MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
Salhesh_k_nyay_a_Dabna_k_tantra.m4a
Timestamped machine output
- 0:00–0:08आएन आजा के एही विमर्ष्छ में, हम सब राजा सालेष के लोक गथापर आदारित आलेक परगप करब.
- 0:08–0:13जताई एक्ता सिपाही अपन न्याए प्रियता से जन राजा बनाई च्यत,
- 0:13–0:18और दबना के तान्त्रिक प्रेम के बल पर शवध्यंत्र से मुक्त होई च्यत.
- 0:18–0:32मुदा, एही कता मे पात्रा सबख्मनो वैग्यानिक प्रेर्ना और उकर परिनाम के भीज्ग के समवन्द आरो सपष्ट कर सकेत चला, लेक्व्ख, जना पहिल अद्याय मे राजा के वेद्ध्याके आत्महत्याके गतना.
- 0:32–0:48इक्दम सही दियान गिलहांके, इवेद्ध्यक के आत्महत्या गठन, कत्ठा के शुरू में, तए एक ता पहिज जंजावात जकान अभाईच्च्छै, मुदा माने अगन के कुछक्र, वा मुख्य कत्ठा पर, एक रर कोनो असर नी पर इच्च्चै?
- 0:48–0:50अग, बिल्कोल असर नी च्या.
- 0:50–0:55तए गटना कथा से एक दम विछन माने अलग खलग भुजाएच आए,
- 0:55–0:59अग, कुनो भी लोक गथा के प्रभाव, वोकर पात्रा के प्रेरना,
- 0:59–1:02अग, गटना करम के जुराप परनरभर करी च्या.
- 1:02–1:15आए आईन जे हम एक रा एक तब हवन के रूप में देखी, तववेद्ध्यका आत्महत्या एक तएहन खिडकी चाए, जे खुजाएत की चे मुदद अकर पचान कोनो द्रिष्ट नाए चाए.
- 1:15–1:18बाज, बड़िया द्रिष्टानत दिलो आहा.
- 1:18–1:23तक्की यी अपुर्न्ता कता के मुल प्रवाह के बादित नहीं कर रहल चाए,
- 1:23–1:30आरू एकरा संगे-संगे सलेस जे कता के प्रारंव सब दबना के अंदेखा कराए ताभी रहल चला,
- 1:30–1:35उ अचानक अद्याय चाँ में उनका सब विवाह कर लित अचाए.
- 1:35–1:47बिना कुनो भावात्मक विकास के एही दोनो गर्टना के बीच कुनो क्रमिक परिवर्तन आलेक में नाई चे, जैहे से इदोनो कता के मुख्ध्य प्रवाज से अलग थलग लग लग लग अई चै.
- 1:47–1:55अम्रा बुजब में यी समागरी सलेश के नाई कत्वा आददबना के प्रेम के लेलक एक ता आदार तयार कराए चे.
- 1:55–2:03मुदद जे ओहन गंभीर विशाए के उप्योग कतानक के आंगन बड़ाईबाने नै भेल तो उक्रा रखबक कियो चित्या.
- 2:03–2:04सत्या कहलो
- 2:04–2:08लेखख प्रायः द्राअथ में बहुत रास्विचार लबई चित
- 2:08–2:11मुगर कोनु गटना जा आगा कटव जुराइत नहीं
- 2:11–2:15तो उ पाटख के लेलक खाली भ्रम पेडा कराएच चैन
- 2:15–2:18तलेखख केन की करबकचा ही एही जगा
- 2:18–2:23तब लेक्खखेन इवैद के म्रित्य। के आगु के सद्यंट्र से जोड़ जरूरी च्याईन.
- 2:24–2:27जकन कोनो रच्ना में कोनो परहगगतना होईत च्याईत,
- 2:27–2:31तब पाथक उक्रा एक ता पूर्व संकेत वादा के रुप में ग्रहान कराई च्याईन.
- 2:31–3:01अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ�
- 3:01–3:03दबना अ सलेश का कुनो गुप्त श़्यंटर चाए.
- 3:03–3:06आईन, आमेता आहा के,
- 3:06–3:09एही विचार पर एकता प्रष्नोट्धावे चाब.
- 3:09–3:10आईन, कहो.
- 3:10–3:12जिक कता की प्रारंव मेही,
- 3:12–3:15तथापा इत्टेक पैग राजनेटिक दबाव बना लेद.
- 3:15–3:20तक्यु क्लनायक किन बहुत जल्दी बहुत अदेक शक्तीशाली नहीं बनादेत.
- 3:20–3:21इत चाए.
- 3:21–3:26मने सलेश खंदरी जन्ता के भीच स्तापिट सहो नहीं भेल चाएत.
- 3:26–3:32अ तापा हूनका पर इत्तेख पैग रद्या वाशशव्यंत्र के आरोप लगा रहल चाएत.
- 3:32–3:37की इप्रारमभिक असन्तुलन सलेश के नायकत्व के नहीं दबादेत,
- 3:37–3:39जे पाथख निराश भेजाए?
- 3:39–3:41बुजिलय है आंके बाद.
- 3:41–3:45मुदा थापा के तुरंट सफल होगा कोनो अवष्षकता नहीं चआए.
- 3:45–3:49वीचार इच्टे खाली एक्टा सन्शे के भीआ रोपल जाए.
- 3:49–3:50खाली सन्शे?
