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पतिक_प्रेम_आ_गांगोदेवीक_माछक_चमत्कार.m4a
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- 0:00–0:07इं मितलाक मला समुदायक प्रसिद कता गांगो देविक भगत करेक्ता तवरिट समिख्षा जे,
- 0:07–0:11गजंद्र ताकौरा की अदबूद गाता देखावे ताचे,
- 0:11–0:15जे कोना माच मारी गुजारा करेत एक ता साद्धारन स्त्री,
- 0:15–0:22मात्र आपन पतिक अगाद प्रेमक कारने पुरा समाजक लेल आस्थाख प्रतिक बन गे लिया.
- 0:22–0:29पहले हम सब देखेच फीज, जे गोर निराशक बादो प्रेमक संकलप कोना नहीं तुटेताचे.
- 0:29–0:42आहा सोचु गांगो देविक पती साँन कमेला में पतनी कलेल लहती कीनबा के तु दिनबर जाल फेकलनी, मुदा माचषब बडला मात्र दोका सितुवा भेटलनी.
- 0:42–0:47जखन सब महनत विफल बहुजायता चे तकन की बचेटा चे.
- 0:47–0:52एते विफल्ताक बीचो पतिक प्रेम एक ता अन्तिम आसक रूप मिटार रहल.
- 0:53–0:57तो सर, एह निराशाक बीच एक ता गजब चमतकार होएता चे.
- 0:57–1:01निराश भहे पति अन्तिम बार पतनिक नाम ले जाल फेकलनी.
- 1:02–1:05इई अन्तिम भेरची गांगो हम्रा शमाकरव.
- 1:05–1:11आखी कहब जाल एतेक माच सबहरी गेल जे गेचब मुष्किल भोगेल.
- 1:11–1:14की कोनो जादूचल? एकदम नहीं.
- 1:14–1:18इक ता सादारन पतिक निश्चल समरपनक शक्तीचल,
- 1:18–1:21जे प्रक्रतिक निमक के से हो बदली देलक.
- 1:21–1:27अन्त में इव्यक्तिकत प्रेम कोना इक ता सामहिक परमपरा बने जाई ता चे से भुजु
- 1:27–1:34जगन इ़ाहसे खुजल तकन साूँ से मलाह समुदाए गांगुक नाम के एक ता शुब आवान मानी लेलक
- 1:34–1:38आईयो जाल फेखभास से पहले हुंकर समरन कर अई ता ची
- 1:38–1:47इकोनु यूध कता नही आचे, बलकी इदेखावगता चे, चे प्रेमक एक ता चोट भीया कोना विशाल परमपरा गाज बनी सकता चे.
- 1:47–1:57इगाता हमरा सबके सिखवगता चे जि निश्छल प्रेम आनन्रता, सादारन सादारन परस्तितिक के से हो असादारन आ आमर बनासके टाचे.
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इं मितलाक मला समुदायक प्रसिद कता गांगो देविक भगत करेक्ता तवरिट समिख्षा जे, गजंद्र ताकौरा की अदबूद गाता देखावे ताचे, जे कोना माच मारी गुजारा करेत एक ता साद्धारन स्त्री, मात्र आपन पतिक अगाद प्रेमक कारने पुरा समाजक लेल आस्थाख प्रतिक बन गे लिया. पहले हम सब देखेच फीज, जे गोर निराशक बादो प्रेमक संकलप कोना नहीं तुटेताचे. आहा सोचु गांगो देविक पती साँन कमेला में पतनी कलेल लहती कीनबा के तु दिनबर जाल फेकलनी, मुदा माचषब बडला मात्र दोका सितुवा भेटलनी. जखन सब महनत विफल बहुजायता चे तकन की बचेटा चे. एते विफल्ताक बीचो पतिक प्रेम एक ता अन्तिम आसक रूप मिटार रहल. तो सर, एह निराशाक बीच एक ता गजब चमतकार होएता चे. निराश भहे पति अन्तिम बार पतनिक नाम ले जाल फेकलनी. इई अन्तिम भेरची गांगो हम्रा शमाकरव. आखी कहब जाल एतेक माच सबहरी गेल जे गेचब मुष्किल भोगेल. की कोनो जादूचल? एकदम नहीं. इक ता सादारन पतिक निश्चल समरपनक शक्तीचल, जे प्रक्रतिक निमक के से हो बदली देलक. अन्त में इव्यक्तिकत प्रेम कोना इक ता सामहिक परमपरा बने जाई ता चे से भुजु जगन इ़ाहसे खुजल तकन साूँ से मलाह समुदाए गांगुक नाम के एक ता शुब आवान मानी लेलक आईयो जाल फेखभास से पहले हुंकर समरन कर अई ता ची इकोनु यूध कता नही आचे, बलकी इदेखावगता चे, चे प्रेमक एक ता चोट भीया कोना विशाल परमपरा गाज बनी सकता चे. इगाता हमरा सबके सिखवगता चे जि निश्छल प्रेम आनन्रता, सादारन सादारन परस्तितिक के से हो असादारन आ आमर बनासके टाचे.