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मीरांसाहब_और_नूनजागढ़_की_खूनी_विरासत.m4a
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- 0:00–0:11मुझे लकता है, आजके इस विस्त्रित विष्लेशन की शुर्वात हमें एक बहुत लिए अजीब सी कल्पना के साथ करनी चाहिए अच्छा कैसी कल्पना?
- 0:11–0:18मडलब, सोचकर देख्ये एक अजे गर के बारे में, जहां, हत्यारों का नामो निशान तक मिता दिया गया हो.
- 0:18–0:20बिलकुज जहाए कुई हाथ्यार ना हो
- 0:20–0:22अग, मतलब जहाए एक माने
- 0:22–0:25हर उस चीस को बहुत गेराई में दफना दिया हो
- 0:25–0:27जो यूध, खॉन
- 0:27–0:30या अखाडे की जरासी भी याध दिलाती हो
- 0:30–0:31सईभाते
- 0:31–0:33उसका एक मात्र लक्षे बस ये है
- 0:33–0:37यह कि उसका बच्चा कभी हिन्सा का चेहरा ही न देखे
- 0:37–0:41लेकिन फिर भी वो पाथ साल का बच्चा बाहार
- 0:41–0:42मिट्टी से किले बनारा है
- 0:42–0:43और वाआ
- 0:43–0:46और एक सादारन लक्डी को हाथ में लेकर
- 0:46–0:48किसी कुषल योद्धा कितर है
- 0:48–0:50हवामे तलवार कितर बहांज रहा है
- 0:50–0:58मतलब, ये एक ये साथ द्रिष्षे है, जो एक बहुत लिग गे़े और आज सहज करने वाले मनोविग्यानिक सवाल को जन्म देता है.
- 0:58–1:03एक दम सेगी का आपने. ये सच्मे एक ये साथ द्रिष्षे है, जो सद्यो पुराने उस संगर्ष को सामने लाख हडा करता है,
- 1:03–1:07जिसे हम मनोविग्यान में प्रक्रती बनाम पालन पोषन
- 1:07–1:10या कहें के नेच्छर वर्सिज नर्चर कहतें।
- 1:10–1:12प्र कुछ अजा भी होता है, जो हमारी रगो में बसा हो।
- 1:12–1:15हां, जो हमारी इतिहास में बहुत गेरे तक बसा होता है।
- 1:15–1:18और आजके हमारी इस गेरे चर्चा में,
- 1:18–1:22हम टीक इसी जटल संगर्ष के पर्टों को उदेरने वाले है.
- 1:22–1:25हमारे पास, गजेंद्र ताकुर दूरा रचित,
- 1:25–1:28विदे ही पत्रिका का एक बहुत इखास अंश है.
- 1:28–1:30जी, जिसका शीर्षक है,
- 1:30–1:3215 underscore miransahab.pdf
- 1:32–1:36भलकोल, ये मित्ला के दिल्रीनगर की एक एतिहासेक
- 1:36–1:39और बहध बहवोक लोग कता है
- 1:39–1:42और मैं बतादुं कि इस चर्चा का हमारा मुख्य मिशन
- 1:42–1:44सर्फिक पुरानी कहानी को जनना नहीं है
- 1:44–1:45सही बाते
- 1:45–1:48बलकी, हम उस मनोविग्यानिक तन्त्र को
- 1:48–1:50उस्मेकानिजम को समजना चाहते है,
- 1:50–1:52तब सक्क्रीय होता है,
- 1:52–1:54जब अप अपने चुनी हुई परवरिष,
- 1:54–1:56और उसकी जन्मजात नियती,
- 1:56–1:58आमने सामने आप्टक राती है.
- 1:58–2:01गजेंद्र ताकोर ने इस कता के माद्धिम से,
- 2:01–2:03जिस गेराई को चूए है,
- 2:03–2:05मैं कोंगा कि वो असाथारन है
- 2:05–2:09मतलब ये कहानी सता पर एक योड़ा की गाथा लक सकती है
- 2:09–2:11अपर से देखने पर
- 2:11–2:13बलकोल लेकिन इसके भीटर जाखने पर पता चलता है कि
- 2:13–2:16ये असल में पीटीों से चले आरहे दरद
- 2:16–2:18अगोषित पारिवारेक आगाद
- 2:18–2:23अर उस मुक संगर्ष्का दस्तावेज ये उन गरूँ की दिवारों के भीतर लडाजाता है.
- 2:23–2:27जहां अतीट का साया बहुत भारी होता है आप आप आप बलकुल.
- 2:27–2:30उस युग में तल्वाने के वल लोहे के तुक्डे मिहीवा करती ती.
- 2:30–2:35वे एक पुरी जीवनषेली और एक कछोर पहचान का प्रतिक थी
- 2:35–2:37और इसी पहचान को समजने के ले
- 2:37–2:40हमें कहानी के बलकुल केंदर में चलना होगा
- 2:40–2:43दिलरी नगर की उस प�रानी हवेली में
- 2:43–2:45हां, उस सैयत परवार की हवेली में
- 2:45–2:50मिलकुल, ये एक बहुती सम्मानित और दर्म परायन, सैयत परिवार का गर है.
- 2:50–2:53स्रोथ में इस गर की सुबहा का जो वरनन मेंने पडा,
- 2:54–2:56वो अपने आप में पुरा समाच शास्तर समेटे होई आप.
- 2:56–2:58बहुती सुदर वरनन है वो.
- 2:58–3:04प्लब सोचिये सुबा कि शुर्वाद नमास की एक आग्रता और शान्ती पोण प्राथना के साथ होती है.
- 3:04–3:12लेकिन उसी समय टिक उसी वकत अखाडे की मिट्टी से कुष्ती और तल्वार भाजी की खनकती अवाजग न भी आवाज़े एई होती है.
- 3:12–3:16उन्द के बाद्तना और दुच्ड का ब्यास.
- 3:16–3:20आँ पिता और उनके सभी बेटे एक सात गूड सवारी,
- 3:20–3:24तीरन्दाजी और यूध कोशल का ब्यास करते है.