- 3:50–4:03अग, जखुन तापा राजा लगे सन्शे पेडा करिच्छे, तर राजा तुरन् सलेश के दन्दित नहीं करिच्छे, मुदा राजा के मस्तिष्क में एक ता अद्रिष्ष्य दरार अवश्ष्य पेडा बोजे च्छे.
- 4:03–4:07अव उई दरार के आसर बाद में देखाभै.
- 4:07–4:08बलकुल.
- 4:08–4:10ए दागमगाल विष्वास.
- 4:10–4:13आगु चले को एही समें काज करेद,
- 4:13–4:17जोखन सालेश पर नो लाक्रोप्या के चोरी कारोप लगेद.
- 4:17–4:19बिना कोनो पूर्व संदेह के,
- 4:19–4:24राजा आचाना कपन सब से योगे सबाही पर चोरी का आरोप कोना माने लेता.
- 4:24–4:27आप, यी पोईंट बड़िया चे.
- 4:27–4:32जे वेद्धिया के मुद्थिव कारन राजा के मन में पहलने से तनी संदे च्याये.
- 4:32–4:37तो चोरी के आरोप पर राजा के क्रोद स्वाभाविक लागे लागच्छे.
- 4:37–4:40एक्दम एहे तरा पहल अद्यार में,
- 4:40–4:42भेल वेद्या के आत्महत्या के गच्ना,
- 4:42–4:46पन्चम अद्याय द्याय द्हरी कता के लेलक एक ता उत्प्रे रक,
- 4:46–4:48मैंने कातलिस्ट मनी के काज करे चे.
- 5:02–5:32अपना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना �
- 5:32–5:34अपन भीतर कोना विचार कर अच्छेत
- 5:34–5:37एक दिस हुंकार सार्व जनिक कर्तव्यच है
- 5:37–5:39दोसर दिस अ इस्ट्रीच है
- 5:39–5:42जे बारावरक दरी हुंकालेलक प्रतीख्षाके लक
- 5:42–5:45और अपन तन्त्रिक विद्या दाव पर लगादेलक
- 5:45–5:50जहम सलेश के अपन कर्तव्या
- 5:50–5:53अर व्यक्तिगत रिन के भीच संगर्ष करएत नै देखाव,
- 5:53–5:56तो यी विवाहा कहली एक ता प्लोट के अवष्च्ता बुजायत,
- 5:56–5:58कोनो मानविया चुनावने.
- 5:58–6:01मुदा की आत्मचिन्तन सलेष के कमजोर नै देखाथ.
- 6:01–6:03कमजोर कि आग देखाथ.
- 6:03–6:05माने एक तजनराजा,
- 6:20–6:26अई नदवन्दव चरित्र के कमजोर नई, बलकी मानविया अप प्रमानिग बनावेचे.
- 6:27–6:33कोनो भी महान नायक, जे बिना कोनो भीत्री संगर्ष के निरनाय लेक चे, उको यंट्र जकान लगएचे.
- 6:34–6:35मनुश्शे नाय.
- 6:35–6:38इत चै? मनुश्शे ता मनुश्शे हे चै?
- 6:38–6:54जखोल पाटख देखाएद जे सालेश कतेक गमभीरता सव, दाबनाक त्याग करव, और राजा के रुप में आपन निसपक्षता के रक्षा करव भईच सन्तूलन खोजी रहल चात, तकोन हुंकार अन्तिम निरनेक महत्व आरो अदिक बड़ी जाएद.
- 6:54–7:00अच्छा, तजग्यों उवही आत्मच इंटन के बाद दाबना के अपना बईच्छाएत,
- 7:00–7:04तो उन निरने कोनो बावुकता के वशीबूत भोगे नहीं?
- 7:04–7:09बलकी पुरन चेटन अवस्ता औग क्रितग्यता से लिल्गिल गमभीर निरने होएत,
- 7:09–7:39इपने अगाँईदा बागा जादू अगाईदा बागा जादू अगाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बाग
- 7:39–8:01अगर अद्टर बद्या के मद्या सन्तुलन आनेत इक खाथा कमूल सन्देश आरो प्रभाव्शाली बहेसके ची, जो जादू से सब किच भेरहल चे, तमुख्य पात्र का आपनी शमता, बुद्दि, अर संगरष अर्द्टीन बहेजग ची.
- 8:01–8:04पात्रके तनायक सवूमीद होई चाए,
- 8:04–8:08बलकुल, चूहन्द माल के दन्द जे पूरनता,
- 8:08–8:10दाबना के तन्तरीक सकती से भेटाए तकाए,
- 8:10–8:14तसलेश मात्र एक ता मुक दरषक बनी के रही चाए तुछ.
- 8:14–8:16तकर उन्याई राजा कोना बेला,
- 8:16–8:21अदक हली दाबना के जादू के लाब उठाएवावावाला एक ता वेक्ती मात्र बनी गला
- 8:21–8:24तईया एक्रा कोना संतूलित कर सकाई च्यालेख्ख,
- 8:24–8:30जाही से तन्त्र के रहेस, आलोग गता का परमपरागत रोमाज सहो बनल रहे,
- 8:30–8:32अन्नायक कन्याय सहो अस्तापित हुए.
