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मीरांसाहेब__डिलरीनगरक_गाथा.mp4
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- 0:00–0:10नमस्कार, स्वागत अच्याहा सबखके विषेश प्रस्तुती में, जटे हम्रा सब गब करब एक ता एहन आमर गाताक विषै में, जे मित्हिलाक माटी में आए यो रचल बसल अची.
- 0:10–0:16इसे खुनो सादारन खिस्सा नहीं चैक, इसे कता चै दिलेरी नगरक आओकर एका की योद्धा मिरान साईबक.
- 0:16–0:21तब पिना कोनो विलंबक आओ शुरू करे ची विरासत आब बलेदानक इद्बुत यात्रा.
- 0:21–0:32अब कनी सोच के देखू कि कि यी समबव च्याएक जे कोनो वेक्तिक म्रित्योग बहुत दिन का बादो मात्र उनकर नाम कोनो नगरक लेल धालबनी का काज करा?
- 0:32–0:34सुनक कनी आश्चरे लगए च्या नहीं?
- 0:34–0:36मुदा इ मात्र कोनो कोरा प्रषन नहीं च्यक,
- 0:36–0:39बलकी इ एक टा एन योद्दध साच च्यक,
- 0:39–0:42जे आपन भलिदान से एक टा औमर विरासत च्यूए गेला.
- 0:42–0:45मितिलाक एक टा गाँच्या दिल्री नगर,
- 0:45–0:48एता इ दिन अरातिक पहर, बदलाए च्यक,
- 0:48–0:54मुदाजे नहीं बदले च्यक से चे एक ता नाम जे आयो एताई शान्ती बनी के बहुत अची मिरान साहेब
- 0:54–1:02कहल जाए च्यक जे एही नगर में शान्ती आ इस्तिर्ताक इबहावना प्रतेग भोरक खिरन आ रातिक अनार संग गेरी रुप से जोडल अची
- 1:02–1:04इए एक्दम से अदबूत अचे
- 1:04–1:07अब चलू गामक टीक भीचो भीच
- 1:07–1:10अथे चल प्रक्यात सएदक हवेली
- 1:10–1:15जे द्र्मपरायंता आनुशासनक सरवोच प्रतीक मानल जाई चल
- 1:15–1:18बुजू जे पूरा गरेन जन्मजात लडा का चल
- 1:18–1:31उईक्ता सैयद उनकर कन्या आक्क्ता बेटा सब कसब आहन दूर्जे योद्धा, जिनका तर्वारिक खनक दूर दूर दरी पष्रल चल, एता भकती अशकती दूनो संक संचले चल.
- 1:31–1:35अही सयद हवेलीक बहुरे बहुरक दूश्य कनी कल्पना करू।
- 1:35–1:39बहुर मे एताए जे दूता अवाज उठाई चल
- 1:39–1:42से एक ता अखल्पनीः संतूलन गराई चल
- 1:42–1:45एक दिस नमाजक पवित्र अशान्त गुँज
- 1:45–1:48तीक दोसर दिस अखाला सावेत खडखड अवाज
- 1:49–1:51पिता संग भेता सब गोडसवारी
- 1:51–1:53तीर अतर्वारिक कडा अब्यास करे चला
- 1:54–1:56इसं तुलन उही योद्धा परिवारक दिनचर्याक
- 1:57–1:58मूल हिस्सा चल.
- 1:58–2:00हवेली कप्रांगन में जकन
- 2:00–2:02बेता सब अब्यास करे चला
- 2:02–2:05तो माए यी सब बद गर्व सदे कहेत,
- 2:05–2:10मुदा उही गर्व कपाचु एक टा भारी माँन चिन्ता से हो चुपल रही चल.
- 2:10–2:13उआद्रिश शदर जे अंदार बनी क,
- 2:13–2:16यूद्दाक गरक सब स्त्रीक करेजा में
- 2:16–2:18हमेशा व्याप्त रहाता ची.
