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महुआ_घटवारिनक_पात्र_आ_कथाक_समीक्षा.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:06आएक समिक्षा में हम्रालोचनी गजंद्र ठाकुरक लिखल महुवा गध्वारिन पर चर्चा कर रहल ची
  2. 0:06–0:13आए, जे परमान नदिक तत्पर एक ता विवष कन्याक, आमर, प्रेम आर भलीदानक लोग कता थेक
  3. 0:13–0:14एक दम!
  4. 0:14–0:16तब पना कोनो देरी के सिथा समिक्षा पराभी,
  5. 0:16–0:19कताक सजीव चित्रन पहोतनी कची.
  6. 0:19–0:21मुदा हमर जे पहिल बिन्दू अची,
  7. 0:21–0:25उक कताक पुरनता अग्केंद्रित द्रुष्टिकोन पर अची.
  8. 0:25–0:28माने आहा नकरात्मक पात्र देश इशारा कर रहल ची.
  9. 0:28–0:33ये सत्माय आस सधागर जका नकर आत्मक पात्र चति,
  10. 0:33–0:37तिनकर कुनो यतार्थ वादि या मनोवैग्यानिक आदार ने आची.
  11. 0:37–0:40हम्रा विचारे ये एक ता पेगव सर कचुक अची.
  12. 0:40–0:41हम सहमत ची हाशा.
  13. 0:41–0:45जकन हम कताक अद्याय एक अ पाज पेडे ची,
  14. 0:45–0:50तते महुवाक सत्माए उक्रा सव्दागर कहात हैं दन कलिल बेची देताची.
  15. 0:50–0:54रहा, बेची देताची आश सवदागर उक्रा कहरीद लेताची.
  16. 0:54–1:00मुदा दिकत इए ची जे इदोनु पात्र बलक्ल काजर जका कारी दिखाओल गेल जती.
  17. 1:00–1:01मने एक दम फ्लात.
  18. 1:01–1:09अग, एक दम फ्लात. अगनका लोकनिक भीट्रक कोन उठल पुठल वा कोन विवष्ता या कोन सपच्ट कारन ने देल गल अची.
  19. 1:09–1:11इदुन बस दूश्ट चति कारन.
  20. 1:11–1:15कारन कठाके एक ता दूश्टक आवश्षकता आची. बुजलो ना.
  21. 1:15–1:26एक दम, जक्खन पात्र एतिक सीथा सीथी कलनायक होई पची, तक कत्खाक यतारत वाद कतम बजाई तची, इमात्र एक ता सामान ने द्रिष्टान्त बनी कर रजाई तची.
  22. 1:26–1:56वो बवागा वो बवागा दो बवागा दो बवागा दो बवागा दो वो बवागा दो वो बवागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो व
  23. 1:56–1:59राम कम न्यादा औरो निखरी कावेत आजी
  24. 1:59–2:00इत आजी
  25. 2:00–2:03तकी एते से हो लेक्ख का उदेश्य
  26. 2:03–2:07श्रोता का सहान अबहुती पुनत महुवा देस राखव नही आजी
  27. 2:07–2:09जब हम सतमाय के मानविय बनादब
  28. 2:09–2:12तकी पाथक महुवाख त्राज्दी से बधटक नही जायत
  29. 2:12–2:18आहा के इप टूलना बहुत सतीक चे, वुदा एते माद्ध्यम आसमेक भुजनाई आवश्षक चे.
  30. 2:18–2:19आज्थ? कोना?
  31. 2:19–2:24देको मोखिक परमपरा या पुराना लोग कता में एई मोडल काज करे तची.
  32. 2:24–2:27करन उते कहनिक गती तेज होगतची.
  33. 2:27–2:37मुदा जखन आहा उही लोग कता के एक ता विस्त्रत लिखित रूप दैची, तकन आदहुनिक पाट्ख, जटल ताख होजे तची.
  34. 2:37–2:39माने हुनका ग्रे एर्या चाही?
  35. 2:39–2:46एब्दम, सत्माये के मान्विय बनेवाक वर्त इई नहीं आची जे उक्रा निर्दोष बना देल जाए.
  36. 2:46–2:54उजे कोरहल आची से ग्र्ने तची मुदा जा उकर इग काज कोनो तोस हताशा सा उप्जल आची ता?
  37. 2:54–2:57तो आरो बीशी भ्यनक लागे तची. हम भूजी रहल ची.
  38. 2:57–3:05आप, एकर सुदार ले लेखख सत्माय आस अदागरक क्रूर तक पाचु किचु यतार्थवादी प्रेरना जोर सकाईच्छती.
  39. 3:05–3:11माने ज़, हम सत्माय के केवल एक्ता लालची महिलाक बदला एक्ता एहन्स्त्री क्रूर्प मे देखी,
  40. 3:11–3:13जगर पती शराभी आची
  41. 3:13–3:15जे मववाक बाप ची
  42. 3:15–3:17जे गरक कुनो दाईत्व नहीं लेटव तजी
  43. 3:17–3:19तव उकर निरनाई यधार्थवादी बूजात
  44. 3:19–3:21हमर लागे तची जे जे लेखख एक या धो पाती मे एग दिखा देट्छी
  45. 3:21–3:25अगर बूक सम्मरी रहल आपन दोसर बच्चक बहविश्षक असुरक्शा सहताश अची
  46. 3:25–3:26इक दम
  47. 3:26–3:30तकन अवहताश भखः इशाला करी तची
  48. 3:30–3:32एस सकताख वजन बहुत बवधी जाएत
  49. 3:32–3:34सही कहल हूँ
  50. 3:34–3:38आहा जे इदरिद्रता आहताशक छित्र कि चलहूँ
  51. 3:38–3:40आश्भभखः यी सुला करीत अची
  52. 3:40–3:43ये से कताक वजन बहुत बगी जाएत
  53. 3:43–3:44सही कहल हूँ
  54. 3:44–3:48आहाजे यी दरिद्रता आहाटाशक चित्र कि चला हूँ
  55. 3:48–3:51उईसे सत्माएक क्रुडता कम नहीं भेल
  56. 3:51–3:55बलकी समाजग को कुर यतार्थ सोजा आभी गेल
  57. 3:55–3:58जाही में महुवा जीवी रहल अची
  58. 3:58–3:59आप सव्दागर अच बात करू?
