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छेछन_महराजक_गाथा.mp4

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:04नमशकार, आए दरी के सब से रोमान्चक प्रस्थूती में स्वागत अछी.
  2. 0:04–0:09आई हम सब मितलाक, लोक स्म्रित्ती में बसल एक ता अदम में लोग देवता,
  3. 0:09–0:13छेचन महराजक, बल आशाहस का अद्बुद गाथा पर चर्चा करब.
  4. 0:13–0:23इसकोनो सादारन कता नहीं चथे, बलकी अदम्यश्खती आ अटूट संकलप क एक ता एहन कता चे जे आयो लोकक जेवापर भिराज माना ची.
  5. 0:23–0:25तब आप ना कोनो देरी के शुरू करे ची.
  6. 0:25–0:30आब सोच्छू, सरबोच पुरस्कार पाबकलिल आखिर की चाही?
  7. 0:30–0:38की एक ता बहंकर पशु एक ता भलशाली सर्दार आआकल पनी आ शक्तिक परिक्षन कोनो चोटमोद बाच है?
  8. 0:38–0:43इक ता एक ता आहें वीर कच है, जक्रा इस सबता चुनाती पार कर बाक चल.
  9. 0:43–0:50इगाता मात्र शक्तिक नहीं बलकी सहसक चरम सीमाक एक ता बहुत पैग परिक्षन थेग.
  10. 0:50–0:54तीक चे ता आब इविशेक गेराई में प्रवेश करे चिए.
  11. 0:54–0:57इग कता शुरू हुए चै सहीदापृर गामसा.
  12. 0:57–1:04जखन चिचन महराज के संगी साती बास के तोकरी अपत्या बेच्बाक लेल सहीदापूर गल चला,
  13. 1:04–1:10तो उते उसब दोम सरदार मानिक चंदक वीरताक निक जंका किस्सा सूनालिन.
  14. 1:10–1:13मानिक चंद उते एक ता पाएक संदंका राखल चला,
  15. 1:13–1:21जिसीदा सीदी चुनोतीक प्रतीक शल, विरताक आवान शल, मानिक चंदक एक ता बहुत असादारन प्रन चल,
  16. 1:21–1:27जाहे में चार्टा एक दम कठिन चरन सम्मिलित शल, पहल उही दंखापर चोट करब,
  17. 1:27–1:33तो सर, मानिक्चन्दक भ्यंकर पोस्वा सुगर चत्या सु युद्ध का उकरा हराएब.
  18. 1:33–1:37तेसर, स्वैम मानिक्चन्दसन दंगन में विजेः प्राप्त करव.
  19. 1:37–1:43आच्चारम, जे इस सब को लेत उ मानिक्चन्दक भहीन पन्मासं विवाहक अदिकारी होएत.
  20. 1:43–1:49सूनी में इएक ता असमबवजका लागवाला शर्थ चै मुदा पूरसकार से हुत अदूती अचलने
  21. 1:49–1:53मुदा चिचन मैराज दरेवारा लोक कताई चला
  22. 1:53–1:58इच्नोती सुन्ते और दंकाक सामना करबागलेल सादापूर दिस विदाब होगेला
  23. 1:58–2:03आपन पाजबसेरी कबारी कता, आपन पाजबसेरी कबारी कता,
  24. 2:03–2:08जक्रा उठावः से हो सादारन लोकक लेल असमबप चे शे लोक चला.
  25. 2:08–2:11इह उनका अदम में शारे लिक चमताक सीथा परीचाया कचे,
  26. 2:11–2:15आदे कहवै चे जे उई चुनोती लेल कते एक तत पर चला.
  27. 2:15–2:18जे उ इच्नोती लेल कते एक तत पर चला
  28. 2:18–2:22दंकापर चोथ करभासा पहने की इद्रिष्श बद रोचक चै
  29. 2:22–2:25मनविग्यानिक तयारी कोना केल जाए चै
  30. 2:25–2:27इवो कर एक दा एक दा एक दोद्बुत उदारन थिक
  31. 2:27–2:31छिचन महाराज एक ता बूडी सा आगी मांगलनी
  32. 2:31–2:36आआ अपनन चिलम में आगी अविषेश पूषप पदार्त, मेदनी पूल भहरी सब्टा पीभी गेला.
