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मूँगा_आ_जालिम_सिंहक_रक्तरंजित_प्रेमकथा.m4a

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Part 10 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 10
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  1. 0:00–0:02देबेट में आहां कष्वागत अछि।
  2. 0:02–0:12कलपना करू, एक ता एहन प्रेम कताक जक्रा रोक बाक लेल सम्पूरन राज्दर्बार आपन शव्यंत्रक जाल भिचा दे तचे
  3. 0:12–0:18आज्जते एक ता परम्म्मित्र के सरे आम मदल भीर्ड वारा काती दे जाए तचे
  4. 0:18–0:24इक्दम आज्दे एक्टा बहाई अपनाही बहीं के बोईन्क देवी लग भली देबाक लिल कदग उठा लेते चे
  5. 0:25–0:33आई हम सब गजेंद्र ताकुरक लिखल प्रसिद अटिहासिक गाता मुंगा आज्दालिम्सिंग कपन्ना में प्रवेश करहल चे
  6. 0:33–0:37जे बेतिया राजक प्रिष्ट भूमी मेरचल गेल अचे
  7. 0:37–0:42एक राजपूट सिपाही सर्दार जालिम सिंग आ दूदबन्षी
  8. 0:42–0:47अचात दूसाद जाते की कन्या मुंगाक प्रेम का दस्तावेष थेख
  9. 0:47–0:50सही बात आई एक दा कता अचे
  10. 0:50–0:53बलकी समाजक औही क्रुर देवालक साख्षात वरनन्तिक
  11. 0:53–0:56जक्रा तोडबाक प्रयास में नदिया बही जाईता चे.
  12. 0:56–1:00मुदद दिख हो इं नदी जलक नहीं रक्त कचे.
  13. 1:00–1:03बेतिया राजक औही काल कहन्ट के जाहा दिखव,
  14. 1:03–1:06ते इी कोनो समाने समाज नहीं चल.
  15. 1:06–1:10इक ता एहन लोह कवच जका बनल सामनती वेवस्था चल
  16. 1:10–1:14जते, मतलब जातिक नियम इश्वर्य विदान जका मानल जाएत अचे
  17. 1:14–1:20ता एक ता राजबूद आईक ता दूदबन्सी कन्याक भीच का अकर्षन
  18. 1:20–1:22कोन वस सामान ने वरजना नहीं चल
  19. 1:22–1:28बल की स्तापित राज सत्ता अ समाजिक अनुक्रम पर सीधा राज द्रोज चल.
  20. 1:28–1:32हमर पक्ष यह ची जे यी कता मुलता समाजिक रूरता
  21. 1:32–1:35आस थापित सन्रक्चना की तोडबाक लेलभेल
  22. 1:35–1:38ब्यंकर अनपेखषित संभार
  23. 1:38–1:41अथात कोलाट्रल दमेज का दस्तावेच थेक.
  24. 1:41–1:49अहो! ता आजा के कहाव आची, जे यी केवल त्रास्दी आची, मुता हमर पक्ष एक दिक विप्रीत आची.
  25. 1:49–1:58हमर यी द्रध मानने ता आची, जे यी गाता जालिम, अन, मुंगाक, वक्तिग चुनावक, अग, अन्तिम विजे थिक.
  26. 1:58–2:04इप्रमानित करईत जगगन कोन वक्ती आपन नियती के बदल्वाकले थाड़ बोजाई तची
  27. 2:04–2:09तच्सदियो प�रान क्रूरस् क्रूर व्यवस्ताके सेव गुटना तेकई पडेचे.
  28. 2:09–2:12आहाक इद्रुष्टि कोन बहुत काव्याद्मक अचे.
  29. 2:12–2:20मुदा, خर, हम्रा लेल एक ता ब्रहम थेक, प्रेम के एही आवरनक नीचा निर्दोष लोको के न बली चड़ाई परल,
  30. 2:20–2:31जाले मा मुंगाक प्रेम के स्थापित करबाक लेल समाज अविषेश रुब से हुनक अपल लोकन के जे बारी कीमट चुकावे पडल से ही कता कदवाय अथ फर्त थेक.
  31. 2:31–2:37मुदा एक रानतित लास कषीटी पर नही, बलकी संकलपक नीव पट्हार बेल चल.
  32. 2:37–2:38संकलपक नीव?
  33. 2:50–2:57मोनी भावाक प्रस्शंगता वास्टब में जालीमक उही चेतना के प्रमानित करई तची, जकर हम वकालत करो हल चे.
  34. 2:57–3:00कोना? बावा तवोनका अस्पष्ट मना के निचला?
  35. 3:00–3:04राजा प्रिथवी पालक चुगली सूनी जालीम परक्रुद चला,
  36. 3:04–3:11अज्जालिम आपन मित्र पतुक संग मोनी भाबा लग जाई चत्छतिन, तब भाबा कहे चत्छिन चोडिद मोंगाख संग.
  37. 3:11–3:14मुदा जालिम की करे चत्छिन? उताय मोन रही जाएचे.
  38. 3:14–3:17अ मोन आहा के क्रान्ती लगाई तची?
  39. 3:17–3:18एक दम.
  40. 3:18–3:22इं मून कोनो कायारता नहीं सुचेत विद्रोज्चल
  41. 3:22–3:25इं तीक उहीना चे, जेना कोनो जहाजक कप्तानके
  42. 3:25–3:28बयानक तूफानक चेतावनी बेटेटेटची,
  43. 3:28–3:31मुदा उजानेटची, जो कर जीवन के लक्छ,
  44. 3:31–3:33उकर सत्ते उही तूफानक पार चे.
