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मूँगा_आ_जालिम_सिंहक_प्रेमकथाक_समीक्षा.m4a
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- 0:00–0:16आई हमरा सब गजेंद्र ताकृर जिक लिखल भेतिया राजक प्रिस्ट भूमी पर आदारित मुंगा और जालिम सिंक प्रेम कथापर चर्चा करहल ची, जते जाती और राज दर्बारक कुचक्र बीच एक ता अदम में संगर्ष छा छी.
- 0:16–0:23अई, आई एटियासिक चित्रन बहुत जीवन्त अचे, मने बहुत निक जका गड़ल गेल अची.
- 0:23–0:29इक दम, तगबशव छोरी का हमरा सब सीदा रचनात्मक समिक्षादिस बड़े ची,
- 0:29–0:35करन हमरजे स्रोता चतीन, जे इसामकरी पतेने चतीन और बहुत नीक काजकने चतीन.
- 0:35–0:39आप, एक दम सीथा मुख्य बिन्दू पर आवे ची.
- 0:39–0:44तपहिल जी मुख्य गप आची, उ कताक गती और सन्रचनाक विषे मे आची.
- 0:44–0:50अद्याय पाचक अद्रूष्य जत्ते प्मुंगाके गोर जंगल में कनूवालक पटावल जाईत छी.
- 0:50–0:54बाह प्रे अद्रूष्य तबहुड दरावना आच्छे.
- 0:54–1:00आप बाग शिकारी महींस पर सवार कनूवा प्मुंगाक भली देभे ले इक्दम तत्पर आची.
- 1:00–1:02अग, यक दम अचानक
- 1:02–1:08तकी आँगे तची, जे इई अचानक भेल बडलाव, कताख मुख्यगती से मेल कहाई तची
- 1:08–1:13देखू, तचाख मद्ध्यबाग में कनुवाख प्रवेश और मुझगाख भलीख प्रसंग, इट बहुत प्रभाव शाली द्रिष्छ थेख
- 1:13–1:17जे इई आचानक भेल बडलाव कताक मुख्यगती से मेल कहाई तची.
- 1:18–1:24देखो, तचाक मद्धबाग में कनुवाक प्रवेश और मुंगाक बलीक प्रसंग,
- 1:24–1:27इट बहुत प्रभाव शाली द्रिष्टेक,
- 1:27–1:33उदा एते चरीत्रक प्रेरना और उदेशिक अस्पष्टताक बहुत पेगभाव अची
- 1:34–1:37मैंने उब बली की एक दोरहल अची ये स्पष्ट ने अची
- 1:37–1:39एक दम सही पकल लहूँ।
- 1:39–1:45जे मूल सामगरी अची ताही में कनवा दौरा मुंगाक बली देबा कारनके
- 1:45–1:48बस आज अस्पष्ट कही कछ चोर देल गेलाची
- 1:48–1:53आजगन कोनो चरित्र एदेक भ्यांकर काज करग तचेना
- 1:53–1:59तब पिना कोनो तोस कारनक उद्रिश बहुत आकस्मिक और अप्रसांगेक लागे तचे
- 1:59–2:04इपाथक दियान मुख्य प्रेम कतासा एक दंब भद्का देचे
- 2:04–2:10अब मुदा रूकिया, हमराएते एक ता शंका आची, लोक कता या जे फोल्क्लोर्क परम्परा आची,
- 2:10–2:17ताही में खलनायक अकसर हा बिना कुनो तरकक, सक्षात, बूराई वा क्होवक प्रतिक नहीं होई तचे की?
- 2:17–2:20मैंने, जंगल्क दानव बस दानव होई तची.
- 2:20–2:26आहाक प्रश्न बहुत नी कची, मुदा एते समस्या विद्ःा मने जैनर्क मिश्रन कची,
- 2:26–2:29इगथा पूरन रूप सा लोक कचा नहीं आची.
- 2:29–2:31औहो, बुजलिये.
- 2:31–2:36आप एक रिक ता बहुत पैग हिस्सा, भेत्या राजक, राजनेतिक, कुचक्र,
- 2:36–2:41वग्यानिक तनाव और यधार्थ्वादी समाजिक संगर्ष पर अदारी तची.
- 2:41–2:42सत्त कहलू हूँ.
- 2:42–2:47तजक्हन पात्ख, दर्बारक शवण्द्रक तार्किक दून्यासं
- 2:47–2:52सीधि जंगल अकिक ता तर्क रहेत अस्पष्ट भली प्रथामे प्रवेश करे तची,
- 2:52–2:55तक कताक तोन मे बहुत पैग विरोदा भास आभी जाए चे?
