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बाघ_पर_भारी_पड़ी_बत्तू_की_चतुराई.m4a
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- 0:00–0:12ये कलपना करना भी ना कितना आजीब लकता है, कि एक होखार बाग, जिसके सामने पूरे जंगल के जान्वर कापते हैं, वो एक गासचरने वाले बक्रे को देक्कर दुम दबागर बागर रहे हैं.
- 0:12–0:14आ, मतलब सुन्ने में तो एक दम...
- 0:14–0:17किसी कोमिक बूक या कार्टून का सीन लकता है, ना?
- 0:17–0:18बिलकोल
- 0:18–0:20लेगन आजकी हमारी जेहन चर्चा का आदार
- 0:20–0:22यही एक विरोदा बास है
- 0:22–0:23जी
- 0:23–0:25आज आम जिस रोट सामगरी पर बात कर रहे हैं
- 0:25–0:29वो गजेंद्र ताकृर दवारा रचित एक बहध दिल्चास्त मेत्ली कता है
- 0:29–0:31वह दिशान्दा रच्ना है
- 0:31–0:32और इसका शीर्षक है
- 0:32–0:36बत्तु जंगलक चतृर चागरग अदबुद सहास
- 0:36–0:39और ये कहानी साल दोहादार से शुरूए
- 0:39–0:43प्रथम मेतली पाखषिक एी पत्री का विदेः से ली गगे है.
- 0:43–0:43जी.
- 0:44–0:45तो हमार आज का मिशन ये समझना है,
- 0:46–0:49कि कैसे एक छोटे से बक्री के बच्चे की ये लोग कता,
- 0:49–0:51हमें ये सिकहाती है, कि विप्रीत परस्थितियो में,
- 0:51–0:59शारीरिग बल से कही जीआदा बड़िक शमता, आपका मनोविग्यान और अत्मोविष्वास मैंने रकता है.
- 0:59–1:05यह अमिशन बहुती प्रास संगिक है, तुकी देखे लोग कता है केवल, केवल मनोविग्यान के ले नहीं गरी जाती थी.
- 1:05–1:08अग, उन में हमेशा कोई सब अख होता था.
- 1:08–1:13सही कहा, वे अपने समें के सब से जटिल मनोवेग्यानिक
- 1:13–1:17और सरवाईएल यानी जीवित रहने के जो सिद्धानत होते है ना
- 1:17–1:20उनको बहुत्ती सरल आवरन में लपेट कर पीष करती थी.
- 1:20–1:21बलकल.
- 1:21–1:25और इस कहानी का जो अदार है, वो मुझे बहुत उच्साहिट करता है.
- 1:25–1:31मतलब एक आँसा चोता सा जीव, जो अपनी जान बचाने के लिए एक अजान जंगल मे बागता है,
- 1:31–1:35अर फिर अपनी चतुराई से जंगल के सबसे खुंकार राजा
- 1:35–1:37यानी बाग को भी दूल चटा देता है?
- 1:37–1:40हे! तीके शे तोडा समझते है!
- 1:40–1:42ये सरव बच्छो को सलाने वाली कोई कहानी नहीं है
- 1:42–1:47बलकी ये सरवाएवल और मनोविग्यान का एक बहुत्ही गेरा पाथ है
- 1:47–1:48मैं पुरी तरा सहमत हूं
- 1:48–1:50और इस पाट की शुर्वात मैं बहुती गेरे
- 1:50–1:52मनोविग्यानिक संगट से होती है.
- 1:52–1:54अग, वो बलिदान वाला हिस्सा?
- 1:54–1:56अग, कहानी के पहले हिससे में हम देखते हैं कि
- 1:56–1:59एक शान्त और सनेहे करने बक्री है
- 1:59–2:01और उसका स्वफ चार महीने का
- 2:01–2:05बहुति कोमल बच्चा है, जिसे चागर कहा गया है
- 2:05–2:06बहुति चोटा बच्चा
- 2:06–2:09बलकुल, समें दुर्गा पूजा कहें
- 2:09–2:13और उस माहाल में पुरानी परमपरा के तहेद
- 2:13–2:15बलीदान की तईयारी चल रही है
- 2:15–2:18मैं लग बे एक बहुती कहोफनाक प्रिष्ट भूमी तैर हो रही हो रहा है
- 2:18–2:21यहां जीवन का सबसे क्रूर सच यह नागे आगे
- 2:21–2:26कि वो बाडा जो अब दक उस बच्च्छे को बाहरी जंगली जानवर उसे बचारा था
- 2:26–2:27आग, वो बाडा
- 2:27–2:30अब उसकी मुद्का कारन बनने वाला है
- 2:30–2:30बाप्रे
- 2:30–2:32तो होता क्या है के एक खरीदार आता है
- 2:32–2:34दामतै करता है
- 2:34–2:36लेकिन यहां एक आजी गतना होती है
- 2:36–2:39तो थो पूरे गतना क्रम कोई बडल देती है
- 2:39–2:40वो पैसे लाना बूल जाता है
- 2:40–2:42सही पक्डा
- 2:42–2:44वो विक्ती पैसे लाना बूल गया है
- 2:44–2:46वो ख़ेता है कि वो अगले दिन पैसे लेकर आएगा
- 2:46–2:47और चागर को लेजाएगा
- 2:47–2:49अब इस एक दिन की जो महलत मिलीना
- 2:49–2:51वो बहाड बारी पडगगेई
- 2:51–2:54अआ, मागो एस भ्यानक भविष्यका प�रा अबहास हो जाता है
- 2:54–2:57उसे समज जाती है कि उसके बच्छे का अंत अप सूनिष्छित है
- 2:57–3:01एक माग के लिए जानना कितना बहयानक होगा
- 3:01–3:02बहुत बहयानक
- 3:02–3:06और फिर वो एक आँसा निरने लेती है
- 3:06–3:09तो किसी बी माग के लिए सबसे कठिन होता है
- 3:09–3:12वो अपने बच्चे को तुरन्त राद के अंदेरे में
- 3:12–3:15उस अग्यात उर खटरनाक जंगल की ओर
- 3:15–3:17बहाग जाने की चितावनी देती हैं
- 3:17–3:19ये एक बहुती शकती शाली शान है
- 3:19–3:23लेकिन अगर में यहां थोड़ा रुक कर सोचुं
- 3:23–3:26तो ये पैसला मुझे बहुत्ती अजीब और खटरनाक लखता है
- 3:26–3:27कैसे?
- 3:27–3:29मतलब जंगल
- 3:29–3:31यानी एक पूरी तरा से अग्याद भविष्छ ये
- 3:31–3:33वहां जंगली जानवर है
- 3:33–3:35बोजन की कोई पक्की विवस्था नहीं
- 3:35–3:37पक पक पर खटरा है
- 3:37–3:39तो और कदम पर मुत का खटर है
- 3:53–3:57कभी कभी सब से बड़ा जोके मुठाना ही बचने का एक मात्र रास्ता होता है?
