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गरीबन_बाबाक_गाथा_आ_सामूहिक_प्रायश्चित्त.m4a
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- 0:00–0:07कल्पना करू, जे आपन सवक कोनो बाट़स से जार हल्षी, आप पैर फिसल जाया, या किछु भोजाया?
- 0:07–0:11बलकु या मानिलिया, अन जाने में कख्रो चपल पैर पैर लागी जाया,
- 0:11–0:15कुनो जानी भुजी का काल गलती नहीं, बस एक ता सादारन भूल,
- 0:15–0:17तए एकर बदला मे की है बाखचा ही?
- 0:17–0:21तब आदारन तए तब लोक शमा मांगी लेई चाए, बाद्खटम.
- 0:21–0:22आए, एक दम.
- 0:22–0:27मुदद सोचु, जे एकर बदला मे स्वरक से एक तब भागिनानी को चोड दे जाए तब.
- 0:27–0:31ब्रे, यी तो एक दम मझवव अब भ्यानक लागग च्ये सूनी में
- 0:31–0:41च्याने, मुदा आय आपमर सब कजे यी गहीर परताल चे उआई ही विषे पर चे जे हमरा सब कन न्याय अदंडण्डण्डारना के जग्जोर के रखी दे च्ये
- 0:41–0:49आई आपन सब गजेंदर ताकुर दवरा समपादिद, विदेह इपत्रिका से संकलिद, एक तब बहुत अदुत लोग कतापर चर्चा करव.
- 0:49–0:53आआ, जकर नाम चै, गरीबन भाबा का गाता.
- 0:53–0:59इक्दम सही आई आपन मिशन एन है चे, जे खाली एक ता पुरान कता सूनाल जाए,
- 0:59–1:08बलकी एबुजब जी, जे हमर परमपराग भीतर, दन्द, न्याय, भूल, आप सामूहिक प्रायष्षिट का की आज्ट चे?
- 1:08–1:11तीख चे? आओ एक राविस्तार से भूँची.
- 1:11–1:14कारन इगाता मानव जीवनक भूल
- 1:14–1:17आच्वमाक उही गहीर दर्षन के सोजाने चे
- 1:17–1:21जताई माने आदूनि कानुनक तरक काज नहीं करे चे
- 1:21–1:25आप एक दम इगाता हमरा सब के उहे दूनिया में ले जाए चे
- 1:25–1:28जताई कर्म का आश्य से भेशी
- 1:28–1:31बूजल्याने उकर परिनाम पर द्यान दिल जाएचे
- 1:31–1:35माने जे गल्ती भेल उकर असर कते क पैग जे ताही पर
- 1:35–1:42भिल्कुल कोनो गतना जकन गते चे ता उकर प्रभाँ मातर उहे व्यक्तिदरी सिमित नहीं रहे चे गल्ती के लक
- 1:42–1:46अँ समाज, प्रक्रूति, अपार्लोकिक शक्ति सब के प्रभाविद करे चे.
- 1:47–1:50एह कता में जिन नयाय अदन्डक सुरुप चे,
- 1:50–1:53उईक ता जतल पारिस्तित की तन्तर माने एको सिस्तम जका चे.
- 1:54–1:55अहो, एको सिस्तम जका.
- 1:56–1:58अह, जते एक ता चोट सन भूल,
- 1:58–2:28उगरा वापे सन्तुलन में आनबा के लिल एक देब बहुत कथोर प्रतिक्रिया का वशक्ता हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 2:28–2:34भरहम ताकुर जे ब्रामवन चला हा गासी यादव अगरी बन दोभी
- 2:35–2:40एक्दम सही, इद तीनो गोटे कुष्ती आप प्याल्वानी में निपूँद चला
- 2:41–2:46एक्दम आपन शारेरिग भलक चरम पर, गाअँगरक अखाराक वो भोरकुवा समय,
- 2:46–2:51मातिक, महیک, देख, पसीना, सब किचु एक्छु समान ने चली रहाल चला.
- 2:51–2:54मुदा, तकने एक ता चोट सन गतना गतल?
- 2:54–2:59आप भ्यासक्रम में दाव पेच लगावएया काल,
- 2:59–3:04गरीबनक पैर पनजान में कमला माएक पवित्र पीडी में लागी जाएचे.
- 3:04–3:08पीडि माने उस्थान जते देविक आवान या पुजा हो इच्छे.
- 3:08–3:10बिलकुल, पवित्र स्थान.
- 3:10–3:13आस्वोट समगरी बहुत स्पष्ट रूपसा कही चै,
- 3:14–3:17जे एह में गरीबन कोनो दूबहावना नहीं चल.
- 3:17–3:20उ जानिबुजी के पीडे के अप्मानित नहीं के ने चला,
- 3:20–3:23इम भाद्र एक ता शारीरिक संटूलन चल,
- 3:23–3:26एक ता अन्जान सुन्जान में भेल्स पर्ष,
- 3:26–3:29एताई जे सब सम भेशी ध्याना कर्षक गब चाए,
- 3:29–3:32से एज लोग कता सब में,
- 3:32–3:39पवित्रता और लोकिक सीमक अतिक्रमनक परिनामक के बहुत निर्दाई अ प्रतिकात्मक रुप में दिखाए जाएच्छे.
- 3:39–3:44माने अन्तेंच्छन या मन में की चल उकर कुनो मोल नहीं.
- 3:44–3:46एक दम नहीं. आदूनिक नयाए प्रनाली में,
- 3:46–3:53हम सब इदेखे च्ये, जे अप्राद करबाक पाचा व्यक्तिक मन में की चली रहल चल,
- 3:53–3:55की ओकर मन्शा गल्ती करबाक चल,
- 3:55–3:59जब मन्शा नहीं चल, तदंद कम कदेल जाए च्ये.
- 3:59–4:03रहा, जिना अख्सिरेंट भोजाए तदषजा कम होगी च्ये.
- 4:03–4:09भिल्कुल, मुदा पारमपारिक अ अद्यात्मिक संदर्व में इनीम लागु नहीं होईत चे.
- 4:09–4:12उक्रा आहा प्रक्रतिक नीम जका देखी सकए च्ये.
- 4:12–4:18जअ आहा अन्जान में आगी में हात दो देब, तकी आगी इसोचत जे आहाक मन्शा की चल.
- 4:18–4:20आई, आगी तज़र्वे करत्
- 4:20–4:25इक्दम, पवित्र स्थानक आपन एक ता उर्जा चेत्र मानल गेल चे,
- 4:25–4:30औही सीमा का उलंगन चाहे उ अग्यानतावष केक नहीं भेल होए,
- 4:30–4:33औही लोकिक संथुलन के बिगाडी देचे.
- 4:33–4:38देविक पीडिप पार लागव उही ब्रमान्द्ये सन्तुलन्पर प्रहार चल.
- 4:38–4:39बाप्रे!
- 4:40–4:42आ उकर परनाम कतेख बयानक भेल?
- 4:42–4:45कमला मैया क्रोद इतेख भ्यंकर चल
- 4:45–4:47जो उसुजे आद्रक दर्बानसशा
- 4:47–4:51एक ता शालीन बागिन आनी का गरीबन पर चोर दिल दिल.
- 4:51–4:53अगी में मानवबलता टिकी ने से के जे.
- 4:53–4:54बिल्ल्कुन नहीं.
- 4:54–4:58अनतता एही युध में गरीबनाक म्रित्यो बहुजाई चे.
- 4:58–5:00अदो सर्दिस देवी शक्ती युक्त बागिन
- 5:00–5:02उही में मानवबल ता टिकी ने सकेचे
- 5:02–5:04बिल्लकु नहीं
- 5:04–5:06अनतता एही युध में
- 5:06–5:08गरीबनाक म्रित्यु बहुजाएचे
- 5:08–5:10मुदा हमर मन एक ता एक दबपर अडीजाएचे
- 5:10–5:12इत बहुत बेसी असन्तुलित नयाएभेल
- 5:12–5:42बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा ब�
- 5:42–5:45जक्र कोनो गलती ने चल, उक्रा सीधे म्रित्य। दन्द?
