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राजा_सलहेस__दिलों_का_राजा.mp4

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Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
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  1. 0:00–0:08नमस्ते, आज हम मित्ला मुरंग छेत्र की एक बेहत कमाल की और उर्जा से बहरी मैठिली लोक कता को दिकोड करने वाले हैं.
  2. 0:08–0:10मतलब ये कोई सादारन कहाने नहीं है?
  3. 0:10–0:14ये न्याए जातियों की सीमाव को तोडने
  4. 0:14–0:16और तन्ट्र विद्ध्या की एक असी जबर्दस्द गाता है
  5. 0:16–0:18जो सच में हैरान कर देती है.
  6. 0:18–0:23चलिए राजा सलहेस की इस किवन्दन्ती का विष्लेशन करते है?
  7. 0:23–0:29और देखते हैं कि कैसे एक आम अन्सान रात अ रात एक महान लोक नायक बन गया?
  8. 0:29–0:32तो चलीए, सीदे इस कहानी के गेराई में उतरते हैं
  9. 0:32–0:36इस पूरी गाता का जो सबसे पावर्फुल बेस है, वो यही है
  10. 0:36–0:39एक अईसा नेता जिसकी सथ्ता किसी लक्डी या सूने के सिंगासन से नहीं
  11. 0:39–0:42बलकी सीदे जंदा के दिलो से आती थी.
  12. 0:42–0:46ज़ा सुचिए एक अईसा अनसान जिसने अपना सम्मान बिना किसी राजची अदिकार के
  13. 0:46–0:49केवल और केवल अपने करमो से कमाया.
  14. 0:49–0:52अपने आप में बहुती शक्तिशाली विचार है, है ना?
  15. 0:52–0:54बागेक दिलों का राजा
  16. 0:54–0:57तो कहानी शुग रोती है, राजा सलहेस से
  17. 0:57–1:01वे एक बेहद सुन्दर, इमान्दार, और बहादुर सिपाही ते
  18. 1:01–1:04एक अईसा अईन्सान, जो देक्ते-टेक्ते
  19. 1:04–1:07जन्ता के सच्चे रक्षक और हम दर्द बन गय.
  20. 1:07–1:10यहा एक बाद समजनी बहुत जरूरी है,
  21. 1:10–1:12सलहेस दूसाथ समवुदाय से आते ते,
  22. 1:12–1:16जो अटिहासिक रूप से समाजके हाषिये पर रहा है.
  23. 1:16–1:17अब कुछ सुच्छिये,
  24. 1:17–1:21जमीनी स्थर पर एक दूसाज सिपाही को इतना सम्मान देना
  25. 1:21–1:23और उसे सीथा राजा की उपादी से नवाजना
  26. 1:23–1:25ये कुई चुटी बात नहीं ती
  27. 1:25–1:29ये उस समय की समाजिग बादावो को तोडने का एक बहुत कहरा प्रतीक �the
  28. 1:29–1:35ये साव दिक हाता है कि जब जन्ता किसी को अपना नेता चुन्ती हैं तो वो जन्म या जाती बिल्कुल नहीं देकती.
  29. 1:35–1:40अब कहानी में एक दिल्चस मोडाता है, यहां दो बिल्कुल अलग-लग लोगों का तक्राव है.
  30. 1:40–1:45उगई तरफ हमारे सलहेस हैं, जो बहत विनम रहें और जनों लोगों का प्यार अपने करमो से कमाया है.
  31. 1:46–1:48और तुसरी तरफ नोरंगी बहादुर तापा.
  32. 1:49–1:54ये वहां के अदिकारिक तालुगदार है, मतलब तापा का अहंकार यूंक लिजे की बहुत नाजुक हैं.
  33. 1:54–1:57उने वो सम्मान च़े जो नोने कभी कमाया ही नहीं
  34. 1:57–2:02और सच कहुथ तो यही जबर्दस्ट कंट्रास्ट आगे चलकर एक बहुत बड़े संगर्ष्की नीव रकता है.
  35. 2:02–2:05बाग्दो, इर्श्या और निर्वासन
  36. 2:05–2:12जाहर है एक सादारन सिपाही को जब लोग राजा कहने लगे, तो तालुक्दार तापा की इर्ष्या बभड़कुत्ही.
