MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
डिजिटल_ठगी_और_चन्ना_गाछी_के_भूत.m4a
Timestamped machine output
- 0:00–0:30स्वागत है, आज हम गोही सवक भीच जल समादी पर गेरी चर्चा कर रहे हैं, जो एक जादूई यथार्थ्वादी कता है, जाहां गाँउ के भूथ चन्नागाची के नीचे कबद्दी खेल कर विवस्था दूरा बुला दिये गाए लोगो के नामों को जिन्दा रकते हैं.
- 0:30–0:32तो सीले पहले बात पर आते हैं
- 0:32–0:37चुकी इसे विशेश रूप से एक बाल संसकरन के रूप में प्रस्थूत की आगया है
- 0:37–0:40मेरा पहला सवाल यही है की वूँँँँँ
- 0:40–0:43क्या इस सामगरी की जतलता बच्छो कि लिए उप्युक थे
- 0:43–0:55बाल संसकरन के रूप में प्रस्थ। इस रच्ना में आदूनिक अप्रादों और विवस्थागत भ्रष्टाचार जैसे जटिल विष्यों का समावेश इसकी पहुच को यूवा पाधखों किलिए चुनोती पूरन बनाता है.
- 0:55–0:56अचा.
- 0:56–0:57अचा.
- 0:57–1:04मतला, कमजोरी यहे, कहानी में एक तरव तो बहुत ही जादूई और समोहक लोक कतावाँ वाले तत्व हैं.
- 1:05–1:08जैसे की बुदवा भूथ और हुलासी वाले हिसे.
- 1:08–1:09भिलकुल.
- 1:09–1:11और चनागा चीका वो पेड,
- 1:11–1:14ये हिसा बच्छो को तुरन तबनी वोर किझचता है.
- 1:14–1:19लेकिन दूस्री तरव कहानी अचानक बिना किसी फिल्तर के,
- 1:19–1:21दिजितल अरेस्ट और
- 1:21–1:22फर्जी अख्सिजन सपलाई
- 1:22–1:25आप फर्जी अख्सिजन सपलाई
- 1:25–1:29कोड एन आर सवंटी सबन और करपरेट धोखादड़ी जैसे
- 1:29–1:32अत्यदिदिग गंभीर और व्यस्क विष्यों में उतर जाती है
- 1:33–1:35बच्छो के लिए यें कोरपरेट गुटालों
- 1:35–1:39और अडिटिंग प्रक्रिया के तक्नी की बारी क्यों को समझना
- 1:39–1:41भगत भारी पर सकता है
- 1:41–1:43सईब आत है, एक दं सिर क्यो पर से निकल जाएगा
- 1:43–1:45मतलब अगर में एक दस सल का बच्चा हूं
- 1:45–1:48तो मुझे भूतो का कबड़ी खिलना तो समझ में आता है
- 1:48–1:51लेकिन एक अडिटर, बलन्चषीट में फ्रोड गे से पख़ड रहा है
- 1:51–1:53वो मिरे लिये उबाउ होजाएगा
- 1:53–1:56बिलकुल उनका द्यान कहानी से तुट सकता है
- 1:56–2:02ये तो आज़्े आज़्े ज़े से आप हैरी पोटर पड़र हों और अग़्ानक से कहनी शेर मारकिट के रेगूलेशन्द पर शिफ्ट होग़ाए.
- 2:02–2:06तो इन भारी विश्षों को बच्छो तक पहचाने के लिए सुजाव क्या है?
- 2:06–2:07ज़ाव क्या है?
- 2:07–2:13ज़ा ये है कि इन आदूनीक और जटल समस्याउ को सीदे तकनी की शब्डो में समजाने के बजाए,
- 2:13–2:19कहानी में पहले से मुझुद जादूई ये तार्थवाद और रुपकों का सहार लिया जाना चाहीए.
- 2:19–2:22मदलब हम तकनीकी भाशा को जादूई भाशा में बडलतें
- 2:22–2:23एक्जाक्तेगटूएग।
- 2:23–2:27उदारन के लिए आई उज्वल वाले प्रसंख को लेते हैं
- 2:27–2:30जाए उसे एनलाईं जूए में फसाया जाता है
- 2:30–2:35अदिटल अरेस्ट के जाल में फ़साया जाता है
- 2:35–2:39अब इसे एक साइबर सेल की रिपोट की तरा समजाने के वजाए
- 2:39–2:42हम बा यानी दादी के चरित्र का अपियो कर सकते है
- 2:42–2:44अचा बा कैसे समजाएंगी से
- 2:44–2:47बा बच्छों को इसे स्क्रीन की गोई
- 2:47–2:50मतलब मобाईके मगर मचके रूप में समजा सकती है
- 2:50–2:52वो कहे सकती है कि
- 2:52–2:55नदी की गोई तो केवल शरीर निगलती है
- 2:55–2:57अग बच्चा शिस्तमाटिक लिस्क नहीं समथ सकता
- 2:57–2:59लेक एक अज़े अच्छस को समथ सकता है
- 2:59–3:01जो स्क्रीन के अंदर से खार रहा है
- 3:01–3:03और थीक इसी तरा हम
- 3:03–3:05करप्रट भश्टा चार
- 3:05–3:07और अडटिटिंग की प्रक्रीया
- 3:07–3:09अग बच्टा चार
- 3:09–3:12उसे खागजी बीमारी के रूप में चित्रित किया जा सकता है
- 3:12–3:13खागजी बीमारी
- 3:13–3:17अग, एक असी रहस्से मैं बीमारी जो अनसानो को नहीं
- 3:17–3:19बलकी सरकार जाता है
- 3:19–3:22बलकी विप अगजी बीमारी बीमारी
- 3:22–3:25अगजी बीमारी बीमारी बीमारी बीमारी बीमारी
- 3:25–3:29अदिटाग को भी दाल सकते हैं. गोप कुमार जो अडिट कर रहा है,
- 3:29–3:33उसे एक काखजी बिमारी के रूप में चित्रित किया जा सकता है.