  45. 3:33–3:35ते उ स्वेच्छा सव उही दिस बड़े तची
  46. 3:35–3:39मोनी भाबा समाजक अस्थापित मानने ताक स्वर चला
  47. 3:39–3:42जाली मक उही चे तावनीक अस्विकार करब
  48. 3:42–3:44वेक्तिवादी सुतन्द्र ताक चरम गूशना चल
  49. 3:44–3:47आहा जाहाजक कप्तानक उप्मा देलूं
  50. 3:47–3:48मुदा सोचु
  51. 3:48–3:51जो खब्तान जखन जिद का का तूफान में जाएत अची
  52. 3:51–3:56तो उ उ ही जहाज पर भैसल निर्दोस यात्री सब के सोथ तदूवा देट अची
  53. 3:56–3:57आँ न, मुदा
  54. 3:57–4:02देखू मोनी भाबा कोनो के वल भविष्वकता नहीं चला
  55. 4:02–4:04जे जादू तोना करे चला
  56. 4:04–4:07उ भेत्या राज्यक समाज शास्त्री चला
  57. 4:07–4:10उ जानेच चला, जे राजा क्रुद्द अची
  58. 4:10–4:13प्रत्वि पाल जेहन दूर्त दर्बारी
  59. 4:13–4:15निरन्तर कान बहरी रहा लाची
  60. 4:15–4:19तब आबग उ वाक्या चोडी दे मुंगाक संग
  61. 4:19–4:21कोन वस समाने सला नहीं चल
  62. 4:21–4:27उ आगा आभे वाला वर्ग संगर्ष अब भ्यंकर रक्त पातक पूर्व सुचना चल.
  63. 4:27–4:33जालिं जाने चला, जो हुनक एक्ता देग उठाभे सब पूरा राज्ज मे आगे लागी जाएत.
  64. 4:33–4:38मुदा उआपन प्रेमक हद्मे उई चितामनी के नजर अंदाज कर दिलन.
  65. 4:38–4:39उ कब्तान्त बची गेला
  66. 4:40–4:43मुदा उही जहाज सक सब सब पहल्यात्री जे दूब गेला
  67. 4:43–4:44उचल पट्टू
  68. 4:44–4:45नहीं
  69. 4:45–4:46मतलव
  70. 4:46–4:48इसरा सर अन्याय है दे
  71. 4:48–4:51जो हम पट्टू के मात्र एकता लाचार यातरी
  72. 4:51–4:53या अन्चाही भली मानी ली
  73. 4:53–4:55लाचार यातरी नहीं ते की चलो?
  74. 4:55–5:03पट्टुक म्रित्यों के केवल एक तात रासदिक रूप में देखब पट्टूक आपन स्वायत्ता के रूप निरनाय के आप मानित करवत्तिक.
  75. 5:03–5:08जालिम के बचेबाक लेल रूप विस्वास पात्र मल्ला पट्टू जे प्रानक भाजी लगो लग,
  76. 5:08–5:12अजातिक सीमा सु उपर उठल मित्रता चरम उदारन थी
  77. 5:12–5:14मुदा पट्टू अकेले मारेल गिला
  78. 5:14–5:18आ, पट्टू प्रिठ्वी पालक बाडाक लोकस अकेले लडल
  79. 5:18–5:20भवानी माताक नाम लोका युद्ध केलक
  80. 5:20–5:22अ प्रिट्ट्वी पालक खुन केलक
  81. 5:22–5:28उ भीड द्वारा मारल गेल इसत्ते चै, मुदा पट्टू अपन स्वतन्त्र इच्चासा लडल चल,
  82. 5:28–5:33उ राज्दर्बारक शड्यन्त्र अब्रस्टाचारा क्हिलाफ सत्ते अनिष्टाक युद्ध्धल लडल,
  83. 5:33–5:37उकर भलिदान जालिम आमुंगाक प्रेम के एक्ता पवित्रता प्रदान के लक।
  84. 5:37–5:39पवित्रता?
  85. 5:39–5:44आहा एक्तर निमनजातिक मलाहक निर्मजात्या के पवित्रता कहे रहल ची,
  86. 5:44–5:46विचार करूजी कते क बहाना कची.
  87. 5:46–5:50शक्तिया वर्ग का असन्तुलन यता एब रहुत सपर्ष्ट थछी
  88. 5:50–5:52पट्टु एक ता मलाज चल
  89. 5:52–5:54मुदा हो जालिम के मित्र से हो चल
  90. 5:54–5:58मित्र चल मुदा समाज शास्तरे द्र्ष्टिकोन सा देख हूता
  91. 5:58–6:01इएक ता शोषित वर्ग प्रतिनिदी के
  92. 6:01–6:04तद्ता सा जुडल प्रेम कथाक वेदिपर भली च़ाबग्थिक
  93. 6:05–6:07प्रिथ्वि पाल जे कुचक्र रची रहल चला
  94. 6:07–6:09उकर मूल निशाना जालिम चला
  95. 6:10–6:12मुदा जालिमक रक्षाक लेल प्रानक कर जाइत अछी
  96. 6:12–6:13पट्वूक
  97. 6:13–6:15की इक ता प्रेम कथाक सफलता लेल
  98. 6:15–6:18आईन निस्वार्त मित्रक निर्मज़्या न्यायोचिच आई?
  99. 6:18–6:20न्यायोचिच तक बात नहीं आची
  100. 6:20–6:21मुदा युद्ध में
  101. 6:21–6:22प्ट्टू
  102. 6:22–6:25उईईद्धख मुल्ले चुकाईत आची
  103. 6:25–6:27जकर शुर्वात उन नहीं केनिचल
  104. 6:27–6:32जखन पट्टु भीड द्वारा मारल जाएतची, तो उ प्रेम के विज़ै नहीं,
  105. 6:32–6:38बेत्या राजक, वेवस्थाक, क्रूर्ताक, चरम नगन रूप होईतची,
  106. 6:38–6:44जदे एक ता उच्जातिक लोकक, विद्रोहक, सजा, सदिकन निचाक लोकन के बुगतोई परेच है.