- 5:45–5:48रहा, हमहा कबात भूजी रहाल ची.
- 5:48–5:51मुदा इ उग्रिता वास्तव में देवी न्याई,
- 5:51–5:55आम्मानविय न्याई प्रनालिग भीच का मालिक अन्तर की देखा रहाल चे.
- 5:55–5:56आ, कोना?
- 5:56–5:59दन्द गरीबक मन्शा कलेल नहीं चल,
- 5:59–6:01उ औरी सीमा उलंगन कलेल चल,
- 6:01–6:04जक्रा लांगभ सरबता वरजित चल.
- 6:04–6:07इलोक कता इस थापिट करहल चे जे,
- 6:07–6:10देवी देवताक दून्या मानव भावनाक अदीन अदीन नहीं चे.
- 6:10–6:13माने उसब हम्रा सब जगका नहीं सुचे चतिन.
- 6:13–6:17एक दम नहीं, उही दून्या में पवित्रता पूरन चै,
- 6:17–6:20आवकर खन्दन करव सीथ हप्रले के आमन्चन देप चे.
- 6:20–6:23गरीबनक म्रित्त्य। इदेखावे चे,
- 6:23–6:26जगन अद्यात्मिक नियम तुटाएचे,
- 6:26–6:29तकन मान्विये तरक अबल दूनु अर्ठहीन भीजाएचे
- 6:29–6:30अहो
- 6:30–6:33आई इगठना अगाडी कताक लेल एक ता अदार तेर करेचे
- 6:33–6:38करन अस्ली ध्वन्द्ता गरीबनक म्रित्युक बाद शुरू होएचे
- 6:38–6:40देवी आपन संटूलन ता वापस लोलेल दिन
- 6:40–6:43मुदा मानव समाज आपन सन्तुलन गुमादे लक.
- 6:43–6:46इब वहत दरावना मुदा गहीर विचार चे,
- 6:46–6:50जे आपन सब एक ता एहन ब्रमाणड मे ची,
- 6:50–6:53जते चोट-चोट भूल के से हो,
- 6:53–6:56बहुत बारी मुल ये चुकावे परी सके चे.
- 6:56–7:01अग, अच्टा बद्योंगा देटागा प्रान्डादा चान्त्ब होगेल,
- 7:01–7:04मुदा म्रित्योंगाद जे गतना गतेट चे,
- 7:04–7:07उवो हम्रा सब के जगजोरी कर रक्टेट चे.
- 7:07–7:13कताद अनुसार, गरीबनाक लहास के सम्मान जनक अंतेष्टी ने बईतेट चे.
- 7:13–7:19गरीबनक लहास के सम्मान जनक अंतेश्टी नैबदेद छे
- 7:19–7:22ये बहुत पयग बाथ छे वोई समाजक लेल
- 7:22–7:26रहा, एक दम ये अपने आप में एक ताएख त्रास छे
- 7:26–7:30जे एक ता वेक्तिक एहन दुखद अंत बहु
- 7:30–7:35अख्रा अगनी संस्कार अख्ठाम कमलादार में फेकी देल जाएत छे
- 7:35–7:40उलेहास पानी में बहत-भहत एक ता दोभी आ गाट लक पहुचे छे
- 7:40–7:43जता एक ता दोशर दोभी कप्रा सावकर रहाल चला
- 7:43–7:47एक तम सही, लहास गाट पर आडचन बने छे
- 7:47–7:50उईदोबी के कपला साव करे में दिकत होईत चे
- 7:50–7:54तो उदोबी बनाई जाने जे एक ककर लहास चे
- 7:54–7:57उक्रा अनादर पूर्वक सहतारी का
- 7:57–8:00मने दھकेल का दो सर दिस भाहा देच छतिन
- 8:00–8:03जाई से हुंकर काज में कोनो भादाने पड़े
- 8:03–8:05इद्रिष ये मानविय समवेदना
- 8:05–8:18आ लोक एक दिनचर्याग भीचक एक ता बहुत खुर तक्रा है एक देस एक ता म्रिद शरीर चे जक्रा अंतिम समानक प्रतिक्षा चे आ दोसर दिस उ व्यक्ती चे जक्रा आपन काजक जल्दी चे
- 8:18–8:20रोस मर्रा काज.
- 8:20–8:21बलकुल.
- 8:21–8:28इए उ चन च़े जदे एक ता म्रित्त्युक त्रास्दी एक ता सादारन भाउतिक अद्चन में बदली जाएच्चे
- 8:28–8:35इए आमान बियताक उस्वरूप चे जदे लोक दोसरक दुख के देखा बंद को देच्चे
- 8:35–8:39मुदा एते हम औही दोबिक पक्ष सक एक तर्क रक्फूं
- 8:39–8:41मने एक तर पूष्बैक देभ हम एते
- 8:41–8:43इमान्दारी सकहल जाए
- 8:43–8:46तजज हमु या आहा उही दोबिक जगा पो होगती
- 8:46–8:48ता शाएद एही तर खाज करती
- 8:48–8:49अच्छा कोना
- 8:49–8:52देखो, उदोभी कोनो खलना एक ता नहीं चला
- 8:52–8:56उदो मात्र अपन जीभी को पारजना काज कर अल चला
- 8:56–8:58उनका ला कप्डाक भारी भोजा रहल हैतनी
- 8:58–9:01परिवार अग भरन पोषन कर चिन्ता हैतनी
- 9:01–9:02आँ उद छे
- 9:02–9:07तपानी में बहेत लहास उनका लिल मात्र एक ता बहुते करचन चल,
- 9:07–9:11उनका की पता जे इगरीबन कलहाच चे, या कुनो सम्मनत वेक्तिक शव चे,
- 9:11–9:15की उक्रा दھकेल देब वास्तब में इतिक पिग अप्राद चल,
- 9:15–9:18अगगद तर्क अपन ताम सही चे
- 9:18–9:21मुदा लोकि कावष्खता जैना जीविका
- 9:21–9:24और अद्याक्मिक मर्यादा जैनाम्रतक कषम्मान
- 9:24–9:27कबीज इद्वंद बहुत पुरान चे
- 9:27–9:29दोबिक कुनु दूबावना नहीं चल
- 9:29–9:30इसत्य चे
- 9:30–9:33मुदा जकनाहा एक ता लहास के
- 9:33–9:45इसत्ते चे, मुदा जक्ञनाहा एक ता लहास के, मातर एक ता कुडा या अद्चन भुजिकर थेली देच ची, तकनहाहा उही शरीर का बितर बसल मानविय गर्मा के अस्विकार कर रहल ची.
- 9:45–9:48माने एक ता इनसान के वस्तुमानी लेल गल?
- 9:48–9:53इक्दम, समाज का निर्माड मात्र जीवी का कमाई बस से नहीं होई ता चे
- 9:53–9:56यह एही चोड-चोड-समवेदन शीलता से बने चे
- 9:56–10:01जक्ञन कोनो समाज में एक ता म्रिज शरीर कप्रती इतिग भुदासींता आभी जाएच चे
- 10:01–10:04तए उई समाज का अंतरिक पतनक संकेद छे
- 10:04–10:05ओगग
- 10:05–10:07उद़वी अग्यान्ता मेचल
- 10:07–10:10मुदा उकर काज इसिद करे छे
- 10:10–10:14जे उई समाज में म्रितक कप्रती सम्मानको भावना मरिचुकल चल
- 10:14–10:18इई एक ता अचेतन रूप में भेल नैतिक पतन चल
- 10:18–10:23आप्रक्रितिया इश्वर्या शक्ति, एही तरग क्या शुन्निता के स्विकार नहीं करे च्ये.
