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बहुरा_गोढ़िन_आ_नटुआ_दयालक_तांत्रिक_रहस्य.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:02विमर्श अविविद्द्द्द्ष्टि कोनक इविषेष्कार-गर्ध्रम में आजाएक स्वागत अचे,
  2. 0:02–0:07मतलब तनी कलपना करू जे आहाक भीतर इत्टिक सकती आब जाए,
  3. 0:07–0:13जे आहाँ आपन एक ता इशारास़ जना कोनो बहरल पूडल नदिक पानी सुखादी.
  4. 0:13–0:18अग, वा क्रोद मे आबिका आपन विरोदी के पातरक मुर्ती बनादी,
  5. 0:18–0:24तक की आँ ही शक्तिक प्रेओ नयाय लेल करब, वा आपन वेक्तिगत प्रतिषोद लेल.
  6. 0:24–0:30विमर्ष अविविद द्रिष्टी कोनक यी विशेष कारेक्रम में आहाक स्वागत अचे.
  7. 0:30–0:36एता इी हम सब कोनो विषे ग़राई में जाकः बुजलिये उकर भिन्न भिन्न पहलुक विष्लेशन करेच्छी
  8. 0:36–0:43नमसकार और आएक इजे विषेर ची उवास्तव में उही आगाद कमला नदीजका आची
  9. 0:43–0:45जकर सताजपर किचु आर देखे देखे था ची
  10. 0:45–0:47अ गराई में किचु आर
  11. 0:47–0:52एक दम सही कहलाओ, आई हम्रा सब का विमर्षक केंद्र में आची मिठलाख
  12. 0:52–0:54विषेश का कमला बलानक तद पर
  13. 0:54–0:57पल्लगवित बक्री भेगु सराय अंचल शित्रख
  14. 0:57–1:00एक ता अट्यंत शक्तिषाली और जटिल गाता
  15. 1:00–1:02बहुरा गोडेन आ नत्वादयाल
  16. 1:02–1:05जे केवल जादूक कता नै अची
  17. 1:05–1:08तन्त्र, निरित्य, प्रेम, विश्वास गात
  18. 1:08–1:09आए...
  19. 1:09–1:12सरवोच भलीदानक कताज
  20. 1:12–1:12भिल्कुल
  21. 1:12–1:14मुदा अटे सा
  22. 1:14–1:16हमर आईक मुल प्रष्न उटेटच
  23. 1:16–1:19आई महाकाव्यक मुल चालक शक्ती कियेच
  24. 1:19–1:24कि ई, मतलब मुख्य रुब से मानविय आध्कार, वासना
  25. 1:24–1:26आशानसारेक शड्यन्त्रक कताज
  26. 1:26–1:31जक्रा केवल जादु अट्तंत्रक आवरन पहरे लगे लगे लच
  27. 1:31–1:36वाज, हमरा विचार सा इे एक ता विषुद धा अद्यात्मिक अ तान्त्रिक रूप कराच,
  28. 1:36–1:40जे इश्वरी नियाय अक्कर्मक जटिल सिद्धान्त के प्रदर्षित करेत आच.
  29. 1:40–1:46देखू, हमर इस पष्ट मानबच जे इगाता मुलत मानविय सम्वेदना,
  30. 1:46–1:50आखारक तक्राव आशान्सारिक शवेंट्र कताच
  31. 1:50–1:53एक राम कोनो देवत्वस नी जोडी सके ची
  32. 1:53–1:55आप आप एक राद दुसर रूप में दिखे ची
  33. 1:55–1:57हमर द्रिष्टिकोन यह जी
  34. 1:57–2:01जे यी कता वस्तुता तान्त्रिक विकास ब्रमहन्द्य नियाई
  35. 2:01–2:06आप ख़ान बुजिराहल जे आहा एहन केक सोचाईच्छे
  36. 2:06–2:10मोदा हमरा एक ता एसबहिन द्रिष्टिकों राखे दिए।
  37. 2:10–2:14जगन आहा एही कताख के द्यान सविष्लेषित करबना
  38. 2:14–2:19आहा देखव जे जादूक आव्रनक नीचा इपूनता मानविय द्रिबलता कता अच्छे
  39. 2:31–2:32कोना?
  40. 2:32–2:34शुर्वात कते से होईता चे?
  41. 2:34–2:37नट्वादयाल, जे बहरोड कराज कुमार आची
  42. 2:37–2:40आब भहुरा, जे एक ता क्योटिक भेटी आचे?
  43. 2:40–2:43आप, दूनो दूई अलक वरक सच्छतीन.
  44. 2:43–2:46भिल्कुल, उही दूनो भीचक जे संगर सच्छी
  45. 2:46–2:50उ आहाय मुक्यरूपस आहंकार अवर्ग भेदक संगर्ष अची
  46. 2:50–2:53मतलब आहा व्यपारी जैसिंक क उदारन लिया
  47. 2:53–2:54जैसिंक क तो उही में
  48. 2:54–2:56उ बहुराक बेटी पर मोहिट चल
  49. 2:56–2:59इगी आचे इविशुद वासना आचे
  50. 2:59–3:02उही वासना क पुर्तिलेल जैसिंक उचक कर रचलक
  51. 3:02–3:08तजे परिस्तिति उत्पन्नभेल उते कोनो देवी देता खेल ने आचे, बलकि मानविय स्वार्त आचे.
  52. 3:08–3:16ने, उईबाज साम सामच्छी, जैसिंक क्रित्या तवासना सप्रे रिच्छल, मुदा भोहुराक प्रतिक्रिया के आँई के अई अंकार नी कै ची.
  53. 3:16–3:18तकी कहा भुक्रा?
  54. 3:18–3:21जक्हन हम एही कता के गेराए सा देखत ची
  55. 3:21–3:24तब वोगरा के वल एक तक ग्रोदी इस्त्री नहीं आए ची
  56. 3:24–3:28उो कमला मयाक अनन्य भख्त आची
  57. 3:28–3:30भूजली आ जक्हन अगवाई तची
  58. 3:30–3:34आई कमले एक आसन उही मे भासे कमला मया
  59. 3:34–3:35उता एक दगीत आची
  60. 3:46–3:50उआपने इस्टक उर्जा युध अवस्तामे करे ताची
  61. 3:50–3:53मुदा उही उर्जक प्रियोग की बहर रहाल आची
  62. 3:53–3:59जगन भोरा क्रोद मे आब एक विवाहक बर्याती के पातरक मुर्ती बना दे ताची
  63. 3:59–4:01अग, उईक ता पैग गतना ची
  64. 4:01–4:02बलकुल
  65. 4:02–4:13अन्निर्दोश मंत्री मल्लक एक आखिक रूष्नी चीन लेए ता इसा विषुद्द मानवी एक रोद आप्रतीशोदख परिनाम अची इहंकारक नगन प्रदर्षन अची.
  66. 4:13–4:14देखु इई...
  67. 4:14–4:15हमरा पूरा करे दियो.
