MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

जट-जटिनक_कथा.mp4

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.509254)
Duration
5:35
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:06सोचु, जे एक ता सादारन गरक जग़ा कोना एक ता जादूई वर्षा अनुष्ठान में बडली सकेट अछि.
  2. 0:06–0:11औ, आई हम सब मित्हिलाक सुप्रसित लोकनात्य जट-जट-टिन पर गब्षषप करी.
  3. 0:11–0:16इएक्ता एहन अद्वितिय परम पराजी, जे रोज मर्राग पारीवारिक नोग जोग के,
  4. 0:16–0:19एक्ता गेहर जंगली पारिस्तितिक अनुश्ठान सा,
  5. 0:19–0:22बहुथ शान्दार द्हंषा मिलावेत अची.
  6. 0:22–0:24आजु के ही अंक में हम सब देखाओ,
  7. 0:24–0:54अग, उग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ�
  8. 0:54–0:59अगी एही नाटक करच्ना कीने चला, अजजटेक भूमी का सध्यो सयम करे चला.
  9. 1:00–1:06मुदा सब सक हास बात की अची जाने ची, इप पूरन रूप से महिला सबक अपन सपेस अचे.
  10. 1:07–1:11सावन भादुक्रिम जिम राती मे गामक महिला सब एक्ता भखाए नाटक करे चाती.
  11. 1:11–1:15भी बवाज़ी में गामक महला सब एक था बवख़ई नाटक करे चाती.
  12. 1:15–1:19पूरुश आएस्ट्री दून्नूके भूमे का महला सबखजिम में.
  13. 1:19–1:23पीडि दर पीडि महला सब एही अद्बूत परमपराके जिन्दा रखने चाती.
  14. 1:23–1:26अंक दो वीवा आगरेलू नोकजोग
  15. 1:26–1:56ख़्था शुरू होई तखछी नवविवाहित जोडाक पहिल साँँच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्�
  16. 1:56–2:26यजट के गरीभीक एहन मजाकुड़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
  17. 2:26–2:28बाते-बाते में दूनुगोता अलक भाई जाए च्छती,
  18. 2:28–2:31अजक्चन जते नहर जाबाग बात उदबाए च्छतीन,
  19. 2:31–2:35तजट अपन खेती बारी विशेशकर दान के प्रात्मिक्ता दाए च्छतीन.
  20. 2:35–2:39इस सब अहाखा अपन गर के काज अप्रात्मिक्ता जका लागत,
  21. 2:39–2:44अग्तीन प्रलोबन आवी रहा
  22. 2:44–2:47मुदा कता में मोड अवेद अवेद अछी
  23. 2:47–2:53एक ता तीत जग्डाक भीज जट्स असावदानी वश जट्टेन कैं जाडू लागे जाए चन है
  24. 2:53–2:56बाते बाते में दूनो गोता अलग बही जाए चत्टी,
  25. 2:56–2:58जटिन रुस्क गर चूड़ी दाई चाछथी
  26. 2:58–3:01आजट पइसा कमई बाकले ल वोरंग चले जाछथी
  27. 3:01–3:05एक उर पर इनाम जटा गर एक दम वीरान भाईजाद अची
  28. 3:05–3:08जोल मक्डा अजंगली दूभी गास समबरल
  29. 3:08–3:12पतने बिना गरक इदुर्दशा बहत किच कहेट अची
  30. 3:12–3:21आब विरहक यी परिक्षा देखू, एही भीच एक ता स्थानिय सूनार जटीन के दन समपतिक लोब देबाक पुरा प्रैजास करेद जी.
  31. 3:21–3:25मुदा जटीन औव आपन पतिक प्रती एक दम अतल चतीन.
  32. 3:25–3:30एक दिस सूनारक अपार दन अदोसर दिस जटक औही प�रान गरीभी.
  33. 3:42–4:12तो तो तो जद्यादा बागागा तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो
  34. 4:12–4:15अर प्रेम फेर सन जीद जाईता जे
  35. 4:15–4:17आँकार पर प्रेमक एविज़ाय
  36. 4:17–4:20दर्षक के एक तब औगुट सन्दुष्टी दैता जे
  37. 4:20–4:23अंक पाच मान्सुनक वर्शा अनुश्टान
  38. 4:24–4:26मोदा तहरू, असल रोमाच्ता आब अची
  39. 4:27–4:28नाटक अक अन्तमे एक ता अदबुत
  40. 4:28–4:31बेंग कवर्षा अनुश्ठान होई तची
  41. 4:31–4:33इएक ता एहन लोक विष्वास अची
  42. 4:33–4:35जे सूनिला पर आवागे आश्चरे लागत
  43. 4:35–4:37गामक इस्त्री गन एकथा भेए
  44. 4:37–4:38कवबेंग पकडे च्ठें
  45. 4:38–4:41उक्रा पार्तल कप्रा से मडख कवूटे च्ठें
  46. 4:41–4:46फेर उ मरल बेंके कोनो जगरा ही पडोसिनक दरवाज्जा पर फेखी अवे चतिन.
  47. 4:46–4:51उकर बाद भोर में उ पडोसिन बेंके देख कर जत्तिक भेशी गारी देच्च्छतिन,
  48. 4:51–4:54विश्वाज अची जे तो तेख भेशी बहयंकर वर्षा होई तची.
  49. 4:54–4:59वर्शा आएस्त्री कळोदख भीच यी जादूई समबंद कते ख्विलक्ष्ण आछी नहीं।
  50. 4:59–5:04तस सुच्बाक विश्य यी आछी जे कौना एही प्राचीन लोक परमपरा में
  51. 5:04–5:13पत्टी पत्निक सादारन जग्डाक आवरन में समुदाय संचालित वर्षा आमन्त्रन अनुष्टान के एक शान्दार दंग से चुपाएने आची.
  52. 5:13–5:32जजजटिन केवल एक्ता नाटक नहीं बलकी सामाजिग बन्धन, इस्त्री विमर्ष्ष्वार्द्प्रक्रिती से जोडाव के एक्ता अदबत्रिवेनी अची, की इलोक कलाक जादूई शकती नहीं अची, जे सादारन जीवन के कथामे एते गेर पारिस्तितिक अद्थ चिप

