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राजा_सलहेसक_न्याय_आ_दबनाक_तंत्र.m4a
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- 0:00–0:13देबेट में आहा सब का स्वागत है ची, हमरा सब आई एक ता एहन गाता पर विमर्ष कर हल ची, मतलब, जेक्रा सुनेत हमरा सब पेग भेल ची, गजिंद्र ताकुर द्वारा समपादित राजा सलीजिस का अटिहासिक लोग काता.
- 0:13–0:18राजा सलेस यी बोद गमभीर और रोचक विशे आची.
- 0:18–0:23एक दम अब दिख हो, यी कता केवल एक ता व्यक्तिक जीवन नहीं आची.
- 0:23–0:27इसच्ता विद्रो हो अन्याय पर एक ता बहुत पैग्विमर्ष आची.
- 0:27–0:31हमर मानब आची, जे यी गाता आची ने,
- 0:31–0:37अगर अद रूप से सलीस इक स्वाभविग जन नित्रत्व अहुंकर अदम में न्याईप्रियता कता आची
- 0:37–0:41माने एक ता शोषित नायक विजैई
- 0:41–0:45मुद-ई की यी वास्तव में केवल सलेस कता आची
- 0:45–0:47हम्रत याय लगे तची
- 0:47–0:51अगर निने शम्ता और इस्त्री शक्ती कता आची
- 0:51–0:55अगर निने शम्ता और इस्त्री शक्ती कता आची
- 0:55–0:57अगर निने शम्ता और अज्ट्टी कता आची
- 0:57–1:01बलकी खुनकर प्रेमिका दबनाक तान्त्रिक समर्त के कता ची
- 1:01–1:05उकर निने शम्ता और इस्ट्री शक्ती कता ची
- 1:05–1:08दबनाक कता, मुदा सलेस तो केंद्र में चोथी ने
- 1:08–1:10केंद्र मैं देखायल गेल चेतिन
- 1:10–1:14मुदा सलेस के जन समर्तन उनका केवल संकत में पहसो लक
- 1:14–1:19बिना दबनाक लच्तच्छेप मदला उकर तन्त्र विद्या आवकर हत्के बिना
- 1:19–1:24सलहेस की गाता बहुत पहिनेक्ता दुखड अंत के प्राप्त बहगेल रहीते.
- 1:24–1:28आज्छा आव हम पहले सलहेस उही नेटिक शक्ती के,
- 1:28–1:32उनकर उही जन समर्ठन के तैनी नीगजका भुजवाग परयास करे
- 1:32–1:35सलहेस मुरंग मे रहे चला, बुजलो ने
- 1:35–1:38उकोनो राज सिनहासन पर नहीं बैसल चला हा
- 1:38–1:40मुदा उचला हा मों कराजा
- 1:40–1:42रहा हा, मों कराजा, बलकुल
- 1:42–1:44इकोनो सादारन बात नहीं आची
- 1:44–1:53तत्कालीं सामन्ती समाज में, जते जाती के आदार पर मनुश्विक स्थान तैहोई चल, जते एक्ता दूसाद के केवल पहरेदारी काज देल जाई चल,
- 1:53–1:59उते एक्ता दूसाद सिपाही के लोग अपना हर्दै में राजा कस्थान्दा रहल अची.
- 1:59–2:00सही बात अची मुदा
- 2:00–2:03मुदा इजन समर्तन कोनो तर्वारेक दरसी नहीं आईल चल
- 2:03–2:09इहूंकर निष्छलता, प्रजाके प्रतिहूंकर करूना, अन्याई प्रियता समवपजल चल
- 2:09–2:14इगाता वास्तव में सत्ता प्रतिष्टान और एकता जन नायक क उबारक भीच के
- 2:14–2:23उही मान संगर्षक कता जदे सामन्ती आहिंकार के एक ता सोषित वर्ग नायक अपन चरित्रग बल परभाजित करते चे.
- 2:23–2:26इस सूने में तब भडा आदर्ष्वादी लागी तचे.
- 2:26–2:31मुदा यदार्थ वादी द्रिष्टी से देकि, ता इजन समर्तन हुनका कते लोगे लो.
- 2:31–2:34चलेस कनेटिकता निश्चे ही प्रशंस निया चे.
- 2:34–2:38मुदा उनेटिकता हुनका केवल निर्वासन जेल दरी लोगे लू.
- 2:38–2:42निर्वासन्दरी लोगेल मुदा उ जूकी नहीं गेला
- 2:42–2:43उने जूकला थीक अचे
- 2:43–2:48मुदा सले सक उ मान विद्रो उ उनका वेवस्तापर विजेने दर हल चल
- 2:48–2:52कताक वास्त्वक चालक शकती मतलब जे गतिकारक शकती आचे
- 2:52–2:53उत दबना आचे
- 2:53–2:57जखन्सलेस मोरंग चोडी मुंगेर जारहल चला तकन दबनाकी के लक
- 2:57–2:59ओ उनकार सर्दार बनुला
- 2:59–3:00एक दम
- 3:00–3:03ओ आपन कम्रो कमाख्यक तान्तरिक विद्याक प्रयोग कै
- 3:03–3:06उनका साथ सो सिपाहिक सर्दार बनवाईता चे
- 3:06–3:13अफिर जक्ण सलेस के जुथा आरोप में जेल पठाए जाईता चे, तकन हुनकार नैतिक्ता उनका बाहर ने निकाली पाभेता चे.
- 3:13–3:17मुदा हुनकर नैतिक्ता रेंका जन समर्ठन्त देलक.