  68. 4:15–4:19अपन अद्याद्म्याद्यो, हमर्श्रोताजे आयकालक तार्खिक दून्या मेरहाच्छती,
  69. 4:19–4:21उनका इसुनिका आच्चर्र्य भूर है लितनी,
  70. 4:21–4:26जे एक ता अद्याद्मिक सादिका एते क्रूर कोना भासकेता ची,
  71. 4:26–4:28इक खुनो अद्याद्मिक न्याए न्याची,
  72. 4:28–4:30इत मतलप आपन शक्ती पर्दम्ब है ची
  73. 4:30–4:36तनिक रुक्कु आहा एह कताक तान्त्रिक प्रक्रते के पुल रुपस चोड रहल ची
  74. 4:36–4:41हम मानत ची जे मलक द्रुष्ती जेबाके गतना
  75. 4:41–4:45कताक एक ता अक्किंत अंद्खार में पक्ष आची
  76. 4:45–4:47बहुत अंद्खार में
  77. 4:47–4:53अगर प्रभाव आस्पास का वातावरन पर पडीत आफी गुद्वा कर्शन जका जे उही च्छत्र में आविगेल उ प्रभाविठेत।
  78. 4:53–4:57इसे वह दोगागा वादावरन पर पडीट आपाज़ा थाची
  79. 4:57–5:00इसे गुद्वा करशन जगाची
  80. 5:00–5:03जे उही चेट्र में आविगेल उप्रभाविधेद
  81. 5:03–5:06तकिया हम मनत्री मल्लक अनहार हुईबा के केवल एक ता दुर्गध ना मानी रहा लग ची
  82. 5:06–5:07उकर की दोष्चल
  83. 5:07–5:11तकिया हम मंत्री मल्लक अनहार हुईबा के केवल एक ता दूगखतना मानी रहल ची.
  84. 5:12–5:15उकर की दोश चल, जकन मल्लक मुसे आहरे वाह निकले ता ची,
  85. 5:16–5:18तो उ पीना वास्तवे कची, बुजलिये, उकोनो तान्त्रिक रूप नहीं आची.
  86. 5:18–5:20तो तुर्गट्ना मानी रहल ची?
  87. 5:20–5:22उकर की दोश चल?
  88. 5:22–5:24जकन मल्लक मुसे आहरे वाह निकलेता ची
  89. 5:24–5:26तो उ पीरना वास्तवे कची
  90. 5:26–5:28बुजलिये?
  91. 5:28–5:30उकोनो तान्तरिक रूप नहें आची
  92. 5:30–5:32एक तो सिद्द सादक
  93. 5:32–5:34निर्दोशक हानी ने करी तची
  94. 5:34–6:04बवरा रवाद्यादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादा
  95. 6:04–6:08अगर यात्रा में सोहुता शक्ती प्रदर्शनक लाल्सा आची
  96. 6:08–6:12बहुरा अपन कम्रु काम्रुप्सा सीख्यल जादुक प्रेोग
  97. 6:12–6:17गाज के हंकाईबाक आ जना विरोदी के सुग्गा बनागे पिंज्रा में रक्बाक लिल करे तची
  98. 6:17–6:20अगर अद्यात्तिक उत्कर्ष्पर पहुचल मानेच्छी
  99. 6:20–6:21बलकुड
  100. 6:21–6:25मुदा अखर यात्रा में सो हुता शक्ती प्रदशनक लाल्सा आची
  101. 6:25–6:29बहुरा अपन कम्रु काम्रुप्सा सीखेल जादूक प्रेोग
  102. 6:29–6:34तजज़के हंकाईबाक आ जना विरोदी के सुग्गा बनाके पिंज्रा मे रखबाक लेल करे तची
  103. 6:34–6:37इं निंद्रन करबाक मानविय लाल्सा आची
  104. 6:37–6:38मुदा दैाल
  105. 6:38–6:40दैाल सो हो कम नै आची
  106. 6:40–6:43जखन बहुराक कमला दारक पानी सुखा दे तची
  107. 6:43–6:46अन्नत्वा द्याल पर दोश मडेतची,
  108. 6:46–6:48जे न्नत्वा पथेलक सबता पानी पाताल,
  109. 6:48–6:52ता इस पाष्ट रूपसा एक ता शक्तिषाली स्ट्रीक आहंकार अची,
  110. 6:52–6:56जे एक ता राज कुमारक के नीचा दिखाबै चाहेतची.
  111. 6:56–6:58द्याल सो हो गुरु मंगल लक जायतची,
  112. 6:58–7:03अपन शक्ति बड़ेबात लेल, नेजे कोनो इश्वर्य ज्यान प्राप्त्तगर बाख्लेल.
  113. 7:03–7:09अईटाम हम्रा आहाके बात कैटे परत, आहा दयालक यात्रा में अंपर नहीत विग्यानक के ने दिख्राल ची,
  114. 7:09–7:14जखन गुरु मंगल दैयालक के कामाख्या जेबा कादेस दे चतीन
  115. 7:14–7:17तो उ हत्यार अन्वाक्लेल पतारहल चतीन
  116. 7:17–7:20नहीं नहीं, उकोनो हत्यार अन्वाक्लेल ने पतारहल चतीन
  117. 7:20–7:22गुरु मंगल सवयम एतेक सिद्र चला
  118. 7:22–7:26जे मतलब भीना खूटिक अकाश में दोती सुखा सकत चलाए.
  119. 7:26–7:32इकोनो जादूगरी ने, बलकी गुर्ट्वा कर्शन अप पन्च तत्टोपर हुंकर निंट्रन कषंकेत अची.
  120. 7:32–7:34मुदा कामाख्या की आत्राता?
  121. 7:34–7:36कामाख्या की आत्रा ज्यानक लेल चल.
  122. 7:36–7:42अदयालक के कामाख्याक चन्दिका मन्दिर में पथावे चतिन योगनी सबह से शतन्रुत्ते सिख्बाक लेल,
  123. 7:42–7:49और उकर बाद सरया ग्रामिक सिथ देवी भागेश्वरी लग, अनहद और आग्या चक्र जाग्रत कर बाक लेल.
  124. 7:49–8:19ता हम्राया स्पष्ट करू इस्छन्रूत्ते और आग्या चक्र जाग्रत करब की अची, हमर बहुत रास रोता एक्रा केवल एक्ता जादूक प्रक्रिया बुजधषतीन, की इस केवल एक्ता मान्सिक अवस्ता अची, वग कोनो वास्त्विक शकती जे बहुतिक दुन्या के �
  125. 8:19–8:22अगर विस्तार सँम्जब अद्यन्त अवश्यक अची
  126. 8:22–8:26तन्त्र में शट नित्ते कोनो सादारन नाच नही अची
  127. 8:26–8:29हमर शरीर में च्यरता मुख्य उर्जा केंधर हुई तची
  128. 8:29–8:31जिकरा चकर कहल जाएत चे
  129. 8:31–8:34आप चकरक विशे में तचुनल अची
  130. 8:34–8:36अगर अग्याचक्र अखर की काजः है?
  131. 8:36–8:41अगर नाद नाद उद्वनी आखी जे बिना कोनो वस्तुक तक्राहथ के उद्पन अगी तची
  132. 8:41–8:45अद्वनी आची जे बिना कोनो वस्तुक तक्राहत के उद्पन आपण नहुए तची
  133. 8:45–8:48मतलव जेक्रा अनाहत आद से हो कहल जाए तची
  134. 8:48–8:52एक दम सही इप्रम्हांद बूल द्वनी आची
  135. 8:52–8:56जकन कोनो सादख अनाहत नाद के उद्पन नहुए तची
  136. 8:56–9:26अग्या चक्र जे हमर दूनु आखिक के भीच ब्रिकुटी पहोईता ची अग्र जागरनक अज्छ ही त्रिकाल द्रिष्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्�
  137. 9:26–9:38जब बाई हे रूप से नहीं देखाई दराहलाची, उक्रा देखवाख शमता, तजगन दयाली सब प्राबत करेई तची, भुजली उ एक ता सदारन राज्कुमार नहीं जाई तची, उ प्रक्रतिक लेए जाई तची.
