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ग़रीबन_बाबा_की_कथा.mp4
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- 0:00–0:08सीथा मुद्दे पर आते हैं. स्वागत है इस खास विष्लेशन में, जहां हम मित्फला की एक बेहत दिल्चस्प लोग कता में गोता लगाने वाले हैं.
- 0:08–0:13इक अईसी कहानी, जहाँ एक बहुत ही सादारन्द से ग्रामेड जीवन का,
- 0:13–0:15सीड़ा सामना इश्वर ये शकतियों से होजाता है.
- 0:15–0:19जरा सुची ए, क्या अईजने में हुई एक चोटी सी गलती,
- 0:19–0:22किसी आम अँईन्सान को आमर देवता बना सकती है?
- 0:22–0:26यही सवाल हमारी आजकी इस कहानी का सब से बड़ा रहसे है.
- 0:26–0:29हम अजनाने में हुए एक पाप, एक दुखध मुध,
- 0:29–0:32और गलोकिक नियाए के एक अजे सफर पर निकलने वाले है,
- 0:32–0:34जो आपको सच में हेरान कर देगा.
- 0:34–0:37तो चलिए, कहानी के पहले पडाव पर चलते है,
- 0:37–0:40तीन दोस्त और उदरा गाँउका जीवन
- 0:40–0:43बात है कमला नदी के किनारे बसे
- 0:43–0:46उदरा नाम के एक बड़ेही जीवन्त गाँउकी
- 0:46–0:49यहां तीन पक्के डोस्त रहते के
- 0:49–0:52बरहम ठाकुर, गासी यादाव, और गरीबन दोभी
- 0:52–0:55इनका तो बस एकी रूटीन था
- 0:55–0:57में मिला नहीं की पूजगगया खाडे में कुष्टी लडने,
- 0:57–1:01एक दाम हसी मजाग और रोज मर्रा की मस्ती वाला,
- 1:01–1:02खुष्नुमा माहल.
- 1:02–1:05लेकिन फिर आता है कहानी का दुस्रा बाग,
- 1:05–1:09एक अनजानी भूल और एक पवित्र शीमा का पार होना.
- 1:09–1:14अब दिक्ये, परेशानी कहां से शुरू हुत्ती है, ये जो कुष्ती का अखाडा ताना,
- 1:14–1:17इसके बिल्कुल सता हूँआ एक पवित्र चबूत्रा था,
- 1:17–1:22जिस से लोग पीटी कहते थे, ये जगा देवी कमला माए को समर पिट थी,
- 1:22–1:25अद जाहर है, गाँवालों के ले बहुत श्रद्धा का केंद्र थी
- 1:25–1:28आब होता यह है के खुष्टी का कडा भ्यास चल रहा था
- 1:29–1:33एक दम जोश में, तबही गरीबन का पैर बिलकोल अनजाने में
- 1:33–1:37और बिना किसी गलत एरादे के, उस पवित्र पीटी से तक्रा जाता है.
- 1:37–1:45अप इन्सानी नजर से देखें तो ये महज एक चुक थी, लेकिन इश्वर ये द्रिष्टि कोंट से? ये एक बहुत बडाई अप्राद बन गया.
- 1:45–1:50यही से शुरू होता है हमारा तीस्रा हिस्था, देवी का क्रोद और इश्वर ये प्रतिषोद.
- 1:50–1:55अपने पवित्र स्थान का अईसा अप्मान देखक्क्र देवी कमलमाई ब्यंकर क्रोदित होडती है,
- 1:55–2:00उनका गुस्सा इतना देज्ता कि उनहोने इस अन्जानी भूल को माअप करने के बजाए,
- 2:00–2:03तुरनत एक खोफनाक सचा देने का फैस्ला कर लिया.
- 2:03–2:15और सजाभी आज़्ी वैसी नही, देवी कमला सीदे बवाग्वान एंद्र के दर्बार से एक भेहद, खुंकार और जादूई बागिन को बलागिन को बलागिन ताकि वो उस निर्दोश पहल्वान पर अपना कहर बरपासके.
- 2:15–2:19इक सदादारन इन्सान और एक इश्वर्य ये शक्तियो वली बागिन,
- 2:19–2:24मतलब ये मुकापला तो शुरू हुने से पहले ही पूरी तरहां से एक तर्फा था.
- 2:24–2:30वो जाना पहजाना सुरक्षिट सागार्डा पलक जबकते ही एक जानलेवा मैधान में बडल गया.
- 2:30–3:00गरीबन कुष्टी का उस्ताद जरूर था, लेकिन उस इश्वर या जानवर के सामने, उसकी इन्साली ताकते एक दम भेबस साभित हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 3:00–3:04अदिक दारा मे भेटा हुँआ गरीबन का शव इक दोभीः गाट पर पहुचता है।
- 3:04–3:09वहां एक दुस्रा दोभी अपने रोस के कपड़े तोने के काम में पूरी तरहे से मगन था
- 3:09–3:12सब कुछ एक दम समान ने चल रहा था
- 3:12–3:17अपने चोथे हिस्छे की तरव अप्मान, श्राप और एक आत्मा का जाग्रन.