  59. 3:59–4:04आप सवदागर के केवल एक ता कामी पूरुष देखावल गे लची
  60. 4:04–4:06जे महुवाक सुन्दर्या पर लट्टू अची
  61. 4:06–4:09एक रा बदल्वाख अवष्चकता आची
  62. 4:09–4:11तस्वदागर के कोना प्रस्थूत केल जाए,
  63. 4:11–4:15जो उकामी नहीं अचे ता महुवाक के क्ष्वीदत.
  64. 4:15–4:21देखों, वोक्रा एक ता त्हन्डा दिमागक चतृर व्यपारेक रुप में प्रस्थूत के जाए तची.
  65. 4:21–4:27एक ता आहन सवदागर, जे महुवाक मात्र एक ता वस्तू या इन्वेस्मेंट बुजगेद थची.
  66. 4:27–4:29बाप्रे, इत आरोख खतरना कची?
  67. 4:29–4:36आँ, उकर क्रुरता, उकर वासना में नहीं, बलकी उकर समवेदन हींता में हो बाख चाही.
  68. 4:36–4:42जखन महुवाक खापी रहाल आची तकन सवदागरक महुवाक दॉखसक कुनो मतलब नहीं
  69. 4:42–4:49उ मात्र इदेखी रहाल आची जे इशमान सुरक्षित मुरंक पहोची जाई जाही सवौक्रा नीक दाम बेट सके
  70. 4:49–4:57एक दम, इसम्वेदन हीनता, महुवाक सतित्व, और उकर प्रेम के प्रकाशक के आरोबेसी चमकावत.
  71. 4:57–5:05इत बहुत गहीर बात कहलो आहा, एक तवासना से भडल दूष्ट से बेसी कठरनाक उडूष्ट होई तची,
  72. 5:05–5:10जक्रा आख बहावना कोनो मोल नेके जे आखे मात्रेक्ता सिक्का बुजगेत अची.
  73. 5:10–5:17सही बात इपरिवर्तन कताख परिद्रिष्खे एक्दम वास्तविक्ता से जोड देत.
  74. 5:17–5:22आप कताख दोसर मुख्य बिन्दू पर चलेची जे अची सरंचना और प्रवाः.
  75. 5:22–5:28महुवाक इई त्रास्दी केवल सत्माय और सोदागर क्रुर्तापर नहीं तिकल अची.
  76. 5:28–5:31आई चरमोद कर्ष के लएक गब कर अगल ची ना?
  77. 5:31–5:36आई. कताख चरमोद कर्ष अर्ठात अद्याय सात में जे खलामेक्स अची.
  78. 5:36–5:40उते हमरा एक्ता बहुत बर समस्या देखा रहली
  79. 5:40–5:42आहा को चोटका सिपाही वला द्रिश
  80. 5:42–5:43एक्धम
  81. 5:43–5:46जखन महुवा अपना आत्म सम्मानक रक्षार्त
  82. 5:46–5:49नदीक तीवर द्हार में कुदैतची
  83. 5:49–5:51तकन एक्धम से एक्ता चोटका सिपाही
  84. 5:51–5:54अगर प्रेम के कोनो पूर्व संकेत नहीं अच्छे
  85. 5:54–5:57आई अच्छनक क्लैमेक्स में उकुद जाई तची
  86. 5:57–6:00एक्रा अंग्रेजी में बिना सेट्टब के दिलगिल प्याँफ कोल जाई तची
  87. 6:00–6:06उगर प्रेम के कोनो पूर्व संकेत नहीं आचे आई आचानक क्लामेक्स में उकुद जाई तची
  88. 6:06–6:11एक्रा अंग्रेजी में बिना सेट्टप के दिलगिल प्योफ कोल जाई तची
  89. 6:11–6:14आई एक्र दूश परिनाम एई होई तची
  90. 6:14–6:17अगर दूश परिनाम एई होई तची
  91. 6:17–6:20जे महुवाक स्वेच्छा से देल गिल महान भलीदान
  92. 6:20–6:24आमोरंग कप पतियोकर समरपन कमूल विषेसा
  93. 6:24–6:27पात्ख दियान अचानक भड़क जाए तची
  94. 6:27–6:30पात्ख महुवाक शोक मनेबाक बदला
  95. 6:30–6:37पात्ख्महुवाक शोक मनेबाक बद्ला इस शोच्वा में लागी जाए तची जे औरे इनवका प्रेमी कते से आबिगेल
  96. 6:37–6:38एक दम
  97. 6:38–6:42जखनम इस दिश्छे पडलूं ता हमरा इस एक दम नबबक दश्षक के कोनो भालीबृ सिनेमाक क्लामेक्स जखान लागल
  98. 6:42–6:49जखनम इद्रिष्य पडलूं, ता हमरा इई एकदम नबबेक दशक के कोनो भालीबुट सिनेमाक,
  99. 6:49–6:53कलाईमेक्स जगा लागल. जते अचानक सकोनो छोटका गुन्डाक,
  100. 6:53–6:56हिर्दे परिवर्तन बहुजायता ची, अ औग हीरो,
  101. 6:56–6:58वा हीरो इनके लेल जान्द दे ची.
  102. 6:58–7:00अग, इं मेलरो ड्रामा बहगेल.
  103. 7:00–7:05मुदा, तनी रुकु, की इं जानी भुजी का नहीं का लेगेल अचे?
  104. 7:05–7:06माने अगा की की का बाक अचे?
  105. 7:06–7:10की सिपाहीक अचानक कुदी पडव, इं नहीं देखाई बाए चे,
  106. 7:10–7:16जे महुवाक संदर्या असतित्वसा उक्रोक्रूर परीवेश से हो इतेक प्रभेज्च्छल,
  107. 7:16–7:20जे उही पाथर जखा सिपाहिक, हिर्दे से हो पिगेल गेल.
