MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
बत्तूक_चतुराईसँ_कोना_हारल_बाघ.m4a
Timestamped machine output
- 0:00–0:09इगजेंद्र ताकुरक लिखल प्रसिद्ध कता, बत्तु, जंगलक चतृर चागरक अदबुट् साहिस के एक ता द्रुट् सारांश अचि.
- 0:09–0:15श्रोतागर इएक ता चोट्चागरक, माने बक्रेक बच्चाक बडड प्रेरक कता आचि,
- 0:15–0:21जे दुर्गा पूजा मे आपन भलीदाने से बच्बाक लेल, अनहार जंगल बागी जाएत आची.
- 0:21–0:28आ उताई आपन कुशाग्र बुद्दि, आ सहस से बाग, आ सीरजे का खुंकार जानवरो के मात दैट आची.
- 0:28–0:37इटीक उहना आची जिना कोनो चोट श्टाटब मातर अपन आत्म विष्वास से कोनो विशाल करपरेट कमपनी के दरा दे,
- 0:37–0:41तब पहल मुख्य बात आची, सहास अपरिवरतनक निरनै.
- 0:41–0:48जखन माए उक्रा बलीक विषे में चेत वगत छी ता च्चागर दरे से राती में अनहार जंगल बागी जाए तची.
- 0:48–0:55तु तीन सालक प्राक्रतिक संगरष कबाद उएक ता मोट सोट विषाल सींग वला शक्तिषाली बद्टू बनी जाए तची.
- 0:55–1:02कि यहा के नहीं लगे तची, जिस संकत में अग्या दिश कदम बड़ावब हम्रा सबहे के भेसी मज्बूद बनवए तची.
- 1:02–1:06तो सर बातक शारी लिख बल से पैग अची बुद्दिक प्रयोग.
- 1:06–1:15दिखु, जंगल में जगन बत्तुक सामना एक ता खुंखार बाख से हूँए तची, तो उ दरे बाख बदला में काव्यात्मक शैली में गप्फर कै तची.
- 1:15–1:21अबाक के कही तची, जे उतषेर से खेले तची, अवक्रा भूख मेट्बाक लेल दस्ता बाक चाही.
- 1:21–1:24बाक तुरन्टेरा का बागी जाए तची.
- 1:24–1:27इप बिल्कुल फेख इट्टिल्यु मेखित रन्नी तिवेल,
- 1:27–1:34माने, बिना लडे मान्सिक रूप से दुश्मन के पराजित कदेव, अब अंत में, दूर्तता का ब्यानक परिनाम,
- 1:34–1:39एक ता दूर्त स्यार बागक पैर में अपन पैर बान्दिका वापस बत्तू लगावे तची.
- 1:39–1:43मुदा बत्तु तुरत दिमाग लगवाइत स्यार के दपपतेत कही तची
- 1:43–1:47हम तुरा दूता बाग आने ले कहली है, तो एक ता बाकी एक अनला
- 1:47–1:51बाप्रे, इसुनी बाख फिर आहन अनर्या दोड लगाइ तची
- 1:51–1:54जिस्यार उही में गिस्या कम मरी जाई तची
- 1:54–1:59तकी चल कपत, अंतता चलन रारक लेल म्रित्यो दन्द बनी जाएत छी,
- 1:59–2:03तनिषकर्ष एग, जे एग कता साप प्रमानित करेत छी,
- 2:03–2:07जे आस्ली ताकच शरीर का अकारे नहीं, बलकी आत्म विष्वास,
- 2:07–2:11सही समय پर सही सबदक प्रयोग अब भुद्दिमानी मे होई तची.
Plain text
इगजेंद्र ताकुरक लिखल प्रसिद्ध कता, बत्तु, जंगलक चतृर चागरक अदबुट् साहिस के एक ता द्रुट् सारांश अचि. श्रोतागर इएक ता चोट्चागरक, माने बक्रेक बच्चाक बडड प्रेरक कता आचि, जे दुर्गा पूजा मे आपन भलीदाने से बच्बाक लेल, अनहार जंगल बागी जाएत आची. आ उताई आपन कुशाग्र बुद्दि, आ सहस से बाग, आ सीरजे का खुंकार जानवरो के मात दैट आची. इटीक उहना आची जिना कोनो चोट श्टाटब मातर अपन आत्म विष्वास से कोनो विशाल करपरेट कमपनी के दरा दे, तब पहल मुख्य बात आची, सहास अपरिवरतनक निरनै. जखन माए उक्रा बलीक विषे में चेत वगत छी ता च्चागर दरे से राती में अनहार जंगल बागी जाए तची. तु तीन सालक प्राक्रतिक संगरष कबाद उएक ता मोट सोट विषाल सींग वला शक्तिषाली बद्टू बनी जाए तची. कि यहा के नहीं लगे तची, जिस संकत में अग्या दिश कदम बड़ावब हम्रा सबहे के भेसी मज्बूद बनवए तची. तो सर बातक शारी लिख बल से पैग अची बुद्दिक प्रयोग. दिखु, जंगल में जगन बत्तुक सामना एक ता खुंखार बाख से हूँए तची, तो उ दरे बाख बदला में काव्यात्मक शैली में गप्फर कै तची. अबाक के कही तची, जे उतषेर से खेले तची, अवक्रा भूख मेट्बाक लेल दस्ता बाक चाही. बाक तुरन्टेरा का बागी जाए तची. इप बिल्कुल फेख इट्टिल्यु मेखित रन्नी तिवेल, माने, बिना लडे मान्सिक रूप से दुश्मन के पराजित कदेव, अब अंत में, दूर्तता का ब्यानक परिनाम, एक ता दूर्त स्यार बागक पैर में अपन पैर बान्दिका वापस बत्तू लगावे तची. मुदा बत्तु तुरत दिमाग लगवाइत स्यार के दपपतेत कही तची हम तुरा दूता बाग आने ले कहली है, तो एक ता बाकी एक अनला बाप्रे, इसुनी बाख फिर आहन अनर्या दोड लगाइ तची जिस्यार उही में गिस्या कम मरी जाई तची तकी चल कपत, अंतता चलन रारक लेल म्रित्यो दन्द बनी जाएत छी, तनिषकर्ष एग, जे एग कता साप प्रमानित करेत छी, जे आस्ली ताकच शरीर का अकारे नहीं, बलकी आत्म विष्वास, सही समय پर सही सबदक प्रयोग अब भुद्दिमानी मे होई तची.