- 10:23–10:25ए बहुत गहरीन गब कहलो है.
- 10:25–10:29तई ई शर्फ कप्रा द्वामे भेल आद्चन दूर करभ नहीं चल,
- 10:29–10:34उगटा एक्ता एक्ता बहुत गहीन अप पार्लोकिग दिशा दिस्मूडेच्छे
- 10:34–10:37रहा सक एक अस्ली मोड़ बएच्छे
- 10:37–10:41बलकुड, गरीबन कन्या अपन पतिक अकाल म्रित्य।
- 10:41–10:45अम्रित्य। के बाद लहा सक एक्ता बहुत दुर्दशाक समाचार सूनी का
- 10:45–10:54गरीबन कन्या अपन पतिक अकाल म्रित्य। अम्रित्य। के बाद लहा सक एहन दुर्दशाक समचार सुनी का शोका कुल भोजाएच्छतीं
- 10:54–11:00एक तपती चीने लेल गेल अदो सर उकर शरीर की नदी में एक तलावारिस वस्तूजका दखेल लेल गेल
- 11:00–11:04आँ सहनी ए शोक में बखवान के सुम्रे थ्छती
- 11:04–11:05अँ
- 11:05–11:06उनकर य आर्टनाद
- 11:06–11:08इजे भीत्रक क्रन्दन चे
- 11:08–11:10उ एते क्षक्तिषारी होई चे
- 11:10–11:13जव खव सीथा पार्लोकि दुन्या के जगजोडी दिचे
- 11:13–11:16एते य गव औरो भेसी रोचक भेजाए चे
- 11:16–11:19कारन एही क्रन्दन के बाज्जे गटना गटे चे,
- 11:19–11:21उकुमो सादारन चमत कार नहीं चे?
- 11:21–11:24एक दम नहीं, एक ता गलोके गटना गटे चे.
- 11:24–11:30हां, गरीबनक आत्मा एक ता सादारन वेक्तिक शरीर में प्रवेश कजाएत चे.
- 11:30–11:33एही अवस्ता के बबगता कहल जाएख चे.
- 11:46–11:51अपन चरम्प पहुच़े चे तकन नयाय मांगबाक पुकार भूटिक दून्याक सीमा के तोडी देचचै.
- 11:51–11:57बगताक रूप में गरीबनक आबब यी अस्पष्ट करएद चे जे ओ आत्मा शान्त नहीं भेल चै.
- 11:57–11:59अखरा नयाय चाही.
- 11:59–12:01अगरा न्याय चाही
- 12:01–12:03अगरा न्याय चाही
- 12:03–12:05अगरा न्याय चाही
- 12:05–12:07अगरा न्याय चाही
- 12:07–12:09अगरा न्याय चाही
- 12:09–12:11अगरा न्याय चाही
- 12:11–12:13अगरा न्याय चाही
- 12:13–12:15अगरा न्याय चाही
- 12:15–12:17अगरा न्याय चाही
- 12:17–12:19अगरा न्याय चाही
- 12:19–12:21अगरा न्याय चाही
- 12:21–12:25अदर पन च्याई में उसब आपन असम्वेदन शिलता दिखिस अकाई
- 12:25–12:27अ अद्मा जे फरमान सुन्वेच्ये
- 12:27–12:30उसुनी का हमर माता चकरा जाईत चे
- 12:30–12:31की फरमान चल?
- 12:31–12:33बबगता मने गरीबनक आप्मा
- 12:33–12:37कहत चे जे एगो गोटे दोभी हुंकर अप्मान किलग
- 12:37–12:41मुदा उ शाप सम्पूर्न दोभी समुदाये के दैच्छतिन
- 12:41–12:43रहा, पूर्द समुदाये के
- 12:43–12:51चाप इरहे चे, जिजे सब दोभी मिली का हुनकर लहास कमला दारस निकाल सम्मान पूर्वक दाह संसकार नहीं करे चदी
- 12:51–12:55तदोबी सबखग बद्थी मेराखल सब कपडा जरी जात.
- 12:55–12:57बद्थी माने जते कपडा उबालाए चे?
- 12:57–13:00एक जातली, मुदखेर हम उही प्रश्न परावे च्ये,
- 13:00–13:04एक विक्तिक भूलक लेल समपून समवुदाय के कियक शाप दिलगेल.
- 13:04–13:06गलती उही एक तदोबीख चल,
- 13:06–13:11जिलहास के तेल्लक, गामक बाखी दोवी सब ता अपन अपन गर में चलाने.
- 13:11–13:14आआ, उनका सब के तब पता से हो नहीं हे तन.
- 13:14–13:17एक जाखली, यित सीथा सीथा समहिक दंदभेल,
- 13:17–13:20जे आदूनिक द्रिष्तिसा पुँन तह अन्न्याई पुँन लागे चे.
- 13:20–13:24ये वेक्तिक अप्रादख बोजा पूरा समाज किया कुत्धावे
- 13:24–13:27जो हम सब एक्रा पाग परी प्रेक्ष्यस जोडी
- 13:27–13:32तप पारमपरिक अलोक समाज में वेक्ती और समाज के भीच का जे सीमा रेखा होईचे
- 13:32–13:34उबहुत शीन होईचे
- 13:34–13:36मने, अद्विज़्ूलिзम नहीं होई चे
- 13:36–13:37एक दम नहीं
- 13:37–13:41आदूनिक युग मे हम सब व्यक्तिवाद में बेसी विष्वास करी चे
- 13:41–13:43जतै हमर गलती सर्फ हमर चे
- 13:43–13:46मुदब पारम पर एक समाज में दाएत्व समोही कोई चे
- 13:46–13:49जखन औही एक ता दोभी लहास के टिल लक
- 13:49–13:53तो उ कोनो वक्तिगत शुन्यमे काज नहीं करा हल चल
- 13:53–13:55आँ उ समाजक हिस्सा चल
- 13:55–13:58आँ उ उही समाजक उपज चल
- 13:58–14:02जताई करूना से भेसी काज के महत्व देल जारा हल चल
- 14:02–14:05समुदायकर कोनो एक सदस्यड
- 14:05–14:08जखन असमवेदन शील या अनेतिक काज करे चे
- 14:08–14:13तव उक्रा सम्पृर्ण समाजक नेटिक पतनक परिचायक मानल जाएचे.
- 14:13–14:16माने, पूरा समाज उकर लेल जिम्मिदार चे.
- 14:16–14:17बलकुल.
- 14:17–14:20गरीबनक आत्मा इभली बहाती जाने चल,
- 14:20–14:24जे एक व्यक्ती के दन्धित करभासे आस्ली न्याय नहीं भीटत.
- 14:24–14:29न्याय तक्श्भ्ध्ध जग्खन पूरा समाज आपन निद्रा से जाग्रत होएद
- 14:29–14:33और उही आमान्वियताक वूरुद्ध एक संग्ट्ध्ध्ध्ध्ध्ध।
- 14:33–14:37और शाप के जे लक्षचे बद्�the उक्रा पर द्यान दिया?
- 14:37–14:42आप बद्�the, जटे जोभी सब कप्रा उभाले च्छती, असाप करे च्छती,
- 14:42–14:44उतो हुंकर जीविका के केंद्र भेल.
- 14:44–14:48एक दम बद्the, उही समवुदायक अर्थ्तन्त्र,
- 14:48–14:53वूँगर जीवन यापनक मूल दूरी चे, जीविका पर सीदह प्रहार का,
- 14:53–14:57गरीदनक आत्माज समाज कर समोहिक चेतना के जागरत कर बाग,
- 14:58–15:00एक ता अचुक अस्त्र प्रयोग के लक.
- 15:00–15:01अचुक अस्त्र?
