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बहुरा_गोढ़िन_नटुआदयाल.mp4
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- 0:00–0:05नमसकार, आज हम आज आईसी अदबूद और रहस्स्समैई गाता की परताल करने जारे है,
- 0:05–0:08जो सीदे मैथिली लोग साहित्य के खजाने से निकल कराई है.
- 0:08–0:11बहुरा गोडिन और नतुवा दयाल की ये कहानी,
- 0:11–0:14कोई आम कहानी बilkul नहीं है.
- 0:14–0:19इस विश्लेशन में हम देखेंगे कि कैसे रहस्यमएई नद्या, तान्त्रिक विद्या,
- 0:19–0:24गेह्रा प्यार और विनाशकारी बद्ला ये सब आपस में आजसे गुन्ते हुए है,
- 0:24–0:26कि आप सच मुछ हेरान रहे जाएंगे
- 0:26–0:28तो चल ये बिना किसी देरी के
- 0:28–0:30इस जादूई दून्या में गोता लगाते हैं
- 0:30–0:32ये जो कमला और बलान नद्दियों के किनारे की
- 0:32–0:34खॉबसुरत दून्या एना
- 0:34–0:36ये सर्फिक बैग्रूं नहीं आई आप यही
- 0:36–0:39बबग्रिति की इतनी शान्त अर खुबसुरत जगागा
- 0:39–0:42और यही पर निद्यकला, खौफनाक, काला जादू,
- 0:42–0:46निस्चल प्रेम और अंत में एक बोगड बडाडान
- 0:46–0:48ये सब कुछ गटित होताए
- 0:48–0:51मतलप, कुद्रत की इसी सुंदर्ता के भीज
- 0:51–0:54अद्रत में एक बोछद बडा बलीदान ये सब कुछ गटित होता है,
- 0:54–0:58मतलप, कुद्रत की इसी सुंदर्ता के बीज अईन्सान की सबसे
- 0:58–1:02उलजीवी बावनाई जनम लेती हैं. अब इस कहानी की सबसे
- 1:02–1:06दिलचस्प कडी से मिलते है, बहुरा गोडफिन, इनका चरित्र
- 1:06–1:36बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब�
- 1:36–1:40कमले का आसन, उही मेबास, हे कमला मया.
- 1:40–1:42ये सिव कुछ शब्द नहीं है.
- 1:42–1:44ये बताते है कि भूरा का रोम रोम,
- 1:44–1:46देवी कमला को कैसे समर पिथ था.
- 1:46–1:48और मजे की बात ये है,
- 1:48–1:50कि यही चरम बखती ही उसकी असीमित
- 1:50–1:56यही च्रम भक्ती ही उसकी असीमित और रहेसे मैं तान्तरेक शक्ती का मुखे स्रूत भी थी.
- 1:57–2:00एक असी शक्ती जो शान्त हो तो दिव्या लकती है,
- 2:00–2:04लेकिन भडग जाए तो किसी भी पल एक भ्यानक विनाश लासक्ती है.
- 2:05–2:06तो कहानी में ट्विस्ट तब आता है,
- 2:06–2:13जब मित्फला राज्ये के बहरोड़ से एक राज्कुमार दूलरा दैयाल बूरा के पास नित्य कला सिक्ने पहुच्टे हैं.
- 2:13–2:16अब दान्स सिक्ते सिक्ते उनका नाम ही नत्वा दैयाल पट जाता है.
- 2:17–2:19लेकिन बात सिव दान्स तक सीमित नहीं रहती.
- 2:19–2:24कला सीक்ते सीकते नत्वा दयाल को बहुरा की बेटी से गेरा प्यार हूँजाता है.
- 2:24–2:29और यही से समज लीजे इस पूरी महागाता का भीज भोया जाता है.
- 2:29–2:31कुकी यह सर्फ दो लोगों का प्यार नहीं ता.
- 2:31–2:35बलकी दो बिल्कुल अलग अलक दुन्याग का बहुत बड़ाट्तक्राव हूने वाला था.