  138. 9:38–9:46बहुत रोचक व्याख्या जी, हमी मानी लेए जी तन्तर कषद्दान्त अद्यन्त गूड जी, आएक राएक्ता दाश्नि कादार आज्टेए.
  139. 9:46–9:56मुदा तए यो हमराई भूजाँ जे जगन उ एतेक सिद्भाईगेल, जगन उ प्रक्रतिक हस्सा बनेगेल, तव उ भहुरा सप्रतिशोद की लेलक.
  140. 9:56–10:07अग, मुदद, यदी यी केवल आँकार का तक्राव नहीं चल, तद्ध्धाल आपन कामाख्या से प्राप्त तन्त्रिक शक्तिक प्रयोग, बहुराप अख्रमन करभाक लेल की एक नहीं के लक?
  141. 10:07–10:12एते आहा सुयम आपन तरक के काटी रहल ची, दैयाल टीक उही नहीं के लक.
  142. 10:12–10:12की?
  143. 10:12–10:15उष्क्ती से शक्ती के नहीं काट लक.
  144. 10:15–10:21जगन भहुरा पानी सुखाई दे लक, तद्डयाल कोनो विनाशकारी मन्तरक प्रयोग नहीं के लक.
  145. 10:21–10:28उ आपन रित्यक सक्ती, जक्रा जलाजल कहल गल अगर प्रेएो के लक, आख कमला में पूना पानी बहर दे लक.
  146. 10:28–10:29आप जलाजल निरित्या?
  147. 10:29–10:33जलाजल निरित्ये जल तत्वक के जाग्रत करभाक सादना आच्छ.
  148. 10:33–10:37उ प्रकरती से समवाद करे तची, आदेश नही दे तची.
  149. 10:51–10:57उबव्रा द्वारा लेलगेले एक ता अद्ध्यात्मिक परिक्षाचल जक्रा द्याल पार्के लक
  150. 10:57–11:02अम आहाक बाथ से एते सहमत ची जे द्याल विनम्रता देखा लक
  151. 11:02–11:04उब वव्रा पर प्रहार नहीं के लक
  152. 11:04–11:06जिल मिल दोरी चोत हेबाक बहाना करे तची
  153. 11:06–11:08दोरी चोत हेबाक बात तची
  154. 11:08–11:10अद्टी बात तची
  155. 11:10–11:14याजना उनका सबक भीचक संगरषक समाप्त कदे तची
  156. 11:14–11:15कता के नहीं?
  157. 11:15–11:17आप, कता तो आगु बड़ाई तची
  158. 11:17–11:20भिल्ल्कु, विवाग उल्लासक भीच
  159. 11:20–11:23जखन नतुवा दयालक के प्यास लागे तची
  160. 11:23–11:25तो अपन शिष्य जिल्मिलक
  161. 11:25–11:28पनी बर्बाकलेल पथावे तची
  162. 11:40–11:43अख्रा इनारलक पच्जासे चाकू मारी देटाई तची
  163. 11:43–11:47आहा एक्रा की कहब की इक्कोनो ब्रहमान्द्या गटना आची
  164. 11:47–11:49हम्रा वीचार सच्ट?
  165. 11:49–11:49नहीं
  166. 11:49–11:51इत एक्दम अहीना आची
  167. 11:51–11:54जैना कोनो सादारन स्वार्थी का पूरुश
  168. 11:54–11:57अपन गुरु वम्मित्रक एच्छा वश्मारी देटाची
  169. 11:57–12:00एक्ता शिष्यव अपन गुरु से एच्छा करेटाची
  170. 12:00–12:03अप पीट में खंजर भोखेटाची
  171. 12:03–12:06एटे कोनो देवत्वन नहीं अच्छी भुजलिये
  172. 12:06–12:08इक टक क्रूर मान्वी अप्राद अच्छी
  173. 12:08–12:12इविश्व्द्ध्रुब से एक्ता सान्सारिक सद्यान्त्रा आची
  174. 12:12–12:14जटे सक्ती असम्मानक भूग
  175. 12:14–12:17मनुश्शक पतनक गर्त में लाजाई तची
  176. 12:17–12:21हम्रा खेद आची, मुद-ा हम्रा इद्टरक भिल्कुल सुईकार नहीं आची
  177. 12:21–12:24आहा एही गतना क्रमक केवल सता से देख रहा हो लजी
  178. 12:24–12:27जेना कोनो दैनिक समचार पत्रक कखवर होई
  179. 12:27–12:30उही ख्षनक प्रतीक वाद पर द्यान दीो
  180. 12:30–12:31कोना प्रतीक वाद
  181. 12:31–12:34जक्ञन जिल मिल पानी बरभाक लेजाए तची
  182. 12:34–12:36तक कता अस्पस्ट रुपस रुपसा कही तची
  183. 12:36–12:39जे दोरी आप चोट पैक बहुर हैं चलग
  184. 12:39–12:41इकोनो बहाना ने चल
  185. 12:41–12:43तन्त्र में मानल जाए तची
  186. 12:43–12:46जे जगन कोनो पैक अनिस्ट वा ब्रम्हान्दिय परिवर्तन हुवाक रहे तची
  187. 12:46–12:49तप रकिरती आपन निमक मोड दे तची
  188. 12:49–12:52इनारक दोरी क आप चोट पैक होएभ
  189. 12:52–12:54कों उ सादारन असुविदान नहीं
  190. 12:54–12:57बलकी एक ता अद्दिष्य लोकिक सक्तिक संकेत आची
  191. 12:57–12:59जि नेती आपन काजकोर है लची
  192. 12:59–13:00तकी मियती चाह चलक
  193. 13:00–13:02जि जिल्मिल दोखादे
  194. 13:02–13:04की जिल्मिलक स्वतन्तर इच्छा नहें चल
  195. 13:04–13:07जिल्मिलक आपन करमक पल भेटत
  196. 13:07–13:09उएक ता गलग विषे आची
  197. 13:09–13:11मुदा दयालक इस्तिती देखो
  198. 13:11–13:13जक्ञन दयाल विवाक लिजारहल चलक
  199. 13:13–13:15उक्रा लग तींटा पान चल
  200. 13:15–13:17आप पानक बात तक गाथा मे आची
  201. 13:17–13:19इस सादारन पान नहे चल
  202. 13:19–13:21तंत्र सादना में इस तीनू पान प्रतीक चल
  203. 13:21–13:26तीनुपान प्रतीक चल, प्रक्रती प्र विजें, क्रोद प्र विजें, असानसारिक मोब प्र विजेंग.
  204. 13:27–13:31दैयाल तीनुपान उठहुने चल, उपुर्नता सिद भजुकल चलक.
  205. 13:32–13:34उकर मिर्त्य। कुनो सादारन मान्विय मिर्त्य। नहे आची.
  206. 13:35–13:36तो फेर की आची?
  207. 13:36–13:39जखन उ गायल अवस्ता में मिरित्तिव शयाए पर रहे तची
  208. 13:40–13:42उ अपना लेल जीवन नी मागे तची
  209. 13:42–13:44जे कोनो सामान नी मनुश्वकरत
  210. 13:45–13:47बलकी, उ कमला मैया के पतोर
  211. 13:47–13:50जे एक ता विशेश रेश्मी वस्त्र होई तची
  212. 13:50–13:51उ चर होई तची
  213. 13:51–14:01यो कर सर्वोच आद्ध्यात्मिक विजयाया ची अबना अन्तिम सांस दरी भोतिक शरीरक मोह्तियाजी का इश्वर ये सत्ता के समर्पित अची.
