MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
मूँगा_और_जालिम_सिंह.mp4
Timestamped machine output
- 0:00–0:07नमशकार, बेत्या राज की एक बेहत दिलचास्प और अतिहासिक लोग गाता के सविष्लेषन में आपका बहुत-बहुत स्वागत है.
- 0:07–0:10आज हम जिसकाहनी पर बात करने वाले है ना,
- 0:10–0:13उसने अपने समवे समाज, सत्ता, और भगावत,
- 0:13–0:16सब की सीमाओ को पुरी तरहा से चनाउती दी थी.
- 0:16–0:20तो बिना किसी देरी के चल ये सीदे तेहास के उन पन्नो में चलते हैं,
- 0:20–0:24ज़ाह प्यार के कीमत अकसर अपनी जान देकर चुकानी परती थी
- 0:24–0:26तो चल ये इस में गेराई से उतरते हैं
- 0:26–0:30और चलते हैं सीदे प्राछीन भेत्या राज की सीमाव के भीतर
- 0:30–0:33सुची ए, एक आसा दोर जाए बहुत एक गेरी भावनाय
- 0:33–0:36अर भेंकर प्रतिशोद एक साथ पनप्रहे दे,
- 0:36–0:39ये सिव कोई आम प्रेम कहानी बिलकु नहीं है,
- 0:39–0:42बलकी ये प्यार, दोखे और एक साम्राज्जिके बेकाबु क्रोग,
- 0:42–0:45आब जर अप इस बात पर गवर कीजे.
- 0:45–0:48कहा जाता है, एक तरफ राजा का क्रोद,
- 0:48–0:50तुस्री तरव बाग शिकारी
- 0:50–0:51और भीच मे फ़सा है
- 0:52–0:52प्रेम
- 0:53–0:54एप पंक्तिया सच में
- 0:54–0:56इस पूरी एटेहासीग गाता के दाव को
- 0:56–0:57बलकु साव कर देती हैं
- 0:58–1:00जातीों की सीमावो को तोडने वाला ये प्यार
- 1:00–1:01कोई मामूली किस्सनी ता
- 1:01–1:11ये एक अईसा तूफान ताना जिस में जान जाना लगभग तैठा और सच कहुतो ये एक अईसे संगरष की श्रूात थी जिस ने पूरे राजे की नीवी हिलाकर रक्दी.
- 1:11–1:15अब इस गेहली समाजे कहाई और इस भगावत को समजने के लिए,
- 1:15–1:19हमें इन दो मुखे किरदारों के भीचके बारी अंतर को देखना होगा.
- 1:19–1:24एक तरफ है जालिम सिंग. ये भेतिया राजा के बहुत ही सम्मानित राजपूट,
- 1:24–1:26सिपाही और सिनापती हैं.
- 1:26–1:30रूट्बा एशा कि इनके गोडे की ताप सूनकर ही रास्ते खाली हो जाते हैं.
- 1:30–1:32और दूसरी तरफ हैं मुंगा.
- 1:33–1:37ये दूद बंसी, यानी दूसाथ समवदाए की एक बहत खुपसुरत कन्या है.
- 1:37–1:39रूप और गूड में एक दं भेजोड.
- 1:39–1:42लेकिन, उस्वैकि समाज के तो कडे नियम तेना,
- 1:42–1:44उनके हिसाब से इन दोनो का मिलना,
- 1:44–1:47एक पूरी तरासे असमबव और अकल्पनिय विद्रो था.
- 1:48–1:50तो पहानी की जो अस्ली श्वर्वात होती है,
- 1:50–1:52वो इसे खास पल से होती है.
- 1:52–1:53सुबह सुबह का समय हैं,
- 1:53–1:56गाँ की महिलाये कुईपर पानी बहर रही हैं
- 1:56–2:00और तबही, जालिम सिंग अपने गोडे पर सवार होकर वहांसे गुजरते हैं
- 2:00–2:06भीड को चीड़ते वे आगे बड़ते जालिम के कदम अचानाक मुंगा को देखकर वही रुक जाते हैं
- 2:06–2:15उईक आम रही कितरा बस पानी मागते है, और बस यही से एक अनकहे बिना शब्दों वाले गेरे रिष्टे की शुर्वात हो जाती है.
