंगली रक्कर कैसकता है कि ये रही समस्या
- 0:22–0:23यह उस पष्ट्टा बहुत सुकून देती है
- 0:23–0:29किवकी चब चीजग साव साव अलगल अखचो में बटी होती है तो अईसा मैसुस होता है किस सब कुछ नियंट्रन में है
- 0:29–0:30सही बात है
- 0:30–0:33लेकिन मानव मन, इनसानी मनोवि ग्यान
- 0:33–0:36और खास तोर पर प्राचीन लोक कताशागों की दुन्या में
- 0:36–0:39ये एकस्रे मशीन अचाना काम करना बन कर देती है
- 0:39–0:42बिलकुल, वहां कोई ब्लाक एंवाइट नहीं होता
- 0:42–0:44वहां कोई तबष्ट रेक हाए नहीं होती
- 0:44–1:14बस एक दूंडला और रहस्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट
- 1:14–1:18तो आजकी इस चर्चा में हम इसी का गेरा विषलेशन करेंगे
- 1:18–1:20ये महस कोई पुरानी कहनी नहीं है
- 1:20–1:23बलकी एक अँसा जटिल दस्तावेज है
- 1:23–1:25जो हमें ये सुचने पर मजबोर करता है
- 1:25–1:29कि जब समाज के हाँशिये पर रहने वाले किसी अन्सान के हाथ में
- 1:29–1:33अचीमत शक्ती आजाती है, तो वो उसका इस्तिमाल कैसे करता है.
- 1:33–1:34बिलकुल.
- 1:34–1:37और इस पूरी गाता के नोट्स जब मैं पट्रा आता न तो मुझे असा लगा,
- 1:37–1:40जैसे मैं किसी मनोविगानिक ख्णिक ख्लिर के पनने पलड़ूएं।
- 1:40–2:10अगर बवाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँ�
- 2:10–2:14और उसके बारे में कुछ बहुत्ती अजीब बाते भी कही गई हैं
- 2:14–2:18और थोर उपने ही पती की जान लेली है
- 2:18–2:23लेकिन इसी खौफ के समानानतर वो कमला मह्या की परम बखड भी है
- 2:23–2:26कमले कासन वोही में बास है कमला मह्या
- 2:26–2:30ये विरोटा बहास मानुए सवबहाव का एक बहती सच्चा आईना है
- 2:30–2:31मतलप कैसे
- 2:31–2:35विरोटा बहास मानुये सबहाद का एक बहती सच्चा आईना है, मतलप कैसे?
- 2:35–2:40देखे, हम अखसर अईन्सानो को पुरी तरह से बुराया पुरी तरह से अच्छा मानना चाहते है,
- 2:40–2:43लेकिन भहुरा के चरित्र में जो ये मिष्रन है,
- 2:43–2:45लेकिन भहुरा के चरित्र में जो ये मिष्रन है
- 2:46–2:48चरम, क्रूरता और असीम भक्ते का
- 2:48–2:51यो उसके असल जतिलता को दर्षाता है
- 2:51–2:52रही करी आप
- 2:52–2:57वो एक अईसी महीला है जिसे समाज ने शायत कभी वो सम्मान नहीं दिया जिसके वो हक्डार थी
- 2:57–3:03और आजे में कहानी में एक और किर्दार का प्रवेश पूरी गतिषील्ता को पलडद देता है.
- 3:03–3:08वो किर्दार है बहरोड के राज्कुमार दूर्रा देयाल.
- 3:08–3:09बिलकुल.
- 3:09–3:12और दूर्रा देयाल कोई आम राज्कुमार नहीं है.
- 3:12–3:17राज गरानों के वारिस आमूमन तल्वार वाजी या राजनीती सीकते हैं हैं आ?
- 3:17–3:18जी, अकसर एसा ही होता है.
- 3:18–3:23लिकिन दूर्रा देल को नित्ति से एक अजीप सा लगबक जुनूनी लगाव है.
- 3:23–3:32ये लगा वितना गेरा है कि वे राज महल की सुख सुविदाये चोडगर बहुरा जैसी खुखार तान्तरिक के पास नित्तिक शिक्षाले ने पोज्जातें.
- 3:32–3:35और वही से उने एक नया नाम मिलता है नतुवादयाल.
- 3:35–4:05आप आप बवावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावा
- 4:05–4:09ये दो गलक गलक दून्याँ कामना सामना होता है
- 4:09–4:12एक दम बहुरा एस प्रस्ताव को स्विकार तो कर लेती है
- 4:12–4:15लेकेन एक गेहरी असुरक्षा उसके मन में बनी रेती है
- 4:15–4:19और वो असुरक्षा कहानी में बहुत बहयानाक रूप ले लेती है
- 4:19–4:19जी!
- 4:20–4:24जब राज्कुमार नटूवा की बारात बहुरा के दरवाजे पर पहच्छती है
- 4:24–4:27तो किसी मामूली सी बात पर कहा सूनी हो जाती है
- 4:27–4:28सर्फ मामूली सी बात पे
- 4:28–4:29आप!
- 4:29–4:31और उस एक पल में
- 4:31–4:33बहुरा का गुस्सा इस कदर बड़कता है
- 4:33–4:38वो अपनी जादूई शक्ती से पूरी कि पूरी बाराद कोई बन्दी बनालेती है
- 4:38–4:40सब को बन्दख बनालिया जाता है
- 4:40–4:41या मुझे एक बात कटकती है
- 4:41–4:47मतलब, बहार से देखने पर ये महेंज एक जादूई चमतकार या भहुरा का एहंकार लक्सकता है
- 4:47–5:17यह बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बव
- 5:17–5:23तो ये हाश्ये पर हैने बाले लोगों के लिए शक्ती सन्तुलन का एक अजार होता है.
- 5:23–5:24एक दाल की तरा.
- 5:24–5:25बिल्कुल.
- 5:25–5:29बहुरा के पास नतो राज्सी सेना है, नहीं सामाजिक रुदबा.
- 5:29–5:49अपनाज़िक रुदबा, अज़ा बाद को बन्दी बनाना उसके लिए क्रक्षात्मक प्रतिक्रिया थी, जो सद्यों की दबीवी समाजिक असुरक्षा से उबजी थी, तन्त्र ही वो ड़ाल है, जो उसे उस समाज में कुछ ले जाने से बचाती है.
