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बत्तू_की_कहानी_और_किरदारों_की_गहराई.m4a

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Part 10 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 10
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  1. 0:00–0:12आज हम बतू की समीक्षा कर रहे है, जो एक बली से बचकर, जंगल के शिकारियों को मात देने वाले साहसी चागर की लोक कता है.
  2. 0:12–0:17तो बिना किसी देरी के सीथा इस समगरी की रचनात्मक समीक्षा पर आते है.
  3. 0:17–0:21बलकुल! तो पहली बात, कहानी के शुर्वाती हिस्टे में
  4. 0:21–0:23माँ और बच्चे के बिचटने का द्रष्छ,
  5. 0:23–0:26बहावनात्मक रूप से बहुत जल्बाजी में गुजर जाता है.
  6. 0:26–0:28आप, मुझे भी एसा ही लगा.
  7. 0:28–0:58बाथक बस उसे पहल लिए देखा पाथक लगा पाथक लगा बदादा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा
  8. 0:58–1:00भी बद़ा था है, महेंसुस नहीं करता.
  9. 1:00–1:04बिलकुल, अग्याज जंगल कभवे वे और अपना सुवक्षित गर चुटने की पीडा,
  10. 1:04–1:06तो अगर भागने के इस द्रिश्छे को दीमा कर देंगे
  11. 1:06–1:08तो वो जान बचाखर भागने वाली हदबडी
  12. 1:08–1:38अप भी बज़ाँ बज़ाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ ब
  13. 1:38–1:43आपातकाल में तो लोग बस बागते है, रूककर हर चीस का विषलेशन नहीं करते.
  14. 1:43–1:46देखे, यह एक बहुत ही जायस तरक है.
  15. 1:46–1:50और अकसर लिखखो को यही लकता है, कि तेस गती वाली गतनाो को,
  16. 1:50–1:54तेस वाख्यों और कम विवरन के साथ लिखना चाहीए.
  17. 1:54–1:56ताकि वो आख्छन फील हो सके
  18. 1:56–2:00लेकि मेरा सुजाव यह के इस महत्वपुड प्रस्थान की गती को दीमा करें
  19. 2:00–2:04ताकि पाटख इस श़न के बहावनात्मक वजन को वजन और तनाव को
  20. 2:04–2:06पूरी तरह से आत्मसात कर सकें
  21. 2:06–2:07आच्छा
  22. 2:07–2:08पर वो कैसे
  23. 2:08–2:15आपको ये समजना होगा कि जब आप चरम भई में होते हैं, तो मनोविग्यान के अनुसार समघ दीमा हो जाता है.
  24. 2:15–2:22उज़ेसे जब कोई दुरगखतना होने वाली होती है, तो वे कुछ सेकन भी बहुत लंबे महसुस होते हैं.
  25. 2:22–2:25अग्टाईटी का दिमाग अटी सक्रिये हो जाता है
  26. 2:25–2:28इसलिये साहित्ते में से दरशाने के लिए हमें
  27. 2:28–2:30पन्नोपर समें को तोडा रोकना परता है
  28. 2:30–2:33तो हमें से काहानी में कैसे लागु कर सकते है
  29. 2:33–2:36इसके लिया आप कुछ बहुत ही थोज बडलाव कर सकते है
  30. 2:36–2:38अगु कर सकते है?
  31. 2:38–2:41इसके लिया आप कुछ बहुत ही थोज बडलाव कर सकते है
  32. 2:41–2:44पहला तरी का यह है, की राथ के अंदेरे
  33. 2:44–2:47और जंगल से आने वाली दरावनी आवाजो का
  34. 2:47–2:50समवेदी, मधलब सेंसरी विवरन जोडे
  35. 2:50–2:53समवेदी विवरन से आप का मतलब है की हम
  36. 2:53–2:56अगर तो बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद
  37. 2:56–2:59बलकी ये बताएं कि वो अंदेरा कैसा महसुस हो रहा था
  38. 2:59–3:02तीक यही, अंदेरा सर्फ रोशनी की कमी नहीं है
  39. 3:02–3:07ये एक यह सा कैनवास है, जहां हर चोटी आवाज एक हत्रा बन जाती है
  40. 3:07–3:11आप जैसे कोई पत्ता भी खड़के तो लक्ता कोई आगा गया
  41. 3:11–3:17बलकुल, हवा की सर सरा हट, सुके पत्तों पर किसी चोटे जीव के चलने की खड़क्डा हट
  42. 3:17–3:21या दूर से आती किसी अनजान जानवर की खोफना कावाज
  43. 3:21–3:26जब बत्तु जंगल कि और कदम बड़ाता है, तो उसे ये सब मैजुस हूना चाहिए.
  44. 3:26–3:31इसे इस यक चाकर का दर पाटख के भीतर भी एक सेहरन पहडा करेगा है ना?
  45. 3:31–3:34आ, ये पाटख को कहानी के अंदर खिछ लेता है.
  46. 3:34–3:37ये मुझे सिनेमा कि उस तकनी की आद दिलाता है,
  47. 3:51–4:21अगर बाग लग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बा�
  48. 4:21–4:26बादुर बन्ना बाव से कुछ आज़े कैसकती है कि शिकारी तुमहरे दर को सुंग सकते हैं,
  49. 4:26–4:31जब दर लगे तु अखने बडी करना और अबनी आवास को बारी कर लेना.
  50. 4:31–4:35औव, मतलब एक बहुत ही स्पस्टिफिक सलाह.
  51. 4:35–4:38आँ, इस तरह की कोई विषिष्ट सलाह है,
  52. 4:38–4:43अग, इस तरह की कोई विषिष्ट सलाह है, ये केवल एक बहावोक विधाई नहीं रहागी,
  53. 4:43–4:47बलकी आगे आने बाली गधनावो की एक तारकिक नीव बन जाएगी.
  54. 4:47–4:51यह बहुत इश्णार विचार है, किंकी जब वाख से मिलेगा,
  55. 4:51–4:57उपने बाट्खख को याद आगा की यह वह तकनीक है, जो उसकी माने उसे सिखाई ती.
  56. 4:57–5:00वह स्वे एक जादोई रूब से निदर प्रानी नहीं बन गया है.
  57. 5:00–5:03वह अपनी माग की बात का पालन कर रहा है.