  214. 14:01–14:06इसमर्पन अची वम्रित्त्यो शयया के निराशा इबहस के विशय बहस कै टची.
  215. 14:06–14:10बहुत रास लोक म्रित्यो काल में इश्वर के यात करहेत च्छती
  216. 14:10–14:13एकर रद एने जे ओ ब्रम्हान्ट्या सिद्द पुरुष भूगेला
  217. 14:13–14:16मुदा आईक यदि हम मान्यो लिए
  218. 14:16–14:19जि दैयाल शरीर मोह त्याजी चुकल चल
  219. 14:19–14:22औसब सान्सारिक मोह से मुक्त भूगेल चल
  220. 14:22–14:26तफिर अंत में जद्रिश उपस्तित होई तची उक्र आहा कोना समजाएब.
  221. 14:26–14:29आहाग तप पर कामाख्या के जादुगरनी साची.
  222. 14:29–14:32बिलकुल. कामाख्या के जादुगरनी प्रवेष होई तची.
  223. 14:32–14:35उ आबी का नतूए दयाल के पुनर जीवित कराई तची
  224. 14:35–14:38अर विश्वास खाती जिल्मिलक बली कमलदारक देताची
  225. 14:38–14:41इबली इतिक वीभध सची
  226. 14:41–14:43जी पुरा कमलदार कुने कुना भोजाई तची
  227. 14:43–14:45इद्दिष्खी आची
  228. 14:45–14:47इग लोकिक नियाए ची
  229. 14:47–14:49नहीं इविश्विद प्रतिशोद आच
  230. 14:49–14:51इब भध्ला लान्यायाच
  231. 14:51–14:55आईक्रा लोकिक न्याई वा तान्त्रिक सन्तूलन कही सकैच्छे
  232. 14:55–14:59मुदा इख्फुन खराबा मान्विय क्रोदख चरमच
  233. 14:59–15:05जकर शिष्ष्छ दूखा देलग, उक्रजान से मारका नदी में बहा देलग.
  234. 15:05–15:12मुदाई, इता एक्ता अथ्यंत लगष्वाद भेल जक्रा जादूक चादरी से दख देल गेल आच्छ.
  235. 15:12–15:18यदी देल एक पीक सादख चल, जे चमा कर सकए चल, जे ना उबहुराए के चमा के लग,
  236. 15:18–15:22तो उ कामाख्यक जादूगरनी के जिल्मिले के मारवासे केखन रोगलक
  237. 15:22–15:25ये ते अद्यात्मिक उच्छता कते गयल
  238. 15:25–15:30इस सिद्ध करे ता ची जे अंतता हब उजल्ये इस शकती या प्रतिशोदग कता आची
  239. 15:30–15:34एक ता बहुत प्रस्संगिक प्रश्न जे आहा उठेलावाच
  240. 15:34–15:37मुदा की आहा ए विचार के लावाच
  241. 15:37–15:40जे तंत्र में बली कवास्त्विक अर्थ की हुए तची
  242. 15:40–15:44इकोनो सादारन रथ्यावा विक्तिगत बद्ला नहीं आची
  243. 15:44–15:46हम पहलीो कहने रही जे
  244. 15:46–15:48तन्त्र में उर्जाक एक ता स्पस्ट विग्यान अची
  245. 15:49–15:52कामला बलानक दार इते केवल एक ता नदी नहीं
  246. 15:52–15:54बलकी प्रक्रितिया तन्त्र गवा आची
  247. 15:55–15:58जखन जिल्मिल जहन विश्वास गाती ब्रमान्डक नियमो के तोडे चाएत
  248. 15:58–16:01मतलब एक ता सिट्द गुरूपर प्रहार करे चाईद,
  249. 16:01–16:04ता प्रक्रिति में अथ्यंत गेर असंटूलन आभी जाएचचे.
  250. 16:04–16:08तक की औही असंटूलन के दूर करवाकलेल खुन भाईब आवश्यक अची.
  251. 16:08–16:10तन्त्र की नियमनुसार.
  252. 16:10–16:14अग, कामा ख्याक जादूगरनी कोनो व्यक्तिगत क्रोद से ही काज नहीं करेताची
  253. 16:14–16:17उओ, उही असन्तुलन के दूर करेताची
  254. 16:17–16:21विश्वास गातिक भलीदाग का प्रक्रिती अपन् सन्तुलन वापस करेताचे
  255. 16:21–16:24नदी कुने कुना होएभ इदेखावत अची
  256. 16:24–16:28जे प्रक्रिति उही न्याय के सुविकार कर रहाल जे उ पाब दोर रहाल जे
  257. 16:28–16:31मुदा इ बहुत लागत अची
  258. 16:31–16:32लागत अची
  259. 16:32–16:35मुदा इ म्रित्त्यु आप पुनर जीवन गाता के
  260. 16:35–16:40एक ता रहस्यमए न्याय पून ब्रम्हन्दिये विवस्ता से जोडे तची
  261. 16:40–16:43जते कर्मक्पल निष्चित आची
  262. 16:43–16:46नटूवा दे आलक पुनर जीवन इसिद करे तची
  263. 16:46–16:49जे जे सत्या अत्तपस्याक मार्ग पर आची
  264. 16:49–16:53उक्रा म्रित्यु से हो पराजित नहीं कर सके तची
  265. 16:53–16:55शरीरक अंत भहे सके तची
  266. 16:55–16:57मुदा तान्त्रिक चेतनाक नहीं
  267. 16:57–17:06अमहाक बाज से इस जेहुर मानेज ची, जि तन्त्र कबलीक अवदारना, हम्रा सबख सादारन न्याय प्रनाली से भिन अचे.
  268. 17:06–17:10आई कता उही तन्त्रिक सिद्द्धन्तक क बहुत गेराई से प्रस्थूत कर अचे.
  269. 17:10–17:15मुदा जगन हम एह समपुन विमरष्के समेट बाक प्रयास करेच ची
  270. 17:15–17:19ता हम अखनो अपन मुल विचार पर अदिग ची
  271. 17:19–17:22जे एक ता मुल रूप से मानुशक कता चे
  272. 17:22–17:23अच्छा
  273. 17:23–17:26तन्त्र शटन्रित्य जादू करहस्स्यमाइ तत्वा
  274. 17:26–17:28अकामाख्याक सक्तियो को उलेक
  275. 17:28–17:58यही कताथ निस्सन्देह अप्यंत आकर्षक निस्देह अप्यंत आप्यंत आप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत �
  276. 17:58–18:03तन्त्रक आव्रनक भावजुद जक्शन कोनो श्रोता ए गात्था सुनाई ताचे,
  277. 18:03–18:10उक्रा नत्वा दयालक अनहद नाथ सब एशी जिल्मिल्क छुरा गोपनाई बेशी वास्तविक लागे थाचे.
  278. 18:10–18:15इक कता हम्रा सब के अपना देविक सम्तूल्य मानी लै तची,
  279. 18:15–18:20तन्त्रक आव्रनक बावजुद जखन कोनो श्रोता ए गात्था सूनाई ता चे,
  280. 18:20–18:27तो उक्रा नत्वा देयालक अनहद नाथ सब एख्जिल्मिल्क चुरा गोपनाई बेशी वास्तविक लागे ता चे.
