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छेछन_लोकगाथा_के_आलेख_की_समीक्षा.m4a

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:05आज्गी इस समिक्षा में हम चेचन नामक मैठली लोक गाता के आलेक पर चर्चा कर रही हैं,
  2. 0:05–0:09जो दोम लोग देवता की वीर्ता और संगर्षों पर आदारित है.
  3. 0:09–0:13तो बिना समें बरभाद किये सीथा पहले मुद्धे पर आते हैं,
  4. 0:13–0:17कता में सूर चटिया के सात होने बहयंकर यूधगा वरनन
  5. 0:17–0:19अपने पूर्व पीथिका की तुलना में
  6. 0:19–0:21बहुत जल्द वाजी में समेट लिया गया है.
  7. 0:21–0:26आप और मैं कहुंगी कि यह यह एस आलेख की सबसे पहली
  8. 0:26–0:28और सबसे बडी कमजोरी है.
  9. 0:28–0:31मतलब दिखे अद्ध्याय एक और दो में
  10. 0:31–0:33लिटख ने जो माहल बनाया है ना
  11. 0:33–0:35वो सच में अदबुत है
  12. 0:35–0:37वो दंका बजानेवाला हिस्चा
  13. 0:37–0:39भिलकुल दंका बचता है
  14. 0:39–0:41वो मेदनी पूल वाली चिलम पीता है
  15. 0:41–0:43पूरा गाँ आतंकित है
  16. 0:43–0:48अब एक विशाल और भ्यशाड़ सूर चत्या के सात महा युध होने वाला है
  17. 0:48–0:52एक तरे से पाटख बलकुल अपने कुरसी की पेटी बाण लेता है
  18. 0:52–0:54सही बात है, सस्पैं सिथम चरम पर होता है
  19. 0:54–0:57लेकिन फेर अद्ध्याय तीन में क्या होता है
  20. 0:57–0:59केवल एक वाख्के आता है
  21. 0:59–1:29तो तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा
  22. 1:29–1:32तो तो बज़ाग बवाद बवाद बवाद बवाद
  23. 1:32–1:35बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद
  24. 1:35–1:38बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद
  25. 1:38–1:41बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद
  26. 1:41–1:44बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद
  27. 1:44–1:48यवद़न के ख़़च के विलन को मार देता है,
  28. 1:48–1:50तो विलन के कथरनाग होने का,
  29. 1:50–1:53वो सारा बिल्डब विर्थ होजाता है.
  30. 1:53–1:56पाथक ने अभी आभी देखा है,
  31. 1:56–1:59के चेचन ने चुनोती स्विकार की है.
  32. 1:59–2:04बिना किसी करोचके विलन को मार देता है,
  33. 2:04–2:09तो विलन के कथरनाग होने का, वो सारा बिल्डब विर्थ होडाता है.
  34. 2:09–2:14पाटख ने अभी अभी देखा है, के चैचन ने चुनोती स्विकार की है.
  35. 2:14–2:16दंके पर भारी चोट की है.
  36. 2:16–2:19रा, इतनी सारी तगयारी हूई है.
  37. 2:19–2:24तो इस बारी तयारी के बाद, जब आसली तक्राव काक्षन आता है,
  38. 2:24–2:27तो संगर्ष का पूरी तरे से नहोंगा,
  39. 2:27–2:31उस पूरी पूर्व पीठिका को खोखला साभित कर देता है.
  40. 2:31–2:33हाँ, ये तो एक त्रिलर फिल्म की टरा होगया है आँँँ.
  41. 2:33–2:36जाँ बम को दिफूस करने का तनाव बहुत लंबा है
  42. 2:36–2:38तामर टिक टिक कर रहा है
  43. 2:38–2:39पसीना तपक रहा है
  44. 2:39–2:40और फिर हीरो
  45. 2:40–2:44और हीरो बिना सोचे बस एक नीला तार काट देता है
  46. 2:44–2:45और सब शान्त हो जाता है
  47. 2:45–2:46बिलकुल
  48. 2:46–2:48और आप सक्रीन की तरव देक तरहे जाते हैं कि
  49. 2:48–2:50अरे क्या बस इतना ही ता
  50. 2:50–2:52अगर हम आक्ष्छन द्रिश्वो में
  51. 2:52–2:54नायक की शमता को स्थापित कर रहे है
  52. 2:54–2:57तो हमें उस संगर्ष को महसुस करने की आवश्चकता है
  53. 2:57–2:59तीक यही मिरे सुजाव है
  54. 2:59–3:02इस लडाई के द्रिष्चका थोडा और विस्तार करे है
  55. 3:02–3:08ताकी पाटक चेचन की शक्ती और कोशल दोनो का वास्तवे कनुबहव कर सकें
  56. 3:08–3:11यानी सर्फ बताना नहीं है दिखाना है
  57. 3:11–3:15आँ, हम केवल ये नी बताना चाते की नायक ताकतवर है
  58. 3:15–3:20हम चाते है की पाटक उसकी ताकत और उस ताकत को आजमाने वाले खत्रे