- 2:55–3:00इत वहीना भेल जेन आहा एक तपाकल सडख पर गानी साला रहल ची
- 3:00–3:04आचानक बिना कुनो चे तावनिक कच्चा रस्ता पर आभी गें ची.
- 3:04–3:07एक तमसती कुदारन, ता हमर सुजाव यह ची
- 3:07–3:15जे कन्वाग एही भ्यानक्रतिके मुख्यकतानक जे दर्बारक कुचक्र अची ताहीस जोडबाग चाही.
- 3:15–3:21आप अगर अपन कोनो सान्सक्रितिक या जन्जातिय मनिताक तोस प्रिष्ट्बूमी देवाख चाही
- 3:21–3:23जाही साई स्वाभाविक लागे.
- 3:23–3:24बिल्क्ल.
- 3:24–3:32जे ना एक तो सुदारन लेजाए, तो दिखावल जासके तची जी प्रिठ्विपाल जी दर्बारक खलनाया कची.
- 3:32–3:35आज जालिम सिंके विरुद साजिष रची रहा लची.
- 3:35–3:40एक्दम, उ कन्वादरी इजुट खबर पहुचालक, जी मुंगा कारने,
- 3:40–3:43रूँकर कुल में कोनो पैग विपत्ति आए लचे.
- 3:43–3:45बाप्रे, इत बहुत नी कुप आज?
- 3:45–3:50आ, जाही सा बच्बाक लेल भली आवश्षक अचे.
- 3:50–3:55एही सव प्रिथ्विपाल मात्र दर्बार में चुगली करे वाला नहीं जाएत जे
- 3:55–3:58उएक ता खतरनाक रननीति कार बनी जाएत जे
- 3:58–4:03आ, यी काज कारन सिद्दहानत जालिम सिंक पीडा के और बड़ा देत
- 4:03–4:06मने जखन जालिम जंगल में लडी रहल होगता
- 4:06–4:10तक्हन उनका बुजनाय होएत जे यी दरबारक दूश्मनक जाल अच्छे
- 4:10–4:17आप इक खत्हक मुख्य राजनी तिक तनाव के जंगलक द्रिष्यस जहीर रुप न जोर देत
- 4:17–4:21मुदाजना आहा कहलूं एक ता दूसर उपाय से हु भहस खए तची
- 4:21–4:25जा लेखख चाहती, जी प्रिट्विपालक साजिश अथे दरी नहीं पहुचाई.
- 4:25–4:28ततक हन, कनवाक कोनो पूरान माननेता,
- 4:28–4:32या बोनक देविक कोनो प्राचीन श्रापकर जिक्र काई जासके तचे?
- 4:32–4:34माने, कनवाके गहीन विष्वास होई,
- 4:34–4:37जे बली देला सा उकर कभीला सुरक्षिद बजाएत.
- 4:37–4:40एक दम इमात्रक की चु समभा वोपाया चे
- 4:40–4:43जाही से चरित्रक वेवार तरके क्लागत
- 4:43–4:47अ पाथक उकर क्रूर ताक पाचाक तरक के भुज्ठ्हपावत.
- 4:47–4:50राद, जखन खलनायक निस्वार्त मानेता कारने
- 4:50–4:54तो उबेसी दरावना होई तोछे
- 4:54–4:55आजालिम सिंकक जे
- 4:55–4:56हीरोएक छवी आचे
- 4:56–4:59और निकरी कसामने आवे तोछे
- 4:59–5:00भी कोल
- 5:00–5:02चरित्रक प्रेर्ना के सबष्ट करव
- 5:02–5:05कथाक रीर के मस्वूट करव अची
- 5:05–5:07ता जंगल के आही
- 5:07–5:10क्रुडता संटः उसब बची जाएच्छती
- 5:10–5:15आब हम उही आद्यात्मिक संगर्स दिस बड़ेची जे बहुत महत्वपुरनाची
- 5:15–5:18आद्याय तीन और सात कप्रसंग
- 5:18–5:22एक दम जंगल के एकान्त में म्रित्यु पर जीट कतुरंत बाद
- 5:22–5:24जाले मुंगा के सिन्दूर ददेच्छती
- 5:24–5:28मुदम मोनी बाबाक का बूमिका हमरा बहुत दूविदा में डाले चै.
- 5:28–5:30ताईपर हम सोब शोच रहल चलो.