- 3:17–3:22नदी की दारा मे भेहता हुँ अगरीवन का शव, एक दोभी आ गाट पर पहुचता है.
- 3:22–3:27वहाँ एक तुस्रा दोभी अपने रोज के कबड़े तुने काम में पूरी तरह से मगन था.
- 3:27–3:29सब कुछ एक्दम समान ले चल रहा था.
- 3:29–3:32तब ही उस दोभी की नजर शव पर परती है.
- 3:32–3:34बजाए एसके की वो कोई ईनसानियत दिखाए,
- 3:34–3:37उसे ये शव अपने काम में एक रुकाववध लगा.
- 3:37–3:39और भिना ये जाने की वो शरीर किसका है,
- 3:39–3:41उसने बस स्वार्ठ मे आखर,
- 3:57–4:02उसकी उन प्रार्ठनाव में अस्सीम दुक और बस एक आखरी उम्मीद बची थी.
- 4:02–4:08और जानते है, उन प्रार्ठनाव का असर हुए, एक बहुत बडाट चमत कार होता है.
- 4:08–4:12नियाए के लिए गरीबन की आत्मा वापिस लोडती है.
- 4:12–4:15और गाँउ के एक माद्ध्यम, जिसे हम भब्ख्ता कहते है,
- 4:15–4:17उसके शरीर में प्रवेश कर जाती है.
- 4:17–4:19अब आत्मा खुद बोल रही थे.
- 4:19–4:23उस भब्खता के जर ये आत्मा ने पूरे दोभी समुदाय को
- 4:23–4:26सीदे एक खोफनाक चेतावनी दे डाली.
- 4:26–4:32उसने कहा अगर सबने मिलकर उसका शव नहीं निकाला और सही से अंतिम संचार नहीं किया,
- 4:32–4:36तो दोभीो की बध्फी में रके सारे कपडे जल कर राग हुजाएंगे.
- 4:36–4:40ये कोई चोटी मोटी चेतावनी नहीं फी, एक सीदा श्राप था.
- 4:40–5:10और फिर आता है हमारा अंतिम पडाओ, प्राएश्चित और आमर्ता, एक रक्षक का जन्, इस खफनाक अल्टिमेटम को सूंकर पूरे समदाय के हो शूडगे, उने अपनी सामूहिग गल्ती का इहसास हो चुका था, बिना देर किय, सारे दोभी एक जुट होकर नदी में कु�
- 5:10–5:40अदोभी समवदाय की आजीविका, यानी उनकी बद्ध्धी हमेशा किलिए सुवक्षित होग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़
- 5:40–5:46यह में दिखाती है कि कैसे अनजाने में हुए पाप, समुदाए की एक जुट्ता और प्राएश चित,
- 5:46–5:50ये सब मिलकर एक बहुत बडी सांस्च्रूतिक विरासत का रूप ले लेते हैं.
- 5:50–5:54इस पूरे विष्लेशन के बाद एक सवाल जहन में जरूर आता है.
- 5:54–6:01दून्या बर की आजी ही नजाने कितनीक शेत्रे कहानियो में और कितने सादारन लोग हूंगे,
- 6:01–6:05जो मित्ख और आस्ता की बड़ूलत आज भी अंदेके रक्षक बनकर बैठे हूंगे.
- 6:05–6:09इसी विचार के साथ आज की चर्चा हम यही कचत्म करते है.
- 6:09–6:12अपना समे देने किले आपका बहुत भुए चुक्रिया
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सीथा मुद्दे पर आते हैं. स्वागत है इस खास विष्लेशन में, जहां हम मित्फला की एक बेहत दिल्चस्प लोग कता में गोता लगाने वाले हैं. इक अईसी कहानी, जहाँ एक बहुत ही सादारन्द से ग्रामेड जीवन का, सीड़ा सामना इश्वर ये शकतियों से होजाता है. जरा सुची ए, क्या अईजने में हुई एक चोटी सी गलती, किसी आम अँईन्सान को आमर देवता बना सकती है? यही सवाल हमारी आजकी इस कहानी का सब से बड़ा रहसे है. हम अजनाने में हुए एक पाप, एक दुखध मुध, और गलोकिक नियाए के एक अजे सफर पर निकलने वाले है, जो आपको सच में हेरान कर देगा. तो चलिए, कहानी के पहले पडाव पर चलते है, तीन दोस्त और उदरा गाँउका जीवन बात है कमला नदी के किनारे बसे उदरा नाम के एक बड़ेही जीवन्त गाँउकी यहां तीन पक्के डोस्त रहते के बरहम ठाकुर, गासी यादाव, और गरीबन दोभी इनका तो बस एकी रूटीन था में मिला नहीं की पूजगगया खाडे में कुष्टी लडने, एक दाम हसी मजाग और रोज मर्रा की मस्ती वाला, खुष्नुमा माहल. लेकिन फिर आता है कहानी का दुस्रा बाग, एक अनजानी भूल और एक पवित्र शीमा का पार होना. अब दिक्ये, परेशानी कहां से शुरू हुत्ती है, ये जो कुष्ती का अखाडा ताना, इसके बिल्कुल सता हूँआ एक पवित्र चबूत्रा था, जिस से लोग