  58. 5:03–5:06बलकोल. और तीस्रा थोस उदाहरन यहा है,
  59. 5:06–5:13यहां है कि चागर के मुडकर एक आखरी बार अपनी माँ और स्वक्ष्टगगर को देखने का एक चोटा सा दिश्ष जोडे.
  60. 5:14–5:19आप वो एक पल जाहा वह जानता है कि शाएद वह यह सब फिर कभी नहीं देख बाएगा.
  61. 5:19–5:23इसे वह तहराव पाट़क के गले में एक गांट बान्द देगा
  62. 5:23–5:26यह तहराव सच्छ में बहुत जरूरी है
  63. 5:26–5:31क्योंकी यह वह जगा है चाहां मुसके अंतरिक दर को पूरी तरह से समझब आते हैं
  64. 5:31–5:37और यह दिल्चस्प है कैसे इस अंतरिक दर को गहराई से स्थापित करना
  65. 5:49–5:53अगर बाग बाग बाग बाग बीच के समवात को देकते हैं
  66. 5:53–6:02अगर बाग बद्तु के बीच के समवात को देखते हैं, तो वे अचानक एक तुस्रे से कावियात्मक बाशा में बात करने लकते हैं. ये मुझे बहुत अजीब लगा.
  67. 6:02–6:08जैसे किसी फिल्म में अचानक कोई किर्दार बिना किसी पूर्व तयारी के गाना गाने लगे.
  68. 6:08–6:12अचानक कोई किर्दार बिना किसी पूर्व तध्यारी के गाना गाने लगे
  69. 6:12–6:14मैं समच सकता हों
  70. 6:14–6:18बाग और बत्तू के भीच का काव्यात्मक समवाद बहद अकर्षक है
  71. 6:18–6:22लिकिन गद्दिश्यले के भीच इसका आगमन थोडा अचानक प्रतीथ होता है
  72. 6:22–6:26आप आप बग ये अचानक से एक ज़टके जैसा लकता है.
  73. 6:26–6:28हम एक सादारन कहानी पड़रे हैं.
  74. 6:28–6:33और फिर आचानक बाग एक लंभी चव़िटा में सवाल पुछता है.
  75. 6:33–6:36और बद्तु भी उसी लेमे जवाब देता है.
  76. 6:36–6:39यही एस हिसे की सब से बडी कमजोरी है.
  77. 6:39–6:42पूरी कहानी एक सीदे कतात्मक गद्यमे चल रही है
  78. 6:42–6:46और अचानक बाग का कावियात्मक लहेजे में पुचना
  79. 6:46–6:48और बत्तुका उसी शेली में जवाब देना
  80. 6:48–6:50तून में एक अझा बडलाव है
  81. 6:50–6:53जो पाटख के दिहान को कहानी से बहार निकाल सकता है
  82. 6:53–6:56मतलब पात्ख कहानी से तुट जाता है
  83. 6:56–7:01आदी नानी जब कहानी सूनाती है, तो वे बीज भीज मे इन लईात्मक समवादों का उप्योग करती है,
  84. 7:01–7:04ता कि बच्छे उस लई को आनन्द ले सकें।
  85. 7:04–7:24लोग कताए की मुल प्रक्रिती ही आसी होती है है तुवे बीज बीज मे इन लैयात्मक समवादों का उप्योग करती है, ताके बच्छे उस लैए को अनन्द ले सकें।
  86. 7:24–7:34तो अगर ये लोग कता की आस्ली पहचान है, तो क्या हम इसे सर्फ इसली बडल देना जाहीए, क्यो कि हम इसे एक किताप के रुप में पड़ रहे हैं?
  87. 7:34–7:41दिक्ये यह एक बहुत्ती विचारनी यह बिंदू है, अप सही कै रही हैं, कि यह श्रूती परमपरा का हिस्सा है,
  88. 7:41–7:45लेकिन हमे ये समजना होगा कि माद्यमका बहुत बडा असर होता है
  89. 7:45–7:46माद्यमका?
  90. 7:46–7:48मतलब ओरल और रिटन का फरक?
  91. 7:49–7:49बलकुल!
  92. 7:50–7:53जब कुई कहानी सूनाता है, तो उसके चेरे के बहाव,
  93. 7:53–7:55उसके हातों के इशारे,
  94. 7:55–7:56और सबसे महत्लपून,
  95. 7:56–8:01उसकी आवाज का उतार च़ाव उस बदलाव को बहुत स्वबाविक बना देता है
  96. 8:01–8:03आआ, सुनाने वाला कुछ गाखर सुनाता है
  97. 8:03–8:09लेकिन एक किताप के पन्नो पर हमारे पास वो आवाज या वे इशारे नहीं होते
  98. 8:09–8:14पन्नो पर वह जिम्म्डारी सिर्फ और सिर्फ शब्डों की होती है
  99. 8:14–8:18यानी चो काम कहानी सुनाने वाले की अवाज करती है
  100. 8:18–8:22वो काम अब हमे शब्डों के जर्ये प्रिष्ट भूमी बना कर रहा होगा
  101. 8:22–8:52अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई �
  102. 8:52–8:55इसके कुछ बहुती प्रभाबी तरीके हो सकते हैं
  103. 8:55–8:59पहला तरीका ये है कि समवाथ से टीक पहले
  104. 8:59–9:03जंगल के प्राछीन गुँजते हुए वातवरन का वरनन करें
  105. 9:03–9:04एक महाल बनान
  106. 9:04–9:34आप अगा बादख अवचेतन रूप से उस जादूई काव्यात्मक दून्या में प्रवेश करने के लिए तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं �
  107. 9:34–9:38बत्तु की एक सोची समजी मनोवैज्यनिक चाल बनादें
  108. 9:38–9:39एक मनोवैज्यनिक चाल?
  109. 9:39–9:40वो कैसे?
  110. 9:40–9:42ये सपष्ट करें
  111. 9:42–9:44की बत्तु ने जानबूजकर बाग को ब्रमित करने
  112. 9:44–9:47और कुद को एक रहस्सिमः प्रानी साभिद करने के लिए
  113. 9:47–9:49इस कावियात्मक शेली का सहारा लिया
  114. 9:49–9:53अ, तो बत्तु सर्व जवाब नहीं देरा है
  115. 9:53–9:55वो एक पहोमेंच देरा है
  116. 9:55–9:58वो बाग के दिमाग से खेल रहा है
  117. 9:58–9:59बलकोल
  118. 9:59–10:01आप लिक सकते हैं की बत्तु ने बाग को देखा
  119. 10:01–10:03उसके अंदर का दर चरम पर था
  120. 10:03–10:09लेकिन उसे अपनी माखी बात याद आई, उसने गेहरी सास ली, अपनी चाती चवरी की,
  121. 10:09–10:15और बाग को ब्रमित करने के लिए एक गुज्ठती हुई नाटकी और काव्यात्मक अवाज में बोलना शुरू किया.
