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बिहुला_की_गाथा.mp4

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Part 10 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 10
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  1. 0:00–0:03नमस्कार! आजके एस खास विष्लेषन में हम बात करने वाले है,
  2. 0:03–0:08एक बेहत पुरानी लिकिन रोंडे कडे कर देने वाली मैठली लोग गाता की.
  3. 0:08–0:12मतलब यह कुई आम कहानी नहीं, यह एक अईसा महाखावे है,
  4. 0:12–0:16ज़ाहा इंसान और भगवान बिलकुन आमने सामने आगगे ते.
  5. 0:16–0:22तो चलिये बिना किसी देरी के इस दिलचस्प और शक्तिशाली गाता की गेरायो में उतरते हैं.
  6. 0:22–0:29सोच ये एक अजी स्तिती जगा देवता और नश्वर इंसान एक दुसरे के खिलाफ दटकर कडे हों.
  7. 0:29–0:34जाहर है, जब देविये शक्तियों की जिद और अन्सान का स्वाभिमान आपस में टक राते हैं,
  8. 0:34–0:36तो अन्जाम भ्याना की होता है.
  9. 0:36–0:42और इस महा संग्राम के भीच, जो सबसे बूरी तरह पिसा वो ता एक पूरा का पूरा परिवार.
  10. 0:42–0:46ये सर्फ एक विवाद नहीं ता, बलके अस्तित्वकी एक बहुत बडी लडाई थी.
  11. 0:47–0:52इस पूरी कहानी का जो केंद्र हैना, वो है गंगा नदी के तट्पर बसा चंपानगर.
  12. 0:52–0:55आज कि समय में, शाएद हमीसे त मेगा सिटी कहे सकते हैं.
  13. 0:55–0:59उस दोर में यह शहर इतना सम्डद और जीवंद ता
  14. 0:59–1:03के इसके गातो पर हमेशा विशाल जाहाजो की लाईन लगी रहती थी
  15. 1:03–1:05दूनिया बरके व्यापारी यहां आते थे
  16. 1:05–1:08और सच कहुथ तो गंगा की लेहरे मानो
  17. 1:08–1:09अपने सात यहां सरव पानी नहीं
  18. 1:09–1:12बलकी आस्टी में दोलत बहाकर लाती ती
  19. 1:12–1:14अब इस शहर के भव्यता का अंदाजा
  20. 1:14–1:16आप इसी बाट से लगा सकते है कि कहाजाता ता
  21. 1:16–1:20यहां के बाजारो में साथ समन्दर पार की महेंक आती ती
  22. 1:20–1:21क्या बाथ है ना?
  23. 1:21–1:24मतलब, रेशम हो या दूलब बसाले
  24. 1:24–1:27दूलत इतनी विशाल ती की बड़े बड़े राजा महराजा भी शर्माजाएं
  25. 1:27–1:30चंपानगर की हर सडख, हर गाथ, यहां तक की हर सोदे पर, बस उनी का सिख्का चलता था
  26. 1:30–2:00तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  27. 2:00–2:03पूरे चोड़ा बड़े जहाजो का एक विशाल भेडा था
  28. 2:03–2:07अब प्राचीन काल में जहाजा किसी के पास एक जहाजोना भी बहुत बड़ी बात होती टी
  29. 2:07–2:09वहां चोड़ा जहाज जहाज
  30. 2:09–2:11जरा सोची ए, ये कोई मामुली बात नहीं फी
  31. 2:11–2:14ये उनक असीमट सन्सादनो
  32. 2:14–2:17अगर उज़माने में उनके व्यापार की जो गलोबल पहुच ती
  33. 2:17–2:20उसका सब से बाडा और जीता जागता सबूट था.
  34. 2:20–2:22चाहे दिन का उजाला हो या राद का अंदेरा
  35. 2:22–2:25ये जाहाज कभी रुकते नहीं दे.
  36. 2:25–2:30ये लगातार बिना ठके समुंदर की लेहरों को चीरते हुए आगे बड़ते रहते दे.
  37. 2:30–2:34ये बड़े-बड़े जहाज मानो ठकना जानते ही नहीं दे.
  38. 2:34–2:39ये हमें बताता है, कि चान सोदागर की महत्वाकांशा कभी सोती नहीं दे.
  39. 2:39–2:44उनका प्रबाओ सच्छ्मुच सातो समनदर पर एक छत्र कायम ता.