- 5:30–5:35सूर्वात में मोनी बाबा जालिम के अस्पस्ट रूपे मुंगा के चुडवाक निर्देश देच देच छती.
- 5:35–5:40मुदा जंगल में विवाख का समें अचानक भाबाके आशिर्वाद उपस्तित रहेताची
- 5:40–5:42आई विरोद़ा भास आची
- 5:42–5:47तक की अछ्ट्य कताक अद्यात्मिक स्वर में कोन विरोद़ा भास नहीं ची
- 5:47–5:55देखो, मोनी भाबाक चरित्र आहुनक भविष्यवानिक उप्योग कताक अद्यात्मिक पक्ष्के बड़ही तची,
- 5:55–6:01मुदा हुनक भूमिकाक निरन्तरता में एक तस पष्ट विरोदधा बास देखभा में आवाई तची.
- 6:01–6:05मानेजे बाभा पहले मना कर रहल चला वजनक आशिर्वाद कोना देदलनी
- 6:05–6:12आ, मोनी बाभाजका सिद्ध सादू जकर वचन वेद वाख्यमानल जाई तची
- 6:12–6:16उपहले मुंगा के चोडबाक आदेश देट छतीन
- 6:16–6:21मुदा बाद में बिना कोनो कारन या अस्पष्टी करनक
- 6:21–6:25विवाहक समय हुनके आशिर्वादक उलेक कलकेल गेल अची
- 6:25–6:29इत पाथक के ब्रमित करे तची
- 6:29–6:31एक दं ब्रमित करे तची
- 6:31–6:34आश सादुक चरित्र के गामभीर्या के कम करे तची
- 6:34–6:36जे वोल्ट बिल्टिंग अची
- 6:36–6:39तकर नियम के तोरी देई तची
- 6:39–6:47मुदा की एक्रा एह रूप में नहीं देखाल जा सके तची जे बाभा जालिमक वीरता सब प्रसन्नब होगे ला
- 6:47–6:56जा एहन अची तब लेखख के यी बात शपष्ट करे पडद, आहा नियम बिना कोनो असपष्टी करनक बदली नहीं सके ची
- 6:56–6:59अग, ता एकर समथान की बहुज़के तचे?
- 6:59–7:03हमर सुजाव यए ची, जे बाबाक प्रारमभिख चेतावनी के,
- 7:03–7:09एक ता पूडन निशेद नहीं बनाक, जालिमक प्रेम के परिक्षाट के रूप में प्रस्तुत कल जाए.
- 7:09–7:15यह देखाल जाए, जे बाबा जाली मक द्रद संकल्प देखी का अपन विचार बदललनी.
- 7:15–7:19आ, यह तब बहुत बडईा विचार अच्छे, प्रेम के परिक्षा.
- 7:19–7:26आ, जैना थो सुदाहरन का लेल, मोनी बाबाक समवाद के एही तरह बदलल जासकत अच्छे,
- 7:26–7:56अजा बाबाक वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा अगा वचन के अगा वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा वचन के अटल वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा वचन के अटल वचन के अटल वचन क
- 7:56–7:58एक तदोसर विकल्प से हो अच्छी
- 7:58–7:59उकी
- 7:59–8:02विवाहक सम्याई बाबक आजिर्वादक बदला
- 8:02–8:07उते बोनक कोनो दोसर अस्ठान्य पुरोही तक उपस्थिती दिखावल जासकत अच्छे
- 8:07–8:08अच्छा
- 8:08–8:11जाई सब बाबक पहल कतन कहन्टित नहीं हो यत
- 8:11–8:12एक दम
- 8:12–8:17अई भेत्या राज का उही सामाजिक सान्सक्रितिक मिष्रन्के सेहो दर्षावेत अची
- 8:17–8:25इस थापिट सत्तक अस्विक्रितिक बाज्जुद प्रक्रिति अजंजात्य समाज रहनकर प्रेम के स्विकार कर रहलचे
- 8:25–8:28यह ते बज़़ सच्षक्त विद्रो ही कदम बनी जाएत ची
- 8:28–8:33आख यह विचारत पूरा दिष्खे एक ता गलगई सांस्क्रतिक गेराई दोर अलेची
- 8:33–8:38आद ते यी मात्र किच्विकाल पच्छे जाहिसन निरन्तरता बनल रहत
- 8:38–8:39बुजलिये
- 8:39–8:44खेल, जंगलक रूड़्टा अनियतिक परिक्षातः प्रेमी युगल बच्गेल,
- 8:44–8:47मुदा अस्ली परिक्षात समाजक भीच क्डा चल.