  59. 3:20–3:50तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  60. 3:50–3:55उसकी अक्रामक्ता का एक आद वाख्यो में सजी वरनन करें
  61. 3:55–3:58जैसे कोई विज्योल इमेज बनाना
  62. 3:58–4:01अआ दिखाएए कि जब वो सूर दोडता है
  63. 4:01–4:03तो दरती कैसे कापती है
  64. 4:03–4:06उसके खुरों से कैसे दूल का गुबार उडता है
  65. 4:06–4:08और फिर छेछन के प्रतिक्रिया क्या होगी
  66. 4:20–4:24शायएद सूर के दाद छेचन के पास से गुजरे हो
  67. 4:24–4:26जिस से पाटख की दडगने तेज हो जाएं
  68. 4:26–4:29औरे वाआ, ये सुनकर ही रोमान्चक लग रहा है
  69. 4:29–4:33है ना, उसके बाद जब सूर दूसरी बार पलड़कर हमला करता है
  70. 4:33–4:37तब छेचन अपनी पार लोकेक शक्ती का प्रदर्षन करते हुए
  71. 4:37–4:40उसके पैर पकरता है और उसे चीर देता है
  72. 4:40–4:45ये चोटी सी खीच्तान ये एक या दोपल का संगर्ष
  73. 4:45–4:50उस एक वाके की तुलना में सो गुना अदेक प्रभाव पैदा करेगा
  74. 4:50–4:51ये बहुती व्यवारिक सुजाव है
  75. 4:52–4:53इस से ये सपष्ट होगा
  76. 4:53–4:55कि सूर वास्तम में आजेया ता
  77. 4:55–4:57जिस से चेचन की जीद का महत्वब बध जाएगा
  78. 4:57–4:58खेर
  79. 4:58–5:00चलिये अब उस हिससे को करीब से देकते है
  80. 5:00–5:03जाए चेचन बंस बिट्टी में प्रवेश करता है
  81. 5:03–5:05नायक छेचन महराज के चरित्र चित्रण में,
  82. 5:05–5:09विषेश्वृप से क्रिष्नाराम की बन्स्बिट्टी से बाँच काटने के प्रसंग में,
  83. 5:09–5:14उनके सहसे क्रित्ते की प्रियाना बहुत सतही और अस्पष्ट प्रतीथ होती है, मोड है.
  84. 5:14–5:16अद्याय छे में हम देकते है,
  85. 5:16–5:20की चेचन का विवाह पन्मा से हो चुका है.
  86. 5:20–5:23अब वो यादव लोग देवता क्रिषनाराम की बन्सभिट्टी में
  87. 5:23–5:27गूसकर बिना अनुमती के बारी मात्रा में बास काटता है.
  88. 5:27–5:29जो की एक बहुग बडा कदम है.
  89. 5:29–5:30बहुग बडा कदम है.
  90. 5:30–5:33लेकिन जब आलेक में इस इतने बड़े कदम का,
  91. 5:33–5:35कारन बताया जाता है तो लिखा है,
  92. 5:35–5:37शायद जीविका के आवशकता,
  93. 5:37–5:39वापनी पुरानी आदत.
  94. 5:39–5:42आए, यही सबसे बड़ी कमजोरी है,
  95. 5:42–5:44एक महान आया क्या लोग देफ्ता के लिए,
  96. 5:44–5:46महेज पुरानी आदत के कारन,
  97. 5:46–5:52इतना बडवन्गो मोल लेना उनके चरित्र की गमभीर्ता और गरीमा को एकदम से गड़ा देता है.
  98. 5:52–5:56जब बडवाग लिखा के पकष में सोचकर देखता हूँ.
  99. 5:56–6:01था पूरानी आदत कहना एक तरा का अलहडपन या नायक का स्वाग नहीं दिखाता?
  100. 6:01–6:03स्वाग किस तर है से?
  101. 6:03–6:06जेसे उसे परवाही नहीं कि क्रिष्नाराम कोन है
  102. 6:06–6:08वो बस अपनी मस्ती में बास काट रहे है
  103. 6:08–6:09किवकि उसे आददध है
  104. 6:09–6:11क्या ये उसे अदिक निदर नी बनाता?
  105. 6:11–6:16देखे, निदरता रहा हो ल्मुर्खता मे एक बारी क्रेखा होती है
  106. 6:16–6:20अगर आप एक शक्तीशाली सथ्ता से इसले तक्रा रहे हैं,
  107. 6:20–6:24कुके आपको बस आदत है, तो आप एक विद्रोही नायक नहीं,
  108. 6:24–6:28बलकी एक सामान ने अप्रादी, या एक गेर जिमबेदार व्यक्ती लकते हैं.
  109. 6:28–6:31रहा, खास कर तब जब उसकी नहीं नहीं शादी हुई है?
  110. 6:46–6:48अगर संदरब से जोड कर प्रस्थूट करे।
  111. 6:48–6:51यानी इसे एक नायक का उदेशे पूड कदम लगना चाहीए,
  112. 6:51–6:54नकी किसी सादारन भूल या हाददद का परिनाम।
  113. 6:54–6:57एक दम सतीक. पाटख को ये लगना चाहीए,
  114. 6:57–7:00के चेचन को पता है कि वो क्या कर रहा है.
  115. 7:00–7:03उसे इसके परनाम भी पता है,
  116. 7:03–7:05लेकिन फिर भी वो ये कर रहा है,
  117. 7:05–7:08क्योंकि उसके पास एक बहुत वी मजबूत कारन है.
