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बत्तू_बाघ_आ_सियारक_कथाक_समीक्षा.m4a
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- 0:00–0:05आए हम सब बत्तु नामक एक ता चागर कोई कताक समिक्षा करहल ची,
- 0:05–0:08जे बली सा बची जंगल बहागे थे ची,
- 0:08–0:13आर आपन बुद्दिसा बाग और सीरजका जान्वर के पराजित करे थे चे.
- 0:13–0:26कताख सन्रच्ना में बतुक छोट चागर साँ एक ता विशाल आर शक्तिषाली जंगली जान्वर बनवाख जे रूपान्तरन आची, ओकर भीच्क संगर्ष्क वरनन आवर भेसी इसपप्ष्ट बहे सकेट आचे.
- 0:26–0:28एक दम सही
- 0:28–0:31माने अद्याय तीन में लेक्ख दिखायो लची
- 0:31–0:35जे चागर तु तीन साल जंगल में रही का मोट सोट बन गे लचे
- 0:35–0:38आ, उकरा बरभर सींग आदाडी भेगे लची
- 0:38–0:40मुदा कमजोरी इए चे
- 0:40–0:44जे एही ताम कता बहुत तेजी सागा बरजाई तचे
- 0:44–1:14आप आप आप बद्द़ाग बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बा�
- 1:14–1:16बाद्ख्त सीधे बाग्स न सामना देखे चाहे तची
- 1:16–1:18देखू, कथाख्त कगती आगेहराई दोनो दूता भिन्नगाः पची
- 1:18–1:20जोन हम सब बिना संगर्ष के उक्रा सीधे सींग वाला बहादुर चागर बना देची
- 1:20–1:22तो उविकास अवास्तविक लागत ची
- 1:22–1:24तो उगर महत तो कम बहाजाई तची
- 1:24–1:26ता एकर ले लेखख की कर थे
- 1:26–1:28उदाहरन के लेल, जक्हन उचोट रहे
- 1:28–1:30तक खुनो चोड जंगली जानवर
- 1:30–1:32जेना जंगली भिलाई वा कुत्ता सब वच्वा के लेए
- 1:32–1:34लेगग बागा लेगग बागा लेगग बागा लेगग
- 1:34–1:36तो उविकास आवास्तविक लागत अची.
- 1:36–1:40आव, मैंने, बिना पसीना भहने जीट बहती तची,
- 1:40–1:42वोकर महत तो कम वह जाए तची.
- 1:42–1:44तई एकर लेल लेक्ख की कर थी?
- 1:44–1:45उदाहरन के लेल,
- 1:45–1:47जगन उचोट रहे,
- 1:47–1:49तक कुनो चोट जंगली जानवर,
- 1:49–1:54जेना जंगली भिलाई वा कुत्ता सबच्वाके लिल, उआपन कुनो पाकल बुद्धिक प्रुएक के ने होए.
- 1:54–1:58दर लिया जी एक राति गंगोर वर्षा भहुर हाल आच्छी.
- 1:58–2:01आएक ता जंगली भिलाई उक्रा पाचा लागल आच्छी.
- 2:01–2:11एक दम, बतु लग अक्शारीरिक बल नहीं अची, मुदा उ अपन चतुराईसा कोनो गुफाक संकरी रस्ता वक काटक कजाडी में बिलाई के पसादे चे.
- 2:11–2:19बुजल्य, ये एक तब आईग द्रिष्छ बनी सकेत छी, जाए सब पाथक के विश्वाज बजाएत, जो जंगल में मात्र भाग गिसान नहीं बचलची.
- 2:19–2:24आई इ चोट गतना आगा जे बाग वला काँड आप वला ची
- 2:24–2:28उकर लेल एक तप फोल शाडोएंग वा आदार तगार करत.
- 2:28–2:32मने पाथक अवचेतन मन में इबात बैस जाइत
- 2:32–2:37जे बतुक आस्ली हत्यार उकर सिंग नहीं बलकी उकर दिमाग आची.
- 2:37–2:44भिल्ल्कुल! आप ज़म सब आगा बड़ी येट चरम सीमा पर भाग अस्यारक संबद्तू कर जे अन्तिम मुट्भेत आची,
- 2:44–2:49वो कर प्रभाव के और भेशी नाट्ग्या अस्सगन बनावल जासकई तची.
- 2:49–2:53आप पात्खा के उही क्यत्राक आस्ली गराई महेंसुस नहीं बापाई तची.
- 2:53–2:57अपाटका के उही कष्टराक अस्ली गराई महेंसुस नहीं बाआपाई तची
- 2:57–3:00मुदा जब बत्तु तुरन् समवाद बाजी तची
- 3:00–3:03तक यह उकर निदर्तान अप देखाई तची
- 3:03–3:06जे सियार आपन पेर में बागख पेर बान्दी का आभी रहाल आची
- 3:06–3:09तो तो तो बाग आने ले कहत्र लिया
- 3:09–3:12एही सजे सबह सरो माचक चन च्चन ची
- 3:12–3:14उ बहु जल्दी समाप्त बहुजाई तची
- 3:14–3:18अप पाट्खा के उही कहत्राक अस्ली गराई महेंसुस नहीं भापाई तची
- 3:18–3:21मुदा जो बत्तु तुरन समवाद भाजी तची
- 3:21–3:24तक यी उकर निदरता नहीं देखाव रहल थी?
- 3:24–3:28देखो बत्तुक निदरता के लिए नीक अची
- 3:28–3:30मुदा कता वाचनक द्रुस्टि कोन से
- 3:30–3:33मने सस्पन्सक लिल यी आत्मगाती अची
- 3:33–3:37कता जेना अचानक गीर बदली ले तची
- 3:37–3:40अट्तनाव एक के चन में विलाजाई तची
- 3:51–4:00बुजल ये ये तो वहीना बेल जादूगर मंच पर आवे देरी बिना कोनो भूमी का बनोने सीदे जादूग खॉलासा कर देवे
- 4:00–4:15अदर्शक कहत बस एटबे चल तो सुजाओ एजी जे बत्तू के बुद्दिमानी दिखावे से तीक पहलने कुछ सेकंड के लेल उकर अंत्रिक भहे के गंभीरता पूरवक वड़न के लजाए.
- 4:15–4:20अग, उदारन के लेल जखन बाग आस्यार लग आभी रहल होए,
- 4:20–4:27तदूर उदबाक द्रिष्य, बागग भारी दग, अप बतू के रदाएक द़गन के विस्तार देल जाए.
- 4:27–4:33आ, जेना बतू एक चन के लेल दिराजाए, अकर पैर किचु काँपे,
- 4:33–4:39बक्तु एक च्चन के लेड दिराजाए, अकर पैर किचु कामपे उ एक दक पाचा हते.
- 4:39–4:42आप, इप पाचा हत बाक भात बहुत महत्वपून अची.
- 4:42–4:48नायक का पाचा हतनाए इदेखावे तची जिस्तती वास्तो में प्रान गातक अची.
- 4:48–4:53मुदद तनावक समय में नम्हर नम्हर वाख्या लिख हब तर थीक नहें रहें
- 4:53–4:55उही सकता गती सुस्त बहजाएत ना
- 4:55–4:57एक दम सही पकर लवाहा
- 4:57–5:01एही ताम छोट-छोट वाख्यक प्रियोग हे वाख चाही
- 5:01–5:07जेना, दूरी उरल, बागक पैर जमीन पर परल, ठफ, ठप
- 5:07–5:16अ, स्यारक आखी चमकल, बत्तुख सास रूकी गैल, इप पाथक के सास केन सो हो किचुक शनक लेल रूकी लेत.
- 5:16–5:27आएकर भाद, जखन बत्तू आपन दर के पीभी जायता थी, आएक ता ब्यंकर आवाज में उसम्वाद भाजेत अछी, तकन उसम्वाद ब्रमहास्त्र बन जायता थी.