- 3:17–3:19जन समर्ठन्त सा जेल सतर नहीं निकला ला है,
- 3:19–3:26सत्त्त के उजागर करवाक लेल दबनाक के काली मन्दिर में भूद प्रेत के बयानक सादना करे पडेत अची.
- 3:26–3:31इगाता दबनाक बारा बरस का हत अगर अदम् मिसामर्ठ का ची,
- 3:31–3:35जकरा हमरा सब केवल एक ता प्रेमिका क्रुप में नहीं देखी सगेची.
- 3:35–3:37उ एही कता में आसल किंग मेकर अची
- 3:37–3:38मुदा रुकु
- 3:38–3:41दबनाक किंग मेकर कुना बनी गेली
- 3:41–3:44उकर आदारत सलहेस को जना नमोदनाई चलने
- 3:44–3:46तनी सुचु
- 3:46–3:48जखन तालुगदार नवरंगी बहादुर तापा
- 3:48–3:52सलहेस के दरबार में बजाका इआदेश दिलनी
- 3:52–3:57जे आहा इे राजा उपादी चोडी दियों, तो उजी समे सलहेस को उतर की चल?
- 3:57–4:00उखाला जे लोग के कुना मना करभेक?
- 4:00–4:06आँ उखाला जे लोग के कुना मना करभेक, लोग क मोंजे उखकरा की बजावत.
- 4:06–4:08इस समवाद सामान ने नहीं अची.
- 4:08–4:14इदेखा बैट अचीजे सलहेसके अपन शक्तिक भान चल, तापा के सलहेसक कोनो हतिहारस सदरनेचल,
- 4:14–4:16तब कडरस सदरचल,
- 4:16–4:23हुनका दरचल, सलहेसक, उही स्वाबहवी गुद्वा कर्शनसा जकर कारन चन्ता हुनकार संगे चलिन,
- 4:23–4:29सलहेसक उशान्त विद्रू मतलप जदे उ थापास लड़ेत नई चठीन,
- 4:29–4:34मुदा हसी का नुक्री चोडी मुंगेर जेबाकलेल तयार भजाएच चठीन.
- 4:34–4:37इस सामन्ती विवस्तापर एक तक करारा प्रहार आची.
- 4:37–4:39उ मानी लेल हू, मुदा.
- 4:39–4:45इजन समर्तनक उही शान्त नदी जका जी जक्रा कोनो सत्ता बान दिने सके तची
- 4:45–4:50मुदा एते आहा एक तपेग बात भीसरी रहल ची उशान्त नदी के बान्धल गेल
- 4:50–4:51कोना बान्धल गेल
- 4:51–4:56तालुक्दारक आंकार सलहेस कोही शान्त विद्रो के कुछली देलक
- 4:56–4:59सलहेस के निरुत्तर भा नोक्री चोडे पराल,
- 4:59–5:02हुंकर उ जन समर्तन तालुक्दारक निरने के बदलीने सकल.
- 5:02–5:05सलहेस तपराजित भा के मुंगेर जारल चलाने?
- 5:05–5:08उ पराजित नहीं, उ सवच्छा सजारल चलाने.
- 5:08–5:11मुदाजे पीच में दबना नहीं अभई ताकी होईत.
- 5:26–5:29कारनो मालीं चली, अखरालक दो सरपाई नहीं चल?
- 5:29–5:30बलकल.
- 5:30–5:32कारन अँ मालीन अची,
- 5:32–5:34उहो समाजक हासीए पर अची.
- 5:34–5:37अखर पास तालुगदार जका सेना नहीं अची,
- 5:37–5:39न्याले नहीं अची.
- 5:39–5:41एक ता एस्त्रीक लेल,
- 5:41–5:56अद्रामन्ती विवस्ता अप्पुरुश्वादी सत्ता सलरभाक एक मात्र अस्त्र उ तान्त्रिक विद्या ची, उ अलोकिक सक्ती अची, सल्हेसक जन समर्तन हुनका सत्ता नही देलक, दबनाक उही तान्त्रिक बाल हुनका दर्वार में सर्दार बनो लक.
- 5:56–5:59तीकची दबना हस्तक्षीःप केलक हम मानेत ची
- 5:59–6:02मुदा के है हा उही दर्बारी स्ड्यान्तरक सुरूप के नहीं देखभ
- 6:02–6:05जिस सलहेस के उठान कारन रचल गेल
- 6:05–6:07कोन स्ड्यान्त्र? चूहडमल वला?
- 6:07–6:10हा खताक मद्ध्यमे जिद वंदो आची
- 6:10–6:18जखन चूहन मल, नालाक के रामिक हार चोरा का सलहेस की गिर्वा में नुका देता ची, उक्की आची, उकोनो सामाने चोरी नही आची.
- 6:18–6:21मुदा उकर कारन सलहेसक उठान नहीं चल.
- 6:21–6:28आह, सुनु तबहले, उएक ता शोषित मुदा योग ये सिपाहिक उत्ठानक विरुद्ध, इर श्यालू सत्ता कुचक्रा आचे.
- 6:28–6:33सलेसक पवित्रता अततकालीन दर्बारी भ्रष्टचारक भीचक इसीदा संगर्ष आचे.
- 6:33–6:43इए उई बात की प्रमान आचे, जगन कोन उमान्दार व्यक्ती विषेशकर निचुल का तबकासु उपर उठे तची, तव्यवस्ता उक्रा जुता आरोप में फ्फसावे तचे.