- 8:32–8:36तन्त्र के मात्र सत्य उजागर करवाके माद्यम बनावल जाए,
- 8:36–8:41अंतिम नियाय सहलेश के बुद्दिमत्ता अन्याय सिद्धान्त पर आदारी थो.
- 8:41–8:44माने दावना के तन्त्र कहली कन्फेश्यन कराभे लला.
- 8:44–8:45अआ.
- 8:45–8:49दावना के तन्त्र से चूहंड मोल के इत्ते शरीरीक पीला होवै,
- 8:49–8:52जे उ राजा के दरबार में सत्तिबाकी दीए.
- 8:52–8:55जे उहे नो लाख के हार चोरानाई चाय,
- 8:55–8:58मुदा जकन अक्रा मरवाक वा दंद दिवाक वात आवाई,
- 8:58–9:00तकन सलेश मदस्त हता करत.
- 9:00–9:03शलेजस आएगु अबहातत,
- 9:03–9:06उही तन्त्रिक खुद के शान्त करत,
- 9:06–9:08राजा के समजावत,
- 9:08–9:12जे चूहन्द्माल के प्रतिशोद स्वरूप म्रित्योदन्द नै भिटाख चाही
- 9:12–9:16उ अप्राद के अनुसार उचित कारावास के आगर आगर आगर आगर आद.
- 9:16–9:20आईन, हम्रा हे ते बहुत गंभीर आपती चाही आदात पर.
- 9:20–9:22कहु कि आपती चाही?
- 9:22–9:25चूहन्द्माल राजा के नावलाक के हार चूरे नाई चाई,
- 9:25–9:28सालेज जे का इमान्दार सिपाही के जेल में सडाबक,
- 9:28–9:31अपहासी पर चदाबक शद्यंट्र रच्डाई चाई?
- 9:31–9:33पहगा अप्रादत च्चाई
- 9:33–9:36आप पूरा राज्य में आराजक्ता फलाई नहीं च्चाई
- 9:36–9:40जो सालेश एहन खतरनाग खलनायक के म्रित्दंद के बडला
- 9:40–9:43कोनो हलका सजा या खली कारवास देट च्चाएत
- 9:43–9:47तकी आम जन्ता सालेश के एक ता दूबल राजा नाई मानत
- 9:47–9:50ये आईन बड़ा सवबाविक्षंका चे
- 9:50–9:55एक ता एतियासिक लोक गधा में, जता ए न्याई तुरन्द अखधोर हूई चल,
- 9:55–10:01एहन शमादान सालेष के न्याई प्रियताके स्तापित कर्वाग बढलाप उक्रा सन्दिएद बना देद.
- 10:01–10:14आहा एक तब बहुत महत्पृन बिन्दू उठालो आहा, मुदा न्याए प्रियताक अर्थ, हमेशा प्रतीषोद नाय होई चे, अटे हम्रा सब कें दन्दात्मक, न्याय, असुदारात्मक, वस संतुलित न्याय के भीच क अंतर के देखाक चाए.
- 10:14–10:19माने, आहा कहा चाही चाही के, शमा करवत भल्वान के काम चाही?
- 10:19–10:24नाई, खषमा नाई, ज़स सलेश चूहंदमल के प्राईन्दड़ देच चाही,
- 10:24–10:27तो उ मात्र दर्बनाक क्रोद के ही समर्थन कराहल चाही,
- 10:27–10:30उहे महुनकर आपन विवे कताई चाही,
- 10:30–10:32उनका दूबल नाय दिखा बक्चाही
- 10:32–10:35उचूहंदमल के खषमा नाय कराहल चाएत
- 10:35–10:36तकी कराहल चाएत
- 10:36–10:39उखाली उकर म्रित्य। दन्ड के ताल राहल चाएत
- 10:39–10:40उदाहरन के लेलग
- 10:40–10:42सलेश राजा के कही सकए चाएत
- 10:42–10:45के चूहंदमल से खाली हार वापस नाय लेल जाय
- 10:45–10:49बलकी उकर सम्पूर्न सम्पत्ती राज्जके अदहीं का लिल्जाय,
- 10:49–10:51आ उकरा राज्जके निर्वासित का दिल्जाय,
- 10:51–10:54या आजीवन कत्होर्श्रम करावस दिल्जाय.
- 10:54–10:58आच्छा, मतलप, सलहेश इस थापित करत,
- 10:58–11:08जे म्रित्यु दन्द एक ता प्रतिशोद भूसकए चे मुदा कत्होर्श्रम् वस्सम्पती जब्ती वास्त्विक न्याए च्याए.
- 11:08–11:12इत सल्हेश के चरीत्र केन एक दार्षनिक गेराए देते.
- 11:12–11:17आई, इहो देखावे जे राजा खाली अणाय होए च्याए,
- 11:17–11:32ज़न्द का उचित अनुपात जाने थो, तकुन चूहनमल का सजा दबना के जादू का परिनाम नाई, बलकी सलहेश का राजनेतिक अन्याएक विवेख का परिनाम मानल जाइत.
- 11:47–12:17अग, उद़ान, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग
- 12:17–12:21तुरन्त पक्डायल, तुरन्त जादूभेल आपुरन्त चुटीगिला,
- 12:21–12:25तो उही में पाथक वाश्वोता के रिदाय के द़दकन को ना तेज होत.