  122. 10:15–10:16वाओ!
  123. 10:16–10:20इसे वो कविता स्वर फेक लोग कता का दान्जा नहीं रहे जाती.
  124. 10:20–10:23वो बत्तू के चरित्र के विकास का एक हिस्सा बन जाती है.
  125. 10:24–10:26वो अपनी स्थिती को नियन्त्रित कर रहा है.
  126. 10:26–10:27एक दम सही.
  127. 10:27–10:29यह मुझे बोथ पसंदा रहा है.
  128. 10:29–10:34ये बत्तु को केवल एक बाग्येशाली प्रानी से एक चतूर रननीती कार में बदल देता है
  129. 10:34–10:37उजान बुषकर जाधूई प्रानी का नाटक कर रहा है
  130. 10:37–10:40लेकिन फिर बाग के बारे में क्या?
  131. 10:40–10:41बाग के बारे में?
  132. 10:41–10:44रहा, बाग भी तो कबिता में ही बात कर रहा है नहीं?
  133. 10:44–10:46भाग बी नाटक कर रहा है?
  134. 10:46–10:48भाग के हिसे के लिए हम इसे
  135. 10:48–10:50इक �alag tara ki mano वैग्ज्यानेक प्रतिक्रिया बना सकते हैं
  136. 10:50–10:52दिखे भाग जंगल कर आजा है
  137. 10:52–10:54वो आम तोर पर सीदे हमला करता है
  138. 10:54–10:56लंभी चोडी बात नी करता
  139. 10:56–10:58आँ, उसे बात करने की क्या जरूरत है?
  140. 10:58–11:00बाग की अंदर एक अचानाग गब्राहत पैदा होती है
  141. 11:00–11:02आप योंकी शिकारियों को आदध होती है
  142. 11:02–11:04कि उनका शिकार उनसे दरे
  143. 11:04–11:06जब शिकार नहीं दरता
  144. 11:06–11:08तो शिकारी का गड़ित बिगर जाता है
  145. 11:08–11:09सतीग बात
  146. 11:09–11:11और इसी गडित के भिगरने को
  147. 11:11–11:16उज़ब शिकार उन्फे दरे, जब शिकार नहीं दरता, तो शिकारी का गनित बिगर जाता है?
  148. 11:16–11:17सतीक भात!
  149. 11:17–11:20और इसी गनित के बिगरने को हम कविता से जोर सकते हैं
  150. 11:20–11:26बाग के कावियात्मक सवाल को उसके भीतर की गब्राहत को चुपाने के अजी प्रयास के रूप में वरनित करें.
  151. 11:27–11:31मतलव वो कविता का सहारा ले रहा है ताखी उसका दर ना दिखे.
  152. 11:31–11:40अगर बाग अपनी उस नहीं और आसच गब्राहत को एक राज्सी काव्यात्मक सूर की पीछे चिपाने की कोशिष कर रहा है.
  153. 11:40–11:45वो खुत को ये विश्वास दिलाने की कोशिष कर रहा है कि वो अभी बी नियन्तरन में है.
  154. 11:45–12:15ये बज़ी बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब�
  155. 12:15–12:19बवाड्दु बाग के दिमाग से खेल रहा है
  156. 12:19–12:22लेकिन ये जादू का खेल तभी प्रभाव्शाली हुता है,
  157. 12:22–12:26जब सामने वाला दर्षक, यानी हमारे खलनाएक,
  158. 12:26–12:29वास्टी बाग के दिमाग से खेल रहा है.
  159. 12:29–12:32लेकिन ये जादू का खेल तभी प्रभाव्शाली हुता है,
  160. 12:45–12:50अगर बाग और स्यार के पात्र, मुख्हे रुब से पारमपर एक लोग कतागों के साचे में डले हुएं।
  161. 12:50–12:55इन में तोडी गेराई जोडने से उनका पतन और भी अदिक प्रभाव शाली हो सकता है।
  162. 12:55–12:57मैंने भी यही महसुस किया
  163. 12:57–12:59उनो बहत आसानी से बेखूव बन जाते हैं.
  164. 12:59–13:02बाग और स्यार के पात्र, मुख्हे रूब से
  165. 13:02–13:05पारमपर एक लोग कतावो के साचे में डले हूएं.
  166. 13:05–13:07इन में थोडी गेराई जोडने से
  167. 13:07–13:10उनका पतन और भी अदिक प्रभाव शाली हो सकता है.
  168. 13:10–13:19मैंगे भी यही महसुस किया, बाग जंगल का राजा है, वो बत्तू को देखते ही लगबख तुरन्त एक दर्पोग प्रानी की तरह व्यवार करने लकता है.
  169. 13:19–13:22आप, वो अचानक से काएर बन जाता है.
  170. 13:22–13:27और स्यार, स्यार भी बना किसी खास विरोद के बत्तू की बात मान लेता है.
  171. 13:27–13:30यही इस अन्तिम तक्राव की सबसे बड़ी कमजोरी है.
  172. 13:30–13:34बाग अपने विशाल अकार के बावजुद तुरन दर जाता है,
  173. 13:34–13:37और स्यार गेवल एक लालची और चलाक जीव है.
  174. 13:37–13:38बलकल.
  175. 13:38–13:41उन्मे कुई आसा विषिष्ट पूर्वसं केइत या बिल्ड़प नहीं है,
  176. 13:41–13:46जो बद्टू दवारा उने हराए जाने की गतना को अदेक संटोज जनक या विरोदबासी बनाए,
  177. 13:46–13:48जीद बहुत आसानी से मिल जाती है.
  178. 13:48–13:54लेक्खक के नजर्ये से सुचुएं तो क्या ये एक समस्या नहीं होगी?
  179. 13:54–13:55कैसी समस्या?
  180. 13:55–14:00अगर हम खलनायको को बहुत अदेक क्रूर या बहुत अदेक चतूर दिखाएंगे
  181. 14:00–14:06तु क्या ये अविश्वस्निये नहीं लगेगा कि वे एक चोटे चागर की इतनी सादारन्ची चाल में पजगगे?