- 5:49–5:53अगर बारात के बन्दी बन्ते ही पूरी विवस्ता चर्मरा जाती है
- 5:53–5:55और इस अफ्रा तफ्री का पाइडा उठाने किलिए
- 5:55–5:57इक नया किर्दार सामने आता है
- 5:57–5:59जैसिं की नाम का एक स्वार्ती व्यापारी
- 5:59–6:02जैसिं की नजर शूरू से ही बहुरा की बेटी पर थी
- 6:02–6:03जी
- 6:03–6:09जैसिं की नजर शुरु से ही बहुरा की बेटी पर थी
- 6:09–6:15जी, वो इस पूरी उलजन को अपने फाएदे किलि मोडना शुरू कर देता है
- 6:15–6:19उसके रचे कुचकरों का नतीजा ये होता है, किस पूरी जाएएए लडाई में
- 6:19–6:22निर्दोष लोग पिसने लकते है
- 6:22–6:23बिल्कुल
- 6:23–6:26अप्रकोप और जैसिं की साजिशों के भीच,
- 6:26–6:28राजा का एक निर्दोश मंत्री,
- 6:28–6:30मल अपनी आखों की रोशनी को बेटता है.
- 6:31–6:32और यहां उस रोद दस्टावेज में,
- 6:33–6:34एक असी पुकार का जिक्र है,
- 6:34–6:36जो सच में रोंक्ते कडड़े गर देती है.
- 6:37–6:37आवारेबा.
- 6:37–6:44आव अ रेबा ये द्वनी इस पूरी गाता का एक बहुती मार्मिक हिस्चा है
- 6:44–6:46मार्मिक कैसे?
- 6:46–6:48ये सर्फ एक दर्थ की अवाज नहीं है
- 6:48–6:55ये उस बात कप्रतीक है कि जब शक्तीषाली लोग चाही वो जादूई सत्ता हो या राजनी तिक सत्ता
- 6:55–6:59अपस में तक्राते है, तो उसकी सबसे बारी कीमत,
- 6:59–7:02हमेशा आम और निर्दोष लोगों को चुकानी परती है.
- 7:02–7:04बहुत गेरी बात कही आपने.
- 7:04–7:08वंट्री मल का अंदा हूना, उस अंदेपन कभी प्रतीख है,
- 7:08–7:13तो इस भयानक स्तिती को देखकर नतूवा दैल को समज आजा जाता है,
- 7:13–7:17कि ये लडाई अप किसी सेना या तलवार से नहीं जीती जासकती.
- 7:17–7:18फिर वो क्या करता है?
- 7:18–7:21उसी दे अपने गुरु मंगल के पास बाकता है.
- 7:21–7:51उजुब बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद�
- 7:51–7:52अग, कामाख्या
- 7:52–7:54अग, ये हिस्सा मुझे थुड़ा वौल जाता है
- 7:54–7:56मडलब समस्या काले जादू की है
- 7:56–7:57लोगों की जान खत्रे में है
- 7:57–7:59और समथान न्रिट्ते है
- 7:59–8:04क्या कला की ताकत सच्छ में इतनी बहुतिख हो सकती है कि वो तन्त्र और जादू को काट सके
- 8:04–8:06ये बहुती स्वाबहाविखसा सवाल है
- 8:06–8:10कला को हम अकसर केवल मन्च या मनो रनजन तकी सीमित कर देते है
- 8:10–8:11अखसर एसे हुता है
- 8:11–8:14लिकिन अगर हम तान्तरिक दरषन की गेराई में जाए
- 8:14–8:17तो निद्ति महेज शरीर को हिलाना नहीं है
- 8:17–8:21ये अनुनाद यानी रेजमन्झ्द का विग्यान है
- 8:21–8:22रेजमन्झ्द अच्छा
- 8:22–8:25ब्रमान में हर चीज एक विषेश गती
- 8:25–8:28और द्वनी से कंपन कर रही है
- 8:28–8:30जब नट्वा शट निरते सीखने जाता है
- 8:30–8:33तो वो दर सल अपने शरीर की लेए को
- 8:33–8:37ब्रमान की लेए के साथ चोडना सीक्रा है
- 8:37–8:38तो यह सरफ नाचना नहीं है
- 8:38–8:39बिलकुल नहीं
- 8:39–8:41जैसे कोई बहुत सिथ गायक
- 8:41–8:44अपनी आवाज की सही फ्रीकुएंसी से
- 8:44–8:46काजका गिलास तोर सकता है
- 8:46–8:49वैसे ही तांत्रिक नित्ते में ये माना जाता है
- 8:49–8:53अगर कोई अपने शरीर के स्पन्दन को चरम तेक लेजाए,
- 8:53–8:57तो वो पन्च्तत्वों जल अगनी वायू पर निंद्रन पासकता है.
- 8:57–8:59अगर बवाद्यान पासकता है
- 8:59–9:01यानी नटूवा हत्यारन नहीं
- 9:01–9:03बलकी प्रक्रती को नियंत्रित करने का विज्यान सीकने जारा था
- 9:03–9:05एक दम सतीक
- 9:05–9:07और विज्यान सीकने की जगे कोई सादारन पाट्शाला नहीं थे
- 9:07–9:12अगर नहीं बवागेश्वरी और भूशिन मुहिनी के सामने ये बहायानक सादना करनी परती है
- 9:12–9:14ये कोई आसान सफर नहीं था
- 9:14–9:19बलकुल, मुझे तो ये पदते हो यह असा लगा ज़े सी किसी सुपर हीरो के अरिजन स्टोरी चल रही हो
- 9:19–9:21बताया गया है कि वहां साख्शा देट्या ते हैं
- 9:21–9:23नटूवा को देवी वागेश्वरी
- 9:23–9:25और भूशिन मुहीनी के सामने
- 9:25–9:27ये बहयानक सादना करनी परती है
- 9:27–9:29ये कोई आसान सफर नहीं था
- 9:29–9:30भिल्कुल
- 9:30–9:31मुझे तो ये पदते हो एसा लगा
- 9:31–9:34यह तर ज़ाज़ा ज़े सी सुपर हीरो के औरिजन स्टोरी चल रही हो
- 9:34–9:36यह फिर ज़े से किसी कची दाटू को
- 9:36–9:40लोहे से प्वलाद बनाने के ले बयंकर आग की बद्टीवे जोग दिया गया हो
- 9:40–9:43बिना उस चरम ताप और दरावने माहाल के शायद
- 9:43–9:46याद वो उच्टम शक्ती हासली नहीं की जासकती ती थी
- 9:46–9:50दास्तू को बध्ध्ही में तपाने की वे उप्मा यहां एक दम सतीक पैटती है
- 9:50–9:52मनोवे ज्याने को रद्यात मिकस्टर पर
- 9:52–9:55सरया गाम का वो दरावना माहाल
- 9:55–9:58अनसान के अफचेतन मन के सबसे गेरे
- 9:58–10:00सब से अंदेरे हिसे का प्रतीक है
- 10:00–10:02यानी हमारे अपने डर?