  40. 2:44–2:46लेकिन यहा एक दिल्च्छ बात है,
  41. 2:46–2:51चान सुदागर की आस्ली पह्चान उनकी ये दोलत या चोडा जाहाज बilkul नहीं ते.
  42. 2:51–2:55उनकी सबसे बडी पह्चान ती उनकी अटूट अजेए बबच्ती.
  43. 2:55–2:58गमन पूरी तरासे भगवान शिवके प्रती समर पिद था.
  44. 2:58–2:59जरा इस विरोदाबास को देखे,
  45. 3:00–3:01दून्या का सबसे दनी अन्सान,
  46. 3:02–3:04जिसे संसारिक मोह माया से कोई लगाव नहीं,
  47. 3:04–3:07बलकी वो एक वेरागी देवता का सबसे बगवकत है.
  48. 3:07–3:14अर हा, ये कोई सादारण पूजबात नहीं ती, ये एक योद्धा के अनुशासन जैसी कठोर बकती ती.
  49. 3:14–3:19रह्ँ सुभा पवित्र गंगा में सनान करना, शिवलिंग पर भेलपत्र चडाना,
  50. 3:19–3:24उद्राक्ष्दारन की एड़ना और हर पल हर हर महादेव का जाब करना.
  51. 3:25–3:30ये उनका एसा अटल नियम ता जिसे दुनिया की कोई ताकत तोड नहीं सकती थी.
  52. 3:31–3:34यही वो अनुशासन ता जिसने उने इतना निदर बना दिया था.
  53. 3:34–3:38उनकि इस निष्था का अंदाजा उनके एक संकलप से लगाया जा सकता है.
  54. 3:38–3:42जगा वो कहते हैं, ये माता सरफ एक जगे जुकता है,
  55. 3:42–3:46कैलाश पती के चरनो में. कही और जुके, तो ये माता किस काम का?
  56. 3:46–3:48क्या गजब का अत्मिष्वास है?
  57. 3:48–3:50अदिक यही हुआ।
  58. 3:50–3:52कुकि जिस वकत चान्थ सोदागर अपनी इस अड़ेग भकती में मगनते,
  59. 3:52–3:54नश्वर दून्या से बहुत दूर,
  60. 3:54–3:57केलाश की उचायों पर एक खोफनाक फैसला लिया जा रहा था.
  61. 3:57–4:27तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  62. 4:27–4:31यानी विश्की स्वामीनी, जिने हम सर्प देवी मन्सा के नाम से भी जानते हैं.
  63. 4:31–4:35उनकी ताकत निरंकुष थी, और उनका क्रोद सीथा जान लेवा.
  64. 4:35–4:44जीवन और मिर्ट्यो दोनो पर एक समान अदिकार रखने बाली ये देवी अब अपनी एक अज्छा पूरी करने निकल पडी जिसके सामने कोईगी रुकावट टिक नहीं सकती थी.
  65. 4:44–4:47देवी मन्सा की माग बहुत हिसाथ ती
  66. 4:47–4:50उने लखता था की कैलास के एकान्त में
  67. 4:50–4:52उने आखिर पुच्ता ही कुन हैं
  68. 4:52–4:54इसिलिये उनोने म्रित्यु लोक
  69. 4:54–4:56यानी इनसानो की दुन्या में जाने का फैस्ला किया
  70. 4:56–4:59वो चाहती फीं की इनसान उने पुजे
  71. 4:59–5:02अगर नाम के बड़े-बड़े मंद्ड़ बने और उनके गीद गाए जाएं
  72. 5:02–5:05देव्तावों के भीछ उपेखषित महसुस करने वाली मन्सा
  73. 5:05–5:10अब अब अब अबना राज अस्थापित करने किलिए पुरी तरा तगयार थी
  74. 5:10–5:12लेकिन दर्दी पर पुजा स्थापित करने का
  75. 5:12–5:14इक बोड़ पुराना उसुल होता है
  76. 5:14–5:16मानेटा तभी फ्यलती है
  77. 5:16–5:18जब कोई बड़ाँ और प्रतिष्ट इन्सान
  78. 5:18–5:20सब से पहले अपना सिर जुका है
  79. 5:20–5:22मनसा ये बाद बोड़ अच्छिसे जानती थी
  80. 5:22–5:24वो समच गए दी
  81. 5:24–5:26कि अगर इन्सानो पर राज करना है
  82. 5:26–5:28तो उने किसी क्षी कमजोर को नहीं
  83. 5:28–5:31बलकी अईन्सानो के सबसे शक्ती शाली नेठा को जुकाना होगा
  84. 5:31–5:34और वो नेठा चान सवदागरी थे
  85. 5:34–5:40बस यही से शुरू होता है इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा और खोफनाक तक्राव
  86. 5:40–5:42एक तरव चान सवदागर का हत
  87. 5:42–5:45जिन की शिव भक्ती किसी के आगे नहीं जूक सकती
  88. 5:45–5:48और दूसरी तरव, देवी मन्सा की अन्सानो दबारा
  89. 5:48–5:51पूजे जानी की वो विक्राल एक चा.
