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बत्तू__चतुर_छागरक_अद्भुत_साहस.mp4

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Part 10 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 10
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  1. 0:00–0:03तो चलिये सीथे आज्के विषेकी गेराई में उतरते हैं.
  2. 0:03–0:08मित्फिला की लोग कतावो में, हमेशा से ही कमाल के नायको का जिक्र रहा है.
  3. 0:08–0:11लिकिन आज हम जिस नायक की बात करने वाले हैं न,
  4. 0:11–0:15उगो गो गो राजा महराजा या तल्वार चलाने वाला यूद्धा बिल्कूल नहीं है.
  5. 0:15–0:20आज के चर्चा में हम गजेंद्र ताकुर जीदवारा रची गए एक भेहत,
  6. 0:20–0:23दिल्चस्प और शांदार सच्चित्र गातापर बात करेंगे.
  7. 0:23–0:25इस कहानी का मुख्यपात्र है, बत्तू.
  8. 0:25–0:27अब बत्तू कोई आम जान्वर नहीं,
  9. 0:27–0:29बलकी एक बक्री का बच्चा है,
  10. 0:29–0:31यानी एक चागर,
  11. 0:31–0:35या एक चोटे सी चागर के महाकाविय जैसी यात्रा की कहानी है.
  12. 0:35–0:38पारमपर एक कलाक्रितियों के जर्ये पिरोई गय ये लोग कता
  13. 0:38–0:42हमें प्रक्रिति, गजब के साहस, और कमाल की बुद्दी के
  14. 0:42–0:46एक अईसे रूमाचक सफर पर लेजाती है, जो सावित करती है
  15. 0:46–0:49के इतिहास रचने के लिए आपका रूप रग नहीं
  16. 0:49–0:51बलकी होस्ला माइने रकता है.
  17. 0:51–0:54अब आगे बडने से फहले ज़रा एक बाथ सुची एग.
  18. 0:54–0:57जब जिन्दिगी और मुध का सवाल सामने कह़ा हो,
  19. 0:57–1:01तो बचने के लिए सबसे बड़ा हत्यार क्या होता है.
  20. 1:01–1:04क्या वो एक विशाल, ताकतवर शरीर है?
  21. 1:04–1:08या पिर एक बेहत देज, चत्र और आत्मव विश्वासी दिमाग?
  22. 1:08–1:14सच कहु तो ये सवाल ही हमारे नायक बत्तू की पूरी कहानी की नीव है.
  23. 1:14–1:18श्रुवाथ सिलेकर उसके सबसे बड़े और खतरनाक संगर्ष्टक,
  24. 1:18–1:20ये सवान एक गुँच की तर हैं हमारे साथ साथ चलेगा.
  25. 1:21–1:23तो आई ये गधनाउ के सिल्सले को समचते हैं
  26. 1:23–1:27और देकते हैं, के कैसे एक बिलकल चोटासा,
  27. 1:27–1:29असा हाई जीव, अपनी किस्मत की लकीरों को
  28. 1:29–1:32खुद अपने दंपर बडल कर रग देता है.
  29. 1:32–1:36कहानी की शुवात होती है एक बड़े ही शान्थ और सुकुन भरे ग्रामीन जीवन से.
  30. 1:36–1:43वहां एक मा, बकरी और उसका सिव चार महीने का कोमल सा नन्ना बच्चा बड़े प्यार से सात रहे हैं.
  31. 1:43–1:47देखने में सब कुछ एकदम समानने और खुशाल लकता है.
  32. 1:47–1:52लेकिन कहते हैंगा कि तूफान से पहले की शान्ती अकसर दरावनी होती है.
  33. 1:52–1:57इस शान्ती पर भी जल्द ही एक बहुत गेरा साया पडने वाला है.
  34. 1:57–2:00दरसल दूर्गा पूजा का त्योहार करीब आगया है.
  35. 2:00–2:04और दूर्भागे से इस पूजा में बलिदान की एक पुरानी परमपरा भी जुडी है.