  37. 2:12–2:15और यही से एक खुले तक्राव की श्वर्वात हुई.
  38. 2:15–2:25वहा यूँ कि दर्बार में जब तालुक्दार ने गुस्से में आखर उनका नाम पूचा तू सलहेस ने दंके की चोट पर वो नाम लिया जु जन्ता ने उने प्यार से दिया था.
  39. 2:25–2:28उनो ने कहा, मेरा नाम राजा सलहेस है.
  40. 2:28–2:33बस इतना ही ये एक बहुत ही सिम्पल लेकिन एक दम विद्रो ही जवाब था.
  41. 2:34–2:41और आसानी सि अंदाजा लगाई जा सकता है, कि इस एक लाईन ने तालुगदार के गुस्से को सात्वे आस्मान पर पहँचा दिया होगा.
  42. 2:41–2:47इसके बाद तालोगदार ने सीदा अदेज देडाला कि सलहेस अपने नाम के अगे से ये राजा शबद तुरन थाले.
  43. 2:47–2:50लिकिन सलहेस का लोगिक एक दम क्लीर था.
  44. 2:50–2:54मतलब वो जन्ता को उने कुज़ भी बुलाने से आखिर कैसे रोख सकते थे
  45. 2:54–2:59जब लोगों की आवास को दबाना नामुमकिन हो गया, तो सलहेस ने एक बहुती कडा फैसला लिया.
  46. 2:59–3:05अपने उसुलों से समजोता करने के बजाए, उनो ने अपने नाक्री ही चोर दी और वो निर्वासन में चले गया.
  47. 3:05–3:09बहाक दीन एक नै रास्ते का निर्माना
  48. 3:09–3:20मोरंग से निकलने के बाड, सलहेस को शाएद ही अंदाजा ता कि उनके सफर में एक अजी अलोकिक शकती की अंट्री होने अली है, जो सब कुछ पलटक रग देगी.
  49. 3:20–3:25और यही अंट्री होती है दबना की. दिहां दीजेगा, दबना कोई आम महीला नहीं ती.
  50. 3:25–3:34वो शाही मालिन तो थी ही, लेकें साती काम रूब कामाख्या के बेहत शकती शाली तान्तरिक जादू की मास्टर भी थी.
  51. 3:34–3:39और सब से बड़ी बाद, वो मनि मन सलहेस से बहुत गेरा प्यार करती ती.
  52. 3:39–3:43जब दबना को पता चला, कि सलहेस मुरंग चोड कर जारे हैं,
  53. 3:43–3:47तो उसे तैक रहा ग़ा कि वो सलेज की किस्मत बडलने के लिए
  54. 3:47–3:50अपनी यस जादूई विद्ध्या का पूरा इस्तमाल करेगी.
  55. 3:50–3:54बाग चार नो लाग का चोरी हूँआ हार
  56. 3:54–3:57दबना ले अपनी शक्तियों का इस्तमाल कर के
  57. 3:57–4:00सलहिस को साथ सो सिपाहियों का सर्दार बन वाद दिया
  58. 4:00–4:03और इसकी वजह से पुराना सर्दार,
  59. 4:03–4:05चूहर्मल, इस कदर अपमानित हूँँँँ,
  60. 4:05–4:08कि उसने एक बहयानक साजिष रच्डाली.
  61. 4:08–4:12और ये साजिष का पैमाना बहुड ही शांदार तरीके से दरषाता है.
  62. 4:12–4:14की चूहर्मल किस हत्तक जासकता ता?
  63. 4:14–4:18पूरे नालाक उसने रानी का नालाक का हार चूरालिया?
  64. 4:18–4:23जरा सोची ए, उस दोर में इस रकम की कलपना करना भी दिमाक चकरा देता है.
  65. 4:23–4:29और ये सब, ये सब सिर्फ और सिर्फ सलहेस को पूरी तरह से बरवात करने किले किया गया ता.
  66. 4:42–4:46अगर ग़ाजा कदम खुद राजा के सामने जाकर शाही तलाशी की माँग करना.