पीटी कहते थे, ये जगा देवी कमला माए को समर पिट थी, अद जाहर है, गाँवालों के ले बहुत श्रद्धा का केंद्र थी आब होता यह है के खुष्टी का कडा भ्यास चल रहा था एक दम जोश में, तबही गरीबन का पैर बिलकोल अनजाने में और बिना किसी गलत एरादे के, उस पवित्र पीटी से तक्रा जाता है. अप इन्सानी नजर से देखें तो ये महज एक चुक थी, लेकिन इश्वर ये द्रिष्टि कोंट से? ये एक बहुत बडाई अप्राद बन गया. यही से शुरू होता है हमारा तीस्रा हिस्था, देवी का क्रोद और इश्वर ये प्रतिषोद. अपने पवित्र स्थान का अईसा अप्मान देखक्क्र देवी कमलमाई ब्यंकर क्रोदित होडती है, उनका गुस्सा इतना देज्ता कि उनहोने इस अन्जानी भूल को माअप करने के बजाए, तुरनत एक खोफनाक सचा देने का फैस्ला कर लिया. और सजाभी आज़्ी वैसी नही, देवी कमला सीदे बवाग्वान एंद्र के दर्बार से एक भेहद, खुंकार और जादूई बागिन को बलागिन को बलागिन ताकि वो उस निर्दोश पहल्वान पर अपना कहर बरपासके. इक सदादारन इन्सान और एक इश्वर्य ये शक्तियो वली बागिन, मतलब ये मुकापला तो शुरू हुने से पहले ही पूरी तरहां से एक तर्फा था. वो जाना पहजाना सुरक्षिट सागार्डा पलक जबकते ही एक जानलेवा मैधान में बडल गया. गरीबन कुष्टी का उस्ताद जरूर था, लेकिन उस इश्वर या जानवर के सामने, उसकी इन्साली ताकते एक दम भेबस साभित हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अदिक दारा मे भेटा हुँआ गरीबन का शव इक दोभीः गाट पर पहुचता है। वहां एक दुस्रा दोभी अपने रोस के कपड़े तोने के काम में पूरी तरहे से मगन था सब कुछ एक दम समान ने चल रहा था अपने चोथे हिस्छे की तरव अप्मान, श्राप और एक आत्मा का जाग्रन. नदी की दारा मे भेहता हुँ अगरीवन का शव, एक दोभी आ गाट पर पहुचता है. वहाँ एक तुस्रा दोभी अपने रोज के कबड़े तुने काम में पूरी तरह से मगन था. सब कुछ एक्दम समान ले चल रहा था. तब ही उस दोभी की नजर शव पर परती है. बजाए एसके की वो कोई ईनसानियत दिखाए, उसे ये शव अपने काम में एक रुकाववध लगा. और भिना ये जाने की वो शरीर किसका है, उसने बस स्वार्ठ मे आखर, उसकी उन प्रार्ठनाव में अस्सीम दुक और बस एक आखरी उम्मीद बची थी. और जानते है, उन प्रार्ठनाव का असर हुए, एक बहुत बडाट चमत कार होता है. नियाए के लिए गरीबन की आत्मा वापिस लोडती है. और गाँउ के एक माद्ध्यम, जिसे हम भब्ख्ता कहते है, उसके शरीर में प्रवेश कर जाती है. अब आत्मा खुद बोल रही थे. उस भब्खता के जर ये आत्मा ने पूरे दोभी समुदाय को सीदे एक खोफनाक चेतावनी दे डाली. उसने कहा अगर सबने मिलकर उसका शव नहीं निकाला और सही से अंतिम संचार नहीं किया, तो दोभीो की बध्फी में रके सारे कपडे जल कर राग हुजाएंगे. ये कोई चोटी मोटी चेतावनी नहीं फी, एक सीदा श्राप था. और फिर आता है हमारा अंतिम पडाओ, प्राएश्चित और आमर्ता, एक रक्षक का जन्, इस खफनाक अल्टिमेटम को सूंकर पूरे समदाय के हो शूडगे, उने अपनी सामूहिग गल्ती का इहसास हो चुका था, बिना देर किय, सारे दोभी एक जुट होकर नदी में कु� अदोभी समवदाय की आजीविका, यानी उनकी बद्ध्धी हमेशा किलिए सुवक्षित होग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ग़ यह में दिखाती है कि कैसे अनजाने में हुए पाप, समुदाए की एक जुट्ता और प्राएश चित, ये सब मिलकर एक बहुत बडी सांस्च्रूतिक विरासत का रूप ले लेते हैं. इस पूरे विष्लेशन के बाद एक सवाल जहन में जरूर आता है. दून्या बर की आजी ही नजाने कितनीक शेत्रे कहानियो में और कितने सादारन लोग हूंगे, जो मित्ख और आस्ता की बड़ूलत आज भी अंदेके रक्षक बनकर बैठे हूंगे. इसी विचार के साथ आज की चर्चा हम यही कचत्म करते है. अपना समे देने किले आपका बहुत भुए चुक्रिया