- 2:15–2:21अब इस खटना के बारे में जो बाथ सबसे दिल्चस पिना, वो यहे कि ये पल कितना चोता, कितना शनिक था.
- 2:21–2:26मुंगाडर या शायत शर्म से अपना पानी का गडा वहे चोड़कर तेजी से बाख गडाई.
- 2:26–2:29शायत उसे कुद नहीं पता था कि वो दर था या लाज.
- 2:29–2:34लेकिन ये चोटा सा जिजक से बरापल जालिम शिंक के मन में हम मिशा किले चब या.
- 2:34–3:04अगर बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग ब
- 3:04–3:07अर जलन के उस गन्दे खेल के लिए अज्सा थी
- 3:07–3:10और टीक इसी मुशकल वक्त में सामने आती है
- 3:10–3:12एक अटूट सची मित्रता
- 3:12–3:15ये प्रसंग है प्टू मल्लाग का
- 3:15–3:19प्टू जालिम सिंका सबसे सच्चा और वफादार साती ता
- 3:19–3:22जो हर संकत में उनके कंदे से कंदा मिलाकर कडा रहता ता
- 3:22–3:26जब प्रिद्विपार के बाडे के हत्यारोंने जालिम पर दावा बुलाना
- 3:26–3:29तो आपको जांकर हेरानी होगी कि पत्टू ने अकेले ही
- 3:29–3:31उन सभी हम्लावरों को मुद के गातु दार दिया
- 3:31–3:34एक भी दूश्मन महा से बचके नहीं जापाया?
- 3:34–3:38पट्टू की इस जीतने प्रिथ्फीपाल की आग में गी डालने का काम किया,
- 3:38–3:40उसका अप्मान और बड़गया,
- 3:40–3:42उसने राजा को और ज़ादा बड़काया,
- 3:42–3:45और इस बार इस में मुंगा का नाम भी खसीट लिया गया.
- 3:45–3:51अब जब राजा के ब्यंकर क्रोद की खवर जालिम तक पूँची तो गेज्री दूविदा मे पडगे.
- 3:51–3:56तब जालिम और पट्टू पूँचे गाँके सिध्सादू गुरु माणी बाबा के पास.
- 3:56–4:01बाबा एक एसे गयानी ते जिनकी बात पूरे गाँ में पत्धर की लकीर मानी जाती जाती ती.
- 4:01–4:06और वहां पहुचते ही ना महाल में एक अजीप सन्नाटा और तनाव चागया.
- 4:06–4:11तो यहां सबसे महतुपूश बात यहे है कि बाबाने कुछ देर माअन रहने के बाद
- 4:11–4:16बवद्यी शान्त और गमभीर सूर में स्व्व दो शब्द कहे
- 4:16–4:18चोडी दे मुंगाक संग
- 4:18–4:21यानी मुंगाक साथ चोड़ दो
- 4:21–4:25यकीन मानिये ये सला जालिम के सीने में बरच्ष की तरा चुप गई
- 4:25–4:26वो पुरी तरशन रहे गे
- 4:26–4:29अब रेशे तो सादो की बात को कवी कभी तालता नी ता,
- 4:29–4:32लेकिन जालिम का रिदः ये मानने को तैयारी नी ता.
- 4:32–4:36वो एक दम चुप रहे गय, क्योंकि जिस प्यार से वो बंद चुके देना,
- 4:36–4:39उसे तोडना उनके लिए सच्में असमबव था.
- 4:39–4:42इसके बात तो परिस्तितिया और भी भयंकर हो गएई
- 4:42–4:46खास कर तब जब प्रिट्वी पाल ने सीदे पट्वो ही निशाना बना लिया
- 4:46–4:50यहा से गटना करम बहुत ही देजी से और भेहद हिंसक रूप ले लेता है
- 4:50–4:53पट्वो जो हर मुष्किल में जालिम की डाल ता
- 4:53–4:58उस्टेवी भवावानी की कसम खाई और सीदा उस देज़्ड्रोही प्रिट्वीपाल पर तुट पडा.
- 4:58–5:02इस खुनी और तेस संगर्ष में पट्टोने उस गद्दार को मार्तो गिराया.
