MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

जट_जटिनक_नोक_झोक_आ_बरखा.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.778074)
Duration
2:00
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:05आव, आई हमहा मितला प्रसिद जत जतन लोक नाट्यक एक तवरित सार जानली.
  2. 0:06–0:09इछ छोदमा शताब्दी में राजा शिव सिंग कद्द्दर्बार से शुरु भेल,
  3. 0:10–0:15सावन भाद्रव के रादी केक ता एहन अस्तरी प्रदान लोक नाट्यत्धिक,
  4. 0:15–0:20जे हमारा लोकनिक टेट संसक्रिती अग्रियास्त जीवनक अस्ली रुप देखाबे तची.
  5. 0:20–0:22पहली सुरुकोन भेल से बूजूँ,
  6. 0:22–0:26राजा के आदेश पर ज़ेइट नामक संगीतकार
  7. 0:26–0:28बानवागलिल एकर रचना कैने चला
  8. 0:28–0:30मजेग बात इची
  9. 0:30–0:32जे इ नाटक केवल स्ट्रीगन दवारा
  10. 0:32–0:34खिलल जाईत आची
  11. 0:34–0:36जताई जट माने पुष
  12. 0:36–0:38अजटिन माने स्ट्री
  13. 0:38–0:40दूनुक भूमिका महिला एकर इच्छतिन
  14. 0:40–0:42सोचु इच्छोद्वाश्टाब्दी केख्टा
  15. 0:56–0:59बल की आम वेवाएक जीवनक नोक जोग पर आदारे तची
  16. 1:00–1:01जटिनक नहर जेबाक हत
  17. 1:02–1:05जटक कमाई लेल पर देस, माने मोरंग जिनाई
  18. 1:05–1:09सूनार दबारा देल गाहनाक प्रलोबन के जटिनक खुक्रावब
  19. 1:09–1:12अफिर जग्राग बाद उईटर है, प्रेम पुन मिलन
  20. 1:12–1:18इप्तो हमरहा के देनिक जीवनक रूसनाई मनावरक एक्दम सीदा अ अस्ली प्रतिबिम थेक.
  21. 1:18–1:22अन्त में इनाटक खेती किसानी सहो जोल अची.
  22. 1:22–1:26अन्त में अन्त में स्ट्रीगन एक्टा बेंग के जाबा,
  23. 1:26–1:32माने چھोٹ, बासक, डल्या में मारक, कुनो जग़ा ही पडोसीन के दरबजाकर फैख याबे च्छती.
  24. 1:32–1:39लोक विष्वास य आची, जब फोर में अस्त्री जतेक गारी दे च्छती, ततेख भेसी वर्षा होई तची.
  25. 1:39–1:42प्रक्रितिक संग जुल एक ता जादूई समबन्द जैका ची
  26. 1:42–1:46जते पडोसीन की गारिया क्रोद सा मौसम का पानी बरसध अची
  27. 1:47–1:49की आहा एहन बात कहीो सुनल्वची
  28. 1:49–1:53संखषेप में कहीतः जद जद जटिन मात्र एक नाटक नहीं
  29. 1:53–1:55बलकी मित्ला की गरेस थी
  30. 1:55–1:59अटूट प्रेम अ प्रक्रितिक संगे जुडल एक ता भेजोड सामूहिक उच्साव थेक

Plain text

आव, आई हमहा मितला प्रसिद जत जतन लोक नाट्यक एक तवरित सार जानली. इछ छोदमा शताब्दी में राजा शिव सिंग कद्द्दर्बार से शुरु भेल, सावन भाद्रव के रादी केक ता एहन अस्तरी प्रदान लोक नाट्यत्धिक, जे हमारा लोकनिक टेट संसक्रिती अग्रियास्त जीवनक अस्ली रुप देखाबे तची. पहली सुरुकोन भेल से बूजूँ, राजा के आदेश पर ज़ेइट नामक संगीतकार बानवागलिल एकर रचना कैने चला मजेग बात इची जे इ नाटक केवल स्ट्रीगन दवारा खिलल जाईत आची जताई जट माने पुष अजटिन माने स्ट्री दूनुक भूमिका महिला एकर इच्छतिन सोचु इच्छोद्वाश्टाब्दी केख्टा बल की आम वेवाएक जीवनक नोक जोग पर आदारे तची जटिनक नहर जेबाक हत जटक कमाई लेल पर देस, माने मोरंग जिनाई सूनार दबारा देल गाहनाक प्रलोबन के जटिनक खुक्रावब अफिर जग्राग बाद उईटर है, प्रेम पुन मिलन इप्तो हमरहा के देनिक जीवनक रूसनाई मनावरक एक्दम सीदा अ अस्ली प्रतिबिम थेक. अन्त में इनाटक खेती किसानी सहो जोल अची. अन्त में अन्त में स्ट्रीगन एक्टा बेंग के जाबा, माने چھोٹ, बासक, डल्या में मारक, कुनो जग़ा ही पडोसीन के दरबजाकर फैख याबे च्छती. लोक विष्वास य आची, जब फोर में अस्त्री जतेक गारी दे च्छती, ततेख भेसी वर्षा होई तची. प्रक्रितिक संग जुल एक ता जादूई समबन्द जैका ची जते पडोसीन की गारिया क्रोद सा मौसम का पानी बरसध अची की आहा एहन बात कहीो सुनल्वची संखषेप में कहीतः जद जद जटिन मात्र एक नाटक नहीं बलकी मित्ला की गरेस थी अटूट प्रेम अ प्रक्रितिक संगे जुडल एक ता भेजोड सामूहिक उच्साव थेक

← Transcript index