  108. 7:20–7:22आचा, पोएटिक जस्टिस जगा?
  109. 7:22–7:28आजा जी कावियात्मक नियाय का तरक दिलूं, उसुनम में नीक लागे तचे, मुदा शिल्प का द्रिष्टी सा इग्म्जोर आची.
  110. 7:28–7:34कुनो कताक चरम पर अचानक रिदे परिवर्तन यदार्थ वादी कता शिल्प में कथके तची.
  111. 7:34–7:37मुदा शिल्प कद्रिष्टी सा इग्व्जोर आची
  112. 7:37–7:41कुनो कताक चरम पर आचानक रिदे परिवर्तन
  113. 7:41–7:44यधार्त वादी कता शिल्प में कथकै तची
  114. 7:44–7:46मने एग विश्वसनिया नहीं लागे तचे
  115. 7:46–7:47एक दम नहीं
  116. 7:47–7:52ज़ा आजा है च्छी जे सिपाहिक कुदः प्रभाव कारी हो,
  117. 7:52–7:57तप पाथक के उकर अन्तर द्वन्वक जलक पहले सब हितबक चाही.
  118. 7:57–8:03एकर सुदार लेल याता एही प्रसंगक पूर्वार्ध में स्थापित करू या हता दियो.
  119. 8:03–8:05जब पूर्व संकेत नहीं आची,
  120. 8:05–8:10ये महुवा कपन स्वतन्त्र निरनाएक जे वजन अची ओख्रा हलका कदे तची
  121. 8:10–8:17आँ, कारन एक ता दोसर पूरुष ओखर त्रास्दी में बिना कोनो आदारक लिए ज़िस्सिदार बनी जाए तचे
  122. 8:18–8:19तो फिर एक रा सुदरल को ना जाए?
  123. 8:19–8:21वंड़ा उख्रा की करबाक चाही केवल तार रहबाक साई ता काएज नहीं चलत?
  124. 8:21–8:22नहीं
  125. 8:22–8:24तार रहबाक साई नहीं चलत,
  126. 8:24–8:27ओते आहा सिपाहीक नज्री में सहानु भूती,
  127. 8:27–8:30संकोच, या अप्राद बोद देखागी जाएगी
  128. 8:30–8:35जिना जखन महुवा नाव पर बआइत है तेछे तकन उ छोटका सिपाही उक्रा दीस देखाइत.
  129. 8:36–8:38मुदा उक्रा की करबाक चाही?
  130. 8:38–8:40केवल तार रहबाक साथ खायज नहीं चलत?
  131. 8:40–8:43नहीं, तार रहबाक सा नहीं चलत,
  132. 8:43–8:50उते आहा सिपाहिक नज्री में सहनु भूती, संकोच या अप्राद भोध देखा सकेची.
  133. 8:50–8:53जिना उ नाव पर महुवाके कनदेखाएत,
  134. 8:53–8:55उकरा पानी देबाक प्रयास करे थेची,
  135. 8:55–8:58मुदा सोदागरक दरसा पाचु हटी जाए थेची.
  136. 8:58–9:06एक्दम, एक तचोट सन्द्रिष्य, जते एक वहुवाग विवष्ता देखी का मुड्थी बान्देई ची मुदा चुप रहेता ची.
  137. 9:06–9:07आ, इई नीक रहत.
  138. 9:07–9:15इच्छोटका भीज जगखन क्लामेक्स में गाछ बनत्त, तकशन उकर कुदी पडव पाथकक ब्रहमित नहीं करत, बलकी रूए देत.
  139. 9:15–9:21इप भेल ज़ हम हुंकर प्रेम के अस्थापित करी, मुदा हम्रा दिमाग में एक ता आवर विकल्प आवी रहा लेची.
  140. 9:21–9:25अख्रा अपन मालिक के जवाब देबाख अच्ये
  141. 9:25–9:29सवदागर के समान माने महुवा पानी में खसी रहा लेएचे
  142. 9:29–9:32अख्रा अपन मालिक के जवाब देबाख अच्ये
  143. 9:32–9:36सवदागर के समान माने महुवा पानी में खसी रहा लेचे
  144. 9:36–9:37अच्या
  145. 9:37–9:39जे अव समान दूभी गेल
  146. 9:39–9:43तज़ सवदागर उक्रा नहीं चोड़त, तकी इई नहीं बहुसके तची,
  147. 9:43–9:47जे उसिपाही केवल अपना करतब भी बोध सें,
  148. 9:47–9:52वा मालिक का भहेसें, उई समान के बचेबाक लेल नदी में कुछ जाए.
  149. 9:52–9:54बाप्रे इप गजब अची?
  150. 9:54–9:56ऐही सें, महुवाक त्रास्दी.
  151. 9:56–10:08आव उकर आपन प्रेमक अदितियता अक छुनने रहत, महुवा आपन प्रेमक लेल जान दो रहलत ची, अस्पाही केवल एक ता वस्तूके वचे बाख लेल जान जोख हिम में डारी रहलेस.
  152. 10:08–10:13इबेपडित्य, मने कन्त्रास्त, ता आरो जबर्दस्त भजध,
  153. 10:13–10:16इक ता असादारन विचार अची.
  154. 10:16–10:18हमरो इहे लागाई तची.
  155. 10:18–10:24आहां के सुजाव महुवाक महांता के कोनो दोसर पात्रक भावुकता से नहीं बान दे तची.
  156. 10:24–10:28बलकी समाजक क्रूर व्यव्साइक्ता के सोजा राख है तची
  157. 10:28–10:29इक दम
  158. 10:29–10:36सिपाहीक इस स्वार्त प्रेरिट चलांक महुवाक निस्वार्त चलांक के आरो उज कर देटची
  159. 10:36–10:40इविकल्पक प्रियोग कताक मूल स्वरक पूर्नत सुरक्षिट रखध
  160. 10:40–10:47निक ता आब इज प्रेमोक बात अची यह हमरालोक निक तेसर असथ से महत्वपुन बिंदुदरी लईज जाई तची
  161. 10:47–10:51जे अची कताख सार्थकता आप प्रासंगिकता
  162. 10:51–10:51अची कताख सार्थकता आप प्रासंगिकता
  163. 10:51–10:51अची कताख सार्थकता आप प्रासंगिकता
  164. 10:51–10:56सम्purn katha kendra me morangak o premiyachi.