  67. 4:46–5:16नतीजा क्या हुँँँँँ? तलाशी हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  68. 5:16–5:25वद्या कि दंपर उस्छ अज़्ाद्मक जादूई शक्ती और काम रूप कामाख्या विद्या कि दंपर उसने असी खफनाग आतमाउ का आबान किया जिनोंने सीदे चूफर्मल पर अटैक कर दिया.
  69. 5:25–5:27मतलब कलपना कीजे उस द्रिष्खी
  70. 5:27–5:29चूहर मल दरच से तदवपने लगा
  71. 5:29–5:31उसे खून की उल्टिया होने लगी
  72. 5:31–5:33और अंत तब उस आज्श शहनी ए पीडा में
  73. 5:33–5:35उसने सब के सामने अपनी पूरी साजिष का
  74. 5:35–5:37सरवजने कबूल नामा दिदिया
  75. 5:37–5:40लोक कताथों के नयर की ये ताकत, सच में रोंक्रे कडे कर दिती है.
  76. 5:40–5:43सच सामने आने के बाद का नजारा देखिये.
  77. 5:43–5:47एक तरव सलहेस को पुरी तरहा भेदाग साभिट कर रहा किया गया,
  78. 5:47–5:49बलकी उनका औहदा भी बड़ा दिया गया.
  79. 5:49–5:55और दूसी तरव उस साजचकरता चूहर मल को बेजजध कर के सीदा जेल की सलाकों के पीचे डाल दिया गया.
  80. 5:55–5:58आखिर कार सच्चाए और नयाए की जीथ हुई.
  81. 5:58–6:01बागज है एक स्थाई लोक विरासत.
  82. 6:01–6:06इस पूरी खटना के बाद, सलहेस को आखिर कार दबना के प्यार
  83. 6:06–6:10तो बज़ाग के प्यार और उसके त्याग की गेराई का इहसास हो गया.
  84. 6:10–6:12उन दोनोंने खृषी खृषी शादी कर लिए,
  85. 6:12–6:15और मोरंग में एक सुकुन बहरी जिंदगी बिताई.
  86. 6:15–6:19चलि अब आगे बड़े हैं और देकते हैं कि ये पूरी कहानी कैसे बिल्ड होती है.
  87. 6:19–6:24नियाय के ये पूरा चक्र देखे, पहले प्यार के लिए दबना का बारा साल का लंबा अंटिजार,
  88. 6:24–6:27फिर चूहण मल का वो ब्यानक विष्वाज गाज जिसने सलहेज को फसाया,
  89. 6:27–6:30उसके बात तन्त्र विद्ध्या कि जर ये सच्का पर्दापास,
  90. 6:30–6:34अर अद्छ में एक आँसी विरासत, जो मित्ला मुरंग में आज भी आमर है.
  91. 6:35–6:38एक तर्फा प्यार की एक अहानी किस तरहा परम नयाए की मिसाल बन गए,
  92. 6:39–6:40ये सच में कमाल की बात है.
  93. 6:41–6:44और सबसे बड़ी बात, ये कहानी आज भी क्यो माइने रकती है?
  94. 6:44–7:14योंगे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे
  95. 7:14–7:17और इन खोखली उपादियों के बीचे भाखती इस दुनिया में,
  96. 7:17–7:20दिलों का सच्चा राजा आखिर कुन है?
  97. 7:20–7:22वो जिसे कुर्सी मिल गए?
  98. 7:22–7:27या वो जिसने अपनी इनसानियत और करमो से लोगों का दिल जीता है.