- 5:27–5:32भिल्कुल, उकर प्रभाओ दस गुना बेशी शक्ती शाली भो जायता थी.
- 5:32–5:37यहे सब पाटक के लागल जै, बत्तू वास्तो मेक्ता पैग खत्रा सा बाहर निकलल अची.
- 5:37–5:41बुजलाई, मने भूटिक्ता के महसुस कराबआब जरूरी आची.
- 5:41–5:45दूरी, गंद, आवाज, आब तेसर बिन्दूपर चलाएची.
- 5:45–5:57अग, कत्ठाख स्वर आश्श्शेली में कत हो कत हो, उप्डेश आत्मक गब भेशी आची, जक्रा कम कव गतनाक माद्यम सब पाठक के स्वयम निष्कर्ष दरी पहुची वाख अप्सर देल जासके टची.
- 5:57–6:07कमजोरी इए आची, जे कताक उपक्रम में आन्त में लेक्खक सब श्प्रुष्त रूप साई बतार हल चितिन, जे इखता की सिखवाई तची?
- 6:07–6:13जना, अन्त में लिखाल आची, बत्तुक विज्यक रहस्य बल में नहु बुद्ध्री में चल.
- 6:13–6:18इश्यली पाथक के विचार करबाक स्वतन्त्रता नहीं देता ची
- 6:18–6:22आ, इग्ता ने बन्द जगा बना दे चे
- 6:22–6:27मुदा पंच्तन्त्र कता सबत अहीना समाप � thoitha china athev kahlege lachi kahi kath.
- 6:27–6:33अग, मुदा पन्च्तन्त्रक यूग आदूनेक कता वाचनक यूग में बहुत फरक अची.
- 6:33–6:38आदूनेक पाठक के बतायव से भेसी देखाय परजोर देल जाए तची.
- 6:38–6:40मना शो दून तेल वालागव.
- 6:40–6:46एक दम, पातख के जखन कोनो निषकर्ष थाडी में परोसी का देल जाएत ची,
- 6:46–6:48तो उकर प्रभाव कम बहुजाएत ची.
- 6:48–6:54तो सुज्ठावी भेल, जे सिद्दान्ता अउपदेश वाला वाख्य सब के हताक,
- 6:54–6:58पूरा द्यान द्रिश्य अच्चरित्र क्रिया कलाप पर केंद्रित केल जाए.
- 6:58–6:59बिल्लकुल.
- 6:59–7:03उदाहरनक लेए अन्तेम अद्याय में उप्टेश देबाग बडला में
- 7:03–7:06लेखक द्रिश्य के एहन रुपेंट प्रस्तुत कर थी
- 7:06–7:09जक्रा सव आद्त आप्स्प्ष्ट ब होजाए
- 7:09–7:13जैना इद्रिष्ष्छ देखावेल जासके तची
- 7:13–7:15जे बाग तेजी सो भागी रहल आची
- 7:15–7:18उकर गरजन आप कातर चीक में बदली गेल आची
- 7:18–7:23आप, आस्यार जे आपन जाल में स्वयम फसी गेल
- 7:23–7:27उ माटी में गिस ताहत्स आपन प्रान्द त्यागी चुकल आचे
- 7:27–7:31आब बत्तु, औए समय बत्तु की स्थिती देखावाल जाए?
- 7:31–7:35औए उड़ाइत दूरीक भीच में बत्तु शानती सथाड़ भाई का
- 7:35–7:38गाज का हर्यर पात काई रहा लग चे
- 7:38–7:40मानु कि चु भेल हैं रहा हैं
- 7:40–8:10वुईट्दिसबल पर विज़े पावल जासके तचे तचे ये वुजबा लेल जे बुद्दिसबल पर विज़े पावल जासके तचे तचे ये वुजबा लेल जे बुद्दिसबल पर विज़े पावल जासके तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे त
- 8:10–8:14अद्दधखनक वरनन कोगगग सुस्पेंस बड़वल जाए.
