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गोहि_सभक_बीच_जलसमाधि (2).mp4

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:05नमश्कार, आई हम्रा सब गोही सवक भीच जल समादिक गहीर परताल करव.
  2. 0:05–0:09इ मैथिली साहित्यक एक ता एहन दम्दार कता ची,
  3. 0:09–0:13जत जादुई यतार्थवाद लोक कताक भीतर,
  4. 0:13–0:16मस्दूरक अदिकार आहुनक अस्तित्तो मितावे ले,
  5. 0:16–0:19रचल प्रपंच कब बहुत सुन्नर रूपक गडल गेल अची
  6. 0:19–0:23बिना कुनो देरी के सीदे कताक उही दून्या में प्रवेश करी ची
  7. 0:23–0:29कताक शर्वात होई तची गामक आजीक एक चा बहुत अनमोल सीख सा
  8. 0:29–0:39उ कहे च्द्हीन ज़कोनो कागज पानी सब ज़ल बेटो, तपहिने उकर गंद सूंगाउ, माटिक गंद होई तव विश्वास करो, पैसाक गंद होई तद समरव.
  9. 0:40–0:44सुछुत तः इक ता पाती हमरा सब के कते किच कही जाई तची.
  10. 0:44–0:52इस पश्ट रूप सव, सरकारी कागजात पर अविश्वास आजमीन सजुडल भूटिक सत्ते के आस्ली मानबाक बात कहे ताछी.
  11. 0:52–0:55तए ते एक तबहुत पाएक प्रष्नूते तछी.
  12. 0:55–0:56की होई तछे?
  13. 0:56–1:03जखन कोनो सरकार म्रित लोकक नाम आपन कागजन से मितादाई थाई थाई थाई अक्रामोन राखे लेल बस भूथ बची जाई थाई थाई?
  14. 1:03–1:08इई उतेजक प्रष्ना हम्रा सबक पूरा चर्चाख मुख्या आदारईच्छ,
  15. 1:08–1:15जों सर्कारी तन्त्र कम्जोर लोकके पूरन रूप से भिस्रादाईता ची, तकन हुणकर स्म्रिती कोना बचे बाख चाही.
  16. 1:15–1:22आप चलएची कदाक श्रुवात दिश, गड़नारी केल कोही जीवन्त स्मिरिती दिश.
  17. 1:22–1:30इएक्ता अईहन जगा के बात अच्छ, जे मोखिक परमप्रा के माध्ध्धम सां, अपन इतिहास के बहुत मजबूती सां सुरक्षित रके तची.
  18. 1:30–1:35गडनारे के लक इजादूई अगगहीर वाता वरन बिलकल अलग अच्छे.
  19. 1:35–1:41एता यान कोनो नीरस किताब में नहीं, बलकी माटी, पानी आ लोकक गीद में बसे ताची.
  20. 1:41–1:46यी एक ता ऐहन जीवन्त समाजग ज़ते लोक जान के महसुस कर इच्छती.
  21. 1:46–1:51आहि समाजग सब स्वथ पुर्न बात एक का कहावत में समाही तची,
  22. 1:51–1:54गोही देहे कहाई तची नाम नहीं
  23. 1:54–1:58माने मगर मच जना कोनो लोकक देहे के तची नस्ट कर सके तची
  24. 1:58–2:02मुदा कोनो लोकक असली म्रुत्तियो तक नहीं होई तची
  25. 2:02–2:05जगन उकर नाम पून रूप से भिस्रा दिल जाए तची
  26. 2:05–2:07नाम अची तची अस्तित्व चे
  27. 2:07–2:13और यहे हम्रा सबक के कताक औही रोचक अलोकिक तत्व दिस लोग जाएत छी,
  28. 2:13–2:17जते बूथ सब नाम बचेवाले खेल रहल चातिन.
  29. 2:17–2:21जर अच्छूए, चन्ना गाच्छिक नीजा बूथ सब का कबंडी खेलग.
  30. 2:21–2:23इक उनो सादारन बात नहीं आची?