- 8:47–8:52आब हम अंत दिस बड़ाईत ची अद्याय आट्स दस दरी.
- 8:52–8:56अजालिमक भाई सब विशेस कर कूर जाती भेद के कारने जालिम पर जान लेवा हमला करे ता ची.
- 8:57–9:02मुदा अंतता मुंगा औजालिमक गर गुरला पर सब कानी का पस्चताप करे ता ची.
- 9:03–9:04अजरिश्य.
- 9:05–9:09ता हमर प्रष्न एए जे समाजक एतेक गहीर जाती भेद.
- 9:09–9:15अद्रिश्य ता हमर प्रष्न इए आच्ये जे समाजक एटेक गहीर जाती भेड
- 9:15–9:18जे आपना ही बहाँके मारे लेल प्रेरिद कदिलक
- 9:18–9:21अबस किछु दिनक बाद आपने आप कैन बदलेगेल
- 9:21–9:24की इज्रदाई परीवर्टन तारकिक लागगे तचे
- 9:24–9:29अपने आप कईना बडलेगेल की इहिर्दैः परीवर्तन तारकिक लागगे तचे?
- 9:29–9:35देखो कताक अंत में भाई सबखग, लिएप परीवर्तन अप परीमारक पुनर मिलन,
- 9:35–9:37एक ता सुखगद अंत जरूर दे थची.
- 9:37–9:43मुदाई परिवर्तन बहुत आकस्मिक अबहावनात्मक रूपसा अपुरन लगेत चे.
- 9:43–9:45मने उ अरजित नहीं लागेत चे.
- 9:45–9:51एक दम जालिम पर भाई सबख, हमला बहुत क्रूर चेत.
- 9:51–9:56और इ गहीर सामाजिक पुर्वा ग्रह के दर्षावेत चेत.
- 9:56–10:05बिना कोनो पे गटनावा उप्रेरक्के बहाई सबख मात्र कानीक कषमा मांगल लिप अव वास्तविक लागेट चे.
- 10:05–10:11मुदा जक्ञन औव आपन प्रानप्रीए भाई जालिम के मिथ्त्यो शयया पर देखलनी,
- 10:11–10:16तो उभी ब्यानक परिणाम के देखी के एक ता जटका तलागल हतनी
- 10:16–10:17जटका जरुर लागल
- 10:17–10:21मुदा हम्रा सब के सामाजिक मनोविग्यान भुजगे पडद
- 10:21–10:25जाती वाद सद्यक मान्सिक कन्टिष्निंग अची
- 10:25–10:29जा उ बस आसु खसा का मापी मागी लेट छती
- 10:29–10:32तई बस एक ता सामा एक भावुकत बहल
- 10:32–10:35आचा, तब वैचारीक परवर्तन नहीं भहल
- 10:35–10:41आप, हमर सुजाओ य आची, जे भाई सबखक ऐई वदे परवर्तनक पाचा
- 10:41–10:45कोनो तोस कारन या मुंगा द्वारा करल गेल
- 10:45–10:48आप आई सब कोनो पेक संकत से रक्षा करेत आची.
- 10:48–10:51संकत. जैना प्रिथ्वी पालक कोनो दोसर साजिश.
- 10:51–10:54आप. बाई सब के इपता चले ता.
- 10:54–10:57तव मुंगा के एते किछु सक्रियरूप से करे पडद?
- 10:57–10:58एक दम!
- 10:58–11:00जेना उदारना कलेल,
- 11:00–11:02जगन जालिम गायल चल,
- 11:02–11:05तखन मुंगा अपन जान की परवाह न परवाह न खरेत,
- 11:05–11:08बहाई सबख कोनो पेक संकत से रक्षा करे तची.
- 11:08–11:09संकत!
- 11:09–11:12जईना प्रिठ्विपालक कोनो दोसर साजच्श?
- 11:12–11:15रहा, बहाई सब के यी पता चले तची,
- 11:15–11:17जे प्रिठ्विपाल दर्बार में,
- 11:17–11:21उनके परिवारक नाशकर बाक शर्यंटर रच रहा लची.
- 11:21–11:23आमुंगाक यी कारे,
- 11:23–11:27बाई सपके एबुज्चायपर मजबूर करे तची
- 11:27–11:31जे मानवता आप रेम कोनो जाती से पेग होई तची
- 11:31–11:36बाप रे इपकताख पूरा वैचारिक निषकरष के बडल देत
- 11:36–11:37बिल्कोल
- 11:37–11:42जखन कूर के एबुजनाय होएत जाही कन्या के उ मारे चाहचल
- 11:42–11:50अग्री साहस के कारने आई हुनक परिवार बचल अची तक्हन अखर आहिंकार क्हन्द खन्द बहुजाएत.
