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बिहुला_कथाक_संरचना_आ_पात्रक_मनोवैज्ञानिक_द्वन्द्व.m4a

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Part 10 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 10
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  1. 0:00–0:06आई हम सब गजेंद्र ताकृवर द्वारा समपादित बिहुला कताक समिक्षा कर रहल ची,
  2. 0:06–0:13जते चान सवदागरक शिवबख्ती आ देवी मन्साक हतक महाक काव्यात्मक संगर्ष अची.
  3. 0:13–0:16हा, ए अदहर भूट समगरी बहुत शवक्त छे.
  4. 0:16–0:27इक्दम, तब बिनाकोनो विलंबक, हमर पहल समिक्षा सीधे कताक सन्रच्चना और फोकस पर अची, कारन इश्वरूस अ असन्तुलित लागाई तची.
  5. 0:27–0:35आ, एक दम सही कहली, मुक्छ्य कताक विकास और शीर्षक कब इच एक ता बहुत अस्पष्ट असन्तुलन बुजाईत छे.
  6. 0:35–0:40माने जे पात्राक नाम पर यस समपूरन कताचे उकर प्रवेश्ता,
  7. 0:40–0:44उकर प्रवेश कताक प्रारंभिक चरन में कताउ छतीय नही,
  8. 0:44–0:51कमजोरी ये आचे, जे कताक शीर्षक भिहुला आचे, और प्रस्ताणना से हो, हुंकर भलीदानक महीमागावे तची.
  9. 0:51–0:58आई तचे, मुदा अद्याए 105 दरी बिहुलाक कोनो आते पते नहीं आचे.
  10. 0:58–1:03भिल्कुल, पूरा पोकस केवल चान सवदागर और मन्साक हद्पर अच्छे.
  11. 1:03–1:05पाथक जे करा खोजी रोहल अच्छी,
  12. 1:05–1:08उही मुख्य पात्राक अनुपस्तिती से,
  13. 1:08–1:10कताक मुख्य उदेश्छे भटकल बुजाई तच्छे.
  14. 1:10–1:13माने लखिन्दरक जन्नक संगे,
  15. 1:13–1:43अगर बगरी हदिस जाएत काल अदर प्रजाएत दिखाएत नादा प्रजाएत प्रजाएत बाद्खाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प
  16. 1:43–1:46उही मुक्ये देव्ताक उपस्तिती सर्वत्र भूजाई बाक चाही
  17. 1:47–1:50मुदा उते पूछबा से पहले जब भाट भद्की जाई
  18. 1:51–1:53तदरशनार थी भ्रमित भोजाई तच्छी
  19. 1:53–1:56इछ मन्दिल का द्रिष्तानत एक दम सती कची
  20. 1:56–2:00यह कारन अची जे पहल प्रावगन से गरभ गरी हक अबहस हैबाख चाही
  21. 2:00–2:03ता एकर लेल की सुजहावा चाहाव?
  22. 2:03–2:09दिको सुजहाव यह जे कताख आरमभिक दहाचा मनोकर जे फ्रेमिग अची वे में बदलाओ कईल जाये
  23. 2:09–2:16जाहिर से भीहुला कु पस्तिती अवकर भविश्यक भूमिकाक अबास पाथक के पहल अद्ध्याय से हेबाक चाही.
  24. 2:16–2:22अच्छ, तए एकर कोनो तो सुदारन दसके ची, जेना लेखके करा कोना लागु कर अद्धी?
  25. 2:22–2:28उदारन कलेल अद्याय एक को आरंब सीदे बिहुलाक द्रिष्टी से कयल जासकता ची.
  26. 2:28–2:34मने बिहुला नदिक कात में ठाडी बाकड, चंपानगरक उज्रल अवस्ताके देखी रहल चातिन.
  27. 2:34–2:46अदे सं उ आपन ससुर मने चान सवदागर आम मनसक पूरान कता के एक ता फलाष्बाग के रूप में सूनावेच चथिन. जाई से पाथख के पहल पन्नापर भीहुला बेट जाएत.