  281. 18:27–18:31इक कता हम्रा सब के हमर अपन मान्विय दुर्बलताक दिखावैद छे
  282. 18:31–18:36हम्रा सब के भीतरन इक ता बहुरा अचे जे क्रोद में अंदार भजाई तचे
  283. 18:36–18:39आए एक ता जिल्मिल आचे जी इर्षास़ बहरा लचे
  284. 18:39–18:42आहमहा के हे बाद सपूनता साम अच्छी
  285. 18:42–18:46जे मान्विये दुर्बलता कहे कता सा अस्विकार नहीं के लगा सकेता ची
  286. 18:46–18:49मनुश्षक भावनाई तन्त्रक दरातल ची
  287. 18:49–18:51मुदा, हमर निशकर्ष यी आची
  288. 18:51–18:56जे केवल मान्विये दुर्बलता एगाता के सद्यों दरी जीवित नहीं अची
  289. 18:56–18:57तक की जीवित रखने आची
  290. 18:57–19:04शद्न्र्त्तिक साद्ना, अनहद नाद्क सिद्धि, आग्या चक्र कजाग्रन, अ अंतता हम्रित्य।
  291. 19:04–19:11पर तान्त्रिक विजे, इसब उत्त्व च्छतिन, जे एही कता के एक ता सादारन प्रेम कता,
  292. 19:11–19:17वा आपराद क कत्था सा उठायक, मितलाक आमुल लितान्त्रिक दध्रोहर बनादे तची.
  293. 19:17–19:22यदि ये केवल प्रती शोदख कत्था रहीत, तलोक एक राक कहया भिसरी जाएत.
  294. 19:22–19:23इबात तची?
  295. 19:23–19:35अग, मुदा इग कता अंदार सब रकाश दिश बहुतेख सवद्यात्मिक दिश आम्मानविय त्रूती सब रमहान्दिय पुर्नता दिश जीवाके क्ता जीवन्त यात्रा आची.
  296. 19:35–19:38नटूवा दयाल इप्रमानित करेत ची,
  297. 19:38–19:42जे मनुश्षक नियती केवल कीडा मकुडा जका जीभी का मरी जेवाक नई आची,
  298. 19:42–19:46बल की उचाहित, ता प्रक्रतिक के संगे एका कार भख,
  299. 19:46–19:49ब्रमहन्दी नियाय अस्थापित कर सके टची.
  300. 19:49–19:57अप्पष्ट आचे, जे भवहुरा गुरहिन अन्नतूवा दायाल, मानविय जटिल्ता, अइश्वरि रहस्जे के एक अदबूद मिश्चन आचे.
  301. 19:58–20:02कोनो एक पक्ष्के पुणता सही वग गलत नाइत हरायल जाए सके तची.
  302. 20:02–20:09इं निरभर करेत ची जे आहां एही महाकावे रूपी नदी में कते गाराई तक दूपकी लगावे ची
  303. 20:09–20:17की आहां के नारा पर थाडब हो क, लहर गिनाई ची, वा नीचा जागे, तन्द्रक उही भवर की समज वाख प्रैयास करे ची
  304. 20:17–20:28सत्यक खल हूँ अची, इगाता प्रत्यक स्रोताक लेल हूँकर आपन मानसिक अद्यात्मिक अवस्ता क्यानुसार भिन-भिन अर्थ राखिसके तची.
  305. 20:28–20:33आआ, एत तेई हम आपन स्रोताक लेल एक ता खुला विचार चोडी रहल ची,
  306. 20:33–20:40जखन आहा इगाता सूनेच्छी, तक इहा एह में आपन मानवी दूर्बलता के प्रतिभिम्बित देखाएची.
  307. 20:40–20:49कि आहा के लागगत अछी, जे इं मनुश्षक आहंकार, वासना, आईर्षाक कता चे, जक्रा जादुक रंग्देल गेला ची?
  308. 20:49–20:54वाजा आहा उही तान्त्रिक सादनाक उच्छ शिकर के देख पारहल ची,
  309. 20:54–20:58जाही लक पहुचव, मनुश्यक अंतिम लक्ष्य अच्छी,
  310. 20:58–21:01जेना हम सप कारेक्रमक आरंभ में कहने रही,
  311. 21:01–21:04एक कमला बलानक उही आगाद पानिक समान अच्छी,
  312. 21:04–21:08जाही में सतहे के चूए वाला लहर से हो आची
  313. 21:08–21:10आग गेहराई में उठहवे वाला बहवर से हो
  314. 21:10–21:14आईो इदून्नू रहस्य उही पानी में समाहित आची
  315. 21:14–21:19विमर्षक एही अंक में हम्रा सब संगे जूदबाक लेल आख बहुद-बहुद दन्वाद

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विमर्श अविविद्द्द्द्ष्टि कोनक इविषेष्कार-गर्ध्रम में आजाएक स्वागत अचे, मतलब तनी कलपना करू जे आहाक भीतर इत्टिक सकती आब जाए, जे आहाँ आपन एक ता इशारास़ जना कोनो बहरल पूडल नदिक पानी सुखादी. अग, वा क्रोद मे आबिका आपन विरोदी के पातरक मुर्ती बनादी, तक की आँ ही शक्तिक प्रेओ नयाय लेल करब, वा आपन वेक्तिगत प्रतिषोद लेल. विमर्ष अविविद द्रिष्टी कोनक यी विशेष कारेक्रम में आहाक स्वागत अचे. एता इी हम सब कोनो विषे ग़राई में जाकः बुजलिये उकर भिन्न भिन्न पहलुक विष्लेशन करेच्छी नमसकार और आएक इजे विषेर ची उवास्तव में उही आगाद कमला नदीजका आची जकर सताजपर किचु आर देखे देखे था ची अ गराई में किचु आर एक दम सही कहलाओ, आई हम्रा सब का विमर्षक केंद्र में आची मिठलाख विषेश का कमला बलानक तद पर पल्लगवित बक्री भेगु सराय अंचल शित्रख एक ता अट्यंत शक्तिषाली और जटिल गाता बहुरा गोडेन आ नत्वादयाल जे केवल जादूक कता नै अची तन्त्र, निरित्य, प्रेम, विश्वास गात आए... सरवोच भलीदानक कताज भिल्कुल मुदा अटे सा हमर आईक मुल प्रष्न उटेटच आई महाकाव्यक मुल चालक शक्ती कियेच कि ई, मतलब मुख्य रुब से मानविय आध्कार, वासना आशानसारेक शड्यन्त्रक कताज जक्रा केवल जादु अट्तंत्रक आवरन पहरे लगे लगे लच वाज, हमरा विचार सा इे एक ता विषुद धा अद्यात्मिक अ तान्त्रिक रूप कराच, जे इश्वरी नियाय अक्कर्मक जटिल सिद्धान्त के प्रदर्षित करेत आच. देखू, हमर इस पष्ट मानबच जे इगाता मुलत मानविय सम्वेदना, आखारक तक्राव आशान्सारिक शवेंट्र कताच एक राम कोनो देवत्वस नी जोडी सके ची आप आप एक राद दुसर रूप में दिखे ची हमर द्रिष्टिकोन यह जी जे यी कता वस्तुता तान्त्रिक विकास ब्रमहन्द्य नियाई आप ख़ान बुजिराहल जे आहा एहन केक सोचाईच्छे मोदा हमरा एक ता एसबहिन द्रिष्टिकों