- 3:57–4:01कोई अई अईसी जगा क्यो जाएगा? जाए मुद्गा क्षत्रा हर पल हो?
- 4:01–4:07यह इसे विकास्वादी जीव विग्यान, यहनी इविलुषनरी भायोलगी के नजरये से देखना बहुत ज़ूरी है.
- 4:07–4:08आचा.
- 4:08–4:11विकि यहां चुनाउ जीवन और जीवन के वीच नहीं था.
- 4:11–4:15यहां चुनाउ था निष्चित म्रुत्तियो और अनिष्चित्ता के वीच.
- 4:15–4:18निश्छत मिरत्यों मदलब वो बली जो च़डने वली ते
- 4:18–4:21बलकोल, वो बली दान जो अगले दिन होना ही ता
- 4:21–4:24और दूसरी तरव अनिश्छित्ता, यानी वो जंगल
- 4:24–4:27जब अन्त शो प्रतिष्छत निश्छित होना
- 4:27–4:30तो मस्तिषक अपने आप सरवाइवल मोड में चला जाता है.
- 4:30–4:34अनिष्छित्ता में कम से कम जीवित रहने की एक प्रतिष्ट समभावना तो होती है.
- 4:34–4:38आप लेकिं जाँ वो बच्चा था वहां वो समभावना एक दम शुन्या थी.
- 4:38–4:40सती कहा
- 4:40–4:42तो मतलब जब किसी की पीट दिवार से लगजाए
- 4:42–4:44तो अग्ग्यात का दर
- 4:44–4:46ग्यात के खुफ से चोटा हो जाता है
- 4:46–4:47क्या बात है
- 4:47–4:50ये निरने साहस का पहला और सबसे बड़ा कदम ता
- 4:50–4:52ये हमें बताता है
- 4:52–4:54कि जब किसी प्रानी का सामना
- 4:54–4:58उनिश्चित विनाश्छ से होता है, तो वो उन खत्रों को भी गले लगाने के लिए तैयार हो जाता है,
- 4:58–5:03जिन से वो आम्टर पर दरता है, बिल्कुल, बच्चे का रातो राद गर चोर देना,
- 5:03–5:08उसे उस खम्फर्ट्जोन या उस परचिद दून्या को तोडने का प्रतीक है,
- 5:08–5:12जो भले ही परचिद थी, लेकिन जान लेवा बन चुकी थी.
- 5:12–5:15और वो चोटा सच्जागर सच्च में बाग जाता है.
- 5:15–5:19रात वरात वो सुरक्षित लेकिन जान लेवा जगगग को चोड देता है
- 5:19–5:21आँ और फिर शुरू होता होटा उसका नया सफर
- 5:21–5:24हमेशा कहा जाता है कि ताकत ही सब कुछ है
- 5:24–5:27जंगल में बत्तु दो टीन साल बिताता है
- 5:27–5:30ये जीवन बिलकुल भी आसान रहा होगा उसके लिए
- 5:45–5:49अग बड़ा बक्रा अग पोड विखसित नर बक्रा
- 5:49–5:51अख उसकी लंभी डाडि आजा जाती है
- 5:51–5:53और बड़े बड़े सींगो गाते हैं
- 5:53–5:55वो शारिरिक रूप से पुरी तरह बडल चुका है
- 5:55–5:57यहां जो बाज सबसे दिल्चस्प है
- 5:57–5:59वो ये है कि कटिन परिस्तिया हमें
- 5:59–6:02अगर बच्चा बली से बच्चने किलिए बहागा था
- 6:02–6:06वही जंगल के कथोर वातावरन, वहां की चुनोतियों
- 6:06–6:10और तनाव के कारन एक प्रबावशाली जीव बन गया
- 6:10–6:12आजके संदरभ में यही होटी
- 6:12–6:14जीव विग्यान में सिद्धानत है, होरमेसिस
- 6:14–6:16अद वो मजबुत होती है?
- 6:16–6:19एक दम सही, जो बच्चा भली से बचने किलिए भागा ता
- 6:19–6:22वही जंगल के कथोर वातावरन,
- 6:22–6:25वहां की चुनोत्यों और तनाव के कारन
- 6:25–6:27एक प्रभावषाली जीव बन गया.
- 6:27–6:29आजके संदरभ मे भी यही होता है,
- 6:29–6:59तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
- 6:59–7:03यह से दुशमन से हो, जिसे शारे लिक रूप से हराना ना मुमकिन हो.
- 7:03–7:05राग, और वो समें जल्दी आजाता है.
- 7:05–7:06पलकोल.
- 7:06–7:09बद्तू एक नए जंगल में प्रवेश करता है,
- 7:09–7:12और यहां उसका सामना होता है, अस्ली चुनाउती से.
- 7:12–7:15जंगल का राजा एक खतरनाक बाग.
- 7:29–7:31उपने दर कुछ़्पाने की कोशिष करता है
- 7:31–7:33और एक कावियात्मक शेली में
- 7:33–7:35तोडा राजसी स्वर बनाकर पुचता है
- 7:35–7:37के इतनी नामी डाडी मुच्वाले
- 7:37–7:39तुम कहा से आई हो?
- 7:39–7:41मतलब वो सीड़ा हमला नहीं करता
- 7:41–7:42नहीं
- 7:42–7:44ये बहत महत्वोपोण शरन है
- 7:44–7:46तुम कहा से आई हो?
- 7:46–7:48मतलब वो सीदा हमला नहीं करता.
- 7:48–7:48नहीं
- 7:48–7:50ये बहात महत्वोपोण श़न है.
- 7:50–7:53एक शीज शिकारी तुरन्त हमला नहीं कर रहा.
- 7:53–7:55उसबाल पूच रहा है.
- 7:55–7:56क्योंकि वो अंदर से ब्रहमित है.
- 7:56–7:57लिकिन एक मिनेट.