- 6:43–6:54आजकनो हार सलेशक उचेन समभेते तची तची सलेस कुलाहल नहीं करे चतीन उ मून रहे चतीन
- 6:54–7:00सलेसक मून औकर सहन्सीलता उही ब्रष्टा चारक अगा एक तनेटिक दर्पन अची
- 7:00–7:05उजाने चतीन जि समनती नयाय वेवस्ता हुनक नयाय नहीं देत
- 7:05–7:11अम एही निसकर सा भलकोल सहमत नहीं ची, मतलब यहा बड़े एक तरफा सोची रहल ची.
- 7:11–7:15आई इब तावल जाओ जे चूफ़ड मल इसच्ट्यान्त रच्लक की एक.
- 7:15–7:18की ओग केओल सलेस की इमान्दारी से ड़ारेल चल?
- 7:18–7:20ता आरो की कारन भूसकट अचे?
- 7:20–7:24अपन जादुक प्रभाप्सा चूव़्वल के हथाक,
- 7:24–7:28शलेस के सर्दार बनोलक, तक्हनो ध्वंद का भीज भोल गिल,
- 7:28–7:31चूव़्वलक अर्षाक मुख्छ कारन,
- 7:31–7:35शलेस के इमान्दारी नहीं, अपन जादूक प्रभाप्सा चूव़्वल के हथाक,
- 7:35–7:38तुरहा बारह बरस तोरा लेल आचर बनलों
- 7:38–7:42आआ आपन जादुक प्रभापसा चूह़ मलके हताक
- 7:42–7:44सलहेस के सरदार बनोलक
- 7:44–7:46तक्हनो द्वंद का भीज भोलगिल
- 7:46–7:48चूह़ मलक इर्षाक मुख्छ कारन
- 7:48–7:50सलहेस के इमान्दारी नहीं
- 7:50–7:54बलकी दबना दवारा केल्यल ओकर अप्माँजनक निस्काशन चल
- 7:54–7:57आहात पूरा दोस दबना प्रदार आल ची
- 7:57–7:59दोश नाए, सामर थी कहो एकला
- 7:59–8:06एत बे नाए, कठाक प्रारंभ में राजाक वएद्ध्याक आत्महत्या की अगभेल
- 8:06–8:08दबनाक अस्विक्रितिक कारनस्सव
- 8:20–8:24सलहेस ते पूरा सत्रंज पर मात्र एक ता महरा जका लागे च्छतिन
- 8:24–8:28महरा यत बहुत भेशी भागेल
- 8:28–8:29आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ
- 8:29–8:32जक्रा दबनाक आपन ही साप सा आगु पाछु कोर हल आची
- 8:32–8:38उआदम या इच्छा शक्ति आची जगन उजेल मेच अठीन तक टी ओ शमा मागगए चच्छती
- 8:38–8:42की ओ दरबार का आगा गिडगिडाई बई च्छती
- 8:42–8:44आई शमा ता नहीं मागगए च्छती
- 8:44–8:47दिलकु नहीं उआपन शत्टी पर अदिक च्छती
- 8:47–8:53तक तक यो शमा मागछ चत्छति, कि यो दरबार का अगा गिडगिडाईवाई चत्छति?
- 8:53–8:55नहीं, शमात नहीं मागछ चत्छति
- 8:55–8:59यलकल नहीं, उआपना सत्टिः पर अदिक चत्छति,
- 8:59–9:03चुडल मनक शद्यन्त्र सलहेस के चारित्रिक द्रिर्ताक परिक्षा आची,
- 9:03–9:08आई ई परिक्षा सलहेस आपना सहन शीलता सा पास करे चती
- 9:08–9:10अनतता विजेक अकर होई तची
- 9:10–9:12सलहेस जेल सचुते चती
- 9:12–9:14चुडल मल के जेल होई तची
- 9:14–9:16मुदा उ जेल सचुतला कोना
- 9:16–9:17इत छे
- 9:17–9:21सलहेस कोरनैतिक शकती स्वेम में एक ता एहन गुरुट्वा कर्शन्चल
- 9:21–9:31ज़र्बारी कुचक्रके चिन्न भिन्न का दिलक, समाज उही सलहेस के स्विकार के लक, जच्रालोक आएदरी सलहेस गीट के रुप में गववैत अचे.
- 9:31–9:35मुदा हुंकर, उसहन शिलता हुंका जिल से बाहर नहीं निकाललना,
- 9:35–9:39सत्ते आपन मारक स्वयम नहीं कौजलके ही कता में,
- 9:39–9:43सत्ते के अंद्यारे गरत से बाहर निकालबाक लेल बाद्ध कायल गेल,
- 9:43–9:46आहाक ताटपर ये उही तन्त्र साथना से अची.
- 9:46–9:59एक्दम, आहाज ख़ेच्छी जे सलहेस को न्याई प्रियताक अन्तिम जीद भेल, तो उजीद कोनो भेल, की चूहर्मल के सलहेस को नईतिक्ता देख के गिलानी भेल चल, की दर्बारा के रूदेपरिवर्तन भोगेल चल,
- 9:59–10:03रद़ई परिवर्तन नहीं भेल, मुदा सत्तित सुजहा आईल?
- 10:03–10:04बिलकु नहीं.
- 10:04–10:09चूहर्मल सत्तितकन बजल, जगन उक्रा अलोकिक यातना देल गेल.