  182. 14:07–14:11मतलब अगर सी आर इतना ही चतुर है, तु वो बत्टू को बातो में क्यो आएगा?
  183. 14:11–14:25आप यह आप यह आप यह दिलचस्प सवाल है, लेकिन सहति में विषेश्वूप से जब हम काववत मरक्नियाए या पोएटिक जस्टेस की बात करते है, तो पात्रो की सबसे बड़ी ताकात ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है.
  184. 14:25–14:26अगर दोरी बन जाती है.
  185. 14:26–14:28मतलब उनका अवर कुन्फिटेंस?
  186. 14:28–14:32आप एसे हम गमन्द का अंदापन कैसकते है.
  187. 14:32–14:36जब कोई अपनी ताकात या अपनी बुद्दिए पर बहुत अथिक मुएग्द होता है,
  188. 14:36–14:38उसे दोगा दे सकता है.
  189. 14:38–14:40उवौ।
  190. 14:40–14:42मैं समज रही हूँ
  191. 14:42–14:44तो हमे उनके गवमन्ड को स्थापित करना होगा
  192. 14:44–14:46ताकी उनका वही गवमन्ड उनके पतन काँरन बने.
  193. 14:46–14:48बलकुल.
  194. 14:48–14:50मेरा सुजाव यह है की मुख्छे तक्राव से टीक पहले
  195. 14:50–14:53मेरा सुजाव यह है की मुख्छे तक्राव से तीक पहले
  196. 14:54–14:57बाग और सीर के विवाहार में कुछ अईसी सुख्श्म विषेष्टाएं
  197. 14:57–14:58या आदते जोड़ें
  198. 14:58–15:02जो उनके हारने पर एक गेरा काव्यात्मक नियाई प्रस्तुत करे
  199. 15:02–15:04उने बस बूरे जान्वर नहीं
  200. 15:04–15:06बलकी एहंकारी जन्वर बनाना होगा
  201. 15:06–15:10तो हम उनके किरदारो में ये विषिष्ट एहंकार कैसे लासकते हैं
  202. 15:10–15:13इसे लागु करने के कुछ बहुच पष्ट तरीके हैं
  203. 15:13–15:14पहला बाग किलिए
  204. 15:14–15:19बद्तु से मिलने से टीक पहले बाग को किसी अन्ने चोटे जानवर को दरातिवे दिखाएं
  205. 15:19–15:23अच्छा ताकि हम देख सके कि वो असल में कैसा है
  206. 15:23–15:26आप शाएद वो किसी हेरन या खरगोष के साथ खेल रहा हो
  207. 15:26–15:29अपनी ताकत का अकारन प्रदरषन कर रहा हो
  208. 15:29–15:32इसे उसका समाने आंकार स्तापित होगा
  209. 15:32–15:35हम देकेंगे कि वो कितना निरदाई और अबहिमानी है
  210. 15:35–15:38आँ और जब हम ये द्रिष्ष देख लेंगे
  211. 15:38–15:42तो उसके तुरंट बाद एक छोटे से चागर से उसका दरना
  212. 15:42–15:47पात्खों के लिए एक बहुत लिए लिए आज्यास्पद और सन्तोज जनक खन्ट्रास्ट पेडा करेगा.
  213. 15:47–15:48बिल्कुल
  214. 15:48–15:51वो जो कुछ देर पहले कुत को भग्वान समज रहा था
  215. 15:51–15:53अब एक बक्री के बच्छिसिक काप रहा है.
  216. 15:53–15:56तीक यही प्रभाव हमें चाही एं
  217. 15:56–16:01और अब स्यार किलिए, हमें उसकी चलाकी को ही उसका दुश्मन बनाना होगा.
  218. 16:01–16:05स्यार को अपनी बुद्धिमट्धा पर अत्तेदे गमन्ड करतेवे लिए दिखाए.
  219. 16:05–16:07हम इसे कैसे दिखासकते है?
  220. 16:07–16:10अव बाग के सथ बाचीत में कुछ कहसकता है?
  221. 16:10–16:11बलकल.
  222. 16:11–16:16बाग और सीर के समवाद में सीर को बाग को ताना मारतेवे दिखाएं
  223. 16:16–16:18ताना मारतेवे बाग को?
  224. 16:18–16:24आप वो शेखी बखार सकता है कि कैसे शिकारियों के लिए शाकाहरी जानवर कितने मुर्क होते है
  225. 16:24–16:27और वो कैसे उने हमेश आपनी बातो में फसा लिता है
  226. 16:27–16:32वो कहे सकता है कि ये गास काने वाले जानवर कभी दिमाग नहीं लगाते
  227. 16:32–16:37रहा है, बिलको लेज़ा है, मैं तो इने अपनी उंगलियो पर नचाता हो, इस तरा का डायलोग
  228. 16:37–16:44और इस गमन्ड के कारन, जब वो अंटतटव, बद्टू की उस चतृृर चाल का शिकार होता है
  229. 16:44–16:47ज़हा बद्तू कहता है कि उसने दो बाग मगवाय थे
  230. 16:47–16:51तो सीर का हारना पाथको के लिए कही अदिक वेंगि आतमक होगा
  231. 16:51–16:52बिलकुल
  232. 16:52–16:57किसीर अपनी ही रची हुई श्रेष्टा की बहावना में अदा होगया है
  233. 16:57–17:00जब वो बाग के साथ गसीटा जाता है
  234. 17:00–17:04तो पाथक को सर्फ बत्तू की चतूराई पर खूशी नहीं होती
  235. 17:04–17:10बलकी उनही सीर के तूते हुए गमन्द पर भी एक गेरी सन्तुष्टी मिलती है
  236. 17:10–17:13जैसा उसने भोया वैसा ही उसने काता
  237. 17:13–17:17ये उस द्रिष्ष को बहुत बहुत मस्बूथ बनाता है
  238. 17:17–17:22जब भाग और स्यार के पैर एक सात बनदे होते हैं
  239. 17:22–17:24और वे भागने की कोशिष करते हैं
  240. 17:24–17:27तो वो किवल एक हाज से द्रिष्ष नहीं रहे जाता
  241. 17:27–17:30नहीं, वो उसे कही उपर उब़ग जाता है
  242. 17:30–17:33आ, वो एक दार्षनिक जीट बन जाता है
  243. 17:33–17:35एक घमन्दी भाहुबली
  244. 17:35–17:39और इक अती आत्मविश्वासी दूर्त, दोनो एक सात बन्दे हुए,
  245. 17:39–17:42अपनी ही मुर्क्ता के कारन गसीटे जारे है,
  246. 17:42–17:45ये सच्छ में काव्यात्मक नियाई है.