  107. 6:44–7:14खर, हम माने ची जे बेवस्त्ठ क्रूर चल, अपट्टूक मिर्ट्ट्यो रदेविदारक अची, मुदद पट्टूके कारे के खेवल वरग संगर्ष या शोषितक बलीदानक चच्मा से देखाव, ततकालीन समाज में मित्रताक जे गेराए चल तकर अव मुल्ल्लिन करबे द
  108. 7:14–7:19आज्या आहा इख़ट उग़िज़ि, जे एही प्रेम कर कीमत केवल निमनवर्ग
  109. 7:19–7:24वा दोसर लोग चुकलनाक तकी मुंगा स्वयम कीमत नहीं चुकलनी.
  110. 7:24–7:28जकन मुंगाके, बेतियाक बोन में कनूा लग पधावल गेल,
  111. 7:28–7:32ता उ जीवन के सब संख्ष्ट ख्फनाक संकत में चली.
  112. 7:32–7:36अग कन्वाके चल, उ मुंगाक अपन भाजिक भाई चल,
  113. 7:36–7:39एक दम सतिक ठाम पर हाई बात उठोला हूं.
  114. 7:39–7:42जब पत्टु रास्दर्बारक सदान्द से लडल,
  115. 7:42–7:44ता मुंगाके ककर सामना करे पडल,
  116. 7:44–7:50खुदे आपन लोकक, और इते कनवाक चरित्रक यतार्त भूजनाए बहुत आवष्षक अची.
  117. 7:50–7:57सवाम अन्दूद आएक्ता रस्सिक आहार, बागग शिकार करेवला महीस पर सवारी
  118. 7:57–8:01इक कनवाकोनो समाने कलनाएक नहीं थेक.
  119. 8:01–8:02उता एक ता देट्तेजे का चल.
  120. 8:02–8:32उ मुंगा के बूनक देवी लग बली दिवाक तयारी कर रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा �
  121. 8:32–8:35तो उ समाज बहईभीत बहजाई ता ची
  122. 8:35–8:36आचा
  123. 8:36–8:38तो आहाक कह बची
  124. 8:38–8:40जे उ दरक कारन्चल
  125. 8:40–8:42आँ उ जाएने ता ची
  126. 8:42–8:45जे जा मुंगा राजपुत सरदार के संग भागली हा
  127. 8:45–8:47तर राज दरबार खध कहर
  128. 8:47–8:49पुरा दूद बन्सी समाज पर खषत
  129. 8:49–8:57तें उच्ज जातिक प्रतिशोद़़ से बच्भा के लिल, उ समाज अपने सदसके बली दिबाक निरने करएत अच्छी.
  130. 8:57–9:02कनुवा उही भ्यभीत अन्तरिक रूप से शोषिट समाजक हिंसक रूप थिक.
  131. 9:02–9:07मुंगाक सब से पैग खत्रा उही समाजक जगगडनस से चल,
  132. 9:07–9:11जे आपन रक्षा के लिल आपने भेटी कगर्दनी काटे लित जार चल.
  133. 9:11–9:14इबिसलिशन बहुत सती कछी,
  134. 9:14–9:20जे कनवा समाजक भाया आत्म सन्रक्षन अक हिंसक रूप चर,
  135. 9:20–9:23मुदा टीक,
  136. 9:23–9:26यते तप प्रेम्ग का वास्तविक सक्ती उजागर होईता ची
  137. 9:26–9:27कोना?
  138. 9:27–9:30जखन मुंगा बली वेदी पर चली है
  139. 9:30–9:34आज जाली मैं बखफत पर पहची आपन भाला से
  140. 9:34–9:36वही महीस पर वार कर अच्छतीन
  141. 9:36–9:39आख कनूवा के मार मुंगा क प्रानद बच्वाई चतीन
  142. 9:39–9:42तो उ केवल कनुवा के नहीं मार रहल चातिन,
  143. 9:42–9:44उ उही समपून शोषित मान्सिक्ता,
  144. 9:44–9:47आ अंद्विस्वास के परास्त कर रहल चातिन.
  145. 9:47–9:48मुदा उ हत्या चल,
  146. 9:48–9:52जालिम को उभाला उही समाजिक भयपर प्रहार चल.
  147. 9:52–9:54आ उकर भाद की होई तची?
  148. 9:54–10:00बोन मैं मुंगाक सिंदूर देवा, बिना कोनो समाजक स्विक्रति, बिना कोनो पन्दितक मन्तरक,
  149. 10:00–10:06इस समाजिक मननताक महताज नहीं रहावाक कते क्रान्तिकार या सहसिक कदम चल.
  150. 10:06–10:09मुदा उ क्रान्तिक कोना भेल, हिन्साक माध्ध्यम सा,
  151. 10:09–10:13उ सिंदूर जक्रा आग्रान्तिकारी कदम कही रहल ची
  152. 10:13–10:14उ कते देल गेल
  153. 10:14–10:15बोन में
  154. 10:15–10:19अ, मुदा कन्वाक लास आमहिसक रक्त के समिप
  155. 10:19–10:22उ बूमी रक्त सानल चल
  156. 10:22–10:25इकोनो नव निरमाणक सहज प्रकति करन नही आची
  157. 10:25–10:30इस्तित्व बच्च्वाख एक ता खोनी संगर्षक परिनाम अची
  158. 10:30–10:33कन्वाक म्रित्यो एक ता और लास जे
  159. 10:33–10:36जे एही प्रेम के नीमाम गाडल जाईता चे
  160. 10:36–10:38मुंगाक अपन समाजक एक ता व्यक्ती
  161. 10:38–10:40मारल जाईता चे
  162. 10:40–10:44जाई सा उ एक तदोसर समाजक व्यक्ती सं जूडी सकती
  163. 10:44–10:45तवाईक्रा की कहब?