- 8:14–8:18तब दर सम्मुक तब आख चाही जे की पाथक हमर भात भूज पावत वान नहीं
- 8:18–8:22आप जकन हम पाथक पर विष्वास करे ची
- 8:22–8:24तब पाथक से हो कता पर विष्वास करे तचे
- 8:24–8:28तआ आई हम सब तींट मुख्य बिन्दू पर गबकेल हू
- 8:28–8:31पहिल चोड चोड चागर सब बद्तू बनबाक रूपान्त्रन में
- 8:31–8:34एगो टा चोड संगर शक्द्द्रिष्य जोडल जाए.
- 8:34–8:38अद्द्दध्कनक वरनन कोख कोग सस्पेंस बद्भल जाए.
- 8:38–8:42आद ती सर अन्त में उप्देशात्मक वाख्यक अस्थान पर
- 8:42–8:49शान्ति सब पात, खाइत, बत्तुवला, शक्तिशाली द्रिष्षा, पात्ख के निशकर्ष निकाल्वाक लेल प्रेरित कैल्जाए.
- 8:49–8:54इसब भडलाव एही कताके और भेसी सजीव अप्रवावकारी बनावत.
- 8:54–8:55बिल्कुल.
- 8:55–9:03आहा आपन रच्ना के एह सुज्याव सबक आदार पर परिमारजित को पुनहदोसर भेर समिक्षाक लेल पता सकेच छी.
- 9:03–9:05हम्रा सब के प्रतिख्षार हत.
- 9:05–9:10आप तकंद्धरिक लेल लिखाईत रहु आनन नो प्रियोग करेसन फी डराओ.
Plain text
आए हम सब बत्तु नामक एक ता चागर कोई कताक समिक्षा करहल ची, जे बली सा बची जंगल बहागे थे ची, आर आपन बुद्दिसा बाग और सीरजका जान्वर के पराजित करे थे चे. कताख सन्रच्ना में बतुक छोट चागर साँ एक ता विशाल आर शक्तिषाली जंगली जान्वर बनवाख जे रूपान्तरन आची, ओकर भीच्क संगर्ष्क वरनन आवर भेसी इसपप्ष्ट बहे सकेट आचे. एक दम सही माने अद्याय तीन में लेक्ख दिखायो लची जे चागर तु तीन साल जंगल में रही का मोट सोट बन गे लचे आ, उकरा बरभर सींग आदाडी भेगे लची मुदा कमजोरी इए चे जे एही ताम कता बहुत तेजी सागा बरजाई तचे आप आप आप बद्द़ाग बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बाप बा� बाद्ख्त सीधे बाग्स न सामना देखे चाहे तची देखू, कथाख्त कगती आगेहराई दोनो दूता भिन्नगाः पची जोन हम सब बिना संगर्ष के उक्रा सीधे सींग वाला बहादुर चागर बना देची तो उविकास अवास्तविक लागत ची तो उगर महत तो कम बहाजाई तची ता एकर ले लेखख की कर थे उदाहरन के लेल, जक्हन उचोट रहे तक खुनो चोड जंगली जानवर जेना जंगली भिलाई वा कुत्ता सब वच्वा के लेए लेगग बागा लेगग बागा लेगग बागा लेगग तो उविकास आवास्तविक लागत अची. आव, मैंने, बिना पसीना भहने जीट बहती तची, वोकर महत तो कम वह जाए तची. तई एकर लेल लेक्ख की कर थी? उदाहरन के लेल, जगन उचोट रहे, तक कुनो चोट जंगली जानवर, जेना जंगली भिलाई वा कुत्ता सबच्वाके लिल, उआपन कुनो पाकल बुद्धिक प्रुएक के ने होए. दर लिया जी एक राति गंगोर वर्षा भहुर हाल आच्छी. आएक ता जंगली भिलाई उक्रा पाचा लागल आच्छी. एक दम, बतु लग अक्शारीरिक बल नहीं अची, मुदा उ अपन चतुराईसा कोनो गुफाक संकरी रस्ता वक काटक कजाडी में बिलाई के पसादे चे. बुजल्य, ये