  28. 2:46–2:50बिहुलाग प्रवेश कलेल एक ता मस्वूत जमीन पहीले से तैयार बहुड़ाएत.
  29. 2:50–2:53अहो, यह तो बहुत गजब कवी जार अचे,
  30. 2:53–2:56वा एक ता अवर पिकल्प से हो भासके तची,
  31. 2:56–3:00जखन चान सवदागरक सातू बेटाक म्रुत्तिक वरनन अचे,
  32. 3:00–3:08जोडल जासके तछी, जे इशाप वा मन्साक इग्क्रोद तखने मितत जगन कोनो सती मिरित्य। के दार में उत्रत.
  33. 3:08–3:17बलकुल, एक्रा प्वर्श्य डोइं कहल जाएच्छी भूजलिये, जाएचे भिहुलाक प्रवेश कलेल एक ता मस्वूत जमीन पहिले से तयार भोजाएच.
  34. 3:17–3:20एक्दम सही, जै इस सन्तुलन नहीं बनायल गेल,
  35. 3:20–3:23तब पाथक जे बहावनात्मक निवेश करहल अच्छे,
  36. 3:23–3:26उक्रा भिहुलाक प्रवेजद्धरी जोड कराखभ गत्धिन बहुजाइत.
  37. 3:26–3:29तब आब हमर दोसर समिक्षा एचे,
  38. 3:29–3:31जे चान्द आ मन्साक द्वंद के,
  39. 3:31–3:34आरो तारकिक आ मोलिक बनेवाक वश्वता आची
  40. 3:34–3:39माने हुँँक लोक निक हद्ख के पाचा कोनो मनो वैज्यानिक ग़राई नहीं आची
  41. 3:39–3:42आची इद बहुत महत्पुरन बिन्दू आची
  42. 3:42–3:45कमजोरी यही आची जबर्टमान पाट में
  43. 3:45–3:52मन्साक पुजाग चाहत, अचान सवदागर का इनकार, दूनो मात्र अक्ष्छन रीअक्षन जकान लागे तची.
  44. 3:52–3:56जेना दूनो पात्र अपनपन ठाम पर अत्यंत जिद्दी चाती.
  45. 3:56–4:02एक गोटे केवल शिव का बख्ट चाती, अदोसर के केवल पुजा चाही.
  46. 4:02–4:11भिल्कुल! मन्साक म्रित्तिलोक एबाक जे कारना ची, जे कालाश मे हम्रा के पुचे तची, उ केवल एक ता बच्काना आंकार भेशी भुजाते कची.
  47. 4:11–4:16आदो सर दीस चान्द का हत्फ में कोनो अन्द्रिक उठल्पुषल नहीं आची.
  48. 4:16–4:21इता एक ता सद्दारन कता कनायक, कलनायक वला सीदादाईचा तएर करे तची.
  49. 4:21–4:25जाई से कता के बहुनात्मक गेराई कम बजाई तची.
  50. 4:25–4:31पाथक एक ता देउताक बिना कारन क्रोद से कोनो सहनबूती ने राखी सके तची.
  51. 4:31–4:33एक रा हम एक ता उदाहरन से देखे थची.
  52. 4:33–4:39कल पना करु जे कोनो चित्रकार अपने जीवन का सरवष्रेष्ट चित्र बनाबो.
  53. 4:39–4:42मुदा कोनो कदर्षनी में उक्रा एक ता अनहार कोना में राखी देल जाए,
  54. 4:42–4:45जटे कोनो दर्षक उक्रा देखी ने सके.
  55. 4:45–4:50आँ, उही चित्र कारग भीतर, जे उपेख्षाक सन्ताप होएच चे,
  56. 4:50–4:55जे चथ पता हथ होएच, उही क्रोद सव उकी नहीं को सके तचे.
  57. 4:55–4:57मन्सा के स्तिति से होता यहान अचे.
  58. 4:57–5:27शिवक पुत्री हुबाक बादू, हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  59. 5:27–5:32वो दल जासके तची, जदे हुनका वास्तब में उपेखषित महसुस करावल गेल हो.