  165. 10:56–10:59अद्याय चार मे स्पष्ट रूप से वरनित अची,
  166. 10:59–11:04जे महुवा आपन मरंगक प्रेमिक फागुन मे आबाक भाड जोई रहल ची.
  167. 11:04–11:07इह प्रतिक्षा वोकर एक मात्र संबल आची.
  168. 11:07–11:10वोकर सम्purn sangharshak aadhaar achhi.
  169. 11:10–11:16मुदा कताक उप्संगार माने अद्याय आप्जमे उप्रेमी गायव ची.
  170. 11:16–11:18एह सब से बडग खन्डन अची.
  171. 11:18–11:22महुवाक मेच्त्युख पष्यात इगतो उलेक नहीं आची
  172. 11:22–11:26जे उप्रेमी जखन मोरंग सो गुरल तक्की बहल.
  173. 11:26–11:28एक दम चुपची लेक होते.
  174. 11:28–11:31जे प्रेम एही कताक मुल शक्ती अच्छे
  175. 11:31–11:34जे करलेल महुवा आपन प्रान त्यागी देलक
  176. 11:34–11:36उक्रे अन्त में भिसरी जाना
  177. 11:36–11:38एक्ता पैग सन्रचनात्मक त्रूती अच्छी
  178. 11:38–11:41अंग्रेजी में एक्रा नेरेटेटेव लुप कहल जाए च्छे
  179. 11:41–11:45आहा एक ता सुत्र खूले हू उदा उक्रा बान्द्लू हू नहीं
  180. 11:45–11:48उदा फेर उई दार्षनिक बात पर आवच्छी हम
  181. 11:48–11:52जीवन में की सब किछ सुलजल रहे तची
  182. 11:52–11:54आही तची तची तची तची तची
  183. 11:54–11:59तो हम्रा लगाई तची, जे इदूरे पन स्वयम में एक तरास्दी आची,
  184. 11:59–12:06कि ओक्रा अन्सुल्जल चोडव पाथक से हुनकर अपन निसकर्ष निकालवाक स्वतन्त्रता ने दे तची.
  185. 12:06–12:13माने आचा कहब आची, जे यतार्थ्वाद इची जे उप्रेमी गुम्बहगल.
  186. 12:13–12:17अख्रा कक्नो पताने चलल जे महुवाक संकी भेल
  187. 12:17–12:22आम महुवाक भलिदान बस एक तर्फा मून चीक बनी कर रही गला
  188. 12:22–12:26आहाक तर्क जीवनक द्रिष्टी से सत्या ची
  189. 12:26–12:30मुदा साहित्यमे इपात्ध कसंग एक तर्धक दूखा आची
  190. 12:30–12:31दूखा कुना?
  191. 12:31–12:39देखूं, पात्ख एक्ता कता एही लेल पड़े तची, कारन उ जीवनक भिख्रल यदार्थ से इत्र एक्ता अर्थ कोजगाई तची.
  192. 12:39–12:43अन सुल्जल चोडब अब भिस्री जेनाई में अंतर अची.
  193. 12:43–12:44आच आ, यी बात अची.
  194. 12:44–12:51ज़ा आवक्र अक्र अप्र सुल्जल चोडब चाहत थजी तो उहो एक्ता लेखख का चैंजका लागबाक चाही.
  195. 12:51–12:59जवो प्रेमी गुरक अबैत जी, खाली गाड देखगत जी, अबिना कोनो शवद के वापस चली जाई तची, तजी इएक्ता निश्कर्ष अची.
  196. 12:59–13:01अग, एक ता ख्लोजर अची
  197. 13:01–13:03मुदाउकर जिक्र दरी नहीं करम
  198. 13:03–13:08इदे ख्याईवाई तची जे लेक्हक आपन कताक मोल उप्रे रक्किन भिस्री गेला
  199. 13:08–13:12बुज्गलों, मने पातके के एक ता ख्लोजर वा भाअनात्मक सन्तुष्ती चाही
  200. 13:12–13:19एकर सुद्दारलेल उप्संशार में, मुरंक प्रेमिक परनाती या उकर प्रतिक्रिया कें संच्प में जोडल जा सकते थाची.
  201. 13:19–13:24एक्दम, तएक्रा उप्संशार में कोना समेटल जाए?
  202. 13:24–13:29हम कलपना करोल ची जे अद्ध्याय आप में भागुन का मास चे.
  203. 13:29–13:34मुरंका प्रेमी उट्साह से भरल आपन गाम गुरलो हो
  204. 13:34–13:37हा उसीदा कोशी पर मानक गाड पर अवैत अची
  205. 13:37–13:43उते पहुचला पर अख्रा लोख से महुवा का बरिदान का कता सुन्वाले ले बेटे अची
  206. 13:43–13:47अब अखर की प्रतिक्रिया होईत है? अखानत
  207. 13:47–13:49केवल कानब से तो काज नहीं चलत?
  208. 13:49–13:53नहीं, उही प्रेमी के आजीवन उक्रे स्म्रती में
  209. 13:53–13:55गीत गवएत देख हवल जा सकेत अची.
  210. 13:55–13:57की इनहीं भह सकेत अची,
  211. 13:57–13:59जे इजे लोग गीत अची,
  212. 13:59–14:02जे एक टा चलिये महुवा गत्वाराईं,
  213. 14:02–14:05उकर रच्ना उही प्रेमी द्वारा काईल गेल हो?
  214. 14:05–14:09बाप्रे यी एक्दम रोंग्टा ताड करल वाला विचार अची
  215. 14:09–14:09आची ना
  216. 14:09–14:13ज़ लेखख एही कोन के जोडी दे चतिन
  217. 14:13–14:15तक खथाक प्रारंभी गीत
  218. 14:15–14:17कथाक अंथ से पोंड्रुपें जुडी जाएत
  219. 14:17–14:22प्रेमिक यी दुख़द गीत ना केवल उकर प्रेमक आमर करत,
  220. 14:22–14:25बलकी यी लोग गीतक जनम का कारन सो हो सपष्ट करत.