- 5:02–5:06तुर्बाग से प्रिष्विपाल की पूरी भीडने पट्टू को गेर लिया
- 5:06–5:10और वो अकेला युद्धा अपने स्वामी के नाम पर लड़्टे लड़े
- 5:10–5:12वीर गती को प्राप्त हो गया
- 5:12–5:15ये आमर भलीदान पट्टू की वाफादारी का सबसे बड़ा प्रतीक है
- 5:15–5:21उसकी इस मुद्त ने जालिम के सीने में बहुत थी गेरा और कबही नब रहने बारने गाव चोर दिया.
- 5:21–5:26तो दोस्ती की एक आफी कीमद थी जेसे जालिम सिंग ता उमर नहीं बूल सके.
- 5:26–5:30एक सच्चा मित्र, जिसने हस्ते-हस्ते अपने प्रानो की आहुती दे दी,
- 5:30–5:34अबही इस भ्यानक सद्मे से वो उबर भी नहीं पाए थे,
- 5:34–5:36की एक अर ख़ोफनाक खबर आख़िए।
- 5:36–5:40आई देकते हैं के इसके बाद परस्तितिया कैसे और भयंकर रूप लेटी हैं
- 5:40–5:45खबर ये थी के मुगा को बेत्या के गने जंबलो में निरवासित कर दिया गया था
- 5:45–5:48और दियान रहे ये निर्वासन कोई आम सजब बिलकुल नहीं ती
- 5:48–5:51कुकि वो गंगोर जंगल किसी अर का नहीं
- 5:51–5:54बलकी मुंगा के अपने बाई कनूवा का ईलाका था
- 5:54–5:57वो जंगल इतना दरावना था कि वहां जाने का सीथा सा मतलब ता
- 5:57–5:59मुद के मुमे जाना
- 5:59–6:04कनूवा का जो व्यक्तित उताना वो सच्मे रोंटे कडे कर देने वाला था
- 6:04–6:07उसकी शारीरिक ताकत की तो आब बस कल्पना ही कर सकते हैं
- 6:07–6:11उईक आसी भहेंस पर सवारी करता ता जो बागों का शिकार करती ती
- 6:11–6:16ज़रा सुचिये और कहा जाता है कि उसकी कुराक सो मन्दूद थी
- 6:16–6:22लेकिन सबसे बहयानक बात ये ती कि उस जंगल में कनूवा की अपनी एक लिएक खोफनाक रीज चलती थी
- 6:22–6:26मूंगा को उसी जंगल की देवी के सामने बली देने किले बान दिया गया था
- 6:26–6:29और कन्वा उसकी गर्दन काटने किलिए पूरी तयार कडा था
- 6:30–6:32और ये बहुत ही शान्दार तरीके से दर्षाता है,
- 6:32–6:34कि कैसे हर विपत्ती,
- 6:34–6:36हर क्ठरे के बावजुद,
- 6:36–6:38प्यार की एक दोर अटूट रही.
- 6:38–6:40राजा का प्रच्ट क्रोद हो,
- 6:40–6:46जंगल के वो खफनाग खत्रे हो, बली की वेदी हो, या फिर समाज का बहयंकर विरोद.
- 6:46–6:49कोई भी चीज इस प्यार को तोड नहीं सकी.
- 6:49–7:19मुगा और जालिम का प्रेम इन सभी ख्फनाग बादावो को पार करते हुए अंध मे विज़ेई हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 7:19–7:23ब्रानी परम्पराव की सभी जनजीरों को पुरी तरह से तोर सकता है?
- 7:23–7:27इस अटिहासिक लोग गाता और इसके किरदारो के अद्बुध सहस को देकतेवे,
- 7:27–7:30ये सवाल आज भी गेराए से विचार करने योगे है.