  60. 5:32–5:38माने हुनका पूजक भूख केवल आप आगकार नहीं, बलकी अस्तितवक संगर्ष भूजाए.
  61. 5:38–5:43राद, पाथक सोचीत जे उकरा क्रोदख पाच्ठा एक तदर्द थची.
  62. 5:43–5:52अचान्द सवदागर के संदरव में, जकन हुनका सातो बेटाक म्रित्यो होई तची, तकन हुनका वीतर एक छन लेल संशे देखावल जासके तची.
  63. 5:52–6:01औ, मने उ तूटीजा थी, मन्साक अगा जुखबाक विचार कर थे, मुदा फेर तुरनत इश सोची कथार भजा थी,
  64. 6:01–6:07जे दरा संक कयल गेल पूजा उनका जीवन भरीक शिव भक्तिक अर्द्हीं कदेत.
  65. 6:07–6:15एक दम इज आत्म मंतन होए चे उनिरने हुनका केवल एक ता जिद्दी बुडवास अब भडली का एक ता महनायक बना देत.
  66. 6:15–6:20इचोड चोड बाद पात्रक मनोवेग्यानेक के जिवन तको देत.
  67. 6:20–6:26बुजली है, इच्ट नव उचाए दर है लची.
  68. 6:26–6:29आप जे मनोवेग्यानेक गेराई बड़ावल जाए,
  69. 6:29–6:33तकन उही त्रासदीक असर से हो, तो पाटख पर भेसी है बाख चाही.
  70. 6:33–6:35आप, उट आचे.
  71. 6:35–6:40तो हमर तेसर समिक्षा कताक गती मने पेसिंग पर आची
  72. 6:40–6:45अद्याय चारा पाच मे गखतना सपक गती बहुत तेज आची
  73. 6:45–6:49अद्याय चारा पाच मे जे विपत्तिक पहाड खध खध आची
  74. 6:49–6:55उकर भावनात्मक प्रभावक लेल गतनाक्रमक गती में ताराव अविस्तारक आवशकता आचे
  75. 6:55–7:01माने, कमजोरी इए ची जे विपतिक वरनन बूलक पोईंज़का कैल गेल आची
  76. 7:01–7:10बलकुल, सात भेटा सात लाश, सात चिता गात, अलगले चोदा हो जाज एक एक कप पानिक पेट में समागेल.
  77. 7:10–7:20इस सब गतना एते एक जल्दी गडित होई तचे, जे पाथक के शोग मने बाक वा उही विनाशाक गंभीरता के महसुस कर वाख समैने बेटाट अचे.
  78. 7:20–7:25अगटना तेज़ होई बास्वत रासदिक गामभीर्ये नस्ट बहुर अहलाची
  79. 7:25–7:29आहा जे कहल हूँ, उक्रा हम बूले ट्रेन्वाला द्रस्टान्से जोडेई ची
  80. 7:29–7:34जक्हन कोनु रेलगाडी बहुत तीवर गती से गुज्रे त
  81. 7:34–7:38तखिडकी से बहारक दिश्य मात्रेक्ता दुंदला रंजगा का बुजही तचे
  82. 7:38–7:42आहा उते थार गाज वा पानी स्पष्ट नहीं देखी सके थची
  83. 7:42–7:48बलकोल एही कता मे से हो विपती एटेक तीवर गती से गुज्री रहाल आची
  84. 7:48–7:53जे पाटख उही त्रास्दिक दुख स्पष्ट रूप से महसुस नहीं कर पबेत अची
  85. 7:53–7:57सात ता भेटाक म्रत्टिव कुनो सादारन गटना नहीं जे
  86. 7:57–7:59एक दम सही
  87. 7:59–8:03तो सुजाओ यह अची जगन कता मुखइ त्रास्टिक बिन्दूपर पहुचेद
  88. 8:03–8:11तखन कत्हाग गती के दीमा कयल जाए, और शारिरिक मानसिक चाती के वरननात्मक रुब से प्रस्तूत कयल जाए.
  89. 8:11–8:17तएकर कोनो तो सुदारन दी, जिना सात बेटाक म्रित्यो भेल तखन लेखख के कर थे?
