MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

चौहड़मल_आ_रेशमा.mp4

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.504258)
Duration
7:32
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:12नमसकार, गजेंद्र ताकृर जिक लिखल कालजेयु मैठली कता, चोहर्णमल आरेश्मा, मुकामा गातक आमर प्रेम दुक्हांत के ही विषेस चर्चा में बहुत स्वागच्छे.
  2. 0:12–0:17आई हम सब एक ता एहन एतियासिक आदुक्हांत कताक विष्लेषन करब,
  3. 0:17–0:20जे प्रेम अ समाजक कत्फोर निमक भीच का
  4. 0:20–0:23औही भीशर संगर्ष के दिखावेचे
  5. 0:23–0:25जकर गूँज आयु सूनाई देच्छे
  6. 0:25–0:28तो चलू, सीदे एही कता का गेराई में चलेची
  7. 0:29–0:31मोकामा गातत की उलास
  8. 0:31–0:34अ भीडबार से भरल मेला के देखी का कक्रा नहीं क्लागत
  9. 0:34–0:39चारु कात खूशी रंग भिरंगग दुखान मुदा वास्तविक्ता इच है,
  10. 0:39–0:45जे आई खूशी आ उच्सव कि पाचा एक ता बहुत फयानक अपिहासिक दुखान्त नुकायल चै.
  11. 0:45–0:47जी हा, एक दम सही सुनला हूँ.
  12. 0:47–0:51इक ता एहन कदा जोही समेक समाजके भीतर सजगजोरी देने चल.
  13. 0:51–0:53इक ता बहुत प्रच्लित गब चे.
  14. 0:53–0:55प्रेमी मरी जाएचचे.
  15. 0:55–0:57मुदा प्रेम मेला बनी जाएचचे.
  16. 0:57–1:01इकोनो सादारन पाती नहीं चे, बलकी एही पुरा कदक आत्मा थिक.
  17. 1:01–1:07इगव आम्रा सब की बतावी चेज जिकोना एक ता हिन्सक समाजिक तक्राओ, समेख पाकलक संग,
  18. 1:07–1:09एक ता आमर दरोहर आमेला में बडलीगेल.
  19. 1:09–1:13इगव आम्रा सब के आगुक पूरा कतक दिशा दिशा दिखाद.
  20. 1:13–1:19तव कता शुरो हो इचे दूड़ा सरवता भिन्न संसारसा, हवेली आर गार्ट.
  21. 1:20–1:24तुनु मुख्य पात्रक भीच एक तब वहुत पैग समाजेक आज्जाती अंटर चल.
  22. 1:24–1:54अग दिस चला हच्छोठ मल, जे गरीब दूसाद जातिक चला अख़ाक एक ता पक्का अनुशासित पहल्वान, शरीडिक रूप से अथ्तिंत मस्वूत अग गजजब का यतार्थ्वादी, अदोसर दिस दोसर दिस चली है रेश्मा, जे एक ता दनी भूनियार ब्राम्हन प
  23. 1:54–2:00उनकर पूरा जीवन बस अखाडक माटी, कुष्ती आँ गंगा गाट काज से बनल चल,
  24. 2:00–2:04उनका लग्दन दूलत नहीं चल, मदा एक ता एहन सवाभिमान चल,
  25. 2:04–2:06जे गरीबिक पातल कप़ो में जग्मगाएच चल.