- 3:24–3:28ये अद्धियात्मिक अनुशासन और शारी रिक अक्रामक्ता का एक
- 3:28–3:31बहुती अजीब, लेकिन शक्ती शारी मिष्रन है
- 3:31–3:34और देखिए इस मिष्रन को समजना बहुत जरूरी है
- 3:34–3:37क्युकि यही उस परिवार की मुल सन्रचना है
- 3:37–3:38वुई, कैसे?
- 3:38–3:41मतलब आद्दियात्मि कनुशासन उने ये सिक आता है,
- 3:41–3:43कि किस चीज के लिए लडना है.
- 3:43–3:43आच्छ, हाँ.
- 3:43–3:47और शारीडि कनुशासन उने ये सिक आता है,
- 3:47–3:48कि कैसे लडना है.
- 3:48–3:50लेकिन इस पूरी दिनचर्या,
- 3:50–3:54इस पूरे शक्ती प्रदश्छन को एक और नजर्या है, जो लगातार देख रहा है.
- 3:54–3:56गर की माँ का नजर्या.
- 3:56–3:57बलकुल.
- 3:57–4:02एक तरव वो अपने पती वो बेटो के इस खोषल पर एक स्वबभावे गर्व महिजुस करती है.
- 4:02–4:03जो के लाज्मे भी है?
- 4:03–4:33आँ, लेकिन स्रोथ बताता है, कि उसके सीने में एक अन कहा अद्रिष्ष दर भी बसा हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 4:33–4:36ये किसी भी दिन ये लावा पूट सकता है
- 4:36–4:37बिलकुल
- 4:37–4:40और ये उस युख के योद्दा परिवारों की महिलाव का
- 4:40–4:43एक बहुत ही कडवा समाज शास्तरी ये याठार्त था
- 4:44–4:47ये एक येख याचा सच ता जिस पर कभी खुलकर चर्चा नहीं हूती थी
- 4:47–4:49कोई बोलता नी ता इस बारे में
- 4:49–4:52लेकिन जो हर किसी के अवचेतन में मोझुद ता
- 4:52–4:53वो सच ये ता
- 4:53–4:56के अगर गर की दिवारों पर तल्वारे तंगी है
- 4:56–4:58और अखाडे में रोज ने पैना किया जारा है
- 4:58–5:01तो एक दिन वो तल्वारे गर से बहार जो जाएंगी
- 5:01–5:02इक दम सही
- 5:03–5:05एक दन आसा ज़ोर आएगा
- 5:05–5:08जब वे तल्वारें गर से बहार जाएंगी और वापिस नहीं आएगी
- 5:08–5:10कुकी युध्द का गनध बहुत सेदा होता है
- 5:11–5:14जो बहार जाता हो तोसके वापिस लोटने की कुई गारन्टी नहीं होती
- 5:14–5:16माखा उड़र असल में
- 5:16–5:46इसी आप परिहारिया त्राजदी के अपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना �
- 5:46–5:49माहवेली की देडरी अई चोखष्ट पर कडी एं
- 5:49–5:52और अपने पती सहत अपने हरेक भेटे को
- 5:52–5:55युध्ड में जाने से पहले काजल तीका लगा रही है.
- 5:55–5:56एक बहुत इब हवुख पल.
- 5:56–5:57बिलकुल.
- 5:57–5:59ये एक यह अईसा अनुश्ठान है,
- 5:59–6:02जो सुरक्षा और विजेए की कामना के लेकिया जाता है
- 6:02–6:04लेकिन इस अनुश्ठान के टीक बाद
- 6:04–6:07उदेहरी हमेशा के ले खमोष जाती है
- 6:07–6:08हमेशा के लिए
- 6:08–6:11विकि नुन्जा गडगा वो जीव तपोई आम ज़डव नही थी
- 6:11–6:13श्रोथ के वरनन के उसार
- 6:13–6:18वो एक आँसा भीशन जन संगार था जिसने पूरी दरती को लाल कर दिया
- 6:18–6:19बाप्रे
- 6:19–6:21तलवारों से तलवाने तक राती हैं
- 6:21–6:23और ये केवल एक युद्ध की हार नहीं ती
- 6:23–6:26ये एक पूरे वंष्का समूल नाश था
- 6:26–6:27मतलब एक ही दिन में
- 6:27–6:34आप येखी दिन में महज कुछी गंटों के भीटर सईयद और उनके सभी बेटे रनबहुमी में मारे जाते हैं.
- 6:34–6:38एक पूरी की पूरी पीडी एक जडके में उस हवेली से मिट जाती हैं.
- 6:38–6:42आप इस ट्रासदी के बाद उस हवेली में जो सननाथा पसरता है ना.
- 6:42–7:12अद्या ना अगा ना अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा
- 7:12–7:16यह बव़वाज जो गरभवती है, उस खाली गर में अपनी बची हुँमीट को कैसे सहीजती है?
- 7:17–7:20यहां जो बाध सब से हेरान करने वाली है, वो यहे है कि, कैसे शोक और आशा दोनो एक ही आचल में बन गये है?
- 7:21–7:22एक ही आचल में.
- 7:22–7:30यहां जो बाथ सब से हेरान करने वाली है, वो यहे है कि कैसे शोक और आशा दोनो एक ही आचल में बन गये.
- 7:30–7:31एक ही आचल में.
- 7:31–7:38आप युक एक एसा गर जा हवा में बी मुद की गंद है, वहा एक नया जीवन आकार ले रहा है.
- 7:38–7:42बद्वा माग के कनदो पर सरफ बच्चे को पालने के जम्वडारी नहीं नहीं ती
- 7:42–7:44बल कि उस बच्चे को बचाने के जम्वडारी फीजी
- 7:44–7:46प्यानक अतीद के साए से बचाने के जम्वडारी
- 7:46–7:48ती बच्चे के जम्वडारी ती बच्चे के जम्वडारी ती
- 7:48–7:52तो जो नया जीवन जनम लेता है, वो कभी भी सादारन न नहीं हो सकता.
- 7:52–7:53सही बात है.
- 7:53–7:57उस विद्वा माग के कनदो पर, सरफ पिछे को पालने के जमिदारी नहीं नहीं ती.