  118. 7:08–7:10हमें ये महसुस होना जाएए,
  119. 7:10–7:13कि इस निरनै के पीछे एक ठोस वजग है,
  120. 7:13–7:18जिसके लिये वो अपने नेग रहस्त जीवन को भी दावपर लगाने को तगयार है.
  121. 7:18–7:21तो इसे सुदहारने के लिए लेक्हक क्या कर सकता है?
  122. 7:21–7:25क्या हमेसे अदिकार और विद्द्रोग के नजरीये से देख सकते है?
  123. 7:25–7:31कुकि मुझे याद है, आलेक मे कही प्रतागत अदिकारक ब्रम का जिक्र क्या गया है.
  124. 7:31–7:36बलकोल, यही वो जगा है जहां लेक हक बहुत बडया बडलाव कर सकता है.
  125. 7:36–7:40उदारन के लिए आप सपष्ट रूप से ये दर्षाखते हैं
  126. 7:40–7:43की दोम समदाय के लिए बास काटना
  127. 7:43–7:44उनका पारमपरिक अदिकार था
  128. 7:44–7:48जिसे क्रिशना राम की सथ्टाने शायग चील लिया था
  129. 7:48–7:51अच्छा तो वो आदत के कारन बास नहीं काट रहें?
  130. 7:51–7:58नहीं, वो क्रिश्ना राम की सत्ता को चुनाती देकर अपने समवदाय के उस पारमपर एक अदिकार को फिरसे स्तापित कर रहा है.
  131. 7:58–8:04इसे ब्रहम की बजाय एक द्रिड विष्वास या सचेट विद्रोग के रूप में लिखा जाना जाहीए.
  132. 8:04–8:13ये तो एक शान्दार आंगल है, ये छेचन को सरफ एक ताकत्वर वक्ती से उठाकर एक समवुदाय के मसीहा के रुपने स्थापित करता है.
  133. 8:13–8:17लेके न व्म्म्, क्या कोई और व्यक्तिगद आंगल भी हो सकता है?
  134. 8:17–8:19जैसे उसकी नहीं शादी को लेकर.
  135. 8:19–8:22आप दूस्रा बहुत नहीं मजबूत उदारन हो सकता है
  136. 8:22–8:26पनमा के सात उसकी नहीं ग्रियस्ती बस रही है
  137. 8:26–8:28आप येस पष्ट कर सकते है
  138. 8:28–8:31के पनमा के लिए नहीं ग्र बनाने
  139. 8:31–8:34या कोई विषेश मांगले कार्या पूरा करने के लिए
  140. 8:34–8:39चेचन को किसी विषेश प्रकार के बास के अट्यंत आवश्च्च्ताती थी
  141. 8:39–8:42और वो बास केवल क्रिशना राम की उसी बन्स विट्टी में मिलता हो
  142. 8:42–8:45आप देखे यहां दाओ बहुत उचे हो ग़े
  143. 8:45–8:49चेचन एक पती के रुप में अपनी जम्यदारी पूरी करने के लिए
  144. 8:49–8:52जान बूजकर ये बारी क्ष्ट्रा मोल ले रहा है
  145. 8:52–8:55ये उसे स्वार्ती नहीं बलकी एक समर पिद
  146. 8:55–8:57और निदर ग्रिहस्त बनाता है
  147. 8:57–8:58सही का
  148. 8:58–8:59जब आप यह सा करते हैं
  149. 8:59–9:01तो बास काटना केवल चोरी नहीं रही रहे जाता
  150. 9:01–9:04ये प्रेम, अदिकार, और सत्ता के किलाग
  151. 9:04–9:07अगाववत का एक मिलाजुला प्रतीक बन जाता है?
  152. 9:07–9:12तो इस सामगरी में चेचन लगातार नहीं और बडी सट्ताँ से तक्रारा है?
  153. 9:12–9:14आए, एक बादेक!
  154. 9:14–9:17पहले सूर के माद्धिम से फिर क्रिशना राम की बन सबिट्टी में
  155. 9:17–9:20और जब भास काटने का ये विद्रो हो सामने आता है,
  156. 9:20–9:23तो उस विद्रो हो को कुछलने के लिये क्रिशना राम का हाती
  157. 9:23–9:25सुबरन मेदान में उतरता है.
  158. 9:25–9:30लेकिन यही पर कता का सन्रचनात्मक धाचा पुरी तरा लगख़ा जाता है.
  159. 9:30–9:35आलेख का अंतिम बाग अपने चरम बिन्दूपर पहुचकर अचानक समाप्त हो जाता है
  160. 9:35–9:39जिस से पाटक एक बड़े और निरनायक धूंद के भीच मेही अनुतरित रहे जाता है
  161. 9:39–9:43अफ, ये एक बहुती गमभीर धाचागत कमजूरी है
  162. 9:43–9:48मैं कोंगी ये कहानी का सब से नाट की है और द्रिश्वान हिस्चा है.
  163. 9:48–9:49इक दंगदं क्लाईमच्वाला फील है?