राखे दिए। जगन आहा एही कताख के द्यान सविष्लेषित करबना आहा देखव जे जादूक आव्रनक नीचा इपूनता मानविय द्रिबलता कता अच्छे कोना? शुर्वात कते से होईता चे? नट्वादयाल, जे बहरोड कराज कुमार आची आब भहुरा, जे एक ता क्योटिक भेटी आचे? आप, दूनो दूई अलक वरक सच्छतीन. भिल्कुल, उही दूनो भीचक जे संगर सच्छी उ आहाय मुक्यरूपस आहंकार अवर्ग भेदक संगर्ष अची मतलब आहा व्यपारी जैसिंक क उदारन लिया जैसिंक क तो उही में उ बहुराक बेटी पर मोहिट चल इगी आचे इविशुद वासना आचे उही वासना क पुर्तिलेल जैसिंक उचक कर रचलक तजे परिस्तिति उत्पन्नभेल उते कोनो देवी देता खेल ने आचे, बलकि मानविय स्वार्त आचे. ने, उईबाज साम सामच्छी, जैसिंक क्रित्या तवासना सप्रे रिच्छल, मुदा भोहुराक प्रतिक्रिया के आँई के अई अंकार नी कै ची. तकी कहा भुक्रा? जक्हन हम एही कता के गेराए सा देखत ची तब वोगरा के वल एक तक ग्रोदी इस्त्री नहीं आए ची उो कमला मयाक अनन्य भख्त आची भूजली आ जक्हन अगवाई तची आई कमले एक आसन उही मे भासे कमला मया उता एक दगीत आची उआपने इस्टक उर्जा युध अवस्तामे करे ताची मुदा उही उर्जक प्रियोग की बहर रहाल आची जगन भोरा क्रोद मे आब एक विवाहक बर्याती के पातरक मुर्ती बना दे ताची अग, उईक ता पैग गतना ची बलकुल अन्निर्दोश मंत्री मल्लक एक आखिक रूष्नी चीन लेए ता इसा विषुद्द मानवी एक रोद आप्रतीशोदख परिनाम अची इहंकारक नगन प्रदर्षन अची. देखु इई... हमरा पूरा करे दियो. अपन अद्याद्म्याद्यो, हमर्श्रोताजे आयकालक तार्खिक दून्या मेरहाच्छती, उनका इसुनिका आच्चर्र्य भूर है लितनी, जे एक ता अद्याद्मिक सादिका एते क्रूर कोना भासकेता ची, इक खुनो अद्याद्मिक न्याए न्याची, इत मतलप आपन शक्ती पर्दम्ब है ची तनिक रुक्कु आहा एह कताक तान्त्रिक प्रक्रते के पुल रुपस चोड रहल ची हम मानत ची जे मलक द्रुष्ती जेबाके गतना कताक एक ता अक्किंत अंद्खार में पक्ष आची बहुत अंद्खार में अगर प्रभाव आस्पास का वातावरन पर पडीत आफी गुद्वा कर्शन जका जे उही च्छत्र में आविगेल उ प्रभाविठेत। इसे वह दोगागा वादावरन पर पडीट आपाज़ा थाची इसे गुद्वा करशन जगाची जे उही चेट्र में आविगेल उप्रभाविधेद तकिया हम मनत्री मल्लक अनहार हुईबा के केवल एक ता दुर्गध ना मानी रहा लग ची उकर की दोष्चल तकिया हम मंत्री मल्लक अनहार हुईबा के केवल एक ता दूगखतना मानी रहल ची. उकर की दोश चल, जकन मल्लक मुसे आहरे वाह निकले ता ची, तो उ पीना वास्तवे कची, बुजलिये, उकोनो तान्त्रिक रूप नहीं आची. तो तुर्गट्ना मानी रहल ची? उकर की दोश चल? जकन मल्लक मुसे आहरे वाह निकलेता ची तो उ पीरना वास्तवे कची बुजलिये? उकोनो तान्तरिक रूप नहें आची एक तो सिद्द सादक निर्दोशक हानी ने करी तची बवरा रवाद्यादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादादा अगर यात्रा में सोहुता शक्ती प्रदर्शनक लाल्सा आची बहुरा अपन कम्रु काम्रुप्सा सीख्यल जादुक प्रेोग गाज के हंकाईबाक आ जना विरोदी के सुग्गा बनागे पिंज्रा में रक्बाक लिल करे तची अगर अद्यात्तिक उत्कर्ष्पर पहुचल मानेच्छी बलकुड मुदा अखर यात्रा में सो हुता शक्ती प्रदशनक लाल्सा आची बहुरा अपन कम्रु काम्रुप्सा सीखेल जादूक प्रेोग तजज़के हंकाईबाक आ जना विरोदी के सुग्गा बनाके पिंज्रा मे रखबाक लेल करे तची इं निंद्रन करबाक मानविय लाल्सा आची मुदा दैाल दैाल सो हो कम नै आची जखन बहुराक कमला दारक पानी सुखा दे तची अन्नत्वा द्याल पर दोश मडेतची, जे न्नत्वा पथेलक सबता पानी पाताल, ता इस पाष्ट रूपसा एक ता शक्तिषाली स्ट्रीक आहंकार अची, जे एक ता राज कुमारक के नीचा दिखाबै चाहेतची. द्याल सो हो गुरु मंगल लक जायतची, अपन शक्ति बड़ेबात लेल, नेजे कोनो इश्वर्य ज्यान प्राप्त्तगर बाख्लेल. अईटाम हम्रा आहाके बात कैटे परत, आहा दयालक यात्रा में अंपर नहीत विग्यानक के ने दिख्राल ची, जखन गुरु मंगल दैयालक के कामाख्या जेबा कादेस दे चतीन तो उ हत्यार अन्वाक्लेल पतारहल चतीन नहीं नहीं, उकोनो हत्यार अन्वाक्लेल ने पतारहल चतीन गुरु मंगल सवयम एतेक सिद्र चला जे मतलब भीना खूटिक अकाश में दोती सुखा सकत चलाए. इकोनो जादूगरी ने, बलकी गुर्ट्वा कर्शन अप पन्च तत्टोपर हुंकर निंट्रन कषंकेत अची. मुदा कामाख्या की आत्राता? कामाख्या की आत्रा ज्यानक लेल चल. अदयालक के कामाख्याक चन्दिका मन्दिर में पथावे चतिन योगनी सबह से शतन्रुत्ते सिख्बाक लेल, और उकर बाद सरया ग्रामिक सिथ देवी भागेश्वरी लग, अनहद और आग्या चक्र जाग्रत कर बाक लेल. ता हम्राया स्पष्ट करू इस्छन्रूत्ते और आग्या चक्र जाग्रत करब की अची, हमर बहुत रास रोता एक्रा केवल एक्ता जादूक प्रक्रिया बुजधषतीन, की इस केवल एक्ता मान्सिक अवस्ता अची, वग कोनो वास्त्विक शकती जे बहुतिक दुन्या के � अगर विस्तार सँम्जब अद्यन्त अवश्यक अची तन्त्र में शट नित्ते कोनो सादारन नाच नही अची हमर शरीर में च्यरता मुख्य उर्जा केंधर हुई तची जिकरा चकर कहल जाएत चे आप चकरक विशे में तचुनल अची अगर अग्याचक्र अखर की काजः है? अगर नाद नाद उद्वनी आखी जे बिना कोनो वस्तुक तक्राहथ के उद्पन अगी तची अद्वनी आची जे बिना कोनो वस्तुक तक्राहत के उद्पन