एक तब आईग द्रिष्छ बनी सकेत छी, जाए सब पाथक के विश्वाज बजाएत, जो जंगल में मात्र भाग गिसान नहीं बचलची. आई इ चोट गतना आगा जे बाग वला काँड आप वला ची उकर लेल एक तप फोल शाडोएंग वा आदार तगार करत. मने पाथक अवचेतन मन में इबात बैस जाइत जे बतुक आस्ली हत्यार उकर सिंग नहीं बलकी उकर दिमाग आची. भिल्ल्कुल! आप ज़म सब आगा बड़ी येट चरम सीमा पर भाग अस्यारक संबद्तू कर जे अन्तिम मुट्भेत आची, वो कर प्रभाव के और भेशी नाट्ग्या अस्सगन बनावल जासकई तची. आप पात्खा के उही क्यत्राक आस्ली गराई महेंसुस नहीं बापाई तची. अपाटका के उही कष्टराक अस्ली गराई महेंसुस नहीं बाआपाई तची मुदा जब बत्तु तुरन् समवाद बाजी तची तक यह उकर निदर्तान अप देखाई तची जे सियार आपन पेर में बागख पेर बान्दी का आभी रहाल आची तो तो तो बाग आने ले कहत्र लिया एही सजे सबह सरो माचक चन च्चन ची उ बहु जल्दी समाप्त बहुजाई तची अप पाट्खा के उही कहत्राक अस्ली गराई महेंसुस नहीं भापाई तची मुदा जो बत्तु तुरन समवाद भाजी तची तक यी उकर निदरता नहीं देखाव रहल थी? देखो बत्तुक निदरता के लिए नीक अची मुदा कता वाचनक द्रुस्टि कोन से मने सस्पन्सक लिल यी आत्मगाती अची कता जेना अचानक गीर बदली ले तची अट्तनाव एक के चन में विलाजाई तची बुजल ये ये तो वहीना बेल जादूगर मंच पर आवे देरी बिना कोनो भूमी का बनोने सीदे जादूग खॉलासा कर देवे अदर्शक कहत बस एटबे चल तो सुजाओ एजी जे बत्तू के बुद्दिमानी दिखावे से तीक पहलने कुछ सेकंड के लेल उकर अंत्रिक भहे के गंभीरता पूरवक वड़न के लजाए. अग, उदारन के लेल जखन बाग आस्यार लग आभी रहल होए, तदूर उदबाक द्रिष्य, बागग भारी दग, अप बतू के रदाएक द़गन के विस्तार देल जाए. आ, जेना बतू एक चन के लेल दिराजाए, अकर पैर किचु काँपे, बक्तु एक च्चन के लेड दिराजाए, अकर पैर किचु कामपे उ एक दक पाचा हते. आप, इप पाचा हत बाक भात बहुत महत्वपून अची. नायक का पाचा हतनाए इदेखावे तची जिस्तती वास्तो में प्रान गातक अची. मुदद तनावक समय में नम्हर नम्हर वाख्या लिख हब तर थीक नहें रहें उही सकता गती सुस्त बहजाएत ना एक दम सही पकर लवाहा एही ताम छोट-छोट वाख्यक प्रियोग हे वाख चाही जेना, दूरी उरल, बागक पैर जमीन पर परल, ठफ, ठप अ, स्यारक आखी चमकल, बत्तुख सास रूकी गैल, इप पाथक के सास केन सो हो किचुक शनक लेल रूकी लेत. आएकर भाद, जखन बत्तू आपन दर के पीभी जायता थी, आएक ता ब्यंकर आवाज में उसम्वाद भाजेत अछी, तकन उसम्वाद ब्रमहास्त्र बन जायता थी. भिल्कुल, उकर प्रभाओ दस गुना बेशी शक्ती शाली भो जायता थी. यहे सब पाटक के लागल जै, बत्तू वास्तो मेक्ता पैग खत्रा सा बाहर निकलल अची. बुजलाई, मने भूटिक्ता के महसुस कराबआब जरूरी आची. दूरी, गंद, आवाज, आब तेसर बिन्दूपर