  26. 2:06–2:09अपन अदम ये महनत आँकडा अनुश्वासन के कारने,
  27. 2:09–2:14अगाड़ा के ओई साद्गी के तीक विप्रीत तार्चल इविशाल हवेली
  28. 2:14–2:18रेश्माक जीवन अथ्ट्यन् सुविदा और अथा समपन्नताक चल
  29. 2:18–2:22उआजीबी सिंके बेटी और आजे सिंके बहीं चली है
  30. 2:22–2:25उनका लगपाय कोडी दास दासी कोनो कमीन चल
  31. 2:25–2:28उनका लक्पाये कौडी दास्दासी कोनो कमी नचल
  32. 2:28–2:31मुदा उ हवेली के कडा पहरा
  33. 2:31–2:34और परिवार के तीखषन नजरेक नीचा चली
  34. 2:34–2:37कैबाक लेलते हुनका दुन्या सुक्सुविदा से बहरल चल
  35. 2:37–2:40मुदा उते स्वतन्त्रता के कोनो नामूनिशान नचल
  36. 2:40–2:46आप जलएज शी उई मोड पर जतः एवरजित आकर्षन श्रू भेल
  37. 2:46–2:49गंगा की कात में भेल औए टिहासिक भेट
  38. 2:49–2:54गंगा दारक कात में भेल एब़ेट तां जेहना इतिहास रची देलक
  39. 2:54–2:57रेश्मा अपन सकी भहीन पाक संग गात पर चली
  40. 2:57–3:02आँम्हर सा चोहड मल आपन अखाडाक थासक में आविरहल चला
  41. 3:02–3:04रेश्मा हुनका देखिते रही गली
  42. 3:04–3:06इ बिलकुल पहल नजरीक प्रेम चल
  43. 3:06–3:10जते रेश्मा उही भल्वान पहलान से प्रेम करे लागली
  44. 3:10–3:12बिना कोनो उच नीचक विचार के ने
  45. 3:12–3:16इक ता गजबकर अकर्षन चल, जे कोन समाजिक सीमा के नहीं मानत चल.
  46. 3:17–3:19मुदा चोहल मलक य पाती सूनो,
  47. 3:20–3:23आहा लेलिक, भेटी, हम गातक, भोनिहार,
  48. 3:23–3:27य देखावे चे, जे उ किते क्यदाथ वादी चला,
  49. 3:27–3:31उ समाजक करा नियम के बहुत नीक जका बुजे चला.
  50. 3:31–3:35उनका दूर दर्षिता चल जे एही प्रेमक परिनाम की भैसगे चे?
  51. 3:35–3:40अद्ताई उश्रूवात में रेश्माक प्रस्ताव के साफ मना कदेने चला.
  52. 3:40–3:44उजने चला जे यी भाट कते काटीला आख कतेन चे?
  53. 3:44–3:46मुदा प्रेम कते नुकायल रही चे?
  54. 3:46–3:53आब शूरू होई चे रहस्व्द खातन, अग्केद कद़वर, जगन दिवालक खेरा चोथ हो में लगेचे.
  55. 3:53–3:56एकर बात तग, अग्तनाक्रम बहुत टेजी सिबदलल.
  56. 3:56–4:00पहिले, नदी कात में नुका चूरा कबेट भेल.
  57. 4:00–4:04तो सर इबहेद खुज गेल और हवेली में जैना भूकम्पाबेग गेल
  58. 4:04–4:07तेसर रेश्मा पर कलापहरा लगा देल गेल
  59. 4:07–4:10हवेली हुंकर लेल गर सक कैद खाना बनी गेल
  60. 4:10–4:15और चारीम सब सकधरनाक अजे सिंदूरा हत्यारा पधोल गेल
  61. 4:15–4:22इटाना इक ता नुकाल प्रेम्प्रुसंग बहुत जल्दी एक जानलेवा संगर्ष में बदलगेल.
  62. 4:22–4:26लगातक बीच तनाव अवे एक दम तिखषन भोजुकल चल.
  63. 4:26–4:33इक ता एक आनिवार यद्दक आहट चल, जे गातक बाअनिहार आवेली के आहंकारक बीच होबाला चल.
  64. 4:45–4:49जकर पर इनाम भेल गात पर रक्त पात।
  65. 4:49–4:54दिखु रेश्माक भाई आजय सिंग अपन परिवारक कतित कलंक मेटाए बलेल
  66. 4:54–4:59रामजीद आमनिकान आमके दूटा कुख्यात हत्यारा पथावेद छतें
  67. 4:59–5:05मुदा चोहर मल, जे अखाडाक शेर चला, अपन रक्षा करेत दूनू के मारी देट चतें.
  68. 5:05–5:09आही असपलता सव आजे सिंगग, क्रोव, आरोभेसी बवडखाएच च्याए,
  69. 5:09–5:14आ अदत त एक पैग रह्ठ्यार बंद भीड दूसाद तोल पर हमला कर देचचे.
  70. 5:14–5:16पूरा गाँ में हाँखार मची जाछचे.
  71. 5:16–5:18एही ताम इबूजा बहुत जरूरी चे,
  72. 5:18–5:20जे चोहर मल कोनो हत्यारा नहीं चला,
  73. 5:20–5:22अठा एक ता शान्त पहल वान चला,
  74. 5:22–5:25मुदा जकन हुंका पर जान लेवा हम्ला बहिल,
  75. 5:25–5:30तवूंका आपन जीवन कपहल रक्त पात करे परल, औहो मात्र आत्मरक्षक लेल.