  221. 14:25–14:28एक दम महुवा शरीर से कहतम बहुगे ली,
  222. 14:28–14:33मुदा उ प्रेमि उकर आपन गीतक माद्ध्यम सदिकनक के ले जीवित कोडे लक.
  223. 14:33–14:38इ एक ता एहन बावनात्मक गूँज उपन कुरत
  224. 14:38–14:41जे पात्धक वन में बहुत दिनदरी बसल रहत
  225. 14:41–14:45आहाक इ विचार नारेटिव लूप के बहुत सुंदरता संबान दे तची
  226. 14:45–14:49तए इ चल हम्रा लोक्किक नेक किचु गंभीर विचार
  227. 14:49–14:50संख्षेप में कही
  228. 14:50–14:55तद महुवा गट्वारिन आपन मुल रूप में अथ्ट्ट्मार्मिक आज सजीव अच्छी
  229. 14:55–15:01मुदा एक्रा आरोउद्क्रिष्ट बनेवाक लेल तींटा प्रमुक्ठाम पर काज कयल जासके तची
  230. 15:01–15:02एक दम
  231. 15:02–15:08पहिल जे सत्माय अ सवदागरक पात्र में दरिद्रता अ व्याम्साएक समवेदन हिंताजका
  232. 15:08–15:13यत्हार्थ वादी गेराई जोडु जाहिसा महुवाक संगर्ष भेसी जीवन्त लागे.
  233. 15:13–15:18आदो सर जे क्लायमेक्स में चोट्का शिपाही के भूमिका सा मेलो ड्रामा हताओ.
  234. 15:18–15:21याता उकर प्रेम के पहले स्थापिद करू,
  235. 15:21–15:25या फेर उक्रा मात्र सधागर के समान बचेबाक विवष्ता में
  236. 15:25–15:28नदी में कुदाविर देखाओ, जाहिसा समपुरन द्यान
  237. 15:28–15:31महुवाक बलिदान पर किंद्रित रहें.
  238. 15:31–15:34सही कहलहू, आत्ते सर उप संगार में
  239. 15:34–15:38मूरंके प्रेमिक कता सुत्र के समेटू उक्रा गाट पर गूरा कलाउ
  240. 15:38–15:40आव उही लोग गीद के रच्नाक संग
  241. 15:40–15:43प्रेमक सार्थाक्ता के एक्ता आमर पूनता दिया
  242. 15:43–15:46इतीनो बिन्दु जया कताक भीतर
  243. 15:46–15:48नीक जका भूनल जाये
  244. 15:48–15:51तईी मुल कत्ठाक के कोनो हानी नपहुचावत
  245. 15:51–15:55बलके एक्रा एक्ता काल जैई रच्नाक्रूप में स्तापित करत.
  246. 15:55–16:00महुवा के विवष्ता, उकर साहस, आ उकर प्रेव,
  247. 16:00–16:02सब किच आरो गहीर भोक अबहरत.
  248. 16:02–16:05हम्रा लोकनी श्रोता के आमन्त्रित करेची.
  249. 16:05–16:13जे आहा एही सुज़ाव सबक आदार पर अपन कत्ठा के परिमारजित करू आरो नीक बनेवाख लेल एक्रा फेडस पथाउ
  250. 16:13–16:17आख, कत्ठा लिखब एक तानिरन्तर चलेत रहे वाला यात्रा थेक
  251. 16:17–16:21आख, हम्रा लोकनी एही यात्रा मे आहा के संग सदैव उपस्तित रहव
  252. 16:21–16:24आएकलेल बसेत्वे सूनेट्रहू आलिक्ठ्रहू

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आएक समिक्षा में हम्रालोचनी गजंद्र ठाकुरक लिखल महुवा गध्वारिन पर चर्चा कर रहल ची आए, जे परमान नदिक तत्पर एक ता विवष कन्याक, आमर, प्रेम आर भलीदानक लोग कता थेक एक दम! तब पना कोनो देरी के सिथा समिक्षा पराभी, कताक सजीव चित्रन पहोतनी कची. मुदा हमर जे पहिल बिन्दू अची, उक कताक पुरनता अग्केंद्रित द्रुष्टिकोन पर अची. माने आहा नकरात्मक पात्र देश इशारा कर रहल ची. ये सत्माय आस सधागर जका नकर आत्मक पात्र चति, तिनकर कुनो यतार्थ वादि या मनोवैग्यानिक आदार ने आची. हम्रा विचारे ये एक ता पेगव सर कचुक अची. हम सहमत ची हाशा. जकन हम कताक अद्याय एक अ पाज पेडे ची, तते महुवाक सत्माए उक्रा सव्दागर कहात हैं दन कलिल बेची देताची. रहा, बेची देताची आश सवदागर उक्रा कहरीद लेताची. मुदा दिकत इए ची जे इदोनु पात्र बलक्ल काजर जका कारी दिखाओल गेल जती. मने एक दम फ्लात. अग, एक दम फ्लात. अगनका लोकनिक भीट्रक कोन उठल पुठल वा कोन विवष्ता या कोन सपच्ट कारन ने देल गल अची. इदुन बस दूश्ट चति कारन. कारन कठाके एक ता दूश्टक आवश्षकता आची. बुजलो ना. एक दम, जक्खन पात्र एतिक सीथा सीथी कलनायक होई पची, तक कत्खाक यतारत वाद कतम बजाई तची, इमात्र एक ता सामान ने द्रिष्टान्त बनी कर रजाई तची. वो बवागा वो बवागा दो बवागा दो बवागा दो बवागा दो वो बवागा दो वो बवागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो वागा दो व राम कम न्यादा औरो निखरी कावेत आजी इत आजी तकी एते से हो लेक्ख का उदेश्य श्रोता का सहान अबहुती पुनत महुवा देस राखव नही आजी जब हम सतमाय के मानविय बनादब तकी पाथक महुवाख