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भट्ठीक_रक्षक_देवता_गरीबन_बाबाक_कथा.m4a

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Collection
Part 9 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 9
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.725331)
Duration
1:47
Source
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  1. 0:00–0:06इगरीबन बाबाक प्रसिद लोक कथा पर एक्ता तवरित अस्सतीक संख्षे पच्छी.
  2. 0:06–0:11गजेंद्र थाकुर दूरा संपादित इखथा, वास्तो में एक्ता सादारन दुबि कच्छी,
  3. 0:11–0:14जकर आजान मे भेल एक ता चोडजका गलती
  4. 0:14–0:17उक्रा म्रित्यो गात उतारी दिलकें
  5. 0:17–0:19मुदा अंतत हुकर आत्मान नयाय पाभी का
  6. 0:19–0:22समाजक पुजनी रक्षक देवता बनी गेला.
  7. 0:22–0:26तपहल, इकता शुरू हुई तची उदरा गाउसा
  8. 0:26–0:28जतें कुष्ती कभ्यास करेत काल
  9. 0:28–0:34गरीबन दोबिक पैर अजान में कमला मयाक पवित्र पीडी सचती जाए चे.
  10. 0:34–0:38अप सोचु कि क्या एकर सजा एतिक भ्यंकर हुबाक चाही?
  11. 0:38–0:42मुदा क्रोदी देवी आंद्रक दर्बार से एक्ता बागिन पठोल लेनी,
  12. 0:42–0:48जखर संगे लडाएत गरीबन मारलगल अ उकर लास कमला दार मे फेक दिलगल.
  13. 0:48–0:492 सर
  14. 0:49–0:55जखन दार मे दहेत लास के एक ता दोसर दोभी असुविधा भुजेग का अनादर पूर्वक दھकेल दिलगें
  15. 0:55–0:58तक्हन गरीबनक कन्याक विलाप सूनी,
  16. 0:58–1:02उकरात्मा एक्ता बगता, यानी माद्यम में प्रवेस केला.
  17. 1:02–1:05उसम्पुड धोभी समाच के शाप दिलकें,
  18. 1:05–1:08जजघ लास्क सम्मान पुवक दाह संसकार नहीं भेल,
  19. 1:08–1:10तसबक भथ्थी में कप्रा जरी जाएत.
  20. 1:10–1:18बुजलिय, इश्वाप वास्तव में कुनो बदला नहीं, बलकी समाज के म्रित्व्यक्ती प्रती सम्मानक एक ता क्डा पाट्पड़े बाक लेल च्यल.
  21. 1:18–1:24अन्त्मे, दरल सामल दोभी समाज तुर्थ लास खोज सम्मान पुर्वक दाह संचार केला.
  22. 1:24–1:30इगजवप कबद्लावा ची जटे न्याय बइटे लग बात पीडित वेक्ती स्वैम रक्षक बनी जाएत ची
  23. 1:30–1:35औही दिन सक गरीबन भाबा सदा लेल उही समवुदाएक बभध्ष्ख देवता बनी गिला
  24. 1:35–1:40अन्याय असमुहिक प्रैश्चित के इकता प्रमानित करे तची,
  25. 1:40–1:46जे उचित सम्मान भेट्लापर कोनो सादारन पीडिट से हो समपुन समाजक रक्षक बनी सके तची.

Plain text

इगरीबन बाबाक प्रसिद लोक कथा पर एक्ता तवरित अस्सतीक संख्षे पच्छी. गजेंद्र थाकुर दूरा संपादित इखथा, वास्तो में एक्ता सादारन दुबि कच्छी, जकर आजान मे भेल एक ता चोडजका गलती उक्रा म्रित्यो गात उतारी दिलकें मुदा अंतत हुकर आत्मान नयाय पाभी का समाजक पुजनी रक्षक देवता बनी गेला. तपहल, इकता शुरू हुई तची उदरा गाउसा जतें कुष्ती कभ्यास करेत काल गरीबन दोबिक पैर अजान में कमला मयाक पवित्र पीडी सचती जाए चे. अप सोचु कि क्या एकर सजा एतिक भ्यंकर हुबाक चाही? मुदा क्रोदी देवी आंद्रक दर्बार से एक्ता बागिन पठोल लेनी, जखर संगे लडाएत गरीबन मारलगल अ उकर लास कमला दार मे फेक दिलगल. 2 सर जखन दार मे दहेत लास के एक ता दोसर दोभी असुविधा भुजेग का अनादर पूर्वक दھकेल दिलगें तक्हन गरीबनक कन्याक विलाप सूनी, उकरात्मा एक्ता बगता, यानी माद्यम में प्रवेस केला. उसम्पुड धोभी समाच के शाप दिलकें, जजघ लास्क सम्मान पुवक दाह संसकार नहीं भेल, तसबक भथ्थी में कप्रा जरी जाएत. बुजलिय, इश्वाप वास्तव में कुनो बदला नहीं, बलकी समाज के म्रित्व्यक्ती प्रती सम्मानक एक ता क्डा पाट्पड़े बाक लेल च्यल. अन्त्मे, दरल सामल दोभी समाज तुर्थ लास खोज सम्मान पुर्वक दाह संचार केला. इगजवप कबद्लावा ची जटे न्याय बइटे लग बात पीडित वेक्ती स्वैम रक्षक बनी जाएत ची औही दिन सक गरीबन भाबा सदा लेल उही समवुदाएक बभध्ष्ख देवता बनी गिला अन्याय असमुहिक प्रैश्चित के इकता प्रमानित करे तची, जे उचित सम्मान भेट्लापर कोनो सादारन पीडिट से हो समपुन समाजक रक्षक बनी सके तची.

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