- 7:57–7:59यहां मुझे तोडा संदे हो रहा है
- 7:59–8:02यह यह बात मुझे थोडी आव्यावाहारीक लगरी है
- 8:02–8:05एक बूखा बाग, जो अपने लाके का राजा है
- 8:05–8:09वो सर्फ एक आजीब से जीव को देखकर कैसे दर सकता है
- 8:09–8:11मैं समज रही हों आपका सवाल
- 8:11–8:41अगर बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न �
- 8:41–8:43बाग के लिए कोई अस्पताल नहीं है
- 8:43–8:44अहो हो है ये तो है
- 8:44–8:47अगर किसी अनजान शिकार पर हमला करते वकत
- 8:47–8:49बाग का पैर तुट जाए
- 8:49–8:51या उसे कोई गेरी चोट लग जाए
- 8:51–8:54तो वो हा भविश्ष में शिकार नहीं कर पाएगा
- 8:54–8:57और अंत तह भूग से मारा जाएगा
- 8:57–8:58तो वो रिस्क नी लेन अचाता
- 8:58–8:59बलकोल
- 9:00–9:02इसलिए, विकास्वादी नजर्ये से
- 9:02–9:05शिकारी जान्वर, हमेशा उस चीज से दरते है
- 9:06–9:08जिसे वे पहचानते नहीं है
- 9:08–9:10अग्यात का दर उनके लिक
- 9:10–9:12एक तरा का सुरक्षा तन्त्र है
- 9:12–9:14बद्तू का वो विशाल शरीर
- 9:14–9:18वे बड़े सींग, ये सब बाग के मान्सिक डेटाबेस में ताही नहीं
- 9:18–9:21यहां बाग सच में बहुत दिल्चास पूजाती है
- 9:21–9:27बाग पूरी तरह से कन्फुज ता और बत्तू भागने के बजाई पलटकर अपनी चतुराई का पहला प्रदरषन करता है
- 9:27–9:29आप बग बाग की आखो में आखें डाल कर कैरा है,
- 9:29–9:31कि वो बागों को नाश्तें में खाता है.
- 9:31–9:32बलकों.
- 9:32–9:33ये तो पोकर के खेल में,
- 9:33–9:35बलफ करने ज़सा है.
- 9:35–9:37हात में खराब पते है,
- 9:37–9:39लेकिन दाओ अगा दिया,
- 9:39–9:43बत्तु नहीं आपने अपने अपने बत्ते पफेग देग
- 9:43–9:46बद्तूने यहाँ पने आत्मा विष्वास का सब से बड़ा डावज़्ाया
- 9:46–9:49यह जिसे नहीं कैते हैं फेख यह तिल यु मेख यह वाला खेल कर दिया
- 9:49–9:52बिलकु सटी कुदारन बद्तूने स्तिटी को बहुत जल्दी बहांप लिया
- 9:52–9:55बद्तूने यहाँ बने आत्मा विष्वास का सब से बड़ा डाव चलाया
- 9:55–9:58यह ज़े से आम कैतियाना फेकिट तिल यु मेकिट
- 9:58–9:59वो लाख खेल कर दिया
- 9:59–10:01बिलकुल सटी कुदारन
- 10:01–10:03बद्तूने इस टीटी को बहुत जल्दी बहाँप लिया
- 10:03–10:04अपास का सब से बड़ा दाव चलाया
- 10:05–10:08ये ज़े से आम कैते हैं आप प्फेख ये तिल यो मेख येट वोला खेल कर दिया
- 10:08–10:10बिलकोल सती कुदारन
- 10:10–10:13बत्तू ने स्तीती को बहुत जल्दी बहाप लिया
- 10:13–10:16उसने समथ लिया की उसका अज समान ने रुब
- 10:16–10:20बाग के लिए एक एक बहुत बडा रहस लिए हैं
- 10:20–10:23और उसने एस रहस से को अपनी ताकत बना लिया
- 10:23–10:28आर्थ शास्तर और मनोविद्यान की बाशा मे इसे सुचना की विषमता
- 10:28–10:31यानी अन्फमेशन असेमिट्री का फप्डा उठाना कैते हैं
- 10:31–10:33अन्फमेशन असेमिट्री
- 10:33–10:35बट्तु जानता ता के वो क्या है?
- 10:35–10:37लेकिन बाग नी जानता ता
- 10:37–10:39बट्तु ने बाग को गलत सुचना दी
- 10:39–10:43एक अँसा ब्रहम पेडा किया, जिसकी बाग चाहकर भी पुष्टी नहीं कर सकता था
- 10:43–10:49लेकिन क्या सरफ बाते बनाने से सच्मे कोई बाग दर सकता है?
- 10:49–10:51मदला बाग इतना बेवकूफ तो नहीं होता
- 10:51–10:54हा, क्योंकि यहां संज्यामात्मक अदिबहार
- 10:54–10:57यानी, कोगनेटेव अवर लोड की स्तिती पड़ा हो गगे थी
- 10:57–10:59कोगनेटेव अवर लोड
- 10:59–11:04बाग का दिमाग एक साथ कई विरोदा भासी जानकारियों को प्रोसेस करने की कोशिष कर रहा था
- 11:04–11:05आचा कैसे?
- 11:05–11:08दिखे, एक तरफ एक एसा जीव है जो अजीप दिकता है
- 11:08–11:12तुस्री तरव वो जीव दरने या बागने कबजा एक दम आत्मविविश्वास से खड़ाएं
- 11:12–11:16और तीसरी तरव वो केराएं के वो बागुगो कहाता है
- 11:16–11:18तो दिमाग का तो दधी होनाई था बाग के
- 11:18–11:21यलकल बाग का दिमाग इस उलजन को सुलजाने पाया
- 11:21–11:23और जब दिमाग एसे सुन होजाता है,
- 11:23–11:26तो शरीर का सबसे सुबस्छित दिफाल्ट रेएक्ष्छन होता है,
- 11:26–11:27वहाँ से बस बाग जाना.
- 11:27–11:31और बाग सच में अपनी जान बचाएकर वहाँ से बभाग निकलता है.
- 11:32–11:34उसने अपने बल का इस्तमाल करने के बचाए,
- 11:34–11:38अपने अपने दर को खुट पर हावी होने दिया
- 11:38–11:40अब वो मान्सिक रूप से हर गगया है
- 11:40–11:44लिकिन कहानी का सब से रोमान्चाक हिस्चा तो अब शिरू होता है
- 11:44–11:48बाकते हुए बाग को रास्ते में क्चालाक सीर मिलता है
- 11:48–11:52सीर, जो हमेशा से अपनी दूर्टता के लिए मशूर है
- 11:52–11:53हा...
- 11:53–11:55सीर बाग से पूरी कहानी सुनता है
- 11:55–11:58और और जोर जोर से हसने लकता है
- 11:58–12:00वो बाग को वास्ट्विक्ता बताता है
- 12:00–12:01कि वो सर्फिक बख्रा है
- 12:01–12:02बिल्ल्कुल
- 12:02–12:05वे कहता है कि जिस से बाग दरकर बाग रहे है
- 12:18–12:22तोडने की कोशिष कर रहा है, जो बद्तू ने बाग की दमाग में पेडा किया ता.
- 12:22–12:27वो एक तरका सलाकार बन गया जो केरा है, के दरो मद,
- 12:27–12:29वास्ट्विक्ता वो नहीं है जो तोमें दिख्रे है.
- 12:29–12:31सी आर कुद बहुट चालाक है.