आपण नहुए तची मतलव जेक्रा अनाहत आद से हो कहल जाए तची एक दम सही इप्रम्हांद बूल द्वनी आची जकन कोनो सादख अनाहत नाद के उद्पन नहुए तची अग्या चक्र जे हमर दूनु आखिक के भीच ब्रिकुटी पहोईता ची अग्र जागरनक अज्छ ही त्रिकाल द्रिष्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्� जब बाई हे रूप से नहीं देखाई दराहलाची, उक्रा देखवाख शमता, तजगन दयाली सब प्राबत करेई तची, भुजली उ एक ता सदारन राज्कुमार नहीं जाई तची, उ प्रक्रतिक लेए जाई तची. बहुत रोचक व्याख्या जी, हमी मानी लेए जी तन्तर कषद्दान्त अद्यन्त गूड जी, आएक राएक्ता दाश्नि कादार आज्टेए. मुदा तए यो हमराई भूजाँ जे जगन उ एतेक सिद्भाईगेल, जगन उ प्रक्रतिक हस्सा बनेगेल, तव उ भहुरा सप्रतिशोद की लेलक. अग, मुदद, यदी यी केवल आँकार का तक्राव नहीं चल, तद्ध्धाल आपन कामाख्या से प्राप्त तन्त्रिक शक्तिक प्रयोग, बहुराप अख्रमन करभाक लेल की एक नहीं के लक? एते आहा सुयम आपन तरक के काटी रहल ची, दैयाल टीक उही नहीं के लक. की? उष्क्ती से शक्ती के नहीं काट लक. जगन भहुरा पानी सुखाई दे लक, तद्डयाल कोनो विनाशकारी मन्तरक प्रयोग नहीं के लक. उ आपन रित्यक सक्ती, जक्रा जलाजल कहल गल अगर प्रेएो के लक, आख कमला में पूना पानी बहर दे लक. आप जलाजल निरित्या? जलाजल निरित्ये जल तत्वक के जाग्रत करभाक सादना आच्छ. उ प्रकरती से समवाद करे तची, आदेश नही दे तची. उबव्रा द्वारा लेलगेले एक ता अद्ध्यात्मिक परिक्षाचल जक्रा द्याल पार्के लक अम आहाक बाथ से एते सहमत ची जे द्याल विनम्रता देखा लक उब वव्रा पर प्रहार नहीं के लक जिल मिल दोरी चोत हेबाक बहाना करे तची दोरी चोत हेबाक बात तची अद्टी बात तची याजना उनका सबक भीचक संगरषक समाप्त कदे तची कता के नहीं? आप, कता तो आगु बड़ाई तची भिल्ल्कु, विवाग उल्लासक भीच जखन नतुवा दयालक के प्यास लागे तची तो अपन शिष्य जिल्मिलक पनी बर्बाकलेल पथावे तची अख्रा इनारलक पच्जासे चाकू मारी देटाई तची आहा एक्रा की कहब की इक्कोनो ब्रहमान्द्या गटना आची हम्रा वीचार सच्ट? नहीं इत एक्दम अहीना आची जैना कोनो सादारन स्वार्थी का पूरुश अपन गुरु वम्मित्रक एच्छा वश्मारी देटाची एक्ता शिष्यव अपन गुरु से एच्छा करेटाची अप पीट में खंजर भोखेटाची एटे कोनो देवत्वन नहीं अच्छी भुजलिये इक टक क्रूर मान्वी अप्राद अच्छी इविश्व्द्ध्रुब से एक्ता सान्सारिक सद्यान्त्रा आची जटे सक्ती असम्मानक भूग मनुश्शक पतनक गर्त में लाजाई तची हम्रा खेद आची, मुद-ा हम्रा इद्टरक भिल्कुल सुईकार नहीं आची आहा एही गतना क्रमक केवल सता से देख रहा हो लजी जेना कोनो दैनिक समचार पत्रक कखवर होई उही ख्षनक प्रतीक वाद पर द्यान दीो कोना प्रतीक वाद जक्ञन जिल मिल पानी बरभाक लेजाए तची तक कता अस्पस्ट रुपस रुपसा कही तची जे दोरी आप चोट पैक बहुर हैं चलग इकोनो बहाना ने चल तन्त्र में मानल जाए तची जे जगन कोनो पैक अनिस्ट वा ब्रम्हान्दिय परिवर्तन हुवाक रहे तची तप रकिरती आपन निमक मोड दे तची इनारक दोरी क आप चोट पैक होएभ कों उ सादारन असुविदान नहीं बलकी एक ता अद्दिष्य लोकिक सक्तिक संकेत आची जि नेती आपन काजकोर है लची तकी मियती चाह चलक जि जिल्मिल दोखादे की जिल्मिलक स्वतन्तर इच्छा नहें चल जिल्मिलक आपन करमक पल भेटत उएक ता गलग विषे आची मुदा दयालक इस्तिती देखो जक्ञन दयाल विवाक लिजारहल चलक उक्रा लग तींटा पान चल आप पानक बात तक गाथा मे आची इस सादारन पान नहे चल तंत्र सादना में इस तीनू पान प्रतीक चल तीनुपान प्रतीक चल, प्रक्रती प्र विजें, क्रोद प्र विजें, असानसारिक मोब प्र विजेंग. दैयाल तीनुपान उठहुने चल, उपुर्नता सिद भजुकल चलक. उकर मिर्त्य। कुनो सादारन मान्विय मिर्त्य। नहे आची. तो फेर की आची? जखन उ गायल अवस्ता में मिरित्तिव शयाए पर रहे तची उ अपना लेल जीवन नी मागे तची जे कोनो सामान नी मनुश्वकरत बलकी, उ कमला मैया के पतोर जे एक ता विशेश रेश्मी वस्त्र होई तची उ चर होई तची यो कर सर्वोच आद्ध्यात्मिक विजयाया ची अबना अन्तिम सांस दरी भोतिक शरीरक मोह्तियाजी का इश्वर ये सत्ता के समर्पित अची. इसमर्पन अची वम्रित्त्यो शयया के निराशा इबहस के विशय बहस कै टची. बहुत रास लोक म्रित्यो काल में इश्वर के यात करहेत च्छती एकर रद एने जे ओ ब्रम्हान्ट्या सिद्द पुरुष भूगेला मुदा आईक यदि हम मान्यो लिए जि दैयाल शरीर मोह त्याजी चुकल चल औसब सान्सारिक मोह से मुक्त भूगेल चल तफिर अंत में जद्रिश उपस्तित होई तची उक्र आहा कोना समजाएब. आहाग तप पर कामाख्या के जादुगरनी साची. बिलकुल. कामाख्या के जादुगरनी प्रवेष होई तची. उ आबी का नतूए दयाल के पुनर जीवित कराई तची अर विश्वास खाती जिल्मिलक बली कमलदारक देताची इबली इतिक वीभध सची जी पुरा कमलदार कुने कुना भोजाई तची इद्दिष्खी आची इग लोकिक नियाए ची नहीं इविश्विद प्रतिशोद आच इब भध्ला लान्यायाच आईक्रा लोकिक न्याई वा तान्त्रिक सन्तूलन कही सकैच्छे मुदा इख्फुन खराबा मान्विय क्रोदख चरमच जकर शिष्ष्छ दूखा देलग, उक्रजान से मारका नदी में बहा देलग. मुदाई, इता एक्ता अथ्यंत लगष्वाद भेल जक्रा जादूक चादरी से दख देल गेल आच्छ. यदी देल एक पीक सादख