  90. 5:51–5:55मानो एक अजेया चतान किसी अजेया तूफान सिटक राने जा रही हो.
  91. 5:55–5:59इसका परिणाम सिर्फ और सिर्फ विनाश.
  92. 5:59–6:04और फिर वो पल आही जाता है, जब विष्की देवी सीदे चंपनगर में उतर आती हैं.
  93. 6:04–6:07वो वो शक्तिषाली व्यापारी के बिलकुल सामने कडी हो जाती हैं.
  94. 6:07–6:11और बिना किसी लाग लपेट के अपनी पूजा करने का आदेज देती हैं.
  95. 6:11–6:21आस्मान और जमीन आम ने सामने थे, मन्सान अपने पुरे खौफ का प्रदश्चन किया, लेकिन चान सवदागर अपने फैस्ले से तस्से मस्नेही हुए.
  96. 6:21–6:24सच कहु तो ये कोई मामुली बहस नहीं दी.
  97. 6:24–6:27ये दो जिद्दी और महाशक्तिशाली इच्छागो कटक राव था.
  98. 6:27–6:30तोनो के सहनकार की लडाई में सब से बड़ा नुकसान किसका हूँः,
  99. 6:30–6:33एक मासुम परिवार का, जो बिना किसी गलती के,
  100. 6:33–6:35ये तो तो बज़ों के बीच बूरी तरह प्श गया.
  101. 6:35–6:37चान सवदागर जुके नहीं
  102. 6:37–6:40और देवी का प्रकोप आग बनकर उनके परिवार पर तुट पडा.
  103. 6:40–6:43दोलत, बेटे, खुषिया, सब कुछ राग हो गया.
  104. 6:43–6:45लिकिन, ठेहरिये
  105. 6:45–6:47कहानी का सब से बड़ा
  106. 6:47–6:50और रोंग्ते कड़े कर देने वाला तूएस तो अबाता है.
  107. 6:51–6:54अंत में ये कहानी नहीं तो चान सवदागर के एहंकार की बच्ती है,
  108. 6:54–6:56और नहीं देवी मन्सा के क्रोद की.
  109. 6:57–7:00ये कहानी बन जाती है एक सहासी नहीं नवेली दुल्हन की.
  110. 7:00–7:02जिस कनाम था बिहुला.
  111. 7:02–7:07जब सब कुछ तबा हो गया, तब इस महान नाईकाने वो जिम्मदारी उठाई,
  112. 7:07–7:10जिसे देखकर शायत बड़े बड़े योद्धा भी काम चाते.
  113. 7:10–7:14बिहुलाने जो किया ना, वो किसी अनसान की कलपना से भिल्कुल परे है.
  114. 7:14–7:18उस्ट्ट्टी के खिलावद ती जिसने स्वर्ग लोक तक्की नीविलादी।
  115. 7:19–7:24इस प्राचीन लोक कता से हमें जिन्दिगी में दटे रहने के चार भेहत कमाल के सबक मिलते हैं।
  116. 7:24–7:31अपने अद्बुध्साहस और अथा प्रेम से उसने साख्षाद म्रिट्व्य। और देव्टाँ को राँँनने पर मजबूर कर दिया.
  117. 7:31–7:36ये सर्फ एक सफर नहीं नियती के किलाअद आसी बगाववत ती जिसने स्वर्ग लोग तक्की नीविलादी.
  118. 7:36–7:42इस प्राचीन लोक कता से हमें जिन्दिगी में डड़े रहने के चार भेहत कमाल के सबक मिलते हैं.
  119. 7:42–7:47पहला, मुष्किल वक्त में किनारे पर कडे रहकर रोने के बजाए बहाँ में उतरना.