- 12:31–12:34इसले वो बत्तू की चालाकी को तुरंथ पकर लेता है
- 12:34–12:37लेकिन बाग का जो वो मनोबिग्यान लिक दर ताना
- 12:37–12:41वो इतना गेरा हो चुका ता कि तरक उस्पे कामी नी कर राथा
- 12:41–12:45बाग अभी भी इतना दरा हुए कि वो अकेले वापस जाने को तैयार नहीं
- 12:45–12:49तब सीर एक बहुत ही एक अजीब सप्रस्ताव रकता है
- 12:49–12:52वो केता है के विदोनो आपने पेर एक साथ एक रस्सी से बांद लें
- 12:52–12:55ताकि बाग उसे चोडगर बाग ना सके
- 12:55–12:56कितनी अजीब बाद अद अना
- 12:56–13:00और दरावा बाग इस भेतू की शर्ट को मान भी जाता है
- 13:00–13:30तो तो बगादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बाद
- 13:30–13:32तो इस सब का असल मतलप क्या है?
- 13:32–13:34अगर लिए में से बडी तस्वीर से जोडखर देखें
- 13:34–13:36महाव की जेगा मेरा मतलप हैगर
- 13:36–13:38अगर लिए में से बडी तस्वीर से जोडखर देखें
- 13:38–13:40तो ये मनोवैग यानिक यूद
- 13:40–13:42यानी साइकलोगिकल वार्फेर का सब से
- 13:42–13:45अगर आमे से बडी तस्वीर से जोड़कर देखें
- 13:45–13:48महाजकी जगा मेरा मतलब है अगर आमे से बडी तस्वीर से जोड़कर देखें
- 13:48–13:53तो ये मनोवैग यानिक यूध यानी साईकलोगिकल वार्फेर का सबसे बहतरी नुदारन है
- 13:53–13:55साईकलोगिकल वार्फेर
- 13:55–14:00अग, इसका मतलब है कि दुश्मन के शरीर पर नहीं, बलकि उसके दिमाग परवार करना.
- 14:00–14:06बत्तूने बाग के नाखुनों या दान्तों को नहीं, बलकि उसके ब्रम को अपना निशाना बनाया.
- 14:06–14:09उसने बाग की सबसे कमजोर कडी परवार किया.
- 14:09–14:15ये रननीती मुजे तो किसी बड़े कोरप्रेट बैटल या या कुटनीती की तरा लकती है.
- 14:15–14:20जो आसल आहा मोमेंट है ना वो ये नहीं है के बत्तूने बाख से जुड बोला.
- 14:20–14:20तो क्या है?
- 14:20–14:25असली केल तो यहे के बद्तूने अपने दुश्मन के सलाकार को ही उसी के खिलाफ अट्यार बना दिया
- 14:25–14:27वाँ बिल्कुल सही
- 14:27–14:29मड़ब स्यार बाग का तर्क केंदर ता
- 14:29–14:30जो से सच बतारा था
- 14:31–14:34बद्तूने एकी वाख्के से बाग के दिमाग में बाग डाल दी
- 14:34–14:37के सीार बाग का दोस नहीं बलकी बद्टू का अजन्ट है
- 14:37–14:38एक दम सही पक्डा आपने
- 14:38–14:41यही बद्टू की सबसे बडई जीथ है
- 14:41–14:45शारी रिक रूप से बख्रा कभी बाग को हराही नहीं सकता
- 14:45–14:47अगर वे लड़ते तो परिनाम सब को पता है
- 14:47–14:49आप बत्तु कतो कीमा बन जाता?
- 14:49–14:50बलकुल!
- 14:50–14:53इसके बजाए, उसने बाग के दिमाग में चल रहे,
- 14:53–14:56उस सन्देह को एक पकी हकीकत में बडल दिया.
- 14:56–15:00जैसे ही बाग ने सुना के सीर ने उसे लाने का सवधा किया था,
- 15:00–15:05उसका बचा खुचा सारा तर्क, सारा लोगिक एक सेकिन में खत्म होगगया.
- 15:05–15:07उसे लगा स्यार ने दोका दे दिया?
- 15:07–15:08रहां!
- 15:08–15:10उसे लगा कि स्यार ने उसे फसा दिया है,
- 15:10–15:12और ये अजीब जीव सच में उसे खाने वाला है.
- 15:12–15:16इसे कुतनिती में विबाजित करो और राज करो
- 15:16–15:20यानी दिवाएडन्रूल का सबसे सुखष्म रूभ भी काजा सकता है
- 15:20–15:24दूशमन के खेमे में औल विष्वास पैदा कर दिना ही आदी जीत होती है
- 15:24–15:29तुछ जो होता है वो सच में रोंग्टे कर देने वाला है
- 15:29–15:34बत्तु की बाद सुनते ही बाग बिना पीछे मुडे पुरी रफ्तार से बाग ख़ाउता है
- 15:34–15:35अंदा दूंद बाखता है
- 15:35–15:41आँ, उस देहशत में वो ये पुरी तरा है बूल जाता है कि उसका पहर सी आर के पहर से बनदा होए
- 15:41–15:44बाग की उस तेजगती और गब्राहत में
- 15:44–15:46सीर जमीन पर गिसट गिसट कर
- 15:46–15:48पत्टरों और काटो से तक्राखर मारा जाता है
- 15:48–15:50इस से बहुत अहिम सवाल उठता है
- 15:50–15:53सीर की अपनी ही दूरतता, उसकी चाला की
- 15:53–15:55उसकी मोथ का कारन कैसे बन गय?
- 15:55–15:57आई ये बहुत विटम बना है.
- 15:57–16:00साहित्यो न्याइश्वास्त्र में ये से काव्यात्मक न्याय यानी
- 16:00–16:02पोईतिक जस्टिस कहाजाता है.
- 16:02–16:07इस का मतलब है कि जब किसी के बूरे कर्म उसी के पतन का कारन बन जाए.
- 16:07–16:07जैसे कुत आँसा.
- 16:07–16:08बलकुल.
- 16:08–16:15सीार ने बाग के दर का फझदा उठाखर, बिना महनत के खुद का भूजन पक्का करने की कोशिष की ती.
- 16:15–16:21उसने क्रित्रिम बंदन बनाया पैर बादना ये सोचकर की बाग उसे चोड नहीं पाएगा,
- 16:21–16:22और वो पुरी तरा सुरक्षित रहेगा.