  90. 8:17–8:20अख्रा इक तन्व अनुच्छेद में वरनित कयल जासा के तचे.
  91. 8:20–8:23जेना चंपानगर कोही सून्सान भेल आंगनक द्रिष्ज जते दूवाक गंद्भसल अचे.
  92. 8:23–8:27अखरा एक ता नव अनुच्छेद में वरनित कयल जासकेटछे
  93. 8:27–8:33जे ना चंपा नगर कोही सून्सान भेल आंगनक द्रिश्छ जते दूवाक गंद्भसल अच्छे
  94. 8:33–8:37आआ जते न नगर वासिक फुस-फुसाहत मात्र आच्छी
  95. 8:37–8:49अगी में से हो, जखन जखाज दुबाई तची, तकन केवल जगाज दुबल केबाग बढला चान्द सोदागर के द्रिष्टी सा समुद्द्री लठर के औही ब्यानक रूप के देखाउ.
  96. 8:49–8:59वो जगन जाहाज दूबः तची तखन केवल जाहाज दूबल केवाग बदला चान्द सोदागर के द्रिष्टी सा समुद्द्री लहर के औही भ्यानक रुप के देखाओ.
  97. 8:59–9:07माने हुनका सबह सप्रीय जहाजक तूटव, बिख्रब देखाओ जैसव उही की कंगालिक दर्ध साएक्षात बहुऽ सके.
  98. 9:07–9:16बिल्ल्कु, उ चोडा जहाज केवल काट का तुक्डा नी चल, उ हुनक प्रतिष्टा, अश्व भक्तिक उ आहंकार चल, जाई पर उ ठार चला.
  99. 9:16–9:28इत बूद मार्मिक अची दूख गहीराई जटेक भेसी होएत, पाटक उही अंदार मे जटेक समए बेतीत करत, तक्हन लक्हिंदर के जन्मक प्रभाओ उत्बे शक्तिषाली होएत.
  100. 9:28–9:34एक्दम सत्ते जखन पाथक चान सवदागरक संगे उही समपुरन सुन्यता के महसुस कर लेद
  101. 9:34–9:40तक्ने लक्हिन्दर के जनम के जे आस्क छिन्गी अची उबेसी प्रकाश्मान बुजाएद
  102. 9:40–9:43यी विमच बहत गहीर असार्थक लागल
  103. 9:43–9:45इगथा अद्खादा वास्तमे उद्क्रिष्त अची,
  104. 9:45–9:49मुदा आई हम सब जे मुख्य बिन्दूपर चर्चा के लूए,
  105. 9:49–9:51उकर एक भेर साराव्ष राखी देची.
  106. 9:51–9:52आए, एक दम.
  107. 9:52–9:56पहल, कठाक आरंभ में भिहलाक उपस्तिती के स्थापित करव,
  108. 9:56–10:00जैसे सीर्षक आग कताग सन्तुलन बनल है
  109. 10:00–10:04आदो सर चान्द सवदागर आमन्साक हत्ख पाचा
  110. 10:04–10:07मनोवैग्यनिक दुन्दों के सपष्ट करव
  111. 10:07–10:10जैसा पात्र अदिक मानवीए भुजाभे
  112. 10:10–10:14आते सर त्रासदी खतना सबख गती के दीमा कख
  113. 10:14–10:17अकर बावनात्मक प्रभाव के बड़ाव,
  114. 10:17–10:22जैसब पाथक उही विनाशाक दर्द के सक्षात महसुऽ कषके.
  115. 10:22–10:24हम्रा पोरन विश्वास अची,
  116. 10:24–10:29जे इसब सुजाव निष्चित रूपेन कता के आरोग गहीर आसम्मोहक बनावत.
