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गांगोदेवी_के_प्रेम_का_चमत्कारी_जाल.m4a
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- 0:00–0:06आज्ग के इस छोटे साराव्ष में, हम गजेंद्र ताकृर की खुबसुरत लोग कता गांगो देविग भगत पर बागत करेंगे.
- 0:07–0:11ये कहानी मित्फिला के मच्वारा समुदाय की महिला गांगो देविख
- 0:11–0:13और उनके पते के अटूट प्रेम को दरषाती है,
- 0:13–0:16जिसने एक चमतकारेक परमपरा को जन्म दिया.
- 0:16–0:19तो पहला पहन्त, सावन के महीने में,
- 0:19–0:21गांगो देवी के पतीने अपनी पतनी किलिए,
- 0:21–0:24चूडी लहेटी यानी कुछ चूडिया कहरीदने की सोची.
- 0:24–0:26वो मचली पकरने गया,
- 0:26–0:31अप आपी सुच्ये जब दिनबर की महनत पानी में चली जाए,
- 0:31–0:37तो इनसान क्या राँर मान लेता है, या हाटाशा में कोई आखरी कोशिष करता है.
- 0:37–0:40तुस्रा यही से एक चमत कार होता है.
- 0:40–0:48यही से एक चमतकार होता है, उस निराश पती ने गेहरे प्रेम के साथ बस आख्री बार अपनी गांगो देविक कनाम लिया और जाल पानी में फेग दिया.
- 0:48–0:54और आप यकी नहीं करेंगे जाल अचानक इतनी सारी मच्लियों से बर गया क्यो से खिचना मुष्किल हो गया.
- 0:54–0:57अगले दिन भी सर्फ उसी का जाल बहरा.
- 0:57–0:59ये किसी जादूई मंत्रे जैसा लकता है ना?
- 0:59–1:01लेकिन असल में ये कोई मंत्र नहीं,
- 1:01–1:04बलकी एक सादारन पती के सच्चे प्रेम की पुकार थी.
- 1:04–1:07अनतता ये अद्बुद गतना देरे-ढेरे
- 1:07–1:34तो जोग बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़
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आज्ग के इस छोटे साराव्ष में, हम गजेंद्र ताकृर की खुबसुरत लोग कता गांगो देविग भगत पर बागत करेंगे. ये कहानी मित्फिला के मच्वारा समुदाय की महिला गांगो देविख और उनके पते के अटूट प्रेम को दरषाती है, जिसने एक चमतकारेक परमपरा को जन्म दिया. तो पहला पहन्त, सावन के महीने में, गांगो देवी के पतीने अपनी पतनी किलिए, चूडी लहेटी यानी कुछ चूडिया कहरीदने की सोची. वो मचली पकरने गया, अप आपी सुच्ये जब दिनबर की महनत पानी में चली जाए, तो इनसान क्या राँर मान लेता है, या हाटाशा में कोई आखरी कोशिष करता है. तुस्रा यही से एक चमत कार होता है. यही से एक चमतकार होता है, उस निराश पती ने गेहरे प्रेम के साथ बस आख्री बार अपनी गांगो देविक कनाम लिया और जाल पानी में फेग दिया. और आप यकी नहीं करेंगे जाल अचानक इतनी सारी मच्लियों से बर गया क्यो से खिचना मुष्किल हो गया. अगले दिन भी सर्फ उसी का जाल बहरा. ये किसी जादूई मंत्रे जैसा लकता है ना? लेकिन असल में ये कोई मंत्र नहीं, बलकी एक सादारन पती के सच्चे प्रेम की पुकार थी. अनतता ये अद्बुद गतना देरे-ढेरे तो जोग बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़ा बाद़