- 11:50–11:55अगे समय, जक्हन अखर आँसु खसत उसर्फ भावुक्ता काँसू नहीं होएत.
- 11:55–11:59उगहीर पष्चताः वास्तविक आत्मबोदध काँसू होएत.
- 11:59–12:29आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 12:29–12:34अब समय आबी गला आची जे हम पुरा चर्चाक निशकर्स निकाली
- 12:34–12:36आँ, सन्छेप में दूराली
- 12:36–12:39हम सब मुक्यरूप से तीन बिन्दूपर बात के लाओ
- 12:40–12:43एक, कन्वा कबयानक्रित्यक पाचा
- 12:43–12:47एक ता अस्पष्ट कारन वास सांस्क्रेतिक ब्रिष्ट भूमी जोडना है
- 12:47–12:50आआ, जही से उ तार्किक लागाए
- 12:50–12:54दू, मोनी बावा के चेतावनी के प्रेम का परिक्षाक रूप में प्रस्तुत का
- 12:54–12:57उनका भूमी का के सुसंखत बनाईवव
- 12:57–13:06अर तीन बही सब का हिर्दे परिवर्तन के मुंगा के कोनो महान कार्या या तोस कारन से जोड का अंद्त के अदिक विष्वस्निया बनाईवा.
- 13:06–13:18एक दम इसब रचनात्मक सुजाव लेक्ख कमुल उद्देश अर भाँ के सुरक्षित रख्यत कता के आवर अदिक तारकेक अर प्रभाव शाली बनाईबा के लेल अची.
- 13:18–13:21हम श्रोटा के उच्वाप पूर्वक आमन्त्रित करेची,
- 13:21–13:28जे उ आपन समगरी के एशुजाव सब का आदारप, सन्सोदित कागगग वापस पताव थी.
- 13:28–13:31जाईस अगर पुनर विचार करल जासके.
- 13:31–13:36आपन काज कर निरन्तर निकारेत रहु, आपन वरा सब से जुडल रहु, बहुत-बहुत द्श्वाद.
- 13:36–13:37द्श्वाद
Plain text
आई हमरा सब गजेंद्र ताकृर जिक लिखल भेतिया राजक प्रिस्ट भूमी पर आदारित मुंगा और जालिम सिंक प्रेम कथापर चर्चा करहल ची, जते जाती और राज दर्बारक कुचक्र बीच एक ता अदम में संगर्ष छा छी. अई, आई एटियासिक चित्रन बहुत जीवन्त अचे, मने बहुत निक जका गड़ल गेल अची. इक दम, तगबशव छोरी का हमरा सब सीदा रचनात्मक समिक्षादिस बड़े ची, करन हमरजे स्रोता चतीन, जे इसामकरी पतेने चतीन और बहुत नीक काजकने चतीन. आप, एक दम सीथा मुख्य बिन्दू पर आवे ची. तपहिल जी मुख्य गप आची, उ कताक गती और सन्रचनाक विषे मे आची. अद्याय पाचक अद्रूष्य जत्ते प्मुंगाके गोर जंगल में कनूवालक पटावल जाईत छी. बाह प्रे अद्रूष्य तबहुड दरावना आच्छे. आप बाग शिकारी महींस पर सवार कनूवा प्मुंगाक भली देभे ले इक्दम तत्पर आची. अग, यक दम अचानक तकी आँगे तची, जे इई अचानक भेल बडलाव, कताख मुख्यगती से मेल कहाई तची देखू, तचाख मद्ध्यबाग में कनुवाख प्रवेश और मुझगाख भलीख प्रसंग, इट बहुत प्रभाव शाली द्रिष्छ थेख जे इई आचानक भेल बडलाव कताक मुख्यगती से मेल कहाई तची. देखो, तचाक मद्धबाग में कनुवाक प्रवेश और मुंगाक बलीक प्रसंग, इट बहुत प्रभाव शाली द्रिष्टेक, उदा एते चरीत्रक प्रेरना और उदेशिक अस्पष्टताक बहुत पेगभाव अची मैंने उब बली की एक दोरहल अची ये स्पष्ट ने अची एक दम सही पकल लहूँ। जे मूल सामगरी अची ताही में कनवा दौरा मुंगाक बली देबा कारनके बस आज अस्पष्ट कही कछ चोर देल गेलाची आजगन कोनो चरित्र एदेक भ्यांकर काज करग तचेना तब पिना कोनो तोस कारनक उद्रिश बहुत आकस्मिक और अप्रसांगेक