- 2:18–2:23दिखु यूद्दा के गर में एक ता कतू सत्योई च्यक जक्रा सब जने तची
- 2:23–2:25मुदा क्यो मुँ से बजेत नहीं च्यक
- 2:25–2:31सत्ये इजे तोर्वारी जे गर में तंगल अची से एक दिन गर से बहर ज़ोर जाए तची
- 2:31–2:33आप फिर गुरेत नहीं आची
- 2:33–2:42इं मात्र एक्ता वाख के नूए जी, इं एक्ता एहन भारी सांस्क्रितिक सत्या जी, जे करेज के चीर देता जी, एह जीवन शेली में बध पेग मोल चुकावे पडे चेक.
- 2:42–3:12आतकने आचानक सबता सान्ती भंग बहुजात छे, दूर नुनुजागर सा युद्धक्रूर भजात आबी जात छे, सब किछ बटीवर गती सबदले छे, उई शान्त नगर कोना कोना में खलबली मच जात छे, आस शप्यद आपन सबता भेटाक संग युधलेल तच्चन कु�
- 3:12–3:16माई आपन सब बेटा के काजर तीका करहल चे थीन
- 3:16–3:21उदेरी उगी दिन जी तेक चुप चेल, तो तेक चुप शायत पहीने कहीो नी चेल
- 3:21–3:26कोनो शबदक प्रियोग नी भेल, मात्र मन में एक दागी इर आमान करन्दन चेल
- 3:26–3:29जे बेटा सब समर भूमीदीस प्रस्थान करहल चे थीन.
- 3:29–3:33आआ आब शुरू हुएत आफी नूनू जागडग उ महा संग्राम,
- 3:33–3:35तर्वारी, तर्वारी सबाजल,
- 3:35–3:37क्षाकच मारी काट मची गेल,
- 3:37–3:40क्षल, तीर, अरक्तिम, भेल दर्ती,
- 3:40–3:44एही बाते क्सक्षाख्षात गवाह आची जी यूध कते कब्यंकर चल,
- 3:44–3:48उही चनक कोलाहल अविनाश चारुकात, एक ता प्रले थाद ता ते लक.
- 3:49–3:55मुदा बूजू जे एही कोलाहलक बाद जे अंद्यार अवेत ची से आवर भयानक चल.
- 3:55–4:05जखन युद्ध भूमी के गर्दा बैसल, ता एक ता एहन शून ने आहिर्दै विदारक समाचार दिल रिनगर पहुचल, जगरा सुन्वाक लेल उताएक्यो तएयारने चल.
- 4:05–4:11ब्रित्त्यो अविनाश का ओ क्रूर अद्यार आब शान्त गाम दिस अपना पसारी जुकल चल.
- 4:25–4:29जख्रा भोरे भोर गुजे चल से पुर्न रूपें सुन्न बहगेल
- 4:29–4:33दिवाल पटंगल तर्वारी सबक ताम खाली चुटी रही गेल
- 4:34–4:38येक्ता आहें त्रासद अन्ते चल जे कक्रो आत्माक के जग्जोर कर अगी दै
- 4:38–4:43पूरा दिल्री नगरक उ शोक मगन वातावरन करेज भाईद देच्छल,
- 4:43–4:47मुदा सबसे गहर शोक उही हवेली के भीटर चल,
- 4:47–4:51जता ए आब मात्र एक ता विद्वा असगर रही गेल चली.
- 4:51–4:53पती गेला, सब ता भेटा गेला,
- 4:53–4:58उ पाए गवेली आब एक ता खन्धर जका उनक्रा खाएल दोईर रहल्चल.
- 4:58–5:01उही आलकलपनी ए गुतन आए एकान तक वरनन,
- 5:01–5:04हम आहा शब्द मेत कत तो नी का सकएची.
- 5:04–5:07आब एई गमभीर त्राज्दीक भीछ,
- 5:07–5:09सब भाभी क्रुप से एक ता प्रषन उड़ेत चेक.
- 5:09–5:14अगा अगा की, सब किस्तक खटम भाजे का लगेट चे,
- 5:14–5:19मुदा तकने, एई आन्दार मसे हो एक ता रहस्स चूपल चल,
- 5:19–5:24एक ता एहन किरन जे इब धार हल चल, जे इग कताक अन्त नहीं आचे.