  36. 2:04–2:34वो नन्हा बच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
  37. 2:34–2:40अगरीदार अपने साथ पैसे लाना बूल गया है, तो वो तैकरता है, कि वो अगले दिन पैसे लेकराएगा.
  38. 2:40–2:46सच मानिये ये चोटी सी देरी उस माबकरी किले किसी बड़े चमतकार से कम नहीं ती.
  39. 2:46–2:49मौत अब कल तक के लिए तल तो गए थी,
  40. 2:49–2:52लेकिन माग का दिल बूरी तरा खौफ से काप रहा था,
  41. 2:52–2:54कुकि मौत अबईभी चोकट पर ही खडी खुडी खुडी फीज़।
  42. 2:54–2:58अब समय मुछ्ठी की रेथ की रहा था,
  43. 2:58–3:01राद का अंदेरा गिराया तारों की चावो में,
  44. 3:01–3:03माबक्री तुरन्त अपने बच्चे को पास बलाती है,
  45. 3:03–3:08वो पुरी तरह से हताश है, लेकिन उसकी चेतावनी बिलकुल स्पष्ट है,
  46. 3:08–3:12वो कहती है कि रात औरात यहां से बाख जाओ, सीधे जंगल की तरव,
  47. 3:12–3:15उसे पता है कि अगर सुभे की पहली किरन फूट गगई,
  48. 3:15–3:17तो बलिदान होना एक दम पक्का है.
  49. 3:17–3:20एक माग लिए अपने इतने चोते से बच्चे को
  50. 3:20–3:23गने जंगल के अन्जान खत्रो में दھकेलना
  51. 3:23–3:24कितना मुष्किल रहा होगा है ना.
  52. 3:24–3:28लेकिन उसे मालुम ता के विदाई का ये कथोर फैसला ही
  53. 3:28–3:30उसके बच्चे की जान बचाचता है.
  54. 3:30–3:32मागी बातो के गंभीरता को समचते हुए
  55. 3:32–3:36वो नन्ना चागर उसी राज जंगल की ओर भाग नेकलता है.
  56. 3:36–3:40जरा उस द्रिष्ष्खे कि कलपिना की जे शहरन पैदा हो जाती है.
  57. 3:40–3:42एक चोता सा मासुम जीव,
  58. 3:42–3:46अपना गर, अपनी मा, अपनी पूरी दुन्या को पीचे चोडगर
  59. 3:46–3:51एक पूरी तरह से अग्यात और भ्यानक जंगल के अंदेरे में दोड़ रहा है.
  60. 3:51–3:56जंगल का वो अज्जान संसार उसके ले किसी बूरे सपने जैसा हूँ सकता था.
  61. 3:56–3:59लेकिं जीवन और म्रित्यों के बीच का चुनाग बहुत आसान था.
  62. 3:59–4:04बलिदान की निष्चित मोथ से तो जंगल की वो अनिष्चित्ता पही जीआदा बहतर थी.
  63. 4:04–4:09और सच कहुए तो ये उस छोटे से जीव का पहला और सबसे बडा साहसे कदम था.
  64. 4:09–4:14और ब ज़र एस कमाल के बडलाव को देखे, समय और प्रक्रिती के आजादी क्या कुछ नहीं कर सकती.
  65. 4:15–4:22एक समय जो नन्ना असहाएसा बच्चा ता, तो तीन साल के कठेन, लेकिन आजाजाद जंगली जीवन ने उसे पुरी तरा बदल कर रग दिया है.
  66. 4:22–4:24वो अप कोई कमजोर मेंना नहीं रहा,
  67. 4:24–4:28बलकी एक विशाल, शक्तिशाली और एक दम राज्सी जीव बन गया.