  33. 2:36–2:44देखो, यी केवल कोनो नशा नहीं चल, यी एक ता विषेश प्रकारक मान्सिक अज्शारिरिक एक अग्रता लेल कैल गेल तयारी चल,
  34. 2:44–2:47जाही सच्वरीर के समपुन शक्ती एकथा भे सके
  35. 2:47–2:53इद्यारी वास्तब में चही चनक, असादारन, सहस, और आत्म विश्वासक प्रतीख चल.
  36. 2:53–2:55चुनोति के सामना करभा से पहले,
  37. 2:55–2:57अपन आत्मा के सुद्द्रीड करभ,
  38. 2:57–3:00शारिरिक अ मान्सिक दूनु रूप से तैयार होएभ,
  39. 3:00–3:02इकोनो भी भ्यंकर संगर्ष से पूर्व,
  40. 3:02–3:04बहत आवश्षक होई चाए.
  41. 3:04–3:06इबात भूजह महतूर चाए,
  42. 3:06–3:08जे यूध केवल शरीर से नहीं,
  43. 3:08–3:11बल की पूरन मान्सिक एक आग्रता से हो लड़ल जाए चाए.
  44. 3:11–3:24आई बहुत नेक जंका दर्षाभई चे जे पूरन निंद्रन आएका गरता कसं चेंचन जखन दंका पर जोर सच्चोट केलनी तो उकर द्हनी समपूरन सहिदापूर में गुन जूत हेल.
  45. 3:24–3:54तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ �
  46. 3:54–4:24अपन्दा अज्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
  47. 4:24–4:37अखर बाद जे भेल से बिल्कुल अविष्वसनीय चल, चे चन पूरन रूब से तगयार चला, अचे टियाक दूनूपैर पक्डी अखरा भीच से चीड दिलनी.
  48. 4:37–4:42सोची सके ची, ये एक ता अदूद बल अख़ूशल को प्रदर्षन चल,
  49. 4:43–4:45जक्रा आएदरिक्यो रहा नहीं सकल चल,
  50. 4:45–4:48उक्रा चेचन एके प्रहार में समाप्त कदलनी.
  51. 4:48–4:52ये द्रिष्ष्य रूपनी आखकल्ठनी आशारे लिक शकती का अचुक प्रमान चे.
  52. 4:52–4:57आब आगु बड़े ची और देखे ची जे इग कोना विखसित होई चे
  53. 4:57–5:01चत्याक पराजैक बाद आगला चरन सुरुभ हैल
  54. 5:01–5:07प्रन आनुसार आब स्वैम मानिक चन्द चेचन से लडबाक लेल आखहाडा मे उतर ला
  55. 5:07–5:12इदंगल दूनु शक्ती साली योद्धाक भीच्क अन्तिम और निरनायक मुखाबला चल.
  56. 5:12–5:19इक दिस सर्दार्क प्रतिष्था चल तदोसर दिस एक ता यूवा योद्धाक अदम मैं साहस.
  57. 5:19–5:22इव वास्तव में दूता महाबलीक तकराउ चल.
  58. 5:22–5:28मानिक چन् आचेचन में भ्यंकर दंगल भेल, बल, कोशल, आद्रद्ताक भीशन तक्कर.
  59. 5:28–5:32तुनू पक्ष आपन अपन समर्त् क्पूर्ण प्रदर्षन कराई चल.
  60. 5:32–5:36उपस्तित जन समुख आगा ईएक्ता आह्न रोमाच्चक तुंद चल,
  61. 5:36–5:39जदे केकर जीत होगत से कहब बद कतिन चल
  62. 5:39–5:44दूनु युद्धाक प्र्यासा अखराक वातावरन अथ्यन्ततना पुर्न भोगेल चल
  63. 5:44–5:49अनतता चरम सीमा पर पहुचकर चेचनक विजेई भेला
  64. 5:49–5:52उम वानिक चंद के उठाक बजारी देलनी
  65. 5:52–5:57इविजे च्छनक कबल अ सहस क अन्तिम प्रमान चल
  66. 5:57–6:00जे चुनोती आएदरी कियो पूरन नहीं को सकल चल
  67. 6:00–6:03से च्छनक सफलता पूर्वक पूरन का लेईनी
  68. 6:03–6:07सम्पूरन जन समु आश्चर आउथ सहसे बरिगेल
  69. 6:07–6:09की कमाल अग्द्रिष्य रहो रहो ए तो
  70. 6:09–6:15मुदा पराजेएक बाद कै एप पतिक्रिया एग दखाख सबसं सुन्दर सांस्क्रितिक पहलु क्या उजागर करे चे.