Plain text

सोचु, जे एक ता सादारन गरक जग़ा कोना एक ता जादूई वर्षा अनुष्ठान में बडली सकेट अछि. औ, आई हम सब मित्हिलाक सुप्रसित लोकनात्य जट-जट-टिन पर गब्षषप करी. इएक्ता एहन अद्वितिय परम पराजी, जे रोज मर्राग पारीवारिक नोग जोग के, एक्ता गेहर जंगली पारिस्तितिक अनुश्ठान सा, बहुथ शान्दार द्हंषा मिलावेत अची. आजु के ही अंक में हम सब देखाओ, अग, उग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ� अगी एही नाटक करच्ना कीने चला, अजजटेक भूमी का सध्यो सयम करे चला. मुदा सब सक हास बात की अची जाने ची, इप पूरन रूप से महिला सबक अपन सपेस अचे. सावन भादुक्रिम जिम राती मे गामक महिला सब एक्ता भखाए नाटक करे चाती. भी बवाज़ी में गामक महला सब एक था बवख़ई नाटक करे चाती. पूरुश आएस्ट्री दून्नूके भूमे का महला सबखजिम में. पीडि दर पीडि महला सब एही अद्बूत परमपराके जिन्दा रखने चाती. अंक दो वीवा आगरेलू नोकजोग ख़्था शुरू होई तखछी नवविवाहित जोडाक पहिल साँँच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्� यजट के गरीभीक एहन मजाकुड़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़ बाते-बाते में दूनुगोता अलक भाई जाए च्छती, अजक्चन जते नहर जाबाग बात उदबाए च्छतीन, तजट अपन खेती बारी विशेशकर दान के प्रात्मिक्ता दाए च्छतीन. इस सब अहाखा अपन गर के काज अप्रात्मिक्ता जका लागत, अग्तीन प्रलोबन आवी रहा मुदा कता में मोड अवेद अवेद अछी एक ता तीत जग्डाक भीज जट्स असावदानी वश जट्टेन कैं जाडू लागे जाए चन है बाते बाते में दूनो गोता अलग बही जाए चत्टी, जटिन रुस्क गर चूड़ी दाई चाछथी आजट पइसा कमई बाकले ल वोरंग चले जाछथी एक उर पर इनाम जटा गर एक दम वीरान भाईजाद अची जोल मक्डा अजंगली दूभी गास समबरल पतने बिना गरक इदुर्दशा बहत किच कहेट अची आब विरहक यी परिक्षा देखू, एही भीच एक ता स्थानिय सूनार जटीन के दन समपतिक लोब देबाक पुरा प्रैजास करेद जी. मुदा जटीन औव आपन पतिक प्रती एक दम अतल चतीन. एक दिस सूनारक अपार दन अदोसर दिस जटक औही प�रान गरीभी. तो तो तो जद्यादा बागागा तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो अर प्रेम फेर सन जीद जाईता जे आँकार पर प्रेमक एविज़ाय दर्षक के एक तब औगुट सन्दुष्टी दैता जे अंक पाच मान्सुनक वर्शा अनुश्टान मोदा तहरू, असल रोमाच्ता आब अची नाटक अक अन्तमे एक ता अदबुत बेंग कवर्षा अनुश्ठान होई तची इएक ता एहन लोक विष्वास अची जे सूनिला पर आवागे आश्चरे लागत गामक इस्त्री गन एकथा भेए कवबेंग पकडे च्ठें उक्रा पार्तल कप्रा से मडख कवूटे च्ठें फेर उ मरल बेंके कोनो जगरा ही पडोसिनक दरवाज्जा पर फेखी अवे चतिन. उकर बाद भोर में उ पडोसिन बेंके देख कर जत्तिक भेशी गारी देच्च्छतिन, विश्वाज अची जे तो तेख भेशी बहयंकर वर्षा होई तची. वर्शा आएस्त्री कळोदख भीच यी जादूई समबंद कते ख्विलक्ष्ण आछी नहीं। तस सुच्बाक विश्य यी आछी जे कौना एही प्राचीन लोक परमपरा में पत्टी पत्निक सादारन जग्डाक आवरन में समुदाय संचालित वर्षा आमन्त्रन अनुष्टान के एक शान्दार दंग से चुपाएने आची. जजजटिन केवल एक्ता नाटक नहीं बलकी सामाजिग बन्धन, इस्त्री विमर्ष्ष्वार्द्प्रक्रिती से जोडाव के एक्ता अदबत्रिवेनी अची, की इलोक कलाक जादूई शकती नहीं अची, जे सादारन जीवन के कथामे एते गेर पारिस्तितिक अद्थ चिप

← Transcript index