  164. 10:45–10:47अईक्रा प्रेम के जीत मानु
  165. 10:47–10:50मुदा हम एक्रा व्यवस्ताक क्रूर्ता मानेच्छी
  166. 10:50–10:55जदे दूटा लोग के एक हेबाक लेल नर संधार करे पडे चै
  167. 10:55–10:59अपन बागत करे च्छी ता जालिम केवल दोसरक रक्त नहीं भहुलनी
  168. 10:59–11:01उआपन रक्त से हो देल हन
  169. 11:01–11:02अआप उता चे
  170. 11:02–11:05उही बोनसद्यकन जालिम मुंगा के आपन गाम रेच्छती
  171. 11:05–11:08आप समाच का सुजा निरभिक्ता सा गूष्ना करे च्छी
  172. 11:08–11:10इई हमर कन्न्या ची
  173. 11:10–11:12जालिम मुंगा के अपन गाम रे चती
  174. 11:12–11:15अद समाच का सुजा निरभिक्ता सा गूशना करे चती
  175. 11:15–11:17इई हमर कन्न्या ची
  176. 11:17–11:19तो उस सदीो पुरान जातिक दिवाला के
  177. 11:19–11:21एक ही दखका में खसा दे चती
  178. 11:21–11:23आएकर परनाम की होई तचे
  179. 11:23–11:25जालिमक अपन भाय, कूर
  180. 11:25–11:26आनने सब भाय
  181. 11:40–11:46अदर बादिक तर बादिक तर प्रजाइज्टी तो वो जागल रही बना कोनो दर का पतिक सेवा करेच्छती
  182. 11:46–11:48इकोनो समाने सेवा नहीं चल
  183. 11:48–11:49तकी चल
  184. 11:49–11:54इम वुंगा द्वारा अपन समरपन के खेख्ता अस्तरक रूप में प्रियोक करप चली
  185. 11:54–11:57अगर रही बिना कोनो दर का पतिक सेवा करे चत्छती
  186. 11:57–11:59इकोनो समाने सेवा नहीं चल
  187. 11:59–12:00तकी चल
  188. 12:00–12:05इम मुंगा दवारा अपन समरपन के के केकेक्ता अस्तरक रूप में प्रियोग करप्चली
  189. 12:05–12:08उआपन सेवा आमान उपस्तिती सा
  190. 12:08–12:18अगर परिनाम देखु अंततता भाई या माए कानत कानत प्रायस्चित करे चति अ दूनुके स्विकार करे चति
  191. 12:18–12:23मुन्गा के अदम में सेवा उही कतर परिवारक नेटिक रुपेन परास्ट कले लक
  192. 12:23–12:27की प्रेमग रिदै परिवर्टन करवाक असीम शक्ती नेटिक
  193. 12:27–12:31अदर्ष्वादी चश्मास से दिखी रहल ची
  194. 12:31–12:35इजे सुखध अंप्जक्रा आहाग कही रहल ची
  195. 12:35–12:38उवास्तो में कतिक सुखध अची
  196. 12:38–12:41विचार करो जे इपरिवारक स्विक्रती कोना बहितल
  197. 12:41–12:44इकोनो उदार वादक परनाम नहें चल
  198. 12:44–12:54इकोनो उदार वादक परनाम नहें चल, इनहें चल जालीमक भाई सब का मन में आचानक सकोनो नव चेतना जागल अ उसब जाती कभेद बहुत यागी देलन.
  199. 12:54–12:56मुदा उस्विकार तक्यलेना?
  200. 12:56–13:02इस्विक्रति विष्च्द्द रूप सग्लानी अप्रादबोद आमान्सिक अगातक परनती चल.
  201. 13:02–13:06मुदा प्राएश्षित तप्राएश्षित होए चाहे उखो खोनो रूप मे आवे.
  202. 13:06–13:08नहीं दूनो में बहुत फरक चाहे.
  203. 13:08–13:15बआई सब जालिमक खुन करभा कबाद ओक्रा मरना सन देखी अप्राद बोध से बभरगेला
  204. 13:15–13:20जकन उवैद्धया के दुरपर पहुचला तो ओप प्रेम के सिद्धान्त के मान के नहीं
  205. 13:20–13:24बलकी अपन बआई के मिट्टु दुवार पर देख कर तुटीगेला
  206. 13:24–13:32समाज खुशी से नहीं बदलल, उक्रा खून के नदी आ अपने ही बहयक मिद्टिओक समझावना देखला के बाद जुकाई पडल.
  207. 13:32–13:33आ, उतो छले?
  208. 13:33–13:39ए परिवरतन नहीं, बलकी त्रासदी से उपन्नब हेल एक ता मानसिक अगात का परिनाम चल.
  209. 13:39–13:44उ गर जते मिलल का उच्सव भेल, उकर भित्ती में पटुक के म्रित्तिओ,
  210. 13:44–13:48कनूवा का वद आज्जालिमक आपन कुन सनाल आची.
  211. 13:48–13:50उ परिवार मुंगा के नहीं आपना रहल चल,
  212. 13:50–13:54उ आपन बहाइ के मरन से बचेबा को एक मातर शर्ट मानी रहल चल.
  213. 13:54–13:56ये एक ता क्हन्दित विजे थेक
  214. 13:56–13:58आग ये तरक बहुत दार्दार अच्छे
  215. 13:58–14:00जे परीवर्तनक उप्रे रक आगाच्छल
  216. 14:00–14:03मुदा मानव, मनवि यान में विषेष्कर काके
  217. 14:03–14:05एक ता जर समाज में
  218. 14:05–14:07परीवर्तन प्राया एहीना आवेच चे
  219. 14:07–14:13जखन लोक आपना क्रुड़ा के चरम परिनाम देखेताची तक हने होकर अंटरात्मा जागरत होई तची.
  220. 14:13–14:18उजे प्रायश्चिट चल, उजे माया भायक नोर चल, उजूटा नहीं चल.
  221. 14:18–14:20आ, जूटा नहीं चल, मुदा...
  222. 14:20–14:24आ, उजी सत्ते उजी प्रेम का अन्तिम विजगे चल.