- 7:57–7:59बलकि, उस बच्छे को बचाने के जमिदारी थी.
- 7:59–8:03उसे विद्वा माग के कनदो पर सरफ एक बच्चे को पालने के जम्विदारी नहीं नहीं थी
- 8:03–8:05बलकि उस बच्चे को बचाने के जम्विदारी थी
- 8:05–8:05रहां
- 8:06–8:08उस बहयानक अतीद के साय से बचाने के जम्विदारी थी
- 8:08–8:12वो माँ एक नै बहविष्च का निर्मान करना चाती थी
- 8:12–8:16एक यासा बहविष्च जान नुजागर जसी त्राजदी दुबारा ना हो
- 8:16–8:18और इसी द्रिज् संकल्प के साथ
- 8:18–8:21उस हवेली में एक भेटे का जन मोता है
- 8:21–8:23जिसका नाम रखा जाता है मीरान
- 8:23–8:24मीरान साब
- 8:24–8:24जी
- 8:24–8:32ये एक अईसा बच्चा है, जिसने जनम लीने से पहले ही अपने पिता और अपने सारे बहायों को खो दिया है.
- 8:32–8:35ये अपने आप में एक बहुत बारी विरासत है.
- 8:35–8:36बहुत बारी.
- 8:36–8:41स्रोद बताता है कि मां मनी मन एक बहुत कछोर प्राँन लेती है.
- 8:41–8:47वो तेखरती है के मीरा की पूरी परवरिष को यूध्द की चाँँँ से भी दूर रखाईगाईगा
- 8:47–8:52उसका संकलप है की ये तल्वार नहीं चूएगा ये सर्फ जीएगा
- 8:52–8:55मा का ये निरने कोई कमजोरी नहीं थी
- 8:55–8:57बलकी ये उसके गेहरे मानसिक अगाद
- 8:57–8:59यान उसके त्रामा से उबजाता
- 8:59–8:59बलकुल
- 8:59–9:01जिसने सब कुछ खो दिया हो
- 9:02–9:03वो तो यासा ही सोचे गी
- 9:03–9:03आप
- 9:04–9:06एक ही दिन में पुरा सनसार उज़द देखने के बाद
- 9:06–9:10सुरक्षा को लेकर उसका ये अटीवादी नजर्या पूरी तरह से तारकिक लगता है.
- 9:10–9:15वो पालन्पोशन की ताकत से एक नै याठार्त का निरमान करना चाती ती.
- 9:15–9:19लेकन जैसा की स्रोथ आगे बताता है, अईन्सान की मुल प्रक्रिती बहुट जद्दी होती है.
- 9:19–9:20खून की पुकार
- 9:21–9:21विलकुल
- 9:21–9:23मीरान जैसे जैसे बड़ा होने लगा
- 9:23–9:26उसके खेल आपने आपी युध्द करूप लेने लगे
- 9:26–9:29वो बच्चाज यसने कभी आस्ली तल्वार नहीं देखी ती
- 9:29–9:31वो लक्डी से तल्वार बना लेता है
- 9:31–9:34और मिट्टी की देरी से किले बनाने लकता है
- 9:34–9:36आप और सबसे बड़ी बाद
- 9:36–9:38उसकी आखो में वोही चमक आजाती है
- 9:38–9:41तो कभी उसके मारे गय पिता और बहाईँ की आखो में ती
- 9:41–9:43मतलब नेचर अपना काम कर रहा था
- 9:43–9:44जी
- 9:44–9:48ये सपष्ट्रुब से दिखाता है के योद्धाउं के खुन में क्या होता है
- 9:48–9:50विरासत की पुकार इतनी मजबॉत होती है
- 9:51–9:54कि उसे किसी भी क्रित्रम तरीके से दबाया नहीं जासकता
- 9:54–9:57लेकिन रुकिये मुझे आप तोडा सन्दे है
- 9:58–10:00तो इस सब का असल में क्या मतलब है?
- 10:14–10:20बदल सकते हैं? ये तो वही बात होगग, क्या पेक बाज को पिंजरे में रखकर ये उमीद करें,
- 10:20–10:22कि वो आस्मान के तरव देखना चोड़ देगा?
- 10:22–10:24बहुती बहतरीन उदारन है ये.
- 10:24–10:29है ना? लेकिन इसके सात ही, क्या ये समबव नहीं के इसके पीचे कोई
- 10:29–10:31बच्चिस पन्ज कितरा हूँटें
- 10:31–10:33वह महोल को सुख लेतें
- 10:33–10:34बिलकोल
- 10:34–10:36वे अपने आस्पास के महोल को
- 10:36–10:38बिना शब्डो के भी पर लेते हैं
- 10:38–10:41उस हवेली में एक भ्यानक सननाटा था
- 10:41–10:43एक माथ ही जो हमेशा दरी हूँइ
- 10:43–10:50अगर आदूनिक मनोविग्यान के चच्मे से देखें तो यह पीडियो के आगात यानी जैनरेशनल त्रोमा का एक बहुत फीटी कुदारन बन जाता है.
- 10:50–10:58तो क्या ये नहीं हो सकता के उस पाथ साल के बच्चे ने अपनी माग के उस दबाये हुए अनकहे त्रोमा को अवशोषित कर लिया हो?
- 10:58–11:02मैं कहुगा के ये एक बहुत ही शान्दार और महत्वपुन विष्लिषन है.
- 11:02–11:07अगर अम इसे आदूनिक मनोविग्यान के चष्मे से देखें तो यहे पीडियो के आगात
- 11:07–11:12यहनी जनरेशनल ट्रोमा का एक बहुत फीज़ चटी कुदारन बन जाता है.
- 11:12–11:18होता यहे कि जब कोई मा यह परिवार किसी चीस को बहुत शिददत से चबाने की कोशिष करता है,
- 11:18–11:23तो वे अजनाने में उस चीस के एड़ गिरद एक बहुत बडा शून्या एक रहेस से पड़ा कर देते हैं.
- 11:23–11:26और बच्चा उस रहेस से को महसुस करता है.
