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बत्तू_-_चतुर_छागरक_साहस.mp4
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- 0:00–0:07नमशकार, आए अपन सब गजेंदर ताकूर जीक रच्छत एक ता बद रोचक मेठली कताक गधाराई में जारहे चे.
- 0:07–0:11इगोनो सादारन कहनीनी च्यक, बलकी इदिक्हाईवत अच्छी,
- 0:11–0:16जे कोना त्धन्डा दिमाग अब भुद्दिसे, शारिरेग बल पर सहु,
- 0:16–0:18असानी से विज़े प्राप्त कल जासके तची
- 0:18–0:22तबिना कोनो देरी के आँ इ चर्चा शुरू करी
- 0:22–0:26जर खल्त ना करो एक ता एक दम चोट दराल चागर
- 0:26–0:30जो कर जन्म मात्र वेदी पर भली देभे लिल भेर चेक
- 0:30–0:34औप पैग भख़ कोना सक्षात जंगल के राजा के
- 0:34–0:37अपन प्रान बच्छबा करेल बहागे पर मजबोर का दिलक
- 0:37–0:39सूनी में आश्चरे लागते चीने?
- 0:39–0:41मुदैई सत्यते क
- 0:41–0:44इजीवन नक एक ता अदबूत यात्राक गब चेक
- 0:44–0:47सब से पहले बात करे ची पहल कंडक
- 0:47–0:49बलिदानक भयावः संकक्त
- 0:49–0:56इते चार मासक एक तक कोमल अशान्त चागरक जीवन अचानक कोना बदली जायत अची से देखू.
- 0:56–1:02एक दिस माएक असीम प्रेम जायक तदोसर दिस अचानक एक तक गराजक का अगमन होई च्यक.
- 1:02–1:07इगर अहक दूर्गा पूजा में च्याग्रक भली दिवाक लेल मोल भाओ करे आयल अची.
- 1:07–1:13इख शन औही च्वटक च्याग्रक जीवन पर एक ता भ्यानक संकत ताडक देच्छ.
- 1:13–1:18आब अबएइच्छी दोसर कहन्ट पर अंद्यार में साहसिक पलायन.
- 1:18–1:22तकन माए आपन बच्चा के चितावनी देद की कही च्छत्हीन?
- 1:22–1:25उ कही च्छत्हीन बागीजाउ जंगल देस,
- 1:25–1:28नहीं तई मलिक भा काली आखा के भेच देद,
- 1:28–1:31अकिनिहार दूर्गा पूजा में आखा बली ददेद.
- 1:31–1:35इश्वद सुनव कते गंभीर अदुखा दची.
- 1:35–1:43इक ता माएक अन्तिम रब प्रयास च्यक जि कोना हूँ अकर संटान तुरन्तोते सब भागी जाए, आपन प्रान बचावः.
- 1:43–1:48आग गजब का बात इच्यक जि उन ननहाचागर माएक गब मानी लिलग,
- 1:48–1:52आराता राती गंगोर अंदियार जंगल दिस दोरी गिल.
- 1:52–2:05एकन सोचु, जंगलक जीवन अनिष्चित अखधरनाएक चे, से तपन सब जानेई ची, मुदा उही भली वेदी पर सुनिष्चित म्रित्यु के तुलना में, उ अनिष्चित ता हजार गुना नीक चल. ने की?
- 2:05–2:09आब भड़ाई चे तेसर खण देस बतुक अबबुत रुपान्त्रन
- 2:09–2:13समय भी ताईत गेल, उचारी मासक कोमला रोस फाए चागर
- 2:13–2:17जे बली सब भागल चल, उजंगल में 2-3 साल दरी
- 2:17–2:21कष्फोर, मुदा एक्दम स्वतन्त्र जीवन भी तेलग
- 2:21–2:24उ आपन सबता दूर्बलता के पाचा चोड़े लग,
- 2:24–2:27और इक ता विशाल, शक्तीशाली प्रानी में बडल गे लग.
- 2:27–2:31अवो च्यागर नहीं, बलकी बत्तू बनी गे लग छी.