  71. 6:15–6:19सादारन्ता पराजे सन लोग क्रोदित हो इच्छे.
  72. 6:19–6:23मुदा मानिक चन्द आपन पराजे स्विकार केलन, आद दुखि नहीं बहला,
  73. 6:23–6:27आपितु प्रस्शन्बहला, कारनोकर प्रन्पून्बहल,
  74. 6:27–6:30आर उक्राक एक ता अत्तिन्त योग वीर भेट गेल,
  75. 6:30–6:33जक्रा उ आपन भहीनक हाज सुवापी सकत चला.
  76. 6:33–6:36इहार में सहो समानक बाच्छल.
  77. 6:36–6:39खूषी खूषी मानिक चन्द आपन भहीन पन्माक विवा,
  78. 6:39–6:41च्छनक संक्रादिलीन
  79. 6:41–6:42इं मदूर मिलन
  80. 6:42–6:44च्छनक विर्ता क्सम्मान मेच्छल
  81. 6:44–6:45आहुंकर बल
  82. 6:45–6:46विजैक मदूर पालचल
  83. 6:46–6:49मानिक च्छनक कबीच
  84. 6:49–6:50इजे प्रत्योगिता बिल
  85. 6:50–6:52से शत्रुता में नई बदलल
  86. 6:52–6:53अपितू सम्मान
  87. 6:53–6:55अपारिवारिक बनदन में परिनद बिल
  88. 7:09–7:18उगात्था इतिये समआप्त बोजाइचे कि एक ता वीर युद्धा कजीवन में कही यो पुरन शान्तियाविसा कैईचे,
  89. 7:18–7:25जकन सब किच एक दम शान्त लागाईचे तकने नियती नव चुनाउती लोक अबआईट चे.
  90. 7:25–7:36अब एते जे सबसे रोचक बाचे से इजे च्छनक नव ग्रहस्त जीवनक भीच एक ता और शक्तिशाली विरोदी हूनक प्रतीखशा मे चल.
  91. 7:36–7:46अब एते जे सबसे रोचक बाचे से एजे च्छनक नव ग्रहस्त जीवनक भीच एक ता और शक्तिशाली विरोदी हुनक प्रतीखशा मे चल.
  92. 7:46–7:52इकोनो मनुश्श्या वा सादारन पशू नहीं बलकी एक ता विशाल हाती चल.
  93. 7:52–8:03अग, एक ता हातिए, जे वीर चतिया आमानिक चंदसन सकतिषाली विरोदिके पराजित कने चला, से आब एक ता हातिक अपार बलक सुजा तार चला.
  94. 8:03–8:16ता अंत में इपाग प्रष्न उठाइत फ्ये, कि मनुशक साहस आशारीरक बल कही ओए एक ता विशाल, रोकी नहीं जासके वाला हातिक अकल पनी एश्वक्तिक सामना का सकएद फ्ये,
  95. 8:16–8:37इणव मोर च्खनाग गाताके कताईला जाएत, इडव में साहस आसंगर्षक कता एत एक ता नव रहस से चोडी जाएत छे हमरा सवक के मितलाक इसम्रिद लोक कताक और गही राई में जीवा लेल प्रेरिद काएत छे, इणवेशन प्रस्तुती दिख्वाक लेल बहुत-बहु

Plain text

नमशकार, आए दरी के सब से रोमान्चक प्रस्थूती में स्वागत अछी. आई हम सब मितलाक, लोक स्म्रित्ती में बसल एक ता अदम में लोग देवता, छेचन महराजक, बल आशाहस का अद्बुद गाथा पर चर्चा करब. इसकोनो सादारन कता नहीं चथे, बलकी अदम्यश्खती आ अटूट संकलप क एक ता एहन कता चे जे आयो लोकक जेवापर भिराज माना ची. तब आप ना कोनो देरी के शुरू करे ची. आब सोच्छू, सरबोच पुरस्कार पाबकलिल आखिर की चाही? की एक ता बहंकर पशु एक ता भलशाली सर्दार आआकल पनी आ शक्तिक परिक्षन कोनो चोटमोद बाच है? इक ता एक ता आहें वीर कच है, जक्रा इस सबता चुनाती पार कर बाक चल. इगाता मात्र शक्तिक नहीं बलकी सहसक चरम सीमाक एक ता बहुत