- 3:33–3:34काखजी बिमारी?
- 3:34–3:38अग, एक आसी रहस्सेमए बिमारी जो अनसानो को नहीं
- 3:38–3:40बलकी सरकारी काखजों को लकती है.
- 3:40–3:44ज़हां जिन्दा लोग अचानक म्रित गोषिथ होछाते हैं
- 3:44–3:49और बाब दा सकते हैं कि इस भीमारी का एक मात्र इलाज हैं
- 3:49–3:52सच्चे नाम का जोर से उच्चारन करना
- 3:52–3:57इस तरा वो अडिटिंकी उबाओ प्रक्रिया बच्चों के लिए एक जादुई लडाई बन जाती है
- 3:57–4:27बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवा�
- 4:27–4:31तो बदे लेक्खख का संदेश इस जादू के निचे दब तो नहीं जाएगा?
- 4:31–4:34ये एक बहुत फी वाजवप चिंता है.
- 4:34–4:38लेक्खख का शंदेश इस जादू के निचे दब तो नहीं जाएगा?
- 4:38–4:41ये एक बहुत फी वाजवप चिंता है.
- 4:41–4:43उसके अन्वाद के तरीका बडल दें
- 4:43–4:44अन्वाद के तरीका
- 4:44–4:49अग, देखे लोग कताई या फोक्लोर, कभी भी सती ही नहीं होते
- 4:49–4:54वे असल में जटल सत्यों और समाज के सबसे गेरे दर्दों को देकोड करने का
- 4:54–4:56सबसे बेतरीं साधन रहे हैं
- 4:56–5:01जब दादी काखजी बिमारी की बात करती है, तो वो अन्याय कम नहीं होता.
- 5:01–5:05वो बस एक आँसे आकार में आजाता है, जिसे बच्चा महसुस कर सके.
- 5:05–5:12बिल्कुल, रूपक सन्टेश को कमजोर नहीं करते, वे उसे एक सर्वबहविग बाशा देते है.
- 5:12–5:22या एक बहुत ही सुन्दर व्याख्या है, रूपक असल में सच्चाई को चुपाते नहीं, बलकी उसे उस भाशा में बोलते हैं, जिसे रिदै समचता है.
- 5:22–5:29तु चुकि हम काखजों और आदूनिक विशियों को लोक कताएगों के चष्मे से देखने की बात कर रहे हैं
- 5:29–5:31चलि ये थोडा सन्दचना पर बात करते हैं
- 5:31–6:01अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ�
- 6:01–6:31तो बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बव
- 6:31–6:34परते समे बलकुल यही महसुस कर रहा था
- 6:34–6:37मतलब जब लेखख दो रवग रवग टाम्लाईं इस्तमाल करते हैं
- 6:37–6:42तो उदेशी ये दिखाना होता है कि अटीत के पाप वर्त्मान में कैसे गुँज रहे हैं
- 6:42–6:46लेकिन यहा उन दोनो युगों के भीच कोई प�ल ही नहीं हैं
- 6:46–6:47अब बस टेलीपोड हो जातें
- 6:47–6:48सही कहा
- 6:48–6:51तो इस सन्रषनात्मक खाई को पाटने किलिए
- 6:51–6:52क्या सुजाव है?
- 6:52–6:56अटीत और वर्तमान की इन दो अलक दुन्याव को
- 6:56–6:58एक निरबाद सुत्र में पिरोने किलिए
- 6:58–7:02किसी बहुतिक वस्तु या जादोई गटना का उप्योग
- 7:02–7:05एक मस्वूथ कत्ठापौल के रूप में किया जाना जाहे.
- 7:05–7:07किसी बहुतिक वस्तूग का उप्योग
- 7:07–7:10जैसे कोई आसा अबजेग जो समें के साथ सब़ कर राओ?
- 7:10–7:11भिल्कुल.