- 12:25–12:29कता के चरम, बिन्दू और समथान के गती के आरो संथूलित काला से,
- 12:29–12:31तब आप प्रदख प्रबाव रिद्दिभ हो सकाएचे
- 12:31–12:33एही खंडक कमजोरी इचे
- 12:33–12:35जगडना सो बहुत जल्दी गड़िद बोजाएचे
- 12:35–12:37जाही से संकत गमभीर नाई भुजाएचे
- 12:37–12:39राद, तिंख्षन नाई बनेचे
- 12:39–12:41संगे अद्याय चारी में
- 12:41–12:44जाही से संकत गंबिर नाई बुजाए चे
- 12:44–12:46तेंशन नाई बने चे
- 12:46–12:50संगे अद्याय चारी में बारा बारक के प्रतिक्षा के बाथ से हूँ
- 12:50–12:53आचानक गीट के माद्यम से प्रकत हूँए चे
- 12:53–12:55पातकेन ईई अनुबहम नाई हूँच चे
- 12:55–12:58जे बारा बरकी प्रतिक्षाक कते कतिन रहल होद,
- 12:58–13:00जो संकत खषन भंगुर चे,
- 13:00–13:03तव विजे के उलास से होग खषन भंगुर बवजाए चे.
- 13:03–13:06आईन, हमरा एक ता बात लगाए चे.
- 13:06–13:09लेखख प्राया हो तलामाएक्स पर आएके,
- 13:09–13:39अगर बजल्चनी अगर उस्वयम उही सस्पन्से मुक्त होगाई चाहेचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच
- 13:39–13:41बाद्ख लेंता इसब नवींच है
- 13:41–13:44उनका लेली यात्रा नवच है
- 13:44–13:49एक रहा मेक्ता परमपारिक दिमा आज पर बनाएद भोजन से तुलना कर सकए चे
- 13:49–13:51बाज भोजन को दारन
- 13:51–13:54जहान जलदबाजी में आज तेल कदेप
- 13:54–13:56तब भोजन का बहार का हिस्सात पकी जायत
- 13:56–13:59मुदा भीटर का स्वाद अरस कच्चा रही जायत.
- 13:59–14:03तनाव के ताप पर किछु काल दरी पाथक कमनु विग्यान केन
- 14:03–14:05सिजबक आवश्षकता होच्छे.
- 14:05–14:08आए दीमा आज्वाला उप्मा
- 14:08–14:11वास्थव में कताव के गती के लेलक सतीक चाई,
- 14:11–14:20अदीक चाई मुदा जेहम क्लामेक सकेन बहुत भेसी दिमा कदेब अनावश्षक विव्रनन देब तो कि पाटक उभी ने जाता हा?
- 14:20–14:25तनाव बनाबक और कता के खिचबक के भीच के सीमा रेका कते चे?
- 14:25–14:30सीमा रेका समय सीमा वा देड्लाएन सनिरदारित होई चाई
- 14:30–14:35आप दाव पर लागल वस्तूके मूल ले बढ़ावक चै.
- 14:36–14:38देडलाईन कोना लगाओल जै?
- 14:38–14:41एक्रा हित ता उपाए यी भहूसक आई चै,
- 14:41–14:43जे सालेश जखों जेल मे चैइत,
- 14:43–14:49ता उनका पासी वा कतोर सजा भेडबा के टास समय सीमा निरदारीत का देल जाए.
- 14:49–14:56जिना राजा गुषना को दिता, जे काल सन्ध्या दारी जे हार नाई भेटल, ता सालेश के पासी दिल जायात.
- 14:56–15:03आच्छा, ता आब तनाव खाली गतना से नाई, बलकी भिताएत समय से उतपन भेरहल चे,
- 15:03–15:09इबद्या पोईट्चे आई यही समय सीमा के भीच दबना के तन्त्र सादना के न कोना जोडल जाए?
- 15:09–15:16या महार दबना के काली सादना के लगा तार तीन दिन द़ी के हताश संगरष के रुप में दिखाओजाए.
- 15:16–15:19उ मंद्र मे बईटल चाइत, अन्ने जल त्याग कहला,
- 15:19–15:22उंकर शरीर तूटी रहल चाए, मुदा उ हाथ पर अडल चाइत.
- 15:23–15:26बाप्रे, इत बडया द्रिष्य बनत.
- 15:27–15:31एक तरफ सुड दھरी रहल चाए, सलेष के मिर्थ्तो लगा भी रहल चाय,
- 15:31–15:34तो सर्देस मंत्र के प्रभाउ तुरन्त नहीं भाईर हो चाहें
- 15:34–15:39इखिचाई नहीं भेल, इपाटक के कताक भीतर बाएन कराखाब भेल
- 15:39–15:42जटे उ पाट्रक संगे साँस रोकी के समय के प्रतिक्षा करिच्च्छा है
- 15:43–15:43एक दम
- 15:43–15:47एक रा समानान्तर जन्ता के भीज के निराशा वरनन कदल जाए,
- 15:47–15:49जे हुंकर जन राजा संकत मेचाइत.
- 15:49–15:52इस सन्शाय अद्दर के वतावरन जक्ण बनत,
- 15:52–15:54तक्चन जाकर सत्टे बहारा अलेपर,
- 15:54–15:56उकर प्रभाव चरम पर होएत.