- 15:01–15:05रहा, जा आत्मा सर्फ एक आद्यात्मिक शाप देत,
- 15:05–15:11जे आहा सबखग पर लोक भिगडिजाएत, ता शाएद लोक उक्रा अन्सुना कर दित.
- 15:11–15:18मुदा जखन आहाक रोस्गारी, आहाक बद्धी जरबाक गप होईच्छे, तकन समाज तुरन्त चेती जाएच्छे.
- 15:18–15:22इशाः उही समवदाय के इं महसुस कराबाक लेल चल,
- 15:22–15:26जे जा आहा मानविये गर्माक रक्षा नहीं करेच्छी,
- 15:26–15:30ता आहा के इबहोट्तिक जीविकाक अदिकार से हु नहीं चै.
- 15:30–15:33बापरे, इता गजब क समाजिक अंजिनेरिंग भेल,
- 15:33–15:38माने म्रित्त वेक्तिक गर्माक लेल पुरा समाजके हुक्कापानी बंद्करवाग द्जम्की
- 15:38–15:43यशाप वास्तों में म्रित्तक के प्रती अनादर के जे गंभीर परिनाम बहुऽ सकेच्छे
- 15:43–15:46उक्र बहुत निर्मम्तां से रिखांकित करेच्छे.
- 15:46–15:47बिल्कोल
- 15:47–15:49ज़ोबी समुदायक शाब सुलाक बाद की के लक
- 15:49–15:51की उसब आपन हदपर आडल रहला
- 15:51–15:53की उसब तरक केलनी
- 15:53–15:55जी हमर की दोष्चे
- 15:55–15:57गल्ती तप फलाना धूभीक चे
- 15:57–15:59वा उसब देर से
- 15:59–16:01या विवेक जागरत भिलासा
- 16:01–16:03प्राइष्चित कब आद अपनाँलनी
- 16:03–16:10दिखु, जीविकाक संकत एहन विषे चे जे कोनो भी समुदायक भीद्रक जडदा के तोडी देचचे.
- 16:10–16:15जोकन, समपुन समुदायक भथ्थी जरबाक संकत सोजा आबिगिल,
- 16:15–16:18तकन विक्तिवादक लेल कोनो स्तान नहीं बचल.
- 16:18–16:21उते य तर्क काम नहीं करए चे,
- 16:21–16:51अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ�
- 16:51–16:54इद्रिश्छ आपने आपने कत्तेक शक्ती शाली चे,
- 16:54–16:58जि लहाश की चु समे पहले एक ता अद्चन चल,
- 16:58–17:02उआप पुरा समाजक लेल सबसे महतोपोण वस्तू बन गेल चे.
- 17:02–17:05इब रहात पैक बडलाव चल हुनका सबक सोच में.
- 17:05–17:12इसर्व भ्याज्क करबाक लिल प्रेरित किलक, सामूहिक प्रेयास्स्स लहास निकाल जाएचे, अवदिवत पुर्न सम्मानक संग दास्स्कार कल जाएचे.
- 17:12–17:20अंतता गरीबन के उसमान भेटे चन्नी जक्रो रक्दार चला हा, अजकर लेल हुंकर आत्मा चट पता रहल चल.
- 17:35–17:41अवि समाजक एकता अगल्ती सुदार्वा कबावना कव अद्गुत प्रतीक चल.
- 17:41–17:44अव्सव शर्ट इक ता लहास ने खोजी रहल चला.
- 17:44–17:47अव्सव अपन हेरायल मनवियता खोजी रहल चला.
- 17:47–17:50अरे वा! कतिक नीगगव कहलो है!
- 17:50–17:56जखन कोनो समवदाय अपन्दाएत्व स्विकार के लेच्छे, तकन अप्राद बोदख कबार कम होईच्छे.
- 17:56–18:01प्रैश्चित्तक एप प्रक्रिया स्र्व गरीबन कर आत्मा के शान्त करवाक लेल नीच्छल,
- 18:01–18:06बलकी स्वयम उही समाज के उही नेटिक पतन से मुक्त करवाक लिजल.
- 18:06–18:11अगनी संसकारक जे आगी चे उसर्फ गरीबन कर शरीरेक के नहीं जरावे चे,
- 18:11–18:16बलकी उही समुदायक ककलंक आओा समवेदन शीलता के सोब फस्म कदेचे.
- 18:16–18:24तो आही सबख अद्त की भेल, इप रह्शिट तक परिनाम इत ट्टे चमतकारिक हो इच्छे, जो पूरा कत्ठाक दिशा बड़जाएच्छे.
- 18:24–18:54दधा संस्कार अग बाद शाप निष्प्रभावी बहडाएचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच�
- 18:54–18:57इस भीरोदा या बद्टिक अग कप्डाग रक्षक देव्टा बनी जाथ थी.
- 18:57–18:59इस रूपान्तरन बहुत महत्रपून चे.
- 18:59–19:03इस ता एक ता बहुत पाएक पेराडोख्स, माने वीरोदा बहास च्या,
- 19:03–19:06जे विक्ती उई समवदान दोरा अप्मानित भेल चल,
- 19:06–19:15जखर लहास के दखेली देल गेल जल, जे आत्मा शाप देरहल चल, उम निर्थ्थ्थ परान्त उकर रक्षक गेग बनी गेल, इप रूपान्तरन कोना समबभभ हैल.
- 19:15–19:25इक उनो विरोदा भासन चे, बलकी इक शमा रूपान्तरन असन्तूलन पूनरस्तापित कर बाग सबसे सुन्दर मनोवे गयनिक अ अद्ध्यात्मे कुदारन चे.
- 19:25–19:33इबुजनाई आवश्षक चे जे गरीबनक आत्माक मूल क्रोद न्याय नहीं भेट्बाग कारन चेल अनादरक कारन चेल.
- 19:34–19:36माने उ बदलाने ले भी चाहच्छला.
- 19:37–19:42एक दम नहीं आत्मा प्रतिषोदी नहीं चेल, उ बस अपन अदिकार मागी रहाल चल.
- 19:42–19:48जखन समवदाय आपन भूल मानी कै सामूहिक प्राएष्चित के लक, तकन शत्रूता समाप्त भेगेल?
- 19:49–19:52आप, न्याय भेडगेल तक्रोद शान्त भोगेल.
- 19:53–19:59भिल्कुल, समाज उहे आत्मा के सम्मान देलक, तब बदले मे उ आत्मा समाच के आपन सन्रक्षन देलक.
- 19:59–20:05न्याय बेट्लाक बाद उ पीदित व्यक्ती प्रतिशोदी नहीं गेल, उ पर अपकारी बनी गेल.
- 20:05–20:10इ लोग कता इ अस्पष्ट करे चे, जगन न्याय पून प्राएष्चित होएचे,
- 20:10–20:15तकन मात्र गल्तिक सुदार नहोएचे, बलकी समबन्धक नवीनी करन होएचे.
- 20:15–20:19नवीनिकरन, मने फेरस एक ता निक सम्वन्धक सुर्वात
- 20:19–20:23आप, एक ता अन्याए पुरन म्रित्युक शिकार भेल वक्ती
- 20:23–20:28जक्रा गामक लोक तिरस्क्रत केने चल, सामूहिक सम्मान भेट्लाक बाद
- 20:28–20:32अगर दन्द उनका अपन प्रान्द कईल्गेल कोनो भी काज अपन परिनाम लोक अबई चे.
- 20:32–20:36इक दम चाहे उ गरीबन दवारा देविक पीडी चुभे हुए,
- 20:36–20:40जकर दन्द हुनका अपन प्रान्द कईल्गेल प्रान्द के चुकावे प्राण्द.