  247. 17:45–17:46और यही वो बिन्दू है,
  248. 17:46–17:48जहां एक साथारन कहानी,
  249. 17:48–17:54पाटखों के दिमाग में लंभे समय तक तिकनेवाली एक खालजेए कता बन जाती है.
  250. 17:54–18:02जब नायक की जीत उसके सामने कष्डी चुनाती और खलनायक के एहंकार के अनुपात में बडी लकती है.
  251. 18:02–18:06तो कुल मिलाकर अगर हम आजकी इस पूरी चर्चा को समेतें,
  252. 18:06–18:12तो हम देक सकते है, कि हमें कहानी की मुल गटनाउ को बडलने की ज़ोरत नहीं है.
  253. 18:12–18:19हमें सिर्फ उन गटनाउ के पीछे के मनो विग्यान और प्रस्थोटी करन को मस्बूत करना है.
  254. 18:19–18:22बलकुल सई, यही मेरा मुख की बिन्दू है.
  255. 18:22–18:28अगर मैं ये से सारानषित करूं, तो लेक्हक को मुख्यो रूप से तींजाँ पर द्यान के अंद्रित करना है.
  256. 18:28–18:33पहला, शुरुवाती बाग में माबेटे के बिचट़ने के दिष्चे की गती को दीमा करना.
  257. 18:33–18:38इस में समवेदी विवरन जोरना ताकि हम केवल गठना को नप़ें
  258. 18:38–18:43बलके उस अन्जान अंदेरे के खफ और उस अल्गाव के दर्द को महसुज कर सकें
  259. 18:43–18:45रहा वो थेरा वोड़ जरूरी है
  260. 18:45–18:52तुस्रा, कहानी में जो कावियात्मक समवाद है, उने केवल एक लोग कता का अजीब हिस्सा न रहने दें.
  261. 18:52–18:55उनके लिए एक रहस्यमाई माहल तढार करें
  262. 18:55–18:58उर उसे बद्तू की एक सोची समजी रननीतिक चाल
  263. 18:58–19:01और बाग के दर को चिपाने के प्रयास के रूप में स्थापित करें
  264. 19:01–19:04इस से कहाने की तारकिक्ता बहुत बगड़ जाएगी
  265. 19:04–19:06और अन्त में तीस्रा
  266. 19:06–19:12बाग और स्यार के चरित्रो में, एहंकार या अती आत्मा विष्वास की सपष्ट परते जोडना,
  267. 19:12–19:18उने मुख्धख्राव से पहले अपनी ताकत और भुद्दीः पर गमन्ड करते हूना,
  268. 19:18–19:23ताकि जब वे बत्तू से हारें, तो उनकी वहाजार अदिक प्रभाव शाली लगे.
  269. 19:23–19:34मुझे पुरा विश्वास है कि इन गेराई वाले बडलाओं के बाद ये कथा एक सादारन लोग कथा से उपर उपर उटकर एक बहुत ही उतक्रिष्ट मनोवेग्यानेक और साहित्तिक अनबहुम ए बडल जाएगी.
  270. 19:34–19:40बलकुल, हम अपने श्रोटा से अनुरोद करते है, कि वे इन सुजावों पर विचार करें,
  271. 19:40–19:45अपने पात्रों के मनोविज्यान में गेराई लाई, अपने काम को और निकारें,
  272. 19:45–19:50और बविष्ष्य में आगे की समिक्षा के लिए अपनी सामगरी हमें फिर से सबमद करें.
  273. 19:50–19:58अगी भार जब आप अपने किरदारों को किसी क्षट्रे में डालें, तो सूनिष्चित करें, की पाटख भी उस क्ष्त्रे की हर एक दधकन को महसुऽ कर सके.
  274. 19:59–20:01आज की चर्चा यही समापत होती है.

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आज हम बतू की समीक्षा कर रहे है, जो एक बली से बचकर, जंगल के शिकारियों को मात देने वाले साहसी चागर की लोक कता है. तो बिना किसी देरी के सीथा इस समगरी की रचनात्मक समीक्षा पर आते है. बलकुल! तो पहली बात, कहानी के शुर्वाती हिस्टे में माँ और बच्चे के बिचटने का द्रष्छ, बहावनात्मक रूप से बहुत जल्बाजी में गुजर जाता है. आप, मुझे भी एसा ही लगा. बाथक बस उसे पहल लिए देखा पाथक लगा पाथक लगा बदादा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा पाथक लगा भी बद़ा था है, महेंसुस नहीं करता. बिलकुल, अग्याज जंगल कभवे वे और अपना सुवक्षित गर चुटने की पीडा, तो अगर भागने के इस द्रिश्छे को दीमा कर देंगे तो वो जान बचाखर भागने वाली हदबडी अप भी बज़ाँ बज़ाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ बजाँ ब आपातकाल में तो लोग बस बागते है, रूककर हर चीस का विषलेशन नहीं करते. देखे, यह एक बहुत ही जायस तरक है. और अकसर लिखखो को यही लकता है, कि तेस गती वाली गतनाो को, तेस वाख्यों और कम विवरन के साथ लिखना चाहीए. ताकि वो आख्छन फील हो सके लेकि मेरा सुजाव यह के इस महत्वपुड प्रस्थान की गती को दीमा करें ताकि पाटख इस श़न के बहावनात्मक वजन को वजन और तनाव को पूरी तरह से आत्मसात कर सकें आच्छा पर वो कैसे आपको ये समजना होगा कि जब आप चरम भई में होते हैं, तो मनोविग्यान के अनुसार समघ दीमा हो जाता है. उज़ेसे जब कोई दुरगखतना होने वाली होती है, तो वे कुछ सेकन भी बहुत लंबे महसुस होते हैं. अग्टाईटी का दिमाग अटी सक्रिये हो जाता है इसलिये साहित्ते में से दरशाने के लिए हमें पन्नोपर समें को तोडा रोकना परता है तो हमें से काहानी में कैसे लागु कर सकते है इसके लिया आप कुछ बहुत ही थोज बडलाव कर सकते है अगु कर सकते है? इसके लिया आप कुछ बहुत ही थोज बडलाव कर सकते है पहला तरी का यह है, की राथ के अंदेरे और