  31. 2:23–2:28इबूट सब आपन खेल उई भिस्रायल गेल मस्दूर सब के नाम पुकारे लेल समरपित करही चथेन
  32. 2:28–2:31जिनकर नाम सरकारी खाता बाईसा मिता दिल गेल आची
  33. 2:31–2:35जे भूट कोनो भिस्रायल नाम बजाएक सीमा चूले ताची
  34. 2:35–2:39उकर नाम गाज का पात पर हर्यर कोपल जगा का फेर सो उगी जाई ताची
  35. 2:39–2:43म्रितिव का दून्या ये ते एक ता अन्तिम रिकोट की पर काज कराई ताची
  36. 2:43–2:46स्म्रिति बचावाक एक कते क अद्बूत रूपक अची नहीं
  37. 2:46–2:49मुदा इनवबत आयल को ना
  38. 2:49–2:54आब बात करे च्छी उही मुख्ये खतनाक जे आचे पूलक उही नुकायल त्राज दी.
  39. 2:54–3:04मुख्ये पात्र एक ता यूएंजीन्यर नंद के उकर नीरस श्प्रेट्षीट सो खीच का एक ता बयानक यदार्ठ मे लेजावे वाला यह गतना आची.
  40. 3:04–3:07एता एक ता बहुत गहीर अंतर विरोद देखले बहितत छी,
  41. 3:07–3:11कागजी सत्या आ मातिक कससत्या का बीच का अंतर,
  42. 3:11–3:13पाइक करपूरेत अफिस में तगयार भेलो,
  43. 3:13–3:16कागजी सत्या जक्रा में पैसाक गंद हची,
  44. 3:16–3:21जूथ है जी, उकर सीदा तूलना उही माटिक सत्यसा कायल गेल जी,
  45. 3:21–3:26जे मस्दूर वर्ग को पसीना माटी आ आस्ली पहचान में भेटेत जी.
  46. 3:26–3:31कतना किछ आहन भेल जज बिनाशकारी तूफान अब भारी बरक्खा के बादो,
  47. 3:31–3:35निर्मान काज्य कदिकारी काज्रोगबा से मना कैदलनी
  48. 3:35–3:36नतीजा
  49. 3:36–3:38एक ता ब्यंकर दूगखतना में
  50. 3:38–3:40पूल खसी पेडल
  51. 3:40–3:43अक गतेक मज्दूर नीचा अंदार पानी में
  52. 3:43–3:45खस्ख्या पं जान गमादलनी
  53. 3:45–3:46इग त्राज्दिक बाद
  54. 3:46–3:48एक ता बहुत पएग
  55. 3:48–3:51अदो सर देस करपरेट जगत तक साध सुत्रा जुट
  56. 3:51–3:54सरकारी म्रित्युक अंक्रा कहत अची
  57. 3:54–3:57जे महेस तीस लोकक जान गेल है
  58. 3:57–3:59मुदा सते की चल
  59. 3:59–4:02नदी में दूभी का मरल लोकक असल संख्या
  60. 4:02–4:04पुरा पुरी तीन सैचल
  61. 4:04–4:06ये एक तर दरावे वला जुट है चे
  62. 4:06–4:10तो दूभी का मरल लोकक असल संख्या पुरा पुरी तीन सै चल
  63. 4:10–4:14ये एक तर दरावे वला जूथ है जे सादा कागच पर रचल गेल
  64. 4:14–4:17आज सब से बहयानाग बात की चे भुजे ची
  65. 4:17–4:21ये जे लोकक अस्तित तो मितावे ले रचल गेल शद्यन्त्र आचे
  66. 4:21–4:33जाने कध रदे काईपी जाई तचे, जे जान गमावेवला सब में बहुत्रास आईहन महला मस्टूर चलिया जेना की सर्यू, जिनकर आस्ली नाम कहीो रोजगारक सरकारी रजिस्टर में लिखले ने गेल,
  67. 4:33–4:39उआपन म्रित्पतिक नाम पर काज करे चलिया जाईसे उनका काज भीटी सकः, सरकारी नजरी में तो उच्छलिया आईने.
  68. 4:39–4:46मुदा जखन कागज जुट भाजे लागगत छी तकखन वस्तु सथ्टिक रही तची.
  69. 4:46–4:50यह सुचके नंद आपन परताल शुए करे चाती.