- 15:56–15:59इद्तनाओ कताकेन बहुत जीवन्त बनादित
- 15:59–16:02मुगा हमरा एक ता बात और बुजवक च्या एही कडी में
- 16:02–16:05आईजे बारा बरस के प्रतिक्षा चे
- 16:05–16:07जखन दाबना गावत चेत
- 16:07–16:11रोउ सुरहा बारा बरस तोरा लेलक आचर बनहे लों
- 16:11–16:16तो ओई गीट से पहले आकर मनु वेग्यानिक प्रभाव कोना स्तापित कर सके चे,
- 16:16–16:18जही से इई आचानक ने लागगे.
- 16:18–16:22आईन, इगीट ततकोन अत्यंत रिदे विदारक होएत,
- 16:22–16:24जखन पाधख के पहीने से,
- 16:24–16:27दावना के उई बारा बरस के माँन तलप भुजाल रहत.
- 16:27–16:33अद्याय चारी से पहले जखन दावना सलेश के लेलक काज करोल रहल चै,
- 16:33–16:38उही बीच में हुंकार चोट-चोट समिर्तीवे या कोनो पुरान चिन देखाओल जाए.
- 16:38–16:41पुरान कास्मिर्ती जैना की?
- 16:41–16:47ज़िना उ आपन कोनो सندूक मेरकल पुरान वस्तू देखी के सलेस के पहल बहेंत मोन परा थी.
- 16:47–16:53जगन पाथक इदेखछ ज़े दावना एक युग से इप प्रेम आपन भीतर समेटने चै,
- 16:53–17:01तकुन क्लामेखस में जखुन उगीद के मद्ध्यम से आपन विराज के विस्फोट करएच च्याए, तो उकर ताप पाथक के आत्माद्ठरी पहुचात.
- 17:01–17:05सक्ते कहलो वहा, मोल तीनो रचनात्मक सुजाव इच्छी.
- 17:05–17:17पहिल बिच्छन गठना जना वेद के आत्महत्या के न मुख्छे शड्यन्त्र के हिस्ष्ट बनाउ और सालेश के भीतर के द्वन्द्व के निस्पष्ट करू जाही से निरने प्रमानिक लागे.
- 17:17–17:29तो सर, तन्त्र किन मात्र सत्य उजागर करबक सादन बनाउ अद्दन्द के अदिकार सालेश के विवेक पर चोडु जाई से उ वास्त्विक न्याय राजा सिद्ध होत.
- 17:29–17:30एक दम सही.
- 17:30–17:55अदे सर चरम बिन्दू के गती के न्दीमा करू अदे समय सीमा के प्रेजोग ककतनाव के ताप के सिजबक अफसर दियो जाही से पाथग ओई संकत के अज्छ में महसुस कषके लेखख के इकाज अछ्टन्त सरहनेची हम श्रोता के आमन्त्रत करेची जो ओई ही सुज्ठाव स
Plain text
आएन आजा के एही विमर्ष्छ में, हम सब राजा सालेष के लोक गथापर आदारित आलेक परगप करब. जताई एक्ता सिपाही अपन न्याए प्रियता से जन राजा बनाई च्यत, और दबना के तान्त्रिक प्रेम के बल पर शवध्यंत्र से मुक्त होई च्यत. मुदा, एही कता मे पात्रा सबख्मनो वैग्यानिक प्रेर्ना और उकर परिनाम के भीज्ग के समवन्द आरो सपष्ट कर सकेत चला, लेक्व्ख, जना पहिल अद्याय मे राजा के वेद्ध्याके आत्महत्याके गतना. इक्दम सही दियान गिलहांके, इवेद्ध्यक के आत्महत्या गठन, कत्ठा के शुरू में, तए एक ता पहिज जंजावात जकान अभाईच्च्छै, मुदा माने अगन के कुछक्र, वा मुख्य कत्ठा पर, एक रर कोनो असर नी पर इच्च्चै? अग, बिल्कोल असर नी च्या. तए गटना कथा से एक दम विछन माने अलग खलग भुजाएच आए, अग, कुनो भी लोक गथा के प्रभाव, वोकर पात्रा के प्रेरना, अग, गटना करम के जुराप परनरभर करी च्या. आए आईन जे हम एक रा एक तब हवन के रूप में देखी, तववेद्ध्यका आत्महत्या एक तएहन खिडकी चाए, जे खुजाएत की चे मुदद अकर पचान कोनो द्रिष्ट नाए चाए. बाज, बड़िया द्रिष्टानत दिलो आहा. तक्की यी अपुर्न्ता कता के मुल प्रवाह के बादित नहीं कर रहल चाए, आरू एकरा संगे-संगे सलेस जे कता के प्रारंव सब दबना के अंदेखा कराए ताभी रहल चला, उ अचानक अद्याय चाँ में उनका सब विवाह कर लित अचाए. बिना कुनो भावात्मक विकास के एही दोनो गर्टना के बीच कुनो क्रमिक परिवर्तन आलेक में नाई चे, जैहे से इदोनो कता के मुख्ध्य प्रवाज से अलग थलग लग लग लग अई चै. अम्रा बुजब में यी समागरी सलेश के नाई कत्वा आददबना के प्रेम के लेलक एक ता आदार तयार कराए चे. मुदद जे ओहन गंभीर विशाए के उप्योग कतानक के आंगन बड़ाईबाने नै भेल तो उक्रा रखबक कियो चित्या. सत्या कहलो लेखख प्रायः द्राअथ में बहुत