  223. 14:24–14:28एन आर लगक पहिल भेट जत्टी केवल द्रिष्टी मिलल चल,
  224. 14:28–14:33तो ताई से गरक आंगन दरी पहुच्भा की यात्रा अदम में सहसक द्रिष्टानत थेक.
  225. 14:33–14:40राज्दर्बार का शड्यन्त्र, परमपरा का चेतावनी, बाहुबलक दरप अपरिवार कट्तरता,
  226. 14:40–14:45इस सबता जालेम आमुगा का संकलप का आगा अंततता चिन बहन रोगेल.
  227. 14:45–14:51उगरापर गण्क प्रहार होईचे, जालेम आमुगा करी मिलन, उही अभेद तल्वार थेक.
  228. 14:51–14:55मुदा हमर प्रश्न, उही बड्टी को ताप अगनक चोट पर आची.
  229. 14:55–14:57तल्वार ता बनी गेल, इसत चे.
  230. 14:57–14:59तब आप अगनक छोट पर आची
  231. 14:59–15:02तलवार तब नी गेल इसत चे
  232. 15:02–15:04मुगा अजालिम एक भेल
  233. 15:04–15:07मुदा उही भट्टिक तब से जी जिलका उडल
  234. 15:07–15:09उमे पट्टू जहन निर्दोष जरी गेल
  235. 15:09–15:13जकर अकारन म्रित्त्यो राज दर्बाराक शन्यंत्र निगली गेल
  236. 15:13–15:43वुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  237. 15:43–15:52जे आख परिप्रिखष ए लोग गाता केवल एक ता रोमान्तिक प्रेम कताख श्रेनी सन निकाली का एक ता गंभीर सामाजिक विमर्षक रूप में स्तापित करेताची.
  238. 15:52–15:58गजेंद ताकुर की कता बेतिया राजक उही समय के दिखावे ताची
  239. 15:58–16:03जतै जाती सत्ता अप प्रेम के बीच का संगर्ष बहुत रक्त रनजिच्छल
  240. 16:03–16:09एक दिश यी साभिद करे ताची जे जगन दूनु व्यकती अपन् प्रेम के लिल अडिक बहुजाए चती
  241. 16:09–16:13तो कोनु समाजिक देवाल उनका रोकी नहीं सकेटची.
  242. 16:13–16:16तो सर देश इस पष्ट करे तची,
  243. 16:16–16:19जे एहन क्रानतिक आगी जकन समाज में लगाई चे,
  244. 16:19–16:22तो उही में बहुत रास एहन लोग सो हो भज्म हुईच्छती,
  245. 16:22–16:25जगर उई यूद में कुनो सीथा स्वार्त नहीं चल.
  246. 16:25–16:26एक दम सही.
  247. 16:26–16:28और हम्रा लगे दह ची,
  248. 16:28–16:32जे एई कताक सुन्दर या आत्रासद दूनु एहे मिच है.
  249. 16:32–16:35कुनो अटिहासिक गाता के हम सब एक ता सरल,
  250. 16:35–16:38उजज़वा कारी रंग में नहीं रंगे सकेची.
  251. 16:38–16:43जखन हम जालिम आमुंगाके प्रेम के एक दादर्षक रूप में देखे ची,
  252. 16:43–16:47तहम्रा उही रक्त रनजित मारग के सुहु स्विकार करे परत,
  253. 16:47–16:50जग्रा पाच्ध चोडी कवे तदरी पहुचल चला.
  254. 16:50–16:53आब यह हमर स्रोता सब पर निरभर अची,
  255. 16:53–16:58यह आप आप बद्धिन तब कबनल आदम में तल्वार के देखेख चतिन,
  256. 16:58–17:02जे ना जालिम आ मुंगाक अटूट प्रेम आची,
  257. 17:02–17:05यह आप आप द्धिश्टी उही जरल लोहार काना,
  258. 17:05–17:08आप उही निर्दोष लोकक राक पर जाइत आची,
  259. 17:08–17:11जे एही प्रेम कक चुकलक.
  260. 17:11–17:22बवाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद �

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देबेट में आहां कष्वागत अछि। कलपना करू, एक ता एहन प्रेम कताक जक्रा रोक बाक लेल सम्पूरन राज्दर्बार आपन शव्यंत्रक जाल भिचा दे तचे आज्जते एक ता परम्म्मित्र के सरे आम मदल भीर्ड वारा काती दे जाए तचे इक्दम आज्दे एक्टा बहाई अपनाही बहीं के बोईन्क देवी लग भली देबाक लिल कदग उठा लेते चे आई हम सब गजेंद्र ताकुरक लिखल प्रसिद अटिहासिक गाता मुंगा आज्दालिम्सिंग कपन्ना में प्रवेश करहल चे जे बेतिया राजक प्रिष्ट भूमी मेरचल गेल अचे एक राजपूट सिपाही सर्दार जालिम सिंग आ दूदबन्षी अचात दूसाद जाते की कन्या मुंगाक प्रेम का दस्तावेष थेख सही बात आई एक दा कता अचे बलकी समाजक औही क्रुर देवालक साख्षात वरनन्तिक जक्रा तोडबाक प्रयास में नदिया बही जाईता चे. मुदद दिख हो इं नदी जलक नहीं रक्त कचे. बेतिया राजक औही काल कहन्ट के जाहा दिखव, ते इी कोनो समाने समाज नहीं चल. इक ता एहन लोह कवच जका बनल सामनती वेवस्था चल जते, मतलब जातिक नियम इश्वर्य विदान जका मानल जाएत अचे ता एक ता राजबूद आईक ता दूदबन्सी कन्याक भीच का अकर्षन कोन वस सामान ने वरजना नहीं चल बल की स्तापित राज सत्ता अ समाजिक अनुक्रम पर सीधा राज द्रोज चल. हमर पक्ष यह ची जे यी कता मुलता समाजिक रूरता आस थापित सन्रक्चना की तोडबाक लेलभेल ब्यंकर अनपेखषित संभार अथात कोलाट्रल दमेज का दस्तावेच थेक. अहो! ता आजा के कहाव आची, जे यी केवल त्रास्दी आची, मुता हमर पक्ष एक दिक विप्रीत आची. हमर यी द्रध मानने ता आची, जे यी गाता जालिम, अन, मुंगाक, वक्तिग चुनावक, अग, अन्तिम विजे थिक. इप्रमानित करईत जगगन कोन वक्ती आपन नियती के बदल्वाकले थाड़ बोजाई तची तच्सदियो प�रान क्रूरस् क्रूर व्यवस्ताके सेव गुटना तेकई पडेचे. आहाक इद्रुष्टि कोन बहुत काव्याद्मक अचे. मुदा, خर, हम्रा लेल एक ता ब्रहम थेक, प्रेम के एही आवरनक नीचा निर्दोष लोको के न बली चड़ाई परल, जाले मा मुंगाक प्रेम के स्थापित करबाक लेल समाज अविषेश रुब से हुनक अपल लोकन के जे बारी कीमट चुकावे पडल से ही कता कदवाय अथ फर्त थेक. मुदा एक रानतित लास कषीटी पर नही, बलकी संकलपक नीव पट्हार बेल चल. संकलपक नीव? मोनी भावाक प्रस्शंगता वास्टब में जालीमक उही चेतना के प्रमानित करई तची, जकर हम वकालत करो हल चे. कोना? बावा तवोनका अस्पष्ट मना के निचला? राजा प्रिथवी पालक चुगली सूनी जालीम परक्रुद चला, अज्जालिम आपन मित्र पतुक संग मोनी भाबा लग जाई चत्छतिन, तब भाबा कहे चत्छिन चोडिद मोंगाख संग. मुदा जालिम की करे चत्छिन? उताय मोन रही जाएचे. अ मोन आहा के क्रान्ती लगाई तची? एक दम. इं मून कोनो कायारता नहीं सुचेत विद्रोज्चल इं तीक उहीना चे, जेना कोनो जहाजक कप्तानके बयानक तूफानक चेतावनी बेटेटेटची, मुदा उजानेटची, जो कर जीवन के लक्छ, उकर सत्ते उही तूफानक पार चे. ते उ स्वेच्छा सव उही दिस बड़े तची मोनी भाबा समाजक अस्थापित मानने ताक स्वर चला जाली मक उही चे तावनीक अस्विकार करब वेक्तिवादी सुतन्द्र ताक चरम गूशना चल आहा जाहाजक कप्तानक उप्मा देलूं मुदा सोचु जो खब्तान जखन जिद का का तूफान में जाएत अची तो उ उ ही जहाज पर भैसल निर्दोस यात्री सब के सोथ तदूवा देट अची आँ न, मुदा देखू मोनी भाबा कोनो के वल भविष्वकता नहीं चला जे जादू तोना करे चला उ भेत्या राज्यक समाज शास्त्री चला उ जानेच चला, जे राजा क्रुद्द अची प्रत्वि पाल जेहन दूर्त दर्बारी निरन्तर कान बहरी रहा लाची तब आबग उ वाक्या चोडी दे मुंगाक संग कोन वस समाने सला नहीं चल उ आगा आभे वाला वर्ग संगर्ष अब भ्यंकर रक्त पातक पूर्व सुचना चल. जालिं जाने चला, जो हुनक एक्ता देग उठाभे सब पूरा राज्ज मे आगे लागी जाएत. मुदा उआपन प्रेमक हद्मे उई चितामनी के नजर अंदाज कर दिलन. उ कब्तान्त बची गेला मुदा उही जहाज सक सब सब पहल्यात्री जे दूब गेला उचल पट्टू नहीं मतलव इसरा सर अन्याय है दे जो हम पट्टू के मात्र एकता लाचार यातरी या अन्चाही भली मानी ली लाचार यातरी नहीं ते की चलो? पट्टुक म्रित्यों के केवल एक तात रासदिक रूप में देखब पट्टूक आपन स्वायत्ता के रूप निरनाय के आप मानित करवत्तिक. जालिम के बचेबाक लेल रूप विस्वास पात्र मल्ला पट्टू जे प्रानक भाजी लगो लग, अजातिक सीमा सु उपर उठल मित्रता चरम उदारन थी मुदा पट्टू अकेले मारेल गिला आ, पट्टू प्रिठ्वी पालक बाडाक लोकस अकेले लडल भवानी माताक नाम लोका युद्ध केलक अ प्रिट्ट्वी पालक खुन केलक उ भीड द्वारा मारल गेल इसत्ते चै, मुदा पट्टू अपन स्वतन्त्र इच्चासा लडल चल, उ राज्दर्बारक शड्यन्त्र अब्रस्टाचारा क्हिलाफ सत्ते अनिष्टाक युद्ध्धल लडल, उकर भलिदान जालिम आमुंगाक प्रेम के एक्ता पवित्रता प्रदान के लक। पवित्रता? आहा एक्तर निमनजातिक मलाहक निर्मजात्या के पवित्रता कहे रहल ची, विचार करूजी कते क बहाना कची. शक्तिया वर्ग का असन्तुलन यता एब रहुत सपर्ष्ट थछी पट्टु एक ता मलाज चल मुदा हो जालिम के मित्र से हो चल मित्र चल मुदा समाज शास्तरे द्र्ष्टिकोन सा देख हूता इएक ता शोषित वर्ग प्रतिनिदी के तद्ता सा जुडल प्रेम कथाक वेदिपर भली च़ाबग्थिक प्रिथ्वि पाल जे कुचक्र रची रहल चला उकर मूल निशाना जालिम चला मुदा जालिमक रक्षाक लेल प्रानक कर जाइत अछी पट्वूक की इक ता प्रेम कथाक सफलता लेल आईन निस्वार्त मित्रक निर्मज़्या न्यायोचिच आई? न्यायोचिच तक बात नहीं आची मुदा युद्ध