- 16:22–16:26लेकिन वही सुरक्षा का बंदन उसकी जान का दूश्मन बन गया
- 16:26–16:27बिलकुल
- 16:27–16:30ये एक बफ्ड बडा सबक है
- 16:30–16:32के चल और दूर्थ ता
- 16:32–16:36अंतता चल करने वाले को ही नश्ट कर देती है
- 16:36–16:37सही बात है
- 16:37–16:40सियार अपने ही बुने हुए जाल में
- 16:40–16:43अपनी ही बनाई हुई रस्सी में उलज कर रहे गया
- 16:43–16:46अगर उसने चलाकी दिखाने की बजाए
- 16:46–16:47सीदा रास्ता चुना होता
- 16:47–16:49तो शाएद उसकी जान बज्जाती
- 16:49–16:50और बत्तु
- 16:50–16:52वो बिना एक भी खरोज खाए
- 16:52–16:54सरफ अपनी बुद्द्दी
- 16:54–16:58अपनी प्रज़न्स अप मैंड और शब्दो के सही इस्तमाल से विजेटा बन गया.
- 16:58–17:00मित्फिला की लोग कतावाँ में,
- 17:00–17:03बद्दू की ये गाता एसे ही येजनी लोग प्रिया नहीं है.
- 17:03–17:05ये एक बहुत बडा प्रतीक है.
- 17:05–17:07आप बहुत गेरा प्रतीक है.
- 17:07–17:14ये कहानी हमे साथ तोर पर बताताती है, कि शारिरिग बल, पैसा या सन्सादन चाहे कितने भी जईदा क्योना हो,
- 17:14–17:19अगर विप्रीत परस्थितियो में बुद्दी स्तिर है, तो बाजी पल्टी जा सकती है.
- 17:19–17:25तब रहासी होने का मतलब हमेशा तलवार उठाना या या या शारेरे क्रुब से लडना नहीं होता.
- 17:25–17:32कई बार साहस का सबसे बडा रूप होता है, अपने दिमाग को शान्त रखना, जब बाकी पुरी दुन्या गब्रा रही हो.
- 17:32–17:33ज़से बद्दू ने किया?
- 17:33–17:37अब बत्तु का अत्मविष्वासी उसकी सबसे बड़ी धाल था
- 17:37–17:40सोचिए अगर वो स्यार और बाग को साथ आते देखखर
- 17:40–17:43एक पल के लिए बही अपनी जगा से हिल जाता
- 17:43–17:45या थोडा सब भी पसीना आ जाता उसे
- 17:45–17:47या उसके चहरे पदर दिख जाता
- 17:47–17:50या वो बगने की कोशिष करता, तो तुरन्त मारा जाता.
- 17:50–17:53उसका अपने बनाईवे ब्रम्पट तिके रहना,
- 17:53–17:57अपने ब्लफ को अंथ तक मेंटेन करना ही,
- 17:57–17:58उसकी जीट की कुन जी ठा.
- 17:58–18:00तो अगर आम इस पूरी चर्चा को समेट है,
- 18:00–18:02तो सबसे बड़ी बाज जो हमे सीकने को मिलती है वो यह आई है,
- 18:02–18:07कि जीवन में जब भी बाग जैसी विक्राल और दरावनी समस्सें सामने आई है.
- 18:07–18:10तो शरेरिक ताकत या सीमथ संसादनो पर रोने के बजाए,
- 18:10–18:12मानसिक संथुलन का अईस्तमाल करना चाही.
- 18:12–18:13बलकल सही.
- 18:13–18:15समस्या कित्री भी बड़ी क्यो नहों
- 18:15–18:18उसका कोई नहों कोई मनोवैग्यानिक लूप्होल जरूर होता है
- 18:18–18:20बस उस लूप्होल को प्यचानना है
- 18:20–18:23और बत्व कित्रा सही समय पर सही शब्डो का प्रार करना है
- 18:23–18:26और इसी के साथ में अग अंतिम विचार चोडना चाहूंगी
- 18:43–18:46योंकि हम ने उने अपने दिमाग में बड़ा मान लिया है।
- 18:46–18:48और सब से महत्टबों बात,
- 18:48–18:51क्या हम ने अनजाने में किसी स्यार के सात,
- 18:51–18:53यानी किसी गलत सला,
- 18:53–18:55या अपने ही नकारात्मक विचारों के सात,
- 18:55–18:57अपने पैर बान लिया है,
- 18:57–18:59जो हमे आगे बडने से रोक रहा हैं?
- 18:59–19:01अगर एक छोटा सब अख्रा
- 19:01–19:03सर्फ अपनी बातों और आत्मविष्वास से
- 19:03–19:05एक खुंकार बाख को दरा सकता है?
- 19:05–19:07तो हम अपनी चुनोतियों को
- 19:07–19:09किस तरा का ब्रहम दिखा सकते हैं?
- 19:09–19:11ये सच में एक विचार उटेजग बाथ है
- 19:11–19:32अपने यह ज़़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज
Plain text
ये कलपना करना भी ना कितना आजीब लकता है, कि एक होखार बाग, जिसके सामने पूरे जंगल के जान्वर कापते हैं, वो एक गासचरने वाले बक्रे को देक्कर दुम दबागर बागर रहे हैं. आ, मतलब सुन्ने में तो एक दम... किसी कोमिक बूक या कार्टून का सीन लकता है, ना? बिलकोल लेगन आजकी हमारी जेहन चर्चा का आदार यही एक विरोदा बास है जी आज आम जिस रोट सामगरी पर बात कर रहे हैं वो गजेंद्र ताकृर दवारा रचित एक बहध दिल्चास्त मेत्ली कता है वह दिशान्दा रच्ना है और इसका शीर्षक है बत्तु जंगलक चतृर चागरग अदबुद सहास और ये कहानी साल दोहादार से शुरूए प्रथम मेतली पाखषिक एी पत्री का विदेः से ली गगे है. जी. तो हमार आज का मिशन ये समझना है, कि कैसे एक छोटे से बक्री के बच्चे की ये लोग कता, हमें ये सिकहाती है, कि विप्रीत परस्थितियो में, शारीरिग बल से कही जीआदा बड़िक शमता, आपका मनोविग्यान और अत्मोविष्वास मैंने रकता है. यह अमिशन बहुती प्रास संगिक है, तुकी देखे लोग कता है केवल, केवल मनोविग्यान के ले नहीं गरी जाती थी. अग, उन में हमेशा कोई सब अख होता था. सही कहा, वे अपने समें के सब से जटिल मनोवेग्यानिक और सरवाईएल यानी जीवित रहने के जो सिद्धानत होते है ना उनको बहुत्ती सरल आवरन में लपेट कर पीष करती थी. बलकल. और इस कहानी का जो अदार है, वो मुझे बहुत उच्साहिट करता है. मतलब एक आँसा चोता सा जीव, जो अपनी जान बचाने के लिए एक अजान जंगल मे बागता है, अर फिर अपनी चतुराई से जंगल के