लागे तचे इपाथक दियान मुख्य प्रेम कतासा एक दंब भद्का देचे अब मुदा रूकिया, हमराएते एक ता शंका आची, लोक कता या जे फोल्क्लोर्क परम्परा आची, ताही में खलनायक अकसर हा बिना कुनो तरकक, सक्षात, बूराई वा क्होवक प्रतिक नहीं होई तचे की? मैंने, जंगल्क दानव बस दानव होई तची. आहाक प्रश्न बहुत नी कची, मुदा एते समस्या विद्ःा मने जैनर्क मिश्रन कची, इगथा पूरन रूप सा लोक कचा नहीं आची. औहो, बुजलिये. आप एक रिक ता बहुत पैग हिस्सा, भेत्या राजक, राजनेतिक, कुचक्र, वग्यानिक तनाव और यधार्थ्वादी समाजिक संगर्ष पर अदारी तची. सत्त कहलू हूँ. तजक्हन पात्ख, दर्बारक शवण्द्रक तार्किक दून्यासं सीधि जंगल अकिक ता तर्क रहेत अस्पष्ट भली प्रथामे प्रवेश करे तची, तक कताक तोन मे बहुत पैग विरोदा भास आभी जाए चे? इत वहीना भेल जेन आहा एक तपाकल सडख पर गानी साला रहल ची आचानक बिना कुनो चे तावनिक कच्चा रस्ता पर आभी गें ची. एक तमसती कुदारन, ता हमर सुजाव यह ची जे कन्वाग एही भ्यानक्रतिके मुख्यकतानक जे दर्बारक कुचक्र अची ताहीस जोडबाग चाही. आप अगर अपन कोनो सान्सक्रितिक या जन्जातिय मनिताक तोस प्रिष्ट्बूमी देवाख चाही जाही साई स्वाभाविक लागे. बिल्क्ल. जे ना एक तो सुदारन लेजाए, तो दिखावल जासके तची जी प्रिठ्विपाल जी दर्बारक खलनाया कची. आज जालिम सिंके विरुद साजिष रची रहा लची. एक्दम, उ कन्वादरी इजुट खबर पहुचालक, जी मुंगा कारने, रूँकर कुल में कोनो पैग विपत्ति आए लचे. बाप्रे, इत बहुत नी कुप आज? आ, जाही सा बच्बाक लेल भली आवश्षक अचे. एही सव प्रिथ्विपाल मात्र दर्बार में चुगली करे वाला नहीं जाएत जे उएक ता खतरनाक रननीति कार बनी जाएत जे आ, यी काज कारन सिद्दहानत जालिम सिंक पीडा के और बड़ा देत मने जखन जालिम जंगल में लडी रहल होगता तक्हन उनका बुजनाय होएत जे यी दरबारक दूश्मनक जाल अच्छे आप इक खत्हक मुख्य राजनी तिक तनाव के जंगलक द्रिष्यस जहीर रुप न जोर देत मुदाजना आहा कहलूं एक ता दूसर उपाय से हु भहस खए तची जा लेखख चाहती, जी प्रिट्विपालक साजिश अथे दरी नहीं पहुचाई. ततक हन, कनवाक कोनो पूरान माननेता, या बोनक देविक कोनो प्राचीन श्रापकर जिक्र काई जासके तचे? माने, कनवाके गहीन विष्वास होई, जे बली देला सा उकर कभीला सुरक्षिद बजाएत. एक दम इमात्रक की चु समभा वोपाया चे जाही से चरित्रक वेवार तरके क्लागत अ पाथक उकर क्रूर ताक पाचाक तरक के भुज्ठ्हपावत. राद, जखन खलनायक निस्वार्त मानेता कारने तो उबेसी दरावना होई तोछे आजालिम सिंकक जे हीरोएक छवी आचे और निकरी कसामने आवे तोछे भी कोल चरित्रक प्रेर्ना के सबष्ट करव कथाक रीर के मस्वूट करव अची ता जंगल के आही क्रुडता संटः उसब बची जाएच्छती आब हम उही आद्यात्मिक संगर्स दिस बड़ेची जे बहुत महत्वपुरनाची आद्याय तीन और सात कप्रसंग एक दम जंगल के एकान्त में म्रित्यु पर जीट कतुरंत बाद जाले मुंगा के सिन्दूर ददेच्छती मुदम मोनी बाबाक का बूमिका हमरा बहुत दूविदा में डाले चै. ताईपर हम सोब शोच रहल चलो. सूर्वात में मोनी बाबा जालिम के