- 7:30–7:34इस विश्लेशन से ज़ूडने किलिए आपका बहुत-बहुत दनेवाद
Plain text
नमशकार, बेत्या राज की एक बेहत दिलचास्प और अतिहासिक लोग गाता के सविष्लेषन में आपका बहुत-बहुत स्वागत है. आज हम जिसकाहनी पर बात करने वाले है ना, उसने अपने समवे समाज, सत्ता, और भगावत, सब की सीमाओ को पुरी तरहा से चनाउती दी थी. तो बिना किसी देरी के चल ये सीदे तेहास के उन पन्नो में चलते हैं, ज़ाह प्यार के कीमत अकसर अपनी जान देकर चुकानी परती थी तो चल ये इस में गेराई से उतरते हैं और चलते हैं सीदे प्राछीन भेत्या राज की सीमाव के भीतर सुची ए, एक आसा दोर जाए बहुत एक गेरी भावनाय अर भेंकर प्रतिशोद एक साथ पनप्रहे दे, ये सिव कोई आम प्रेम कहानी बिलकु नहीं है, बलकी ये प्यार, दोखे और एक साम्राज्जिके बेकाबु क्रोग, आब जर अप इस बात पर गवर कीजे. कहा जाता है, एक तरफ राजा का क्रोद, तुस्री तरव बाग शिकारी और भीच मे फ़सा है प्रेम एप पंक्तिया सच में इस पूरी एटेहासीग गाता के दाव को बलकु साव कर देती हैं जातीों की सीमावो को तोडने वाला ये प्यार कोई मामूली किस्सनी ता ये एक अईसा तूफान ताना जिस में जान जाना लगभग तैठा और सच कहुतो ये एक अईसे संगरष की श्रूात थी जिस ने पूरे राजे की नीवी हिलाकर रक्दी. अब इस गेहली समाजे कहाई और इस भगावत को समजने के लिए, हमें इन दो मुखे किरदारों के भीचके बारी अंतर को देखना होगा. एक तरफ है जालिम सिंग. ये भेतिया राजा के बहुत ही सम्मानित राजपूट, सिपाही और सिनापती हैं. रूट्बा एशा कि इनके गोडे की ताप सूनकर ही रास्ते खाली हो जाते हैं. और दूसरी तरफ हैं मुंगा. ये दूद बंसी, यानी दूसाथ समवदाए की एक बहत खुपसुरत कन्या है. रूप और गूड में एक दं भेजोड. लेकिन, उस्वैकि समाज के तो कडे नियम तेना, उनके हिसाब से इन दोनो का मिलना, एक पूरी तरासे असमबव और अकल्पनिय विद्रो था. तो पहानी की जो अस्ली श्वर्वात होती है, वो इसे खास पल से होती है. सुबह सुबह का समय हैं, गाँ की महिलाये कुईपर पानी बहर रही हैं और तबही, जालिम सिंग अपने गोडे पर सवार होकर वहांसे गुजरते हैं भीड को चीड़ते वे आगे बड़ते जालिम के कदम अचानाक मुंगा को देखकर वही रुक जाते हैं उईक आम रही कितरा बस पानी मागते है, और बस यही से एक अनकहे बिना शब्दों वाले गेरे रिष्टे की शुर्वात हो जाती है. अब इस खटना के बारे में जो बाथ सबसे दिल्चस पिना, वो यहे कि ये पल कितना चोता, कितना शनिक था. मुंगाडर या शायत शर्म से अपना पानी का गडा वहे चोड़कर तेजी से बाख गडाई. शायत उसे कुद नहीं पता था कि वो दर था या लाज. लेकिन ये चोटा सा जिजक से बरापल जालिम शिंक के मन में हम मिशा किले चब या. अगर बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग ब अर जलन के उस गन्दे खेल के लिए अज्सा थी और टीक इसी मुशकल वक्त में सामने आती है एक अटूट सची मित्रता ये प्रसंग है प्टू मल्लाग का प्टू जालिम सिंका सबसे सच्चा और वफादार साती ता जो हर संकत में उनके कंदे से कंदा मिलाकर कडा रहता ता जब प्रिद्विपार के बाडे के हत्यारोंने जालिम पर दावा बुलाना तो आपको जांकर हेरानी होगी कि पत्टू ने अकेले ही उन सभी हम्लावरों को मुद के गातु दार दिया एक भी दूश्मन महा से बचके नहीं जापाया? पट्टू की इस जीतने प्रिथ्फीपाल की आग में गी डालने का काम किया, उसका अप्मान और बड़गया, उसने राजा को और ज़ादा बड़काया, और इस बार इस में मुंगा का नाम भी खसीट लिया गया. अब जब राजा के