- 7:11–7:15उदारन के तोर पर हम नन्द आरूनी की उस मुल डाईरी का उप्योग कर सकते है,
- 7:15–7:18जिस में अस्वे पहली बार चबाक कहिसाब लिखा था
- 7:18–7:20अहो उ वो दाईरी
- 7:20–7:23कलपना की जे की आदनिक समय में
- 7:23–7:26इरा या गोप कुमार अपनी जाज के दोरान
- 7:26–7:29किसी पूरानी दूल भरी पेटी से
- 7:29–7:31वो दाईरी कोज निकालते है
- 7:31–7:33उस दाईरी के पन्ने
- 7:33–7:35उसे दबे हुए पुराने पत्ते
- 7:35–7:38वो कहानी को अतीज से वर्त्मान में
- 7:38–7:40खीच कर लासकते हैं
- 7:40–7:42मुजे इस इसे में जो बात पहले से बहुत पसन्द है
- 7:42–7:44वो ये है कि एरा
- 7:44–7:48हाववर्ट की लिबरेरी में पुराने पत्रों के जर्ये इस सच तक पहुचती है
- 7:48–7:54इक तरव दून्या की सबसे आदूनिक लावरेरी और दूसरी तरव भीहार के एक गाँ की मिट्टी
- 7:54–7:56बहुती शकती शाली कोंट्रास्ट है
- 7:56–8:01लेकिं जैसा कि आप खैरे हैं इसे केवल बाग्राउन अन्पमेशन तक सीमित नहीं रखना जाहीए
- 8:01–8:06उस दाईरी को कता का मुख्य प्रेरग बल, मडलब द्राएविंग फोर्स बना चाहीए.
- 8:06–8:09क्या हम इसके लिए बूपोंटोंवाले हिस्से का भी कुछ अस्तमाल कर सकते है?
- 8:09–8:10निष्चित रूप से.
- 8:10–8:13एक और उदारन ये हो सकता है,
- 8:13–8:15कि चन्ना गाची के बूद,
- 8:15–8:18जो अप तक अपने खेल में केवल सीरिय।
- 8:18–8:20या पुराने मस्धूरों का नाम पुकारते थे
- 8:20–8:24वे अचानक कबद्टी खेलते हुए किसी रात
- 8:24–8:28उज्वल या पूल्मति का नाम पुकारना शूरूकर दें
- 8:28–8:30औरे वाआ, नै आदूनिक नाम
- 8:30–8:35आदूनेक किरदारों के बुजुर गे सूनकर चोग जाएं कि ये नैं आम किसके है?
- 8:36–8:40यही रहेस्या आदूनेक किरदारों को उनके गाँ वापिस ले आए.
- 8:40–8:42एक मिनेट, मैं या थोड़ा सवूलज राहूं.
- 8:42–8:47अगर भूट पहले से ही उज्वल या प्वौल्मती का नाम पुकारने लगेंगे,
- 8:47–8:53तो क्या इस से आदूनिक किरदारों की कहनी का सुस्पैंस कहत्मनी हो जाएगा?
- 8:53–8:57गाँवालों को तो पहले पता चल जाएगा ना कि शहर में कुछ बुला हो राए.
- 8:57–8:59ये बहुत ही दिलच्छप सवाल है
- 8:59–9:02लेकिन यहा सस्पैंस खत्म नहीं होता
- 9:03–9:05बलकी वो द्रमाटिक आईरनी का रूप ले लेता है
- 9:05–9:06कैसे?
- 9:06–9:09दिक्ये, बूतो को कोई कुई कुन्टेक्स्ट नहीं पता
- 9:09–9:12वे ये नहीं जानते कि दिजितल अरेस्ट क्या है
- 9:12–9:17वे केवल इतना जानते है, कि सिस्टम ने एक और नाम निगल लिया है.
- 9:17–9:24तो जब वे उज्वल पुकारते है, तो गाँवालों के लिए यह एक रहेस ने बन जाता है, कि यह उज्वल आखेर है कोन?
- 9:24–9:27अच्छा, मतलब बेचैनी बड़ जाती है.
- 9:27–9:34बिल्कुल ये बेचेनी ही किर्दारों को शेहेर से गाँ और गाँ से शेहेर बहगने पर मजबोर करेगी
- 9:34–9:39बूथ अतीत और वर्तमान के बीच सबसे मस्बुज जादूई पुल बन सकते हैं
- 9:39–9:42अब मुझे ये पुरी टरा स्पष्ट होगया है
- 9:42–9:45तो ये ब्रिज ख्छ स्वग दो ताईम लैंस को नहीं जोड रहा,
- 9:45–9:49बलके गाँ के जादू और शेहर के याठार्त को भी गूत रहा है.
- 9:49–9:50एक दम सही.