  70. 4:50–4:58नोकर शाहिक एप प्रपंचक विरोद में नन्द रहे लोकोग जीवन क्छोस अव वास्तविक प्रमान जमा करो शुए करे चिन
  71. 4:58–5:03जूथा सरकारी काखजात के चूडी नन्द बहुत व्यक्तिगा जिनिस सब जमा करे चिन
  72. 5:03–5:12जक्रा उ च्पाक इसाप कहिच्छिन, बिसे सरक जुता, सर्योग चान्दिक्क्डा, मुन्यक बच्चक्स्लेट, आईक्ता पातल गम्चा.
  73. 5:12–5:18इसव वस्तु जुत्ठा मुठक अख्डाके एक्ता अकाट्या आध्रिदे विदारक मानविय प्रमान में बडल्डीताची.
  74. 5:18–5:22जकर अस्तित्वा मिताल जार होला ची इ वस्तू उकर सक्षी आची
  75. 5:22–5:28आब एह माटिक सत्ते सलाइस भखग कथा अपन चरम सीमा दिस बड़ही तची
  76. 5:28–5:33नन्द न्याई लेल इ लड़ाई कानूनी अदालत में लोग जाए चितिन
  77. 5:33–5:41अदालत कक्ष में गामक औई जैविक असाचच सत्तिय, करपूरेत वकील सबक औई चिकना आचालाक तरक सट्तक रहेता ची.
  78. 5:41–5:47औवकील इप मानविय वस्तु सबके मात्र भावनात्मक वस्तू कही का खारिज कर देच्छतिं.
  79. 5:47–5:50अनकालेल जूता अक्कडा कानूनी साक्षिन नहीं भो सकेता चे,
  80. 5:50–5:54सत्ते आजुटख भीचा की एक ता बहुत पएग युद्दा चे.
  81. 5:54–5:56जखन नंद के इबुजा जाएच्चनी,
  82. 5:56–5:59जे अदालत से हो का अगजी कारवाएक कारन,
  83. 5:59–6:02नये देबा में भिफल भो सकेता ची,
  84. 6:02–6:05तकन उज करे च्थी से बहुत मार्मी का ची
  85. 6:05–6:09उमरल लोकक विरासत बचेबाक लेल, गामक बच्चा सब के
  86. 6:09–6:12सब तीन सुन आम याद करे ले सिखवाई च्थी
  87. 6:12–6:16उआसल खातावाएक एक ता कोपी नदिक किनार में गाडी दे च्थी
  88. 6:16–6:20इस उनिष्चित करे च्टिन जे इनाम सब माँकिक परमपराक माद्ध्यम से जीबित रहें
  89. 6:21–6:23जहासे कोनोभी कमजोर कानूनी कागध से
  90. 6:23–6:26बेशी दिन दरी इनाम आएस्म्रिती बचल रहें
  91. 6:26–6:29ता अंततध इकता हम्रा सब ख्यें
  92. 6:29–6:32इक ता बहुत महत्पूरन सवालक संच्छोर जाई ता ची
  93. 6:32–6:35जखन सरकारी संस्त्ठा सब सून्योजत दंखसें कम जोर
  94. 6:35–6:39आसी मान्द्कित लोगकर अस्तित्व मितावाई काई ता ची
  95. 6:39–6:44तकन इतिहास रुनक गरीमा, सत्य, आस्म्रिती के कोना मोन्ड्राखत
  96. 6:44–6:50इक ता एहन प्रष्न थी, जे हमरा आहांके सब देख पहरेदार बन्वा लेल विवष करीत अची.