  120. 7:47–7:51तुस्रा, लेहरे कितनी भी तेज हूं, हार मत मान।
  121. 7:51–7:56तीस्रा दुख मेरोना थीक है, पर हाद पर हाद दरकर बैट जाना वुस सबसे बडी हार है.
  122. 7:56–8:02और चोथा जब भी कुछ मांगो तो स्वफ अपने लिये नहीं, सब के कल्यार किलिए मांगो.
  123. 8:02–8:04यही तो अस्ली नित्रत्व है?
  124. 8:04–8:07ये गाता हमे गोर अंदेरे और मुष्किलों के भीछ
  125. 8:07–8:09एक रोशनी की टरा दड़कर खडे रहने की
  126. 8:09–8:13अपार प्रेरना देती है. ये सुचने पर मजबूर कर देती है,
  127. 8:13–8:16कि जब परेशानिया पहार बनकर खडी हों,
  128. 8:16–8:20बीचे हटने के बजाए भीहुला जैसा सहाज दिकाना ही तो असल जीट है.
  129. 8:20–8:23चाहे देवों का गुस्सा हो या किस्मत की मार,
  130. 8:23–8:26अगर अगर अपना बीचान के बीटर का संकल पपका है,
  131. 8:26–8:29तो वो अपना रास्ता और अपना प्रकाष खुद बन सकता है.
  132. 8:29–8:34तु चलिये अंथ में एक बहुत लिए गेरे सवाल के साथ इस चर्चा को विराम देते हैं
  133. 8:34–8:37जब मुसीबत और मुध की अजे लेहरे उट्ती हैं
  134. 8:37–8:41तु क्या अनसानियत बस उस भहाव के सामने सर्जूका लेगी
  135. 8:41–8:45या फिर भिहुला कितरा अपने लिए बलक्ल नहीं दारा का निर्मान करेगी?
  136. 8:46–8:48हमारे इस प्राची नितिहास की गेराई वाखग यद्बुद है
  137. 8:49–8:51इस खास विष्लेशन में साज जुनने किल ये बहुत भूध द्श्वाद
  138. 8:51–8:54ग्यान की यात्रा आगे भी आजी ही जारी रहेगी.

Plain text

नमस्कार! आजके एस खास विष्लेषन में हम बात करने वाले है, एक बेहत पुरानी लिकिन रोंडे कडे कर देने वाली मैठली लोग गाता की. मतलब यह कुई आम कहानी नहीं, यह एक अईसा महाखावे है, ज़ाहा इंसान और भगवान बिलकुन आमने सामने आगगे ते. तो चलिये बिना किसी देरी के इस दिलचस्प और शक्तिशाली गाता की गेरायो में उतरते हैं. सोच ये एक अजी स्तिती जगा देवता और नश्वर इंसान एक दुसरे के खिलाफ दटकर कडे हों. जाहर है, जब देविये शक्तियों की जिद और अन्सान का स्वाभिमान आपस में टक राते हैं, तो अन्जाम भ्याना की होता है. और इस महा संग्राम के भीच, जो सबसे बूरी तरह पिसा वो ता एक पूरा का पूरा परिवार. ये सर्फ एक विवाद नहीं ता, बलके अस्तित्वकी एक बहुत बडी लडाई थी. इस पूरी कहानी का जो केंद्र हैना, वो है गंगा नदी के तट्पर बसा चंपानगर. आज कि समय में, शाएद हमीसे त मेगा सिटी कहे सकते हैं. उस दोर में यह शहर इतना सम्डद और जीवंद ता के इसके गातो पर हमेशा विशाल जाहाजो की लाईन लगी रहती थी दूनिया बरके व्यापारी यहां आते थे और सच कहुथ तो गंगा की लेहरे मानो अपने सात यहां सरव पानी नहीं बलकी आस्टी में दोलत बहाकर लाती ती अब इस शहर के भव्यता का अंदाजा आप इसी बाट से लगा सकते है कि कहाजाता ता यहां के बाजारो में साथ समन्दर पार की महेंक आती ती क्या बाथ है ना? मतलब, रेशम हो या दूलब बसाले दूलत इतनी विशाल ती की बड़े बड़े राजा महराजा भी शर्माजाएं चंपानगर की हर सडख, हर गाथ, यहां तक की हर सोदे पर, बस उनी का सिख्का चलता था तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � पूरे चोड़ा बड़े जहाजो का एक विशाल भेडा था अब प्राचीन काल में जहाजा किसी के पास एक