पैग परिक्षन थेग. तीक चे ता आब इविशेक गेराई में प्रवेश करे चिए. इग कता शुरू हुए चै सहीदापृर गामसा. जखन चिचन महराज के संगी साती बास के तोकरी अपत्या बेच्बाक लेल सहीदापूर गल चला, तो उते उसब दोम सरदार मानिक चंदक वीरताक निक जंका किस्सा सूनालिन. मानिक चंद उते एक ता पाएक संदंका राखल चला, जिसीदा सीदी चुनोतीक प्रतीक शल, विरताक आवान शल, मानिक चंदक एक ता बहुत असादारन प्रन चल, जाहे में चार्टा एक दम कठिन चरन सम्मिलित शल, पहल उही दंखापर चोट करब, तो सर, मानिक्चन्दक भ्यंकर पोस्वा सुगर चत्या सु युद्ध का उकरा हराएब. तेसर, स्वैम मानिक्चन्दसन दंगन में विजेः प्राप्त करव. आच्चारम, जे इस सब को लेत उ मानिक्चन्दक भहीन पन्मासं विवाहक अदिकारी होएत. सूनी में इएक ता असमबवजका लागवाला शर्थ चै मुदा पूरसकार से हुत अदूती अचलने मुदा चिचन मैराज दरेवारा लोक कताई चला इच्नोती सुन्ते और दंकाक सामना करबागलेल सादापूर दिस विदाब होगेला आपन पाजबसेरी कबारी कता, आपन पाजबसेरी कबारी कता, जक्रा उठावः से हो सादारन लोकक लेल असमबप चे शे लोक चला. इह उनका अदम में शारे लिक चमताक सीथा परीचाया कचे, आदे कहवै चे जे उई चुनोती लेल कते एक तत पर चला. जे उ इच्नोती लेल कते एक तत पर चला दंकापर चोथ करभासा पहने की इद्रिष्श बद रोचक चै मनविग्यानिक तयारी कोना केल जाए चै इवो कर एक दा एक दा एक दोद्बुत उदारन थिक छिचन महाराज एक ता बूडी सा आगी मांगलनी आआ अपनन चिलम में आगी अविषेश पूषप पदार्त, मेदनी पूल भहरी सब्टा पीभी गेला. देखो, यी केवल कोनो नशा नहीं चल, यी एक ता विषेश प्रकारक मान्सिक अज्शारिरिक एक अग्रता लेल कैल गेल तयारी चल, जाही सच्वरीर के समपुन शक्ती एकथा भे सके इद्यारी वास्तब में चही चनक, असादारन, सहस, और आत्म विश्वासक प्रतीख चल. चुनोति के सामना करभा से पहले, अपन आत्मा के सुद्द्रीड करभ, शारिरिक अ मान्सिक दूनु रूप से तैयार होएभ, इकोनो भी भ्यंकर संगर्ष से पूर्व, बहत आवश्षक होई चाए. इबात भूजह महतूर चाए, जे यूध केवल शरीर से नहीं, बल की पूरन मान्सिक एक आग्रता से हो लड़ल जाए चाए. आई बहुत नेक जंका दर्षाभई चे जे पूरन निंद्रन आएका गरता कसं चेंचन जखन दंका पर जोर सच्चोट केलनी तो उकर द्हनी समपूरन सहिदापूर में गुन जूत हेल. तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ � अपन्दा अज्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च अखर बाद जे भेल से बिल्कुल अविष्वसनीय चल, चे चन पूरन रूब से तगयार चला, अचे टियाक दूनूपैर पक्डी अखरा भीच से चीड दिलनी. सोची सके ची, ये एक ता अदूद बल अख़ूशल को प्रदर्षन चल, जक्रा आएदरिक्यो रहा नहीं सकल चल, उक्रा चेचन एके प्रहार में समाप्त कदलनी. ये द्रिष्ष्य रूपनी आखकल्ठनी आशारे लिक शकती का अचुक प्रमान चे. आब आगु बड़े ची और देखे ची जे इग कोना विखसित