में प्ट्टू उईईद्धख मुल्ले चुकाईत आची जकर शुर्वात उन नहीं केनिचल जखन पट्टु भीड द्वारा मारल जाएतची, तो उ प्रेम के विज़ै नहीं, बेत्या राजक, वेवस्थाक, क्रूर्ताक, चरम नगन रूप होईतची, जदे एक ता उच्जातिक लोकक, विद्रोहक, सजा, सदिकन निचाक लोकन के बुगतोई परेच है. खर, हम माने ची जे बेवस्त्ठ क्रूर चल, अपट्टूक मिर्ट्ट्यो रदेविदारक अची, मुदद पट्टूके कारे के खेवल वरग संगर्ष या शोषितक बलीदानक चच्मा से देखाव, ततकालीन समाज में मित्रताक जे गेराए चल तकर अव मुल्ल्लिन करबे द आज्या आहा इख़ट उग़िज़ि, जे एही प्रेम कर कीमत केवल निमनवर्ग वा दोसर लोग चुकलनाक तकी मुंगा स्वयम कीमत नहीं चुकलनी. जकन मुंगाके, बेतियाक बोन में कनूा लग पधावल गेल, ता उ जीवन के सब संख्ष्ट ख्फनाक संकत में चली. अग कन्वाके चल, उ मुंगाक अपन भाजिक भाई चल, एक दम सतिक ठाम पर हाई बात उठोला हूं. जब पत्टु रास्दर्बारक सदान्द से लडल, ता मुंगाके ककर सामना करे पडल, खुदे आपन लोकक, और इते कनवाक चरित्रक यतार्त भूजनाए बहुत आवष्षक अची. सवाम अन्दूद आएक्ता रस्सिक आहार, बागग शिकार करेवला महीस पर सवारी इक कनवाकोनो समाने कलनाएक नहीं थेक. उता एक ता देट्तेजे का चल. उ मुंगा के बूनक देवी लग बली दिवाक तयारी कर रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा रहा � तो उ समाज बहईभीत बहजाई ता ची आचा तो आहाक कह बची जे उ दरक कारन्चल आँ उ जाएने ता ची जे जा मुंगा राजपुत सरदार के संग भागली हा तर राज दरबार खध कहर पुरा दूद बन्सी समाज पर खषत तें उच्ज जातिक प्रतिशोद़़ से बच्भा के लिल, उ समाज अपने सदसके बली दिबाक निरने करएत अच्छी. कनुवा उही भ्यभीत अन्तरिक रूप से शोषिट समाजक हिंसक रूप थिक. मुंगाक सब से पैग खत्रा उही समाजक जगगडनस से चल, जे आपन रक्षा के लिल आपने भेटी कगर्दनी काटे लित जार चल. इबिसलिशन बहुत सती कछी, जे कनवा समाजक भाया आत्म सन्रक्षन अक हिंसक रूप चर, मुदा टीक, यते तप प्रेम्ग का वास्तविक सक्ती उजागर होईता ची कोना? जखन मुंगा बली वेदी पर चली है आज जाली मैं बखफत पर पहची आपन भाला से वही महीस पर वार कर अच्छतीन आख कनूवा के मार मुंगा क प्रानद बच्वाई चतीन तो उ केवल कनुवा के नहीं मार रहल चातिन, उ उही समपून शोषित मान्सिक्ता, आ अंद्विस्वास के परास्त कर रहल चातिन. मुदा उ हत्या चल, जालिम को उभाला उही समाजिक भयपर प्रहार चल. आ उकर भाद की होई तची? बोन मैं मुंगाक सिंदूर देवा, बिना कोनो समाजक स्विक्रति, बिना कोनो पन्दितक मन्तरक, इस समाजिक मननताक महताज नहीं रहावाक कते क्रान्तिकार या सहसिक कदम चल. मुदा उ क्रान्तिक कोना भेल, हिन्साक माध्ध्यम सा, उ सिंदूर जक्रा आग्रान्तिकारी कदम कही रहल ची उ कते देल गेल बोन में अ, मुदा कन्वाक लास आमहिसक रक्त के समिप उ बूमी रक्त सानल चल इकोनो नव निरमाणक सहज प्रकति करन नही आची इस्तित्व बच्च्वाख एक ता खोनी संगर्षक परिनाम अची कन्वाक म्रित्यो एक ता और लास जे जे एही प्रेम के नीमाम गाडल जाईता चे मुंगाक अपन समाजक एक ता व्यक्ती मारल जाईता चे जाई सा उ एक तदोसर समाजक व्यक्ती सं जूडी सकती तवाईक्रा की कहब? अईक्रा प्रेम के जीत मानु मुदा हम एक्रा व्यवस्ताक क्रूर्ता मानेच्छी जदे दूटा लोग के एक हेबाक लेल नर संधार करे पडे चै अपन बागत करे च्छी ता जालिम केवल दोसरक रक्त नहीं भहुलनी उआपन रक्त से हो देल हन अआप उता चे उही बोनसद्यकन जालिम मुंगा के आपन गाम रेच्छती आप समाच का सुजा निरभिक्ता सा गूष्ना करे च्छी इई हमर कन्न्या ची जालिम मुंगा के अपन गाम रे चती अद समाच का सुजा निरभिक्ता सा गूशना करे चती इई हमर कन्न्या ची तो उस सदीो पुरान जातिक दिवाला के एक ही दखका में खसा दे चती आएकर परनाम की होई तचे जालिमक अपन भाय, कूर आनने सब भाय अदर बादिक तर बादिक तर प्रजाइज्टी तो वो जागल रही बना कोनो दर का पतिक सेवा करेच्छती इकोनो समाने सेवा नहीं चल तकी चल इम वुंगा द्वारा अपन समरपन के खेख्ता अस्तरक रूप में प्रियोक करप चली अगर रही बिना कोनो दर का पतिक सेवा करे चत्छती इकोनो समाने सेवा नहीं चल तकी चल इम मुंगा दवारा अपन समरपन के के केकेक्ता अस्तरक रूप में प्रियोग करप्चली उआपन सेवा