- 2:35–2:39और फिर चीजे कितनी देजी से बिगरती हैं वो देखिये.
- 2:39–2:44राजकुमार नतुवा दयाल पूरे कुन्फिडन्स के साथ शादी का प्रस्ताव रकते हैं.
- 2:44–2:47लेकिन बहुरा वो अपने बहयंकर अहंकार के चलते
- 2:47–2:50एस प्रस्ताव को पूरी तरसे तूक्रा देती है.
- 2:50–2:53अब राजकुमार भी राज शाही थ्हसक्वाले थेरे
- 2:53–2:55वो बिना परवा क्ये बारात लेकर आद्दमकते है.
- 2:55–2:59नतीजा बहुरा का गुस्सा ज्वाला मुखिकी की तरा फ़प़पता है
- 2:59–3:03वो आपने भ्यआंकर काले जादू से पूरी कि पूरी बारात को ही बन्दी बना लेती है
- 3:03–3:05और जैसे यतना ही काफी नहीं ता
- 3:05–3:09इसी उठल पुठल के भीज जैसिंग नाम का एक व्यापारी
- 3:09–3:11जो खुद भहुरा की भेटी कुछ आता है,
- 3:11–3:14वो भी अंदेरे में अपनी साज़िशे बून्ना शुरूकर देता है.
- 3:14–3:17लेकिन जैसा की अकसर होता है,
- 3:17–3:20जब दो बड़े लोग तक्राते हैं,
- 3:20–3:22तो नुक्सान हमेशा किसी बेकसुर का होता है.
- 3:22–3:29बहुरा के इस जादूई प्रकोप का सीडा असर मंत्री मले जैसे एकदम निर्दोश अन्सान पर पडा.
- 3:29–3:34इस भ्यांकर हमले की वगेसे मंत्री मले की एक आख की रोषनी हमेशा के लिए चली गगी.
- 3:34–3:45मतलब यह आमे साव दिखाता है के जब अब अपना वोगादा तो बहारी कीमद अखसर उन लोगो को चुकानी परती है जिनकी कोई गलती ही नहीं होती.
- 3:45–3:49आहे रिबा सुन्ने में शाएद यह बहुट शोटे शब्द लगें.
- 3:49–3:53अच्छल में ये एक बेहत दर्दनाक चीख है,
- 3:53–3:56जो इस पूरी गाता में बार-बार गूँच्टी सूनाई दिती है.
- 3:56–4:00ये चीख उस अत्ठाह दुक, उस भ्यानक पीडा का प्रतीख है,
- 4:00–4:03जो इस बिना बात के तक्राव ने पैडा की ती.
- 4:03–4:10ये पुकार बार-बार ये एह आज्सास दिलाती है कि जादू की इन लडायों और खोखले आहंकार की जंग में,
- 4:10–4:14असल बली इनसानी सुकुन और भावनाउ की ही दी जारही ती.
- 4:14–4:18अप सवाल ये था की इस विनाश को रोका कै से जाए?
- 4:18–4:22नटूएडयाल की ये जो रहस्से मैं याट्रा है, वही इसका जवाब है.
- 4:22–4:25सब से पहले वो पने गुरू मंगल के पास जाते हैं.
- 4:25–4:27और गुरू मंगल कोई आम अँईन्सान नहीं ते.
- 4:27–4:31सरा सुच्छिए, उनकी सिद्दिया इतनी गजब की ती,
- 4:31–4:34कि वो अपनी गीली दोती हवामे ही तांकर सुखा सकते थे.
- 4:34–4:38ख़र, गुरू के कहने पर नटूवा दैयाल सीदे कामाख्या जाते हैं.
- 4:38–4:43वहां चन्दी का मन्दर में योगीनियो से चैतरह के दिविन रिट्ते सीखते हैं,
- 4:43–4:45जिसे शट निरित्य कहागा आजा हैं.