- 2:31–2:34बत्तूख ए रूपान तरनत देख हूँ,
- 2:34–2:36इक ता देराल बच्चा सबदलिक,
- 2:36–2:40अब एक तप पैग कर्या रंगक शक्तिषाली चागर बन गेल च्यक
- 2:40–2:44उक्रा एक दम पैग पैग दादी आविशाल सींग हो गेल च्यक
- 2:44–2:49एक उनो जादूने बलके जंगली या स्वदन्त्र जीवनक एक तप राक्रतिक परनाम चल
- 2:49–2:53योखरा एक प्रभाव्शाली अबल्शाली बनादे लक
- 2:53–2:56एकर भादक कहानी आऔ रोचक अची
- 2:56–2:57खंद चार
- 2:57–3:00बागख संग आमने सामने बेट
- 3:00–3:05अपन नव सोतन्द्रता कारन बत्तू जंगलक नव छेत्र सबखक अनवेशन करे लागल
- 3:05–3:18उगरा सोजे सोजी जंगलक बह्यामक राजा अथात सक्षात बागगक रस्ताग में तार कर देच्छ, सोचु एक ता एहन मुधभेट, जकर प्रतिखशा में स्वयम म्रित्टिउ तार च्छैक.
- 3:18–3:26बाग का पेख्षा की चल, उस शोचल नहीं, जे एक ता चोट, कमजोर शिकार भीतत, जक्रा आसानीस मार कक खाजीतात.
- 3:27–3:35मुदब बत्तुक रूप एहन आसमान ने चल, विशाल शरीर, पएग दाडी, विशाल सींग, जे बाग सुएम गब्रागेल.
- 3:35–3:47अग एक ता एहन ब्रमक जाल बिछे लक इदिखा बे लेल जे अ बाग सब के खाईवाला कोनो बहायानक जीव थिक.
- 3:47–3:51मूल कता की समवाद सूंक आखे बदनिक लागत.
- 3:51–3:54बाग आपन भायनु कावेट पुछेत अछी.
- 3:54–3:58नामी नामी दाडी मोच बहकुला कहो कते से नबैइच्छी
- 3:58–4:00नेदेब �thekura
- 4:00–4:05एकर उतरभे बद्तु एक्दम थस्कस चतूरता पूर्वक कहे चेक
- 4:05–4:09अचुन्नी खेलहां गर्चुन्नी खेलहां, सिंग खेलहां सात
- 4:09–4:13अज़ेया दस बाग नहीं होए तईया परहत्त्तख्ध उपास
- 4:13–4:17मतलब सोचु उकहेत ची जी उस सात सिंग के संखे लेट ची
- 4:17–4:21अदस बाग नहीं बेट्लापर भूके रहत ची
- 4:21–4:23गजजब कसासी गब चैक यी
- 4:23–4:28बत्तुक इप्रम आत्मविष्वास आ आसमान ने रूपक असर देखाओ.
- 4:28–4:58इबागग रिदै में सक्षात भाई उपन्न कर देछच्छ, बाग इबहयानक बाद सूनी एक दराजाई तची, जो गबराहत में उतैसे तुरन्त भागी जच्छ, एक ता चागर्क सोजा जंगलक राजाक इपलायन, इश्चाररेक बल पर बुद्दीक एक ता अबहुत पु
- 4:58–5:02उब भीज बचाउ करवाख वच्छल करवाग प्रैयास करेता चे,
- 5:02–5:06मुदा अंतता उस्वयम अपन दूर्तता के शिकार बनी जाएच छेख,
- 5:06–5:10इग अता क काव्यात्मक न्याए थेख, जे चलिके अपन चल्सच,
- 5:10–5:13स्वयम नुक्सान उच्छान उच्छाएच छेख.
- 5:13–5:17तएही सम्पून कत्ह सा अपन सब की सिखलों
- 5:17–5:20मुख्यबात एई जे बुद्दिए और आत्मविष्वास सा
- 5:20–5:24कोनो से हु शारी रिक बल के पराजजट कैल जासकाई तचे
- 5:24–5:28दूरतता आचल अनतता हचलिहारा के कतम कर अच्छे
- 5:28–5:33असल जीवन रक्षा एही बात में आचे जे कखन सही साहस देखा लगजाए.
- 5:33–5:37और सबसा महत्व पून बात कोनो से हो प्रतीदवन्दी के
- 5:37–5:41पुरान मानिताक आदार पर कखनो कमजोर नई बुज़ा बाखचाही.