- 10:02–10:06जी हा, हम सब के भीटर डर और असुरक्षा के देट्ट्यो होते हैं
- 10:06–10:10तन्तर में आग्या चकर या उच्छतम ज्यान तक पहुट्चने के लिए
- 10:10–10:15वेक्ती को अपने इन सबसे गेरे दरों के बिलकु भीचो भीच कडा होना पडता है.
- 10:15–10:16ये दो बहुत मुष्किल काम है.
- 10:16–10:17है ना?
- 10:17–10:23जब नतूवा उस नरभली और देट्तिवाले माहाल मे भी विच्लित हुए बना अनहद न्रित्ते सिध करता है,
- 10:23–10:27तो वो बहारी राक्षुसों को नहीं, बलकी अपने भीतर के बहे को हरा रहा होता है.
- 10:27–10:28वाए!
- 10:28–10:31और इसी अटूट एक अग्रता के बाद ही गुरु मंगल,
- 10:31–10:35उसके कान मे वो अन्तिम गुप्त मंत्र फूकते है,
- 10:35–10:37जो बहुरा के काले जादू को कार्ट सकता है.
- 10:37–10:40तो उगुप्त मंत्र लेकर जब नट्वा वापस लडतीता है,
- 10:40–10:42तो स्तिती पहले से भी बद्तर हो चुकी होती है.
- 10:42–10:44बहुरा क्या कर रही होती है?
- 10:44–10:45बहुरा का गुसा बे काबू है.
- 10:45–10:49वो आपनी जादूई शक्ती का सबसे विनाशकारी रूप दिखाती है.
- 10:49–10:52और पूरी कमला नदी का पानी ही सुखा देती है
- 10:52–10:53एब हगवान
- 10:53–10:55एक पूरी नदी को सुखा देना
- 10:55–10:57ये सर्फ शकती का प्रदर्शन नहीं
- 10:57–11:00बलकी पूरे समाज के जीवन शोथ को खतन कर देना है
- 11:00–11:02नदी का पानी सुखाना ये दरशाता है
- 11:02–11:04की बहुरा का एहंकार
- 11:04–11:06अपने नियंट्रन् से बाहर जा चुका है.
- 11:07–11:09जब व्यक्ती के पास यसी शक्ती आजा जा ती है,
- 11:09–11:11जिसे कोई चुनोती न दे सके,
- 11:11–11:14तो वो खुतको प्रक्रिती से भी उपर समजने लकता है.
- 11:14–11:20लेकिन राजा जुटिया जुटिया जु नट्वा के प्रिता है,
- 11:20–11:23उनके गुप्तचर किसी तरा भहुरा को पकर लेते हैं
- 11:23–11:25बहुरा यहाँ भी एक चाल चलती है
- 11:25–11:26वो क्या?
- 11:26–11:28वो सारा इल्जाम नटूवा पर मरतेती है
- 11:28–11:32और कहती है कि नटूवा नहीं सारा पानी पाताल में भेज दिया है
- 11:32–11:35इक बार फिर सत्तिए और जुट आमने सामने होते हैं
- 11:35–11:37और नटूवा को खुद को साबित करना होता हैं
- 11:37–11:38फिर नटूवा क्या करता हैं?
- 11:38–11:41तब वो शुरू करता है आपना वो तान्त्रिक निट्ते
- 11:41–11:44जो उसने कामाख्या कि उन खोफनाग रातो में सीखाता
- 11:44–12:14वो दर्ति के स्पन्दन के सात यसा जूटा है कि सुक्षी हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 12:14–12:44आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
- 12:44–12:46सामने वाले कु नीचा दिखाने की होती है.
- 12:46–12:49लेकिन नत्वाने अपनी जीद का हैंकार चोर दिया.
- 12:49–12:51रिष्ते को बचाने के लिए,
- 12:51–12:53उसने अपनी जीद की जीद को ही किनारे कर दिया.
- 12:53–12:55तो इस से हमें ये समझा जाता है,
- 12:55–12:57की तन्त्र सादना का चरम लक्षे,
- 12:57–13:01उईपने कोई चमतकारी शक्तिपाना नहीं बलकी मैं,
- 13:01–13:03यानी आईंकार का विसरजन करना है.
- 13:03–13:04बहुत कुब कहा आपने.
- 13:04–13:07नट्वाने कामाख्या में सर्व जादू नी सीखा था.
- 13:07–13:10उसने खुद पर नियंट्रन करना सीखा था.
- 13:10–13:13जब वहुरा से शमा मांगता है,
- 13:13–13:16तो वो दर असल बहुरा के उस सद्यो पुराने क्रोद
- 13:16–13:19और असुरक्षापर करूना का लेप लगा रहा हूता है
- 13:19–13:24वीनम्रता बहुरा के उस कठोर तन्त्र से
- 13:24–13:26कही जाडदा ताकत्वर साभित होती है
- 13:26–13:28बहुरा का जाडू रादा आता है
- 13:28–13:31कुई कि नट्वाने लडने से ही इंकार कर दिया था
- 13:31–13:34और इस बिनम्रता का आसर किसी चमत कार से कम नहीं होता
- 13:34–13:38बहुरा का पत्धर वो चुका दिल आचानाक पिगर जाता है
- 13:38–13:39अन्देत हा
- 13:39–13:41अन्विट्वा को अपनी बेटी के योग यमान लेती है
- 13:41–13:46यह बवाउरा बी अपने कीई का प्राइष्टित करती है और बन्त्री मल्ले की आखू की रोशनी वापस लानी की अनमती दे देती है.
- 13:46–13:52फिर एक बहुती सुन्दर द्रिष्च्छे आता है, उट्सव का महाल, यहां तीन विषे शुप पान मगवाय जाते है.
- 13:52–13:55एक पान कमला नदी के लोटे हुए पानी के सम्मान में,
- 13:55–14:00तुस्रा बहुरा को माव करनें और उस पुरानी कडवाहत को खत्म करने किलिए,
- 14:00–14:04और तीस्रा उस नहीं रिष्ते उस विवाह किलिए.
- 14:04–14:06ये बहुती प्रतिक आत्मक है.
- 14:06–14:09बिल्कुल, बहुरा भी आपने कीए का प्राएश्चित करती है
- 14:09–14:12और मंत्री मल्ले की आखु की रोषनी वापस लोटा देती है.
- 14:12–14:14सब कुछ इतना परीपून लकता है,
- 14:14–14:17ज़से हर लोक कता के अन्त में हैपी अपी अपी होती है.