जंगल से आने वाली दरावनी आवाजो का समवेदी, मधलब सेंसरी विवरन जोडे समवेदी विवरन से आप का मतलब है की हम अगर तो बज़ाद बज़ाद बज़ाद बज़ाद बलकी ये बताएं कि वो अंदेरा कैसा महसुस हो रहा था तीक यही, अंदेरा सर्फ रोशनी की कमी नहीं है ये एक यह सा कैनवास है, जहां हर चोटी आवाज एक हत्रा बन जाती है आप जैसे कोई पत्ता भी खड़के तो लक्ता कोई आगा गया बलकुल, हवा की सर सरा हट, सुके पत्तों पर किसी चोटे जीव के चलने की खड़क्डा हट या दूर से आती किसी अनजान जानवर की खोफना कावाज जब बत्तु जंगल कि और कदम बड़ाता है, तो उसे ये सब मैजुस हूना चाहिए. इसे इस यक चाकर का दर पाटख के भीतर भी एक सेहरन पहडा करेगा है ना? आ, ये पाटख को कहानी के अंदर खिछ लेता है. ये मुझे सिनेमा कि उस तकनी की आद दिलाता है, अगर बाग लग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बा� बादुर बन्ना बाव से कुछ आज़े कैसकती है कि शिकारी तुमहरे दर को सुंग सकते हैं, जब दर लगे तु अखने बडी करना और अबनी आवास को बारी कर लेना. औव, मतलब एक बहुत ही स्पस्टिफिक सलाह. आँ, इस तरह की कोई विषिष्ट सलाह है, अग, इस तरह की कोई विषिष्ट सलाह है, ये केवल एक बहावोक विधाई नहीं रहागी, बलकी आगे आने बाली गधनावो की एक तारकिक नीव बन जाएगी. यह बहुत इश्णार विचार है, किंकी जब वाख से मिलेगा, उपने बाट्खख को याद आगा की यह वह तकनीक है, जो उसकी माने उसे सिखाई ती. वह स्वे एक जादोई रूब से निदर प्रानी नहीं बन गया है. वह अपनी माग की बात का पालन कर रहा है. बलकोल. और तीस्रा थोस उदाहरन यहा है, यहां है कि चागर के मुडकर एक आखरी बार अपनी माँ और स्वक्ष्टगगर को देखने का एक चोटा सा दिश्ष जोडे. आप वो एक पल जाहा वह जानता है कि शाएद वह यह सब फिर कभी नहीं देख बाएगा. इसे वह तहराव पाट़क के गले में एक गांट बान्द देगा यह तहराव सच्छ में बहुत जरूरी है क्योंकी यह वह जगा है चाहां मुसके अंतरिक दर को पूरी तरह से समझब आते हैं और यह दिल्चस्प है कैसे इस अंतरिक दर को गहराई से स्थापित करना अगर बाग बाग बाग बाग बीच के समवात को देकते हैं अगर बाग बद्तु के बीच के समवात को देखते हैं, तो वे अचानक एक तुस्रे से कावियात्मक बाशा में बात करने लकते हैं. ये मुझे बहुत अजीब लगा. जैसे किसी फिल्म में अचानक कोई किर्दार बिना किसी पूर्व तयारी के गाना गाने लगे. अचानक कोई किर्दार बिना किसी पूर्व तध्यारी के गाना गाने लगे मैं समच सकता हों बाग और बत्तू के भीच का काव्यात्मक समवाद बहद अकर्षक है लिकिन गद्दिश्यले के भीच इसका आगमन थोडा अचानक प्रतीथ होता है आप आप बग ये अचानक से एक ज़टके जैसा लकता है. हम एक सादारन कहानी पड़रे हैं. और फिर आचानक बाग एक लंभी चव़िटा में सवाल पुछता है. और बद्तु भी उसी लेमे जवाब देता है. यही एस हिसे की सब से बडी कमजोरी है. पूरी कहानी एक सीदे कतात्मक गद्यमे चल रही है और अचानक बाग का कावियात्मक लहेजे में पुचना और बत्तुका उसी शेली में जवाब देना तून में एक अझा बडलाव है जो पाटख के दिहान को कहानी से बहार निकाल सकता है मतलब पात्ख कहानी से तुट जाता है आदी नानी जब कहानी सूनाती है, तो वे बीज भीज मे इन लईात्मक समवादों का उप्योग करती है, ता कि बच्छे उस लई को आनन्द ले सकें। लोग कताए की मुल प्रक्रिती ही आसी होती है है तुवे बीज बीज मे इन लैयात्मक समवादों का उप्योग करती है, ताके बच्छे उस लैए को अनन्द ले सकें। तो अगर ये लोग कता की आस्ली पहचान है, तो क्या हम इसे सर्फ इसली बडल देना जाहीए, क्यो कि हम इसे एक किताप के रुप में पड़ रहे हैं? दिक्ये यह एक बहुत्ती विचारनी यह बिंदू है, अप सही कै रही हैं, कि यह श्रूती परमपरा का हिस्सा है, लेकिन हमे ये समजना होगा कि माद्यमका बहुत बडा असर होता है माद्यमका? मतलब ओरल और रिटन का फरक? बलकुल! जब कुई कहानी सूनाता है, तो उसके चेरे के बहाव, उसके हातों के इशारे, और सबसे महत्लपून, उसकी आवाज का उतार च़ाव उस बदलाव को बहुत स्वबाविक बना देता है आआ, सुनाने वाला कुछ गाखर सुनाता है लेकिन एक किताप के पन्नो पर हमारे पास वो आवाज या वे इशारे नहीं होते पन्नो पर वह जिम्म्डारी सिर्फ और सिर्फ शब्डों की होती है यानी चो काम कहानी सुनाने वाले की अवाज करती है वो काम अब हमे शब्डों के जर्ये प्रिष्ट भूमी बना कर रहा होगा अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई अगई � इसके कुछ बहुती प्रभाबी तरीके हो सकते हैं पहला तरीका ये है कि समवाथ से टीक पहले जंगल के प्राछीन गुँजते हुए वातवरन का वरनन करें एक महाल बनान आप अगा बादख अवचेतन रूप से उस जादूई काव्यात्मक दून्या में प्रवेश करने के लिए तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं तब रहीं � बत्तु की एक सोची