- 20:40–20:45जो आपुन सब श्रोथ समागरीक एही समपून गाता के समेटी
- 20:45–20:51तई इस पष्ट होई च्याए जे अन्जान में काईल गेल कोनो भी काज आपन परिनाम लोक अबएच ज्याए
- 20:51–20:55एक दम चाहे ओग गरीबन दवारा देवीक पीडी चूभे हुए
- 20:55–20:58जकर दन्द हुनका अपन प्रान्द कचुकावे पडल
- 20:58–21:01या फिर दूभी दूरा लहास के ठेलव होए
- 21:01–21:04जकर परिनाम समपुन समवुदाय पर
- 21:04–21:07बद्थी जरबाक शाप के रूप में खषल.
- 21:07–21:08तोनु स्तिती में,
- 21:08–21:12अनजाने में भेल भूल कबयानक परिनाम सोजा आईल.
- 21:12–21:17आप ख़न प्रक्रती आब्रम्हांड आपन संटुलन्ता के चे
- 21:17–21:22भिल्कुल, मुदा संग है, इग कता हमरा सब खे, इशे हो भुजावे चे,
- 21:22–21:26जे प्राएश्चित, सम्मान, अस्समहेक प्रेयासस्सा,
- 21:26–21:32कोनो वियोग या अन्याई पून गतना के श्रद्द्धा अपरोपकार में बदलल जासके चे
- 21:32–21:38गरीबन भाबाक लोक देव्टा बनब एही श्रद्द्धा मैं रूपान्तरन का प्रतीक चे
- 21:38–21:42जते दुख अक्रोद का अंत एक ता रक्षक का जन्म के संग होई चे
- 21:42–21:46इगात्ठा मात्र एकता प्राचीन लोग कता नहीं चै,
- 21:46–21:52बलकी ये मानवी आच्रन के एकता शाष्वत मारगदर्षिका चै.
- 21:52–21:57इज़ हमरा सबके बताइत चै, जे भोल भेनाई मानव सबहाव चै,
- 21:57–22:00उक्रा रोक नहीं सकैची.
- 22:00–22:05मुदा, उही गल्तिक प्रती आहाक समाजक प्रतिक्रिया की चे,
- 22:05–22:09आहा, उक्रा सुद्दर्बाक लेल की कदम उत्हे बेची,
- 22:09–22:11उहाहाक भविश्ट्त ताई करेचे.
- 22:11–22:14प्राएश्चित में जे शक्ती चे,
- 22:14–22:18उह समाजके सब से गहीर गाव के से उ बहरी सकेचे.
- 22:18–22:20अप्रादबहल सजादे दियो
- 22:20–22:21भिलकुल
- 22:21–22:23अप्रादिके जेल पटादियो
- 22:23–22:24या जरीमाना लगा दियो
- 22:24–22:25मामला कहतम
- 22:25–22:27हम सब समाजे क्रूए कहला वहा
- 22:27–22:29आईही चर्चाक अन्त में
- 22:29–22:30इगा ता
- 22:30–22:31हम्रा सब के सोजा
- 22:31–22:33एक ता बहुत विचारो
- 22:33–22:35अप्रादबहल सजाजा दे दियो
- 22:35–22:37रिए अप्रादी के जेल पथा दियो
- 22:37–22:39या जरीमाना लगा दियो
- 22:39–22:40मामला कहतम
- 22:40–22:41हम सब समाजे क्रूपे
- 22:41–22:44उही में अपन कोनो दाइत्व नहीं देखाई ची
- 22:44–22:46मुदा जैं हमर समाज से हो
- 22:46–22:48इही कताजका सामूहिक प्राएष्चित
- 22:48–22:50अपन कोनो दाएत्व नहीं देखेची.
- 22:50–22:52मुदा जैं हमर समाज से हो,
- 22:52–22:54एही कतादजका समूहिक प्राइष्च्ट,
- 22:54–22:57अक्षमा का माद्धिम से सुदारक बात अपनाभई,
- 22:57–22:59तकि हमर समाज में अप्राद,
- 22:59–23:04अगरनाक इस्थान पर एक्ता नव सदबाव कजन्म नहीं बहसाके चे
- 23:04–23:09ये एक्ता बहुत गहीर प्रष्न चे, जक्रापर वास्तम ए सोच भाखवष्श्च्ता चे
- 23:09–23:13दन्द मात्र एक्ता एंट्र जकां काज करे चे
- 23:13–23:19मुदाकी सामहिक प्रायस्चित रहमर समाजके भीत्र साद्कखो एक तनव रक्षक,
- 23:19–23:21या सहिश्वु समाज नहीं बना सके चे.
- 23:21–23:24एक रापर गमभीरता सब विचार जाए.
- 23:24–23:26आए ही विचारो तेजक प्रष्नक संग,
- 23:26–23:30विदेप पत्रिका सलेल गल एही कता कहमर इग,
- 23:30–23:32गेर पर्ताल यते पुर्न होईते चे.
Plain text
कल्पना करू, जे आपन सवक कोनो बाट़स से जार हल्षी, आप पैर फिसल जाया, या किछु भोजाया? बलकु या मानिलिया, अन जाने में कख्रो चपल पैर पैर लागी जाया, कुनो जानी भुजी का काल गलती नहीं, बस एक ता सादारन भूल, तए एकर बदला मे की है बाखचा ही? तब आदारन तए तब लोक शमा मांगी लेई चाए, बाद्खटम. आए, एक दम. मुदद सोचु, जे एकर बदला मे स्वरक से एक तब भागिनानी को चोड दे जाए तब. ब्रे, यी तो एक दम मझवव अब भ्यानक लागग च्ये सूनी में च्याने, मुदा आय आपमर सब कजे यी गहीर परताल चे उआई ही विषे पर चे जे हमरा सब कन न्याय अदंडण्डण्डारना के जग्जोर के रखी दे च्ये आई आपन सब गजेंदर ताकुर दवरा समपादिद, विदेह इपत्रिका से संकलिद, एक तब बहुत अदुत लोग कतापर चर्चा करव. आआ, जकर नाम चै, गरीबन भाबा का गाता. इक्दम सही आई आपन मिशन एन है चे, जे खाली एक ता पुरान कता सूनाल जाए, बलकी एबुजब जी, जे हमर परमपराग भीतर, दन्द, न्याय, भूल, आप सामूहिक प्रायष्षिट का की आज्ट चे? तीख चे? आओ एक राविस्तार से भूँची. कारन इगाता मानव जीवनक भूल आच्वमाक उही गहीर दर्षन के सोजाने चे जताई माने आदूनि कानुनक तरक काज नहीं करे चे आप एक दम इगाता हमरा सब के उहे दूनिया में ले जाए चे जताई कर्म का आश्य से भेशी बूजल्याने उकर परिनाम पर द्यान दिल जाएचे माने जे गल्ती भेल उकर असर कते क पैग जे ताही पर भिल्कुल कोनो गतना जकन गते चे ता उकर प्रभाँ मातर उहे व्यक्तिदरी सिमित नहीं रहे चे गल्ती के लक अँ समाज, प्रक्रूति, अपार्लोकिक शक्ति सब के प्रभाविद करे चे. एह कता में जिन नयाय अदन्डक सुरुप चे, उईक ता जतल पारिस्तित की तन्तर माने एको सिस्तम जका चे. अहो, एको सिस्तम जका. अह, जते एक ता चोट सन भूल, उगरा वापे सन्तुलन में आनबा के लिल एक देब बहुत कथोर प्रतिक्रिया का वशक्ता हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ भरहम ताकुर जे ब्रामवन चला हा गासी यादव अगरी बन दोभी एक्दम सही, इद तीनो गोटे कुष्ती आप प्याल्वानी में निपूँद चला एक्दम आपन शारेरिग भलक चरम पर, गाअँगरक अखाराक वो भोरकुवा समय, मातिक, महیک, देख, पसीना, सब