- 9:50–9:52और जब ये सारे दहगे आपस में जूडते हैं,
- 9:52–9:56तो हम कहानी के चरमोद कर्ष या क्लािमैक्स की तरव बड़ते हैं
- 9:56–9:59जहाँ गोप कुमार, सोम्या और मीरा मिलकर
- 9:59–10:01इस दिजितल जाल का परदबाश करते हैं
- 10:01–10:03कहानी के अंतिम बहाग में
- 10:03–10:08जादूई या तार्टवाद और आदूनेक जाज प्रक्रिया के तठोंके भीज का सन्तूलन,
- 10:08–10:12पूरी तहां से तूटकर, केवल जाज प्रक्रिया की और जुग जाता है.
- 10:12–10:15जी मैंने भी नोटिस किया?
- 10:15–10:18ये जी जाज़ाफ्ट के एक बहुत बडी कम्जोरी है.
- 10:18–10:23शुर्वात में ज़ादूई दूनिया ती वो पीपर का पेर जिस पर ब्रम्मा बेटे हैं
- 10:23–10:28वो नाम बचाने वाले बूथ वो पूरी दूनिया क्लामेक साते आते गाया बोजाती है
- 10:28–10:33अंद में कहनी पूरी तरान से एक कानूनी या कोरपरेट खुलर बन जाती है
- 10:33–10:39बिल्कुल हम केवल प्रेस कुन्फरन्स और अडिट फायल्स के इड्किर्द गूम ते रहे जाते है.
- 10:39–10:45किताब अपनी वो मूल जादूई आप्मा खोदेती है, जिसने पाटख को शुर्वात में बान्दा था.
- 10:45–10:50सही बाथ है, अगर अपने पाटक से एक जादूई दुन्या का वादा किया है,
- 10:50–10:55तो उस जादूग को समादान के समई भी कम्रे मोझुद होना चाहीए,
- 10:55–10:58वरना पाटक ख़गा हूँँ मैहसुस करेगा.
- 10:58–11:00तो सुजाव क्या है?
- 11:00–11:12सुजाव ये है कि चरमोद करष के दोरान जो आदूनिक जीद के शन हैं उने सीदे तोर पर गाँँके जादूई तत्वों की प्रतिक्रिया के साथ गुथा जाना चाहीए.
- 11:12–11:15मतलब दोनो दून्याँ को एक साथ साथ शाथ लेनी चाहीए.
- 11:15–11:45अग्जाख्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट
- 11:45–11:47बहुत इप पावर्फल मुमिंट है
- 11:47–11:50है ना? ये एक मेड्या द्रिविन शान है
- 11:50–11:54लेकिन तीक उसी शान कता को कत करके गाँ लेजाया जाये
- 11:54–11:59वहार रात का सनाटा है और चन्ना गाची के उसुके तुछ मे
- 11:59–12:03अचानक एक नहीं हरी पती फुडती वी दिखाए जाये
- 12:03–12:12अफ, रोंक्ते कडे कर देने वाला द्रिष्चे है, एक तरव सक्रीन पर उसका नाम गूज रहा है, और दूसरी तरव प्रक्रती उसे वापस स्विकार कर रही है.
- 12:12–12:15और हम गोप कुमार के द्रिषे के साथ भी एसा ही कर सकते हैं
- 12:15–12:20जब वो कमपूटर सक्रीन पर ब्रष्ट कोड एन र सवंटी सेवन को करत करत था है
- 12:20–12:25तो सक्रीन पर अचानक पानी की एक अस्ली बूंद गिरने का जादूई एहसाज हो
- 12:25–12:26पानी की बूंद?
- 12:26–12:29आप दिजितल दून्या के सर्वर्स के भीटर बी पूज रहा है
- 12:29–12:32मैं यह आप देवल्ज अद्वोकेट की बूमिका निभाना चाहूंगा
- 12:32–12:35आप देवल्ज अद्वोकेट की बूमिका निभाना चाहूंगा
- 12:35–12:39अगर अदूनिक पात्रों की जो मानवी ये महनत है, वो कमतर लगने लगेगी.
- 12:39–12:44मेरे मतलब है, मीरा का सहास, या गोप कुमार की महीनो की उबाओ अडटिटिं,
- 12:44–12:48अगर अन्त में सब कुछ जादूई चमतकार जैसा लगने लगेगा,
- 12:48–12:50मीरा का सहास
- 12:50–12:52या गोप कुमार की महीनो की उबाओ अडटिटिं
- 12:52–12:54अगर अन्त में सब कुछ
- 12:54–12:56जादूई चमतकार जैसा लगने लगेगा
- 12:56–12:58तो पाट़ कै सकता है की
- 12:58–13:00औरे ये तो जादूने कर दिया
- 13:00–13:02ये एक बेहद महत्वपोण बिन्दू है
- 13:02–13:06अद लिखखख को इसे लिकते समवे बहुत सावदान रहना होगा
- 13:06–13:10लेकिन यही पर हमें जादू से समस्या सुलजाने
- 13:10–13:14और जादू दवारा गवाही देने के भीच्ख का फरक समजना होगा
- 13:14–13:15अच्छा
- 13:15–13:18हम यहां जादूई तत्वों से कमपुटर हैक नहीं करवारे है
- 13:18–13:25बूटा कर विलन को नहीं मार रहें, समादान पूरी तरा से पात्रो की मानविये महनत से ही निकल रहा है.