Plain text

नमश्कार, आई हम्रा सब गोही सवक भीच जल समादिक गहीर परताल करव. इ मैथिली साहित्यक एक ता एहन दम्दार कता ची, जत जादुई यतार्थवाद लोक कताक भीतर, मस्दूरक अदिकार आहुनक अस्तित्तो मितावे ले, रचल प्रपंच कब बहुत सुन्नर रूपक गडल गेल अची बिना कुनो देरी के सीदे कताक उही दून्या में प्रवेश करी ची कताक शर्वात होई तची गामक आजीक एक चा बहुत अनमोल सीख सा उ कहे च्द्हीन ज़कोनो कागज पानी सब ज़ल बेटो, तपहिने उकर गंद सूंगाउ, माटिक गंद होई तव विश्वास करो, पैसाक गंद होई तद समरव. सुछुत तः इक ता पाती हमरा सब के कते किच कही जाई तची. इस पश्ट रूप सव, सरकारी कागजात पर अविश्वास आजमीन सजुडल भूटिक सत्ते के आस्ली मानबाक बात कहे ताछी. तए ते एक तबहुत पाएक प्रष्नूते तछी. की होई तछे? जखन कोनो सरकार म्रित लोकक नाम आपन कागजन से मितादाई थाई थाई थाई अक्रामोन राखे लेल बस भूथ बची जाई थाई थाई? इई उतेजक प्रष्ना हम्रा सबक पूरा चर्चाख मुख्या आदारईच्छ, जों सर्कारी तन्त्र कम्जोर लोकके पूरन रूप से भिस्रादाईता ची, तकन हुणकर स्म्रिती कोना बचे बाख चाही. आप चलएची कदाक श्रुवात दिश, गड़नारी केल कोही जीवन्त स्मिरिती दिश. इएक्ता अईहन जगा के बात अच्छ, जे मोखिक परमप्रा के माध्ध्धम सां, अपन इतिहास के बहुत मजबूती सां सुरक्षित रके तची. गडनारे के लक इजादूई अगगहीर वाता वरन बिलकल अलग अच्छे. एता यान कोनो नीरस किताब में नहीं, बलकी माटी, पानी आ लोकक गीद में बसे ताची. यी एक ता ऐहन जीवन्त समाजग ज़ते लोक जान के महसुस कर इच्छती. आहि समाजग सब स्वथ पुर्न बात एक का कहावत में समाही तची, गोही देहे कहाई तची नाम नहीं माने मगर मच जना कोनो लोकक देहे के तची नस्ट कर सके तची मुदा कोनो लोकक असली म्रुत्तियो तक नहीं होई तची जगन उकर नाम पून रूप से भिस्रा दिल जाए तची नाम अची तची अस्तित्व चे और यहे हम्रा सबक के कताक औही रोचक अलोकिक तत्व दिस लोग जाएत छी, जते बूथ सब नाम बचेवाले खेल रहल चातिन. जर अच्छूए, चन्ना गाच्छिक नीजा बूथ सब का कबंडी खेलग. इक उनो सादारन बात नहीं आची? इबूट सब आपन खेल उई भिस्रायल गेल मस्दूर सब के नाम पुकारे लेल समरपित करही चथेन जिनकर नाम सरकारी खाता बाईसा मिता दिल गेल आची जे भूट कोनो भिस्रायल नाम बजाएक सीमा चूले ताची उकर नाम गाज का पात पर हर्यर कोपल जगा का फेर सो उगी जाई ताची म्रितिव का दून्या ये ते एक ता अन्तिम रिकोट की पर काज कराई ताची स्म्रिति बचावाक एक कते क अद्बूत रूपक अची नहीं मुदा इनवबत आयल को ना आब बात करे च्छी उही मुख्ये खतनाक जे आचे पूलक उही नुकायल त्राज दी. मुख्ये पात्र एक ता यूएंजीन्यर नंद के उकर नीरस श्प्रेट्षीट सो खीच का एक ता बयानक यदार्ठ मे लेजावे वाला यह गतना आची. एता एक ता बहुत गहीर अंतर विरोद देखले बहितत छी, कागजी सत्या आ मातिक कससत्या का बीच का अंतर, पाइक करपूरेत अफिस में तगयार भेलो, कागजी सत्या जक्रा में पैसाक गंद हची, जूथ है जी, उकर सीदा तूलना उही माटिक सत्यसा कायल गेल जी, जे मस्दूर वर्ग को पसीना माटी आ आस्ली पहचान में भेटेत जी. कतना