समजी मनोवैज्यनिक चाल बनादें एक मनोवैज्यनिक चाल? वो कैसे? ये सपष्ट करें की बत्तु ने जानबूजकर बाग को ब्रमित करने और कुद को एक रहस्सिमः प्रानी साभिद करने के लिए इस कावियात्मक शेली का सहारा लिया अ, तो बत्तु सर्व जवाब नहीं देरा है वो एक पहोमेंच देरा है वो बाग के दिमाग से खेल रहा है बलकोल आप लिक सकते हैं की बत्तु ने बाग को देखा उसके अंदर का दर चरम पर था लेकिन उसे अपनी माखी बात याद आई, उसने गेहरी सास ली, अपनी चाती चवरी की, और बाग को ब्रमित करने के लिए एक गुज्ठती हुई नाटकी और काव्यात्मक अवाज में बोलना शुरू किया. वाओ! इसे वो कविता स्वर फेक लोग कता का दान्जा नहीं रहे जाती. वो बत्तू के चरित्र के विकास का एक हिस्सा बन जाती है. वो अपनी स्थिती को नियन्त्रित कर रहा है. एक दम सही. यह मुझे बोथ पसंदा रहा है. ये बत्तु को केवल एक बाग्येशाली प्रानी से एक चतूर रननीती कार में बदल देता है उजान बुषकर जाधूई प्रानी का नाटक कर रहा है लेकिन फिर बाग के बारे में क्या? बाग के बारे में? रहा, बाग भी तो कबिता में ही बात कर रहा है नहीं? भाग बी नाटक कर रहा है? भाग के हिसे के लिए हम इसे इक �alag tara ki mano वैग्ज्यानेक प्रतिक्रिया बना सकते हैं दिखे भाग जंगल कर आजा है वो आम तोर पर सीदे हमला करता है लंभी चोडी बात नी करता आँ, उसे बात करने की क्या जरूरत है? बाग की अंदर एक अचानाग गब्राहत पैदा होती है आप योंकी शिकारियों को आदध होती है कि उनका शिकार उनसे दरे जब शिकार नहीं दरता तो शिकारी का गड़ित बिगर जाता है सतीग बात और इसी गडित के भिगरने को उज़ब शिकार उन्फे दरे, जब शिकार नहीं दरता, तो शिकारी का गनित बिगर जाता है? सतीक भात! और इसी गनित के बिगरने को हम कविता से जोर सकते हैं बाग के कावियात्मक सवाल को उसके भीतर की गब्राहत को चुपाने के अजी प्रयास के रूप में वरनित करें. मतलव वो कविता का सहारा ले रहा है ताखी उसका दर ना दिखे. अगर बाग अपनी उस नहीं और आसच गब्राहत को एक राज्सी काव्यात्मक सूर की पीछे चिपाने की कोशिष कर रहा है. वो खुत को ये विश्वास दिलाने की कोशिष कर रहा है कि वो अभी बी नियन्तरन में है. ये बज़ी बबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबबब� बवाड्दु बाग के दिमाग से खेल रहा है लेकिन ये जादू का खेल तभी प्रभाव्शाली हुता है, जब सामने वाला दर्षक, यानी हमारे खलनाएक, वास्टी बाग के दिमाग से खेल रहा है. लेकिन ये जादू का खेल तभी प्रभाव्शाली हुता है, अगर बाग और स्यार के पात्र, मुख्हे रुब से पारमपर एक लोग कतागों के साचे में डले हुएं। इन में तोडी गेराई जोडने से उनका पतन और भी अदिक प्रभाव शाली हो सकता है। मैंने भी यही महसुस किया उनो बहत आसानी से बेखूव बन जाते हैं. बाग और स्यार के पात्र, मुख्हे रूब से पारमपर एक लोग कतावो के साचे में डले हूएं. इन में थोडी गेराई जोडने से उनका पतन और भी अदिक प्रभाव शाली हो सकता है. मैंगे भी यही महसुस किया, बाग जंगल का राजा है, वो बत्तू को देखते ही लगबख तुरन्त एक दर्पोग प्रानी की तरह व्यवार करने लकता है. आप, वो अचानक से काएर बन जाता है. और स्यार, स्यार भी बना किसी खास विरोद के बत्तू की बात मान लेता है. यही इस अन्तिम तक्राव की सबसे बड़ी कमजोरी है. बाग अपने विशाल अकार के बावजुद तुरन दर जाता है, और स्यार गेवल एक लालची और चलाक जीव है. बलकल. उन्मे कुई आसा विषिष्ट पूर्वसं केइत या बिल्ड़प नहीं है, जो बद्टू दवारा उने हराए जाने की गतना को अदेक संटोज जनक या विरोदबासी बनाए, जीद बहुत आसानी से मिल जाती है. लेक्खक के नजर्ये से सुचुएं तो क्या ये एक समस्या नहीं होगी? कैसी समस्या? अगर हम खलनायको को बहुत अदेक क्रूर या बहुत अदेक चतूर दिखाएंगे तु क्या ये अविश्वस्निये नहीं लगेगा कि वे एक चोटे चागर की इतनी सादारन्ची चाल में पजगगे? मतलब अगर सी आर इतना ही चतुर है, तु वो बत्टू को बातो में क्यो आएगा? आप यह आप यह आप यह दिलचस्प सवाल है, लेकिन सहति में विषेश्वूप से जब हम काववत मरक्नियाए या पोएटिक जस्टेस की बात करते है, तो पात्रो की सबसे बड़ी ताकात ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है. अगर दोरी बन जाती है. मतलब उनका अवर कुन्फिटेंस? आप एसे हम गमन्द का अंदापन कैसकते है. जब कोई अपनी ताकात या अपनी बुद्दिए पर बहुत अथिक मुएग्द होता है, उसे दोगा दे सकता है. उवौ। मैं समज रही हूँ तो हमे उनके गवमन्ड को स्थापित करना होगा ताकी उनका वही गवमन्ड उनके पतन काँरन बने. बलकुल. मेरा सुजाव यह है की मुख्छे तक्राव से टीक पहले मेरा सुजाव यह है की मुख्छे तक्राव से तीक पहले बाग और सीर के विवाहार में कुछ अईसी सुख्श्म विषेष्टाएं या आदते जोड़ें जो उनके हारने पर एक गेरा काव्यात्मक