- 13:25–13:31जादू के वल उस मानविये जीत को वलिटेट कर रहा है, उसकी गवाही दे रहा है.
- 13:31–13:34यानी जादू कोई हत्यार नहीं है, वो बसे गवाह है.
- 13:34–13:41बिल्कुल, तीक वैसे ही जैसे गाएं की नदी लोगों के दुख की गवाही देती थी.
- 13:41–13:44वो उने दूबने से बचाती नहीं ती.
- 13:44–13:47जब अब अपने सच के लिए ख़़ा होता है,
- 13:47–13:50तो प्रक्रती बस उसका अबिवाडन करती है.
- 13:50–13:55पत्तिका उगना या चपाक की आवाज उसी अभिवादन का प्रतिक है
- 13:55–13:57ये सपष्टिकरन बहुत ही तारकिक है
- 13:57–14:01ये दिखाता है कि प्रक्रतिए और तकनीक आमने सामने नहीं कषडे हैं
- 14:01–14:06बलकी मान्विय संगर्ष के माद्ध्यम से वे एक ही सच्चका हिस्चा बन गयें।
- 14:06–14:13और ये इस कहानी की मुल बहावना की नाम कभी नहीं मरता के सात पुरी तरहन नयाय करता है।
- 14:13–14:14एक दम सही
- 14:14–14:18तो आजकी इस गेहरी और बहध दिल्चस्प बाज्चीट को समेट ते हुए
- 14:31–14:38उस्ट्रा अपने श्ट्रक्छर को देखा उनिस्ट्टर के अटियासिक गटनक्रमो और वर्टमान की समस्याँ के भीचके अचानक बडलाउ को रोकने किल एक मस्वूथ कठाप्पूल बना वश्षक है.
- 14:38–14:40दाईरी या भूथों का उप्योख कर के.
- 14:40–15:10बलकोड, दुस्रा हमने स्ट्रक्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्
- 15:10–15:12प्रतिक्र्याँ के साथ जोडा जाना जाहीए
- 15:12–15:14जाजादो को समस्या नहीं सुल्जानी
- 15:14–15:17बस मानविए जीट का गवाह बनना है
- 15:17–15:18बलको सही
- 15:18–15:20इस रच्ना की वेचारे गेराई वास्तो में
- 15:20–15:21बहुती शक्तिषाली है
- 15:21–15:23ये उन लोगो को आवाज देता है
- 15:23–15:53अप नहीं बज़ाप तब पर विज़्ेश़ तब पर विज़्ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब �
- 15:53–15:54बहुत भहुत द्ध्ध्ध्धधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधध�
Plain text
स्वागत है, आज हम गोही सवक भीच जल समादी पर गेरी चर्चा कर रहे हैं, जो एक जादूई यथार्थ्वादी कता है, जाहां गाँउ के भूथ चन्नागाची के नीचे कबद्दी खेल कर विवस्था दूरा बुला दिये गाए लोगो के नामों को जिन्दा रकते हैं. तो सीले पहले बात पर आते हैं चुकी इसे विशेश रूप से एक बाल संसकरन के रूप में प्रस्थूत की आगया है मेरा पहला सवाल यही है की वूँँँँँ क्या इस सामगरी की जतलता बच्छो कि लिए उप्युक थे बाल संसकरन के रूप में प्रस्थ। इस रच्ना में आदूनिक अप्रादों और विवस्थागत भ्रष्टाचार जैसे जटिल विष्यों का समावेश इसकी पहुच को यूवा पाधखों किलिए चुनोती पूरन बनाता है. अचा. अचा. मतला, कमजोरी यहे, कहानी में एक तरव तो बहुत ही जादूई और समोहक लोक कतावाँ वाले तत्व हैं. जैसे की बुदवा भूथ और हुलासी वाले हिसे. भिलकुल. और चनागा चीका वो पेड, ये हिसा बच्छो को तुरन तबनी वोर किझचता है. लेकिन दूस्री तरव कहानी अचानक बिना किसी फिल्तर के, दिजितल अरेस्ट और फर्जी अख्सिजन सपलाई आप फर्जी अख्सिजन सपलाई कोड एन आर सवंटी सबन और करपरेट धोखादड़ी जैसे अत्यदिदिग गंभीर और व्यस्क विष्यों में उतर जाती है बच्छो के लिए यें कोरपरेट गुटालों और अडिटिंग प्रक्रिया के तक्नी की बारी क्यों को समझना भगत भारी पर सकता है सईब आत है, एक दं सिर क्यो पर से निकल जाएगा मतलब अगर में एक दस सल का बच्चा हूं तो मुझे भूतो का कबड़ी खिलना तो समझ में आता है लेकिन एक अडिटर, बलन्चषीट में फ्रोड गे से पख़ड रहा है वो मिरे लिये उबाउ होजाएगा बिलकुल उनका द्यान कहानी से तुट सकता है ये तो आज़्े आज़्े ज़े से आप हैरी पोटर पड़र हों