किचु एक्छु समान ने चली रहाल चला. मुदा, तकने एक ता चोट सन गतना गतल? आप भ्यासक्रम में दाव पेच लगावएया काल, गरीबनक पैर पनजान में कमला माएक पवित्र पीडी में लागी जाएचे. पीडि माने उस्थान जते देविक आवान या पुजा हो इच्छे. बिलकुल, पवित्र स्थान. आस्वोट समगरी बहुत स्पष्ट रूपसा कही चै, जे एह में गरीबन कोनो दूबहावना नहीं चल. उ जानिबुजी के पीडे के अप्मानित नहीं के ने चला, इम भाद्र एक ता शारीरिक संटूलन चल, एक ता अन्जान सुन्जान में भेल्स पर्ष, एताई जे सब सम भेशी ध्याना कर्षक गब चाए, से एज लोग कता सब में, पवित्रता और लोकिक सीमक अतिक्रमनक परिनामक के बहुत निर्दाई अ प्रतिकात्मक रुप में दिखाए जाएच्छे. माने अन्तेंच्छन या मन में की चल उकर कुनो मोल नहीं. एक दम नहीं. आदूनिक नयाए प्रनाली में, हम सब इदेखे च्ये, जे अप्राद करबाक पाचा व्यक्तिक मन में की चली रहल चल, की ओकर मन्शा गल्ती करबाक चल, जब मन्शा नहीं चल, तदंद कम कदेल जाए च्ये. रहा, जिना अख्सिरेंट भोजाए तदषजा कम होगी च्ये. भिल्कुल, मुदा पारमपारिक अ अद्यात्मिक संदर्व में इनीम लागु नहीं होईत चे. उक्रा आहा प्रक्रतिक नीम जका देखी सकए च्ये. जअ आहा अन्जान में आगी में हात दो देब, तकी आगी इसोचत जे आहाक मन्शा की चल. आई, आगी तज़र्वे करत् इक्दम, पवित्र स्थानक आपन एक ता उर्जा चेत्र मानल गेल चे, औही सीमा का उलंगन चाहे उ अग्यानतावष केक नहीं भेल होए, औही लोकिक संथुलन के बिगाडी देचे. देविक पीडिप पार लागव उही ब्रमान्द्ये सन्तुलन्पर प्रहार चल. बाप्रे! आ उकर परनाम कतेख बयानक भेल? कमला मैया क्रोद इतेख भ्यंकर चल जो उसुजे आद्रक दर्बानसशा एक ता शालीन बागिन आनी का गरीबन पर चोर दिल दिल. अगी में मानवबलता टिकी ने से के जे. बिल्ल्कुन नहीं. अनतता एही युध में गरीबनाक म्रित्यो बहुजाई चे. अदो सर्दिस देवी शक्ती युक्त बागिन उही में मानवबल ता टिकी ने सकेचे बिल्लकु नहीं अनतता एही युध में गरीबनाक म्रित्यु बहुजाएचे मुदा हमर मन एक ता एक दबपर अडीजाएचे इत बहुत बेसी असन्तुलित नयाएभेल बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा बद्रादा ब� जक्र कोनो गलती ने चल, उक्रा सीधे म्रित्य। दन्द? रहा, हमहा कबात भूजी रहाल ची. मुदा इ उग्रिता वास्तव में देवी न्याई, आम्मानविय न्याई प्रनालिग भीच का मालिक अन्तर की देखा रहाल चे. आ, कोना? दन्द गरीबक मन्शा कलेल नहीं चल, उ औरी सीमा उलंगन कलेल चल, जक्रा लांगभ सरबता वरजित चल. इलोक कता इस थापिट करहल चे जे, देवी देवताक दून्या मानव भावनाक अदीन अदीन नहीं चे. माने उसब हम्रा सब जगका नहीं सुचे चतिन. एक दम नहीं, उही दून्या में पवित्रता पूरन चै, आवकर खन्दन करव सीथ हप्रले के आमन्चन देप चे. गरीबनक म्रित्त्य। इदेखावे चे, जगन अद्यात्मिक नियम तुटाएचे, तकन मान्विये तरक अबल दूनु अर्ठहीन भीजाएचे अहो आई इगठना अगाडी कताक लेल एक ता अदार तेर करेचे करन अस्ली ध्वन्द्ता गरीबनक म्रित्युक बाद शुरू होएचे देवी आपन संटूलन ता वापस लोलेल दिन मुदा मानव समाज आपन सन्तुलन गुमादे लक. इब वहत दरावना मुदा गहीर विचार चे, जे आपन सब एक ता एहन ब्रमाणड मे ची, जते चोट-चोट भूल के से हो, बहुत बारी मुल ये चुकावे परी सके चे. अग, अच्टा बद्योंगा देटागा प्रान्डादा चान्त्ब होगेल, मुदा म्रित्योंगाद जे गतना गतेट चे, उवो हम्रा सब के जगजोरी कर रक्टेट चे. कताद अनुसार, गरीबनाक लहास के सम्मान जनक अंतेष्टी ने बईतेट चे. गरीबनक लहास के सम्मान जनक अंतेश्टी नैबदेद छे ये बहुत पयग बाथ छे वोई समाजक लेल रहा, एक दम ये अपने आप में एक ताएख त्रास छे जे एक ता वेक्तिक एहन दुखद अंत बहु अख्रा अगनी संस्कार अख्ठाम कमलादार में फेकी देल जाएत छे उलेहास पानी में बहत-भहत एक ता दोभी आ गाट लक पहुचे छे जता एक ता दोशर दोभी कप्रा सावकर रहाल चला एक तम सही, लहास गाट पर आडचन बने छे उईदोबी के कपला साव करे में दिकत होईत चे तो उदोबी बनाई जाने जे एक ककर लहास चे उक्रा अनादर पूर्वक सहतारी का मने दھकेल का दो सर दिस भाहा देच छतिन जाई से हुंकर काज में कोनो भादाने पड़े इद्रिष ये मानविय समवेदना आ लोक एक दिनचर्याग भीचक एक ता बहुत खुर तक्रा है एक देस एक ता म्रिद शरीर चे जक्रा अंतिम समानक प्रतिक्षा चे आ दोसर दिस उ व्यक्ती चे जक्रा आपन काजक जल्दी चे रोस मर्रा काज. बलकुल. इए उ चन च़े जदे एक ता म्रित्त्युक त्रास्दी एक ता सादारन भाउतिक अद्चन में बदली जाएच्चे इए आमान बियताक उस्वरूप चे जदे लोक दोसरक दुख के देखा बंद को देच्चे मुदा एते हम औही दोबिक पक्ष सक एक तर्क रक्फूं मने एक तर पूष्बैक देभ हम एते इमान्दारी सकहल जाए तजज हमु या आहा उही दोबिक जगा पो होगती ता शाएद एही तर खाज करती अच्छा कोना देखो, उदोभी कोनो खलना एक ता नहीं चला उदो मात्र अपन जीभी को पारजना काज कर अल चला उनका ला कप्डाक भारी भोजा रहल हैतनी परिवार अग भरन पोषन कर चिन्ता हैतनी आँ उद छे तपानी में बहेत लहास उनका लिल मात्र एक ता बहुते करचन चल, उनका की पता जे इगरीबन कलहाच चे, या कुनो सम्मनत वेक्तिक शव चे, की उक्रा दھकेल देब वास्तब में इतिक पिग अप्राद चल, अगगद तर्क अपन ताम सही चे मुदा लोकि कावष्खता जैना जीविका और अद्याक्मिक मर्यादा जैनाम्रतक कषम्मान कबीज इद्वंद बहुत पुरान चे दोबिक कुनु दूबावना नहीं चल इसत्य चे मुदा जकनाहा एक ता लहास के इसत्ते चे, मुदा जक्ञनाहा एक ता लहास के, मातर एक ता कुडा या अद्चन भुजिकर थेली देच ची, तकनहाहा