  117. 10:29–10:46अम लेखा कषम्पादक के इहावान करेच्छी जे आहा इसब भधलाव कगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग�

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आई हम सब गजेंद्र ताकृवर द्वारा समपादित बिहुला कताक समिक्षा कर रहल ची, जते चान सवदागरक शिवबख्ती आ देवी मन्साक हतक महाक काव्यात्मक संगर्ष अची. हा, ए अदहर भूट समगरी बहुत शवक्त छे. इक्दम, तब बिनाकोनो विलंबक, हमर पहल समिक्षा सीधे कताक सन्रच्चना और फोकस पर अची, कारन इश्वरूस अ असन्तुलित लागाई तची. आ, एक दम सही कहली, मुक्छ्य कताक विकास और शीर्षक कब इच एक ता बहुत अस्पष्ट असन्तुलन बुजाईत छे. माने जे पात्राक नाम पर यस समपूरन कताचे उकर प्रवेश्ता, उकर प्रवेश कताक प्रारंभिक चरन में कताउ छतीय नही, कमजोरी ये आचे, जे कताक शीर्षक भिहुला आचे, और प्रस्ताणना से हो, हुंकर भलीदानक महीमागावे तची. आई तचे, मुदा अद्याए 105 दरी बिहुलाक कोनो आते पते नहीं आचे. भिल्कुल, पूरा पोकस केवल चान सवदागर और मन्साक हद्पर अच्छे. पाथक जे करा खोजी रोहल अच्छी, उही मुख्य पात्राक अनुपस्तिती से, कताक मुख्य उदेश्छे भटकल बुजाई तच्छे. माने लखिन्दरक जन्नक संगे, अगर बगरी हदिस जाएत काल अदर प्रजाएत दिखाएत नादा प्रजाएत प्रजाएत बाद्खाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प्रजाएत नादा प उही मुक्ये देव्ताक उपस्तिती सर्वत्र भूजाई बाक चाही मुदा उते पूछबा से पहले जब भाट भद्की जाई तदरशनार थी भ्रमित भोजाई तच्छी इछ मन्दिल का द्रिष्तानत एक दम सती कची यह कारन अची जे पहल प्रावगन से गरभ गरी हक अबहस हैबाख चाही ता एकर लेल की सुजहावा चाहाव? दिको सुजहाव यह जे कताख आरमभिक दहाचा मनोकर जे फ्रेमिग अची वे में बदलाओ कईल जाये जाहिर से भीहुला कु पस्तिती अवकर भविश्यक भूमिकाक अबास पाथक के पहल अद्ध्याय से हेबाक चाही. अच्छ, तए एकर कोनो तो सुदारन दसके ची, जेना लेखके करा कोना लागु कर अद्धी? उदारन कलेल अद्याय एक को आरंब सीदे बिहुलाक द्रिष्टी से कयल जासकता ची. मने बिहुला नदिक कात में ठाडी बाकड, चंपानगरक उज्रल अवस्ताके देखी रहल चातिन. अदे सं उ आपन ससुर मने चान सवदागर आम मनसक पूरान कता के एक ता फलाष्बाग के रूप में सूनावेच चथिन. जाई से पाथख के पहल पन्नापर भीहुला बेट जाएत. बिहुलाग प्रवेश कलेल एक ता मस्वूत जमीन पहीले से तैयार बहुड़ाएत. अहो, यह तो बहुत गजब कवी जार अचे, वा एक ता अवर पिकल्प से हो भासके तची, जखन चान सवदागरक सातू बेटाक म्रुत्तिक वरनन अचे, जोडल जासके तछी, जे इशाप वा मन्साक इग्क्रोद तखने मितत जगन कोनो सती मिरित्य। के दार में उत्रत. बलकुल, एक्रा प्वर्श्य डोइं कहल जाएच्छी भूजलिये, जाएचे भिहुलाक प्रवेश कलेल एक ता मस्वूत जमीन पहिले से तयार भोजाएच. एक्दम सही, जै इस सन्तुलन नहीं बनायल गेल, तब पाथक जे बहावनात्मक निवेश करहल अच्छे, उक्रा भिहुलाक प्रवेजद्धरी जोड