आमान उपस्तिती सा अगर परिनाम देखु अंततता भाई या माए कानत कानत प्रायस्चित करे चति अ दूनुके स्विकार करे चति मुन्गा के अदम में सेवा उही कतर परिवारक नेटिक रुपेन परास्ट कले लक की प्रेमग रिदै परिवर्टन करवाक असीम शक्ती नेटिक अदर्ष्वादी चश्मास से दिखी रहल ची इजे सुखध अंप्जक्रा आहाग कही रहल ची उवास्तो में कतिक सुखध अची विचार करो जे इपरिवारक स्विक्रती कोना बहितल इकोनो उदार वादक परनाम नहें चल इकोनो उदार वादक परनाम नहें चल, इनहें चल जालीमक भाई सब का मन में आचानक सकोनो नव चेतना जागल अ उसब जाती कभेद बहुत यागी देलन. मुदा उस्विकार तक्यलेना? इस्विक्रति विष्च्द्द रूप सग्लानी अप्रादबोद आमान्सिक अगातक परनती चल. मुदा प्राएश्षित तप्राएश्षित होए चाहे उखो खोनो रूप मे आवे. नहीं दूनो में बहुत फरक चाहे. बआई सब जालिमक खुन करभा कबाद ओक्रा मरना सन देखी अप्राद बोध से बभरगेला जकन उवैद्धया के दुरपर पहुचला तो ओप प्रेम के सिद्धान्त के मान के नहीं बलकी अपन बआई के मिट्टु दुवार पर देख कर तुटीगेला समाज खुशी से नहीं बदलल, उक्रा खून के नदी आ अपने ही बहयक मिद्टिओक समझावना देखला के बाद जुकाई पडल. आ, उतो छले? ए परिवरतन नहीं, बलकी त्रासदी से उपन्नब हेल एक ता मानसिक अगात का परिनाम चल. उ गर जते मिलल का उच्सव भेल, उकर भित्ती में पटुक के म्रित्तिओ, कनूवा का वद आज्जालिमक आपन कुन सनाल आची. उ परिवार मुंगा के नहीं आपना रहल चल, उ आपन बहाइ के मरन से बचेबा को एक मातर शर्ट मानी रहल चल. ये एक ता क्हन्दित विजे थेक आग ये तरक बहुत दार्दार अच्छे जे परीवर्तनक उप्रे रक आगाच्छल मुदा मानव, मनवि यान में विषेष्कर काके एक ता जर समाज में परीवर्तन प्राया एहीना आवेच चे जखन लोक आपना क्रुड़ा के चरम परिनाम देखेताची तक हने होकर अंटरात्मा जागरत होई तची. उजे प्रायश्चिट चल, उजे माया भायक नोर चल, उजूटा नहीं चल. आ, जूटा नहीं चल, मुदा... आ, उजी सत्ते उजी प्रेम का अन्तिम विजगे चल. एन आर लगक पहिल भेट जत्टी केवल द्रिष्टी मिलल चल, तो ताई से गरक आंगन दरी पहुच्भा की यात्रा अदम में सहसक द्रिष्टानत थेक. राज्दर्बार का शड्यन्त्र, परमपरा का चेतावनी, बाहुबलक दरप अपरिवार कट्तरता, इस सबता जालेम आमुगा का संकलप का आगा अंततता चिन बहन रोगेल. उगरापर गण्क प्रहार होईचे, जालेम आमुगा करी मिलन, उही अभेद तल्वार थेक. मुदा हमर प्रश्न, उही बड्टी को ताप अगनक चोट पर आची. तल्वार ता बनी गेल, इसत चे. तब आप अगनक छोट पर आची तलवार तब नी गेल इसत चे मुगा अजालिम एक भेल मुदा उही भट्टिक तब से जी जिलका उडल उमे पट्टू जहन निर्दोष जरी गेल जकर अकारन म्रित्त्यो राज दर्बाराक शन्यंत्र निगली गेल वुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� जे आख परिप्रिखष ए लोग गाता केवल एक ता रोमान्तिक प्रेम कताख श्रेनी सन निकाली का एक ता गंभीर सामाजिक विमर्षक रूप में स्तापित करेताची. गजेंद ताकुर की कता बेतिया राजक उही समय के दिखावे ताची जतै जाती सत्ता अप प्रेम के बीच का संगर्ष बहुत रक्त रनजिच्छल एक दिश यी साभिद करे ताची जे जगन दूनु व्यकती अपन् प्रेम के लिल अडिक बहुजाए चती तो कोनु समाजिक देवाल उनका रोकी नहीं सकेटची. तो सर देश इस पष्ट करे तची, जे एहन क्रानतिक आगी जकन समाज में लगाई चे, तो उही में बहुत रास एहन लोग सो हो भज्म हुईच्छती, जगर उई यूद में कुनो सीथा स्वार्त नहीं चल. एक दम सही. और हम्रा लगे दह ची, जे एई कताक सुन्दर या आत्रासद दूनु एहे मिच है. कुनो अटिहासिक गाता के हम सब एक ता सरल, उजज़वा कारी रंग में नहीं रंगे सकेची. जखन हम जालिम आमुंगाके प्रेम के एक दादर्षक रूप में देखे ची, तहम्रा उही रक्त रनजित मारग के सुहु स्विकार करे परत, जग्रा पाच्ध चोडी कवे तदरी पहुचल चला. आब यह हमर स्रोता सब पर निरभर अची, यह आप आप बद्धिन तब कबनल आदम में तल्वार के देखेख चतिन, जे ना जालिम आ मुंगाक अटूट प्रेम आची, यह आप आप द्धिश्टी उही जरल लोहार काना, आप उही निर्दोष लोकक राक पर जाइत आची, जे एही प्रेम कक चुकलक. बवाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद �

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