- 11:26–11:30बिल्कुल इसे हाम एक प्रश्र कुकर के उदारन्च से भी समथ सकते हैं.
- 11:30–11:31अच्च? कैसे?
- 11:31–11:37दिक्ये माने हवेली से तल्वारे हटादीं, युध्द की बाते बन्द कर दीं, अखाडा बन्द कर दीए.
- 11:37–11:41उसने बहावनाव के बाहर निकलने वाले सारी रास्ते सील कर दीए,
- 11:41–11:43उसे लगा कि उसने खत्रे को बाहर कर दीए है.
- 11:43–11:45लेकिन असल में वो दबाव बड़ा रही थी.
- 11:45–11:49आप वो उस प्रेश्व कोगर के अंदर दबाव को और बड़ा रही थी.
- 11:49–11:51इग्जाक्ली. और उस से भी बड़ी बाद यहे है,
- 11:51–11:55कि जब एक मा अथ्टिदिक सतर्क यह रही पर विजिलिंट होती है,
- 11:55–12:01तो वो बनाग कुछ कहे अपने बच्चे के अव चेतन को एक सन्देश दे रही होती है.
- 12:01–12:02की ये दून्या खतरनाख है.
- 12:02–12:07बलकल. की ये दून्या बहुत खतरनाख है तो में हमेशा सावदान रहन रहना है.
- 12:07–12:11तो वो बच्चा जो आपनी माग की सुरक्षा को लेकर चिन्तेत है
- 12:11–12:14वो आपने आप येग रक्षक की बूमिका में आजाता है
- 12:14–12:18औग! मतलव वो तल्वार अपनी माग को बचाने के उटारा था
- 12:18–12:48आप आप बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद ब�
- 12:48–12:52निंद्रन का एक आखरी और बहुत बड़ा अस्त्र इस्त्र अपने का फैस्ला करती हैं.
- 12:52–12:53विवाहा?
- 12:53–12:54जी.
- 12:54–12:58उस युख की परमपरा की अनुसार माएक अन्तिम उपाय सुचती है.
- 12:58–13:01मीरा की कम उम्र मेही शादी करवादिना.
- 13:01–13:06ताकि उसे गर ग्रेस थी की दोर में बान्दा जासके और उसकमन युद्द्र से हदजाए.
- 13:06–13:11ये समाज दवारा विद्द्रोई प्रव्रुत्तियों को निंद्रित करने का एक बहुत पुराना तरीका रहा है.
- 13:11–13:15पर्वारिग जम्यदारियों का बोज डालकर अईन्सान को शान्त करने की कोशिश
- 13:15–13:17आँ जो आज़ भी होता है
- 13:17–13:17बलकोल
- 13:17–13:21स्रोथ की अनुसार, हवेली में सालो बाद शहनाई बचती है
- 13:21–13:24मातम की जगा हरे पतो का तोरन लगाया जाता है
- 13:24–13:25एक नहीं उमीद
- 13:25–13:30अग, लिकिन मा और नहीं भवू दोनो मिलकर मिरान को रोकने की कोशिष करती हैं
- 13:30–13:34वे उसे समजाती हैं कि बदले से मरे हुए लोग वापस नहीं आते
- 13:34–13:37और आब उसके जीवन पर पतनी का भी अदिकार हैं
- 13:37–13:42वि दोनो अपने अपने तरीके से उसे उस सुरक्षित पिंज्रे में बनाई रक्ने की कोशिष करती हैं
- 13:42–13:45और यहां कहानी वागे बहुत दिल्च्छ पोजाती हैं
- 13:45–13:45किसे?
- 13:45–13:52किसे यहुकी इन सब तरको के जवाव में मिरान की प्रतीक्रिया ती वो हैरान करने वाली हैं
- 13:52–13:54जब ये दोनो महिलाये उसे समजारे होती हैं,
- 13:54–13:56तो मीरानना तो गुस्स्सा करता है,
- 13:56–13:58नहीं उनसे कोई बहेस करता है.
- 13:58–13:59वो बलकुल शान्त रहता है.
- 13:59–14:00बलकुल.
- 14:00–14:03वो चुप चाएब आदर के साथ अपना सिर जूका कर सब सुनता है.
- 14:03–14:05वो कभी प्रतिवाद नहीं करता.
- 14:22–14:24अदा तो तो बज़ादा थाई.
- 14:24–14:27मा और पतनी को लगा कि उनके तरक काम कर गये हैं.
- 14:27–14:31लेकिन इस खामोशी के पीछे एक बहयानक तूफान पल रहा था.
- 14:31–14:33एक तूफान की तएयारी.
- 14:33–14:34बलकु.
- 14:34–14:36महिलाओ का तरक अपनी जगा सही ता.
- 14:36–14:40लेकिन मीरा के भीतर नुन्जागर का हिसाब चल रहा था
- 14:41–14:44उसका माँन सहमती नहीं बलकी तयारी का प्रतीक ता
- 14:45–14:49और उसकी इस तयारी की जलक हमें रात के सननाटे में मिलती है
- 14:49–14:50जी
- 14:50–14:56स्रोट में बताया गया है कि मीरा रातो में अकेले उटकर अपनी तल्वार पर दार रकता है.
- 14:56–14:58वो अपने हाथो से अपने गोडे को दाना किलाता है.
- 14:58–15:00जब पूरी हवेली सो रही होती है.
- 15:00–15:01हाँ.
- 15:01–15:04और मन ही मन नुन्जागर का रास्ता नापता है.
- 15:04–15:07मतलब दिन में वो एक आदर्ष, बेटा वर पती था,
- 15:07–15:11लेकिन रात के अंदेरे में वो अपनी नियती की तडयारी कर रहा था.
- 15:11–15:13वो दो गलगग जीवन जी रहा था.
- 15:13–15:16और अंथ तब वो खषन आना ही ता,
- 15:16–15:18जब वो अपना अंपिम प्रस्थान करता.
- 15:18–15:25अर वो बहुती खामोशी से आता है, एक सुबर जब हवेली जागती है, तो मीरा का कमरा खाली मिलता है.