  164. 9:49–9:52बलकुल. अद्ध्याय साथ में हम देकते है,
  165. 9:52–9:56की अट्यंट शक्तिषाली हाती सुब्रन चेचन की गर्दन पर
  166. 9:56–10:01उसी का पाज पसेरी का बारी कत्ता रग देता है, उसे अपने पेरो तले दबालेता है.
  167. 10:01–10:05ये एक मुद का शिकनजा है, पाथक की सांसे अटकी हूँई है.
  168. 10:05–10:06और फिर क्या होता है?
  169. 10:06–10:11और थीक इसी क्षन कहानी अचाना के चाराच मे बड़ल जाती है.
  170. 10:11–10:16एक वाख के आता है, गाता एच्ता एक ता नव मोड लेत अची,
  171. 10:16–10:20यानी गाता यहान एक नया मोड लेती है.
  172. 10:20–10:22अर कहानी वही रुग जाती है.
  173. 10:22–10:24पाटक ये जाने बना ही रहे जाता है,
  174. 10:24–10:28के चेचन ने इस असमबहु प्रतीट होने वाली स्तिती से
  175. 10:28–10:29खुद को कैसे निकाला.
  176. 10:29–10:33आप जा अम इसे एक ख्लिफ हैंगर कितरा नहीं ले सकते.
  177. 10:33–10:35बवद्खख अगले हिसे का इंतदार करें।
  178. 10:35–10:37शाएड लेखख यहां सस्पैंस पैदा करना चाहता हो।
  179. 10:37–10:39देखिख ख्लिफ्हांगर का भी अपना एक व्याक्रन होता है
  180. 10:39–10:41अच्छाख ख्लिफ्हांगर एक सबाल करता है
  181. 10:41–10:43लेकिन वो किसी द्रिष्य के बीच में
  182. 10:43–10:45अगर ये पाटख को ये पता हो ना चाहीए,
  183. 10:45–10:47कि ये कहानी केवल पहला बाग है,
  184. 10:47–10:49अभी जो अस्तिती है,
  185. 10:49–10:53वो क्लिफ आंगर कम और एक अदूरी चोडीग़ द्राफ्ट कोपी जाडा लकती है.
  186. 10:53–10:55ये अज़े सब पाटख को ये पता हो ना चाहीए,
  187. 10:55–11:25अगर ये क्लिफ आंगर है तु पाटख को ये पता हो ना चाएए, कि ये कहानी का केवल पहला बाग है, अभी जो स्तिती है, वो क्लिफ आंगर कम और एक अदूरी चोडी गई द्राफ्ट कोपी जाएए लकती है. ये अज़ा है ज़से कोई आपको कोई त्फिलर सूना रहा ह
  188. 11:25–11:29दाचे को संदूलित करने के लिए क्या किया जाना जाहीए?
  189. 11:29–11:32हमें पाथकों की अपेक्षाँ का प्रबंदन कैसे करना है?
  190. 11:32–11:36मेरा सुजाव यह है कि या तो शुर्वात मेही शपष्ट्रूप से
  191. 11:36–11:38पाथकों की अपेक्षाँ निरदारित करें.
  192. 11:38–11:41की यहे एक लंबी गाता का केवल प्रथम कहन्द है
  193. 11:41–11:44या फिर इस हाथी वाले धूंव का
  194. 11:44–11:46उचित और सन्तोष चनक निषकर्ष
  195. 11:46–11:49वर्त्मान आलेक मेही शामिल करें
  196. 11:49–11:51दोनो मेसे कोई एक रास्ता अपनाना ही होगा
  197. 11:51–11:52बिलकुल
  198. 11:52–11:54आप पाटख को अंदेरे में रक सकते
  199. 11:54–11:56ज़िल्ये दोनो विकल्पोंपर बात करते हैं
  200. 11:56–12:00मान लिजे अगर लेक्हक इसे पार्ट्वन फीर लेखना चाहता है
  201. 12:00–12:02तो उसे कहां और कैसे बडलाव करना चाहीं?
  202. 12:02–12:05यदि यह कहानी का पहला बहाग है
  203. 12:05–12:08तो प्रस्तावना मेही इस पफ्ष्ट किया जाना चाहीं
  204. 12:08–12:12लेक्हक लेक्ह की शुर्वात मेही एक पेरेग्राफ जोर सकता है
  205. 12:12–12:18जहां यह लिखा हो की यह आलेक चेचन के जीवन के पहले दो महान संगर्षों
  206. 12:18–12:22मनिक चंद और क्रिशना राम की सात की शुर्वात को दर्षाता है.
  207. 12:22–12:25इस से क्या होगा?
  208. 12:25–12:55अगर बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्द
  209. 12:55–13:01अद्वारा उठाया जाना और नायक की गरदन पर रखा जाना एक बहुत ही शक्तिषाली बिमब है.
  210. 13:01–13:04इसका समथान कहानी मेही होना चाहीए.
  211. 13:04–13:06तो इसका निषकरष कैसा दिक सकता है?
  212. 13:06–13:10चेचन उस हाती के पैर के नीचे से कैसे निकलेगा?
  213. 13:10–13:22अप यह यह सपष्ट कर सकते हैं कि चेचन ने अपनी अदम में इच्छा सकती और बहुबल से हाती के उस भारी पैर और कते के दबाव को कैसे दھकेला.
  214. 13:22–13:24या शायद हाती हुदी दर गया हो?