त्राज्दी से बधटक नही जायत आहा के इप टूलना बहुत सतीक चे, वुदा एते माद्ध्यम आसमेक भुजनाई आवश्षक चे. आज्थ? कोना? देको मोखिक परमपरा या पुराना लोग कता में एई मोडल काज करे तची. करन उते कहनिक गती तेज होगतची. मुदा जखन आहा उही लोग कता के एक ता विस्त्रत लिखित रूप दैची, तकन आदहुनिक पाट्ख, जटल ताख होजे तची. माने हुनका ग्रे एर्या चाही? एब्दम, सत्माये के मान्विय बनेवाक वर्त इई नहीं आची जे उक्रा निर्दोष बना देल जाए. उजे कोरहल आची से ग्र्ने तची मुदा जा उकर इग काज कोनो तोस हताशा सा उप्जल आची ता? तो आरो बीशी भ्यनक लागे तची. हम भूजी रहल ची. आप, एकर सुदार ले लेखख सत्माय आस अदागरक क्रूर तक पाचु किचु यतार्थवादी प्रेरना जोर सकाईच्छती. माने ज़, हम सत्माय के केवल एक्ता लालची महिलाक बदला एक्ता एहन्स्त्री क्रूर्प मे देखी, जगर पती शराभी आची जे मववाक बाप ची जे गरक कुनो दाईत्व नहीं लेटव तजी तव उकर निरनाई यधार्थवादी बूजात हमर लागे तची जे जे लेखख एक या धो पाती मे एग दिखा देट्छी अगर बूक सम्मरी रहल आपन दोसर बच्चक बहविश्षक असुरक्शा सहताश अची इक दम तकन अवहताश भखः इशाला करी तची एस सकताख वजन बहुत बवधी जाएत सही कहल हूँ आहा जे इदरिद्रता आहताशक छित्र कि चलहूँ आश्भभखः यी सुला करीत अची ये से कताक वजन बहुत बगी जाएत सही कहल हूँ आहाजे यी दरिद्रता आहाटाशक चित्र कि चला हूँ उईसे सत्माएक क्रुडता कम नहीं भेल बलकी समाजग को कुर यतार्थ सोजा आभी गेल जाही में महुवा जीवी रहल अची आप सव्दागर अच बात करू? आप सवदागर के केवल एक ता कामी पूरुष देखावल गे लची जे महुवाक सुन्दर्या पर लट्टू अची एक रा बदल्वाख अवष्चकता आची तस्वदागर के कोना प्रस्थूत केल जाए, जो उकामी नहीं अचे ता महुवाक के क्ष्वीदत. देखों, वोक्रा एक ता त्हन्डा दिमागक चतृर व्यपारेक रुप में प्रस्थूत के जाए तची. एक ता आहन सवदागर, जे महुवाक मात्र एक ता वस्तू या इन्वेस्मेंट बुजगेद थची. बाप्रे, इत आरोख खतरना कची? आँ, उकर क्रुरता, उकर वासना में नहीं, बलकी उकर समवेदन हींता में हो बाख चाही. जखन महुवाक खापी रहाल आची तकन सवदागरक महुवाक दॉखसक कुनो मतलब नहीं उ मात्र इदेखी रहाल आची जे इशमान सुरक्षित मुरंक पहोची जाई जाही सवौक्रा नीक दाम बेट सके एक दम, इसम्वेदन हीनता, महुवाक सतित्व, और उकर प्रेम के प्रकाशक के आरोबेसी चमकावत. इत बहुत गहीर बात कहलो आहा, एक तवासना से भडल दूष्ट से बेसी कठरनाक उडूष्ट होई तची, जक्रा आख बहावना कोनो मोल नेके जे आखे मात्रेक्ता सिक्का बुजगेत अची. सही बात इपरिवर्तन कताख परिद्रिष्खे एक्दम वास्तविक्ता से जोड देत. आप कताख दोसर मुख्य बिन्दू पर चलेची जे अची सरंचना और प्रवाः. महुवाक इई त्रास्दी केवल सत्माय और सोदागर क्रुर्तापर नहीं तिकल अची. आई चरमोद कर्ष के लएक गब कर अगल ची ना? आई. कताख चरमोद कर्ष अर्ठात अद्याय सात में जे खलामेक्स अची. उते हमरा एक्ता बहुत बर समस्या देखा रहली आहा को चोटका सिपाही वला द्रिश एक्धम जखन महुवा अपना आत्म सम्मानक रक्षार्त नदीक तीवर द्हार में कुदैतची तकन एक्धम से एक्ता चोटका सिपाही अगर प्रेम के कोनो पूर्व संकेत नहीं अच्छे आई अच्छनक क्लैमेक्स में उकुद जाई तची एक्रा अंग्रेजी में बिना सेट्टब के दिलगिल प्याँफ कोल जाई तची उगर प्रेम के कोनो पूर्व संकेत नहीं आचे आई आचानक क्लामेक्स में उकुद जाई तची एक्रा अंग्रेजी में बिना सेट्टप के दिलगिल प्योफ कोल जाई तची आई एक्र दूश परिनाम एई होई तची अगर दूश परिनाम एई होई तची जे महुवाक स्वेच्छा से देल गिल महान भलीदान आमोरंग कप पतियोकर समरपन कमूल विषेसा पात्ख दियान अचानक भड़क जाए तची पात्ख महुवाक शोक मनेबाक बदला पात्ख्महुवाक शोक मनेबाक बद्ला इस शोच्वा में लागी जाए तची जे औरे इनवका प्रेमी कते से आबिगेल एक दम जखनम इस दिश्छे पडलूं ता हमरा इस एक दम नबबक दश्षक के कोनो भालीबृ सिनेमाक क्लामेक्स जखान लागल जखनम इद्रिष्य पडलूं, ता हमरा इई एकदम नबबेक दशक के कोनो भालीबुट सिनेमाक, कलाईमेक्स जगा लागल. जते अचानक सकोनो छोटका गुन्डाक, हिर्दे परिवर्तन बहुजायता ची, अ औग हीरो, वा हीरो इनके लेल जान्द दे ची. अग, इं मेलरो ड्रामा