  76. 5:30–5:34इहूंका जीवनक बहुत दुखध परीवर्तन्चल, जिस समाच कन्यम,
  77. 5:34–5:38हुंका सक करभे कलाक, नहीं चाहे थो हुंका हत्यार उठाभे परल.
  78. 5:38–5:42आब यस संगश मात्र दू प्रेमिक भीच नहीं रही गेल चल.
  79. 5:42–5:49आहंकार और क्रोदख कारने ये एक तपुरा दूसाद समुदाय पर आजे सिंगक अगवाई में
  80. 5:49–5:52भहल पुरन स्तर ये आख्रमण में बडल गिलएच.
  81. 5:52–6:00एही भ्यानक हिन्सा में बहत के चुब बलबाद भिल अन्ने तोश लोकंके सो हो एकर भारी परिनाम भूगते परल.
  82. 6:00–6:07इस समाजक उही क़वा सच्चाए के सोजहा अनलक, जते प्रेम के कीमत रक्त साथ चुकाभे परे च्छे.
  83. 6:07–6:14मुदास समयक संगी गाउ को ना बदलल, आब बात करे ची प्रेम के ओधरो हरक जे आमर मेला बनीगेल.
  84. 6:14–6:20एक ता दुखड इतिहास जे आई हस्थारो लोक के जोडे चे, सुच्बक गाप चे.
  85. 6:20–6:25जे प्रेम जीवित काल में दूटा तोल के आपस में लडादिलक, यूधकरादिलक,
  86. 6:25–6:29उही प्रेमक मरलक बाद, आई एक ता एहन्श़्षकत मोक्धिक परमपरा,
  87. 6:29–6:33आम्मेला के जनम भेल, जे हस्दारो लोक के एक ठम्लावी रहा चे.
  88. 6:33–6:39ये क्ता अद्बूत विरोदाभास च्या नहीं, विनाश्च निरमान दरीकी यात्रा अग्कल्पनी याच्छे.
  89. 6:39–6:43मुकामा गार्ट मे आयो इस्तानिय लुक्ता बहत्प्रच्लिच्छे,
  90. 6:43–6:48कहल जाए जे सांच्कनी जकन गंगापर हावा चले चे, अटालक गाच डोलत चे,
  91. 6:48–6:52तो उई मे आयो उई प्रेमी युगलक आत्मा बैसल रहे चे
  92. 6:52–6:54उनकर प्रेम आएदरी जीवे चे
  93. 6:54–6:57हवा कोई ज़ोका में गाच्छ कोई सर सराहद में
  94. 6:57–7:00एक ता एहन शान्तिपून श्मरती चे
  95. 7:00–7:02जो उई हिन्सा पर भारी परे चे
  96. 7:02–7:11ता अंत में एक ता पैग सवाल उठाई चे, कोना एक ता हिंसक सामाजिक तक्राउ समैक संग एक ता आमर प्रेम के उच्सव में बदली जाए चे.
  97. 7:11–7:16समाज कोना पन दुखद पात्रे किन्वदन्ती अस्मिरतिक माद्ध्यम सामर बनाई देचे.
  98. 7:16–7:21अज़े तब बज़़़़च्छे जे गजजंदर तब बज़गेग एही कठाक विष्लषन सा
  99. 7:21–7:25हमरा सब के इतिहास अ समाज किन दिखवाक एक ता नव द्रिष्टि कोन भेटल होएद.