  68. 4:28–4:58उसकी एक शान्दार बडीसी दाडी आगागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागाग
  69. 4:58–5:01जंगल के सबसे कुंखार शिकारी
  70. 5:01–5:03यानी साख्षाद बाग का
  71. 5:03–5:05ये कहानी का वो मोड है
  72. 5:05–5:07जाहा बतू अनजाने मेही
  73. 5:07–5:09मुत के जबरे में कदम रक चुका है
  74. 5:09–5:12एक आसी भयावाह मुधभेड अब उसका एंटदार कर रही है
  75. 5:12–5:15जो इतिहास के पनो में दरज होने वाली है
  76. 5:15–5:19अग्र कार वो रोंग्टे कडे कर देने वाल आही जाता है
  77. 5:19–5:21बत्तू के तीक सामने जंगल कार आजा
  78. 5:22–5:24वो खुंकार बाग आख्ड़ा होता है
  79. 5:24–5:29जाहिर सी बात है अपने सामने साख्षात मोथ को देकगर बत्तू अंदर थक हिल जाता है
  80. 5:29–5:35लेकिन इस पूरी गटना में जो सबसे मजदार और हेरान करने बात है,
  81. 5:35–5:39वो ये है के बाग भी अनदर से बूरी तरा ड़ा हूँए है.
  82. 5:39–5:43जी हा उसने अपनी पूरी जिन्दगी में अजीबो गरीभ जीव कबी ने देकाता.
  83. 5:43–5:48इतनी लंबी डादी इतने बारी भरकम सींग और इतना विशाल शरीर,
  84. 5:48–5:52बत्तू के इस अजीप से रूप को देकर वो खुंकार शिकारी
  85. 5:52–5:56खॉद मनी मन खॉव कारा है. अब बाक धेरा जंगल कर अजा
  86. 5:56–6:00वो अपना दर दिखा तो सकता नहीं. तो अपने इसी
  87. 6:00–6:30अद्याँ बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बा�
  88. 6:30–6:32सम्ने वाले को दराने की पूरी कोशिष कर रहा है.
  89. 6:32–6:36और बस यही पर बत्तू की चतूराई का सबसे दासु प्रदशन होता है.
  90. 6:36–6:39अपनी गब्राहत को पूरी तरह से पीते हुए,
  91. 6:39–6:42बत्तू भी उसी काव्यात्मक अंदास में एक दम नाटकिय तरीके से
  92. 6:42–6:46अज़वहीया दस्बाग नक्छी होए, तवरीया परान थक्डोपास.
  93. 6:46–6:49मतलप, बत्तु एलान करता है, कि वो शेरो के साथ खिलता है.
  94. 6:49–6:52और जिस दिन उसे काने के लिए कम से कम दस्बाग नहीं मिलतेना,
  95. 6:52–6:54उस दिन वो उप्वास रकता है.
  96. 6:54–6:58अदिन उसे खाने के लिए कम से कम दस बाग नहीं लिए ना उस दिन उप्वास रकता है.
  97. 6:58–7:01वाए क्या कमाल की हाजर जबाबी थी.
  98. 7:01–7:04उसने कुद को एक आसा अजया राक्षिस बना कर पेशकिया,
  99. 7:04–7:06जो बागों का ही शिकार करता है.
  100. 7:06–7:12ये सुन्ते ही तो जंगल के राजा की सिटी पिटी गूम होगगग
  101. 7:12–7:17दस बागों को खाने की बाज सुनकर बाग इतना खौफ जदा होगगया
  102. 7:17–7:47कि वो बिना पीचे मुडे अपनी जान बचाखर वहाँ से बागखखड़ा हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  103. 7:47–7:52तो बद्तू की इस पूरी महाकावय जैसी यात्रा से हमें क्या सीखने को मिलता है?
  104. 7:52–7:54इसकी सीख बहुत ही गेरी है.
  105. 7:54–7:58सबसे बड़ी बाद जो हमें याद रखनी चाहीए वो ये है,
  106. 7:58–8:02के बद्तू ने उस बाग से कभी कोई शारिरिक लडाए लडी है नहीं.
  107. 8:02–8:07उसकी जीत उसके शरीर की ताकत में नहीं, बलके उसकी बुद्धी में ती,
  108. 8:07–8:10प्रेसेंष अफ माँईंट, सही समयपर, सही शबदो का चुनाउ,
  109. 8:10–8:14और उसका वो कभी न तुटने वाला आत्मविष्वास.