- 4:45–4:51और आखिर में वो अनहद जैसे सबसे खब्से खबनाग तन्त्रिक नित्टि में महारत लेते हैं
- 4:51–4:54ताकी भूरा के काले जादू की काट मिल सके.
- 4:54–4:59सच्छ में येक सच्छे युध्धा की तबस्या का अल्टिमेट सबर है.
- 4:59–5:03लेकें ज़रा रूकिये ये सब इतना असान नहीं ता
- 5:03–5:05सरईया गाउका जो ये ब्यानक मनजर है
- 5:05–5:09वो इनहीं तान्तरिक परीक्षाँ का जीता जाएक्ता सबूत है
- 5:09–5:11ये कोई नोमल सी जगा नहीं ती
- 5:11–5:13यहां सच में नरभली दी जाती ती
- 5:13–5:15और खुंखार देट्ति यहां महां गूमा करते थे.
- 5:15–5:20मतलब ये पूरा का पूरा कहोफ और मोध का एक सम्राजज ता.
- 5:20–5:24लेकि नटूवा दैयाल ने बिना किसी दर के इन राक्षसो का समना किया.
- 5:24–5:27ता कि वो अपने प्यार और अपने लोगों की जान बचाचाचे.
- 5:27–5:31उनका ये अटूट साहस शच मे रोंक्ते कडे कर देने वाला है
- 5:31–5:35और अब आता है इस पूरी कहानी का सब से बड़ा लिट्मस टेस्ट
- 5:35–5:40एक तरब तो बहुरा गुस्स्से में अंदी होकर पूरी की पूरी कमला नदी का पानी ही सुखा देती है
- 5:40–5:46और इल्जाम किस पर लगाते है, नट्वा देल पर कि उसने अपने जादू से पानी पाताल में भीज दिया,
- 5:46–5:49एस वज़े से देल को बन्दी तक बना लिया जाता है.
- 5:49–5:52लिकिन तुस्री तरव देख हि, नट्वा देल राड़ नी मानते,
- 5:52–5:57अगर तीक इसी पुईंट पर आखर ये कहानी एक बहुत फुँबसुरत सा मोड लेती है
- 5:57–6:02सबसे खाजबात ये है के इतनी बडी जादूई जीद हासल करने के बाद भी
- 6:02–6:05और खुद को पुरी टर निर्दोष सावित करने के बावजुद
- 6:05–6:11तीक इसी पुझंट पर आखर, ये कहानी एक बहुत ही खुबसुरत सा मोड लेती है.
- 6:11–6:16सबसे खाजबात ये है, के इतनी बडी जादूई जीद ठासिल करने के बाद भी,
- 6:16–6:19और खुद को पुरी तर निर्दोष सावित करने के बावजुद,
- 6:19–6:23नटूँआ दयाल के अंदर रद्ती बर भी गमन्ड नहीं आता.
- 6:23–6:28इसके उलर्ट वो भूरा के समने हाज जोडगर खडे हूँजाते और शमा मागते है.
- 6:28–6:33सरज शूच्छिए, जिस अनसान के पास दून्या की सबसे बडी तान्तरिक शक्ती हो,
- 6:33–6:35तो उईतनी विनम्रता से मापी मागरा है.
- 6:35–6:38दैयाल की ज़़ अधबुत खषमा शीलताने
- 6:38–6:40बहुरा के उस पत्धर जैसे कठोर
- 6:40–6:42और गुस्स्छल दिल को पूरी तरा से
- 6:42–6:43पिगला कर रग दिया.
- 6:43–6:46आखिर कार बहुरा मान जाती है.