- 14:17–14:21लेकिन प्रक्रती का नियम इतना सीथा नहीं होता
- 14:21–14:21मतलप
- 14:21–14:24जब भी अन्सान ये सोचकर सन्तुष्ट होगाता है
- 14:24–14:26कि उसने सब कुछ सुल्जा लिया है
- 14:26–14:29तब अखसर कोई अद्रिष्ष कर्म
- 14:29–14:32या अन्सान के भीटर की ही कोई दबी हुए लाल्सा
- 14:32–14:34अपना सिर उठा लेती है
- 14:34–14:37लोक कताव में ये शान्त दिखने वाला पानी
- 14:37–14:40अकसर किसी बड़े तूफान से पहले का सन्नाता होता है
- 14:40–14:43और वो सन्नाता बहुत अजीब तरीके से तूटता है
- 14:43–14:45विवाख की रस्मे चल रही है
- 14:45–14:47इस भीच नतूवा को प्यास लकती है
- 14:47–14:50अगर वो बगत ख़ीबी सिष्षे जिसका नाम जिल्मिल है
- 14:50–14:52उसे कूए से पानी लाने बेचता है
- 14:52–14:53जिल्मिल
- 14:53–14:55यहां फिर से कुछ बहुत रहस्यम होता है
- 14:55–14:58जिल्मिल जब कूए में डोरी डालता है
- 14:58–15:00तो वो डोरी अचानक चोटी हो जाती है
- 15:00–15:02पानी तक पाँची नी पाती
- 15:02–15:03अच्छा
- 15:03–15:05लेकिं जब नद्वा खोड उस्कूए पर जाता है
- 15:05–15:07तो वही दोरी अपने लंभी हो जाती है
- 15:07–15:08और पानी बहराता है
- 15:08–15:11ये दोरी का चोटा और लंभा हूना
- 15:11–15:13सिर्फ एक जादूई गतना नही है
- 15:13–15:15ये एक रूपक है
- 15:15–15:20ये संके दे रहा था के जिल्मिल की नियत चोटी हो चुकी है
- 15:20–15:23उसकी पहोच अप सच्चाई तक नहीं रहीं
- 15:23–15:26प्रक्रती एक मुख चेतावनी दे रही ती
- 15:26–15:28कि खत्रा बार के किसी राक्षस से नहीं
- 15:28–15:31बलकी बहुत करीप से आने वाला है
- 15:31–15:33अर वो खत्रा एसा है जिसकी कलपना भी नहीं की जासकती
- 15:34–15:37कमला नदी के तद पर विवाजा के अंतिम चरन चल रहे हैं
- 15:37–15:39खुषियों के गीद गाए जारे हैं
- 15:39–15:42और औचानक वोही दिल दहला देने वाली चीख गुजुडती है
- 15:42–15:43आवे रभा
- 15:43–15:45ए भगवान फिर से
- 15:45–15:46जी
- 15:46–15:48लेकिन इस भार ये चीख किसी मंत्री की नहीं ती
- 15:48–15:50ये खुड नतूवा दायाल की पीडा थी
- 15:50–15:52उसी के शिष्ष
- 15:52–15:56उसी के करीभी जिल्मिल ले उसे बोखा देकर पीट में चाकू गोब दिया
- 15:56–15:57ये तो बहुत इदुखध है
- 15:57–15:59ये पडकर एक पल किली यकीनी नहीं होता
- 15:59–16:05उन्ट्वा जो मुद्की गूफाँ से लोटाया, जिसने भहुरा को हरा दिया, वो अपने ही शिष्चे के हातो मारा जाता है.
- 16:05–16:10इस विष्वास गहात को समजने के लिया हमें सत्ता और अनसानी लालज के मनोविच्यान को देकना होगा.
- 16:10–16:15जिल मिल कोई बहरी दुश्मन नहीं ता वो एक तरा से नट्वा की परच्चाई ता
- 16:15–16:18लेकिन सट्टा के बहुत करीब रहने वाले लोगो में
- 16:18–16:21उपने लोगो में, अकसर ये लालसा पैडा हो जाती है,
- 16:21–16:25कि वे परचाई के बजाई हुद उस सत्तागा केंद्र बन जाएं.
- 16:25–16:26बलकुल.
- 16:26–16:28नत्वाने जब नदी को पानी सिब रा,
- 16:28–16:31जब उसने अपने असीम शक्तियों का प्रदर्ष्चन किया,
- 16:31–16:35तो जिल्मिल के भीतर सम्मान से जादा इश्च्या ने जन्मे लेलिया होगा
- 16:36–16:39यह इश्च्या की यह सारी ताकत उसके पास क्यो नहीं है
- 16:40–16:42अपनो का वार इसलिये सबसे गातक होता है
- 16:43–16:45किक वे जानते है के कवच कहां से खुला है
- 16:45–16:46विलकल सब शाए कहापने
- 16:46–16:50और मरने से टीक पहले नटूवा जो करता है,
- 16:50–16:53उसके चरितर की अंतिम और सब से महान उचाई कुछ हूता है.
- 16:53–16:54वो क्या करता है?
- 16:54–16:57पीट में चुरा गोपा जा चूका है, प्रान निकल रहे हैं,
- 16:57–16:59लेकिन वो क्रोद में पलड़कर जिल मिल को कुछ राप नहीं देता.
- 16:59–17:06इसके बज़ा वो अपने अंतिम करतवेकिवोर मुडताया और कामख्या मैया को पतोर जो एक विषेश रिष्मी वस्त्रोताया वो चलाताया.
- 17:06–17:12उसवक नतूवा का खून बहेकर कामा नदी में मिलताया और पूरी नदी का पानी खून से लालो जाताया.
- 17:12–17:42वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 17:42–17:47तन्त्र के चरम का इस्तमाल करती हैं और मुत के मुझ से नत्वा को बापिस की चलाती
- 17:47–17:48और वा?
- 17:48–17:50नत्वा पुनर जीवित हो जाता है
- 17:50–17:52लेके ये कोई सादारन चमतकार नहीं हैं
- 17:52–17:54जीवन के बदल जीवन चुकाना परता है
- 17:54–17:57तन्त्र दर्षन में नयाए की अवदारना
- 17:57–17:59हमारी आदालतो जैसी नहीं होती
- 17:59–18:01जहां भेहेस और अपील होती है
- 18:01–18:02तो कैसी होती है?
- 18:02–18:05वहां सन्तुलन का नीम काम करता है
- 18:05–18:06ब्रमहान दीन याए
- 18:06–18:08जिसे हम कोसमिक जस्टिस कहते है
- 18:08–18:10आगर, कोसमिक जस्टिस
- 18:10–18:10आचा
- 18:10–18:13अगर प्रक्रती के नीम को तोडा गया है
- 18:13–18:18अगर एक निर्दोश की जान गई है, तो उसका पल्ला बराबर करने किलिए,
- 18:18–18:21एक तुस्ट्री आहुती देनी ही पडेगी.
