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बोधि_कायस्थक_गंगा_लाभ_आ_विद्यापतिक_पद.m4a
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- 0:00–0:07इबूदि कायस्तक अदबूत गंगालाव आ महाकवी विद्यापतिक आमर पदपर हमर एक ता संख्षिप्त प्रस्थूतिय छी.
- 0:07–0:37गजेंद्र ताकुर द्वारा समपादित विदे हे पत्रिकासन लेल गेल इस्रोत एक ता आहन अटियासिक अ अद्ध्यात्मिक गाता जी जे आहा के इस सोचने पर मजबोर कर देत जे कोना एक ता सादारन विक्ती आपन पवित्रतासः प्रक्रतिक नियम बडल देलक आप मित
- 0:37–0:39अगर दोगा बाद ज़ादा बाद परम बखत चला
- 0:39–0:41दोशर अच्रजकर बाद अची
- 0:41–0:43वूनकर गंगा लाभख की अदबुट चमत कार
- 0:43–0:45जीवनक अंपिम समय में
- 0:45–0:47उमोख्ष्कलेल गंगा किनारे दिस चलन
- 0:47–0:49कहल जाइत अची
- 0:49–0:51जखन गंगा नदिजन बाद
- 0:51–0:55तान पुन्ने में लगा दे थीन आश्वक्ता उ परम भखत चला
- 0:55–1:00दूसर अच्रजकर भात अची हुनकर गंगा लाबखी अद्बुट चमतकार
- 1:00–1:04जीवनक अंतिम समय में उ मोख्ष्कलेल गंगा किनारे दिस चलना
- 1:04–1:13कहल जाई तखी, जगन गंगा नदी आदा कोस मने लगबबक देड मील दूर चली है, तकने उ दूर ही साग गंगा के समबोदित के लें.
- 1:13–1:21आप चमतकार देखू गंगा नदी आपन प्राक्रतिक सीमा चोडी उच्ली का आगु बरलिया आपन्का कबना में समहित कर लेल हैं.
- 1:21–1:27की मात्र कता जे? या ई बुजवैत अची, जे जखन आहाक श्रद्धा अटूट होई तची,
- 1:27–1:57तख़्रतियो आपन् निम्बदल्वालेल बाद्ध्भाजाई तखईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई�
- 1:57–2:02तची जि मोक्ष आ आमर्ताक लें कोनो बाहिया कर्मकान सब एसी महत्व,
- 2:02–2:05रदेयक पवित्रता आ जीवनक निश्कलंक्ता कोई तची.
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इबूदि कायस्तक अदबूत गंगालाव आ महाकवी विद्यापतिक आमर पदपर हमर एक ता संख्षिप्त प्रस्थूतिय छी. गजेंद्र ताकुर द्वारा समपादित विदे हे पत्रिकासन लेल गेल इस्रोत एक ता आहन अटियासिक अ अद्ध्यात्मिक गाता जी जे आहा के इस सोचने पर मजबोर कर देत जे कोना एक ता सादारन विक्ती आपन पवित्रतासः प्रक्रतिक नियम बडल देलक आप मित अगर दोगा बाद ज़ादा बाद परम बखत चला दोशर अच्रजकर बाद अची वूनकर गंगा लाभख की अदबुट चमत कार जीवनक अंपिम समय में उमोख्ष्कलेल गंगा किनारे दिस चलन कहल जाइत अची जखन गंगा नदिजन बाद तान पुन्ने में लगा दे थीन आश्वक्ता उ परम भखत चला दूसर अच्रजकर भात अची हुनकर गंगा लाबखी अद्बुट चमतकार जीवनक अंतिम समय में उ मोख्ष्कलेल गंगा किनारे दिस चलना कहल जाई तखी, जगन गंगा नदी आदा कोस मने लगबबक देड मील दूर चली है, तकने उ दूर ही साग गंगा के समबोदित के लें. आप चमतकार देखू गंगा नदी आपन प्राक्रतिक सीमा चोडी उच्ली का आगु बरलिया आपन्का कबना में समहित कर लेल हैं. की मात्र कता जे? या ई बुजवैत अची, जे जखन आहाक श्रद्धा अटूट होई तची, तख़्रतियो आपन् निम्बदल्वालेल बाद्ध्भाजाई तखईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई� तची जि मोक्ष आ आमर्ताक लें कोनो बाहिया कर्मकान सब एसी महत्व, रदेयक पवित्रता आ जीवनक निश्कलंक्ता कोई तची.