  110. 8:14–8:16यही उसके सबसे बड़े हत्यार साभित हूए.
  111. 8:16–8:22ये कहने हमे बहुत सबष्ष्ट्रूप से बताती है कि शारीरेग बल से कही ज़ादा एहमियत आपकी बुद्धिमत्ता
  112. 8:22–8:25और सही समयपर दिखाय ज़ाई होष्ले की होती है
  113. 8:25–8:30अब अन्त में एक बड़ा और सोचने वाल हम सब के सआमने आता है
  114. 8:30–8:36अम बत्तू की इस चतूराई और उसके इस गजब के आत्मविश्वास को अपनी जिन्दिगी में कैसे उतार सकते हैं.
  115. 8:36–8:39हमारी जिन्दिगी में भी रोजाना कैई बाग आते हैं,
  116. 8:39–8:42यान वो बडी भडी चुनातिया और मुसीबते हैं जो हमें दराती हैं.
  117. 8:42–8:49तुक खाँ मबि बद्तू की तरां अपनी बुद्दिः और आत्मविश्वास का इस्तमाल कर के उन मुशकिलों को पीचे हटने पर मजबूर कर सकते हैं?
  118. 8:49–8:51ये निष्चित तोर पर सोचने वाली बात है.
  119. 8:51–8:55ये लोग कता हमें हमें पहमेशा यही प्रेरिद करती है,
  120. 8:55–9:00के अगर आपका दिमाग शान्त है, और होस्ला बुलन्द, तो कोई भी संकत बडा नहीं होता.
  121. 9:00–9:04ख़र, इसी विचार के साथ, आजकी इस चर्चा को हम यही विराम लेते है.
  122. 9:04–9:08इस दिल्चस्प सफर में साथ बने रहने किलिए, पहथ भह दहने वाद.

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तो चलिये सीथे आज्के विषेकी गेराई में उतरते हैं. मित्फिला की लोग कतावो में, हमेशा से ही कमाल के नायको का जिक्र रहा है. लिकिन आज हम जिस नायक की बात करने वाले हैं न, उगो गो गो राजा महराजा या तल्वार चलाने वाला यूद्धा बिल्कूल नहीं है. आज के चर्चा में हम गजेंद्र ताकुर जीदवारा रची गए एक भेहत, दिल्चस्प और शांदार सच्चित्र गातापर बात करेंगे. इस कहानी का मुख्यपात्र है, बत्तू. अब बत्तू कोई आम जान्वर नहीं, बलकी एक बक्री का बच्चा है, यानी एक चागर, या एक चोटे सी चागर के महाकाविय जैसी यात्रा की कहानी है. पारमपर एक कलाक्रितियों के जर्ये पिरोई गय ये लोग कता हमें प्रक्रिति, गजब के साहस, और कमाल की बुद्दी के एक अईसे रूमाचक सफर पर लेजाती है, जो सावित करती है के इतिहास रचने के लिए आपका रूप रग नहीं बलकी होस्ला माइने रकता है. अब आगे बडने से फहले ज़रा एक बाथ सुची एग. जब जिन्दिगी और मुध का सवाल सामने कह़ा हो, तो बचने के लिए सबसे बड़ा हत्यार क्या होता है. क्या वो एक विशाल, ताकतवर शरीर है? या पिर एक बेहत देज, चत्र और आत्मव विश्वासी दिमाग? सच कहु तो ये सवाल ही हमारे नायक बत्तू की पूरी कहानी की नीव है. श्रुवाथ सिलेकर उसके सबसे बड़े और खतरनाक संगर्ष्टक, ये सवान एक गुँच की तर हैं हमारे साथ साथ चलेगा. तो आई ये गधनाउ के सिल्सले को समचते हैं और देकते हैं, के कैसे एक बिलकल चोटासा, असा हाई जीव, अपनी किस्मत की लकीरों को खुद अपने दंपर बडल कर रग देता है. कहानी की शुवात होती है एक बड़े ही शान्थ और सुकुन भरे ग्रामीन जीवन से. वहां एक मा, बकरी और उसका सिव चार महीने का कोमल सा