  215. 13:24–13:30आप ख्या उसके आखुं का क्रो देख कर सुबरन हाती पीछे हटक्या?
  216. 13:30–13:33या फिर चुंकी ये एक लोग गाता है,
  217. 13:33–13:35क्या किसी देवी हस्तक शेप से,
  218. 13:35–13:37वो कता हलका हो गया?
  219. 13:37–13:40या क्रिशनराम ने खोदाकर,
  220. 13:40–13:42चेचन की हिम्मत देकखर,
  221. 13:42–13:44हाती को पीचे हटने का आदेश दिया?
  222. 13:44–13:46इन में से कोई भी विकल्प हो सकता है?
  223. 13:46–13:55बिल्कुल इन में से कोई भी विकल्प हो वो एक पारग्राफ इस आलेख को एक समपूरन और यादगार रच्ना बनादेगा.
  224. 13:55–13:59जब आप एक नायक को इतनी बडी मुसीबत में डालते है.
  225. 13:59–14:04तो पाटक नायक की उस मुस्विबत से बाहर निकलने की चतूराई
  226. 14:04–14:07या ताकत को दिखने के लिए खाहनी पड़रहा होता है
  227. 14:07–14:10उसे इस से वनचित मत की जीए
  228. 14:10–14:11एक दम सही बात है
  229. 14:11–14:15तो सन्षेत में कहें तो इस पूरी रचना के प्रभाव को कईगुना बडाने के लिए
  230. 14:15–14:17तीन मुख्य बिंदोवापर कारे करना है
  231. 14:17–14:22बहला, चेट्या सूर के साथ होने वाले युध्द के दिश्ष्ष्टार करें
  232. 14:22–14:25सूर की आक्रामक्ता और चेचन के बचाव का वरनन करें
  233. 14:25–14:27ताकी रोमाच और तनाव चरम तक पहुचे
  234. 14:27–14:35तुस्रा, क्रिश्ना राम की बन्स्बिट्टी से बास काटने के पीछे चेचन की प्रिर्णा को अदिक ठोस बनाए.
  235. 14:35–14:43इसे महज एक पुरानी आदत बताने के बजाए समवुदाय के पारंपरेक अदिकार या ग्रिस्ति की आवशकता जैसे गेरे कारनो से जोडें.
  236. 14:43–14:44बिल्कुट
  237. 14:44–14:45और तीस्रा
  238. 14:45–14:47सुब्रन एठी वाले अदूरे
  239. 14:47–14:48क्लाईमैक्स को तीक करें
  240. 14:48–14:50या तो शुर्वाद में बतादें
  241. 14:50–14:52की यह सुब पहला बाग है
  242. 14:52–14:54या फिर अंट्मे स्पष्ट करें
  243. 14:54–14:56की चेचन ने उस एठी के शिकनजे
  244. 14:56–14:57से कुद को कैसे आजाद किया
  245. 14:57–15:02मैं कहोंगी के ये तीनो सुजाव आलीक की कतानात्मक सन्रच्ना
  246. 15:02–15:07और नायक के मनोवेग्यानिक चित्रन को उस तर पर लेजाएंगे
  247. 15:07–15:09जिसका ये विश्याइ सच्मे हक्दार है
  248. 15:09–15:11तो हम श्रोटा को आमन्त्रित करते हैं
  249. 15:11–15:14के वे इं सन्शुदनो को लागु करने के बाद
  250. 15:14–15:17अपने आलेख को पुने समिक्षा के लिए अवश्षे बेजें
  251. 15:17–15:19हमें ये देककर बहुत खुषी होगी
  252. 15:19–15:21कि इन बदलावों के बाद
  253. 15:21–15:23चेचन महराज की एगाता
  254. 15:23–15:25पाटकों के भीच कैसा दमाका करती है
  255. 15:25–15:28अपना काम साजा करने के लिए बहुत बहुत द्श्वाद

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आज्गी इस समिक्षा में हम चेचन नामक मैठली लोक गाता के आलेक पर चर्चा कर रही हैं, जो दोम लोग देवता की वीर्ता और संगर्षों पर आदारित है. तो बिना समें बरभाद किये सीथा पहले मुद्धे पर आते हैं, कता में सूर चटिया के सात होने बहयंकर यूधगा वरनन अपने पूर्व पीथिका की तुलना में बहुत जल्द वाजी में समेट लिया गया है. आप और मैं कहुंगी कि यह यह एस आलेख की सबसे पहली और सबसे बडी कमजोरी है. मतलब दिखे अद्ध्याय एक और दो में लिटख ने जो माहल बनाया है ना वो सच में अदबुत है वो दंका बजानेवाला हिस्चा भिलकुल दंका बचता है वो मेदनी पूल वाली चिलम पीता है पूरा गाँ आतंकित है अब एक विशाल और भ्यशाड़ सूर चत्या के सात महा युध होने वाला है एक तरे से पाटख बलकुल अपने कुरसी की पेटी बाण लेता है सही बात है, सस्पैं सिथम चरम पर होता है लेकिन फेर अद्ध्याय तीन में क्या होता है केवल एक वाख्के आता है तो तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो बगागा तो तो बज़ाग बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद बवाद यवद़न के ख़़च के विलन को मार देता है, तो विलन के कथरनाग होने का, वो सारा बिल्डब विर्थ होजाता है. पाथक ने अभी आभी देखा है, के चेचन ने चुनोती स्विकार की है. बिना किसी करोचके विलन को मार देता है, तो विलन के कथरनाग होने का, वो सारा बिल्डब विर्थ होडाता है. पाटख ने अभी अभी देखा है, के चैचन ने चुनोती स्विकार की है. दंके पर भारी चोट की है. रा, इतनी सारी तगयारी हूई है. तो इस बारी तयारी के बाद, जब आसली तक्राव काक्षन आता है, तो संगर्ष का पूरी तरे से नहोंगा, उस पूरी पूर्व पीठिका को खोखला साभित कर देता है. हाँ, ये तो एक त्रिलर फिल्म की टरा होगया है आँँँ. जाँ बम को दिफूस करने का तनाव बहुत लंबा है तामर टिक टिक कर रहा है पसीना तपक रहा है और फिर हीरो और हीरो बिना सोचे बस एक नीला तार काट देता है और सब शान्त हो जाता है बिलकुल और आप सक्रीन की तरव देक तरहे जाते हैं कि अरे क्या बस इतना ही ता अगर हम आक्ष्छन द्रिश्वो में नायक की शमता को स्थापित कर रहे है तो हमें उस संगर्ष को महसुस करने की आवश्चकता है तीक यही मिरे सुजाव है इस लडाई के द्रिष्चका थोडा और विस्तार करे है ताकी पाटक चेचन की शक्ती और कोशल दोनो का वास्तवे कनुबहव कर सकें यानी सर्फ बताना नहीं है दिखाना है आँ, हम केवल ये नी बताना चाते की नायक ताकतवर है हम चाते है की पाटक उसकी ताकत और उस ताकत को आजमाने वाले खत्रे तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � उसकी अक्रामक्ता का एक आद वाख्यो में सजी वरनन करें जैसे कोई विज्योल इमेज बनाना अआ दिखाएए कि जब वो सूर दोडता है तो दरती कैसे कापती है उसके खुरों से कैसे दूल का गुबार उडता है और फिर छेछन के प्रतिक्रिया क्या होगी शायएद सूर के दाद छेचन के पास से गुजरे हो जिस से पाटख की दडगने तेज हो जाएं औरे वाआ, ये सुनकर ही रोमान्चक लग रहा है है ना, उसके बाद जब सूर दूसरी बार पलड़कर हमला करता है तब छेचन अपनी पार लोकेक शक्ती का प्रदर्षन करते हुए उसके पैर पकरता है और उसे चीर देता है ये चोटी सी खीच्तान ये एक या दोपल का संगर्ष उस एक वाके की तुलना में सो गुना अदेक प्रभाव पैदा करेगा ये बहुती व्यवारिक सुजाव है इस से ये सपष्ट होगा कि सूर वास्तम में आजेया ता जिस से चेचन की जीद का महत्वब बध जाएगा खेर चलिये अब उस हिससे को करीब से देकते है जाए चेचन बंस बिट्टी में प्रवेश करता है नायक छेचन महराज के चरित्र चित्रण में, विषेश्वृप से क्रिष्नाराम की बन्स्बिट्टी से बाँच काटने के प्रसंग में, उनके सहसे क्रित्ते की प्रियाना बहुत सतही और अस्पष्ट प्रतीथ होती है, मोड है. अद्याय छे में हम देकते है, की चेचन का विवाह पन्मा से हो चुका है. अब वो यादव लोग देवता क्रिषनाराम की बन्सभिट्टी में गूसकर बिना अनुमती के बारी मात्रा में बास काटता है. जो की एक बहुग बडा कदम है. बहुग बडा कदम है. लेकिन जब आलेक में इस इतने बड़े कदम का, कारन बताया जाता है तो लिखा है, शायद जीविका के आवशकता, वापनी पुरानी आदत. आए, यही सबसे बड़ी कमजोरी है, एक महान आया क्या लोग देफ्ता के लिए, महेज पुरानी आदत के कारन, इतना बडवन्गो मोल लेना उनके चरित्र की गमभीर्ता और गरीमा को एकदम से गड़ा देता है. जब बडवाग लिखा के पकष में सोचकर देखता हूँ. था पूरानी आदत कहना एक तरा का अलहडपन या नायक का स्वाग नहीं दिखाता? स्वाग किस तर है से? जेसे उसे परवाही नहीं कि क्रिष्नाराम कोन है वो बस अपनी मस्ती में बास काट रहे है किवकि उसे आददध है क्या ये उसे अदिक निदर नी बनाता? देखे, निदरता रहा हो ल्मुर्खता मे एक बारी क्रेखा होती है अगर आप एक शक्तीशाली सथ्ता से इसले तक्रा रहे हैं, कुके आपको बस आदत है, तो आप एक विद्रोही नायक नहीं, बलकी एक सामान ने अप्रादी, या एक गेर जिमबेदार व्यक्ती लकते हैं. रहा, खास कर तब जब उसकी नहीं नहीं शादी हुई