चलाएची. अग, कत्ठाख स्वर आश्श्शेली में कत हो कत हो, उप्डेश आत्मक गब भेशी आची, जक्रा कम कव गतनाक माद्यम सब पाठक के स्वयम निष्कर्ष दरी पहुची वाख अप्सर देल जासके टची. कमजोरी इए आची, जे कताक उपक्रम में आन्त में लेक्खक सब श्प्रुष्त रूप साई बतार हल चितिन, जे इखता की सिखवाई तची? जना, अन्त में लिखाल आची, बत्तुक विज्यक रहस्य बल में नहु बुद्ध्री में चल. इश्यली पाथक के विचार करबाक स्वतन्त्रता नहीं देता ची आ, इग्ता ने बन्द जगा बना दे चे मुदा पंच्तन्त्र कता सबत अहीना समाप � thoitha china athev kahlege lachi kahi kath. अग, मुदा पन्च्तन्त्रक यूग आदूनेक कता वाचनक यूग में बहुत फरक अची. आदूनेक पाठक के बतायव से भेसी देखाय परजोर देल जाए तची. मना शो दून तेल वालागव. एक दम, पातख के जखन कोनो निषकर्ष थाडी में परोसी का देल जाएत ची, तो उकर प्रभाव कम बहुजाएत ची. तो सुज्ठावी भेल, जे सिद्दान्ता अउपदेश वाला वाख्य सब के हताक, पूरा द्यान द्रिश्य अच्चरित्र क्रिया कलाप पर केंद्रित केल जाए. बिल्लकुल. उदाहरनक लेए अन्तेम अद्याय में उप्टेश देबाग बडला में लेखक द्रिश्य के एहन रुपेंट प्रस्तुत कर थी जक्रा सव आद्त आप्स्प्ष्ट ब होजाए जैना इद्रिष्ष्छ देखावेल जासके तची जे बाग तेजी सो भागी रहल आची उकर गरजन आप कातर चीक में बदली गेल आची आप, आस्यार जे आपन जाल में स्वयम फसी गेल उ माटी में गिस ताहत्स आपन प्रान्द त्यागी चुकल आचे आब बत्तु, औए समय बत्तु की स्थिती देखावाल जाए? औए उड़ाइत दूरीक भीच में बत्तु शानती सथाड़ भाई का गाज का हर्यर पात काई रहा लग चे मानु कि चु भेल हैं रहा हैं वुईट्दिसबल पर विज़े पावल जासके तचे तचे ये वुजबा लेल जे बुद्दिसबल पर विज़े पावल जासके तचे तचे ये वुजबा लेल जे बुद्दिसबल पर विज़े पावल जासके तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे तचे त अद्दधखनक वरनन कोगगग सुस्पेंस बड़वल जाए. तब दर सम्मुक तब आख चाही जे की पाथक हमर भात भूज पावत वान नहीं आप जकन हम पाथक पर विष्वास करे ची तब पाथक से हो कता पर विष्वास करे तचे तआ आई हम सब तींट मुख्य बिन्दू पर गबकेल हू पहिल चोड चोड चागर सब बद्तू बनबाक रूपान्त्रन में एगो टा चोड संगर शक्द्द्रिष्य जोडल जाए. अद्द्दध्कनक वरनन कोख कोग सस्पेंस बद्भल जाए. आद ती सर अन्त में उप्देशात्मक वाख्यक अस्थान पर शान्ति सब पात, खाइत, बत्तुवला, शक्तिशाली द्रिष्षा, पात्ख के निशकर्ष निकाल्वाक लेल प्रेरित कैल्जाए. इसब भडलाव एही कताके और भेसी सजीव अप्रवावकारी बनावत. बिल्कुल. आहा आपन रच्ना के एह सुज्याव सबक आदार पर परिमारजित को पुनहदोसर भेर समिक्षाक लेल पता सकेच छी. हम्रा सब के प्रतिख्षार हत. आप तकंद्धरिक लेल लिखाईत रहु आनन नो प्रियोग करेसन फी डराओ.