  99. 7:27–7:31ये कहानी इसी शाशवत सवाल को हमारे भी चोड़ जाती है
  100. 7:31–7:32सुचनिपर मजबूर करती है ना

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नमस्ते, आज हम मित्ला मुरंग छेत्र की एक बेहत कमाल की और उर्जा से बहरी मैठिली लोक कता को दिकोड करने वाले हैं. मतलब ये कोई सादारन कहाने नहीं है? ये न्याए जातियों की सीमाव को तोडने और तन्ट्र विद्ध्या की एक असी जबर्दस्द गाता है जो सच में हैरान कर देती है. चलिए राजा सलहेस की इस किवन्दन्ती का विष्लेशन करते है? और देखते हैं कि कैसे एक आम अन्सान रात अ रात एक महान लोक नायक बन गया? तो चलीए, सीदे इस कहानी के गेराई में उतरते हैं इस पूरी गाता का जो सबसे पावर्फुल बेस है, वो यही है एक अईसा नेता जिसकी सथ्ता किसी लक्डी या सूने के सिंगासन से नहीं बलकी सीदे जंदा के दिलो से आती थी. ज़ा सुचिए एक अईसा अनसान जिसने अपना सम्मान बिना किसी राजची अदिकार के केवल और केवल अपने करमो से कमाया. अपने आप में बहुती शक्तिशाली विचार है, है ना? बागेक दिलों का राजा तो कहानी शुग रोती है, राजा सलहेस से वे एक बेहद सुन्दर, इमान्दार, और बहादुर सिपाही ते एक अईसा अईन्सान, जो देक्ते-टेक्ते जन्ता के सच्चे रक्षक और हम दर्द बन गय. यहा एक बाद समजनी बहुत जरूरी है, सलहेस दूसाथ समवुदाय से आते ते, जो अटिहासिक रूप से समाजके हाषिये पर रहा है. अब कुछ सुच्छिये, जमीनी स्थर पर एक दूसाज सिपाही को इतना सम्मान देना और उसे सीथा राजा की उपादी से नवाजना ये कुई चुटी बात नहीं ती ये उस समय की समाजिग बादावो को तोडने का एक बहुत कहरा प्रतीक �the ये साव दिक हाता है कि जब जन्ता किसी को अपना नेता चुन्ती हैं तो वो जन्म या जाती बिल्कुल नहीं देकती. अब कहानी में एक दिल्चस मोडाता है, यहां दो बिल्कुल अलग-लग लोगों का तक्राव है. उगई तरफ हमारे सलहेस हैं, जो बहत विनम रहें और जनों लोगों का प्यार अपने करमो से कमाया है. और तुसरी तरफ नोरंगी बहादुर तापा. ये वहां के अदिकारिक तालुगदार है, मतलब तापा का अहंकार यूंक लिजे की बहुत नाजुक हैं. उने वो सम्मान च़े जो नोने कभी कमाया ही नहीं और सच कहुथ तो यही जबर्दस्ट कंट्रास्ट आगे चलकर एक बहुत बड़े संगर्ष्की नीव रकता है. बाग्दो, इर्श्या और निर्वासन जाहर है एक सादारन सिपाही को जब लोग राजा कहने लगे, तो तालुक्दार तापा की इर्ष्या बभड़कुत्ही. और यही से एक खुले तक्राव की श्वर्वात हुई. वहा यूँ कि दर्बार में जब तालुक्दार ने गुस्से में आखर उनका नाम पूचा तू सलहेस ने दंके की चोट पर वो नाम लिया जु जन्ता ने उने प्यार से दिया था. उनो ने कहा, मेरा नाम राजा सलहेस है. बस इतना ही ये एक बहुत ही सिम्पल लेकिन एक दम विद्रो ही जवाब था. और आसानी सि अंदाजा लगाई जा सकता है, कि इस एक लाईन ने तालुगदार के गुस्से को सात्वे आस्मान पर पहँचा दिया होगा. इसके बाद तालोगदार ने सीदा अदेज देडाला कि सलहेस अपने नाम के अगे से ये राजा शबद तुरन थाले. लिकिन सलहेस का लोगिक एक दम क्लीर था. मतलब वो जन्ता को उने कुज़ भी बुलाने से आखिर कैसे रोख सकते थे जब लोगों की आवास को दबाना नामुमकिन हो गया, तो सलहेस ने एक बहुती कडा फैसला लिया. अपने उसुलों से समजोता करने के बजाए, उनो ने अपने नाक्री ही चोर दी और वो निर्वासन में चले गया. बहाक दीन एक नै रास्ते का निर्माना मोरंग से निकलने के बाड, सलहेस को शाएद ही अंदाजा ता कि उनके सफर में एक अजी अलोकिक शकती की अंट्री होने अली है, जो सब कुछ पलटक रग देगी. और यही अंट्री होती है दबना की. दिहां दीजेगा, दबना कोई आम महीला नहीं ती. वो शाही मालिन तो थी ही, लेकें साती काम रूब कामाख्या के बेहत शकती शाली तान्तरिक जादू की मास्टर भी थी. और सब से बड़ी बाद, वो मनि मन सलहेस से बहुत गेरा प्यार करती ती. जब दबना को पता चला, कि सलहेस मुरंग चोड कर जारे हैं, तो उसे तैक रहा ग़ा कि वो सलेज की किस्मत बडलने के लिए अपनी यस जादूई विद्ध्या का पूरा इस्तमाल करेगी. बाग चार नो लाग का चोरी हूँआ हार दबना ले अपनी शक्तियों का इस्तमाल कर के सलहिस को साथ सो सिपाहियों का सर्दार बन वाद दिया और इसकी वजह से पुराना सर्दार, चूहर्मल, इस कदर अपमानित हूँँँँ, कि उसने एक बहयानक साजिष रच्डाली. और ये साजिष का पैमाना बहुड ही शांदार तरीके से दरषाता है. की चूहर्मल किस हत्तक जासकता ता? पूरे नालाक उसने रानी का नालाक का हार चूरालिया? जरा सोची ए, उस दोर में इस रकम की कलपना करना भी दिमाक चकरा देता है. और ये सब, ये सब सिर्फ और सिर्फ सलहेस को पूरी तरह से बरवात करने किले किया गया ता. अगर ग़ाजा कदम खुद राजा के सामने जाकर शाही तलाशी की माँग करना. नतीजा क्या हुँँँँँ? तलाशी हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ वद्या कि दंपर उस्छ अज़्ाद्मक जादूई शक्ती और काम रूप कामाख्या विद्या कि दंपर उसने असी खफनाग आतमाउ का आबान किया जिनोंने सीदे चूफर्मल पर अटैक कर दिया. मतलब कलपना कीजे उस द्रिष्खी चूहर मल दरच से तदवपने लगा उसे खून की उल्टिया होने लगी और अंत तब उस आज्श शहनी ए पीडा में उसने सब के सामने अपनी पूरी साजिष का सरवजने कबूल नामा दिदिया लोक कताथों के नयर की ये ताकत, सच में रोंक्रे कडे कर दिती है. सच सामने आने के बाद का नजारा देखिये. एक तरव सलहेस को पुरी तरहा भेदाग साभिट कर रहा किया गया, बलकी उनका औहदा भी बड़ा दिया गया. और दूसी तरव उस साजचकरता चूहर मल को बेजजध कर के सीदा जेल की सलाकों के पीचे डाल दिया गया. आखिर कार सच्चाए और नयाए की जीथ हुई. बागज है एक स्थाई लोक विरासत. इस पूरी खटना के बाद, सलहेस को आखिर कार दबना के प्यार तो बज़ाग के प्यार और उसके त्याग की गेराई का इहसास हो गया. उन दोनोंने खृषी खृषी शादी कर लिए, और मोरंग में एक सुकुन बहरी जिंदगी बिताई. चलि अब आगे बड़े हैं और देकते हैं कि ये पूरी कहानी कैसे बिल्ड होती है. नियाय के ये पूरा चक्र देखे, पहले प्यार के लिए दबना का बारा साल का लंबा अंटिजार, फिर चूहण मल का वो ब्यानक विष्वाज गाज जिसने सलहेज को फसाया, उसके बात तन्त्र विद्ध्या कि जर ये सच्का पर्दापास, अर अद्छ में एक आँसी विरासत, जो मित्ला मुरंग में आज भी आमर है. एक तर्फा प्यार की एक अहानी किस तरहा परम नयाए की मिसाल बन गए, ये सच में कमाल की बात है. और सबसे बड़ी बात, ये कहानी आज भी क्यो माइने रकती है? योंगे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे बादे और इन खोखली उपादियों के बीचे भाखती इस दुनिया में, दिलों का सच्चा राजा आखिर कुन है? वो जिसे कुर्सी मिल गए? या वो जिसने अपनी इनसानियत और करमो से लोगों का दिल जीता है. ये कहानी इसी शाशवत सवाल को हमारे भी चोड़ जाती है सुचनिपर मजबूर करती है ना

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