  100. 7:25–7:29इक ता एहन विचार चे जा हमरा सब के गेराई से सोचने पर मजबोर कोडिच है

Plain text

नमसकार, गजेंद्र ताकृर जिक लिखल कालजेयु मैठली कता, चोहर्णमल आरेश्मा, मुकामा गातक आमर प्रेम दुक्हांत के ही विषेस चर्चा में बहुत स्वागच्छे. आई हम सब एक ता एहन एतियासिक आदुक्हांत कताक विष्लेषन करब, जे प्रेम अ समाजक कत्फोर निमक भीच का औही भीशर संगर्ष के दिखावेचे जकर गूँज आयु सूनाई देच्छे तो चलू, सीदे एही कता का गेराई में चलेची मोकामा गातत की उलास अ भीडबार से भरल मेला के देखी का कक्रा नहीं क्लागत चारु कात खूशी रंग भिरंगग दुखान मुदा वास्तविक्ता इच है, जे आई खूशी आ उच्सव कि पाचा एक ता बहुत फयानक अपिहासिक दुखान्त नुकायल चै. जी हा, एक दम सही सुनला हूँ. इक ता एहन कदा जोही समेक समाजके भीतर सजगजोरी देने चल. इक ता बहुत प्रच्लित गब चे. प्रेमी मरी जाएचचे. मुदा प्रेम मेला बनी जाएचचे. इकोनो सादारन पाती नहीं चे, बलकी एही पुरा कदक आत्मा थिक. इगव आम्रा सब की बतावी चेज जिकोना एक ता हिन्सक समाजिक तक्राओ, समेख पाकलक संग, एक ता आमर दरोहर आमेला में बडलीगेल. इगव आम्रा सब के आगुक पूरा कतक दिशा दिशा दिखाद. तव कता शुरो हो इचे दूड़ा सरवता भिन्न संसारसा, हवेली आर गार्ट. तुनु मुख्य पात्रक भीच एक तब वहुत पैग समाजेक आज्जाती अंटर चल. अग दिस चला हच्छोठ मल, जे गरीब दूसाद जातिक चला अख़ाक एक ता पक्का अनुशासित पहल्वान, शरीडिक रूप से अथ्तिंत मस्वूत अग गजजब का यतार्थ्वादी, अदोसर दिस दोसर दिस चली है रेश्मा, जे एक ता दनी भूनियार ब्राम्हन प उनकर पूरा जीवन बस अखाडक माटी, कुष्ती आँ गंगा गाट काज से बनल चल, उनका लग्दन दूलत नहीं चल, मदा एक ता एहन सवाभिमान चल, जे गरीबिक पातल कप़ो में जग्मगाएच चल. अपन अदम ये महनत आँकडा अनुश्वासन के कारने, अगाड़ा के ओई साद्गी के तीक विप्रीत तार्चल इविशाल हवेली रेश्माक जीवन अथ्ट्यन् सुविदा और अथा समपन्नताक चल उआजीबी सिंके बेटी और आजे सिंके बहीं चली है उनका लगपाय कोडी दास दासी कोनो कमीन चल उनका लक्पाये कौडी दास्दासी कोनो कमी नचल मुदा उ हवेली के कडा पहरा और परिवार के तीखषन नजरेक नीचा चली कैबाक लेलते हुनका दुन्या सुक्सुविदा से बहरल चल मुदा उते स्वतन्त्रता के कोनो नामूनिशान नचल आप जलएज शी उई मोड पर जतः एवरजित आकर्षन श्रू भेल गंगा की कात में भेल औए टिहासिक भेट गंगा दारक कात में भेल एब़ेट तां जेहना इतिहास रची देलक रेश्मा अपन सकी भहीन पाक संग गात पर चली आँम्हर सा चोहड मल आपन अखाडाक थासक में आविरहल चला रेश्मा हुनका देखिते रही गली इ बिलकुल पहल नजरीक प्रेम चल जते रेश्मा उही भल्वान पहलान से प्रेम करे लागली बिना कोनो उच नीचक विचार के ने इक ता गजबकर अकर्षन चल, जे कोन समाजिक सीमा के नहीं मानत चल. मुदा चोहल मलक य पाती सूनो, आहा लेलिक, भेटी, हम गातक, भोनिहार, य देखावे चे, जे उ किते क्यदाथ वादी चला, उ समाजक करा नियम के बहुत नीक जका बुजे चला. उनका दूर दर्षिता चल जे एही प्रेमक परिनाम की भैसगे चे? अद्ताई उश्रूवात में रेश्माक प्रस्ताव के साफ मना कदेने चला. उजने चला जे यी भाट कते काटीला आख कतेन चे? मुदा प्रेम कते नुकायल रही