- 18:21–18:22और वो आहुती होती है जिल्मिल की.
- 18:22–18:23बलकुल.
- 18:23–18:25वो जादुगरनी जिसने नट्वा को जीवन दिया,
- 18:25–18:29उसी तट्ट पर उस विश्वाज गाती जिल्मिल की बली कमला नदी को च़ा देती है
- 18:29–18:32जिस शिष्छ ने सत्टा के लालच में अपने गुरू की पीट में चूरा गोपा ता
- 18:32–18:35उसी के खून से वो नयाए पूरा होता है
- 18:35–18:38ये एक बहुत इहिन्सक तरीका लक्सकता है
- 18:38–18:41लिक ये एक आँसा न्याय है, जो बिलकुन निष्पक्ष है,
- 18:41–18:44जिसने जो भोया अंत में उसे वही काटना पडा.
- 18:44–18:45एक दम सही.
- 18:45–18:49और वो कमला नदी, जो पहले सुखी, फिर पानी से लबालब भरी,
- 18:49–18:52फिर खून से लाल हुए, वो इस पूरे खेल की,
- 18:52–18:57इंसानी बहावनाव के अस पूरे चक्र की एक मातर गवाह बनकर आज भी बहर रही है.
- 18:57–19:00ये लोग कताएं केवल अटीट के किस्से नहीं है.
- 19:00–19:01तो फिर क्या है ये?
- 19:01–19:05ये इंसान के भीटर चल रहे निरनतर युद्द का बाहरी रोप है.
- 19:05–19:10बहुरा का वो उग्र जादू दर सल अन्सान के भीटर पल्रहा वो ग्रोद है,
- 19:10–19:12जो खुद को सुरक्षित रक्षात रखना चाता है.
- 19:12–19:14बहुरा का वो उग्र जादू दर सल अन्सान के भीटर पल्रहा वो ग्रोद है,
- 19:14–19:18तुब बवाद नथवा का शब नित्ति वो सन्तुलन है, जो उस खुड को थाम सकता है.
- 19:19–19:23और जिल्मिल का विश्वास कहात, इनसान के भीतर चिपे उस लालज का प्रतीक है,
- 19:24–19:26तुग किसी भी चषन उबर सकता है.
- 19:26–19:32तो बहुरा गोडेन नत्वा देयाल की इस पूरी गाता के इस गेहरे विषलेशन से गुजरने के बाद एक बाद बहुत साफ हो जाती है.
- 19:32–19:39ये महेज एक कहानी नहीं है, बलकी शक्ती, कला, एहंकार, और नततता एक बहुत गेहरे बलीदान का दस्तावेज है.
- 19:39–19:40दिलकोल.
- 19:40–19:46कहा जाता है कि आजब ही कमला बलान नदी के किनारे सावन भादों की उन अंदेरी रातो में,
- 19:46–19:50अगर कोई दियान से सूने, तो इस गाता की गुज हवाँ में रहसुस की जासकती है.
- 19:50–19:52यह सच में रोंक्टे कडे कर दिने वाला है.
- 19:52–19:56इस पूरी चर्चा को समेटते हुई एक बहुत इग़्ेरा सवाल जहन में आता है.
- 19:56–20:00हमने देखा की तन्त्र और जाधूई शक्तियो ने इस कहानी के
- 20:00–20:03हर किर्दार को उसके चरम तक पहुचा दिया.
- 20:03–20:05बहुरा चरम क्रोद तक गए.
- 20:05–20:07तो नत्वा चरम शमा तक.
- 20:07–20:37अगर बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग ब
- 20:37–20:50बलक बला नदी के उस लाल और दूंडले पानी कितरा है, जिसके तल में अजाने कितने रहस से, कितने डर और कितनी अता करूना चबी है.
- 20:50–20:57अगर सचको समझना है, तो पानी के उपर से देखने से काम नहीं चलेगा, उस गेराई तक गोता लगाना ही पडेगा.
- 20:57–20:59अदियाना ही पडेगा
- 20:59–21:01इस पर विचार जोर की जेगेगा
Plain text
अख्सर जब किसी मेटिकल डाइश्टा की बात होती है तो एक खास तरा की एंजीनेरिंग जैसी सटीक्ता की उमीद की जाती है. आप बिल्कुल. बतब जैसे जब किसी इनसान की हडी तूट जाती है, तो एकस्रे रिबोट में वो तूटी हूँई सफेद लाईन बलकोल साव दिखाई देती हैं जी एक दम साव दोक्तर बस उस पर उंगली रक्कर कैसकता है कि ये रही समस्या यह उस पष्ट्टा बहुत सुकून देती है किवकी चब चीजग साव साव अलगल अखचो में बटी होती है तो अईसा मैसुस होता है किस सब कुछ नियंट्रन में है सही बात है लेकिन मानव मन, इनसानी मनोवि ग्यान और खास तोर पर प्राचीन लोक कताशागों की दुन्या में ये एकस्रे मशीन अचाना काम करना बन कर देती है बिलकुल, वहां कोई ब्लाक एंवाइट नहीं होता वहां कोई तबष्ट रेक हाए नहीं होती बस एक दूंडला और रहस्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट तो आजकी इस चर्चा में हम इसी का गेरा विषलेशन करेंगे ये महस कोई पुरानी कहनी नहीं है बलकी एक अँसा जटिल दस्तावेज है जो हमें ये सुचने पर मजबोर करता है कि जब समाज के हाँशिये पर रहने वाले किसी अन्सान के हाथ में अचीमत शक्ती आजाती है, तो वो उसका इस्तिमाल कैसे करता है. बिलकुल. और इस पूरी गाता के नोट्स जब मैं पट्रा आता न तो मुझे असा लगा, जैसे मैं किसी मनोविगानिक ख्णिक ख्लिर के पनने पलड़ूएं। अगर बवाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँड़ार बावाँ� और उसके बारे में कुछ बहुत्ती अजीब बाते भी कही गई हैं और थोर उपने ही पती की जान लेली है लेकिन इसी खौफ के समानानतर वो कमला मह्या की परम बखड भी है कमले कासन वोही में बास है कमला मह्या ये विरोटा बहास मानुए सवबहाव का एक बहती सच्चा आईना है मतलप कैसे विरोटा बहास मानुये सबहाद का एक बहती सच्चा आईना है, मतलप कैसे? देखे, हम अखसर अईन्सानो को पुरी तरह से बुराया पुरी तरह से अच्छा मानना चाहते है, लेकिन भहुरा के चरित्र में जो ये मिष्रन है, लेकिन भहुरा के चरित्र में जो ये मिष्रन है चरम, क्रूरता और असीम भक्ते का यो उसके असल जतिलता को दर्षाता है रही करी आप वो एक अईसी महीला है जिसे समाज