- 5:24–5:30शोग आ अनहारक उही गरव सा एक्ता सुनेला तारा उबरी रहल चलेल मिरान साहेब
- 5:30–5:37एक्ता आहन बालक जे अपन जनम से पहने ये अनात बहुगे लेल मुदाजिकर भीतर एक्ता अजे प्रकाश चल
- 5:37–5:41जते म्रित्त्यों अश्व्निता आपन् देरा जमाचुकल चलेल,
- 5:41–5:44अते सा जन्मल इबालक आगा चली के एक आजे शक्ती बनल,
- 5:44–5:47जिकर कल्पना के उ सपने में लिके नहीता.
- 5:47–5:51जे त्रास्दी भेल चल, उक्रा देखष्माय आग्गाम का लोग,
- 5:51–5:56वग़ाग नीयती के क्यो रोके सके जिएक कतो नहीं
- 5:56–5:59मिरान साहेप कर रग रग में जे युध्धा कर रक्त चल,
- 5:59–6:02उक्रा कोनो बन्धन नहीं बाने सकल,
- 6:02–6:05उनक नीयती अटल आ एक दम अजे अचल.
- 6:05–6:08दूबेट सुर्यक प्रकाश में ठाल अस्मारक,
- 6:08–6:11उनक नियती अटल आ एक दम अजे अचल.
- 6:11–6:14दूबेत सुर्यक प्रकाश में ठाल अच्मारक
- 6:14–6:18उनक जीवनक एक ता काव्यात्मक चरमोद कर्षत ही.
- 6:18–6:22मीरा साहेब अपने जीवन बहरी उहे नगर कर रक्षा किलनी.
- 6:22–6:30मुदा सब से आश्चर या जनक बात की चेक भुज़ेई ची, मुद्तिक बादो हुनकर आत्मा आपना नगर के चोडबा से इंकार कर दे लक.
- 6:30–6:35इआस्तम्व औहे जिद्दी रक्षक आत्माक आमित प्रती कची.
- 6:35–6:45जे वेक्ती जिवेट काल नगरक द्हाल चल, उनक स्म्रिती म्रित्युक बादो दिन रातिक सुरक्षा लेल एक्ता अबेद द्हाल बनी गल.
- 6:45–6:52कहल जाए चे जे दूश्ट लोक आयो हुनक नाम सर दराएत आची, अ दूखी लोक हुनक नाम सर भल्पवेत आची.
- 6:52–7:00दिलेरी नगर में साजगन आयो जगन कोनो माए आपन जिद्दी बच्चा के खिस्सा सून्वेत आची, ता मीरान सहेद कक नाम आवेत आची.
- 7:00–7:28ता इगाता समब्त करवाख संगे एक ता विचारो तेजक प्रष्चना हमरा सबखवाग मन में उठी तची कोनो आत्मा सच्मुच कोनो नगर के हमेसाले एक सुरक्षित राखिसकई चेक किच लोक एतिहास के पन्ना में दर्ज बहुजाए चेत, मुदा किच लोग हवा में र
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नमस्कार, स्वागत अच्याहा सबखके विषेश प्रस्तुती में, जटे हम्रा सब गब करब एक ता एहन आमर गाताक विषै में, जे मित्हिलाक माटी में आए यो रचल बसल अची. इसे खुनो सादारन खिस्सा नहीं चैक, इसे कता चै दिलेरी नगरक आओकर एका की योद्धा मिरान साईबक. तब पिना कोनो विलंबक आओ शुरू करे ची विरासत आब बलेदानक इद्बुत यात्रा. अब कनी सोच के देखू कि कि यी समबव च्याएक जे कोनो वेक्तिक म्रित्योग बहुत दिन का बादो मात्र उनकर नाम कोनो नगरक लेल धालबनी का काज करा? सुनक कनी आश्चरे लगए च्या नहीं? मुदा इ मात्र कोनो कोरा प्रषन नहीं च्यक, बलकी इ एक टा एन योद्दध साच च्यक, जे आपन भलिदान