कराखभ गत्धिन बहुजाइत. तब आब हमर दोसर समिक्षा एचे, जे चान्द आ मन्साक द्वंद के, आरो तारकिक आ मोलिक बनेवाक वश्वता आची माने हुँँक लोक निक हद्ख के पाचा कोनो मनो वैज्यानिक ग़राई नहीं आची आची इद बहुत महत्पुरन बिन्दू आची कमजोरी यही आची जबर्टमान पाट में मन्साक पुजाग चाहत, अचान सवदागर का इनकार, दूनो मात्र अक्ष्छन रीअक्षन जकान लागे तची. जेना दूनो पात्र अपनपन ठाम पर अत्यंत जिद्दी चाती. एक गोटे केवल शिव का बख्ट चाती, अदोसर के केवल पुजा चाही. भिल्कुल! मन्साक म्रित्तिलोक एबाक जे कारना ची, जे कालाश मे हम्रा के पुचे तची, उ केवल एक ता बच्काना आंकार भेशी भुजाते कची. आदो सर दीस चान्द का हत्फ में कोनो अन्द्रिक उठल्पुषल नहीं आची. इता एक ता सद्दारन कता कनायक, कलनायक वला सीदादाईचा तएर करे तची. जाई से कता के बहुनात्मक गेराई कम बजाई तची. पाथक एक ता देउताक बिना कारन क्रोद से कोनो सहनबूती ने राखी सके तची. एक रा हम एक ता उदाहरन से देखे थची. कल पना करु जे कोनो चित्रकार अपने जीवन का सरवष्रेष्ट चित्र बनाबो. मुदा कोनो कदर्षनी में उक्रा एक ता अनहार कोना में राखी देल जाए, जटे कोनो दर्षक उक्रा देखी ने सके. आँ, उही चित्र कारग भीतर, जे उपेख्षाक सन्ताप होएच चे, जे चथ पता हथ होएच, उही क्रोद सव उकी नहीं को सके तचे. मन्सा के स्तिति से होता यहान अचे. शिवक पुत्री हुबाक बादू, हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� वो दल जासके तची, जदे हुनका वास्तब में उपेखषित महसुस करावल गेल हो. माने हुनका पूजक भूख केवल आप आगकार नहीं, बलकी अस्तितवक संगर्ष भूजाए. राद, पाथक सोचीत जे उकरा क्रोदख पाच्ठा एक तदर्द थची. अचान्द सवदागर के संदरव में, जकन हुनका सातो बेटाक म्रित्यो होई तची, तकन हुनका वीतर एक छन लेल संशे देखावल जासके तची. औ, मने उ तूटीजा थी, मन्साक अगा जुखबाक विचार कर थे, मुदा फेर तुरनत इश सोची कथार भजा थी, जे दरा संक कयल गेल पूजा उनका जीवन भरीक शिव भक्तिक अर्द्हीं कदेत. एक दम इज आत्म मंतन होए चे उनिरने हुनका केवल एक ता जिद्दी बुडवास अब भडली का एक ता महनायक बना देत. इचोड चोड बाद पात्रक मनोवेग्यानेक के जिवन तको देत. बुजली है, इच्ट नव उचाए दर है लची. आप जे मनोवेग्यानेक गेराई बड़ावल जाए, तकन उही त्रासदीक असर से हो, तो पाटख पर भेसी है बाख चाही. आप, उट आचे. तो हमर तेसर समिक्षा कताक गती मने पेसिंग पर आची अद्याय चारा पाच मे गखतना सपक गती बहुत तेज आची अद्याय चारा पाच मे जे विपत्तिक पहाड खध खध आची उकर भावनात्मक प्रभावक लेल गतनाक्रमक गती में ताराव अविस्तारक आवशकता आचे माने, कमजोरी इए ची जे विपतिक वरनन बूलक पोईंज़का कैल गेल आची बलकुल, सात भेटा सात लाश, सात चिता गात, अलगले चोदा हो जाज एक एक कप पानिक पेट में समागेल. इस सब गतना एते एक जल्दी गडित होई तचे, जे पाथक के शोग मने बाक वा उही विनाशाक गंभीरता के महसुस कर वाख