ने शायत कभी वो सम्मान नहीं दिया जिसके वो हक्डार थी और आजे में कहानी में एक और किर्दार का प्रवेश पूरी गतिषील्ता को पलडद देता है. वो किर्दार है बहरोड के राज्कुमार दूर्रा देयाल. बिलकुल. और दूर्रा देयाल कोई आम राज्कुमार नहीं है. राज गरानों के वारिस आमूमन तल्वार वाजी या राजनीती सीकते हैं हैं आ? जी, अकसर एसा ही होता है. लिकिन दूर्रा देल को नित्ति से एक अजीप सा लगबक जुनूनी लगाव है. ये लगा वितना गेरा है कि वे राज महल की सुख सुविदाये चोडगर बहुरा जैसी खुखार तान्तरिक के पास नित्तिक शिक्षाले ने पोज्जातें. और वही से उने एक नया नाम मिलता है नतुवादयाल. आप आप बवावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावावा ये दो गलक गलक दून्याँ कामना सामना होता है एक दम बहुरा एस प्रस्ताव को स्विकार तो कर लेती है लेकेन एक गेहरी असुरक्षा उसके मन में बनी रेती है और वो असुरक्षा कहानी में बहुत बहयानाक रूप ले लेती है जी! जब राज्कुमार नटूवा की बारात बहुरा के दरवाजे पर पहच्छती है तो किसी मामूली सी बात पर कहा सूनी हो जाती है सर्फ मामूली सी बात पे आप! और उस एक पल में बहुरा का गुस्सा इस कदर बड़कता है वो अपनी जादूई शक्ती से पूरी कि पूरी बाराद कोई बन्दी बनालेती है सब को बन्दख बनालिया जाता है या मुझे एक बात कटकती है मतलब, बहार से देखने पर ये महेंज एक जादूई चमतकार या भहुरा का एहंकार लक्सकता है यह बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बव तो ये हाश्ये पर हैने बाले लोगों के लिए शक्ती सन्तुलन का एक अजार होता है. एक दाल की तरा. बिल्कुल. बहुरा के पास नतो राज्सी सेना है, नहीं सामाजिक रुदबा. अपनाज़िक रुदबा, अज़ा बाद को बन्दी बनाना उसके लिए क्रक्षात्मक प्रतिक्रिया थी, जो सद्यों की दबीवी समाजिक असुरक्षा से उबजी थी, तन्त्र ही वो ड़ाल है, जो उसे उस समाज में कुछ ले जाने से बचाती है. अगर बारात के बन्दी बन्ते ही पूरी विवस्ता चर्मरा जाती है और इस अफ्रा तफ्री का पाइडा उठाने किलिए इक नया किर्दार सामने आता है जैसिं की नाम का एक स्वार्ती व्यापारी जैसिं की नजर शूरू से ही बहुरा की बेटी पर थी जी जैसिं की नजर शुरु से ही बहुरा की बेटी पर थी जी, वो इस पूरी उलजन को अपने फाएदे किलि मोडना शुरू कर देता है उसके रचे कुचकरों का नतीजा ये होता है, किस पूरी जाएएए लडाई में निर्दोष लोग पिसने लकते है बिल्कुल अप्रकोप और जैसिं की साजिशों के भीच, राजा का एक निर्दोश मंत्री, मल अपनी आखों की रोशनी को बेटता है. और यहां उस रोद दस्टावेज में, एक असी पुकार का जिक्र है, जो सच में रोंक्ते कडड़े गर देती है. आवारेबा. आव अ रेबा ये द्वनी इस पूरी गाता का एक बहुती मार्मिक हिस्चा है मार्मिक कैसे? ये सर्फ एक दर्थ की अवाज नहीं है ये उस बात कप्रतीक है कि जब शक्तीषाली लोग चाही वो जादूई सत्ता हो या राजनी तिक सत्ता अपस में तक्राते है, तो उसकी सबसे बारी कीमत, हमेशा आम और निर्दोष लोगों को चुकानी परती है. बहुत गेरी बात कही आपने. वंट्री मल का अंदा हूना, उस अंदेपन कभी प्रतीख है, तो इस भयानक स्तिती को देखकर नतूवा दैल को समज आजा जाता है, कि ये लडाई अप किसी सेना या तलवार से नहीं जीती जासकती. फिर वो क्या करता है? उसी दे अपने गुरु मंगल के पास बाकता है. उजुब बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद़ बवाद� अग, कामाख्या अग, ये हिस्सा मुझे थुड़ा वौल जाता है मडलब समस्या काले जादू की है लोगों की जान खत्रे में है और समथान न्रिट्ते है क्या कला की ताकत सच्छ में इतनी बहुतिख हो सकती है कि वो तन्त्र और जादू को काट सके ये बहुती स्वाबहाविखसा सवाल है कला को हम अकसर केवल मन्च या मनो रनजन तकी सीमित कर देते है अखसर एसे हुता है लिकिन अगर हम तान्तरिक दरषन की गेराई में जाए तो निद्ति महेज शरीर को हिलाना नहीं है ये अनुनाद यानी रेजमन्झ्द का विग्यान है रेजमन्झ्द अच्छा ब्रमान में हर चीज एक विषेश गती और द्वनी से कंपन कर रही है जब नट्वा शट निरते सीखने जाता है तो वो दर सल अपने शरीर की लेए को ब्रमान की लेए के साथ चोडना सीक्रा है तो यह सरफ नाचना नहीं है बिलकुल नहीं जैसे कोई बहुत सिथ गायक अपनी आवाज की सही फ्रीकुएंसी से काजका गिलास तोर सकता है वैसे ही तांत्रिक नित्ते में ये माना जाता है अगर कोई अपने शरीर के स्पन्दन को चरम तेक लेजाए, तो वो पन्च्तत्वों जल अगनी वायू पर निंद्रन पासकता है. अगर बवाद्यान पासकता है यानी नटूवा हत्यारन नहीं बलकी प्रक्रती को नियंत्रित करने का विज्यान सीकने जारा था एक दम सतीक और विज्यान सीकने की जगे कोई सादारन पाट्शाला नहीं थे अगर नहीं बवागेश्वरी और भूशिन मुहिनी के सामने ये बहायानक सादना करनी परती है ये कोई आसान सफर नहीं था बलकुल, मुझे तो ये पदते हो यह असा लगा ज़े सी किसी सुपर हीरो के अरिजन स्टोरी चल रही हो बताया गया है कि वहां साख्शा देट्या ते हैं नटूवा को देवी वागेश्वरी और भूशिन मुहीनी के सामने ये बहयानक सादना करनी परती है ये कोई आसान सफर नहीं था भिल्कुल मुझे