रास्विचार लबई चित मुगर कोनु गटना जा आगा कटव जुराइत नहीं तो उ पाटख के लेलक खाली भ्रम पेडा कराएच चैन तलेखख केन की करबकचा ही एही जगा तब लेक्खखेन इवैद के म्रित्य। के आगु के सद्यंट्र से जोड़ जरूरी च्याईन. जकन कोनो रच्ना में कोनो परहगगतना होईत च्याईत, तब पाथक उक्रा एक ता पूर्व संकेत वादा के रुप में ग्रहान कराई च्याईन. अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अदर अ� दबना अ सलेश का कुनो गुप्त श़्यंटर चाए. आईन, आमेता आहा के, एही विचार पर एकता प्रष्नोट्धावे चाब. आईन, कहो. जिक कता की प्रारंव मेही, तथापा इत्टेक पैग राजनेटिक दबाव बना लेद. तक्यु क्लनायक किन बहुत जल्दी बहुत अदेक शक्तीशाली नहीं बनादेत. इत चाए. मने सलेश खंदरी जन्ता के भीच स्तापिट सहो नहीं भेल चाएत. अ तापा हूनका पर इत्तेख पैग रद्या वाशशव्यंत्र के आरोप लगा रहल चाएत. की इप्रारमभिक असन्तुलन सलेश के नायकत्व के नहीं दबादेत, जे पाथख निराश भेजाए? बुजिलय है आंके बाद. मुदा थापा के तुरंट सफल होगा कोनो अवष्षकता नहीं चआए. वीचार इच्टे खाली एक्टा सन्शे के भीआ रोपल जाए. खाली सन्शे? अग, जखुन तापा राजा लगे सन्शे पेडा करिच्छे, तर राजा तुरन् सलेश के दन्दित नहीं करिच्छे, मुदा राजा के मस्तिष्क में एक ता अद्रिष्ष्य दरार अवश्ष्य पेडा बोजे च्छे. अव उई दरार के आसर बाद में देखाभै. बलकुल. ए दागमगाल विष्वास. आगु चले को एही समें काज करेद, जोखन सालेश पर नो लाक्रोप्या के चोरी कारोप लगेद. बिना कोनो पूर्व संदेह के, राजा आचाना कपन सब से योगे सबाही पर चोरी का आरोप कोना माने लेता. आप, यी पोईंट बड़िया चे. जे वेद्धिया के मुद्थिव कारन राजा के मन में पहलने से तनी संदे च्याये. तो चोरी के आरोप पर राजा के क्रोद स्वाभाविक लागे लागच्छे. एक्दम एहे तरा पहल अद्यार में, भेल वेद्या के आत्महत्या के गच्ना, पन्चम अद्याय द्याय द्हरी कता के लेलक एक ता उत्प्रे रक, मैंने कातलिस्ट मनी के काज करे चे. अपना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना बना � अपन भीतर कोना विचार कर अच्छेत एक दिस हुंकार सार्व जनिक कर्तव्यच है दोसर दिस अ इस्ट्रीच है जे बारावरक दरी हुंकालेलक प्रतीख्षाके लक और अपन तन्त्रिक विद्या दाव पर लगादेलक जहम सलेश के अपन कर्तव्या अर व्यक्तिगत रिन के भीच संगर्ष करएत नै देखाव, तो यी विवाहा कहली एक ता प्लोट के अवष्च्ता बुजायत, कोनो मानविया चुनावने. मुदा की आत्मचिन्तन सलेष के कमजोर नै देखाथ. कमजोर कि आग देखाथ. माने एक तजनराजा, अई नदवन्दव चरित्र के कमजोर नई, बलकी मानविया अप प्रमानिग बनावेचे. कोनो भी महान नायक, जे बिना कोनो भीत्री संगर्ष के निरनाय लेक चे, उको यंट्र जकान लगएचे. मनुश्शे नाय. इत चै? मनुश्शे ता मनुश्शे हे चै? जखोल पाटख देखाएद जे सालेश कतेक गमभीरता सव, दाबनाक त्याग करव, और राजा के रुप में आपन निसपक्षता के रक्षा करव भईच सन्तूलन खोजी रहल चात, तकोन हुंकार अन्तिम निरनेक महत्व आरो अदिक बड़ी जाएद. अच्छा, तजग्यों उवही आत्मच इंटन के बाद दाबना के अपना बईच्छाएत, तो उन निरने कोनो बावुकता के वशीबूत भोगे नहीं? बलकी पुरन चेटन अवस्ता औग क्रितग्यता से लिल्गिल गमभीर निरने होएत, इपने अगाँईदा बागा जादू अगाईदा बागा जादू अगाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बागाईदा बाग अगर अद्टर बद्या के मद्या सन्तुलन आनेत इक खाथा कमूल सन्देश आरो प्रभाव्शाली बहेसके ची, जो जादू से सब किच भेरहल चे, तमुख्य पात्र का आपनी शमता, बुद्दि, अर संगरष अर्द्टीन बहेजग ची. पात्रके तनायक सवूमीद होई चाए, बलकुल, चूहन्द माल के दन्द जे पूरनता, दाबना के तन्तरीक सकती से भेटाए तकाए, तसलेश मात्र एक ता मुक दरषक बनी के रही चाए तुछ. तकर उन्याई राजा