- 6:46–6:47और फेर शुरू हुती है
- 6:47–6:49अदर बवावरा को मावग़ा करने का प्रतीक है
- 6:49–6:51यानी अपने गुस से परजीत
- 6:51–6:53और तीस्रा पत्ता बववरा की बेटी से शादी का प्रतीक है
- 6:53–6:55यानी सच्चे प्यार की जीत
- 6:55–6:57अपने गुस से परजीत
- 6:57–6:59और तीस्रा पत्ता बववरा की बेटी से शादी का प्रतीक है
- 6:59–7:01यानी कुदरत पर जीत
- 7:01–7:04तुस्रा पत्ता बहुरा को माफ करने का प्रतीक है
- 7:04–7:06यानी अपने गुस से पर जीत
- 7:06–7:10और तीस्रा पत्ता बहुरा की बेटी से शादी का प्रतीक है
- 7:10–7:12यानी सच्चे प्यार की जीत
- 7:12–7:16आपसा लग रा दा के मानु अप सारी मुसीबते तल चुकी है
- 7:16–7:19बस वब कुछ एक दम खुशी खुशी भीतने वाला है.
- 7:20–7:23पर एक मिनेट जब सब कुछ इतना परफेट लग रहा हो,
- 7:23–7:27मंगल गीट गाए जारे हो, तो मन में कजीईप सवाल उटा है ना?
- 7:28–7:30क्या वाखग में ये एक हैपी अपनेग है?
- 7:30–7:34क्या कोई आसी अद्रिश्य चिपी हुई काली ताकत है,
- 7:34–7:36जो इस जीद को पूरी तरा से पलड़तने की,
- 7:36–7:38कोई गेरी साजच्च्र रच रच रच रही है?
- 7:38–7:42आई आई देखते है, कि खुष्यों के इस खुष्नुमा माहाल में
- 7:42–7:44आगे क्या तूफान आने वाला है?
- 7:44–7:49शादि की इस पूरी गेमा गेमी के बीज एक अज़ी गतना गडती है,
- 7:49–7:52जो एक बहुत बडा रहेस यवने अंदर समेटे हुए है.
- 7:52–7:55होता यह की नदूवा देयाल को प्यास लकती है.
- 7:55–7:58वो अपने शिष्यष्य जिलमिल को कूए से पानी लाने बेचते है.
- 7:58–8:01वहां एक बहुत ही अजजीब सी चीज होती है,
- 8:01–8:04कूवे की दोरी अपने आप चोटी होने लकती है,
- 8:04–8:06और पानी तक पहुच ही नहीं पाती,
- 8:06–8:09सुनने में शाएद ये एक चोटी सी दिखकत लगे,
- 8:09–8:13लेकिन असल में ये एक भेहद कहोफनाक जाल था,
- 8:13–8:18दोरी चोटी होने की वजेखे कुड नटूवा देयाल पानी नकालने किलिए कुवे के पास जाते हैं
- 8:18–8:20और जैसे ही वो वहां पूचते हैं
- 8:20–8:25वो सीदे उस अद्द्रिष्च्टान्त्रिक जाल में बूरी तरहां पहस जाते हैं
- 8:25–8:29और यही है इस पूरी महागाता का सबसे बड़ा क्लामाक्स
- 8:29–8:32एक तरव वो हसी खुशी वाला स्वाडिका माहाल
- 8:32–8:35और दूसरी तरव अच्चानक कमला नदी का पानी
- 8:35–8:37खून सिएक्दम लाल हो जाना
- 8:37–8:39कूई पर एक भ्यानक तरासदी खडित होती है
- 8:39–8:44ज़हां एक बहुत्ती क्रूर साजिष के तहेद नट्वा दयाल को मार दिया जाता है.
- 8:44–8:48नदी का ये लाल रग उसी बहयानक बलिदान की गवाही देरा था.
- 8:48–8:52जिस प्यार और सुकून को पाने के लिए दयाल ने इतनी लंभी और कठें लडाई लडी थी ना.
- 8:52–8:56तान्त्रिक दुन्या में शायद मुद भी कोई आख्री सच नहीं होती.
- 8:56–8:59नत्वादयाल के गुरु की परमपरा से जुडी,
- 8:59–9:02कामाख्या की एक महान जादुगरनी वहां आती है.