अस्पस्ट रूपे मुंगा के चुडवाक निर्देश देच देच छती. मुदा जंगल में विवाख का समें अचानक भाबाके आशिर्वाद उपस्तित रहेताची आई विरोद़ा भास आची तक की अछ्ट्य कताक अद्यात्मिक स्वर में कोन विरोद़ा भास नहीं ची देखो, मोनी भाबाक चरित्र आहुनक भविष्यवानिक उप्योग कताक अद्यात्मिक पक्ष्के बड़ही तची, मुदा हुनक भूमिकाक निरन्तरता में एक तस पष्ट विरोदधा बास देखभा में आवाई तची. मानेजे बाभा पहले मना कर रहल चला वजनक आशिर्वाद कोना देदलनी आ, मोनी बाभाजका सिद्ध सादू जकर वचन वेद वाख्यमानल जाई तची उपहले मुंगा के चोडबाक आदेश देट छतीन मुदा बाद में बिना कोनो कारन या अस्पष्टी करनक विवाहक समय हुनके आशिर्वादक उलेक कलकेल गेल अची इत पाथक के ब्रमित करे तची एक दं ब्रमित करे तची आश सादुक चरित्र के गामभीर्या के कम करे तची जे वोल्ट बिल्टिंग अची तकर नियम के तोरी देई तची मुदा की एक्रा एह रूप में नहीं देखाल जा सके तची जे बाभा जालिमक वीरता सब प्रसन्नब होगे ला जा एहन अची तब लेखख के यी बात शपष्ट करे पडद, आहा नियम बिना कोनो असपष्टी करनक बदली नहीं सके ची अग, ता एकर समथान की बहुज़के तचे? हमर सुजाव यए ची, जे बाबाक प्रारमभिख चेतावनी के, एक ता पूडन निशेद नहीं बनाक, जालिमक प्रेम के परिक्षाट के रूप में प्रस्तुत कल जाए. यह देखाल जाए, जे बाबा जाली मक द्रद संकल्प देखी का अपन विचार बदललनी. आ, यह तब बहुत बडईा विचार अच्छे, प्रेम के परिक्षा. आ, जैना थो सुदाहरन का लेल, मोनी बाबाक समवाद के एही तरह बदलल जासकत अच्छे, अजा बाबाक वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा अगा वचन के अगा वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा वचन के अटल वचन के अटल राखवा काछी तज्छी अगा वचन के अटल वचन के अटल वचन क एक तदोसर विकल्प से हो अच्छी उकी विवाहक सम्याई बाबक आजिर्वादक बदला उते बोनक कोनो दोसर अस्ठान्य पुरोही तक उपस्थिती दिखावल जासकत अच्छे अच्छा जाई सब बाबक पहल कतन कहन्टित नहीं हो यत एक दम अई भेत्या राज का उही सामाजिक सान्सक्रितिक मिष्रन्के सेहो दर्षावेत अची इस थापिट सत्तक अस्विक्रितिक बाज्जुद प्रक्रिति अजंजात्य समाज रहनकर प्रेम के स्विकार कर रहलचे यह ते बज़़ सच्षक्त विद्रो ही कदम बनी जाएत ची आख यह विचारत पूरा दिष्खे एक ता गलगई सांस्क्रतिक गेराई दोर अलेची आद ते यी मात्र किच्विकाल पच्छे जाहिसन निरन्तरता बनल रहत बुजलिये खेल, जंगलक रूड़्टा अनियतिक परिक्षातः प्रेमी युगल बच्गेल, मुदा अस्ली परिक्षात समाजक भीच क्डा चल. आब हम अंत दिस बड़ाईत ची अद्याय आट्स दस दरी. अजालिमक भाई सब विशेस कर कूर जाती भेद के कारने जालिम पर जान लेवा हमला करे ता ची. मुदा अंतता मुंगा औजालिमक गर गुरला पर सब कानी का पस्चताप करे ता ची. अजरिश्य. ता हमर प्रष्न एए जे समाजक एतेक गहीर जाती भेद. अद्रिश्य ता हमर प्रष्न इए आच्ये जे समाजक एटेक गहीर जाती भेड जे आपना ही बहाँके मारे लेल प्रेरिद कदिलक अबस किछु दिनक बाद आपने आप कैन बदलेगेल की इज्रदाई परीवर्टन तारकिक