चे? आब शूरू होई चे रहस्व्द खातन, अग्केद कद़वर, जगन दिवालक खेरा चोथ हो में लगेचे. एकर बात तग, अग्तनाक्रम बहुत टेजी सिबदलल. पहिले, नदी कात में नुका चूरा कबेट भेल. तो सर इबहेद खुज गेल और हवेली में जैना भूकम्पाबेग गेल तेसर रेश्मा पर कलापहरा लगा देल गेल हवेली हुंकर लेल गर सक कैद खाना बनी गेल और चारीम सब सकधरनाक अजे सिंदूरा हत्यारा पधोल गेल इटाना इक ता नुकाल प्रेम्प्रुसंग बहुत जल्दी एक जानलेवा संगर्ष में बदलगेल. लगातक बीच तनाव अवे एक दम तिखषन भोजुकल चल. इक ता एक आनिवार यद्दक आहट चल, जे गातक बाअनिहार आवेली के आहंकारक बीच होबाला चल. जकर पर इनाम भेल गात पर रक्त पात। दिखु रेश्माक भाई आजय सिंग अपन परिवारक कतित कलंक मेटाए बलेल रामजीद आमनिकान आमके दूटा कुख्यात हत्यारा पथावेद छतें मुदा चोहर मल, जे अखाडाक शेर चला, अपन रक्षा करेत दूनू के मारी देट चतें. आही असपलता सव आजे सिंगग, क्रोव, आरोभेसी बवडखाएच च्याए, आ अदत त एक पैग रह्ठ्यार बंद भीड दूसाद तोल पर हमला कर देचचे. पूरा गाँ में हाँखार मची जाछचे. एही ताम इबूजा बहुत जरूरी चे, जे चोहर मल कोनो हत्यारा नहीं चला, अठा एक ता शान्त पहल वान चला, मुदा जकन हुंका पर जान लेवा हम्ला बहिल, तवूंका आपन जीवन कपहल रक्त पात करे परल, औहो मात्र आत्मरक्षक लेल. इहूंका जीवनक बहुत दुखध परीवर्तन्चल, जिस समाच कन्यम, हुंका सक करभे कलाक, नहीं चाहे थो हुंका हत्यार उठाभे परल. आब यस संगश मात्र दू प्रेमिक भीच नहीं रही गेल चल. आहंकार और क्रोदख कारने ये एक तपुरा दूसाद समुदाय पर आजे सिंगक अगवाई में भहल पुरन स्तर ये आख्रमण में बडल गिलएच. एही भ्यानक हिन्सा में बहत के चुब बलबाद भिल अन्ने तोश लोकंके सो हो एकर भारी परिनाम भूगते परल. इस समाजक उही क़वा सच्चाए के सोजहा अनलक, जते प्रेम के कीमत रक्त साथ चुकाभे परे च्छे. मुदास समयक संगी गाउ को ना बदलल, आब बात करे ची प्रेम के ओधरो हरक जे आमर मेला बनीगेल. एक ता दुखड इतिहास जे आई हस्थारो लोक के जोडे चे, सुच्बक गाप चे. जे प्रेम जीवित काल में दूटा तोल के आपस में लडादिलक, यूधकरादिलक, उही प्रेमक मरलक बाद, आई एक ता एहन्श़्षकत मोक्धिक परमपरा, आम्मेला के जनम भेल, जे हस्दारो लोक के एक ठम्लावी रहा चे. ये क्ता अद्बूत विरोदाभास च्या नहीं, विनाश्च निरमान दरीकी यात्रा अग्कल्पनी याच्छे. मुकामा गार्ट मे आयो इस्तानिय लुक्ता बहत्प्रच्लिच्छे, कहल जाए जे सांच्कनी जकन गंगापर हावा चले चे, अटालक गाच डोलत चे, तो उई मे आयो उई प्रेमी युगलक आत्मा बैसल रहे चे उनकर प्रेम आएदरी जीवे चे हवा कोई ज़ोका में गाच्छ कोई सर सराहद में एक ता एहन शान्तिपून श्मरती चे जो उई हिन्सा पर भारी परे चे ता अंत में एक ता पैग सवाल उठाई चे, कोना एक ता हिंसक सामाजिक तक्राउ समैक संग एक ता आमर प्रेम के उच्सव में बदली जाए चे. समाज कोना पन दुखद पात्रे किन्वदन्ती अस्मिरतिक माद्ध्यम सामर बनाई देचे. अज़े तब बज़़़़च्छे जे गजजंदर तब बज़गेग एही कठाक विष्लषन सा हमरा सब के इतिहास अ समाज किन दिखवाक एक ता नव द्रिष्टि कोन भेटल होएद. इक ता एहन विचार चे जा हमरा सब के गेराई से सोचने पर मजबोर कोडिच है

← Transcript index