- 10:09–10:12दबना काली मंदिर में जे तंत्र सादना के लग,
- 10:12–10:16उही भूद प्रेत का प्रहार सा चूहरमल खून भोकरे लागल
- 10:16–10:19उभ्हायंकर आमानविय यातना चल
- 10:19–10:22मुदा उव्यातना न्याय लेल चलने
- 10:22–10:27अ, मुदा इं न्याय कोनो सत्यक स्वाबहाविक प्रकती करन न्याय चल
- 10:27–10:30इदबनाक क्रूर तान्तरिक शक्तिक परनाम चल
- 10:30–10:44बिना स्तुरी शक्तिक, लग्ष्तक, अद्तन्त्र विद्याक, प्रहारक, इस सत्यक, विजे असमबग्च्छल, न्याय के यतार्ठ्ट में परनत करबाक, जे व्यभाभारिक शक्तिचल, उदबनाक, रड्च्चल, सलेसक, मुन न नहीं.
- 10:44–11:00देखो हम इी मानत चीए, जे सादन दबनाक चल, तन्त्र विद्या दबनाक चली, मुदा साद्देकी चल, साद्देचल, सलेसक, उही नयायके अस्तापिद करव, असप्सन महतो पुन प्रष्न आहाई विचार करू, जे दबना इी सब कीे के लक.
- 11:00–11:02अपन प्रेम के लेल
- 11:02–11:05आहां दबनाके एक ता सुतन्त्र किंग मेकर बतार हैल ची
- 11:05–11:09मुदा उ बारा बरक दरी आचर भानी का कभड प्रतिक्षा कर हैल चली
- 11:09–11:14एक ता आहें पुरुषके जे अपन प्रजाक सेवा में एतेक लिन चल
- 11:14–11:17उक्रा व्यक्तिगत प्रेमक दरी द्यान नहीचल,
- 11:17–11:21सलेसक उनिष्छल स्वरूब समाजके प्रती हूंकर करूना,
- 11:21–11:23उही तदबनाके प्रेरित के लक?
- 11:23–11:25प्रेरना देबेक्त बात अची मुदा
- 11:25–11:32सलहेसक چरित्र काकर्षन, बिना दबनाक इदपस्या कोनो अर्ध नेरखेत अचे.
- 11:32–11:39तन्त्र विद्या एक ता सादन अचे, मुदा उईजि सादन के प्रयुक्त करबाक लेलजे प्रेरना चाही,
- 11:39–11:43उस सलहेसक आदर्ष चरित्र साथ अबई टचे.
- 11:43–11:51चखन अंतत सलेज छुटे चथे अदून्नुक विवा होईत अची, तो उ केवल दूई व्यक्तिक मिलन नहीं अची.
- 11:51–11:52तकी अची यो.
- 11:52–11:58उ सलहे सक जननेत्रुठ्वा अददबना को ही तान्त्रिक शक्तिक एकी करन अची.
- 11:58–12:02तन्त्रविद्याग भिना सलहे सक नैटिक्ता पुरन नैभहिल,
- 12:02–12:04मुदा सलहे सक नैटिक्ता भिना,
- 12:04–12:07उ तन्त्रविद्याग कोनो लक्षे नैच्जल.
- 12:07–12:10अम सलहे सक गुर्त्वाकर्षन के नकारी नहीं रहल ची.
- 12:10–12:12मतलव, उ महान चला.
- 12:12–12:16अगरा केवल सहायक या प्रेरना कैई के चोट कदेची
- 12:16–12:19हम दबनाग के चोट नेक अरहल ची
- 12:19–12:24अगरा केवल प्रेरत नीब हैल चली ओए अईस्तिती प्रस्तिती के नीआन्त्रत करहल चली
- 12:24–12:29तालुग्दार थापा सलहेस्छन जन समर्ठन चाँप अगरा प्रेरना
- 12:29–12:30कै के چھोट कदेची
- 12:30–12:33हम दबनाग के चोट नै करहल ची
- 12:33–12:35दबनाग के वल प्रेड़्त नीभहेल चलीो
- 12:35–12:38उइ स्तिती परस्तिती के नीएंट्रित करहल चली
- 12:38–12:40तालुग्दार थापा
- 12:40–12:43सलहेस चन जन समर्तन चीने चाहत चलय
- 12:43–12:45दबना अख्रा प्रतिक्ष सत्ता देदलक
- 12:45–12:50दर्बारी भ्रष्टा चार अक्रा जेल में बन्गलक, दबनक तंत्र अक्रा बाहर निकाल लक.
- 12:50–12:54अई समें अक्र तंत्र ही एक मात्र उपाए शिलो.
- 12:54–12:58इक दम सलहेस कजन समर्तन हुँँँक राजा जरूर बनावलक
- 12:58–13:01मुदद दबनाक विद्या हुँँक वास्त्विक सन्सार में
- 13:01–13:03उस सम्मान दिलायलक जक्रो रगदार चला
- 13:03–13:07आहाजे तन्तर के केवल एक ता सादन कही राल ची
- 13:07–13:11वास्त्विक में उई समयक सोषित वर्के स्त्रीक एक मात्र सामर्त चल,
- 13:11–13:14जकर प्रियोग सा उन्याय सुलप का सके चली.
- 13:14–13:18आई बात त बिलकुल सत्ते आची,
- 13:18–13:23जे राजा सलहेस कलोक गाता कते कुस्तर पर अपन आर्ट खोले तची.
- 13:23–13:35आई जक्शन मोरंग आमित्छला कान्चल मैं सलेस गितक दून उठाई तची, तब लोकी कही तची, यह वहे सलेस चिती, जे मन्सा राजा चला आमोने रहता है, राजा सलेस.
- 13:35–13:37आ, उगी ज़ सब बहत प्रसेद आची.