कोना बेला, अदक हली दाबना के जादू के लाब उठाएवावावाला एक ता वेक्ती मात्र बनी गला तईया एक्रा कोना संतूलित कर सकाई च्यालेख्ख, जाही से तन्त्र के रहेस, आलोग गता का परमपरागत रोमाज सहो बनल रहे, अन्नायक कन्याय सहो अस्तापित हुए. तन्त्र के मात्र सत्य उजागर करवाके माद्यम बनावल जाए, अंतिम नियाय सहलेश के बुद्दिमत्ता अन्याय सिद्धान्त पर आदारी थो. माने दावना के तन्त्र कहली कन्फेश्यन कराभे लला. अआ. दावना के तन्त्र से चूहंड मोल के इत्ते शरीरीक पीला होवै, जे उ राजा के दरबार में सत्तिबाकी दीए. जे उहे नो लाख के हार चोरानाई चाय, मुदा जकन अक्रा मरवाक वा दंद दिवाक वात आवाई, तकन सलेश मदस्त हता करत. शलेजस आएगु अबहातत, उही तन्त्रिक खुद के शान्त करत, राजा के समजावत, जे चूहन्द्माल के प्रतिशोद स्वरूप म्रित्योदन्द नै भिटाख चाही उ अप्राद के अनुसार उचित कारावास के आगर आगर आगर आगर आद. आईन, हम्रा हे ते बहुत गंभीर आपती चाही आदात पर. कहु कि आपती चाही? चूहन्द्माल राजा के नावलाक के हार चूरे नाई चाई, सालेज जे का इमान्दार सिपाही के जेल में सडाबक, अपहासी पर चदाबक शद्यंट्र रच्डाई चाई? पहगा अप्रादत च्चाई आप पूरा राज्य में आराजक्ता फलाई नहीं च्चाई जो सालेश एहन खतरनाग खलनायक के म्रित्दंद के बडला कोनो हलका सजा या खली कारवास देट च्चाएत तकी आम जन्ता सालेश के एक ता दूबल राजा नाई मानत ये आईन बड़ा सवबाविक्षंका चे एक ता एतियासिक लोक गधा में, जता ए न्याई तुरन्द अखधोर हूई चल, एहन शमादान सालेष के न्याई प्रियताके स्तापित कर्वाग बढलाप उक्रा सन्दिएद बना देद. आहा एक तब बहुत महत्पृन बिन्दू उठालो आहा, मुदा न्याए प्रियताक अर्थ, हमेशा प्रतीषोद नाय होई चे, अटे हम्रा सब कें दन्दात्मक, न्याय, असुदारात्मक, वस संतुलित न्याय के भीच क अंतर के देखाक चाए. माने, आहा कहा चाही चाही के, शमा करवत भल्वान के काम चाही? नाई, खषमा नाई, ज़स सलेश चूहंदमल के प्राईन्दड़ देच चाही, तो उ मात्र दर्बनाक क्रोद के ही समर्थन कराहल चाही, उहे महुनकर आपन विवे कताई चाही, उनका दूबल नाय दिखा बक्चाही उचूहंदमल के खषमा नाय कराहल चाएत तकी कराहल चाएत उखाली उकर म्रित्य। दन्ड के ताल राहल चाएत उदाहरन के लेलग सलेश राजा के कही सकए चाएत के चूहंदमल से खाली हार वापस नाय लेल जाय बलकी उकर सम्पूर्न सम्पत्ती राज्जके अदहीं का लिल्जाय, आ उकरा राज्जके निर्वासित का दिल्जाय, या आजीवन कत्होर्श्रम करावस दिल्जाय. आच्छा, मतलप, सलहेश इस थापित करत, जे म्रित्यु दन्द एक ता प्रतिशोद भूसकए चे मुदा कत्होर्श्रम् वस्सम्पती जब्ती वास्त्विक न्याए च्याए. इत सल्हेश के चरीत्र केन एक दार्षनिक गेराए देते. आई, इहो देखावे जे राजा खाली अणाय होए च्याए, ज़न्द का उचित अनुपात जाने थो, तकुन चूहनमल का सजा दबना के जादू का परिनाम नाई, बलकी सलहेश का राजनेतिक अन्याएक विवेख का परिनाम मानल जाइत. अग, उद़ान, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग तुरन्त पक्डायल, तुरन्त जादूभेल आपुरन्त चुटीगिला, तो उही में पाथक वाश्वोता के रिदाय के द़दकन को ना तेज होत. कता के चरम, बिन्दू और समथान के गती के आरो संथूलित काला से, तब आप प्रदख प्रबाव रिद्दिभ हो सकाएचे एही खंडक कमजोरी इचे जगडना सो बहुत जल्दी गड़िद बोजाएचे जाही से संकत गमभीर नाई भुजाएचे राद, तिंख्षन नाई बनेचे संगे अद्याय चारी में जाही से संकत गंबिर नाई बुजाए चे तेंशन नाई बने चे संगे अद्याय चारी में बारा बारक के प्रतिक्षा के बाथ से हूँ आचानक गीट के माद्यम से प्रकत हूँए चे पातकेन ईई अनुबहम नाई हूँच चे जे बारा बरकी प्रतिक्षाक कते कतिन रहल होद, जो संकत खषन भंगुर चे, तव विजे के उलास से होग खषन भंगुर बवजाए चे. आईन, हमरा एक ता बात लगाए