- 15:25–15:26कोई शोर नहीं.
- 15:26–15:31बलकुल कोई शोर नहीं, बस एक सननाता वो बिना किसी से कुछ कहे निकल चुका था.
- 15:31–15:37मीरान साब के ये प्रस्थान केवल एक वेक्ती का गर चोडना नहीं ता
- 15:37–15:41ये एक एतिहासिग किव्दंती एक लेजिंट के उदै का चन ता
- 15:41–15:43मीरान साब का उदै
- 15:43–15:44राई
- 15:44–15:49स्रोथ में विष्लेशन हैं कि वो वेक्ती जो जीवित रहते वे अपने नगर की डाल ता
- 15:49–15:51उसकी स्म्रती भी एक दाल बन जाती हैं
- 15:51–15:53मतलब मरनी के बाद भी
- 15:53–15:54भिलकल
- 15:54–15:56मीरान साब की आमरता एसी होगग
- 15:56–15:58की दूश्ट लोग उसके नाम से काबते हैं
- 15:58–16:00और अच्छे लोग उसके नाम से ताकत पाते हैं
- 16:00–16:01क्या बाथ है
- 16:01–16:02आज भी
- 16:02–16:04दिलीरी नगर में जब शाम दलती है,
- 16:04–16:06तो माता है अपने जिद्टी बच्छों को
- 16:06–16:08मीरान सावब की कहानी सूनाती है.
- 16:08–16:10उस अनात बच्चे की कहानी,
- 16:10–16:12जिसे सबने रोका पर जो रोका नहीं.
- 16:12–16:14और जो मरने के बाद भी अपने नगर का पहरा देता रहा.
- 16:14–16:21अगर अमेसे एक बड़े प्रीप्रेच्ष्ष्ट से जोडकर देखें तो पता चलता है कि कुछ लोग इतिहास के पन्नो में दरज होकर अगे जाते हैं.
- 16:21–16:26जब कि कुछ लोग मीरान साहब की तरा हवाँम ये शानती बनकर हमेशा के लिए बस चाते हैं.
- 16:26–16:27एक दम सही.
- 16:27–16:31ये पुडी चर्चा हमें सोचने पर मजबोर कर देती हैं.
- 16:32–16:34अगर हमें से आदूनिक जीवन से जोडें,
- 16:34–16:37तो हम सब के जीवन में कुछ हैसी अद्रिष्ष्य विरासतें,
- 16:38–16:41पारिवारे को मीदें, या पीडियों के गाओ होते हैं,
- 16:41–16:45जिन से हम चाह कर भी मुँ नहीं मोड सकते.
- 16:45–16:47बिलकुल वो जैनरेशनल त्रामा जिसकाम ने जिकर किया.
- 16:47–16:53अग, कभी कभी हमारी नियती हमारे सुरक्षित दायरों के बाहरी हमारा अंतदार कर रही होती है.
- 16:53–16:54सही बात है.
- 16:54–16:58हम अखसर अपनो को बचाने के लिए पिंज्रे बना देते है,
- 16:58–17:00पर वो सुरक्षा ही खैध वंजाती है.
- 17:00–17:04और इसी विचार के साथ में कारिक्रम के अंत में
- 17:17–17:19अद बायों की मुद्ट का बड़ा लेना था
- 17:19–17:24या फिर क्या वो असल में उस हवेली के दमगोटु शोक
- 17:24–17:27और उन दो और्टू दवारा बूने गय सुरक्षित
- 17:27–17:30लिकिन कैद कर देने वाले पिंज्रे से
- 17:30–17:32हमेशा के लिए आजाद हूना चाता था
- 17:32–17:35ये सच्व में के यह सबाल है, जिस पर बहुत गेराई से सोचा जास सकता है.
- 17:35–17:43बलकुल, ये सोचने वाली बात है, के उसका वो कदम बदले के लिए ता, या अपनी आजादी के लिए.
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मुझे लकता है, आजके इस विस्त्रित विष्लेशन की शुर्वात हमें एक बहुत लिए अजीब सी कल्पना के साथ करनी चाहिए अच्छा कैसी कल्पना? मडलब, सोचकर देख्ये एक अजे गर के बारे में, जहां, हत्यारों का नामो निशान तक मिता दिया गया हो. बिलकुज जहाए कुई हाथ्यार ना हो अग, मतलब जहाए एक माने हर उस चीस को बहुत गेराई में दफना दिया हो जो यूध, खॉन या अखाडे की जरासी भी याध दिलाती हो सईभाते उसका एक मात्र लक्षे बस ये है यह कि उसका बच्चा कभी हिन्सा का चेहरा ही न देखे लेकिन फिर भी वो पाथ साल का बच्चा बाहार मिट्टी से किले बनारा है और वाआ और एक सादारन लक्डी को हाथ में लेकर किसी कुषल योद्धा कितर है हवामे तलवार कितर बहांज रहा है मतलब, ये एक ये साथ द्रिष्षे है, जो एक बहुत लिग गे़े और आज सहज करने वाले मनोविग्यानिक सवाल को जन्म देता है. एक दम सेगी का आपने. ये सच्मे एक ये साथ द्रिष्षे है, जो सद्यो पुराने उस संगर्ष को सामने लाख हडा करता है, जिसे हम मनोविग्यान में प्रक्रती बनाम पालन पोषन या कहें के नेच्छर वर्सिज नर्चर कहतें। प्र कुछ अजा भी होता है, जो हमारी रगो में बसा हो। हां, जो हमारी इतिहास में बहुत गेरे तक बसा होता है। और आजके हमारी इस गेरे चर्चा में, हम टीक इसी जटल संगर्ष के पर्टों को उदेरने वाले है. हमारे पास, गजेंद्र ताकुर दूरा रचित, विदे ही पत्रिका का एक बहुत इखास अंश है. जी, जिसका शीर्षक है, 15 underscore miransahab.pdf भलकोल, ये मित्ला के दिल्रीनगर की एक एतिहासेक और बहध बहवोक लोग कता है और मैं बतादुं कि इस चर्चा का हमारा मुख्य मिशन सर्फिक पुरानी कहानी को जनना नहीं है सही बाते बलकी, हम उस मनोविग्यानिक तन्त्र को उस्मेकानिजम को समजना चाहते है, तब