बहगेल. मुदा, तनी रुकु, की इं जानी भुजी का नहीं का लेगेल अचे? माने अगा की की का बाक अचे? की सिपाहीक अचानक कुदी पडव, इं नहीं देखाई बाए चे, जे महुवाक संदर्या असतित्वसा उक्रोक्रूर परीवेश से हो इतेक प्रभेज्च्छल, जे उही पाथर जखा सिपाहिक, हिर्दे से हो पिगेल गेल. आचा, पोएटिक जस्टिस जगा? आजा जी कावियात्मक नियाय का तरक दिलूं, उसुनम में नीक लागे तचे, मुदा शिल्प का द्रिष्टी सा इग्म्जोर आची. कुनो कताक चरम पर अचानक रिदे परिवर्तन यदार्थ वादी कता शिल्प में कथके तची. मुदा शिल्प कद्रिष्टी सा इग्व्जोर आची कुनो कताक चरम पर आचानक रिदे परिवर्तन यधार्त वादी कता शिल्प में कथकै तची मने एग विश्वसनिया नहीं लागे तचे एक दम नहीं ज़ा आजा है च्छी जे सिपाहिक कुदः प्रभाव कारी हो, तप पाथक के उकर अन्तर द्वन्वक जलक पहले सब हितबक चाही. एकर सुदार लेल याता एही प्रसंगक पूर्वार्ध में स्थापित करू या हता दियो. जब पूर्व संकेत नहीं आची, ये महुवा कपन स्वतन्त्र निरनाएक जे वजन अची ओख्रा हलका कदे तची आँ, कारन एक ता दोसर पूरुष ओखर त्रास्दी में बिना कोनो आदारक लिए ज़िस्सिदार बनी जाए तचे तो फिर एक रा सुदरल को ना जाए? वंड़ा उख्रा की करबाक चाही केवल तार रहबाक साई ता काएज नहीं चलत? नहीं तार रहबाक साई नहीं चलत, ओते आहा सिपाहीक नज्री में सहानु भूती, संकोच, या अप्राद बोद देखागी जाएगी जिना जखन महुवा नाव पर बआइत है तेछे तकन उ छोटका सिपाही उक्रा दीस देखाइत. मुदा उक्रा की करबाक चाही? केवल तार रहबाक साथ खायज नहीं चलत? नहीं, तार रहबाक सा नहीं चलत, उते आहा सिपाहिक नज्री में सहनु भूती, संकोच या अप्राद भोध देखा सकेची. जिना उ नाव पर महुवाके कनदेखाएत, उकरा पानी देबाक प्रयास करे थेची, मुदा सोदागरक दरसा पाचु हटी जाए थेची. एक्दम, एक तचोट सन्द्रिष्य, जते एक वहुवाग विवष्ता देखी का मुड्थी बान्देई ची मुदा चुप रहेता ची. आ, इई नीक रहत. इच्छोटका भीज जगखन क्लामेक्स में गाछ बनत्त, तकशन उकर कुदी पडव पाथकक ब्रहमित नहीं करत, बलकी रूए देत. इप भेल ज़ हम हुंकर प्रेम के अस्थापित करी, मुदा हम्रा दिमाग में एक ता आवर विकल्प आवी रहा लेची. अख्रा अपन मालिक के जवाब देबाख अच्ये सवदागर के समान माने महुवा पानी में खसी रहा लेएचे अख्रा अपन मालिक के जवाब देबाख अच्ये सवदागर के समान माने महुवा पानी में खसी रहा लेचे अच्या जे अव समान दूभी गेल तज़ सवदागर उक्रा नहीं चोड़त, तकी इई नहीं बहुसके तची, जे उसिपाही केवल अपना करतब भी बोध सें, वा मालिक का भहेसें, उई समान के बचेबाक लेल नदी में कुछ जाए. बाप्रे इप गजब अची? ऐही सें, महुवाक त्रास्दी. आव उकर आपन प्रेमक अदितियता अक छुनने रहत, महुवा आपन प्रेमक लेल जान दो रहलत ची, अस्पाही केवल एक ता वस्तूके वचे बाख लेल जान जोख हिम में डारी रहलेस. इबेपडित्य, मने कन्त्रास्त, ता आरो जबर्दस्त भजध, इक ता असादारन विचार अची. हमरो इहे लागाई तची. आहां के सुजाव महुवाक महांता के कोनो दोसर पात्रक भावुकता से नहीं बान दे तची. बलकी समाजक क्रूर व्यव्साइक्ता के सोजा राख है तची इक दम सिपाहीक इस स्वार्त प्रेरिट चलांक महुवाक निस्वार्त चलांक के आरो उज कर देटची इविकल्पक प्रियोग कताक मूल स्वरक पूर्नत सुरक्षिट रखध निक ता आब इज प्रेमोक बात अची यह हमरालोक निक तेसर असथ से महत्वपुन बिंदुदरी लईज जाई तची जे अची कताख सार्थकता आप प्रासंगिकता अची कताख सार्थकता आप प्रासंगिकता अची कताख सार्थकता आप प्रासंगिकता सम्purn katha kendra me morangak o premiyachi. अद्याय चार मे स्पष्ट रूप से वरनित अची, जे महुवा आपन मरंगक प्रेमिक फागुन मे आबाक भाड जोई रहल ची. इह प्रतिक्षा वोकर एक मात्र संबल आची. वोकर सम्purn sangharshak aadhaar achhi. मुदा कताक उप्संगार माने अद्याय आप्जमे उप्रेमी गायव ची. एह सब से बडग खन्डन अची. महुवाक मेच्त्युख पष्यात इगतो उलेक नहीं आची जे उप्रेमी जखन मोरंग सो गुरल तक्की बहल. एक दम चुपची लेक होते. जे प्रेम एही कताक मुल शक्ती अच्छे जे करलेल महुवा आपन प्रान त्यागी देलक उक्रे अन्त में भिसरी जाना एक्ता पैग सन्रचनात्मक त्रूती अच्छी अंग्रेजी में एक्रा