चे. लेखख प्राया हो तलामाएक्स पर आएके, अगर बजल्चनी अगर उस्वयम उही सस्पन्से मुक्त होगाई चाहेचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच बाद्ख लेंता इसब नवींच है उनका लेली यात्रा नवच है एक रहा मेक्ता परमपारिक दिमा आज पर बनाएद भोजन से तुलना कर सकए चे बाज भोजन को दारन जहान जलदबाजी में आज तेल कदेप तब भोजन का बहार का हिस्सात पकी जायत मुदा भीटर का स्वाद अरस कच्चा रही जायत. तनाव के ताप पर किछु काल दरी पाथक कमनु विग्यान केन सिजबक आवश्षकता होच्छे. आए दीमा आज्वाला उप्मा वास्थव में कताव के गती के लेलक सतीक चाई, अदीक चाई मुदा जेहम क्लामेक सकेन बहुत भेसी दिमा कदेब अनावश्षक विव्रनन देब तो कि पाटक उभी ने जाता हा? तनाव बनाबक और कता के खिचबक के भीच के सीमा रेका कते चे? सीमा रेका समय सीमा वा देड्लाएन सनिरदारित होई चाई आप दाव पर लागल वस्तूके मूल ले बढ़ावक चै. देडलाईन कोना लगाओल जै? एक्रा हित ता उपाए यी भहूसक आई चै, जे सालेश जखों जेल मे चैइत, ता उनका पासी वा कतोर सजा भेडबा के टास समय सीमा निरदारीत का देल जाए. जिना राजा गुषना को दिता, जे काल सन्ध्या दारी जे हार नाई भेटल, ता सालेश के पासी दिल जायात. आच्छा, ता आब तनाव खाली गतना से नाई, बलकी भिताएत समय से उतपन भेरहल चे, इबद्या पोईट्चे आई यही समय सीमा के भीच दबना के तन्त्र सादना के न कोना जोडल जाए? या महार दबना के काली सादना के लगा तार तीन दिन द़ी के हताश संगरष के रुप में दिखाओजाए. उ मंद्र मे बईटल चाइत, अन्ने जल त्याग कहला, उंकर शरीर तूटी रहल चाए, मुदा उ हाथ पर अडल चाइत. बाप्रे, इत बडया द्रिष्य बनत. एक तरफ सुड दھरी रहल चाए, सलेष के मिर्थ्तो लगा भी रहल चाय, तो सर्देस मंत्र के प्रभाउ तुरन्त नहीं भाईर हो चाहें इखिचाई नहीं भेल, इपाटक के कताक भीतर बाएन कराखाब भेल जटे उ पाट्रक संगे साँस रोकी के समय के प्रतिक्षा करिच्च्छा है एक दम एक रा समानान्तर जन्ता के भीज के निराशा वरनन कदल जाए, जे हुंकर जन राजा संकत मेचाइत. इस सन्शाय अद्दर के वतावरन जक्ण बनत, तक्चन जाकर सत्टे बहारा अलेपर, उकर प्रभाव चरम पर होएत. इद्तनाओ कताकेन बहुत जीवन्त बनादित मुगा हमरा एक ता बात और बुजवक च्या एही कडी में आईजे बारा बरस के प्रतिक्षा चे जखन दाबना गावत चेत रोउ सुरहा बारा बरस तोरा लेलक आचर बनहे लों तो ओई गीट से पहले आकर मनु वेग्यानिक प्रभाव कोना स्तापित कर सके चे, जही से इई आचानक ने लागगे. आईन, इगीट ततकोन अत्यंत रिदे विदारक होएत, जखन पाधख के पहीने से, दावना के उई बारा बरस के माँन तलप भुजाल रहत. अद्याय चारी से पहले जखन दावना सलेश के लेलक काज करोल रहल चै, उही बीच में हुंकार चोट-चोट समिर्तीवे या कोनो पुरान चिन देखाओल जाए. पुरान कास्मिर्ती जैना की? ज़िना उ आपन कोनो सندूक मेरकल पुरान वस्तू देखी के सलेस के पहल बहेंत मोन परा थी. जगन पाथक इदेखछ ज़े दावना एक युग से इप प्रेम आपन भीतर समेटने चै, तकुन क्लामेखस में जखुन उगीद के मद्ध्यम से आपन विराज के विस्फोट करएच च्याए, तो उकर ताप पाथक के आत्माद्ठरी पहुचात. सक्ते कहलो वहा, मोल तीनो रचनात्मक सुजाव इच्छी. पहिल बिच्छन गठना जना वेद के आत्महत्या के न मुख्छे शड्यन्त्र के हिस्ष्ट बनाउ और सालेश के भीतर के द्वन्द्व के निस्पष्ट करू जाही से निरने प्रमानिक लागे. तो सर, तन्त्र किन मात्र सत्य उजागर करबक सादन बनाउ अद्दन्द के अदिकार सालेश के विवेक पर चोडु जाई से उ वास्त्विक न्याय राजा सिद्ध होत. एक दम सही. अदे सर चरम बिन्दू के गती के न्दीमा करू अदे समय सीमा के प्रेजोग ककतनाव के ताप के सिजबक अफसर दियो जाही से पाथग ओई संकत के अज्छ में महसुस कषके लेखख के इकाज अछ्टन्त सरहनेची हम श्रोता के आमन्त्रत करेची जो ओई ही सुज्ठाव स