उही शरीर का बितर बसल मानविय गर्मा के अस्विकार कर रहल ची. माने एक ता इनसान के वस्तुमानी लेल गल? इक्दम, समाज का निर्माड मात्र जीवी का कमाई बस से नहीं होई ता चे यह एही चोड-चोड-समवेदन शीलता से बने चे जक्ञन कोनो समाज में एक ता म्रिज शरीर कप्रती इतिग भुदासींता आभी जाएच चे तए उई समाज का अंतरिक पतनक संकेद छे ओगग उद़वी अग्यान्ता मेचल मुदा उकर काज इसिद करे छे जे उई समाज में म्रितक कप्रती सम्मानको भावना मरिचुकल चल इई एक ता अचेतन रूप में भेल नैतिक पतन चल आप्रक्रितिया इश्वर्या शक्ति, एही तरग क्या शुन्निता के स्विकार नहीं करे च्ये. ए बहुत गहरीन गब कहलो है. तई ई शर्फ कप्रा द्वामे भेल आद्चन दूर करभ नहीं चल, उगटा एक्ता एक्ता बहुत गहीन अप पार्लोकिग दिशा दिस्मूडेच्छे रहा सक एक अस्ली मोड़ बएच्छे बलकुड, गरीबन कन्या अपन पतिक अकाल म्रित्य। अम्रित्य। के बाद लहा सक एक्ता बहुत दुर्दशाक समाचार सूनी का गरीबन कन्या अपन पतिक अकाल म्रित्य। अम्रित्य। के बाद लहा सक एहन दुर्दशाक समचार सुनी का शोका कुल भोजाएच्छतीं एक तपती चीने लेल गेल अदो सर उकर शरीर की नदी में एक तलावारिस वस्तूजका दखेल लेल गेल आँ सहनी ए शोक में बखवान के सुम्रे थ्छती अँ उनकर य आर्टनाद इजे भीत्रक क्रन्दन चे उ एते क्षक्तिषारी होई चे जव खव सीथा पार्लोकि दुन्या के जगजोडी दिचे एते य गव औरो भेसी रोचक भेजाए चे कारन एही क्रन्दन के बाज्जे गटना गटे चे, उकुमो सादारन चमत कार नहीं चे? एक दम नहीं, एक ता गलोके गटना गटे चे. हां, गरीबनक आत्मा एक ता सादारन वेक्तिक शरीर में प्रवेश कजाएत चे. एही अवस्ता के बबगता कहल जाएख चे. अपन चरम्प पहुच़े चे तकन नयाय मांगबाक पुकार भूटिक दून्याक सीमा के तोडी देचचै. बगताक रूप में गरीबनक आबब यी अस्पष्ट करएद चे जे ओ आत्मा शान्त नहीं भेल चै. अखरा नयाय चाही. अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अगरा न्याय चाही अदर पन च्याई में उसब आपन असम्वेदन शिलता दिखिस अकाई अ अद्मा जे फरमान सुन्वेच्ये उसुनी का हमर माता चकरा जाईत चे की फरमान चल? बबगता मने गरीबनक आप्मा कहत चे जे एगो गोटे दोभी हुंकर अप्मान किलग मुदा उ शाप सम्पूर्न दोभी समुदाये के दैच्छतिन रहा, पूर्द समुदाये के चाप इरहे चे, जिजे सब दोभी मिली का हुनकर लहास कमला दारस निकाल सम्मान पूर्वक दाह संसकार नहीं करे चदी तदोबी सबखग बद्थी मेराखल सब कपडा जरी जात. बद्थी माने जते कपडा उबालाए चे? एक जातली, मुदखेर हम उही प्रश्न परावे च्ये, एक विक्तिक भूलक लेल समपून समवुदाय के कियक शाप दिलगेल. गलती उही एक तदोबीख चल, जिलहास के तेल्लक, गामक बाखी दोवी सब ता अपन अपन गर में चलाने. आआ, उनका सब के तब पता से हो नहीं हे तन. एक जाखली, यित सीथा सीथा समहिक दंदभेल, जे आदूनिक द्रिष्तिसा पुँन तह अन्न्याई पुँन लागे चे. ये वेक्तिक अप्रादख बोजा पूरा समाज किया कुत्धावे जो हम सब एक्रा पाग परी प्रेक्ष्यस जोडी तप पारमपरिक अलोक समाज में वेक्ती और समाज के भीच का जे सीमा रेखा होईचे उबहुत शीन होईचे मने, अद्विज़्ूलिзम नहीं होई चे एक दम नहीं आदूनिक युग मे हम सब व्यक्तिवाद में बेसी विष्वास करी चे जतै हमर गलती सर्फ हमर चे मुदब पारम पर एक समाज में दाएत्व समोही कोई चे जखन औही एक ता दोभी लहास के टिल लक तो उ कोनो वक्तिगत शुन्यमे काज नहीं करा हल चल आँ उ समाजक हिस्सा चल आँ उ उही समाजक उपज चल जताई करूना से भेसी काज के महत्व देल जारा हल चल समुदायकर कोनो एक सदस्यड जखन असमवेदन शील या अनेतिक काज करे चे तव उक्रा सम्पृर्ण समाजक नेटिक पतनक परिचायक मानल जाएचे. माने, पूरा समाज उकर लेल जिम्मिदार चे. बलकुल. गरीबनक आत्मा इभली बहाती जाने चल, जे एक व्यक्ती के दन्धित करभासे आस्ली न्याय नहीं भीटत. न्याय तक्श्भ्ध्ध जग्खन पूरा समाज आपन निद्रा से जाग्रत होएद और उही आमान्वियताक वूरुद्ध एक संग्ट्ध्ध्ध्ध्ध्ध। और शाप के जे लक्षचे बद्�the उक्रा पर द्यान दिया? आप बद्�the, जटे जोभी सब कप्रा उभाले च्छती, असाप करे च्छती, उतो हुंकर जीविका के केंद्र भेल. एक दम बद्the, उही समवुदायक अर्थ्तन्त्र, वूँगर जीवन यापनक मूल दूरी चे, जीविका पर सीदह प्रहार का, गरीदनक आत्माज समाज कर समोहिक चेतना के जागरत कर बाग, एक ता अचुक अस्त्र प्रयोग के लक. अचुक अस्त्र? रहा, जा आत्मा सर्फ एक आद्यात्मिक शाप देत, जे आहा सबखग पर लोक भिगडिजाएत, ता शाएद लोक उक्रा अन्सुना कर दित. मुदा जखन आहाक रोस्गारी, आहाक बद्धी जरबाक गप होईच्छे, तकन समाज तुरन्त चेती जाएच्छे. इशाः उही समवदाय के इं महसुस कराबाक लेल चल, जे जा आहा मानविये गर्माक रक्षा नहीं करेच्छी, ता आहा के इबहोट्तिक जीविकाक अदिकार से हु नहीं चै. बापरे, इता गजब क समाजिक अंजिनेरिंग भेल, माने म्रित्त वेक्तिक गर्माक लेल पुरा समाजके हुक्कापानी बंद्करवाग द्जम्की यशाप वास्तों में म्रित्तक के प्रती अनादर के जे गंभीर परिनाम बहुऽ सकेच्छे उक्र बहुत निर्मम्तां से रिखांकित करेच्छे. बिल्कोल ज़ोबी समुदायक शाब सुलाक बाद की के लक की उसब आपन हदपर आडल रहला की उसब तरक केलनी जी हमर की दोष्चे गल्ती तप फलाना धूभीक चे वा उसब देर से या विवेक जागरत भिलासा प्राइष्चित कब आद अपनाँलनी दिखु, जीविकाक संकत एहन विषे चे जे कोनो भी समुदायक भीद्रक जडदा के तोडी देचचे. जोकन, समपुन समुदायक भथ्थी जरबाक संकत सोजा आबिगिल, तकन विक्तिवादक लेल कोनो स्तान नहीं बचल. उते य तर्क काम नहीं करए