जहाजोना भी बहुत बड़ी बात होती टी वहां चोड़ा जहाज जहाज जरा सोची ए, ये कोई मामुली बात नहीं फी ये उनक असीमट सन्सादनो अगर उज़माने में उनके व्यापार की जो गलोबल पहुच ती उसका सब से बाडा और जीता जागता सबूट था. चाहे दिन का उजाला हो या राद का अंदेरा ये जाहाज कभी रुकते नहीं दे. ये लगातार बिना ठके समुंदर की लेहरों को चीरते हुए आगे बड़ते रहते दे. ये बड़े-बड़े जहाज मानो ठकना जानते ही नहीं दे. ये हमें बताता है, कि चान सोदागर की महत्वाकांशा कभी सोती नहीं दे. उनका प्रबाओ सच्छ्मुच सातो समनदर पर एक छत्र कायम ता. लेकिन यहा एक दिल्च्छ बात है, चान सुदागर की आस्ली पह्चान उनकी ये दोलत या चोडा जाहाज बilkul नहीं ते. उनकी सबसे बडी पह्चान ती उनकी अटूट अजेए बबच्ती. गमन पूरी तरासे भगवान शिवके प्रती समर पिद था. जरा इस विरोदाबास को देखे, दून्या का सबसे दनी अन्सान, जिसे संसारिक मोह माया से कोई लगाव नहीं, बलकी वो एक वेरागी देवता का सबसे बगवकत है. अर हा, ये कोई सादारण पूजबात नहीं ती, ये एक योद्धा के अनुशासन जैसी कठोर बकती ती. रह्ँ सुभा पवित्र गंगा में सनान करना, शिवलिंग पर भेलपत्र चडाना, उद्राक्ष्दारन की एड़ना और हर पल हर हर महादेव का जाब करना. ये उनका एसा अटल नियम ता जिसे दुनिया की कोई ताकत तोड नहीं सकती थी. यही वो अनुशासन ता जिसने उने इतना निदर बना दिया था. उनकि इस निष्था का अंदाजा उनके एक संकलप से लगाया जा सकता है. जगा वो कहते हैं, ये माता सरफ एक जगे जुकता है, कैलाश पती के चरनो में. कही और जुके, तो ये माता किस काम का? क्या गजब का अत्मिष्वास है? अदिक यही हुआ। कुकि जिस वकत चान्थ सोदागर अपनी इस अड़ेग भकती में मगनते, नश्वर दून्या से बहुत दूर, केलाश की उचायों पर एक खोफनाक फैसला लिया जा रहा था. तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � यानी विश्की स्वामीनी, जिने हम सर्प देवी मन्सा के नाम से भी जानते हैं. उनकी ताकत निरंकुष थी, और उनका क्रोद सीथा जान लेवा. जीवन और मिर्ट्यो दोनो पर एक समान अदिकार रखने बाली ये देवी अब अपनी एक अज्छा पूरी करने निकल पडी जिसके सामने कोईगी रुकावट टिक नहीं सकती थी. देवी मन्सा की माग बहुत हिसाथ ती उने लखता था की कैलास के एकान्त में उने आखिर पुच्ता ही कुन हैं इसिलिये उनोने म्रित्यु लोक यानी इनसानो की दुन्या में जाने का फैस्ला किया वो चाहती फीं की इनसान उने पुजे अगर नाम के बड़े-बड़े मंद्ड़ बने और उनके गीद गाए जाएं देव्तावों के भीछ उपेखषित महसुस करने वाली मन्सा अब अब अब अबना राज अस्थापित करने किलिए पुरी तरा तगयार थी लेकिन दर्दी पर पुजा स्थापित करने का इक बोड़ पुराना उसुल होता है मानेटा तभी फ्यलती है जब कोई बड़ाँ और प्रतिष्ट इन्सान सब से पहले अपना सिर जुका है मनसा ये बाद बोड़ अच्छिसे जानती थी वो समच गए दी कि अगर इन्सानो पर राज करना है तो उने किसी क्षी कमजोर को नहीं बलकी अईन्सानो के सबसे शक्ती शाली नेठा को जुकाना होगा और वो नेठा चान सवदागरी थे बस यही से शुरू होता है इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा और खोफनाक तक्राव एक तरव चान सवदागर का हत जिन की शिव भक्ती किसी के आगे नहीं जूक सकती और दूसरी तरव, देवी मन्सा की