- 9:02–9:05वो अपनी चरम तान्त्रिक शक्तियों का इस्तमाल करती है
- 9:05–9:09अद्र बवादे आल को सच्छ में पुनर जीविद कर देती है.
- 9:09–9:13ये जादू और तन्ट्रमंट्र की ताकत का सब से उच्छा प्रदर्षन ता,
- 9:13–9:17पर इस पुनर जीवन की कीमड बहुत बहुत बहारी थी.
- 9:17–9:20इस चमतकार के बडले में उन सबही दुश्मनो की बली
- 9:20–9:25इस चमतकार के बड़े में उन सबही दुशमनो की बली कमला नदी को च़जानी पडी,
- 9:25–9:29जिनों ये साजिश रची ती, मतलब नियाय तो हुए,
- 9:29–9:32लेकिन एक बहुत ही खोफनाक और खुनी की मच्छुकाकर.
- 9:32–9:37ये पुवरी महागात्ःा हमे सच्छ में गेराई से सोचने पर मजबोर कर देती हैं
- 9:37–9:42तो आईए आजके इस विष्लेशन को इसी एक एहम सवाल के साथ खदम करते हैं
- 9:42–9:46क्या सच्छी ताकत इस में है के हम अपने दुश्मनो को तबहा करने के लिए
- 9:46–9:49बड़े से बड़ा जादू या ताकत हासिल कर लें
- 9:49–9:52या फिर आस्ली ताकत उस विनम्रता में है
- 9:52–9:56जु नट्वा देयाल ने अपनी सबसे बड़ी जीट के वक्त दिखाई थी
- 9:56–9:59जब उनहुने अपने सबसे बड़े जुश्मन को भी माव कर दिया था
- 9:59–10:02बदले की आग रही भारी कीमत मागती है
- 10:02–10:04और ये शान्दार लोग कता
- 10:04–10:06हमें इसी कडवे सचका आईना दिखाती है
- 10:06–10:09हमारे इस विष्लेषन में साथ जुडने के लिए
- 10:09–10:10आपका बहुत-बहुत दन्नेवाद
- 10:10–10:15मुजे पुरा येकीन है कि ये कहानी अभी कापी समय तक अपके ख्यालो में गूँचती रहीगी.
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नमसकार, आज हम आज आईसी अदबूद और रहस्स्समैई गाता की परताल करने जारे है, जो सीदे मैथिली लोग साहित्य के खजाने से निकल कराई है. बहुरा गोडिन और नतुवा दयाल की ये कहानी, कोई आम कहानी बilkul नहीं है. इस विश्लेशन में हम देखेंगे कि कैसे रहस्यमएई नद्या, तान्त्रिक विद्या, गेह्रा प्यार और विनाशकारी बद्ला ये सब आपस में आजसे गुन्ते हुए है, कि आप सच मुछ हेरान रहे जाएंगे तो चल ये बिना किसी देरी के इस जादूई दून्या में गोता लगाते हैं ये जो कमला और बलान नद्दियों के किनारे की खॉबसुरत दून्या एना ये सर्फिक बैग्रूं नहीं आई आप यही बबग्रिति की इतनी शान्त अर खुबसुरत जगागा और यही पर निद्यकला, खौफनाक, काला जादू, निस्चल प्रेम और अंत में एक बोगड बडाडान ये सब कुछ गटित होताए मतलप, कुद्रत की इसी सुंदर्ता के भीज अद्रत में एक बोछद बडा बलीदान ये सब कुछ गटित होता है, मतलप, कुद्रत की इसी सुंदर्ता के बीज अईन्सान की सबसे उलजीवी बावनाई जनम लेती हैं. अब इस कहानी की सबसे दिलचस्प कडी से मिलते है, बहुरा गोडफिन, इनका चरित्र बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब� कमले का आसन, उही मेबास, हे कमला मया. ये सिव कुछ शब्द नहीं है. ये बताते है कि भूरा का रोम