सक्क्रीय होता है, जब अप अपने चुनी हुई परवरिष, और उसकी जन्मजात नियती, आमने सामने आप्टक राती है. गजेंद्र ताकोर ने इस कता के माद्धिम से, जिस गेराई को चूए है, मैं कोंगा कि वो असाथारन है मतलब ये कहानी सता पर एक योड़ा की गाथा लक सकती है अपर से देखने पर बलकोल लेकिन इसके भीटर जाखने पर पता चलता है कि ये असल में पीटीों से चले आरहे दरद अगोषित पारिवारेक आगाद अर उस मुक संगर्ष्का दस्तावेज ये उन गरूँ की दिवारों के भीतर लडाजाता है. जहां अतीट का साया बहुत भारी होता है आप आप आप बलकुल. उस युग में तल्वाने के वल लोहे के तुक्डे मिहीवा करती ती. वे एक पुरी जीवनषेली और एक कछोर पहचान का प्रतिक थी और इसी पहचान को समजने के ले हमें कहानी के बलकुल केंदर में चलना होगा दिलरी नगर की उस प�रानी हवेली में हां, उस सैयत परवार की हवेली में मिलकुल, ये एक बहुती सम्मानित और दर्म परायन, सैयत परिवार का गर है. स्रोथ में इस गर की सुबहा का जो वरनन मेंने पडा, वो अपने आप में पुरा समाच शास्तर समेटे होई आप. बहुती सुदर वरनन है वो. प्लब सोचिये सुबा कि शुर्वाद नमास की एक आग्रता और शान्ती पोण प्राथना के साथ होती है. लेकिन उसी समय टिक उसी वकत अखाडे की मिट्टी से कुष्ती और तल्वार भाजी की खनकती अवाजग न भी आवाज़े एई होती है. उन्द के बाद्तना और दुच्ड का ब्यास. आँ पिता और उनके सभी बेटे एक सात गूड सवारी, तीरन्दाजी और यूध कोशल का ब्यास करते है. ये अद्धियात्मिक अनुशासन और शारी रिक अक्रामक्ता का एक बहुती अजीब, लेकिन शक्ती शारी मिष्रन है और देखिए इस मिष्रन को समजना बहुत जरूरी है क्युकि यही उस परिवार की मुल सन्रचना है वुई, कैसे? मतलब आद्दियात्मि कनुशासन उने ये सिक आता है, कि किस चीज के लिए लडना है. आच्छ, हाँ. और शारीडि कनुशासन उने ये सिक आता है, कि कैसे लडना है. लेकिन इस पूरी दिनचर्या, इस पूरे शक्ती प्रदश्छन को एक और नजर्या है, जो लगातार देख रहा है. गर की माँ का नजर्या. बलकुल. एक तरव वो अपने पती वो बेटो के इस खोषल पर एक स्वबभावे गर्व महिजुस करती है. जो के लाज्मे भी है? आँ, लेकिन स्रोथ बताता है, कि उसके सीने में एक अन कहा अद्रिष्ष दर भी बसा हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� ये किसी भी दिन ये लावा पूट सकता है बिलकुल और ये उस युख के योद्दा परिवारों की महिलाव का एक बहुत ही कडवा समाज शास्तरी ये याठार्त था ये एक येख याचा सच ता जिस पर कभी खुलकर चर्चा नहीं हूती थी कोई बोलता नी ता इस बारे में लेकिन जो हर किसी के अवचेतन में मोझुद ता वो सच ये ता के अगर गर की दिवारों पर तल्वारे तंगी है और अखाडे में रोज ने पैना किया जारा है तो एक दिन वो तल्वारे गर से बहार जो जाएंगी इक दम सही एक दन आसा ज़ोर आएगा जब वे तल्वारें गर से बहार जाएंगी और वापिस नहीं आएगी कुकी युध्द का गनध बहुत सेदा होता है जो बहार जाता हो तोसके वापिस लोटने की कुई गारन्टी नहीं होती माखा उड़र असल में इसी आप परिहारिया त्राजदी के अपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना उपना � माहवेली की देडरी अई चोखष्ट पर कडी एं और अपने पती सहत अपने हरेक भेटे को युध्ड में जाने से पहले काजल तीका लगा रही है. एक बहुत इब हवुख पल. बिलकुल. ये एक यह अईसा अनुश्ठान है, जो सुरक्षा और विजेए की कामना के लेकिया जाता है लेकिन इस अनुश्ठान के टीक बाद उदेहरी हमेशा के ले खमोष जाती है हमेशा के लिए विकि नुन्जा गडगा वो जीव तपोई आम ज़डव नही थी श्रोथ के वरनन के उसार वो एक आँसा भीशन जन संगार था जिसने पूरी दरती को लाल कर दिया बाप्रे तलवारों से तलवाने तक राती हैं और ये केवल एक युद्ध की हार नहीं ती ये एक पूरे वंष्का समूल नाश था मतलब एक ही दिन में आप येखी दिन में महज कुछी गंटों के भीटर सईयद और उनके सभी बेटे रनबहुमी में मारे जाते हैं. एक पूरी की पूरी पीडी एक जडके में उस हवेली से मिट जाती हैं. आप इस ट्रासदी के बाद उस हवेली में जो सननाथा पसरता है ना. अद्या ना अगा ना अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा अगा यह बव़वाज जो गरभवती है, उस खाली गर में अपनी बची हुँमीट को कैसे सहीजती है? यहां जो बाध सब से हेरान करने वाली है, वो यहे है कि, कैसे शोक और आशा दोनो एक ही आचल में बन गये है? एक ही आचल में. यहां जो बाथ सब से हेरान करने वाली है, वो यहे है कि कैसे शोक और आशा दोनो एक ही आचल में बन गये. एक ही आचल में. आप युक एक एसा गर जा हवा में बी मुद की गंद है, वहा एक नया जीवन आकार ले