किछ आहन भेल जज बिनाशकारी तूफान अब भारी बरक्खा के बादो, निर्मान काज्य कदिकारी काज्रोगबा से मना कैदलनी नतीजा एक ता ब्यंकर दूगखतना में पूल खसी पेडल अक गतेक मज्दूर नीचा अंदार पानी में खस्ख्या पं जान गमादलनी इग त्राज्दिक बाद एक ता बहुत पएग अदो सर देस करपरेट जगत तक साध सुत्रा जुट सरकारी म्रित्युक अंक्रा कहत अची जे महेस तीस लोकक जान गेल है मुदा सते की चल नदी में दूभी का मरल लोकक असल संख्या पुरा पुरी तीन सैचल ये एक तर दरावे वला जुट है चे तो दूभी का मरल लोकक असल संख्या पुरा पुरी तीन सै चल ये एक तर दरावे वला जूथ है जे सादा कागच पर रचल गेल आज सब से बहयानाग बात की चे भुजे ची ये जे लोकक अस्तित तो मितावे ले रचल गेल शद्यन्त्र आचे जाने कध रदे काईपी जाई तचे, जे जान गमावेवला सब में बहुत्रास आईहन महला मस्टूर चलिया जेना की सर्यू, जिनकर आस्ली नाम कहीो रोजगारक सरकारी रजिस्टर में लिखले ने गेल, उआपन म्रित्पतिक नाम पर काज करे चलिया जाईसे उनका काज भीटी सकः, सरकारी नजरी में तो उच्छलिया आईने. मुदा जखन कागज जुट भाजे लागगत छी तकखन वस्तु सथ्टिक रही तची. यह सुचके नंद आपन परताल शुए करे चाती. नोकर शाहिक एप प्रपंचक विरोद में नन्द रहे लोकोग जीवन क्छोस अव वास्तविक प्रमान जमा करो शुए करे चिन जूथा सरकारी काखजात के चूडी नन्द बहुत व्यक्तिगा जिनिस सब जमा करे चिन जक्रा उ च्पाक इसाप कहिच्छिन, बिसे सरक जुता, सर्योग चान्दिक्क्डा, मुन्यक बच्चक्स्लेट, आईक्ता पातल गम्चा. इसव वस्तु जुत्ठा मुठक अख्डाके एक्ता अकाट्या आध्रिदे विदारक मानविय प्रमान में बडल्डीताची. जकर अस्तित्वा मिताल जार होला ची इ वस्तू उकर सक्षी आची आब एह माटिक सत्ते सलाइस भखग कथा अपन चरम सीमा दिस बड़ही तची नन्द न्याई लेल इ लड़ाई कानूनी अदालत में लोग जाए चितिन अदालत कक्ष में गामक औई जैविक असाचच सत्तिय, करपूरेत वकील सबक औई चिकना आचालाक तरक सट्तक रहेता ची. औवकील इप मानविय वस्तु सबके मात्र भावनात्मक वस्तू कही का खारिज कर देच्छतिं. अनकालेल जूता अक्कडा कानूनी साक्षिन नहीं भो सकेता चे, सत्ते आजुटख भीचा की एक ता बहुत पएग युद्दा चे. जखन नंद के इबुजा जाएच्चनी, जे अदालत से हो का अगजी कारवाएक कारन, नये देबा में भिफल भो सकेता ची, तकन उज करे च्थी से बहुत मार्मी का ची उमरल लोकक विरासत बचेबाक लेल, गामक बच्चा सब के सब तीन सुन आम याद करे ले सिखवाई च्थी उआसल खातावाएक एक ता कोपी नदिक किनार में गाडी दे च्थी इस उनिष्चित करे च्टिन जे इनाम सब माँकिक परमपराक माद्ध्यम से जीबित रहें जहासे कोनोभी कमजोर कानूनी कागध से बेशी दिन दरी इनाम आएस्म्रिती बचल रहें ता अंततध इकता हम्रा सब ख्यें इक ता बहुत महत्पूरन सवालक संच्छोर जाई ता ची जखन सरकारी संस्त्ठा सब सून्योजत दंखसें कम जोर आसी मान्द्कित लोगकर अस्तित्व मितावाई काई ता ची तकन इतिहास रुनक गरीमा, सत्य, आस्म्रिती के कोना मोन्ड्राखत इक ता एहन प्रष्न थी, जे हमरा आहांके सब देख पहरेदार बन्वा लेल विवष करीत अची.

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