- 5:41–5:49बत्तुक कविजें केवल उकर बल में नहीं बलकी उकर चतूर वाखे आ आत्मविश्वास पून भाओ भंगिमा में निहित चल.
- 5:49–5:53इसब देखला सुन्लाक बाद एक तपभग प्रष्न उठे च्यक.
- 5:53–6:03बहाए एक सम्मुख्य दी हम्रा लोकनी अटूट आत्मविश्वास देखाभी, तजीवनक और कुन-कुन असमबहव लागे वाला चुनोती के आसानी सपार काएल जासके तच्याएक.
- 6:03–6:10एही आकर्शक मेठली कताक सन्देश हम्रा लोकनीक दैनिक जीवनक संगर्ष मेसे हो बहुत उपियोगी अची.
- 6:10–6:15एही विचारनी अप्रष्नक संग हम्रा लोकनी आयक इचर्चा समाप्त करे ची.
- 6:15–6:16सोचब जरूर
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नमशकार, आए अपन सब गजेंदर ताकूर जीक रच्छत एक ता बद रोचक मेठली कताक गधाराई में जारहे चे. इगोनो सादारन कहनीनी च्यक, बलकी इदिक्हाईवत अच्छी, जे कोना त्धन्डा दिमाग अब भुद्दिसे, शारिरेग बल पर सहु, असानी से विज़े प्राप्त कल जासके तची तबिना कोनो देरी के आँ इ चर्चा शुरू करी जर खल्त ना करो एक ता एक दम चोट दराल चागर जो कर जन्म मात्र वेदी पर भली देभे लिल भेर चेक औप पैग भख़ कोना सक्षात जंगल के राजा के अपन प्रान बच्छबा करेल बहागे पर मजबोर का दिलक सूनी में आश्चरे लागते चीने? मुदैई सत्यते क इजीवन नक एक ता अदबूत यात्राक गब चेक सब से पहले बात करे ची पहल कंडक बलिदानक भयावः संकक्त इते चार मासक एक तक कोमल अशान्त चागरक जीवन अचानक कोना बदली जायत अची से देखू. एक दिस माएक असीम प्रेम जायक तदोसर दिस अचानक एक तक गराजक का अगमन होई च्यक. इगर अहक दूर्गा पूजा में च्याग्रक भली दिवाक लेल मोल भाओ करे आयल अची. इख शन औही च्वटक च्याग्रक जीवन पर एक ता भ्यानक संकत ताडक देच्छ. आब अबएइच्छी दोसर कहन्ट पर अंद्यार में साहसिक पलायन. तकन माए आपन बच्चा के चितावनी देद की कही च्छत्हीन? उ कही च्छत्हीन बागीजाउ जंगल देस, नहीं तई मलिक भा काली आखा के भेच देद, अकिनिहार दूर्गा पूजा में आखा बली ददेद. इश्वद सुनव कते गंभीर अदुखा दची. इक ता माएक अन्तिम रब प्रयास च्यक जि कोना हूँ अकर संटान तुरन्तोते सब भागी जाए, आपन प्रान बचावः. आग गजब का बात इच्यक जि उन ननहाचागर माएक गब मानी लिलग, आराता राती गंगोर अंदियार जंगल दिस दोरी गिल. एकन सोचु, जंगलक जीवन अनिष्चित अखधरनाएक चे, से तपन सब जानेई ची, मुदा उही भली वेदी पर सुनिष्चित म्रित्यु के तुलना में, उ अनिष्चित ता हजार गुना नीक चल. ने की? आब भड़ाई चे तेसर खण देस बतुक अबबुत रुपान्त्रन समय भी ताईत गेल, उचारी मासक कोमला रोस फाए चागर जे बली सब भागल चल, उजंगल में 2-3 साल दरी कष्फोर, मुदा एक्दम स्वतन्त्र जीवन भी तेलग उ आपन सबता दूर्बलता के पाचा चोड़े लग, और इक ता विशाल, शक्तीशाली प्रानी में बडल गे लग. अवो च्यागर नहीं, बलकी बत्तू बनी गे लग छी. बत्तूख ए रूपान तरनत देख हूँ, इक ता