तो ये पदते हो एसा लगा यह तर ज़ाज़ा ज़े सी सुपर हीरो के औरिजन स्टोरी चल रही हो यह फिर ज़े से किसी कची दाटू को लोहे से प्वलाद बनाने के ले बयंकर आग की बद्टीवे जोग दिया गया हो बिना उस चरम ताप और दरावने माहाल के शायद याद वो उच्टम शक्ती हासली नहीं की जासकती ती थी दास्तू को बध्ध्ही में तपाने की वे उप्मा यहां एक दम सतीक पैटती है मनोवे ज्याने को रद्यात मिकस्टर पर सरया गाम का वो दरावना माहाल अनसान के अफचेतन मन के सबसे गेरे सब से अंदेरे हिसे का प्रतीक है यानी हमारे अपने डर? जी हा, हम सब के भीटर डर और असुरक्षा के देट्ट्यो होते हैं तन्तर में आग्या चकर या उच्छतम ज्यान तक पहुट्चने के लिए वेक्ती को अपने इन सबसे गेरे दरों के बिलकु भीचो भीच कडा होना पडता है. ये दो बहुत मुष्किल काम है. है ना? जब नतूवा उस नरभली और देट्तिवाले माहाल मे भी विच्लित हुए बना अनहद न्रित्ते सिध करता है, तो वो बहारी राक्षुसों को नहीं, बलकी अपने भीतर के बहे को हरा रहा होता है. वाए! और इसी अटूट एक अग्रता के बाद ही गुरु मंगल, उसके कान मे वो अन्तिम गुप्त मंत्र फूकते है, जो बहुरा के काले जादू को कार्ट सकता है. तो उगुप्त मंत्र लेकर जब नट्वा वापस लडतीता है, तो स्तिती पहले से भी बद्तर हो चुकी होती है. बहुरा क्या कर रही होती है? बहुरा का गुसा बे काबू है. वो आपनी जादूई शक्ती का सबसे विनाशकारी रूप दिखाती है. और पूरी कमला नदी का पानी ही सुखा देती है एब हगवान एक पूरी नदी को सुखा देना ये सर्फ शकती का प्रदर्शन नहीं बलकी पूरे समाज के जीवन शोथ को खतन कर देना है नदी का पानी सुखाना ये दरशाता है की बहुरा का एहंकार अपने नियंट्रन् से बाहर जा चुका है. जब व्यक्ती के पास यसी शक्ती आजा जा ती है, जिसे कोई चुनोती न दे सके, तो वो खुतको प्रक्रिती से भी उपर समजने लकता है. लेकिन राजा जुटिया जुटिया जु नट्वा के प्रिता है, उनके गुप्तचर किसी तरा भहुरा को पकर लेते हैं बहुरा यहाँ भी एक चाल चलती है वो क्या? वो सारा इल्जाम नटूवा पर मरतेती है और कहती है कि नटूवा नहीं सारा पानी पाताल में भेज दिया है इक बार फिर सत्तिए और जुट आमने सामने होते हैं और नटूवा को खुद को साबित करना होता हैं फिर नटूवा क्या करता हैं? तब वो शुरू करता है आपना वो तान्त्रिक निट्ते जो उसने कामाख्या कि उन खोफनाग रातो में सीखाता वो दर्ति के स्पन्दन के सात यसा जूटा है कि सुक्षी हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� सामने वाले कु नीचा दिखाने की होती है. लेकिन नत्वाने अपनी जीद का हैंकार चोर दिया. रिष्ते को बचाने के लिए, उसने अपनी जीद की जीद को ही किनारे कर दिया. तो इस से हमें ये समझा जाता है, की तन्त्र सादना का चरम लक्षे, उईपने कोई चमतकारी शक्तिपाना नहीं बलकी मैं, यानी आईंकार का विसरजन करना है. बहुत कुब कहा आपने. नट्वाने कामाख्या में सर्व जादू नी सीखा था. उसने खुद पर नियंट्रन करना सीखा था. जब वहुरा से शमा मांगता है, तो वो दर असल बहुरा के उस सद्यो पुराने क्रोद और असुरक्षापर करूना का लेप लगा रहा हूता है वीनम्रता बहुरा के उस कठोर तन्त्र से कही जाडदा ताकत्वर साभित होती है बहुरा का जाडू रादा आता है कुई कि नट्वाने लडने से ही इंकार कर दिया था और इस बिनम्रता का आसर किसी चमत कार से कम नहीं होता बहुरा का पत्धर वो चुका दिल आचानाक पिगर जाता है अन्देत हा अन्विट्वा को अपनी बेटी के योग यमान लेती है यह बवाउरा बी अपने कीई का प्राइष्टित करती है और बन्त्री मल्ले की आखू की रोशनी वापस लानी की अनमती दे देती है. फिर एक बहुती सुन्दर द्रिष्च्छे आता है, उट्सव का महाल, यहां तीन विषे शुप पान मगवाय जाते है. एक पान कमला नदी के लोटे हुए पानी के सम्मान में, तुस्रा बहुरा को माव करनें और उस पुरानी कडवाहत को खत्म करने किलिए, और तीस्रा उस नहीं रिष्ते उस विवाह किलिए. ये बहुती प्रतिक आत्मक है. बिल्कुल, बहुरा भी आपने कीए का प्राएश्चित करती है और मंत्री मल्ले की आखु की रोषनी वापस लोटा देती है. सब कुछ इतना परीपून लकता है, ज़से हर लोक कता के अन्त में हैपी अपी अपी होती है. लेकिन प्रक्रती का नियम इतना सीथा नहीं होता मतलप जब भी अन्सान ये सोचकर सन्तुष्ट होगाता है कि उसने सब कुछ सुल्जा लिया है तब अखसर कोई अद्रिष्ष कर्म या अन्सान के भीटर की ही कोई दबी हुए लाल्सा अपना सिर उठा लेती है लोक कताव में ये शान्त दिखने वाला पानी अकसर किसी बड़े तूफान से पहले का सन्नाता होता है और वो सन्नाता बहुत अजीब तरीके से तूटता है विवाख की रस्मे चल रही है इस भीच नतूवा को प्यास लकती है अगर वो बगत ख़ीबी सिष्षे जिसका नाम जिल्मिल है उसे कूए से पानी लाने बेचता है जिल्मिल यहां फिर से कुछ बहुत रहस्यम होता है जिल्मिल जब कूए में डोरी डालता है तो वो डोरी अचानक चोटी हो जाती है पानी तक पाँची नी पाती अच्छा लेकिं जब नद्वा खोड उस्कूए पर जाता है तो वही दोरी अपने लंभी हो जाती है और पानी बहराता है ये दोरी का चोटा और लंभा हूना सिर्फ एक जादूई गतना नही है ये एक रूपक है ये