अन्सानो दबारा पूजे जानी की वो विक्राल एक चा. मानो एक अजेया चतान किसी अजेया तूफान सिटक राने जा रही हो. इसका परिणाम सिर्फ और सिर्फ विनाश. और फिर वो पल आही जाता है, जब विष्की देवी सीदे चंपनगर में उतर आती हैं. वो वो शक्तिषाली व्यापारी के बिलकुल सामने कडी हो जाती हैं. और बिना किसी लाग लपेट के अपनी पूजा करने का आदेज देती हैं. आस्मान और जमीन आम ने सामने थे, मन्सान अपने पुरे खौफ का प्रदश्चन किया, लेकिन चान सवदागर अपने फैस्ले से तस्से मस्नेही हुए. सच कहु तो ये कोई मामुली बहस नहीं दी. ये दो जिद्दी और महाशक्तिशाली इच्छागो कटक राव था. तोनो के सहनकार की लडाई में सब से बड़ा नुकसान किसका हूँः, एक मासुम परिवार का, जो बिना किसी गलती के, ये तो तो बज़ों के बीच बूरी तरह प्श गया. चान सवदागर जुके नहीं और देवी का प्रकोप आग बनकर उनके परिवार पर तुट पडा. दोलत, बेटे, खुषिया, सब कुछ राग हो गया. लिकिन, ठेहरिये कहानी का सब से बड़ा और रोंग्ते कड़े कर देने वाला तूएस तो अबाता है. अंत में ये कहानी नहीं तो चान सवदागर के एहंकार की बच्ती है, और नहीं देवी मन्सा के क्रोद की. ये कहानी बन जाती है एक सहासी नहीं नवेली दुल्हन की. जिस कनाम था बिहुला. जब सब कुछ तबा हो गया, तब इस महान नाईकाने वो जिम्मदारी उठाई, जिसे देखकर शायत बड़े बड़े योद्धा भी काम चाते. बिहुलाने जो किया ना, वो किसी अनसान की कलपना से भिल्कुल परे है. उस्ट्ट्टी के खिलावद ती जिसने स्वर्ग लोक तक्की नीविलादी। इस प्राचीन लोक कता से हमें जिन्दिगी में दटे रहने के चार भेहत कमाल के सबक मिलते हैं। अपने अद्बुध्साहस और अथा प्रेम से उसने साख्षाद म्रिट्व्य। और देव्टाँ को राँँनने पर मजबूर कर दिया. ये सर्फ एक सफर नहीं नियती के किलाअद आसी बगाववत ती जिसने स्वर्ग लोग तक्की नीविलादी. इस प्राचीन लोक कता से हमें जिन्दिगी में डड़े रहने के चार भेहत कमाल के सबक मिलते हैं. पहला, मुष्किल वक्त में किनारे पर कडे रहकर रोने के बजाए बहाँ में उतरना. तुस्रा, लेहरे कितनी भी तेज हूं, हार मत मान। तीस्रा दुख मेरोना थीक है, पर हाद पर हाद दरकर बैट जाना वुस सबसे बडी हार है. और चोथा जब भी कुछ मांगो तो स्वफ अपने लिये नहीं, सब के कल्यार किलिए मांगो. यही तो अस्ली नित्रत्व है? ये गाता हमे गोर अंदेरे और मुष्किलों के भीछ एक रोशनी की टरा दड़कर खडे रहने की अपार प्रेरना देती है. ये सुचने पर मजबूर कर देती है, कि जब परेशानिया पहार बनकर खडी हों, बीचे हटने के बजाए भीहुला जैसा सहाज दिकाना ही तो असल जीट है. चाहे देवों का गुस्सा हो या किस्मत की मार, अगर अगर अपना बीचान के बीटर का संकल पपका है, तो वो अपना रास्ता और अपना प्रकाष खुद बन सकता है. तु चलिये अंथ में एक बहुत लिए गेरे सवाल के साथ इस चर्चा को विराम देते हैं जब मुसीबत और मुध की अजे लेहरे उट्ती हैं तु क्या अनसानियत बस उस भहाव के सामने सर्जूका लेगी या फिर भिहुला कितरा अपने लिए बलक्ल नहीं दारा का निर्मान करेगी? हमारे इस प्राची नितिहास की गेराई वाखग यद्बुद है इस खास विष्लेशन में साज जुनने किल ये बहुत भूध द्श्वाद ग्यान की यात्रा आगे भी आजी ही जारी रहेगी.

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