देराल बच्चा सबदलिक, अब एक तप पैग कर्या रंगक शक्तिषाली चागर बन गेल च्यक उक्रा एक दम पैग पैग दादी आविशाल सींग हो गेल च्यक एक उनो जादूने बलके जंगली या स्वदन्त्र जीवनक एक तप राक्रतिक परनाम चल योखरा एक प्रभाव्शाली अबल्शाली बनादे लक एकर भादक कहानी आऔ रोचक अची खंद चार बागख संग आमने सामने बेट अपन नव सोतन्द्रता कारन बत्तू जंगलक नव छेत्र सबखक अनवेशन करे लागल उगरा सोजे सोजी जंगलक बह्यामक राजा अथात सक्षात बागगक रस्ताग में तार कर देच्छ, सोचु एक ता एहन मुधभेट, जकर प्रतिखशा में स्वयम म्रित्टिउ तार च्छैक. बाग का पेख्षा की चल, उस शोचल नहीं, जे एक ता चोट, कमजोर शिकार भीतत, जक्रा आसानीस मार कक खाजीतात. मुदब बत्तुक रूप एहन आसमान ने चल, विशाल शरीर, पएग दाडी, विशाल सींग, जे बाग सुएम गब्रागेल. अग एक ता एहन ब्रमक जाल बिछे लक इदिखा बे लेल जे अ बाग सब के खाईवाला कोनो बहायानक जीव थिक. मूल कता की समवाद सूंक आखे बदनिक लागत. बाग आपन भायनु कावेट पुछेत अछी. नामी नामी दाडी मोच बहकुला कहो कते से नबैइच्छी नेदेब �thekura एकर उतरभे बद्तु एक्दम थस्कस चतूरता पूर्वक कहे चेक अचुन्नी खेलहां गर्चुन्नी खेलहां, सिंग खेलहां सात अज़ेया दस बाग नहीं होए तईया परहत्त्तख्ध उपास मतलब सोचु उकहेत ची जी उस सात सिंग के संखे लेट ची अदस बाग नहीं बेट्लापर भूके रहत ची गजजब कसासी गब चैक यी बत्तुक इप्रम आत्मविष्वास आ आसमान ने रूपक असर देखाओ. इबागग रिदै में सक्षात भाई उपन्न कर देछच्छ, बाग इबहयानक बाद सूनी एक दराजाई तची, जो गबराहत में उतैसे तुरन्त भागी जच्छ, एक ता चागर्क सोजा जंगलक राजाक इपलायन, इश्चाररेक बल पर बुद्दीक एक ता अबहुत पु उब भीज बचाउ करवाख वच्छल करवाग प्रैयास करेता चे, मुदा अंतता उस्वयम अपन दूर्तता के शिकार बनी जाएच छेख, इग अता क काव्यात्मक न्याए थेख, जे चलिके अपन चल्सच, स्वयम नुक्सान उच्छान उच्छाएच छेख. तएही सम्पून कत्ह सा अपन सब की सिखलों मुख्यबात एई जे बुद्दिए और आत्मविष्वास सा कोनो से हु शारी रिक बल के पराजजट कैल जासकाई तचे दूरतता आचल अनतता हचलिहारा के कतम कर अच्छे असल जीवन रक्षा एही बात में आचे जे कखन सही साहस देखा लगजाए. और सबसा महत्व पून बात कोनो से हो प्रतीदवन्दी के पुरान मानिताक आदार पर कखनो कमजोर नई बुज़ा बाखचाही. बत्तुक कविजें केवल उकर बल में नहीं बलकी उकर चतूर वाखे आ आत्मविश्वास पून भाओ भंगिमा में निहित चल. इसब देखला सुन्लाक बाद एक तपभग प्रष्न उठे च्यक. बहाए एक सम्मुख्य दी हम्रा लोकनी अटूट आत्मविश्वास देखाभी, तजीवनक और कुन-कुन असमबहव लागे वाला चुनोती के आसानी सपार काएल जासके तच्याएक. एही आकर्शक मेठली कताक सन्देश हम्रा लोकनीक दैनिक जीवनक संगर्ष मेसे हो बहुत उपियोगी अची. एही विचारनी अप्रष्नक संग हम्रा लोकनी आयक इचर्चा समाप्त करे ची. सोचब जरूर