है? अगर संदरब से जोड कर प्रस्थूट करे। यानी इसे एक नायक का उदेशे पूड कदम लगना चाहीए, नकी किसी सादारन भूल या हाददद का परिनाम। एक दम सतीक. पाटख को ये लगना चाहीए, के चेचन को पता है कि वो क्या कर रहा है. उसे इसके परनाम भी पता है, लेकिन फिर भी वो ये कर रहा है, क्योंकि उसके पास एक बहुत वी मजबूत कारन है. हमें ये महसुस होना जाएए, कि इस निरनै के पीछे एक ठोस वजग है, जिसके लिये वो अपने नेग रहस्त जीवन को भी दावपर लगाने को तगयार है. तो इसे सुदहारने के लिए लेक्हक क्या कर सकता है? क्या हमेसे अदिकार और विद्द्रोग के नजरीये से देख सकते है? कुकि मुझे याद है, आलेक मे कही प्रतागत अदिकारक ब्रम का जिक्र क्या गया है. बलकोल, यही वो जगा है जहां लेक हक बहुत बडया बडलाव कर सकता है. उदारन के लिए आप सपष्ट रूप से ये दर्षाखते हैं की दोम समदाय के लिए बास काटना उनका पारमपरिक अदिकार था जिसे क्रिशना राम की सथ्टाने शायग चील लिया था अच्छा तो वो आदत के कारन बास नहीं काट रहें? नहीं, वो क्रिश्ना राम की सत्ता को चुनाती देकर अपने समवदाय के उस पारमपर एक अदिकार को फिरसे स्तापित कर रहा है. इसे ब्रहम की बजाय एक द्रिड विष्वास या सचेट विद्रोग के रूप में लिखा जाना जाहीए. ये तो एक शान्दार आंगल है, ये छेचन को सरफ एक ताकत्वर वक्ती से उठाकर एक समवुदाय के मसीहा के रुपने स्थापित करता है. लेके न व्म्म्, क्या कोई और व्यक्तिगद आंगल भी हो सकता है? जैसे उसकी नहीं शादी को लेकर. आप दूस्रा बहुत नहीं मजबूत उदारन हो सकता है पनमा के सात उसकी नहीं ग्रियस्ती बस रही है आप येस पष्ट कर सकते है के पनमा के लिए नहीं ग्र बनाने या कोई विषेश मांगले कार्या पूरा करने के लिए चेचन को किसी विषेश प्रकार के बास के अट्यंत आवश्च्च्ताती थी और वो बास केवल क्रिशना राम की उसी बन्स विट्टी में मिलता हो आप देखे यहां दाओ बहुत उचे हो ग़े चेचन एक पती के रुप में अपनी जम्यदारी पूरी करने के लिए जान बूजकर ये बारी क्ष्ट्रा मोल ले रहा है ये उसे स्वार्ती नहीं बलकी एक समर पिद और निदर ग्रिहस्त बनाता है सही का जब आप यह सा करते हैं तो बास काटना केवल चोरी नहीं रही रहे जाता ये प्रेम, अदिकार, और सत्ता के किलाग अगाववत का एक मिलाजुला प्रतीक बन जाता है? तो इस सामगरी में चेचन लगातार नहीं और बडी सट्ताँ से तक्रारा है? आए, एक बादेक! पहले सूर के माद्धिम से फिर क्रिशना राम की बन सबिट्टी में और जब भास काटने का ये विद्रो हो सामने आता है, तो उस विद्रो हो को कुछलने के लिये क्रिशना राम का हाती सुबरन मेदान में उतरता है. लेकिन यही पर कता का सन्रचनात्मक धाचा पुरी तरा लगख़ा जाता है. आलेख का अंतिम बाग अपने चरम बिन्दूपर पहुचकर अचानक समाप्त हो जाता है जिस से पाटक एक बड़े और निरनायक धूंद के भीच मेही अनुतरित रहे जाता है अफ, ये एक बहुती गमभीर धाचागत कमजूरी है मैं कोंगी ये कहानी का सब से नाट की है और द्रिश्वान हिस्चा है. इक दंगदं क्लाईमच्वाला फील है? बलकुल. अद्ध्याय साथ में हम देकते है, की अट्यंट शक्तिषाली हाती सुब्रन चेचन की गर्दन पर उसी का पाज पसेरी का बारी कत्ता रग देता है, उसे अपने पेरो तले दबालेता है. ये एक मुद का शिकनजा है, पाथक की सांसे अटकी हूँई है. और फिर क्या होता है? और थीक इसी क्षन कहानी अचाना के चाराच मे बड़ल जाती है. एक वाख के आता है, गाता एच्ता एक ता नव मोड लेत अची, यानी गाता यहान एक नया मोड लेती है. अर कहानी वही रुग जाती है. पाटक ये जाने बना ही रहे जाता है, के चेचन ने इस असमबहु प्रतीट होने वाली स्तिती से खुद को कैसे निकाला. आप जा अम इसे एक ख्लिफ हैंगर कितरा नहीं ले सकते. बवद्खख अगले हिसे का इंतदार करें। शाएड लेखख यहां सस्पैंस पैदा करना चाहता हो। देखिख ख्लिफ्हांगर का भी अपना एक व्याक्रन होता है अच्छाख ख्लिफ्हांगर एक सबाल करता है लेकिन वो किसी द्रिष्य के बीच में अगर ये पाटख