चल, जे चमा कर सकए चल, जे ना उबहुराए के चमा के लग, तो उ कामाख्यक जादूगरनी के जिल्मिले के मारवासे केखन रोगलक ये ते अद्यात्मिक उच्छता कते गयल इस सिद्ध करे ता ची जे अंतता हब उजल्ये इस शकती या प्रतिशोदग कता आची एक ता बहुत प्रस्संगिक प्रश्न जे आहा उठेलावाच मुदा की आहा ए विचार के लावाच जे तंत्र में बली कवास्त्विक अर्थ की हुए तची इकोनो सादारन रथ्यावा विक्तिगत बद्ला नहीं आची हम पहलीो कहने रही जे तन्त्र में उर्जाक एक ता स्पस्ट विग्यान अची कामला बलानक दार इते केवल एक ता नदी नहीं बलकी प्रक्रितिया तन्त्र गवा आची जखन जिल्मिल जहन विश्वास गाती ब्रमान्डक नियमो के तोडे चाएत मतलब एक ता सिट्द गुरूपर प्रहार करे चाईद, ता प्रक्रिति में अथ्यंत गेर असंटूलन आभी जाएचचे. तक की औही असंटूलन के दूर करवाकलेल खुन भाईब आवश्यक अची. तन्त्र की नियमनुसार. अग, कामा ख्याक जादूगरनी कोनो व्यक्तिगत क्रोद से ही काज नहीं करेताची उओ, उही असन्तुलन के दूर करेताची विश्वास गातिक भलीदाग का प्रक्रिती अपन् सन्तुलन वापस करेताचे नदी कुने कुना होएभ इदेखावत अची जे प्रक्रिति उही न्याय के सुविकार कर रहाल जे उ पाब दोर रहाल जे मुदा इ बहुत लागत अची लागत अची मुदा इ म्रित्त्यु आप पुनर जीवन गाता के एक ता रहस्यमए न्याय पून ब्रम्हन्दिये विवस्ता से जोडे तची जते कर्मक्पल निष्चित आची नटूवा दे आलक पुनर जीवन इसिद करे तची जे जे सत्या अत्तपस्याक मार्ग पर आची उक्रा म्रित्यु से हो पराजित नहीं कर सके तची शरीरक अंत भहे सके तची मुदा तान्त्रिक चेतनाक नहीं अमहाक बाज से इस जेहुर मानेज ची, जि तन्त्र कबलीक अवदारना, हम्रा सबख सादारन न्याय प्रनाली से भिन अचे. आई कता उही तन्त्रिक सिद्द्धन्तक क बहुत गेराई से प्रस्थूत कर अचे. मुदा जगन हम एह समपुन विमरष्के समेट बाक प्रयास करेच ची ता हम अखनो अपन मुल विचार पर अदिग ची जे एक ता मुल रूप से मानुशक कता चे अच्छा तन्त्र शटन्रित्य जादू करहस्स्यमाइ तत्वा अकामाख्याक सक्तियो को उलेक यही कताथ निस्सन्देह अप्यंत आकर्षक निस्देह अप्यंत आप्यंत आप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत अप्यंत � तन्त्रक आव्रनक भावजुद जक्शन कोनो श्रोता ए गात्था सुनाई ताचे, उक्रा नत्वा दयालक अनहद नाथ सब एशी जिल्मिल्क छुरा गोपनाई बेशी वास्तविक लागे थाचे. इक कता हम्रा सब के अपना देविक सम्तूल्य मानी लै तची, तन्त्रक आव्रनक बावजुद जखन कोनो श्रोता ए गात्था सूनाई ता चे, तो उक्रा नत्वा देयालक अनहद नाथ सब एख्जिल्मिल्क चुरा गोपनाई बेशी वास्तविक लागे ता चे. इक कता हम्रा सब के हमर अपन मान्विय दुर्बलताक दिखावैद छे हम्रा सब के भीतरन इक ता बहुरा अचे जे क्रोद में अंदार भजाई तचे आए एक ता जिल्मिल आचे जी इर्षास़ बहरा लचे आहमहा के हे बाद सपूनता साम अच्छी जे मान्विये दुर्बलता कहे कता सा अस्विकार नहीं के लगा सकेता ची मनुश्षक भावनाई तन्त्रक दरातल ची मुदा, हमर निशकर्ष यी आची जे केवल मान्विये दुर्बलता एगाता के सद्यों दरी जीवित नहीं अची तक की जीवित रखने आची शद्न्र्त्तिक साद्ना, अनहद नाद्क सिद्धि, आग्या चक्र कजाग्रन, अ अंतता हम्रित्य। पर तान्त्रिक विजे, इसब उत्त्व च्छतिन, जे एही कता के एक ता सादारन प्रेम कता, वा आपराद क कत्था सा उठायक, मितलाक आमुल लितान्त्रिक दध्रोहर बनादे तची. यदि ये केवल प्रती शोदख कत्था रहीत, तलोक एक राक कहया भिसरी जाएत. इबात तची? अग, मुदा इग कता अंदार सब रकाश दिश बहुतेख सवद्यात्मिक दिश आम्मानविय त्रूती सब रमहान्दिय पुर्नता दिश जीवाके क्ता जीवन्त यात्रा आची. नटूवा दयाल इप्रमानित करेत ची, जे मनुश्षक नियती केवल कीडा मकुडा जका जीभी का मरी जेवाक नई आची, बल की उचाहित, ता प्रक्रतिक के संगे एका कार भख, ब्रमहन्दी नियाय अस्थापित कर सके टची. अप्पष्ट आचे, जे भवहुरा गुरहिन अन्नतूवा दायाल, मानविय जटिल्ता, अइश्वरि रहस्जे के एक अदबूद मिश्चन आचे. कोनो एक पक्ष्के पुणता सही वग गलत नाइत हरायल जाए सके तची. इं निरभर करेत ची जे आहां एही महाकावे रूपी नदी में कते गाराई तक दूपकी लगावे ची की आहां के नारा पर थाडब हो क, लहर गिनाई ची, वा नीचा जागे, तन्द्रक उही भवर की समज वाख प्रैयास करे ची सत्यक खल हूँ अची, इगाता प्रत्यक स्रोताक लेल हूँकर आपन मानसिक अद्यात्मिक अवस्ता क्यानुसार भिन-भिन अर्थ राखिसके तची. आआ, एत तेई हम आपन स्रोताक लेल एक ता खुला विचार चोडी रहल ची, जखन आहा इगाता सूनेच्छी, तक इहा एह में आपन मानवी दूर्बलता के प्रतिभिम्बित देखाएची. कि आहा के लागगत अछी, जे इं मनुश्षक आहंकार, वासना, आईर्षाक कता चे, जक्रा जादुक रंग्देल गेला ची? वाजा आहा उही तान्त्रिक सादनाक उच्छ शिकर के देख पारहल ची, जाही लक पहुचव, मनुश्यक अंतिम लक्ष्य अच्छी, जेना हम सप कारेक्रमक आरंभ में कहने रही, एक कमला बलानक उही आगाद पानिक समान अच्छी, जाही में सतहे के चूए वाला लहर से हो आची आग गेहराई में उठहवे वाला बहवर से हो आईो इदून्नू रहस्य उही पानी में समाहित आची विमर्षक एही अंक में हम्रा सब संगे जूदबाक लेल आख बहुद-बहुद दन्वाद

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