और अग़्ानक से कहनी शेर मारकिट के रेगूलेशन्द पर शिफ्ट होग़ाए. तो इन भारी विश्षों को बच्छो तक पहचाने के लिए सुजाव क्या है? ज़ाव क्या है? ज़ा ये है कि इन आदूनीक और जटल समस्याउ को सीदे तकनी की शब्डो में समजाने के बजाए, कहानी में पहले से मुझुद जादूई ये तार्थवाद और रुपकों का सहार लिया जाना चाहीए. मदलब हम तकनीकी भाशा को जादूई भाशा में बडलतें एक्जाक्तेगटूएग। उदारन के लिए आई उज्वल वाले प्रसंख को लेते हैं जाए उसे एनलाईं जूए में फसाया जाता है अदिटल अरेस्ट के जाल में फ़साया जाता है अब इसे एक साइबर सेल की रिपोट की तरा समजाने के वजाए हम बा यानी दादी के चरित्र का अपियो कर सकते है अचा बा कैसे समजाएंगी से बा बच्छों को इसे स्क्रीन की गोई मतलब मобाईके मगर मचके रूप में समजा सकती है वो कहे सकती है कि नदी की गोई तो केवल शरीर निगलती है अग बच्चा शिस्तमाटिक लिस्क नहीं समथ सकता लेक एक अज़े अच्छस को समथ सकता है जो स्क्रीन के अंदर से खार रहा है और थीक इसी तरा हम करप्रट भश्टा चार और अडटिटिंग की प्रक्रीया अग बच्टा चार उसे खागजी बीमारी के रूप में चित्रित किया जा सकता है खागजी बीमारी अग, एक असी रहस्से मैं बीमारी जो अनसानो को नहीं बलकी सरकार जाता है बलकी विप अगजी बीमारी बीमारी अगजी बीमारी बीमारी बीमारी बीमारी बीमारी अदिटाग को भी दाल सकते हैं. गोप कुमार जो अडिट कर रहा है, उसे एक काखजी बिमारी के रूप में चित्रित किया जा सकता है. काखजी बिमारी? अग, एक आसी रहस्सेमए बिमारी जो अनसानो को नहीं बलकी सरकारी काखजों को लकती है. ज़हां जिन्दा लोग अचानक म्रित गोषिथ होछाते हैं और बाब दा सकते हैं कि इस भीमारी का एक मात्र इलाज हैं सच्चे नाम का जोर से उच्चारन करना इस तरा वो अडिटिंकी उबाओ प्रक्रिया बच्चों के लिए एक जादुई लडाई बन जाती है बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवाग बवा� तो बदे लेक्खख का संदेश इस जादू के निचे दब तो नहीं जाएगा? ये एक बहुत फी वाजवप चिंता है. लेक्खख का शंदेश इस जादू के निचे दब तो नहीं जाएगा? ये एक बहुत फी वाजवप चिंता है. उसके अन्वाद के तरीका बडल दें अन्वाद के तरीका अग, देखे लोग कताई या फोक्लोर, कभी भी सती ही नहीं होते वे असल में जटल सत्यों और समाज के सबसे गेरे दर्दों को देकोड करने का सबसे बेतरीं साधन रहे हैं जब दादी काखजी बिमारी की बात करती है, तो वो अन्याय कम नहीं होता. वो बस एक आँसे आकार में आजाता है, जिसे बच्चा महसुस कर सके. बिल्कुल, रूपक सन्टेश को कमजोर नहीं करते, वे उसे एक सर्वबहविग बाशा देते है. या एक बहुत ही सुन्दर व्याख्या है, रूपक असल में सच्चाई को चुपाते नहीं, बलकी उसे उस भाशा में बोलते हैं, जिसे रिदै समचता है. तु चुकि हम काखजों और आदूनिक विशियों को लोक कताएगों के चष्मे से देखने की बात कर रहे हैं चलि ये थोडा सन्दचना पर बात करते हैं अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ� तो बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बवागा बव परते समे बलकुल यही महसुस कर रहा था मतलब जब लेखख दो रवग रवग टाम्लाईं इस्तमाल करते हैं तो उदेशी ये दिखाना होता है कि अटीत के पाप वर्त्मान में कैसे गुँज रहे हैं लेकिन यहा उन दोनो युगों के भीच कोई प�ल ही नहीं हैं अब बस टेलीपोड हो जातें सही कहा तो इस सन्रषनात्मक खाई को पाटने किलिए क्या सुजाव है? अटीत और वर्तमान की इन दो अलक दुन्याव को एक निरबाद सुत्र में पिरोने किलिए किसी बहुतिक वस्तु या जादोई गटना का उप्योग एक मस्वूथ कत्ठापौल के रूप में किया जाना जाहे. किसी बहुतिक वस्तूग