सबसे खुंकार राजा यानी बाग को भी दूल चटा देता है? हे! तीके शे तोडा समझते है! ये सरव बच्छो को सलाने वाली कोई कहानी नहीं है बलकी ये सरवाएवल और मनोविग्यान का एक बहुत्ही गेरा पाथ है मैं पुरी तरा सहमत हूं और इस पाट की शुर्वात मैं बहुती गेरे मनोविग्यानिक संगट से होती है. अग, वो बलिदान वाला हिस्सा? अग, कहानी के पहले हिससे में हम देखते हैं कि एक शान्त और सनेहे करने बक्री है और उसका स्वफ चार महीने का बहुति कोमल बच्चा है, जिसे चागर कहा गया है बहुति चोटा बच्चा बलकुल, समें दुर्गा पूजा कहें और उस माहाल में पुरानी परमपरा के तहेद बलीदान की तईयारी चल रही है मैं लग बे एक बहुती कहोफनाक प्रिष्ट भूमी तैर हो रही हो रहा है यहां जीवन का सबसे क्रूर सच यह नागे आगे कि वो बाडा जो अब दक उस बच्च्छे को बाहरी जंगली जानवर उसे बचारा था आग, वो बाडा अब उसकी मुद्का कारन बनने वाला है बाप्रे तो होता क्या है के एक खरीदार आता है दामतै करता है लेकिन यहां एक आजी गतना होती है तो थो पूरे गतना क्रम कोई बडल देती है वो पैसे लाना बूल जाता है सही पक्डा वो विक्ती पैसे लाना बूल गया है वो ख़ेता है कि वो अगले दिन पैसे लेकर आएगा और चागर को लेजाएगा अब इस एक दिन की जो महलत मिलीना वो बहाड बारी पडगगेई अआ, मागो एस भ्यानक भविष्यका प�रा अबहास हो जाता है उसे समज जाती है कि उसके बच्छे का अंत अप सूनिष्छित है एक माग के लिए जानना कितना बहयानक होगा बहुत बहयानक और फिर वो एक आँसा निरने लेती है तो किसी बी माग के लिए सबसे कठिन होता है वो अपने बच्चे को तुरन्त राद के अंदेरे में उस अग्यात उर खटरनाक जंगल की ओर बहाग जाने की चितावनी देती हैं ये एक बहुती शकती शाली शान है लेकिन अगर में यहां थोड़ा रुक कर सोचुं तो ये पैसला मुझे बहुत्ती अजीब और खटरनाक लखता है कैसे? मतलब जंगल यानी एक पूरी तरा से अग्याद भविष्छ ये वहां जंगली जानवर है बोजन की कोई पक्की विवस्था नहीं पक पक पर खटरा है तो और कदम पर मुत का खटर है कभी कभी सब से बड़ा जोके मुठाना ही बचने का एक मात्र रास्ता होता है? कोई अई अईसी जगा क्यो जाएगा? जाए मुद्गा क्षत्रा हर पल हो? यह इसे विकास्वादी जीव विग्यान, यहनी इविलुषनरी भायोलगी के नजरये से देखना बहुत ज़ूरी है. आचा. विकि यहां चुनाउ जीवन और जीवन के वीच नहीं था. यहां चुनाउ था निष्चित म्रुत्तियो और अनिष्चित्ता के वीच. निश्छत मिरत्यों मदलब वो बली जो च़डने वली ते बलकोल, वो बली दान जो अगले दिन होना ही ता और दूसरी तरव अनिश्छित्ता, यानी वो जंगल जब अन्त शो प्रतिष्छत निश्छित होना तो मस्तिषक अपने आप सरवाइवल मोड में चला जाता है. अनिष्छित्ता में कम से कम जीवित रहने की एक प्रतिष्ट समभावना तो होती है. आप लेकिं जाँ वो बच्चा था वहां वो समभावना एक दम शुन्या थी. सती कहा तो मतलब जब किसी की पीट दिवार से लगजाए तो अग्ग्यात का दर ग्यात के खुफ से चोटा हो जाता है क्या बात है ये निरने साहस का पहला और सबसे बड़ा कदम ता ये हमें बताता है कि जब किसी प्रानी का सामना उनिश्चित विनाश्छ से होता है, तो वो उन खत्रों को भी गले लगाने के लिए तैयार हो जाता है, जिन से वो आम्टर पर दरता है, बिल्कुल, बच्चे का रातो राद गर चोर देना, उसे उस खम्फर्ट्जोन या उस परचिद दून्या को तोडने का प्रतीक है, जो भले ही परचिद थी, लेकिन जान लेवा बन चुकी थी. और वो चोटा सच्जागर सच्च में बाग जाता है. रात वरात वो सुरक्षित लेकिन जान लेवा जगगग को चोड देता है आँ और फिर शुरू होता होटा उसका नया सफर हमेशा कहा जाता है कि ताकत ही सब कुछ है जंगल में बत्तु दो टीन साल बिताता है ये जीवन बिलकुल भी आसान रहा होगा उसके लिए अग बड़ा बक्रा अग पोड विखसित नर बक्रा अख उसकी लंभी डाडि आजा जाती है और बड़े बड़े सींगो गाते हैं वो शारिरिक रूप से पुरी तरह बडल चुका है यहां जो बाज सबसे दिल्चस्प है वो ये है कि कटिन परिस्तिया हमें अगर बच्चा बली से बच्चने किलिए बहागा था वही जंगल के कथोर वातावरन, वहां की चुनोतियों और तनाव के कारन एक प्रबावशाली जीव बन गया आजके संदरभ में यही होटी जीव विग्यान में सिद्धानत है, होरमेसिस अद वो मजबुत होती है? एक दम सही, जो बच्चा भली से बचने किलिए भागा ता वही जंगल के कथोर वातावरन, वहां की चुनोत्यों और तनाव के कारन एक प्रभावषाली जीव बन गया. आजके संदरभ मे भी यही होता है, तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � यह से दुशमन से हो, जिसे शारे लिक रूप से हराना ना मुमकिन हो. राग, और वो समें जल्दी आजाता है. पलकोल. बद्तू एक नए जंगल में प्रवेश करता है, और यहां उसका सामना होता है, अस्ली चुनाउती से. जंगल का राजा एक खतरनाक बाग. उपने दर कुछ़्पाने की कोशिष करता है और एक कावियात्मक शेली में तोडा राजसी स्वर बनाकर पुचता है के इतनी नामी डाडी मुच्वाले तुम कहा से आई हो? मतलब वो सीड़ा हमला नहीं करता नहीं ये बहत महत्वोपोण शरन है तुम कहा से आई हो? मतलब वो सीदा हमला नहीं करता. नहीं ये बहात महत्वोपोण श़न है. एक शीज शिकारी तुरन्त हमला नहीं कर रहा. उसबाल