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चौहड़मल_और_रेशमा_की_त्रासदी.mp4
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- 0:00–0:30नमशकार, चल यह आजके इस खास विषलेषन की शुरुवात करते हैं. आज हम एक आजी भेहद शक्तीषाली और सद्यो प�रानी मैठिली लोक कताथ पर बात करने वाले है, जो सच में दिल को जगजोर देती है. ये कहानी है क्षोहर, मल और रेश्मा की. एक आजी कहानी जहा
- 0:30–0:32ज़ान्ना हमारे लिए बुज़़्ूरी है.
- 0:32–0:34ज़रा इस बात पर गवर की जे.
- 0:34–0:36प्रेमी मर जाते है.
- 0:36–0:38लेकिन प्रेम एक मेला बन जाता है.
- 0:38–0:40या गेहरी बात है आप.
- 0:40–0:42यह सिर्फ कोई कहावत नहीं है.
- 0:42–0:44यह हमें सीदे इस पूरी गधना की गेराई में लेजाती है.
- 0:44–0:49ये बताती है के से मुकामा गाट पर गती एक भीशन संस्क्रतिक त्रासदी ने
- 0:49–0:54वक्त के सात एक अजी विरासत का रूप ले लिया जो आज भी कायम है.
- 0:54–0:57बाग एक मुकामा की किम वदन्ती
- 0:57–1:02अगर हम मुकामा गाट की तरफ चले, तो ये गंगा के सबसे चोडे
- 1:02–1:32यह ताल का वो विशाल दल दल येलाका दूर दूर तक फैला हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 1:32–1:36अर तीक उनके बगल में दूस्री तरव मस्दूरों की चोटी चोटी पूसकी जोप्रीया.
- 1:36–1:38ये कोई मामूली फरक नहीं ता.
- 1:38–1:43ये समाज की उस कत्होर भोतिक और समाजिक दूरी का एक दम सती कुदारन है.
- 1:43–1:47जिसे पार करना उसवक्त सच में लगबबग नामुमकिन माना जाता ता.
- 1:47–1:52मतलब ये दोनो दून्या बिल्कुल बगल-बगल होकर भी एक दूस्रे से कोसो दूर थी.
- 1:52–1:56इन दोनो की दून्या मेंना वाखाई जमीन आस्मान का अंथर ता.
- 1:56–1:58एक तरव ते चोहलमल.
- 1:58–2:01आश्ये पर रहने वाले दूसाथ समवदाय के एक बेहत गरीब खेति हर मस्दूर.
- 2:01–2:06लेकिन इसके साथ ही वो अखाडे के एक जबर्दस पहल्वान भी थे.
- 2:06–2:08उनका उटीन एक दंफिक्स था.
- 2:08–2:10आल सुभा गंगासनान और फिर अखाडे की माटी.
- 2:10–2:17लोग उने यो ही नहीं अख्धराहा का शेर बुलाते थे, उनके पास दोलत नहीं ती, पर स्वाभिमान कुट-कुट कर बहरा था.
- 2:17–2:30और दूस्री तरफ, दूस्री तरफ फीं रेश्मा, अजब सिंकी भीटी, एक भेहद रसुखदार, आमीर और जमींदार भूम्या ब्रहुण परिवार से, पैसा रुत्बा नावकर चाकर, मतलप सब कुछ उनके कद्मो मे था.
- 2:30–2:33लेकिन रेश्मा बहुत निदर थी और उनका मन,
- 2:33–2:36हवेली की उन्दम गोटू दिवारो से कही आगे जाना चाता था.
- 2:36–2:39बाग तीन बगावत की खीमत.
- 2:39–2:42अब देखे चीजे कितनी तेजी सिबदली.
- 2:42–2:46पहले दिन गंगा किनारे गाट पर वो पहली मुलाकात होती है,
- 2:46–2:49ज़ान रेश्मा अपना दिल दे बैटती हैं.
- 2:49–2:51फिर, सर्फ एक हबते के भीटर?
- 2:51–2:54जी हाँ, सर्फ एक हबते में,
- 2:54–2:56रेश्मा बिना किसी दर के
- 2:56–2:58सीदे अपने प्यार का इजार कर देती हैं.
- 2:58–2:59लेकिन फिर,
- 2:59–3:01एक महीने के अंदर ही
- 3:01–3:03ये गेरा रास खूल जाता है,
- 3:03–3:06के हवेली की बेटी एक मस्दूर से मिलती है
- 3:06–3:09और फिर स्फ दो महीने के भीटर
- 3:09–3:11हालात इतने भिगर जाते है
- 3:11–3:14के रेश्मा को पुरी तरहा से उनके ही गर में
- 3:14–3:15कैद कर दिया जाता है
- 3:15–3:17ये बात बाते नहीं थिक
- 3:17–3:20यानी ये रास्ता कोई रास्ता नहीं है
- 3:20–3:26पता है, जब रेश्मा ने अपना प्रस्ताव रखा, तो चोफर्मल ने शुर्वात में से तुक्रा दिया था,
- 3:26–3:31और ये उनका कोई गुरूर नहीं ता, बलकुल नहीं, ये उनकी वो दुखध दूर दर्षिता थी,
- 3:31–3:34कुकी वे समाज की उस कड़ भी सच्चाई को बहुवी समचते दे.