रहा है. बद्वा माग के कनदो पर सरफ बच्चे को पालने के जम्वडारी नहीं नहीं ती बल कि उस बच्चे को बचाने के जम्वडारी फीजी प्यानक अतीद के साए से बचाने के जम्वडारी ती बच्चे के जम्वडारी ती बच्चे के जम्वडारी ती तो जो नया जीवन जनम लेता है, वो कभी भी सादारन न नहीं हो सकता. सही बात है. उस विद्वा माग के कनदो पर, सरफ पिछे को पालने के जमिदारी नहीं नहीं ती. बलकि, उस बच्छे को बचाने के जमिदारी थी. उसे विद्वा माग के कनदो पर सरफ एक बच्चे को पालने के जम्विदारी नहीं नहीं थी बलकि उस बच्चे को बचाने के जम्विदारी थी रहां उस बहयानक अतीद के साय से बचाने के जम्विदारी थी वो माँ एक नै बहविष्च का निर्मान करना चाती थी एक यासा बहविष्च जान नुजागर जसी त्राजदी दुबारा ना हो और इसी द्रिज् संकल्प के साथ उस हवेली में एक भेटे का जन मोता है जिसका नाम रखा जाता है मीरान मीरान साब जी ये एक अईसा बच्चा है, जिसने जनम लीने से पहले ही अपने पिता और अपने सारे बहायों को खो दिया है. ये अपने आप में एक बहुत बारी विरासत है. बहुत बारी. स्रोद बताता है कि मां मनी मन एक बहुत कछोर प्राँन लेती है. वो तेखरती है के मीरा की पूरी परवरिष को यूध्द की चाँँँ से भी दूर रखाईगाईगा उसका संकलप है की ये तल्वार नहीं चूएगा ये सर्फ जीएगा मा का ये निरने कोई कमजोरी नहीं थी बलकी ये उसके गेहरे मानसिक अगाद यान उसके त्रामा से उबजाता बलकुल जिसने सब कुछ खो दिया हो वो तो यासा ही सोचे गी आप एक ही दिन में पुरा सनसार उज़द देखने के बाद सुरक्षा को लेकर उसका ये अटीवादी नजर्या पूरी तरह से तारकिक लगता है. वो पालन्पोशन की ताकत से एक नै याठार्त का निरमान करना चाती ती. लेकन जैसा की स्रोथ आगे बताता है, अईन्सान की मुल प्रक्रिती बहुट जद्दी होती है. खून की पुकार विलकुल मीरान जैसे जैसे बड़ा होने लगा उसके खेल आपने आपी युध्द करूप लेने लगे वो बच्चाज यसने कभी आस्ली तल्वार नहीं देखी ती वो लक्डी से तल्वार बना लेता है और मिट्टी की देरी से किले बनाने लकता है आप और सबसे बड़ी बाद उसकी आखो में वोही चमक आजाती है तो कभी उसके मारे गय पिता और बहाईँ की आखो में ती मतलब नेचर अपना काम कर रहा था जी ये सपष्ट्रुब से दिखाता है के योद्धाउं के खुन में क्या होता है विरासत की पुकार इतनी मजबॉत होती है कि उसे किसी भी क्रित्रम तरीके से दबाया नहीं जासकता लेकिन रुकिये मुझे आप तोडा सन्दे है तो इस सब का असल में क्या मतलब है? बदल सकते हैं? ये तो वही बात होगग, क्या पेक बाज को पिंजरे में रखकर ये उमीद करें, कि वो आस्मान के तरव देखना चोड़ देगा? बहुती बहतरीन उदारन है ये. है ना? लेकिन इसके सात ही, क्या ये समबव नहीं के इसके पीचे कोई बच्चिस पन्ज कितरा हूँटें वह महोल को सुख लेतें बिलकोल वे अपने आस्पास के महोल को बिना शब्डो के भी पर लेते हैं उस हवेली में एक भ्यानक सननाटा था एक माथ ही जो हमेशा दरी हूँइ अगर आदूनिक मनोविग्यान के चच्मे से देखें तो यह पीडियो के आगात यानी जैनरेशनल त्रोमा का एक बहुत फीटी कुदारन बन जाता है. तो क्या ये नहीं हो सकता के उस पाथ साल के बच्चे ने अपनी माग के उस दबाये हुए अनकहे त्रोमा को अवशोषित कर लिया हो? मैं कहुगा के ये एक बहुत ही शान्दार और महत्वपुन विष्लिषन है. अगर अम इसे आदूनिक मनोविग्यान के चष्मे से देखें तो यहे पीडियो के आगात यहनी जनरेशनल ट्रोमा का एक बहुत फीज़ चटी कुदारन बन जाता है. होता यहे कि जब कोई मा यह परिवार किसी चीस को बहुत शिददत से चबाने की कोशिष करता है, तो वे अजनाने में उस चीस के एड़ गिरद एक बहुत बडा शून्या एक रहेस से पड़ा कर देते हैं. और बच्चा उस रहेस से को महसुस करता है. बिल्कुल इसे हाम एक प्रश्र कुकर के उदारन्च से भी समथ सकते हैं. अच्च? कैसे? दिक्ये माने हवेली से तल्वारे हटादीं, युध्द की बाते बन्द कर दीं, अखाडा बन्द कर दीए. उसने बहावनाव के बाहर निकलने वाले सारी रास्ते सील कर दीए, उसे लगा कि उसने खत्रे को बाहर कर दीए है. लेकिन असल में वो दबाव बड़ा रही थी. आप वो उस प्रेश्व कोगर के अंदर दबाव को और बड़ा रही थी. इग्जाक्ली. और उस से भी बड़ी बाद यहे है, कि जब एक मा अथ्टिदिक सतर्क यह रही पर विजिलिंट होती है, तो वो बनाग कुछ कहे अपने बच्चे के अव चेतन को एक सन्देश दे रही होती है. की ये दून्या खतरनाख है. बलकल. की ये दून्या बहुत खतरनाख है तो में हमेशा सावदान रहन रहना है. तो वो बच्चा जो आपनी माग की सुरक्षा को लेकर चिन्तेत है वो आपने आप येग रक्षक की बूमिका में आजाता है औग! मतलव वो