का उप्योग जैसे कोई आसा अबजेग जो समें के साथ सब़ कर राओ? भिल्कुल. उदारन के तोर पर हम नन्द आरूनी की उस मुल डाईरी का उप्योग कर सकते है, जिस में अस्वे पहली बार चबाक कहिसाब लिखा था अहो उ वो दाईरी कलपना की जे की आदनिक समय में इरा या गोप कुमार अपनी जाज के दोरान किसी पूरानी दूल भरी पेटी से वो दाईरी कोज निकालते है उस दाईरी के पन्ने उसे दबे हुए पुराने पत्ते वो कहानी को अतीज से वर्त्मान में खीच कर लासकते हैं मुजे इस इसे में जो बात पहले से बहुत पसन्द है वो ये है कि एरा हाववर्ट की लिबरेरी में पुराने पत्रों के जर्ये इस सच तक पहुचती है इक तरव दून्या की सबसे आदूनिक लावरेरी और दूसरी तरव भीहार के एक गाँ की मिट्टी बहुती शकती शाली कोंट्रास्ट है लेकिं जैसा कि आप खैरे हैं इसे केवल बाग्राउन अन्पमेशन तक सीमित नहीं रखना जाहीए उस दाईरी को कता का मुख्य प्रेरग बल, मडलब द्राएविंग फोर्स बना चाहीए. क्या हम इसके लिए बूपोंटोंवाले हिस्से का भी कुछ अस्तमाल कर सकते है? निष्चित रूप से. एक और उदारन ये हो सकता है, कि चन्ना गाची के बूद, जो अप तक अपने खेल में केवल सीरिय। या पुराने मस्धूरों का नाम पुकारते थे वे अचानक कबद्टी खेलते हुए किसी रात उज्वल या पूल्मति का नाम पुकारना शूरूकर दें औरे वाआ, नै आदूनिक नाम आदूनेक किरदारों के बुजुर गे सूनकर चोग जाएं कि ये नैं आम किसके है? यही रहेस्या आदूनेक किरदारों को उनके गाँ वापिस ले आए. एक मिनेट, मैं या थोड़ा सवूलज राहूं. अगर भूट पहले से ही उज्वल या प्वौल्मती का नाम पुकारने लगेंगे, तो क्या इस से आदूनिक किरदारों की कहनी का सुस्पैंस कहत्मनी हो जाएगा? गाँवालों को तो पहले पता चल जाएगा ना कि शहर में कुछ बुला हो राए. ये बहुत ही दिलच्छप सवाल है लेकिन यहा सस्पैंस खत्म नहीं होता बलकी वो द्रमाटिक आईरनी का रूप ले लेता है कैसे? दिक्ये, बूतो को कोई कुई कुन्टेक्स्ट नहीं पता वे ये नहीं जानते कि दिजितल अरेस्ट क्या है वे केवल इतना जानते है, कि सिस्टम ने एक और नाम निगल लिया है. तो जब वे उज्वल पुकारते है, तो गाँवालों के लिए यह एक रहेस ने बन जाता है, कि यह उज्वल आखेर है कोन? अच्छा, मतलब बेचैनी बड़ जाती है. बिल्कुल ये बेचेनी ही किर्दारों को शेहेर से गाँ और गाँ से शेहेर बहगने पर मजबोर करेगी बूथ अतीत और वर्तमान के बीच सबसे मस्बुज जादूई पुल बन सकते हैं अब मुझे ये पुरी टरा स्पष्ट होगया है तो ये ब्रिज ख्छ स्वग दो ताईम लैंस को नहीं जोड रहा, बलके गाँ के जादू और शेहर के याठार्त को भी गूत रहा है. एक दम सही. और जब ये सारे दहगे आपस में जूडते हैं, तो हम कहानी के चरमोद कर्ष या क्लािमैक्स की तरव बड़ते हैं जहाँ गोप कुमार, सोम्या और मीरा मिलकर इस दिजितल जाल का परदबाश करते हैं कहानी के अंतिम बहाग में जादूई या तार्टवाद और आदूनेक जाज प्रक्रिया के तठोंके भीज का सन्तूलन, पूरी तहां से तूटकर, केवल जाज प्रक्रिया की और जुग जाता है. जी मैंने भी नोटिस किया? ये जी जाज़ाफ्ट के एक बहुत बडी कम्जोरी है. शुर्वात में ज़ादूई दूनिया ती वो पीपर का पेर जिस पर ब्रम्मा बेटे हैं वो नाम बचाने वाले बूथ वो पूरी दूनिया क्लामेक साते आते गाया बोजाती है अंद में कहनी पूरी तरान से एक कानूनी या कोरपरेट खुलर बन जाती है बिल्कुल हम केवल प्रेस कुन्फरन्स और अडिट फायल्स के इड्किर्द गूम ते रहे जाते है. किताब अपनी वो मूल जादूई आप्मा खोदेती है, जिसने पाटख को शुर्वात में बान्दा था. सही बाथ है, अगर अपने पाटक से एक जादूई दुन्या का वादा किया है, तो उस जादूग को समादान के समई भी कम्रे मोझुद होना