को ये पता हो ना चाहीए, कि ये कहानी केवल पहला बाग है, अभी जो अस्तिती है, वो क्लिफ आंगर कम और एक अदूरी चोडीग़ द्राफ्ट कोपी जाडा लकती है. ये अज़े सब पाटख को ये पता हो ना चाहीए, अगर ये क्लिफ आंगर है तु पाटख को ये पता हो ना चाएए, कि ये कहानी का केवल पहला बाग है, अभी जो स्तिती है, वो क्लिफ आंगर कम और एक अदूरी चोडी गई द्राफ्ट कोपी जाएए लकती है. ये अज़ा है ज़से कोई आपको कोई त्फिलर सूना रहा ह दाचे को संदूलित करने के लिए क्या किया जाना जाहीए? हमें पाथकों की अपेक्षाँ का प्रबंदन कैसे करना है? मेरा सुजाव यह है कि या तो शुर्वात मेही शपष्ट्रूप से पाथकों की अपेक्षाँ निरदारित करें. की यहे एक लंबी गाता का केवल प्रथम कहन्द है या फिर इस हाथी वाले धूंव का उचित और सन्तोष चनक निषकर्ष वर्त्मान आलेक मेही शामिल करें दोनो मेसे कोई एक रास्ता अपनाना ही होगा बिलकुल आप पाटख को अंदेरे में रक सकते ज़िल्ये दोनो विकल्पोंपर बात करते हैं मान लिजे अगर लेक्हक इसे पार्ट्वन फीर लेखना चाहता है तो उसे कहां और कैसे बडलाव करना चाहीं? यदि यह कहानी का पहला बहाग है तो प्रस्तावना मेही इस पफ्ष्ट किया जाना चाहीं लेक्हक लेक्ह की शुर्वात मेही एक पेरेग्राफ जोर सकता है जहां यह लिखा हो की यह आलेक चेचन के जीवन के पहले दो महान संगर्षों मनिक चंद और क्रिशना राम की सात की शुर्वात को दर्षाता है. इस से क्या होगा? अगर बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्दान बाद्द अद्वारा उठाया जाना और नायक की गरदन पर रखा जाना एक बहुत ही शक्तिषाली बिमब है. इसका समथान कहानी मेही होना चाहीए. तो इसका निषकरष कैसा दिक सकता है? चेचन उस हाती के पैर के नीचे से कैसे निकलेगा? अप यह यह सपष्ट कर सकते हैं कि चेचन ने अपनी अदम में इच्छा सकती और बहुबल से हाती के उस भारी पैर और कते के दबाव को कैसे दھकेला. या शायद हाती हुदी दर गया हो? आप ख्या उसके आखुं का क्रो देख कर सुबरन हाती पीछे हटक्या? या फिर चुंकी ये एक लोग गाता है, क्या किसी देवी हस्तक शेप से, वो कता हलका हो गया? या क्रिशनराम ने खोदाकर, चेचन की हिम्मत देकखर, हाती को पीचे हटने का आदेश दिया? इन में से कोई भी विकल्प हो सकता है? बिल्कुल इन में से कोई भी विकल्प हो वो एक पारग्राफ इस आलेख को एक समपूरन और यादगार रच्ना बनादेगा. जब आप एक नायक को इतनी बडी मुसीबत में डालते है. तो पाटक नायक की उस मुस्विबत से बाहर निकलने की चतूराई या ताकत को दिखने के लिए खाहनी पड़रहा होता है उसे इस से वनचित मत की जीए एक दम सही बात है तो सन्षेत में कहें तो इस पूरी रचना के प्रभाव को कईगुना बडाने के लिए तीन मुख्य बिंदोवापर कारे करना है बहला, चेट्या सूर के साथ होने वाले युध्द के दिश्ष्ष्टार करें सूर की आक्रामक्ता और चेचन के बचाव का वरनन करें ताकी रोमाच और तनाव चरम तक पहुचे तुस्रा, क्रिश्ना राम की बन्स्बिट्टी से बास काटने के पीछे चेचन की प्रिर्णा को अदिक ठोस बनाए. इसे महज एक पुरानी आदत बताने के बजाए समवुदाय के पारंपरेक अदिकार या ग्रिस्ति की आवशकता जैसे गेरे कारनो से जोडें. बिल्कुट और तीस्रा सुब्रन एठी वाले अदूरे क्लाईमैक्स को तीक करें या तो शुर्वाद में बतादें की यह सुब पहला बाग है या फिर अंट्मे स्पष्ट करें की चेचन ने उस एठी के शिकनजे से कुद को कैसे आजाद किया मैं कहोंगी के ये तीनो सुजाव आलीक की कतानात्मक सन्रच्ना और नायक के मनोवेग्यानिक चित्रन को उस तर पर लेजाएंगे जिसका ये विश्याइ सच्मे हक्दार है तो हम श्रोटा को आमन्त्रित करते हैं के वे इं सन्शुदनो को लागु करने के बाद अपने आलेख को पुने समिक्षा के लिए अवश्षे बेजें हमें ये देककर बहुत खुषी होगी कि इन बदलावों के बाद चेचन महराज की एगाता पाटकों के भीच कैसा दमाका करती है अपना काम साजा करने के लिए बहुत बहुत द्श्वाद

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