तल्वार अपनी माग को बचाने के उटारा था आप आप बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद बद ब� निंद्रन का एक आखरी और बहुत बड़ा अस्त्र इस्त्र अपने का फैस्ला करती हैं. विवाहा? जी. उस युख की परमपरा की अनुसार माएक अन्तिम उपाय सुचती है. मीरा की कम उम्र मेही शादी करवादिना. ताकि उसे गर ग्रेस थी की दोर में बान्दा जासके और उसकमन युद्द्र से हदजाए. ये समाज दवारा विद्द्रोई प्रव्रुत्तियों को निंद्रित करने का एक बहुत पुराना तरीका रहा है. पर्वारिग जम्यदारियों का बोज डालकर अईन्सान को शान्त करने की कोशिश आँ जो आज़ भी होता है बलकोल स्रोथ की अनुसार, हवेली में सालो बाद शहनाई बचती है मातम की जगा हरे पतो का तोरन लगाया जाता है एक नहीं उमीद अग, लिकिन मा और नहीं भवू दोनो मिलकर मिरान को रोकने की कोशिष करती हैं वे उसे समजाती हैं कि बदले से मरे हुए लोग वापस नहीं आते और आब उसके जीवन पर पतनी का भी अदिकार हैं वि दोनो अपने अपने तरीके से उसे उस सुरक्षित पिंज्रे में बनाई रक्ने की कोशिष करती हैं और यहां कहानी वागे बहुत दिल्च्छ पोजाती हैं किसे? किसे यहुकी इन सब तरको के जवाव में मिरान की प्रतीक्रिया ती वो हैरान करने वाली हैं जब ये दोनो महिलाये उसे समजारे होती हैं, तो मीरानना तो गुस्स्सा करता है, नहीं उनसे कोई बहेस करता है. वो बलकुल शान्त रहता है. बलकुल. वो चुप चाएब आदर के साथ अपना सिर जूका कर सब सुनता है. वो कभी प्रतिवाद नहीं करता. अदा तो तो बज़ादा थाई. मा और पतनी को लगा कि उनके तरक काम कर गये हैं. लेकिन इस खामोशी के पीछे एक बहयानक तूफान पल रहा था. एक तूफान की तएयारी. बलकु. महिलाओ का तरक अपनी जगा सही ता. लेकिन मीरा के भीतर नुन्जागर का हिसाब चल रहा था उसका माँन सहमती नहीं बलकी तयारी का प्रतीक ता और उसकी इस तयारी की जलक हमें रात के सननाटे में मिलती है जी स्रोट में बताया गया है कि मीरा रातो में अकेले उटकर अपनी तल्वार पर दार रकता है. वो अपने हाथो से अपने गोडे को दाना किलाता है. जब पूरी हवेली सो रही होती है. हाँ. और मन ही मन नुन्जागर का रास्ता नापता है. मतलब दिन में वो एक आदर्ष, बेटा वर पती था, लेकिन रात के अंदेरे में वो अपनी नियती की तडयारी कर रहा था. वो दो गलगग जीवन जी रहा था. और अंथ तब वो खषन आना ही ता, जब वो अपना अंपिम प्रस्थान करता. अर वो बहुती खामोशी से आता है, एक सुबर जब हवेली जागती है, तो मीरा का कमरा खाली मिलता है. कोई शोर नहीं. बलकुल कोई शोर नहीं, बस एक सननाता वो बिना किसी से कुछ कहे निकल चुका था. मीरान साब के ये प्रस्थान केवल एक वेक्ती का गर चोडना नहीं ता ये एक एतिहासिग किव्दंती एक लेजिंट के उदै का चन ता मीरान साब का उदै राई स्रोथ में विष्लेशन हैं कि वो वेक्ती जो जीवित रहते वे अपने नगर की डाल ता उसकी स्म्रती भी एक दाल बन जाती हैं मतलब मरनी के बाद भी भिलकल मीरान साब की आमरता एसी होगग की दूश्ट लोग उसके नाम से काबते हैं और अच्छे लोग उसके नाम से ताकत पाते हैं क्या बाथ है आज भी दिलीरी नगर में जब शाम दलती है, तो माता है अपने जिद्टी बच्छों को मीरान सावब की कहानी सूनाती है. उस अनात बच्चे की कहानी, जिसे सबने रोका पर जो रोका नहीं. और जो मरने के बाद भी अपने नगर का पहरा देता रहा. अगर अमेसे एक बड़े प्रीप्रेच्ष्ष्ट से जोडकर देखें तो पता चलता है कि कुछ लोग इतिहास के पन्नो में दरज होकर अगे जाते हैं. जब कि कुछ लोग मीरान साहब की तरा हवाँम ये शानती बनकर हमेशा के लिए बस चाते हैं. एक दम सही. ये पुडी चर्चा हमें सोचने पर मजबोर कर देती हैं. अगर हमें से आदूनिक जीवन से जोडें, तो हम सब के जीवन में कुछ हैसी अद्रिष्ष्य विरासतें, पारिवारे को मीदें, या पीडियों के गाओ होते हैं, जिन से हम चाह कर भी मुँ नहीं मोड सकते. बिलकुल वो जैनरेशनल त्रामा जिसकाम ने जिकर किया. अग, कभी कभी हमारी नियती हमारे सुरक्षित दायरों के बाहरी हमारा अंतदार कर रही होती है. सही बात है. हम अखसर अपनो को बचाने के लिए पिंज्रे बना देते है, पर वो सुरक्षा ही खैध वंजाती है. और इसी विचार के साथ में कारिक्रम के अंत में अद बायों की मुद्ट का बड़ा लेना था या फिर क्या वो असल में उस हवेली के दमगोटु शोक और उन दो और्टू दवारा बूने गय सुरक्षित लिकिन कैद कर देने वाले पिंज्रे से हमेशा के लिए आजाद हूना चाता था ये सच्व में के यह सबाल है, जिस पर बहुत गेराई से सोचा जास सकता है. बलकुल, ये सोचने वाली बात है, के उसका वो कदम बदले के लिए ता, या अपनी आजादी के लिए.