रोम, देवी कमला को कैसे समर पिथ था. और मजे की बात ये है, कि यही चरम बखती ही उसकी असीमित यही च्रम भक्ती ही उसकी असीमित और रहेसे मैं तान्तरेक शक्ती का मुखे स्रूत भी थी. एक असी शक्ती जो शान्त हो तो दिव्या लकती है, लेकिन भडग जाए तो किसी भी पल एक भ्यानक विनाश लासक्ती है. तो कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब मित्फला राज्ये के बहरोड़ से एक राज्कुमार दूलरा दैयाल बूरा के पास नित्य कला सिक्ने पहुच्टे हैं. अब दान्स सिक्ते सिक्ते उनका नाम ही नत्वा दैयाल पट जाता है. लेकिन बात सिव दान्स तक सीमित नहीं रहती. कला सीक்ते सीकते नत्वा दयाल को बहुरा की बेटी से गेरा प्यार हूँजाता है. और यही से समज लीजे इस पूरी महागाता का भीज भोया जाता है. कुकी यह सर्फ दो लोगों का प्यार नहीं ता. बलकी दो बिल्कुल अलग अलक दुन्याग का बहुत बड़ाट्तक्राव हूने वाला था. और फिर चीजे कितनी देजी से बिगरती हैं वो देखिये. राजकुमार नतुवा दयाल पूरे कुन्फिडन्स के साथ शादी का प्रस्ताव रकते हैं. लेकिन बहुरा वो अपने बहयंकर अहंकार के चलते एस प्रस्ताव को पूरी तरसे तूक्रा देती है. अब राजकुमार भी राज शाही थ्हसक्वाले थेरे वो बिना परवा क्ये बारात लेकर आद्दमकते है. नतीजा बहुरा का गुस्सा ज्वाला मुखिकी की तरा फ़प़पता है वो आपने भ्यआंकर काले जादू से पूरी कि पूरी बारात को ही बन्दी बना लेती है और जैसे यतना ही काफी नहीं ता इसी उठल पुठल के भीज जैसिंग नाम का एक व्यापारी जो खुद भहुरा की भेटी कुछ आता है, वो भी अंदेरे में अपनी साज़िशे बून्ना शुरूकर देता है. लेकिन जैसा की अकसर होता है, जब दो बड़े लोग तक्राते हैं, तो नुक्सान हमेशा किसी बेकसुर का होता है. बहुरा के इस जादूई प्रकोप का सीडा असर मंत्री मले जैसे एकदम निर्दोश अन्सान पर पडा. इस भ्यांकर हमले की वगेसे मंत्री मले की एक आख की रोषनी हमेशा के लिए चली गगी. मतलब यह आमे साव दिखाता है के जब अब अपना वोगादा तो बहारी कीमद अखसर उन लोगो को चुकानी परती है जिनकी कोई गलती ही नहीं होती. आहे रिबा सुन्ने में शाएद यह बहुट शोटे शब्द लगें. अच्छल में ये एक बेहत दर्दनाक चीख है, जो इस पूरी गाता में बार-बार गूँच्टी सूनाई दिती है. ये चीख उस अत्ठाह दुक, उस भ्यानक पीडा का प्रतीख है, जो इस बिना बात के तक्राव ने पैडा की ती. ये पुकार बार-बार ये एह आज्सास दिलाती है कि जादू की इन लडायों और खोखले आहंकार की जंग में, असल बली इनसानी सुकुन और भावनाउ की ही दी जारही ती. अप सवाल ये था की इस विनाश को रोका कै से जाए? नटूएडयाल की ये जो रहस्से मैं याट्रा है, वही इसका जवाब है. सब से पहले वो पने गुरू मंगल के पास जाते हैं. और गुरू मंगल कोई आम अँईन्सान नहीं ते. सरा सुच्छिए, उनकी सिद्दिया इतनी गजब की ती, कि वो अपनी गीली दोती हवामे ही तांकर सुखा सकते