- 3:34–3:40उने अच्छीतरा एहसाज ता की जाती और वर्ग की इन गेहरी खायों को पार करने का अंजाम,
- 3:40–3:43कितना ब्यानक, कितना जान लेवा हो सकता है.
- 3:43–3:46बाख चार, विषे शादिकार के कैदी.
- 3:46–3:52रेश्मा के लिए वो आलीशान हवेली रातो रात एक सकत जेल में तब्दील हो गई.
- 3:52–3:55दर्वाजे पर भारी भरकम पहरेदार बिठा दिये गय,
- 3:55–3:57हर किड़की पर कडी नजर रक्ची जाने लगी.
- 3:57–4:02ज़र ज़़ सोचीए, परिवार की उस तथाकतित मर्यादा और इजध को बचाने के लिए
- 4:02–4:06उस रसुखदार परिवार ने अपनी ही सगी बेटी को कैदी बना लिया.
- 4:06–4:11तो यहां एक बहुती रोंग्टे कडे कर देने वाल उच्छाल उटा है.
- 4:11–4:16ये जो विशेशा दिकार है ना ये अपने एहंकार के रक्षा आफिर कैसे करता है?
- 4:16–4:22ये सवाल हमें स्पूरी गटना के सबसे हिंसक और भ्यानाग मोड की तरफ लेजाता है,
- 4:22–4:27जिसकी चिंगारी रेश्मा के बाई आजैसिंके बेख काबू गुस्से से बडगी थी.
- 4:27–4:30बाग पाज रक्त और यूद
- 4:30–4:36आजे सिंकी उस ख्हूझ नाक बदले की योजना के तीन बहुत ही क्रूर चरन थे
- 4:36–4:42पहला कदम रामजीद और मन्नेखा नाम के दो पेशिवर हत्यारों को पैसे देकर कामपर रखना
- 4:42–4:45तार्गेट एक ही था चोह़डमल की गर्दन काटना
- 4:45–4:48तुस्रा कदम एक गात लगाकर हम्ला करना
- 4:48–4:51लेकिन ये दाओ पूरी तरा उल्ता पड़गया
- 4:51–4:54किंकि चोहर्ड मल ने अपनी आत्मरक्ष्या में
- 4:54–4:56उन दोनो को ही मार गिराया
- 4:56–4:59और फिर आता है तीस्रा और सबसे कहोफनाक कदम
- 4:59–5:08कदम. जब अजेसिंकी अपनी वो भाडे की सेना हार गगग, तो उसने पूरे दूसाद तोले पर एक सुन योजित और हत्यारो से लैस भीशन हमला बोल दिया.
- 5:08–5:14ये कोई आम लडाई नहीं फी, बलकी दो बिलकुल अलग गलक दून्याग का जान लेवा तक्राव था.
- 5:14–5:23उन बाडे के हद्यारों ने ये समजने में बहुड बगूल कर दी थी कि उनका शिकार कोई सीदा साथा अन्सान नहीं बलकी अखाडे का शेर हैं.
- 5:23–5:28ये वाखगे रहान करने वाला है कि कैसे चोहर्वाल ने अपनी जान बचाने के लिए
- 5:28–5:32अदोनो आप्त्यारों को उनीके अप्यारों से दूल चता दी
- 5:33–5:36और इस पूरी गतना के विनाशकारी पर परिनाम हुए
- 5:36–5:37वो पिलकुल साफ थे
- 5:37–5:40दिक्ये पहला खुन तो आत्म रक्षा मेही बहा था
- 5:40–5:44लेकिन इसने हवेली की उस जूटे एहंकार में आग लग लगा दी
- 5:44–5:47इसके बाज जो हुआना वो सरफ कोई निजी बदला नही रेग गया था
- 5:47–5:50वो सीदे सीदे एक वर्ग युध बन चुका था
- 5:50–5:55आजेसिं की आगुवारी में, हत्यारों से लैंसे क्पूरी कि पूरी भीड
- 5:55–5:58उस गरीब हाश्ये पर रहने वाली बस्ती पर तूर पडी
- 5:58–6:02ये एक आजी खोफनाक तरास्दी थी जो ये चीक चीक कर बताती है,
- 6:02–6:06के जब समाच की तो आजी बहयानक रूप से असमान परते अपस में तक्राती है,
- 6:06–6:09तो विनाश का हुना लक्बक तै हुता है.