- 13:37–13:47दूसात समाज में सलहे सक जे जिक्त विषेश थान अचे उंकर उही शूशित प्रष्ट बूमे अन्न्याए प्रिय चरिट्र कारन अचे
- 13:47–13:55उईक ता एहन नायक छतीन जातिक सीमा के पार कजंताक रिदैसा राजाक उपादिपालनी
- 13:55–13:59उनकरी विजै, सामन्ती एहंकारक मुहतोर जवाब अची
- 13:59–14:06आई दिखावे तचे, जे नैतिक शक्ती कत्तिक व्यापक अखाल जैई भहुऽ सकटचे
- 14:06–14:11असंगे संग जखनम होई लोक गीट के दिहान सा सूनेच्छी
- 14:11–14:18ता हम्रा दबनाक उ बारा बरक धपस्या, उ कम्या कविद्या, आवकर हद्से हो स्पष्ट सूनाई देता ची.
- 14:18–14:21एक दम उख्रा भिस्रल नहीं जासके तचे.
- 14:21–14:28दबनाक उ इस्त्रिक प्रती कची, जे अपन अदिकार अप्रेम के लिल संसारक सब सक्फ्रूर शक्ती से,
- 14:28–14:33मतलब, दर्बारी शड्यन्त्र सलै का, अलोकिक शक्तिदरी लडी सकैता ची.
- 14:33–14:37न्याय अप्रेम के शक्तिष्टी सलहे सक चरित्रिक विषेष्ता आची.
- 14:37–14:43मुदा, उही न्याय के यतार्त में परनत करवा कजे भ्यवावारिक शक्ति आची, उदबनाक का ची.
- 14:43–14:47ये दूनु पक्ष मिली का एक गात्ठा के इत्टिक शक्तिषाली बने बैटची
- 14:47–14:56बिल्कुल, बिल्कुल, एक गात्ठा एक चात जन समर्ठनक उशान्त नदी अ दबनाक उतान्त्रिक बाडेख संगम अची
- 14:56–15:01तुन्नु मिले का उही सामन्ती विवस्ताक आहिंकारक के पकाली देलक
- 15:01–15:02सही कालू आहा
- 15:02–15:07जते एक तिस मान आद्धेर एक ता पैग अस्तर छे
- 15:07–15:10उते दोसर दिस अन्याय विरुद लडवाक लिल
- 15:10–15:14सक्करी अस्तक शेप आश्क्तिक आवष्क्ता सोहो ही तचे
- 15:14–15:17बले ही उ शक्ति तन्त्रक रूप में केख नहोए
- 15:17–15:20आप दून्नु पक्षक अपन अपन महत्व आची
- 15:20–15:23एक रक खोनो एक दिसा नहीं मोडल जासकेद शी
- 15:23–15:26आस्ली शक्ति सिहासन पर बैस्वाक अदिकार में आची
- 15:26–15:31अगरा पाविक लेल, काईल येल अद्रिष्य संगर्ष अ संकल्प में
- 15:31–15:36एही विचारसा हम्रा सवाई विदालेव दर दिबेट से जुदबा क्लिल दन्नेवाद
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देबेट में आहा सब का स्वागत है ची, हमरा सब आई एक ता एहन गाता पर विमर्ष कर हल ची, मतलब, जेक्रा सुनेत हमरा सब पेग भेल ची, गजिंद्र ताकुर द्वारा समपादित राजा सलीजिस का अटिहासिक लोग काता. राजा सलेस यी बोद गमभीर और रोचक विशे आची. एक दम अब दिख हो, यी कता केवल एक ता व्यक्तिक जीवन नहीं आची. इसच्ता विद्रो हो अन्याय पर एक ता बहुत पैग्विमर्ष आची. हमर मानब आची, जे यी गाता आची ने, अगर अद रूप से सलीस इक स्वाभविग जन नित्रत्व अहुंकर अदम में न्याईप्रियता कता आची माने एक ता शोषित नायक विजैई मुद-ई की यी वास्तव में केवल सलेस कता आची हम्रत याय लगे तची अगर निने शम्ता और इस्त्री शक्ती कता आची अगर निने शम्ता और इस्त्री शक्ती कता आची अगर निने शम्ता और अज्ट्टी कता आची बलकी खुनकर प्रेमिका दबनाक तान्त्रिक समर्त के कता ची उकर निने शम्ता और इस्ट्री शक्ती कता ची दबनाक कता, मुदा सलेस तो केंद्र में चोथी ने केंद्र मैं देखायल गेल चेतिन मुदा सलेस के जन समर्तन उनका केवल संकत में पहसो लक बिना दबनाक लच्तच्छेप मदला उकर तन्त्र विद्या आवकर हत्के बिना सलहेस की गाता बहुत पहिनेक्ता दुखड अंत के प्राप्त बहगेल रहीते. आज्छा आव हम पहले सलहेस उही नेटिक शक्ती के, उनकर उही जन समर्ठन के तैनी नीगजका भुजवाग परयास करे सलहेस मुरंग मे रहे चला, बुजलो ने उकोनो राज सिनहासन पर नहीं बैसल चला हा मुदा उचला हा मों कराजा रहा हा, मों कराजा, बलकुल इकोनो सादारन बात नहीं आची तत्कालीं सामन्ती समाज में, जते जाती के आदार पर मनुश्विक स्थान तैहोई चल, जते एक्ता दूसाद के केवल पहरेदारी काज देल जाई चल, उते एक्ता दूसाद सिपाही के लोग अपना हर्दै में राजा कस्थान्दा रहल अची. सही बात अची मुदा