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महुआ_घटवारिनक_स्वाभिमान_आ_परमानक_धार.m4a
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- 0:00–0:07आव, आई हम सब महुवा गत्वारिन लोक कताक एक ता चोट छिन मुदा गहीर सारावष पर गप करे ची.
- 0:07–0:14गजंद्र ताकृषी द्वारा विदेः ईपत्रिका में प्रकाषिद, परमान नदीक तट पर भेल इग कता,
- 0:14–0:18एक तगरीब कन्याक उई अई अदम में सहस्क गब करे च्छाए
- 0:18–0:21जे में रातो रात लेगेल उकर एक तखर निरने
- 0:21–0:24उक्रा सद्यों लेल किव्दंती बना दिल कै.
- 0:24–0:29पहिल गप ये कहानी शुरो होए च्छाय महुवाक सतमाएक उगासे.
- 0:29–0:32तदेख हो महुवा मात्र सोला साल के चलीया
- 0:32–0:36बाप प्यकड अगर में स्वार्ती सत्माएक राज
- 0:36–0:39किछ तकाक लोब में उनिर्दाई सत्माए
- 0:39–0:41महुवा के रातेक अंदार में
- 0:41–0:44एक ता सोदागर के हाते बेची देच्ठतिन
- 0:44–0:45आब आब आपने विचार करू
- 0:45–0:52जखन अपन परिवार, अपन रक्षक, हे भक्षक बनीजाए, तई एक तनिस सहाइ कन्या कताईजाए.
- 0:52–0:57तो सर महत्पुरन बात अची सत्यक ज्यान अव महुवाक विद्रोज.
- 0:57–1:03राति में नाव पर जखन सिपाही महुवाए से पत्वार चीनी उक्रा सवदागर लगजायल कहे च्ये,
- 1:03–1:07तकन उक्रा बुजाए च्ये, जे उक्रत सवदा भाचुकल च्ये.
- 1:07–1:11महुवाक मुन में मोरंग में रहे वाला आपन प्रेमिक स्मरन्च्ये,
- 1:11–1:19आ उही सवदागरक वासना से आपन स्वाभिमान बचे बाकलेल उ बिना कुनु संकाक एक ता एहन निरने लेच्छत्छी,
- 1:19–1:23जे उक्रा शिकार से आपन भाग्यक निंथा बना देच्छे.
- 1:23–1:25अन्तिम्गप महुवाक आमर भलिदान
- 1:25–1:28उही सवदागर के चंगुल से बचे लिल महुवा
- 1:28–1:33उफान मारत कोशी अपरमान नदी कखतरनाक दार में कुजाएच्छत्छति
- 1:33–1:36आम मोरंग दिस तेरबाक प्रयास करेच्छत्छति
- 1:36–1:38सवदागर के एक टेच्छत्का सिपाही
- 1:38–1:40जि महुवा से भितर ये प्रेम करे चल,
- 1:40–1:43वो हो उक्रा बचे बाक लेल नदी में कुजाएच्छे,
- 1:43–1:46मुदद दुन्नू गोटे उही तेजदार में दूभी जाएच्छे दि,
- 1:46–1:50कि म्रित्यो कबाद हूँ आत्म सम्मानक इजीद,
- 1:50–1:53समाजक लेल एक ता शाश्वत प्रष्न न न चूडिगे ले
- 1:53–1:55महुवा गध्वारिन की कता
- 1:55–1:57मात्रे एक ता त्रास्ती न नहें
- 1:57–1:59बलकी इस्त्रिक आत्म निरनें
- 1:59–2:01आसाहस्क अँमर प्रतीक थिक
- 2:01–2:04जो परमानक दार में लोक गीत बनी आयु गुजाईच्छे
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आव, आई हम सब महुवा गत्वारिन लोक कताक एक ता चोट छिन मुदा गहीर सारावष पर गप करे ची. गजंद्र ताकृषी द्वारा विदेः ईपत्रिका में प्रकाषिद, परमान नदीक तट पर भेल इग कता, एक तगरीब कन्याक उई अई अदम में सहस्क गब करे च्छाए जे में रातो रात लेगेल उकर एक तखर निरने उक्रा सद्यों लेल किव्दंती बना दिल कै. पहिल गप ये कहानी शुरो होए च्छाय महुवाक सतमाएक उगासे. तदेख हो महुवा मात्र सोला साल के चलीया बाप प्यकड अगर में स्वार्ती सत्माएक राज किछ तकाक लोब में उनिर्दाई सत्माए महुवा के रातेक अंदार में एक ता सोदागर के हाते बेची देच्ठतिन आब आब आपने विचार करू जखन अपन परिवार, अपन रक्षक, हे भक्षक बनीजाए, तई एक तनिस सहाइ कन्या कताईजाए. तो सर महत्पुरन बात अची सत्यक ज्यान अव महुवाक विद्रोज. राति में नाव पर जखन सिपाही महुवाए से पत्वार चीनी उक्रा सवदागर लगजायल कहे च्ये, तकन उक्रा बुजाए च्ये, जे उक्रत सवदा भाचुकल च्ये. महुवाक मुन में मोरंग में रहे वाला आपन प्रेमिक स्मरन्च्ये, आ उही सवदागरक वासना से आपन स्वाभिमान बचे बाकलेल उ बिना कुनु संकाक एक ता एहन निरने लेच्छत्छी, जे उक्रा शिकार से आपन भाग्यक निंथा बना देच्छे. अन्तिम्गप महुवाक आमर भलिदान उही सवदागर के चंगुल से बचे लिल महुवा उफान मारत कोशी अपरमान नदी कखतरनाक दार में कुजाएच्छत्छति आम मोरंग दिस तेरबाक प्रयास करेच्छत्छति सवदागर के एक टेच्छत्का सिपाही जि महुवा से भितर ये प्रेम करे चल, वो हो उक्रा बचे बाक लेल नदी में कुजाएच्छे, मुदद दुन्नू गोटे उही तेजदार में दूभी जाएच्छे दि, कि म्रित्यो कबाद हूँ आत्म सम्मानक इजीद, समाजक लेल एक ता शाश्वत प्रष्न न न चूडिगे ले महुवा गध्वारिन की कता मात्रे एक ता त्रास्ती न नहें बलकी इस्त्रिक आत्म निरनें आसाहस्क अँमर प्रतीक थिक जो परमानक दार में लोक गीत बनी आयु गुजाईच्छे