- 6:09–6:12बाग चै म्रित्तिउ से परे का प्रेम.
- 6:12–6:20लिकिन हर अंत बुरा नहीं होता, ये कहानी आजिक अजी असी आमुर्ट और स्थाई विरासत का प्रतीक बन चुकी है, जो मिताए नहीं मित्ती.
- 6:20–6:25बवाँई नहीं भी बाद की बाद की बाद की प्रेमी बहले ही इस दुन्या से चले जाते है,
- 6:25–6:29लेके नुका प्रेम एक मेले के रूप में हमेशा जीवित रहता है,
- 6:29–6:33जो आज भी वहाँ हाज भी वहाँ रहाँ प्रेमी बहले ही अगवाई प्रेमी बहले ही जाते जाते है,
- 6:50–6:52अद अज ख़ाई से बजाए तो एक साज जोडता है।
- 6:52–6:57और अब इस भेहत शक्तिषाली और सुचने पर मजबोर कर देने वाले सवाल के साथ
- 6:57–7:00हम आजके इस विष्लेशन को यही विराम देते हैं
- 7:00–7:03जर अच्छी ये क्या समाज की इए उची दिवारें
- 7:03–7:29अगर अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े �
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नमशकार, चल यह आजके इस खास विषलेषन की शुरुवात करते हैं. आज हम एक आजी भेहद शक्तीषाली और सद्यो प�रानी मैठिली लोक कताथ पर बात करने वाले है, जो सच में दिल को जगजोर देती है. ये कहानी है क्षोहर, मल और रेश्मा की. एक आजी कहानी जहा ज़ान्ना हमारे लिए बुज़़्ूरी है. ज़रा इस बात पर गवर की जे. प्रेमी मर जाते है. लेकिन प्रेम एक मेला बन जाता है. या गेहरी बात है आप. यह सिर्फ कोई कहावत नहीं है. यह हमें सीदे इस पूरी गधना की गेराई में लेजाती है. ये बताती है के से मुकामा गाट पर गती एक भीशन संस्क्रतिक त्रासदी ने वक्त के सात एक अजी विरासत का रूप ले लिया जो आज भी कायम है. बाग एक मुकामा की किम वदन्ती अगर हम मुकामा गाट की तरफ चले, तो ये गंगा के सबसे चोडे यह ताल का वो विशाल दल दल येलाका दूर दूर तक फैला हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अर तीक उनके बगल में दूस्री तरव मस्दूरों की चोटी चोटी पूसकी जोप्रीया. ये कोई मामूली फरक नहीं ता. ये समाज की उस कत्होर भोतिक और समाजिक दूरी का एक दम सती कुदारन है. जिसे पार करना उसवक्त सच में लगबबग नामुमकिन माना जाता ता. मतलब ये दोनो दून्या बिल्कुल बगल-बगल होकर भी एक दूस्रे से कोसो दूर थी. इन दोनो की दून्या मेंना वाखाई जमीन आस्मान का अंथर ता. एक तरव ते चोहलमल. आश्ये पर रहने वाले दूसाथ समवदाय के एक बेहत गरीब खेति हर मस्दूर. लेकिन इसके साथ ही वो अखाडे के एक जबर्दस पहल्वान भी थे. उनका उटीन एक दंफिक्स था. आल सुभा गंगासनान और फिर अखाडे की माटी. लोग उने यो ही नहीं अख्धराहा का शेर बुलाते थे, उनके पास दोलत नहीं ती, पर स्वाभिमान कुट-कुट कर बहरा था. और दूस्री तरफ, दूस्री तरफ फीं रेश्मा, अजब सिंकी भीटी, एक भेहद रसुखदार, आमीर और जमींदार भूम्या ब्रहुण परिवार से, पैसा रुत्बा नावकर चाकर, मतलप सब कुछ उनके कद्मो मे था. लेकिन रेश्मा बहुत निदर थी और उनका मन, हवेली की उन्दम गोटू दिवारो से कही आगे जाना चाता था. बाग तीन बगावत की खीमत. अब देखे चीजे कितनी तेजी सिबदली. पहले दिन गंगा किनारे गाट पर वो पहली मुलाकात होती है, ज़ान रेश्मा अपना दिल दे बैटती हैं. फिर, सर्फ एक हबते के भीटर? जी हाँ, सर्फ एक हबते में, रेश्मा बिना किसी दर के सीदे अपने प्यार का इजार कर देती हैं. लेकिन फिर, एक महीने के अंदर ही ये गेरा रास खूल जाता है, के हवेली की बेटी एक मस्दूर से मिलती है और फिर स्फ दो महीने के भीटर हालात इतने भिगर जाते है के रेश्मा को पुरी तरहा से उनके ही गर में कैद कर दिया जाता है ये