समैने बेटाट अचे. अगटना तेज़ होई बास्वत रासदिक गामभीर्ये नस्ट बहुर अहलाची आहा जे कहल हूँ, उक्रा हम बूले ट्रेन्वाला द्रस्टान्से जोडेई ची जक्हन कोनु रेलगाडी बहुत तीवर गती से गुज्रे त तखिडकी से बहारक दिश्य मात्रेक्ता दुंदला रंजगा का बुजही तचे आहा उते थार गाज वा पानी स्पष्ट नहीं देखी सके थची बलकोल एही कता मे से हो विपती एटेक तीवर गती से गुज्री रहाल आची जे पाटख उही त्रास्दिक दुख स्पष्ट रूप से महसुस नहीं कर पबेत अची सात ता भेटाक म्रत्टिव कुनो सादारन गटना नहीं जे एक दम सही तो सुजाओ यह अची जगन कता मुखइ त्रास्टिक बिन्दूपर पहुचेद तखन कत्हाग गती के दीमा कयल जाए, और शारिरिक मानसिक चाती के वरननात्मक रुब से प्रस्तूत कयल जाए. तएकर कोनो तो सुदारन दी, जिना सात बेटाक म्रित्यो भेल तखन लेखख के कर थे? अख्रा इक तन्व अनुच्छेद में वरनित कयल जासा के तचे. जेना चंपानगर कोही सून्सान भेल आंगनक द्रिष्ज जते दूवाक गंद्भसल अचे. अखरा एक ता नव अनुच्छेद में वरनित कयल जासकेटछे जे ना चंपा नगर कोही सून्सान भेल आंगनक द्रिश्छ जते दूवाक गंद्भसल अच्छे आआ जते न नगर वासिक फुस-फुसाहत मात्र आच्छी अगी में से हो, जखन जखाज दुबाई तची, तकन केवल जगाज दुबल केबाग बढला चान्द सोदागर के द्रिष्टी सा समुद्द्री लठर के औही ब्यानक रूप के देखाउ. वो जगन जाहाज दूबः तची तखन केवल जाहाज दूबल केवाग बदला चान्द सोदागर के द्रिष्टी सा समुद्द्री लहर के औही भ्यानक रुप के देखाओ. माने हुनका सबह सप्रीय जहाजक तूटव, बिख्रब देखाओ जैसव उही की कंगालिक दर्ध साएक्षात बहुऽ सके. बिल्ल्कु, उ चोडा जहाज केवल काट का तुक्डा नी चल, उ हुनक प्रतिष्टा, अश्व भक्तिक उ आहंकार चल, जाई पर उ ठार चला. इत बूद मार्मिक अची दूख गहीराई जटेक भेसी होएत, पाटक उही अंदार मे जटेक समए बेतीत करत, तक्हन लक्हिंदर के जन्मक प्रभाओ उत्बे शक्तिषाली होएत. एक्दम सत्ते जखन पाथक चान सवदागरक संगे उही समपुरन सुन्यता के महसुस कर लेद तक्ने लक्हिन्दर के जनम के जे आस्क छिन्गी अची उबेसी प्रकाश्मान बुजाएद यी विमच बहत गहीर असार्थक लागल इगथा अद्खादा वास्तमे उद्क्रिष्त अची, मुदा आई हम सब जे मुख्य बिन्दूपर चर्चा के लूए, उकर एक भेर साराव्ष राखी देची. आए, एक दम. पहल, कठाक आरंभ में भिहलाक उपस्तिती के स्थापित करव, जैसे सीर्षक आग कताग सन्तुलन बनल है आदो सर चान्द सवदागर आमन्साक हत्ख पाचा मनोवैग्यनिक दुन्दों के सपष्ट करव जैसा पात्र अदिक मानवीए भुजाभे आते सर त्रासदी खतना सबख गती के दीमा कख अकर बावनात्मक प्रभाव के बड़ाव, जैसब पाथक उही विनाशाक दर्द के सक्षात महसुऽ कषके. हम्रा पोरन विश्वास अची, जे इसब सुजाव निष्चित रूपेन कता के आरोग गहीर आसम्मोहक बनावत. अम लेखा कषम्पादक के इहावान करेच्छी जे आहा इसब भधलाव कगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग�

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