नियाई प्रस्तुत करे उने बस बूरे जान्वर नहीं बलकी एहंकारी जन्वर बनाना होगा तो हम उनके किरदारो में ये विषिष्ट एहंकार कैसे लासकते हैं इसे लागु करने के कुछ बहुच पष्ट तरीके हैं पहला बाग किलिए बद्तु से मिलने से टीक पहले बाग को किसी अन्ने चोटे जानवर को दरातिवे दिखाएं अच्छा ताकि हम देख सके कि वो असल में कैसा है आप शाएद वो किसी हेरन या खरगोष के साथ खेल रहा हो अपनी ताकत का अकारन प्रदरषन कर रहा हो इसे उसका समाने आंकार स्तापित होगा हम देकेंगे कि वो कितना निरदाई और अबहिमानी है आँ और जब हम ये द्रिष्ष देख लेंगे तो उसके तुरंट बाद एक छोटे से चागर से उसका दरना पात्खों के लिए एक बहुत लिए लिए आज्यास्पद और सन्तोज जनक खन्ट्रास्ट पेडा करेगा. बिल्कुल वो जो कुछ देर पहले कुत को भग्वान समज रहा था अब एक बक्री के बच्छिसिक काप रहा है. तीक यही प्रभाव हमें चाही एं और अब स्यार किलिए, हमें उसकी चलाकी को ही उसका दुश्मन बनाना होगा. स्यार को अपनी बुद्धिमट्धा पर अत्तेदे गमन्ड करतेवे लिए दिखाए. हम इसे कैसे दिखासकते है? अव बाग के सथ बाचीत में कुछ कहसकता है? बलकल. बाग और सीर के समवाद में सीर को बाग को ताना मारतेवे दिखाएं ताना मारतेवे बाग को? आप वो शेखी बखार सकता है कि कैसे शिकारियों के लिए शाकाहरी जानवर कितने मुर्क होते है और वो कैसे उने हमेश आपनी बातो में फसा लिता है वो कहे सकता है कि ये गास काने वाले जानवर कभी दिमाग नहीं लगाते रहा है, बिलको लेज़ा है, मैं तो इने अपनी उंगलियो पर नचाता हो, इस तरा का डायलोग और इस गमन्ड के कारन, जब वो अंटतटव, बद्टू की उस चतृृर चाल का शिकार होता है ज़हा बद्तू कहता है कि उसने दो बाग मगवाय थे तो सीर का हारना पाथको के लिए कही अदिक वेंगि आतमक होगा बिलकुल किसीर अपनी ही रची हुई श्रेष्टा की बहावना में अदा होगया है जब वो बाग के साथ गसीटा जाता है तो पाथक को सर्फ बत्तू की चतूराई पर खूशी नहीं होती बलकी उनही सीर के तूते हुए गमन्द पर भी एक गेरी सन्तुष्टी मिलती है जैसा उसने भोया वैसा ही उसने काता ये उस द्रिष्ष को बहुत बहुत मस्बूथ बनाता है जब भाग और स्यार के पैर एक सात बनदे होते हैं और वे भागने की कोशिष करते हैं तो वो किवल एक हाज से द्रिष्ष नहीं रहे जाता नहीं, वो उसे कही उपर उब़ग जाता है आ, वो एक दार्षनिक जीट बन जाता है एक घमन्दी भाहुबली और इक अती आत्मविश्वासी दूर्त, दोनो एक सात बन्दे हुए, अपनी ही मुर्क्ता के कारन गसीटे जारे है, ये सच्छ में काव्यात्मक नियाई है. और यही वो बिन्दू है, जहां एक साथारन कहानी, पाटखों के दिमाग में लंभे समय तक तिकनेवाली एक खालजेए कता बन जाती है. जब नायक की जीत उसके सामने कष्डी चुनाती और खलनायक के एहंकार के अनुपात में बडी लकती है. तो कुल मिलाकर अगर हम आजकी इस पूरी चर्चा को समेतें, तो हम देक सकते है, कि हमें कहानी की मुल गटनाउ को बडलने की ज़ोरत नहीं है. हमें सिर्फ उन गटनाउ के पीछे के मनो विग्यान और प्रस्थोटी करन को मस्बूत करना है. बलकुल सई, यही मेरा मुख की बिन्दू है. अगर मैं ये से सारानषित करूं, तो लेक्हक को मुख्यो रूप से तींजाँ पर द्यान के अंद्रित करना है. पहला, शुरुवाती बाग में माबेटे के बिचट़ने के दिष्चे की गती को दीमा करना. इस में समवेदी विवरन जोरना ताकि हम केवल गठना को नप़ें बलके उस अन्जान अंदेरे के खफ और उस अल्गाव के दर्द को महसुज कर सकें रहा वो थेरा वोड़ जरूरी है तुस्रा, कहानी में जो कावियात्मक समवाद है, उने केवल एक लोग कता का अजीब हिस्सा न रहने दें. उनके लिए एक रहस्यमाई माहल तढार करें उर उसे बद्तू की एक सोची समजी रननीतिक चाल और बाग के दर को चिपाने के प्रयास के रूप में स्थापित करें इस से कहाने की तारकिक्ता बहुत बगड़ जाएगी और अन्त में तीस्रा बाग और स्यार के चरित्रो में, एहंकार या अती आत्मा विष्वास की सपष्ट परते जोडना, उने मुख्धख्राव से पहले अपनी ताकत और भुद्दीः पर गमन्ड करते हूना, ताकि जब वे बत्तू से हारें, तो उनकी वहाजार अदिक प्रभाव शाली लगे. मुझे पुरा विश्वास है कि इन गेराई वाले बडलाओं के बाद ये कथा एक सादारन लोग कथा से उपर उपर उटकर एक बहुत ही उतक्रिष्ट मनोवेग्यानेक और साहित्तिक अनबहुम ए बडल जाएगी. बलकुल, हम अपने श्रोटा से अनुरोद करते है, कि वे इन सुजावों पर विचार करें, अपने पात्रों के मनोविज्यान में गेराई लाई, अपने काम को और निकारें, और बविष्ष्य में आगे की समिक्षा के लिए अपनी सामगरी हमें फिर से सबमद करें. अगी भार जब आप अपने किरदारों को किसी क्षट्रे में डालें, तो सूनिष्चित करें, की पाटख भी उस क्ष्त्रे की हर एक दधकन को महसुऽ कर सके. आज की चर्चा यही समापत होती है.

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