पूच रहा है. क्योंकि वो अंदर से ब्रहमित है. लिकिन एक मिनेट. यहां मुझे तोडा संदे हो रहा है यह यह बात मुझे थोडी आव्यावाहारीक लगरी है एक बूखा बाग, जो अपने लाके का राजा है वो सर्फ एक आजीब से जीव को देखकर कैसे दर सकता है मैं समज रही हों आपका सवाल अगर बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न बज़न � बाग के लिए कोई अस्पताल नहीं है अहो हो है ये तो है अगर किसी अनजान शिकार पर हमला करते वकत बाग का पैर तुट जाए या उसे कोई गेरी चोट लग जाए तो वो हा भविश्ष में शिकार नहीं कर पाएगा और अंत तह भूग से मारा जाएगा तो वो रिस्क नी लेन अचाता बलकोल इसलिए, विकास्वादी नजर्ये से शिकारी जान्वर, हमेशा उस चीज से दरते है जिसे वे पहचानते नहीं है अग्यात का दर उनके लिक एक तरा का सुरक्षा तन्त्र है बद्तू का वो विशाल शरीर वे बड़े सींग, ये सब बाग के मान्सिक डेटाबेस में ताही नहीं यहां बाग सच में बहुत दिल्चास पूजाती है बाग पूरी तरह से कन्फुज ता और बत्तू भागने के बजाई पलटकर अपनी चतुराई का पहला प्रदरषन करता है आप बग बाग की आखो में आखें डाल कर कैरा है, कि वो बागों को नाश्तें में खाता है. बलकों. ये तो पोकर के खेल में, बलफ करने ज़सा है. हात में खराब पते है, लेकिन दाओ अगा दिया, बत्तु नहीं आपने अपने अपने बत्ते पफेग देग बद्तूने यहाँ पने आत्मा विष्वास का सब से बड़ा डावज़्ाया यह जिसे नहीं कैते हैं फेख यह तिल यु मेख यह वाला खेल कर दिया बिलकु सटी कुदारन बद्तूने स्तिटी को बहुत जल्दी बहांप लिया बद्तूने यहाँ बने आत्मा विष्वास का सब से बड़ा डाव चलाया यह ज़े से आम कैतियाना फेकिट तिल यु मेकिट वो लाख खेल कर दिया बिलकुल सटी कुदारन बद्तूने इस टीटी को बहुत जल्दी बहाँप लिया अपास का सब से बड़ा दाव चलाया ये ज़े से आम कैते हैं आप प्फेख ये तिल यो मेख येट वोला खेल कर दिया बिलकोल सती कुदारन बत्तू ने स्तीती को बहुत जल्दी बहाप लिया उसने समथ लिया की उसका अज समान ने रुब बाग के लिए एक एक बहुत बडा रहस लिए हैं और उसने एस रहस से को अपनी ताकत बना लिया आर्थ शास्तर और मनोविद्यान की बाशा मे इसे सुचना की विषमता यानी अन्फमेशन असेमिट्री का फप्डा उठाना कैते हैं अन्फमेशन असेमिट्री बट्तु जानता ता के वो क्या है? लेकिन बाग नी जानता ता बट्तु ने बाग को गलत सुचना दी एक अँसा ब्रहम पेडा किया, जिसकी बाग चाहकर भी पुष्टी नहीं कर सकता था लेकिन क्या सरफ बाते बनाने से सच्मे कोई बाग दर सकता है? मदला बाग इतना बेवकूफ तो नहीं होता हा, क्योंकि यहां संज्यामात्मक अदिबहार यानी, कोगनेटेव अवर लोड की स्तिती पड़ा हो गगे थी कोगनेटेव अवर लोड बाग का दिमाग एक साथ कई विरोदा भासी जानकारियों को प्रोसेस करने की कोशिष कर रहा था आचा कैसे? दिखे, एक तरफ एक एसा जीव है जो अजीप दिकता है तुस्री तरव वो जीव दरने या बागने कबजा एक दम आत्मविविश्वास से खड़ाएं और तीसरी तरव वो केराएं के वो बागुगो कहाता है तो दिमाग का तो दधी होनाई था बाग के यलकल बाग का दिमाग इस उलजन को सुलजाने पाया और जब दिमाग एसे सुन होजाता है, तो शरीर का सबसे सुबस्छित दिफाल्ट रेएक्ष्छन होता है, वहाँ से बस बाग जाना. और बाग सच में अपनी जान बचाएकर वहाँ से बभाग निकलता है. उसने अपने बल का इस्तमाल करने के बचाए, अपने अपने दर को खुट पर हावी होने दिया अब वो मान्सिक रूप से हर गगया है लिकिन कहानी का सब से रोमान्चाक हिस्चा तो अब शिरू होता है बाकते हुए बाग को रास्ते में क्चालाक सीर मिलता है सीर, जो हमेशा से अपनी दूर्टता के लिए मशूर है हा... सीर बाग से पूरी कहानी सुनता है और और जोर जोर से हसने लकता है वो बाग को वास्ट्विक्ता बताता है कि वो सर्फिक बख्रा है बिल्ल्कुल वे कहता है कि जिस से बाग दरकर बाग रहे है तोडने की कोशिष कर रहा है, जो बद्तू ने बाग की दमाग में पेडा किया ता. वो एक तरका सलाकार बन गया जो केरा है, के दरो मद, वास्ट्विक्ता वो नहीं है जो तोमें दिख्रे है. सी आर कुद बहुट चालाक है. इसले वो बत्तू की चालाकी को तुरंथ पकर लेता है लेकिन बाग का जो वो मनोबिग्यान लिक दर ताना वो इतना गेरा हो चुका ता कि तरक उस्पे कामी नी कर राथा बाग अभी भी इतना दरा हुए कि वो अकेले वापस जाने को तैयार नहीं तब सीर एक बहुत ही एक अजीब सप्रस्ताव रकता है वो केता है के विदोनो आपने पेर एक साथ एक रस्सी से बांद लें ताकि बाग उसे चोडगर बाग ना सके कितनी अजीब बाद अद अना और दरावा बाग इस भेतू की शर्ट को मान भी जाता है तो तो बगादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बाद तो इस सब का असल मतलप क्या है? अगर लिए में से बडी तस्वीर से जोडखर देखें महाव की जेगा मेरा मतलप हैगर अगर लिए में से बडी तस्वीर से जोडखर देखें तो ये मनोवैग यानिक यूद यानी साइकलोगिकल वार्फेर का सब से अगर आमे से बडी तस्वीर से जोड़कर देखें महाजकी जगा मेरा मतलब है अगर आमे से बडी तस्वीर से जोड़कर देखें तो ये मनोवैग यानिक यूध यानी साईकलोगिकल वार्फेर का सबसे बहतरी नुदारन है साईकलोगिकल वार्फेर अग, इसका मतलब है कि दुश्मन