चे, अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ� इद्रिश्छ आपने आपने कत्तेक शक्ती शाली चे, जि लहाश की चु समे पहले एक ता अद्चन चल, उआप पुरा समाजक लेल सबसे महतोपोण वस्तू बन गेल चे. इब रहात पैक बडलाव चल हुनका सबक सोच में. इसर्व भ्याज्क करबाक लिल प्रेरित किलक, सामूहिक प्रेयास्स्स लहास निकाल जाएचे, अवदिवत पुर्न सम्मानक संग दास्स्कार कल जाएचे. अंतता गरीबन के उसमान भेटे चन्नी जक्रो रक्दार चला हा, अजकर लेल हुंकर आत्मा चट पता रहल चल. अवि समाजक एकता अगल्ती सुदार्वा कबावना कव अद्गुत प्रतीक चल. अव्सव शर्ट इक ता लहास ने खोजी रहल चला. अव्सव अपन हेरायल मनवियता खोजी रहल चला. अरे वा! कतिक नीगगव कहलो है! जखन कोनो समवदाय अपन्दाएत्व स्विकार के लेच्छे, तकन अप्राद बोदख कबार कम होईच्छे. प्रैश्चित्तक एप प्रक्रिया स्र्व गरीबन कर आत्मा के शान्त करवाक लेल नीच्छल, बलकी स्वयम उही समाज के उही नेटिक पतन से मुक्त करवाक लिजल. अगनी संसकारक जे आगी चे उसर्फ गरीबन कर शरीरेक के नहीं जरावे चे, बलकी उही समुदायक ककलंक आओा समवेदन शीलता के सोब फस्म कदेचे. तो आही सबख अद्त की भेल, इप रह्शिट तक परिनाम इत ट्टे चमतकारिक हो इच्छे, जो पूरा कत्ठाक दिशा बड़जाएच्छे. दधा संस्कार अग बाद शाप निष्प्रभावी बहडाएचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच� इस भीरोदा या बद्टिक अग कप्डाग रक्षक देव्टा बनी जाथ थी. इस रूपान्तरन बहुत महत्रपून चे. इस ता एक ता बहुत पाएक पेराडोख्स, माने वीरोदा बहास च्या, जे विक्ती उई समवदान दोरा अप्मानित भेल चल, जखर लहास के दखेली देल गेल जल, जे आत्मा शाप देरहल चल, उम निर्थ्थ्थ परान्त उकर रक्षक गेग बनी गेल, इप रूपान्तरन कोना समबभभ हैल. इक उनो विरोदा भासन चे, बलकी इक शमा रूपान्तरन असन्तूलन पूनरस्तापित कर बाग सबसे सुन्दर मनोवे गयनिक अ अद्ध्यात्मे कुदारन चे. इबुजनाई आवश्षक चे जे गरीबनक आत्माक मूल क्रोद न्याय नहीं भेट्बाग कारन चेल अनादरक कारन चेल. माने उ बदलाने ले भी चाहच्छला. एक दम नहीं आत्मा प्रतिषोदी नहीं चेल, उ बस अपन अदिकार मागी रहाल चल. जखन समवदाय आपन भूल मानी कै सामूहिक प्राएष्चित के लक, तकन शत्रूता समाप्त भेगेल? आप, न्याय भेडगेल तक्रोद शान्त भोगेल. भिल्कुल, समाज उहे आत्मा के सम्मान देलक, तब बदले मे उ आत्मा समाच के आपन सन्रक्षन देलक. न्याय बेट्लाक बाद उ पीदित व्यक्ती प्रतिशोदी नहीं गेल, उ पर अपकारी बनी गेल. इ लोग कता इ अस्पष्ट करे चे, जगन न्याय पून प्राएष्चित होएचे, तकन मात्र गल्तिक सुदार नहोएचे, बलकी समबन्धक नवीनी करन होएचे. नवीनिकरन, मने फेरस एक ता निक सम्वन्धक सुर्वात आप, एक ता अन्याए पुरन म्रित्युक शिकार भेल वक्ती जक्रा गामक लोक तिरस्क्रत केने चल, सामूहिक सम्मान भेट्लाक बाद अगर दन्द उनका अपन प्रान्द कईल्गेल कोनो भी काज अपन परिनाम लोक अबई चे. इक दम चाहे उ गरीबन दवारा देविक पीडी चुभे हुए, जकर दन्द हुनका अपन प्रान्द कईल्गेल प्रान्द के चुकावे प्राण्द. जो आपुन सब श्रोथ समागरीक एही समपून गाता के समेटी तई इस पष्ट होई च्याए जे अन्जान में काईल गेल कोनो भी काज आपन परिनाम लोक अबएच ज्याए एक दम चाहे ओग गरीबन दवारा देवीक पीडी चूभे हुए जकर दन्द हुनका अपन प्रान्द कचुकावे पडल या फिर दूभी दूरा लहास के ठेलव होए जकर परिनाम समपुन समवुदाय पर बद्थी जरबाक शाप के रूप में खषल. तोनु स्तिती में, अनजाने में भेल भूल कबयानक परिनाम सोजा आईल. आप ख़न प्रक्रती आब्रम्हांड आपन संटुलन्ता के चे भिल्कुल, मुदा संग है, इग कता हमरा सब खे, इशे हो भुजावे चे, जे प्राएश्चित, सम्मान, अस्समहेक प्रेयासस्सा, कोनो वियोग या अन्याई पून गतना के श्रद्द्धा अपरोपकार में बदलल जासके चे गरीबन भाबाक लोक देव्टा बनब एही श्रद्द्धा मैं रूपान्तरन का प्रतीक चे जते दुख अक्रोद का अंत एक ता रक्षक का जन्म के संग होई चे इगात्ठा मात्र एकता प्राचीन लोग कता नहीं चै, बलकी ये मानवी आच्रन के एकता शाष्वत मारगदर्षिका चै. इज़ हमरा सबके बताइत चै, जे भोल भेनाई मानव सबहाव चै, उक्रा रोक नहीं सकैची. मुदा, उही गल्तिक प्रती आहाक समाजक प्रतिक्रिया की चे, आहा, उक्रा सुद्दर्बाक लेल की कदम उत्हे बेची, उहाहाक भविश्ट्त ताई करेचे. प्राएश्चित में जे शक्ती चे, उह समाजके सब से गहीर गाव के से उ बहरी सकेचे. अप्रादबहल सजादे दियो भिलकुल अप्रादिके जेल पटादियो या जरीमाना लगा दियो मामला कहतम हम सब समाजे क्रूए कहला वहा आईही चर्चाक अन्त में इगा ता हम्रा सब के सोजा एक ता बहुत विचारो अप्रादबहल सजाजा दे दियो रिए अप्रादी के जेल पथा दियो या जरीमाना लगा दियो मामला कहतम हम सब समाजे क्रूपे उही में अपन कोनो दाइत्व नहीं देखाई ची मुदा जैं हमर समाज से हो इही कताजका सामूहिक प्राएष्चित अपन कोनो दाएत्व नहीं देखेची. मुदा जैं हमर समाज से हो, एही कतादजका समूहिक प्राइष्च्ट, अक्षमा का माद्धिम से सुदारक बात अपनाभई, तकि हमर समाज में अप्राद, अगरनाक इस्थान पर एक्ता नव सदबाव कजन्म नहीं बहसाके चे ये एक्ता बहुत गहीर प्रष्न चे, जक्रापर वास्तम ए सोच भाखवष्श्च्ता चे दन्द मात्र एक्ता एंट्र जकां काज करे चे मुदाकी सामहिक प्रायस्चित रहमर समाजके भीत्र साद्कखो एक तनव रक्षक, या सहिश्वु समाज नहीं बना सके चे. एक रापर गमभीरता सब विचार जाए. आए ही विचारो तेजक प्रष्नक संग, विदेप पत्रिका सलेल गल एही कता कहमर इग, गेर पर्ताल यते पुर्न होईते चे.