चाहीए, वरना पाटक ख़गा हूँँ मैहसुस करेगा. तो सुजाव क्या है? सुजाव ये है कि चरमोद करष के दोरान जो आदूनिक जीद के शन हैं उने सीदे तोर पर गाँँके जादूई तत्वों की प्रतिक्रिया के साथ गुथा जाना चाहीए. मतलब दोनो दून्याँ को एक साथ साथ शाथ लेनी चाहीए. अग्जाख्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट बहुत इप पावर्फल मुमिंट है है ना? ये एक मेड्या द्रिविन शान है लेकिन तीक उसी शान कता को कत करके गाँ लेजाया जाये वहार रात का सनाटा है और चन्ना गाची के उसुके तुछ मे अचानक एक नहीं हरी पती फुडती वी दिखाए जाये अफ, रोंक्ते कडे कर देने वाला द्रिष्चे है, एक तरव सक्रीन पर उसका नाम गूज रहा है, और दूसरी तरव प्रक्रती उसे वापस स्विकार कर रही है. और हम गोप कुमार के द्रिषे के साथ भी एसा ही कर सकते हैं जब वो कमपूटर सक्रीन पर ब्रष्ट कोड एन र सवंटी सेवन को करत करत था है तो सक्रीन पर अचानक पानी की एक अस्ली बूंद गिरने का जादूई एहसाज हो पानी की बूंद? आप दिजितल दून्या के सर्वर्स के भीटर बी पूज रहा है मैं यह आप देवल्ज अद्वोकेट की बूमिका निभाना चाहूंगा आप देवल्ज अद्वोकेट की बूमिका निभाना चाहूंगा अगर अदूनिक पात्रों की जो मानवी ये महनत है, वो कमतर लगने लगेगी. मेरे मतलब है, मीरा का सहास, या गोप कुमार की महीनो की उबाओ अडटिटिं, अगर अन्त में सब कुछ जादूई चमतकार जैसा लगने लगेगा, मीरा का सहास या गोप कुमार की महीनो की उबाओ अडटिटिं अगर अन्त में सब कुछ जादूई चमतकार जैसा लगने लगेगा तो पाट़ कै सकता है की औरे ये तो जादूने कर दिया ये एक बेहद महत्वपोण बिन्दू है अद लिखखख को इसे लिकते समवे बहुत सावदान रहना होगा लेकिन यही पर हमें जादू से समस्या सुलजाने और जादू दवारा गवाही देने के भीच्ख का फरक समजना होगा अच्छा हम यहां जादूई तत्वों से कमपुटर हैक नहीं करवारे है बूटा कर विलन को नहीं मार रहें, समादान पूरी तरा से पात्रो की मानविये महनत से ही निकल रहा है. जादू के वल उस मानविये जीत को वलिटेट कर रहा है, उसकी गवाही दे रहा है. यानी जादू कोई हत्यार नहीं है, वो बसे गवाह है. बिल्कुल, तीक वैसे ही जैसे गाएं की नदी लोगों के दुख की गवाही देती थी. वो उने दूबने से बचाती नहीं ती. जब अब अपने सच के लिए ख़़ा होता है, तो प्रक्रती बस उसका अबिवाडन करती है. पत्तिका उगना या चपाक की आवाज उसी अभिवादन का प्रतिक है ये सपष्टिकरन बहुत ही तारकिक है ये दिखाता है कि प्रक्रतिए और तकनीक आमने सामने नहीं कषडे हैं बलकी मान्विय संगर्ष के माद्ध्यम से वे एक ही सच्चका हिस्चा बन गयें। और ये इस कहानी की मुल बहावना की नाम कभी नहीं मरता के सात पुरी तरहन नयाय करता है। एक दम सही तो आजकी इस गेहरी और बहध दिल्चस्प बाज्चीट को समेट ते हुए उस्ट्रा अपने श्ट्रक्छर को देखा उनिस्ट्टर के अटियासिक गटनक्रमो और वर्टमान की समस्याँ के भीचके अचानक बडलाउ को रोकने किल एक मस्वूथ कठाप्पूल बना वश्षक है. दाईरी या भूथों का उप्योख कर के. बलकोड, दुस्रा हमने स्ट्रक्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च् प्रतिक्र्याँ के साथ जोडा जाना जाहीए जाजादो को समस्या नहीं सुल्जानी बस मानविए जीट का गवाह बनना है बलको सही इस रच्ना की वेचारे गेराई वास्तो में बहुती शक्तिषाली है ये उन लोगो को आवाज देता है अप नहीं बज़ाप तब पर विज़्ेश़ तब पर विज़्ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेश़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब विज़ेच़ तब � बहुत भहुत द्ध्ध्ध्धधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधधध