MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

बगियाक_गाछ_आ_डाइनक_हार.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.737161)
Duration
1:57
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:04इग गजिंद्र ताकृ रचित कता बग्याक गाच के एक जधपपट समिक्षा अचि.
  2. 0:05–0:11इजासे रोमान्चक कता, एक तचतृर भालक, अकर जादूई पक्वाना काच,
  3. 0:11–0:17आ अक्रा ख्यपलेल, शवविंट्र रचित, एक तबयानक दाईनक संगर्ष पर अचि,
  4. 0:17–0:24मुद्दा की आहां के लगाई तची जे चोटका बच्चा अपन तिक्षन बुद्दी से दाईन के मात दस सकई चे
  5. 0:24–0:29सब से पहिले दाईनक मीच जालक बात करे चे
  6. 0:29–0:34बालक अपन जादूई गाच से स्वादिष्ट बग्या जे एक प्रकारक पक्वान होई चे
  7. 0:34–0:38उ तोडी रहल चिले तकने डाईन उते आभी,
  8. 0:38–0:42बूकक बहाना कईका, मीत बाट से बालक के फसाले चे,
  9. 0:42–0:45आजजद्डा भूरा मे बंद कर लैचे.
  10. 0:45–0:48इएक दम उहिना चे, जहीन कोनो शिकारी,
  11. 0:48–0:50शिकार लेल मीत बूली बजे चे.
  12. 0:50–0:58दो सर यी देखब बद दिल्चस्प अची जे दाईनक अती आत्मविश्वास उक्रा कोना लेल दुबएचे.
  13. 0:58–1:02रस्ता मे दाईन जकन गाचक चाहरी में सुती जाएचे,
  14. 1:02–1:32तबच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्
  15. 1:32–1:38जूत भाजी देच्छे, जे समाथ से मात कुतला पर उक्रो केश कुब सुंदर भाजे देख.
  16. 1:38–1:43बस दाईनक रचल कहाईन में उकर अपने परिवारक सरवनाश भाजाए च्छे,
  17. 1:43–1:46अब बच्च्छा सुरक्षित आपन गाछ लग्गुर्य बेच्छे.
  18. 1:46–1:50तो कुल मिलाकर इकता गजब तरीका से साभिद करेच्छे,
  19. 1:50–1:55ज़ संकत काल में आहा कच्छतुरता अस्साहस पैग से पैग दुष्टता के,
  20. 1:55–1:57आसानी से दूल चता सकेच्छे.

Plain text

इग गजिंद्र ताकृ रचित कता बग्याक गाच के एक जधपपट समिक्षा अचि. इजासे रोमान्चक कता, एक तचतृर भालक, अकर जादूई पक्वाना काच, आ अक्रा ख्यपलेल, शवविंट्र रचित, एक तबयानक दाईनक संगर्ष पर अचि, मुद्दा की आहां के लगाई तची जे चोटका बच्चा अपन तिक्षन बुद्दी से दाईन के मात दस सकई चे सब से पहिले दाईनक मीच जालक बात करे चे बालक अपन जादूई गाच से स्वादिष्ट बग्या जे एक प्रकारक पक्वान होई चे उ तोडी रहल चिले तकने डाईन उते आभी, बूकक बहाना कईका, मीत बाट से बालक के फसाले चे, आजजद्डा भूरा मे बंद कर लैचे. इएक दम उहिना चे, जहीन कोनो शिकारी, शिकार लेल मीत बूली बजे चे. दो सर यी देखब बद दिल्चस्प अची जे दाईनक अती आत्मविश्वास उक्रा कोना लेल दुबएचे. रस्ता मे दाईन जकन गाचक चाहरी में सुती जाएचे, तबच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च् जूत भाजी देच्छे, जे समाथ से मात कुतला पर उक्रो केश कुब सुंदर भाजे देख. बस दाईनक रचल कहाईन में उकर अपने परिवारक सरवनाश भाजाए च्छे, अब बच्च्छा सुरक्षित आपन गाछ लग्गुर्य बेच्छे. तो कुल मिलाकर इकता गजब तरीका से साभिद करेच्छे, ज़ संकत काल में आहा कच्छतुरता अस्साहस पैग से पैग दुष्टता के, आसानी से दूल चता सकेच्छे.

← Transcript index