नन्ना बच्चा बड़े प्यार से सात रहे हैं. देखने में सब कुछ एकदम समानने और खुशाल लकता है. लेकिन कहते हैंगा कि तूफान से पहले की शान्ती अकसर दरावनी होती है. इस शान्ती पर भी जल्द ही एक बहुत गेरा साया पडने वाला है. दरसल दूर्गा पूजा का त्योहार करीब आगया है. और दूर्भागे से इस पूजा में बलिदान की एक पुरानी परमपरा भी जुडी है. वो नन्हा बच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च अगरीदार अपने साथ पैसे लाना बूल गया है, तो वो तैकरता है, कि वो अगले दिन पैसे लेकराएगा. सच मानिये ये चोटी सी देरी उस माबकरी किले किसी बड़े चमतकार से कम नहीं ती. मौत अब कल तक के लिए तल तो गए थी, लेकिन माग का दिल बूरी तरा खौफ से काप रहा था, कुकि मौत अबईभी चोकट पर ही खडी खुडी खुडी फीज़। अब समय मुछ्ठी की रेथ की रहा था, राद का अंदेरा गिराया तारों की चावो में, माबक्री तुरन्त अपने बच्चे को पास बलाती है, वो पुरी तरह से हताश है, लेकिन उसकी चेतावनी बिलकुल स्पष्ट है, वो कहती है कि रात औरात यहां से बाख जाओ, सीधे जंगल की तरव, उसे पता है कि अगर सुभे की पहली किरन फूट गगई, तो बलिदान होना एक दम पक्का है. एक माग लिए अपने इतने चोते से बच्चे को गने जंगल के अन्जान खत्रो में दھकेलना कितना मुष्किल रहा होगा है ना. लेकिन उसे मालुम ता के विदाई का ये कथोर फैसला ही उसके बच्चे की जान बचाचता है. मागी बातो के गंभीरता को समचते हुए वो नन्ना चागर उसी राज जंगल की ओर भाग नेकलता है. जरा उस द्रिष्ष्खे कि कलपिना की जे शहरन पैदा हो जाती है. एक चोता सा मासुम जीव, अपना गर, अपनी मा, अपनी पूरी दुन्या को पीचे चोडगर एक पूरी तरह से अग्यात और भ्यानक जंगल के अंदेरे में दोड़ रहा है. जंगल का वो अज्जान संसार उसके ले किसी बूरे सपने जैसा हूँ सकता था. लेकिं जीवन और म्रित्यों के बीच का चुनाग बहुत आसान था. बलिदान की निष्चित मोथ से तो जंगल की वो अनिष्चित्ता पही जीआदा बहतर थी. और सच कहुए तो ये उस छोटे से जीव का पहला और सबसे बडा साहसे कदम था. और ब ज़र एस कमाल के बडलाव को देखे, समय और प्रक्रिती के आजादी क्या कुछ नहीं कर सकती. एक समय जो नन्ना असहाएसा बच्चा ता, तो तीन साल के कठेन, लेकिन आजाजाद जंगली जीवन ने उसे पुरी तरा बदल कर रग दिया है. वो अप कोई कमजोर मेंना नहीं रहा, बलकी एक विशाल, शक्तिशाली और एक दम राज्सी जीव बन गया. उसकी एक शान्दार बडीसी दाडी आगागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागाग जंगल के सबसे कुंखार शिकारी यानी साख्षाद बाग का ये कहानी का वो मोड है जाहा बतू अनजाने मेही मुत के जबरे में कदम रक चुका है एक आसी भयावाह मुधभेड अब उसका एंटदार कर रही है जो इतिहास के पनो में दरज होने वाली है अग्र कार वो रोंग्टे कडे कर देने वाल आही जाता है बत्तू के तीक सामने जंगल कार आजा वो खुंकार बाग आख्ड़ा होता है जाहिर सी बात है अपने सामने साख्षात मोथ को देकगर बत्तू अंदर थक हिल जाता है