नेरेटेटेव लुप कहल जाए च्छे आहा एक ता सुत्र खूले हू उदा उक्रा बान्द्लू हू नहीं उदा फेर उई दार्षनिक बात पर आवच्छी हम जीवन में की सब किछ सुलजल रहे तची आही तची तची तची तची तची तो हम्रा लगाई तची, जे इदूरे पन स्वयम में एक तरास्दी आची, कि ओक्रा अन्सुल्जल चोडव पाथक से हुनकर अपन निसकर्ष निकालवाक स्वतन्त्रता ने दे तची. माने आचा कहब आची, जे यतार्थ्वाद इची जे उप्रेमी गुम्बहगल. अख्रा कक्नो पताने चलल जे महुवाक संकी भेल आम महुवाक भलिदान बस एक तर्फा मून चीक बनी कर रही गला आहाक तर्क जीवनक द्रिष्टी से सत्या ची मुदा साहित्यमे इपात्ध कसंग एक तर्धक दूखा आची दूखा कुना? देखूं, पात्ख एक्ता कता एही लेल पड़े तची, कारन उ जीवनक भिख्रल यदार्थ से इत्र एक्ता अर्थ कोजगाई तची. अन सुल्जल चोडब अब भिस्री जेनाई में अंतर अची. आच आ, यी बात अची. ज़ा आवक्र अक्र अप्र सुल्जल चोडब चाहत थजी तो उहो एक्ता लेखख का चैंजका लागबाक चाही. जवो प्रेमी गुरक अबैत जी, खाली गाड देखगत जी, अबिना कोनो शवद के वापस चली जाई तची, तजी इएक्ता निश्कर्ष अची. अग, एक ता ख्लोजर अची मुदाउकर जिक्र दरी नहीं करम इदे ख्याईवाई तची जे लेक्हक आपन कताक मोल उप्रे रक्किन भिस्री गेला बुज्गलों, मने पातके के एक ता ख्लोजर वा भाअनात्मक सन्तुष्ती चाही एकर सुद्दारलेल उप्संशार में, मुरंक प्रेमिक परनाती या उकर प्रतिक्रिया कें संच्प में जोडल जा सकते थाची. एक्दम, तएक्रा उप्संशार में कोना समेटल जाए? हम कलपना करोल ची जे अद्ध्याय आप में भागुन का मास चे. मुरंका प्रेमी उट्साह से भरल आपन गाम गुरलो हो हा उसीदा कोशी पर मानक गाड पर अवैत अची उते पहुचला पर अख्रा लोख से महुवा का बरिदान का कता सुन्वाले ले बेटे अची अब अखर की प्रतिक्रिया होईत है? अखानत केवल कानब से तो काज नहीं चलत? नहीं, उही प्रेमी के आजीवन उक्रे स्म्रती में गीत गवएत देख हवल जा सकेत अची. की इनहीं भह सकेत अची, जे इजे लोग गीत अची, जे एक टा चलिये महुवा गत्वाराईं, उकर रच्ना उही प्रेमी द्वारा काईल गेल हो? बाप्रे यी एक्दम रोंग्टा ताड करल वाला विचार अची आची ना ज़ लेखख एही कोन के जोडी दे चतिन तक खथाक प्रारंभी गीत कथाक अंथ से पोंड्रुपें जुडी जाएत प्रेमिक यी दुख़द गीत ना केवल उकर प्रेमक आमर करत, बलकी यी लोग गीतक जनम का कारन सो हो सपष्ट करत. एक दम महुवा शरीर से कहतम बहुगे ली, मुदा उ प्रेमि उकर आपन गीतक माद्ध्यम सदिकनक के ले जीवित कोडे लक. इ एक ता एहन बावनात्मक गूँज उपन कुरत जे पात्धक वन में बहुत दिनदरी बसल रहत आहाक इ विचार नारेटिव लूप के बहुत सुंदरता संबान दे तची तए इ चल हम्रा लोक्किक नेक किचु गंभीर विचार संख्षेप में कही तद महुवा गट्वारिन आपन मुल रूप में अथ्ट्ट्मार्मिक आज सजीव अच्छी मुदा एक्रा आरोउद्क्रिष्ट बनेवाक लेल तींटा प्रमुक्ठाम पर काज कयल जासके तची एक दम पहिल जे सत्माय अ सवदागरक पात्र में दरिद्रता अ व्याम्साएक समवेदन हिंताजका यत्हार्थ वादी गेराई जोडु जाहिसा महुवाक संगर्ष भेसी जीवन्त लागे. आदो सर जे क्लायमेक्स में चोट्का शिपाही के भूमिका सा मेलो ड्रामा हताओ. याता उकर प्रेम के पहले स्थापिद करू, या फेर उक्रा मात्र सधागर के समान बचेबाक विवष्ता में नदी में कुदाविर देखाओ, जाहिसा समपुरन द्यान महुवाक बलिदान पर किंद्रित रहें. सही कहलहू, आत्ते सर उप संगार में मूरंके प्रेमिक कता सुत्र के समेटू उक्रा गाट पर गूरा कलाउ आव उही लोग गीद के रच्नाक संग प्रेमक सार्थाक्ता के एक्ता आमर पूनता दिया इतीनो बिन्दु जया कताक भीतर नीक जका भूनल जाये तईी मुल कत्ठाक के कोनो हानी नपहुचावत बलके एक्रा एक्ता काल जैई रच्नाक्रूप में स्तापित करत. महुवा के विवष्ता, उकर साहस, आ उकर प्रेव, सब किच आरो गहीर भोक अबहरत. हम्रा लोकनी श्रोता के आमन्त्रित करेची. जे आहा एही सुज़ाव सबक आदार पर अपन कत्ठा के परिमारजित करू आरो नीक बनेवाख लेल एक्रा फेडस पथाउ आख, कत्ठा लिखब एक तानिरन्तर चलेत रहे वाला यात्रा थेक आख, हम्रा लोकनी एही यात्रा मे आहा के संग सदैव उपस्तित रहव आएकलेल बसेत्वे सूनेट्रहू आलिक्ठ्रहू

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