संके दे रहा था के जिल्मिल की नियत चोटी हो चुकी है उसकी पहोच अप सच्चाई तक नहीं रहीं प्रक्रती एक मुख चेतावनी दे रही ती कि खत्रा बार के किसी राक्षस से नहीं बलकी बहुत करीप से आने वाला है अर वो खत्रा एसा है जिसकी कलपना भी नहीं की जासकती कमला नदी के तद पर विवाजा के अंतिम चरन चल रहे हैं खुषियों के गीद गाए जारे हैं और औचानक वोही दिल दहला देने वाली चीख गुजुडती है आवे रभा ए भगवान फिर से जी लेकिन इस भार ये चीख किसी मंत्री की नहीं ती ये खुड नतूवा दायाल की पीडा थी उसी के शिष्ष उसी के करीभी जिल्मिल ले उसे बोखा देकर पीट में चाकू गोब दिया ये तो बहुत इदुखध है ये पडकर एक पल किली यकीनी नहीं होता उन्ट्वा जो मुद्की गूफाँ से लोटाया, जिसने भहुरा को हरा दिया, वो अपने ही शिष्चे के हातो मारा जाता है. इस विष्वास गहात को समजने के लिया हमें सत्ता और अनसानी लालज के मनोविच्यान को देकना होगा. जिल मिल कोई बहरी दुश्मन नहीं ता वो एक तरा से नट्वा की परच्चाई ता लेकिन सट्टा के बहुत करीब रहने वाले लोगो में उपने लोगो में, अकसर ये लालसा पैडा हो जाती है, कि वे परचाई के बजाई हुद उस सत्तागा केंद्र बन जाएं. बलकुल. नत्वाने जब नदी को पानी सिब रा, जब उसने अपने असीम शक्तियों का प्रदर्ष्चन किया, तो जिल्मिल के भीतर सम्मान से जादा इश्च्या ने जन्मे लेलिया होगा यह इश्च्या की यह सारी ताकत उसके पास क्यो नहीं है अपनो का वार इसलिये सबसे गातक होता है किक वे जानते है के कवच कहां से खुला है विलकल सब शाए कहापने और मरने से टीक पहले नटूवा जो करता है, उसके चरितर की अंतिम और सब से महान उचाई कुछ हूता है. वो क्या करता है? पीट में चुरा गोपा जा चूका है, प्रान निकल रहे हैं, लेकिन वो क्रोद में पलड़कर जिल मिल को कुछ राप नहीं देता. इसके बज़ा वो अपने अंतिम करतवेकिवोर मुडताया और कामख्या मैया को पतोर जो एक विषेश रिष्मी वस्त्रोताया वो चलाताया. उसवक नतूवा का खून बहेकर कामा नदी में मिलताया और पूरी नदी का पानी खून से लालो जाताया. वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� तन्त्र के चरम का इस्तमाल करती हैं और मुत के मुझ से नत्वा को बापिस की चलाती और वा? नत्वा पुनर जीवित हो जाता है लेके ये कोई सादारन चमतकार नहीं हैं जीवन के बदल जीवन चुकाना परता है तन्त्र दर्षन में नयाए की अवदारना हमारी आदालतो जैसी नहीं होती जहां भेहेस और अपील होती है तो कैसी होती है? वहां सन्तुलन का नीम काम करता है ब्रमहान दीन याए जिसे हम कोसमिक जस्टिस कहते है आगर, कोसमिक जस्टिस आचा अगर प्रक्रती के नीम को तोडा गया है अगर एक निर्दोश की जान गई है, तो उसका पल्ला बराबर करने किलिए, एक तुस्ट्री आहुती देनी ही पडेगी. और वो आहुती होती है जिल्मिल की. बलकुल. वो जादुगरनी जिसने नट्वा को जीवन दिया, उसी तट्ट पर उस विश्वाज गाती जिल्मिल की बली कमला नदी को च़ा देती है जिस शिष्छ ने सत्टा के लालच में अपने गुरू की पीट में चूरा गोपा ता उसी के खून से वो नयाए पूरा होता है ये एक बहुत इहिन्सक तरीका लक्सकता है लिक ये एक आँसा न्याय है, जो बिलकुन निष्पक्ष है, जिसने जो भोया अंत में उसे वही काटना पडा. एक दम सही. और वो कमला नदी, जो पहले सुखी, फिर पानी से लबालब भरी, फिर खून से लाल हुए, वो इस पूरे खेल की, इंसानी बहावनाव के अस पूरे चक्र की एक मातर गवाह बनकर आज भी बहर रही है. ये लोग कताएं केवल अटीट के किस्से नहीं है. तो फिर क्या है ये? ये इंसान के भीटर चल रहे निरनतर युद्द का बाहरी रोप है. बहुरा का वो उग्र जादू दर सल अन्सान के भीटर पल्रहा वो ग्रोद है, जो खुद को सुरक्षित रक्षात रखना चाता है. बहुरा का वो उग्र जादू दर सल अन्सान के भीटर पल्रहा वो ग्रोद है, तुब बवाद नथवा का शब नित्ति वो सन्तुलन है, जो उस खुड को थाम सकता है. और जिल्मिल का विश्वास कहात, इनसान के भीतर चिपे उस लालज का प्रतीक है, तुग किसी भी चषन उबर सकता है. तो बहुरा गोडेन नत्वा देयाल की इस पूरी गाता के इस गेहरे विषलेशन से गुजरने के बाद एक बाद बहुत साफ हो जाती है. ये महेज एक कहानी नहीं है, बलकी शक्ती, कला, एहंकार, और नततता एक बहुत गेहरे बलीदान का दस्तावेज है. दिलकोल. कहा जाता है कि आजब ही कमला बलान नदी के किनारे सावन भादों की उन अंदेरी रातो में, अगर कोई दियान से सूने, तो इस गाता की गुज हवाँ में रहसुस की जासकती है. यह सच में रोंक्टे कडे कर दिने वाला है. इस पूरी चर्चा को समेटते हुई एक बहुत इग़्ेरा सवाल जहन में आता है. हमने देखा की तन्त्र और जाधूई शक्तियो ने इस कहानी के हर किर्दार को उसके चरम तक पहुचा दिया. बहुरा चरम क्रोद तक गए. तो नत्वा चरम शमा तक. अगर बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग ब बलक बला नदी के उस लाल और दूंडले पानी कितरा है, जिसके तल में अजाने कितने रहस से, कितने डर और कितनी अता करूना चबी है. अगर सचको समझना है, तो पानी के उपर से देखने से काम नहीं चलेगा, उस गेराई तक गोता लगाना ही पडेगा. अदियाना ही पडेगा इस पर विचार जोर की जेगेगा