ब्यंकर क्रोद की खवर जालिम तक पूँची तो गेज्री दूविदा मे पडगे. तब जालिम और पट्टू पूँचे गाँके सिध्सादू गुरु माणी बाबा के पास. बाबा एक एसे गयानी ते जिनकी बात पूरे गाँ में पत्धर की लकीर मानी जाती जाती ती. और वहां पहुचते ही ना महाल में एक अजीप सन्नाटा और तनाव चागया. तो यहां सबसे महतुपूश बात यहे है कि बाबाने कुछ देर माअन रहने के बाद बवद्यी शान्त और गमभीर सूर में स्व्व दो शब्द कहे चोडी दे मुंगाक संग यानी मुंगाक साथ चोड़ दो यकीन मानिये ये सला जालिम के सीने में बरच्ष की तरा चुप गई वो पुरी तरशन रहे गे अब रेशे तो सादो की बात को कवी कभी तालता नी ता, लेकिन जालिम का रिदः ये मानने को तैयारी नी ता. वो एक दम चुप रहे गय, क्योंकि जिस प्यार से वो बंद चुके देना, उसे तोडना उनके लिए सच्में असमबव था. इसके बात तो परिस्तितिया और भी भयंकर हो गएई खास कर तब जब प्रिट्वी पाल ने सीदे पट्वो ही निशाना बना लिया यहा से गटना करम बहुत ही देजी से और भेहद हिंसक रूप ले लेता है पट्वो जो हर मुष्किल में जालिम की डाल ता उस्टेवी भवावानी की कसम खाई और सीदा उस देज़्ड्रोही प्रिट्वीपाल पर तुट पडा. इस खुनी और तेस संगर्ष में पट्टोने उस गद्दार को मार्तो गिराया. तुर्बाग से प्रिष्विपाल की पूरी भीडने पट्टू को गेर लिया और वो अकेला युद्धा अपने स्वामी के नाम पर लड़्टे लड़े वीर गती को प्राप्त हो गया ये आमर भलीदान पट्टू की वाफादारी का सबसे बड़ा प्रतीक है उसकी इस मुद्त ने जालिम के सीने में बहुत थी गेरा और कबही नब रहने बारने गाव चोर दिया. तो दोस्ती की एक आफी कीमद थी जेसे जालिम सिंग ता उमर नहीं बूल सके. एक सच्चा मित्र, जिसने हस्ते-हस्ते अपने प्रानो की आहुती दे दी, अबही इस भ्यानक सद्मे से वो उबर भी नहीं पाए थे, की एक अर ख़ोफनाक खबर आख़िए। आई देकते हैं के इसके बाद परस्तितिया कैसे और भयंकर रूप लेटी हैं खबर ये थी के मुगा को बेत्या के गने जंबलो में निरवासित कर दिया गया था और दियान रहे ये निर्वासन कोई आम सजब बिलकुल नहीं ती कुकि वो गंगोर जंगल किसी अर का नहीं बलकी मुंगा के अपने बाई कनूवा का ईलाका था वो जंगल इतना दरावना था कि वहां जाने का सीथा सा मतलब ता मुद के मुमे जाना कनूवा का जो व्यक्तित उताना वो सच्मे रोंटे कडे कर देने वाला था उसकी शारीरिक ताकत की तो आब बस कल्पना ही कर सकते हैं उईक आसी भहेंस पर सवारी करता ता जो बागों का शिकार करती ती ज़रा सुचिये और कहा जाता है कि उसकी कुराक सो मन्दूद थी लेकिन सबसे बहयानक बात ये ती कि उस जंगल में कनूवा की अपनी एक लिएक खोफनाक रीज चलती थी मूंगा को उसी जंगल की देवी के सामने बली देने किले बान दिया गया था और कन्वा उसकी गर्दन काटने किलिए पूरी तयार कडा था और ये बहुत ही शान्दार तरीके से दर्षाता है, कि कैसे हर विपत्ती, हर क्ठरे के बावजुद, प्यार की एक दोर अटूट रही. राजा का प्रच्ट क्रोद हो, जंगल के वो खफनाग खत्रे हो, बली की वेदी हो, या फिर समाज का बहयंकर विरोद. कोई भी चीज इस प्यार को तोड नहीं सकी. मुगा और जालिम का प्रेम इन सभी ख्फनाग बादावो को पार करते हुए अंध मे विज़ेई हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ ब्रानी परम्पराव की सभी जनजीरों को पुरी तरह से तोर सकता है? इस अटिहासिक लोग गाता और इसके किरदारो के अद्बुध सहस को देकतेवे, ये सवाल आज भी गेराए से विचार करने योगे है. इस विश्लेशन से ज़ूडने किलिए आपका बहुत-बहुत दनेवाद