लेकिन इस पूरी गटना में जो सबसे मजदार और हेरान करने बात है, वो ये है के बाग भी अनदर से बूरी तरा ड़ा हूँए है. जी हा उसने अपनी पूरी जिन्दगी में अजीबो गरीभ जीव कबी ने देकाता. इतनी लंबी डादी इतने बारी भरकम सींग और इतना विशाल शरीर, बत्तू के इस अजीप से रूप को देकर वो खुंकार शिकारी खॉद मनी मन खॉव कारा है. अब बाक धेरा जंगल कर अजा वो अपना दर दिखा तो सकता नहीं. तो अपने इसी अद्याँ बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बा� सम्ने वाले को दराने की पूरी कोशिष कर रहा है. और बस यही पर बत्तू की चतूराई का सबसे दासु प्रदशन होता है. अपनी गब्राहत को पूरी तरह से पीते हुए, बत्तू भी उसी काव्यात्मक अंदास में एक दम नाटकिय तरीके से अज़वहीया दस्बाग नक्छी होए, तवरीया परान थक्डोपास. मतलप, बत्तु एलान करता है, कि वो शेरो के साथ खिलता है. और जिस दिन उसे काने के लिए कम से कम दस्बाग नहीं मिलतेना, उस दिन वो उप्वास रकता है. अदिन उसे खाने के लिए कम से कम दस बाग नहीं लिए ना उस दिन उप्वास रकता है. वाए क्या कमाल की हाजर जबाबी थी. उसने कुद को एक आसा अजया राक्षिस बना कर पेशकिया, जो बागों का ही शिकार करता है. ये सुन्ते ही तो जंगल के राजा की सिटी पिटी गूम होगगग दस बागों को खाने की बाज सुनकर बाग इतना खौफ जदा होगगया कि वो बिना पीचे मुडे अपनी जान बचाखर वहाँ से बागखखड़ा हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ तो बद्तू की इस पूरी महाकावय जैसी यात्रा से हमें क्या सीखने को मिलता है? इसकी सीख बहुत ही गेरी है. सबसे बड़ी बाद जो हमें याद रखनी चाहीए वो ये है, के बद्तू ने उस बाग से कभी कोई शारिरिक लडाए लडी है नहीं. उसकी जीत उसके शरीर की ताकत में नहीं, बलके उसकी बुद्धी में ती, प्रेसेंष अफ माँईंट, सही समयपर, सही शबदो का चुनाउ, और उसका वो कभी न तुटने वाला आत्मविष्वास. यही उसके सबसे बड़े हत्यार साभित हूए. ये कहने हमे बहुत सबष्ष्ट्रूप से बताती है कि शारीरेग बल से कही ज़ादा एहमियत आपकी बुद्धिमत्ता और सही समयपर दिखाय ज़ाई होष्ले की होती है अब अन्त में एक बड़ा और सोचने वाल हम सब के सआमने आता है अम बत्तू की इस चतूराई और उसके इस गजब के आत्मविश्वास को अपनी जिन्दिगी में कैसे उतार सकते हैं. हमारी जिन्दिगी में भी रोजाना कैई बाग आते हैं, यान वो बडी भडी चुनातिया और मुसीबते हैं जो हमें दराती हैं. तुक खाँ मबि बद्तू की तरां अपनी बुद्दिः और आत्मविश्वास का इस्तमाल कर के उन मुशकिलों को पीचे हटने पर मजबूर कर सकते हैं? ये निष्चित तोर पर सोचने वाली बात है. ये लोग कता हमें हमें पहमेशा यही प्रेरिद करती है, के अगर आपका दिमाग शान्त है, और होस्ला बुलन्द, तो कोई भी संकत बडा नहीं होता. ख़र, इसी विचार के साथ, आजकी इस चर्चा को हम यही विराम लेते है. इस दिल्चस्प सफर में साथ बने रहने किलिए, पहथ भह दहने वाद.

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