के शरीर पर नहीं, बलकि उसके दिमाग परवार करना. बत्तूने बाग के नाखुनों या दान्तों को नहीं, बलकि उसके ब्रम को अपना निशाना बनाया. उसने बाग की सबसे कमजोर कडी परवार किया. ये रननीती मुजे तो किसी बड़े कोरप्रेट बैटल या या कुटनीती की तरा लकती है. जो आसल आहा मोमेंट है ना वो ये नहीं है के बत्तूने बाख से जुड बोला. तो क्या है? असली केल तो यहे के बद्तूने अपने दुश्मन के सलाकार को ही उसी के खिलाफ अट्यार बना दिया वाँ बिल्कुल सही मड़ब स्यार बाग का तर्क केंदर ता जो से सच बतारा था बद्तूने एकी वाख्के से बाग के दिमाग में बाग डाल दी के सीार बाग का दोस नहीं बलकी बद्टू का अजन्ट है एक दम सही पक्डा आपने यही बद्टू की सबसे बडई जीथ है शारी रिक रूप से बख्रा कभी बाग को हराही नहीं सकता अगर वे लड़ते तो परिनाम सब को पता है आप बत्तु कतो कीमा बन जाता? बलकुल! इसके बजाए, उसने बाग के दिमाग में चल रहे, उस सन्देह को एक पकी हकीकत में बडल दिया. जैसे ही बाग ने सुना के सीर ने उसे लाने का सवधा किया था, उसका बचा खुचा सारा तर्क, सारा लोगिक एक सेकिन में खत्म होगगया. उसे लगा स्यार ने दोका दे दिया? रहां! उसे लगा कि स्यार ने उसे फसा दिया है, और ये अजीब जीव सच में उसे खाने वाला है. इसे कुतनिती में विबाजित करो और राज करो यानी दिवाएडन्रूल का सबसे सुखष्म रूभ भी काजा सकता है दूशमन के खेमे में औल विष्वास पैदा कर दिना ही आदी जीत होती है तुछ जो होता है वो सच में रोंग्टे कर देने वाला है बत्तु की बाद सुनते ही बाग बिना पीछे मुडे पुरी रफ्तार से बाग ख़ाउता है अंदा दूंद बाखता है आँ, उस देहशत में वो ये पुरी तरा है बूल जाता है कि उसका पहर सी आर के पहर से बनदा होए बाग की उस तेजगती और गब्राहत में सीर जमीन पर गिसट गिसट कर पत्टरों और काटो से तक्राखर मारा जाता है इस से बहुत अहिम सवाल उठता है सीर की अपनी ही दूरतता, उसकी चाला की उसकी मोथ का कारन कैसे बन गय? आई ये बहुत विटम बना है. साहित्यो न्याइश्वास्त्र में ये से काव्यात्मक न्याय यानी पोईतिक जस्टिस कहाजाता है. इस का मतलब है कि जब किसी के बूरे कर्म उसी के पतन का कारन बन जाए. जैसे कुत आँसा. बलकुल. सीार ने बाग के दर का फझदा उठाखर, बिना महनत के खुद का भूजन पक्का करने की कोशिष की ती. उसने क्रित्रिम बंदन बनाया पैर बादना ये सोचकर की बाग उसे चोड नहीं पाएगा, और वो पुरी तरा सुरक्षित रहेगा. लेकिन वही सुरक्षा का बंदन उसकी जान का दूश्मन बन गया बिलकुल ये एक बफ्ड बडा सबक है के चल और दूर्थ ता अंतता चल करने वाले को ही नश्ट कर देती है सही बात है सियार अपने ही बुने हुए जाल में अपनी ही बनाई हुई रस्सी में उलज कर रहे गया अगर उसने चलाकी दिखाने की बजाए सीदा रास्ता चुना होता तो शाएद उसकी जान बज्जाती और बत्तु वो बिना एक भी खरोज खाए सरफ अपनी बुद्द्दी अपनी प्रज़न्स अप मैंड और शब्दो के सही इस्तमाल से विजेटा बन गया. मित्फिला की लोग कतावाँ में, बद्दू की ये गाता एसे ही येजनी लोग प्रिया नहीं है. ये एक बहुत बडा प्रतीक है. आप बहुत गेरा प्रतीक है. ये कहानी हमे साथ तोर पर बताताती है, कि शारिरिग बल, पैसा या सन्सादन चाहे कितने भी जईदा क्योना हो, अगर विप्रीत परस्थितियो में बुद्दी स्तिर है, तो बाजी पल्टी जा सकती है. तब रहासी होने का मतलब हमेशा तलवार उठाना या या या शारेरे क्रुब से लडना नहीं होता. कई बार साहस का सबसे बडा रूप होता है, अपने दिमाग को शान्त रखना, जब बाकी पुरी दुन्या गब्रा रही हो. ज़से बद्दू ने किया? अब बत्तु का अत्मविष्वासी उसकी सबसे बड़ी धाल था सोचिए अगर वो स्यार और बाग को साथ आते देखखर एक पल के लिए बही अपनी जगा से हिल जाता या थोडा सब भी पसीना आ जाता उसे या उसके चहरे पदर दिख जाता या वो बगने की कोशिष करता, तो तुरन्त मारा जाता. उसका अपने बनाईवे ब्रम्पट तिके रहना, अपने ब्लफ को अंथ तक मेंटेन करना ही, उसकी जीट की कुन जी ठा. तो अगर आम इस पूरी चर्चा को समेट है, तो सबसे बड़ी बाज जो हमे सीकने को मिलती है वो यह आई है, कि जीवन में जब भी बाग जैसी विक्राल और दरावनी समस्सें सामने आई है. तो शरेरिक ताकत या सीमथ संसादनो पर रोने के बजाए, मानसिक संथुलन का अईस्तमाल करना चाही. बलकल सही. समस्या कित्री भी बड़ी क्यो नहों उसका कोई नहों कोई मनोवैग्यानिक लूप्होल जरूर होता है बस उस लूप्होल को प्यचानना है और बत्व कित्रा सही समय पर सही शब्डो का प्रार करना है और इसी के साथ में अग अंतिम विचार चोडना चाहूंगी योंकि हम ने उने अपने दिमाग में बड़ा मान लिया है। और सब से महत्टबों बात, क्या हम ने अनजाने में किसी स्यार के सात, यानी किसी गलत सला, या अपने ही नकारात्मक विचारों के सात, अपने पैर बान लिया है, जो हमे आगे बडने से रोक रहा हैं? अगर एक छोटा सब अख्रा सर्फ अपनी बातों और आत्मविष्वास से एक खुंकार बाख को दरा सकता है? तो हम अपनी चुनोतियों को किस तरा का ब्रहम दिखा सकते हैं? ये सच में एक विचार उटेजग बाथ है अपने यह ज़़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज़ बज