मुदा इजन समर्तन कोनो तर्वारेक दरसी नहीं आईल चल इहूंकर निष्छलता, प्रजाके प्रतिहूंकर करूना, अन्याई प्रियता समवपजल चल इगाता वास्तव में सत्ता प्रतिष्टान और एकता जन नायक क उबारक भीच के उही मान संगर्षक कता जदे सामन्ती आहिंकार के एक ता सोषित वर्ग नायक अपन चरित्रग बल परभाजित करते चे. इस सूने में तब भडा आदर्ष्वादी लागी तचे. मुदा यदार्थ वादी द्रिष्टी से देकि, ता इजन समर्तन हुनका कते लोगे लो. चलेस कनेटिकता निश्चे ही प्रशंस निया चे. मुदा उनेटिकता हुनका केवल निर्वासन जेल दरी लोगे लू. निर्वासन्दरी लोगेल मुदा उ जूकी नहीं गेला उने जूकला थीक अचे मुदा सले सक उ मान विद्रो उ उनका वेवस्तापर विजेने दर हल चल कताक वास्त्वक चालक शकती मतलब जे गतिकारक शकती आचे उत दबना आचे जखन्सलेस मोरंग चोडी मुंगेर जारहल चला तकन दबनाकी के लक ओ उनकार सर्दार बनुला एक दम ओ आपन कम्रो कमाख्यक तान्तरिक विद्याक प्रयोग कै उनका साथ सो सिपाहिक सर्दार बनवाईता चे अफिर जक्ण सलेस के जुथा आरोप में जेल पठाए जाईता चे, तकन हुनकार नैतिक्ता उनका बाहर ने निकाली पाभेता चे. मुदा हुनकर नैतिक्ता रेंका जन समर्ठन्त देलक. जन समर्ठन्त सा जेल सतर नहीं निकला ला है, सत्त्त के उजागर करवाक लेल दबनाक के काली मन्दिर में भूद प्रेत के बयानक सादना करे पडेत अची. इगाता दबनाक बारा बरस का हत अगर अदम् मिसामर्ठ का ची, जकरा हमरा सब केवल एक ता प्रेमिका क्रुप में नहीं देखी सगेची. उ एही कता में आसल किंग मेकर अची मुदा रुकु दबनाक किंग मेकर कुना बनी गेली उकर आदारत सलहेस को जना नमोदनाई चलने तनी सुचु जखन तालुगदार नवरंगी बहादुर तापा सलहेस के दरबार में बजाका इआदेश दिलनी जे आहा इे राजा उपादी चोडी दियों, तो उजी समे सलहेस को उतर की चल? उखाला जे लोग के कुना मना करभेक? आँ उखाला जे लोग के कुना मना करभेक, लोग क मोंजे उखकरा की बजावत. इस समवाद सामान ने नहीं अची. इदेखा बैट अचीजे सलहेसके अपन शक्तिक भान चल, तापा के सलहेसक कोनो हतिहारस सदरनेचल, तब कडरस सदरचल, हुनका दरचल, सलहेसक, उही स्वाबहवी गुद्वा कर्शनसा जकर कारन चन्ता हुनकार संगे चलिन, सलहेसक उशान्त विद्रू मतलप जदे उ थापास लड़ेत नई चठीन, मुदा हसी का नुक्री चोडी मुंगेर जेबाकलेल तयार भजाएच चठीन. इस सामन्ती विवस्तापर एक तक करारा प्रहार आची. उ मानी लेल हू, मुदा. इजन समर्तनक उही शान्त नदी जका जी जक्रा कोनो सत्ता बान दिने सके तची मुदा एते आहा एक तपेग बात भीसरी रहल ची उशान्त नदी के बान्धल गेल कोना बान्धल गेल तालुक्दारक आंकार सलहेस कोही शान्त विद्रो के कुछली देलक सलहेस के निरुत्तर भा नोक्री चोडे पराल, हुंकर उ जन समर्तन तालुक्दारक निरने के बदलीने सकल. सलहेस तपराजित भा के मुंगेर जारल चलाने? उ पराजित नहीं, उ सवच्छा सजारल चलाने. मुदाजे पीच में दबना नहीं अभई ताकी होईत. कारनो मालीं चली, अखरालक दो सरपाई नहीं चल? बलकल. कारन अँ मालीन अची, उहो समाजक हासीए पर अची. अखर पास तालुगदार जका सेना नहीं अची, न्याले नहीं अची. एक ता एस्त्रीक लेल, अद्रामन्ती विवस्ता अप्पुरुश्वादी सत्ता सलरभाक एक मात्र अस्त्र उ तान्त्रिक विद्या ची, उ अलोकिक सक्ती अची, सल्हेसक जन समर्तन हुनका सत्ता नही देलक, दबनाक उही तान्त्रिक बाल हुनका दर्वार में सर्दार बनो लक. तीकची दबना हस्तक्षीःप केलक हम मानेत ची मुदा के है हा उही दर्बारी स्ड्यान्तरक सुरूप के नहीं देखभ जिस सलहेस के उठान कारन रचल गेल कोन स्ड्यान्त्र? चूहडमल वला? हा खताक मद्ध्यमे जिद वंदो आची जखन चूहन मल, नालाक के रामिक हार चोरा का सलहेस की गिर्वा में नुका देता ची, उक्की आची, उकोनो सामाने चोरी नही आची. मुदा उकर कारन सलहेसक उठान नहीं चल. आह, सुनु तबहले, उएक ता शोषित मुदा योग ये सिपाहिक उत्ठानक विरुद्ध, इर श्यालू सत्ता कुचक्रा आचे. सलेसक पवित्रता