होई चे चत्याक पराजैक बाद आगला चरन सुरुभ हैल प्रन आनुसार आब स्वैम मानिक चन्द चेचन से लडबाक लेल आखहाडा मे उतर ला इदंगल दूनु शक्ती साली योद्धाक भीच्क अन्तिम और निरनायक मुखाबला चल. इक दिस सर्दार्क प्रतिष्था चल तदोसर दिस एक ता यूवा योद्धाक अदम मैं साहस. इव वास्तव में दूता महाबलीक तकराउ चल. मानिक چन् आचेचन में भ्यंकर दंगल भेल, बल, कोशल, आद्रद्ताक भीशन तक्कर. तुनू पक्ष आपन अपन समर्त् क्पूर्ण प्रदर्षन कराई चल. उपस्तित जन समुख आगा ईएक्ता आह्न रोमाच्चक तुंद चल, जदे केकर जीत होगत से कहब बद कतिन चल दूनु युद्धाक प्र्यासा अखराक वातावरन अथ्यन्ततना पुर्न भोगेल चल अनतता चरम सीमा पर पहुचकर चेचनक विजेई भेला उम वानिक चंद के उठाक बजारी देलनी इविजे च्छनक कबल अ सहस क अन्तिम प्रमान चल जे चुनोती आएदरी कियो पूरन नहीं को सकल चल से च्छनक सफलता पूर्वक पूरन का लेईनी सम्पूरन जन समु आश्चर आउथ सहसे बरिगेल की कमाल अग्द्रिष्य रहो रहो ए तो मुदा पराजेएक बाद कै एप पतिक्रिया एग दखाख सबसं सुन्दर सांस्क्रितिक पहलु क्या उजागर करे चे. सादारन्ता पराजे सन लोग क्रोदित हो इच्छे. मुदा मानिक चन्द आपन पराजे स्विकार केलन, आद दुखि नहीं बहला, आपितु प्रस्शन्बहला, कारनोकर प्रन्पून्बहल, आर उक्राक एक ता अत्तिन्त योग वीर भेट गेल, जक्रा उ आपन भहीनक हाज सुवापी सकत चला. इहार में सहो समानक बाच्छल. खूषी खूषी मानिक चन्द आपन भहीन पन्माक विवा, च्छनक संक्रादिलीन इं मदूर मिलन च्छनक विर्ता क्सम्मान मेच्छल आहुंकर बल विजैक मदूर पालचल मानिक च्छनक कबीच इजे प्रत्योगिता बिल से शत्रुता में नई बदलल अपितू सम्मान अपारिवारिक बनदन में परिनद बिल उगात्था इतिये समआप्त बोजाइचे कि एक ता वीर युद्धा कजीवन में कही यो पुरन शान्तियाविसा कैईचे, जकन सब किच एक दम शान्त लागाईचे तकने नियती नव चुनाउती लोक अबआईट चे. अब एते जे सबसे रोचक बाचे से इजे च्छनक नव ग्रहस्त जीवनक भीच एक ता और शक्तिशाली विरोदी हूनक प्रतीखशा मे चल. अब एते जे सबसे रोचक बाचे से एजे च्छनक नव ग्रहस्त जीवनक भीच एक ता और शक्तिशाली विरोदी हुनक प्रतीखशा मे चल. इकोनो मनुश्श्या वा सादारन पशू नहीं बलकी एक ता विशाल हाती चल. अग, एक ता हातिए, जे वीर चतिया आमानिक चंदसन सकतिषाली विरोदिके पराजित कने चला, से आब एक ता हातिक अपार बलक सुजा तार चला. ता अंत में इपाग प्रष्न उठाइत फ्ये, कि मनुशक साहस आशारीरक बल कही ओए एक ता विशाल, रोकी नहीं जासके वाला हातिक अकल पनी एश्वक्तिक सामना का सकएद फ्ये, इणव मोर च्खनाग गाताके कताईला जाएत, इडव में साहस आसंगर्षक कता एत एक ता नव रहस से चोडी जाएत छे हमरा सवक के मितलाक इसम्रिद लोक कताक और गही राई में जीवा लेल प्रेरिद काएत छे, इणवेशन प्रस्तुती दिख्वाक लेल बहुत-बहु

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