MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

गाङ्गोदेवीको_प्रेम_र_मिथिलाको_माछा_मार्ने_परम्परा.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
ne (0.990858)
Duration
1:34
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:05यो मित्हिला को चर्षित लोग कता गांगो देवी को भगत को एक चोटो रस्टिक सार हो.
  2. 0:05–0:09गजंद्र ठाकुर्ले संकलन गरनबाये को यो स्रोट समगरी,
  3. 0:09–0:16योटी सादारन मलहिन अद्धात माचा मरने महिला गांगो देवी रो उनका पती को अथाहा प्रेम को कता हो.
  4. 0:16–0:22ज़स्ले उता ब्यक्तिगद भावना कासरी पुरे समवुदाये को अटूट परमपरा बन्चा बनने देखाूँचा.
  5. 0:22–0:30पहलो कुरा सावन को मेला मा आपनी पतनिलाई चुरा र लुगा किनि दिने सानो इच्या बोके र माचा मारनागाए का पती
  6. 0:30–0:34बूवा रभाई ले दिन बभर प्रयाषकर्दा पनी खाली हाद बस्नू पर सा.
  7. 0:35–0:41अब शोच्नुष्त, के अब ता सादारन मानिस को निस्वार्ठा इच्या रषंगर्साने तूला चमतकार हर को जग होता.
  8. 0:41–0:54दूस्रो दिन भल्को असपलता पच्छ निरास पत्तिले अंतिम पटक मले माझगगरन। गांगो बन्दे पत्नि को नाम लिये रजाल बहाख्चन रव अचम्म जाल अखल पनिया रूप माचले बहरिन जा.
  9. 0:54–0:59पलिपल्ट्ट भूँर भाई को जाल रिट्ते रहूद, पतिको जाल मात्रे बहरीनूले,
  10. 0:59–1:04यो कुने सयोग नभई ग़ेरो प्रेम रस्रद्धा को परिनाम भाई को पुष्टिग और रहुग।
  11. 1:04–1:09अंते मा पतिको तेही ब्यक्तिगत प्रेम रभिश्वास कालन्तर मा,
  12. 1:09–1:13तब दिलाका मला हा समवूदाय को योटा सामविक परमपराने बन पुगयो.
  13. 1:13–1:14तब ले सुन्दा अचम मलागला,
  14. 1:14–1:19तब आजजब पनी तिया हा सफलता को कामना गर दे जाल फ्यकनो अगी,
  15. 1:19–1:22गांगो देभी को भगत बने रह उने लाई समरन गर लिए चाए.
  16. 1:22–1:24यो कता एक च्छलन्त उदाहरन हो

Plain text

यो मित्हिला को चर्षित लोग कता गांगो देवी को भगत को एक चोटो रस्टिक सार हो. गजंद्र ठाकुर्ले संकलन गरनबाये को यो स्रोट समगरी, योटी सादारन मलहिन अद्धात माचा मरने महिला गांगो देवी रो उनका पती को अथाहा प्रेम को कता हो. ज़स्ले उता ब्यक्तिगद भावना कासरी पुरे समवुदाये को अटूट परमपरा बन्चा बनने देखाूँचा. पहलो कुरा सावन को मेला मा आपनी पतनिलाई चुरा र लुगा किनि दिने सानो इच्या बोके र माचा मारनागाए का पती बूवा रभाई ले दिन बभर प्रयाषकर्दा पनी खाली हाद बस्नू पर सा. अब शोच्नुष्त, के अब ता सादारन मानिस को निस्वार्ठा इच्या रषंगर्साने तूला चमतकार हर को जग होता. दूस्रो दिन भल्को असपलता पच्छ निरास पत्तिले अंतिम पटक मले माझगगरन। गांगो बन्दे पत्नि को नाम लिये रजाल बहाख्चन रव अचम्म जाल अखल पनिया रूप माचले बहरिन जा. पलिपल्ट्ट भूँर भाई को जाल रिट्ते रहूद, पतिको जाल मात्रे बहरीनूले, यो कुने सयोग नभई ग़ेरो प्रेम रस्रद्धा को परिनाम भाई को पुष्टिग और रहुग। अंते मा पतिको तेही ब्यक्तिगत प्रेम रभिश्वास कालन्तर मा, तब दिलाका मला हा समवूदाय को योटा सामविक परमपराने बन पुगयो. तब ले सुन्दा अचम मलागला, तब आजजब पनी तिया हा सफलता को कामना गर दे जाल फ्यकनो अगी, गांगो देभी को भगत बने रह उने लाई समरन गर लिए चाए. यो कता एक च्छलन्त उदाहरन हो

← Transcript index