से एक टा औमर विरासत च्यूए गेला. मितिलाक एक टा गाँच्या दिल्री नगर, एता इ दिन अरातिक पहर, बदलाए च्यक, मुदाजे नहीं बदले च्यक से चे एक ता नाम जे आयो एताई शान्ती बनी के बहुत अची मिरान साहेब कहल जाए च्यक जे एही नगर में शान्ती आ इस्तिर्ताक इबहावना प्रतेग भोरक खिरन आ रातिक अनार संग गेरी रुप से जोडल अची इए एक्दम से अदबूत अचे अब चलू गामक टीक भीचो भीच अथे चल प्रक्यात सएदक हवेली जे द्र्मपरायंता आनुशासनक सरवोच प्रतीक मानल जाई चल बुजू जे पूरा गरेन जन्मजात लडा का चल उईक्ता सैयद उनकर कन्या आक्क्ता बेटा सब कसब आहन दूर्जे योद्धा, जिनका तर्वारिक खनक दूर दूर दरी पष्रल चल, एता भकती अशकती दूनो संक संचले चल. अही सयद हवेलीक बहुरे बहुरक दूश्य कनी कल्पना करू। बहुर मे एताए जे दूता अवाज उठाई चल से एक ता अखल्पनीः संतूलन गराई चल एक दिस नमाजक पवित्र अशान्त गुँज तीक दोसर दिस अखाला सावेत खडखड अवाज पिता संग भेता सब गोडसवारी तीर अतर्वारिक कडा अब्यास करे चला इसं तुलन उही योद्धा परिवारक दिनचर्याक मूल हिस्सा चल. हवेली कप्रांगन में जकन बेता सब अब्यास करे चला तो माए यी सब बद गर्व सदे कहेत, मुदा उही गर्व कपाचु एक टा भारी माँन चिन्ता से हो चुपल रही चल. उआद्रिश शदर जे अंदार बनी क, यूद्दाक गरक सब स्त्रीक करेजा में हमेशा व्याप्त रहाता ची. दिखु यूद्दा के गर में एक ता कतू सत्योई च्यक जक्रा सब जने तची मुदा क्यो मुँ से बजेत नहीं च्यक सत्ये इजे तोर्वारी जे गर में तंगल अची से एक दिन गर से बहर ज़ोर जाए तची आप फिर गुरेत नहीं आची इं मात्र एक्ता वाख के नूए जी, इं एक्ता एहन भारी सांस्क्रितिक सत्या जी, जे करेज के चीर देता जी, एह जीवन शेली में बध पेग मोल चुकावे पडे चेक. आतकने आचानक सबता सान्ती भंग बहुजात छे, दूर नुनुजागर सा युद्धक्रूर भजात आबी जात छे, सब किछ बटीवर गती सबदले छे, उई शान्त नगर कोना कोना में खलबली मच जात छे, आस शप्यद आपन सबता भेटाक संग युधलेल तच्चन कु� माई आपन सब बेटा के काजर तीका करहल चे थीन उदेरी उगी दिन जी तेक चुप चेल, तो तेक चुप शायत पहीने कहीो नी चेल कोनो शबदक प्रियोग नी भेल, मात्र मन में एक दागी इर आमान करन्दन चेल जे बेटा सब समर भूमीदीस प्रस्थान करहल चे थीन. आआ आब शुरू हुएत आफी नूनू जागडग उ महा संग्राम, तर्वारी, तर्वारी सबाजल, क्षाकच मारी काट मची गेल, क्षल, तीर, अरक्तिम, भेल दर्ती, एही बाते क्सक्षाख्षात गवाह आची जी यूध कते कब्यंकर चल, उही चनक कोलाहल अविनाश चारुकात, एक ता प्रले थाद ता ते लक. मुदा बूजू जे एही कोलाहलक बाद जे अंद्यार अवेत ची से आवर भयानक चल. जखन युद्ध भूमी के गर्दा बैसल, ता एक ता