थे. ख़र, गुरू के कहने पर नटूवा दैयाल सीदे कामाख्या जाते हैं. वहां चन्दी का मन्दर में योगीनियो से चैतरह के दिविन रिट्ते सीखते हैं, जिसे शट निरित्य कहागा आजा हैं. और आखिर में वो अनहद जैसे सबसे खब्से खबनाग तन्त्रिक नित्टि में महारत लेते हैं ताकी भूरा के काले जादू की काट मिल सके. सच्छ में येक सच्छे युध्धा की तबस्या का अल्टिमेट सबर है. लेकें ज़रा रूकिये ये सब इतना असान नहीं ता सरईया गाउका जो ये ब्यानक मनजर है वो इनहीं तान्तरिक परीक्षाँ का जीता जाएक्ता सबूत है ये कोई नोमल सी जगा नहीं ती यहां सच में नरभली दी जाती ती और खुंखार देट्ति यहां महां गूमा करते थे. मतलब ये पूरा का पूरा कहोफ और मोध का एक सम्राजज ता. लेकि नटूवा दैयाल ने बिना किसी दर के इन राक्षसो का समना किया. ता कि वो अपने प्यार और अपने लोगों की जान बचाचाचे. उनका ये अटूट साहस शच मे रोंक्ते कडे कर देने वाला है और अब आता है इस पूरी कहानी का सब से बड़ा लिट्मस टेस्ट एक तरब तो बहुरा गुस्स्से में अंदी होकर पूरी की पूरी कमला नदी का पानी ही सुखा देती है और इल्जाम किस पर लगाते है, नट्वा देल पर कि उसने अपने जादू से पानी पाताल में भीज दिया, एस वज़े से देल को बन्दी तक बना लिया जाता है. लिकिन तुस्री तरव देख हि, नट्वा देल राड़ नी मानते, अगर तीक इसी पुईंट पर आखर ये कहानी एक बहुत फुँबसुरत सा मोड लेती है सबसे खाजबात ये है के इतनी बडी जादूई जीद हासल करने के बाद भी और खुद को पुरी टर निर्दोष सावित करने के बावजुद तीक इसी पुझंट पर आखर, ये कहानी एक बहुत ही खुबसुरत सा मोड लेती है. सबसे खाजबात ये है, के इतनी बडी जादूई जीद ठासिल करने के बाद भी, और खुद को पुरी तर निर्दोष सावित करने के बावजुद, नटूँआ दयाल के अंदर रद्ती बर भी गमन्ड नहीं आता. इसके उलर्ट वो भूरा के समने हाज जोडगर खडे हूँजाते और शमा मागते है. सरज शूच्छिए, जिस अनसान के पास दून्या की सबसे बडी तान्तरिक शक्ती हो, तो उईतनी विनम्रता से मापी मागरा है. दैयाल की ज़़ अधबुत खषमा शीलताने बहुरा के उस पत्धर जैसे कठोर और गुस्स्छल दिल को पूरी तरा से पिगला कर रग दिया. आखिर कार बहुरा मान जाती है. और फेर शुरू हुती है अदर बवावरा को मावग़ा करने का प्रतीक है यानी अपने गुस से परजीत और तीस्रा पत्ता बववरा की बेटी से शादी का प्रतीक है यानी सच्चे प्यार की जीत अपने गुस से परजीत और तीस्रा पत्ता बववरा की बेटी से शादी का प्रतीक है यानी कुदरत पर जीत तुस्रा पत्ता बहुरा को माफ करने का प्रतीक है यानी अपने गुस से पर जीत और तीस्रा पत्ता बहुरा की बेटी से शादी का प्रतीक है यानी सच्चे प्यार की जीत आपसा लग रा दा के मानु अप सारी मुसीबते तल चुकी है बस वब कुछ एक दम खुशी खुशी भीतने वाला है. पर एक मिनेट जब सब कुछ इतना परफेट लग रहा हो, मंगल गीट गाए जारे हो, तो मन में