लागगे तचे अपने आप कईना बडलेगेल की इहिर्दैः परीवर्तन तारकिक लागगे तचे? देखो कताक अंत में भाई सबखग, लिएप परीवर्तन अप परीमारक पुनर मिलन, एक ता सुखगद अंत जरूर दे थची. मुदाई परिवर्तन बहुत आकस्मिक अबहावनात्मक रूपसा अपुरन लगेत चे. मने उ अरजित नहीं लागेत चे. एक दम जालिम पर भाई सबख, हमला बहुत क्रूर चेत. और इ गहीर सामाजिक पुर्वा ग्रह के दर्षावेत चेत. बिना कोनो पे गटनावा उप्रेरक्के बहाई सबख मात्र कानीक कषमा मांगल लिप अव वास्तविक लागेट चे. मुदा जक्ञन औव आपन प्रानप्रीए भाई जालिम के मिथ्त्यो शयया पर देखलनी, तो उभी ब्यानक परिणाम के देखी के एक ता जटका तलागल हतनी जटका जरुर लागल मुदा हम्रा सब के सामाजिक मनोविग्यान भुजगे पडद जाती वाद सद्यक मान्सिक कन्टिष्निंग अची जा उ बस आसु खसा का मापी मागी लेट छती तई बस एक ता सामा एक भावुकत बहल आचा, तब वैचारीक परवर्तन नहीं भहल आप, हमर सुजाओ य आची, जे भाई सबखक ऐई वदे परवर्तनक पाचा कोनो तोस कारन या मुंगा द्वारा करल गेल आप आई सब कोनो पेक संकत से रक्षा करेत आची. संकत. जैना प्रिथ्वी पालक कोनो दोसर साजिश. आप. बाई सब के इपता चले ता. तव मुंगा के एते किछु सक्रियरूप से करे पडद? एक दम! जेना उदारना कलेल, जगन जालिम गायल चल, तखन मुंगा अपन जान की परवाह न परवाह न खरेत, बहाई सबख कोनो पेक संकत से रक्षा करे तची. संकत! जईना प्रिठ्विपालक कोनो दोसर साजच्श? रहा, बहाई सब के यी पता चले तची, जे प्रिठ्विपाल दर्बार में, उनके परिवारक नाशकर बाक शर्यंटर रच रहा लची. आमुंगाक यी कारे, बाई सपके एबुज्चायपर मजबूर करे तची जे मानवता आप रेम कोनो जाती से पेग होई तची बाप रे इपकताख पूरा वैचारिक निषकरष के बडल देत बिल्कोल जखन कूर के एबुजनाय होएत जाही कन्या के उ मारे चाहचल अग्री साहस के कारने आई हुनक परिवार बचल अची तक्हन अखर आहिंकार क्हन्द खन्द बहुजाएत. अगे समय, जक्हन अखर आँसु खसत उसर्फ भावुक्ता काँसू नहीं होएत. उगहीर पष्चताः वास्तविक आत्मबोदध काँसू होएत. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अब समय आबी गला आची जे हम पुरा चर्चाक निशकर्स निकाली आँ, सन्छेप में दूराली हम सब मुक्यरूप से तीन बिन्दूपर बात के लाओ एक, कन्वा कबयानक्रित्यक पाचा एक ता अस्पष्ट कारन वास सांस्क्रेतिक ब्रिष्ट भूमी जोडना है आआ, जही से उ तार्किक लागाए दू, मोनी बावा के चेतावनी के प्रेम का परिक्षाक रूप में प्रस्तुत का उनका भूमी का के सुसंखत बनाईवव अर तीन बही सब का हिर्दे परिवर्तन के मुंगा के कोनो महान कार्या या तोस कारन से जोड का अंद्त के अदिक विष्वस्निया बनाईवा. एक दम इसब रचनात्मक सुजाव लेक्ख कमुल उद्देश अर भाँ के सुरक्षित रख्यत कता के आवर अदिक तारकेक अर प्रभाव शाली बनाईबा के लेल अची. हम श्रोटा के उच्वाप पूर्वक आमन्त्रित करेची, जे उ आपन समगरी के एशुजाव सब का आदारप, सन्सोदित कागगग वापस पताव थी. जाईस अगर पुनर विचार करल जासके. आपन काज कर निरन्तर निकारेत रहु, आपन वरा सब से जुडल रहु, बहुत-बहुत द्श्वाद. द्श्वाद