एहन शून ने आहिर्दै विदारक समाचार दिल रिनगर पहुचल, जगरा सुन्वाक लेल उताएक्यो तएयारने चल. ब्रित्त्यो अविनाश का ओ क्रूर अद्यार आब शान्त गाम दिस अपना पसारी जुकल चल. जख्रा भोरे भोर गुजे चल से पुर्न रूपें सुन्न बहगेल दिवाल पटंगल तर्वारी सबक ताम खाली चुटी रही गेल येक्ता आहें त्रासद अन्ते चल जे कक्रो आत्माक के जग्जोर कर अगी दै पूरा दिल्री नगरक उ शोक मगन वातावरन करेज भाईद देच्छल, मुदा सबसे गहर शोक उही हवेली के भीटर चल, जता ए आब मात्र एक ता विद्वा असगर रही गेल चली. पती गेला, सब ता भेटा गेला, उ पाए गवेली आब एक ता खन्धर जका उनक्रा खाएल दोईर रहल्चल. उही आलकलपनी ए गुतन आए एकान तक वरनन, हम आहा शब्द मेत कत तो नी का सकएची. आब एई गमभीर त्राज्दीक भीछ, सब भाभी क्रुप से एक ता प्रषन उड़ेत चेक. अगा अगा की, सब किस्तक खटम भाजे का लगेट चे, मुदा तकने, एई आन्दार मसे हो एक ता रहस्स चूपल चल, एक ता एहन किरन जे इब धार हल चल, जे इग कताक अन्त नहीं आचे. शोग आ अनहारक उही गरव सा एक्ता सुनेला तारा उबरी रहल चलेल मिरान साहेब एक्ता आहन बालक जे अपन जनम से पहने ये अनात बहुगे लेल मुदाजिकर भीतर एक्ता अजे प्रकाश चल जते म्रित्त्यों अश्व्निता आपन् देरा जमाचुकल चलेल, अते सा जन्मल इबालक आगा चली के एक आजे शक्ती बनल, जिकर कल्पना के उ सपने में लिके नहीता. जे त्रास्दी भेल चल, उक्रा देखष्माय आग्गाम का लोग, वग़ाग नीयती के क्यो रोके सके जिएक कतो नहीं मिरान साहेप कर रग रग में जे युध्धा कर रक्त चल, उक्रा कोनो बन्धन नहीं बाने सकल, उनक नीयती अटल आ एक दम अजे अचल. दूबेट सुर्यक प्रकाश में ठाल अस्मारक, उनक नियती अटल आ एक दम अजे अचल. दूबेत सुर्यक प्रकाश में ठाल अच्मारक उनक जीवनक एक ता काव्यात्मक चरमोद कर्षत ही. मीरा साहेब अपने जीवन बहरी उहे नगर कर रक्षा किलनी. मुदा सब से आश्चर या जनक बात की चेक भुज़ेई ची, मुद्तिक बादो हुनकर आत्मा आपना नगर के चोडबा से इंकार कर दे लक. इआस्तम्व औहे जिद्दी रक्षक आत्माक आमित प्रती कची. जे वेक्ती जिवेट काल नगरक द्हाल चल, उनक स्म्रिती म्रित्युक बादो दिन रातिक सुरक्षा लेल एक्ता अबेद द्हाल बनी गल. कहल जाए चे जे दूश्ट लोक आयो हुनक नाम सर दराएत आची, अ दूखी लोक हुनक नाम सर भल्पवेत आची. दिलेरी नगर में साजगन आयो जगन कोनो माए आपन जिद्दी बच्चा के खिस्सा सून्वेत आची, ता मीरान सहेद कक नाम आवेत आची. ता इगाता समब्त करवाख संगे एक ता विचारो तेजक प्रष्चना हमरा सबखवाग मन में उठी तची कोनो आत्मा सच्मुच कोनो नगर के हमेसाले एक सुरक्षित राखिसकई चेक किच लोक एतिहास के पन्ना में दर्ज बहुजाए चेत, मुदा किच लोग हवा में र