अततकालीन दर्बारी भ्रष्टचारक भीचक इसीदा संगर्ष आचे. इए उई बात की प्रमान आचे, जगन कोन उमान्दार व्यक्ती विषेशकर निचुल का तबकासु उपर उठे तची, तव्यवस्ता उक्रा जुता आरोप में फ्फसावे तचे. आजकनो हार सलेशक उचेन समभेते तची तची सलेस कुलाहल नहीं करे चतीन उ मून रहे चतीन सलेसक मून औकर सहन्सीलता उही ब्रष्टा चारक अगा एक तनेटिक दर्पन अची उजाने चतीन जि समनती नयाय वेवस्ता हुनक नयाय नहीं देत अम एही निसकर सा भलकोल सहमत नहीं ची, मतलब यहा बड़े एक तरफा सोची रहल ची. आई इब तावल जाओ जे चूफ़ड मल इसच्ट्यान्त रच्लक की एक. की ओग केओल सलेस की इमान्दारी से ड़ारेल चल? ता आरो की कारन भूसकट अचे? अपन जादुक प्रभाप्सा चूव़्वल के हथाक, शलेस के सर्दार बनोलक, तक्हनो ध्वंद का भीज भोल गिल, चूव़्वलक अर्षाक मुख्छ कारन, शलेस के इमान्दारी नहीं, अपन जादूक प्रभाप्सा चूव़्वल के हथाक, तुरहा बारह बरस तोरा लेल आचर बनलों आआ आपन जादुक प्रभापसा चूह़ मलके हताक सलहेस के सरदार बनोलक तक्हनो द्वंद का भीज भोलगिल चूह़ मलक इर्षाक मुख्छ कारन सलहेस के इमान्दारी नहीं बलकी दबना दवारा केल्यल ओकर अप्माँजनक निस्काशन चल आहात पूरा दोस दबना प्रदार आल ची दोश नाए, सामर थी कहो एकला एत बे नाए, कठाक प्रारंभ में राजाक वएद्ध्याक आत्महत्या की अगभेल दबनाक अस्विक्रितिक कारनस्सव सलहेस ते पूरा सत्रंज पर मात्र एक ता महरा जका लागे च्छतिन महरा यत बहुत भेशी भागेल आआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआआ जक्रा दबनाक आपन ही साप सा आगु पाछु कोर हल आची उआदम या इच्छा शक्ति आची जगन उजेल मेच अठीन तक टी ओ शमा मागगए चच्छती की ओ दरबार का आगा गिडगिडाई बई च्छती आई शमा ता नहीं मागगए च्छती दिलकु नहीं उआपन शत्टी पर अदिक च्छती तक तक यो शमा मागछ चत्छति, कि यो दरबार का अगा गिडगिडाईवाई चत्छति? नहीं, शमात नहीं मागछ चत्छति यलकल नहीं, उआपना सत्टिः पर अदिक चत्छति, चुडल मनक शद्यन्त्र सलहेस के चारित्रिक द्रिर्ताक परिक्षा आची, आई ई परिक्षा सलहेस आपना सहन शीलता सा पास करे चती अनतता विजेक अकर होई तची सलहेस जेल सचुते चती चुडल मल के जेल होई तची मुदा उ जेल सचुतला कोना इत छे सलहेस कोरनैतिक शकती स्वेम में एक ता एहन गुरुट्वा कर्शन्चल ज़र्बारी कुचक्रके चिन्न भिन्न का दिलक, समाज उही सलहेस के स्विकार के लक, जच्रालोक आएदरी सलहेस गीट के रुप में गववैत अचे. मुदा हुंकर, उसहन शिलता हुंका जिल से बाहर नहीं निकाललना, सत्ते आपन मारक स्वयम नहीं कौजलके ही कता में, सत्ते के अंद्यारे गरत से बाहर निकालबाक लेल बाद्ध कायल गेल, आहाक ताटपर ये उही तन्त्र साथना से अची. एक्दम, आहाज ख़ेच्छी जे सलहेस को न्याई प्रियताक अन्तिम जीद भेल, तो उजीद कोनो भेल, की चूहर्मल के सलहेस को नईतिक्ता देख के गिलानी भेल चल, की दर्बारा के रूदेपरिवर्तन भोगेल चल, रद़ई परिवर्तन नहीं भेल, मुदा सत्तित सुजहा आईल? बिलकु नहीं. चूहर्मल सत्तितकन बजल, जगन उक्रा अलोकिक यातना देल गेल. दबना काली मंदिर में जे तंत्र सादना के लग, उही भूद प्रेत का प्रहार सा चूहरमल खून भोकरे लागल उभ्हायंकर आमानविय यातना चल मुदा उव्यातना न्याय लेल चलने अ, मुदा इं न्याय कोनो सत्यक स्वाबहाविक प्रकती करन न्याय चल इदबनाक क्रूर तान्तरिक शक्तिक परनाम चल बिना स्तुरी शक्तिक, लग्ष्तक, अद्तन्त्र विद्याक, प्रहारक, इस सत्यक, विजे असमबग्च्छल, न्याय के यतार्ठ्ट में परनत करबाक, जे व्यभाभारिक शक्तिचल, उदबनाक, रड्च्चल, सलेसक, मुन न नहीं. देखो हम इी मानत चीए, जे सादन दबनाक चल, तन्त्र विद्या दबनाक चली, मुदा साद्देकी चल, साद्देचल, सलेसक, उही नयायके अस्तापिद करव, असप्सन महतो पुन प्रष्न आहाई विचार करू, जे दबना इी सब कीे के लक. अपन प्रेम के लेल आहां दबनाके एक ता सुतन्त्र किंग मेकर बतार हैल ची मुदा उ बारा बरक