बात बाते नहीं थिक यानी ये रास्ता कोई रास्ता नहीं है पता है, जब रेश्मा ने अपना प्रस्ताव रखा, तो चोफर्मल ने शुर्वात में से तुक्रा दिया था, और ये उनका कोई गुरूर नहीं ता, बलकुल नहीं, ये उनकी वो दुखध दूर दर्षिता थी, कुकी वे समाज की उस कड़ भी सच्चाई को बहुवी समचते दे. उने अच्छीतरा एहसाज ता की जाती और वर्ग की इन गेहरी खायों को पार करने का अंजाम, कितना ब्यानक, कितना जान लेवा हो सकता है. बाख चार, विषे शादिकार के कैदी. रेश्मा के लिए वो आलीशान हवेली रातो रात एक सकत जेल में तब्दील हो गई. दर्वाजे पर भारी भरकम पहरेदार बिठा दिये गय, हर किड़की पर कडी नजर रक्ची जाने लगी. ज़र ज़़ सोचीए, परिवार की उस तथाकतित मर्यादा और इजध को बचाने के लिए उस रसुखदार परिवार ने अपनी ही सगी बेटी को कैदी बना लिया. तो यहां एक बहुती रोंग्टे कडे कर देने वाल उच्छाल उटा है. ये जो विशेशा दिकार है ना ये अपने एहंकार के रक्षा आफिर कैसे करता है? ये सवाल हमें स्पूरी गटना के सबसे हिंसक और भ्यानाग मोड की तरफ लेजाता है, जिसकी चिंगारी रेश्मा के बाई आजैसिंके बेख काबू गुस्से से बडगी थी. बाग पाज रक्त और यूद आजे सिंकी उस ख्हूझ नाक बदले की योजना के तीन बहुत ही क्रूर चरन थे पहला कदम रामजीद और मन्नेखा नाम के दो पेशिवर हत्यारों को पैसे देकर कामपर रखना तार्गेट एक ही था चोह़डमल की गर्दन काटना तुस्रा कदम एक गात लगाकर हम्ला करना लेकिन ये दाओ पूरी तरा उल्ता पड़गया किंकि चोहर्ड मल ने अपनी आत्मरक्ष्या में उन दोनो को ही मार गिराया और फिर आता है तीस्रा और सबसे कहोफनाक कदम कदम. जब अजेसिंकी अपनी वो भाडे की सेना हार गगग, तो उसने पूरे दूसाद तोले पर एक सुन योजित और हत्यारो से लैस भीशन हमला बोल दिया. ये कोई आम लडाई नहीं फी, बलकी दो बिलकुल अलग गलक दून्याग का जान लेवा तक्राव था. उन बाडे के हद्यारों ने ये समजने में बहुड बगूल कर दी थी कि उनका शिकार कोई सीदा साथा अन्सान नहीं बलकी अखाडे का शेर हैं. ये वाखगे रहान करने वाला है कि कैसे चोहर्वाल ने अपनी जान बचाने के लिए अदोनो आप्त्यारों को उनीके अप्यारों से दूल चता दी और इस पूरी गतना के विनाशकारी पर परिनाम हुए वो पिलकुल साफ थे दिक्ये पहला खुन तो आत्म रक्षा मेही बहा था लेकिन इसने हवेली की उस जूटे एहंकार में आग लग लगा दी इसके बाज जो हुआना वो सरफ कोई निजी बदला नही रेग गया था वो सीदे सीदे एक वर्ग युध बन चुका था आजेसिं की आगुवारी में, हत्यारों से लैंसे क्पूरी कि पूरी भीड उस गरीब हाश्ये पर रहने वाली बस्ती पर तूर पडी ये एक आजी खोफनाक तरास्दी थी जो ये चीक चीक कर बताती है, के जब समाच की तो आजी बहयानक रूप से असमान परते अपस में तक्राती है, तो विनाश का हुना लक्बक तै हुता है. बाग चै म्रित्तिउ से परे का प्रेम. लिकिन हर अंत बुरा नहीं होता, ये कहानी आजिक अजी असी आमुर्ट और स्थाई विरासत का प्रतीक बन चुकी है, जो मिताए नहीं मित्ती. बवाँई नहीं भी बाद की बाद की बाद की प्रेमी बहले ही इस दुन्या से चले जाते है, लेके नुका प्रेम एक मेले के रूप में हमेशा जीवित रहता है, जो आज भी वहाँ हाज भी वहाँ रहाँ प्रेमी बहले ही अगवाई प्रेमी बहले ही जाते जाते है, अद अज ख़ाई से बजाए तो एक साज जोडता है। और अब इस भेहत शक्तिषाली और सुचने पर मजबोर कर देने वाले सवाल के साथ हम आजके इस विष्लेशन को यही विराम देते हैं जर अच्छी ये क्या समाज की इए उची दिवारें अगर अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े अज़े �