कजीईप सवाल उटा है ना? क्या वाखग में ये एक हैपी अपनेग है? क्या कोई आसी अद्रिश्य चिपी हुई काली ताकत है, जो इस जीद को पूरी तरा से पलड़तने की, कोई गेरी साजच्च्र रच रच रच रही है? आई आई देखते है, कि खुष्यों के इस खुष्नुमा माहाल में आगे क्या तूफान आने वाला है? शादि की इस पूरी गेमा गेमी के बीज एक अज़ी गतना गडती है, जो एक बहुत बडा रहेस यवने अंदर समेटे हुए है. होता यह की नदूवा देयाल को प्यास लकती है. वो अपने शिष्यष्य जिलमिल को कूए से पानी लाने बेचते है. वहां एक बहुत ही अजजीब सी चीज होती है, कूवे की दोरी अपने आप चोटी होने लकती है, और पानी तक पहुच ही नहीं पाती, सुनने में शाएद ये एक चोटी सी दिखकत लगे, लेकिन असल में ये एक भेहद कहोफनाक जाल था, दोरी चोटी होने की वजेखे कुड नटूवा देयाल पानी नकालने किलिए कुवे के पास जाते हैं और जैसे ही वो वहां पूचते हैं वो सीदे उस अद्द्रिष्च्टान्त्रिक जाल में बूरी तरहां पहस जाते हैं और यही है इस पूरी महागाता का सबसे बड़ा क्लामाक्स एक तरव वो हसी खुशी वाला स्वाडिका माहाल और दूसरी तरव अच्चानक कमला नदी का पानी खून सिएक्दम लाल हो जाना कूई पर एक भ्यानक तरासदी खडित होती है ज़हां एक बहुत्ती क्रूर साजिष के तहेद नट्वा दयाल को मार दिया जाता है. नदी का ये लाल रग उसी बहयानक बलिदान की गवाही देरा था. जिस प्यार और सुकून को पाने के लिए दयाल ने इतनी लंभी और कठें लडाई लडी थी ना. तान्त्रिक दुन्या में शायद मुद भी कोई आख्री सच नहीं होती. नत्वादयाल के गुरु की परमपरा से जुडी, कामाख्या की एक महान जादुगरनी वहां आती है. वो अपनी चरम तान्त्रिक शक्तियों का इस्तमाल करती है अद्र बवादे आल को सच्छ में पुनर जीविद कर देती है. ये जादू और तन्ट्रमंट्र की ताकत का सब से उच्छा प्रदर्षन ता, पर इस पुनर जीवन की कीमड बहुत बहुत बहारी थी. इस चमतकार के बडले में उन सबही दुश्मनो की बली इस चमतकार के बड़े में उन सबही दुशमनो की बली कमला नदी को च़जानी पडी, जिनों ये साजिश रची ती, मतलब नियाय तो हुए, लेकिन एक बहुत ही खोफनाक और खुनी की मच्छुकाकर. ये पुवरी महागात्ःा हमे सच्छ में गेराई से सोचने पर मजबोर कर देती हैं तो आईए आजके इस विष्लेशन को इसी एक एहम सवाल के साथ खदम करते हैं क्या सच्छी ताकत इस में है के हम अपने दुश्मनो को तबहा करने के लिए बड़े से बड़ा जादू या ताकत हासिल कर लें या फिर आस्ली ताकत उस विनम्रता में है जु नट्वा देयाल ने अपनी सबसे बड़ी जीट के वक्त दिखाई थी जब उनहुने अपने सबसे बड़े जुश्मन को भी माव कर दिया था बदले की आग रही भारी कीमत मागती है और ये शान्दार लोग कता हमें इसी कडवे सचका आईना दिखाती है हमारे इस विष्लेषन में साथ जुडने के लिए आपका बहुत-बहुत दन्नेवाद मुजे पुरा येकीन है कि ये कहानी अभी कापी समय तक अपके ख्यालो में गूँचती रहीगी.