दरी आचर भानी का कभड प्रतिक्षा कर हैल चली एक ता आहें पुरुषके जे अपन प्रजाक सेवा में एतेक लिन चल उक्रा व्यक्तिगत प्रेमक दरी द्यान नहीचल, सलेसक उनिष्छल स्वरूब समाजके प्रती हूंकर करूना, उही तदबनाके प्रेरित के लक? प्रेरना देबेक्त बात अची मुदा सलहेसक چरित्र काकर्षन, बिना दबनाक इदपस्या कोनो अर्ध नेरखेत अचे. तन्त्र विद्या एक ता सादन अचे, मुदा उईजि सादन के प्रयुक्त करबाक लेलजे प्रेरना चाही, उस सलहेसक आदर्ष चरित्र साथ अबई टचे. चखन अंतत सलेज छुटे चथे अदून्नुक विवा होईत अची, तो उ केवल दूई व्यक्तिक मिलन नहीं अची. तकी अची यो. उ सलहे सक जननेत्रुठ्वा अददबना को ही तान्त्रिक शक्तिक एकी करन अची. तन्त्रविद्याग भिना सलहे सक नैटिक्ता पुरन नैभहिल, मुदा सलहे सक नैटिक्ता भिना, उ तन्त्रविद्याग कोनो लक्षे नैच्जल. अम सलहे सक गुर्त्वाकर्षन के नकारी नहीं रहल ची. मतलव, उ महान चला. अगरा केवल सहायक या प्रेरना कैई के चोट कदेची हम दबनाग के चोट नेक अरहल ची अगरा केवल प्रेरत नीब हैल चली ओए अईस्तिती प्रस्तिती के नीआन्त्रत करहल चली तालुग्दार थापा सलहेस्छन जन समर्ठन चाँप अगरा प्रेरना कै के چھोट कदेची हम दबनाग के चोट नै करहल ची दबनाग के वल प्रेड़्त नीभहेल चलीो उइ स्तिती परस्तिती के नीएंट्रित करहल चली तालुग्दार थापा सलहेस चन जन समर्तन चीने चाहत चलय दबना अख्रा प्रतिक्ष सत्ता देदलक दर्बारी भ्रष्टा चार अक्रा जेल में बन्गलक, दबनक तंत्र अक्रा बाहर निकाल लक. अई समें अक्र तंत्र ही एक मात्र उपाए शिलो. इक दम सलहेस कजन समर्तन हुँँँक राजा जरूर बनावलक मुदद दबनाक विद्या हुँँक वास्त्विक सन्सार में उस सम्मान दिलायलक जक्रो रगदार चला आहाजे तन्तर के केवल एक ता सादन कही राल ची वास्त्विक में उई समयक सोषित वर्के स्त्रीक एक मात्र सामर्त चल, जकर प्रियोग सा उन्याय सुलप का सके चली. आई बात त बिलकुल सत्ते आची, जे राजा सलहेस कलोक गाता कते कुस्तर पर अपन आर्ट खोले तची. आई जक्शन मोरंग आमित्छला कान्चल मैं सलेस गितक दून उठाई तची, तब लोकी कही तची, यह वहे सलेस चिती, जे मन्सा राजा चला आमोने रहता है, राजा सलेस. आ, उगी ज़ सब बहत प्रसेद आची. दूसात समाज में सलहे सक जे जिक्त विषेश थान अचे उंकर उही शूशित प्रष्ट बूमे अन्न्याए प्रिय चरिट्र कारन अचे उईक ता एहन नायक छतीन जातिक सीमा के पार कजंताक रिदैसा राजाक उपादिपालनी उनकरी विजै, सामन्ती एहंकारक मुहतोर जवाब अची आई दिखावे तचे, जे नैतिक शक्ती कत्तिक व्यापक अखाल जैई भहुऽ सकटचे असंगे संग जखनम होई लोक गीट के दिहान सा सूनेच्छी ता हम्रा दबनाक उ बारा बरक धपस्या, उ कम्या कविद्या, आवकर हद्से हो स्पष्ट सूनाई देता ची. एक दम उख्रा भिस्रल नहीं जासके तचे. दबनाक उ इस्त्रिक प्रती कची, जे अपन अदिकार अप्रेम के लिल संसारक सब सक्फ्रूर शक्ती से, मतलब, दर्बारी शड्यन्त्र सलै का, अलोकिक शक्तिदरी लडी सकैता ची. न्याय अप्रेम के शक्तिष्टी सलहे सक चरित्रिक विषेष्ता आची. मुदा, उही न्याय के यतार्त में परनत करवा कजे भ्यवावारिक शक्ति आची, उदबनाक का ची. ये दूनु पक्ष मिली का एक गात्ठा के इत्टिक शक्तिषाली बने बैटची बिल्कुल, बिल्कुल, एक गात्ठा एक चात जन समर्ठनक उशान्त नदी अ दबनाक उतान्त्रिक बाडेख संगम अची तुन्नु मिले का उही सामन्ती विवस्ताक आहिंकारक के पकाली देलक सही कालू आहा जते एक तिस मान आद्धेर एक ता पैग अस्तर छे उते दोसर दिस अन्याय विरुद लडवाक लिल सक्करी अस्तक शेप आश्क्तिक आवष्क्ता सोहो ही तचे बले ही उ शक्ति तन्त्रक रूप में केख नहोए आप दून्नु पक्षक अपन अपन महत्व आची एक रक खोनो एक दिसा नहीं मोडल जासकेद शी आस्ली शक्ति सिहासन पर बैस्वाक अदिकार में आची अगरा पाविक लेल, काईल येल अद्रिष्य संगर्ष अ संकल्प में एही विचारसा हम्रा सवाई विदालेव दर दिबेट से जुदबा क्लिल दन्नेवाद