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Part 10 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 10
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  1. 0:00–0:11कल्पना कीजे की राद का गेरा सननाटा है, और जिसके साथ जीवन बिताने की कस्में खाई गये है, वो उसी चत के नीचे किसी और पर अपना सारा प्रेम लडा रहा है.
  2. 0:11–0:15वह, यह तो किसी भी अनसान किलिए बहुत ही दरावना खयाल है?
  3. 0:15–0:16बिल्कुल!
  4. 0:16–0:21और सब से आजीब बात यहे कि यह कोई और कोई सामाने प्रेमी नहीं है.
  5. 0:21–0:25बलकी एक बेहत जहरीला और जान लेवा कोब्रा साप है.
  6. 0:25–0:28बाप ब्रे! एक साप?
  7. 0:28–0:28रहां!
  8. 0:28–0:33जबकि तुस्रा साति इस भ्यानक विष्वाज गाथ से बिल्कुल बेखबर
  9. 0:33–0:36उसी मुद्के साये में गेरी नीन सोरा है.
  10. 0:36–0:40अब देखे जब हम आम तोर पर किसी भीमारी या चोट की बात करते है,
  11. 0:40–0:44तो चिकिटसा विग्यान हमें बहुत इस पष्ट तस्वीर दे देता है, है ना?
  12. 0:44–0:47हा, वहां चीजें काफी क्रमबद होती है.
  13. 0:47–0:48सहीं कहा.
  14. 0:48–0:51रड्यों की जाँच होती है और चित्र सामने आता है
  15. 0:51–0:55तूटीव ही सबएद रेखा देखकर कोई बी बता सकता है कि समस्स्या कहा है
  16. 0:55–0:58इनसान को ये सबष्ट्त्ता बहुत पसन्डाती है
  17. 0:58–1:00क्योंकी इस सिद दून्या को समजना आसान हो जाता है
  18. 1:00–1:30योंकी योंकी योंकी योंकी योंकी योंकी जागाई बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्ट
  19. 1:30–1:38अदित और विदेहा एपत्रिका से लीगे एक बेहद रहेस्यमएई और दार्क मेठली लोक कतापर बात करने अले है।
  20. 1:38–1:40औग ये दु कापी दिल्च्यास्प लग रहा है।
  21. 1:40–1:44आप इस कताप का नाम है बभद भटन ये सर्फ एक सामान ये कहानी नहीं है
  22. 1:44–1:50यह विश्वाज गहात एक बेहत अजीबो गरीब गुप्त प्रेम और नयाए की एक आजी कहानी है,
  23. 1:50–1:53जो शाएद किसी आदूनिक ख्छिलर को भी माथ दे दे.
  24. 1:53–1:56यह नी इस में वो सब कुछ है, जो किसी को भी हेरान कर दे.
  25. 1:56–2:02पिलकुल हमारा मुखे मिशन आज प्राछीन कता की पर्टो को खोलना है
  26. 2:02–2:07यह कहानी एक बध यहनी जो पारम पर एक लोग गायक होते है
  27. 2:07–2:10और उसकी पतनी बध्टिन के एडद गुड गुमती है
  28. 2:10–2:13यहां दोके की शिर्वात किसी बहारी दूशमन से नहीं
  29. 2:13–2:43अद्र नायक लेग ताईग नायक लेग ताईग नायक लेग ताईग नायक ताईग नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नाय
  30. 2:43–3:13तो उगर बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा
  31. 3:13–3:16या ना बाप्रे ये तो खुली क्रूर्ता है
  32. 3:16–3:19बिल्कुल इसका परनाम ये होता है
  33. 3:19–3:22कि पती दिरे दिरे शारीरिक रूप से कमजोर
  34. 3:22–3:25या जिसे कता में दुबगर पतर कहा गया है
  35. 3:25–3:27वैसा हो जाता है
  36. 3:27–3:30और क्रूर्ता की सारी हदे तब पारो जाती है
  37. 3:30–3:39अर क्रुर्ता की सारी हदे तब पारो जाती है, जब भाटिन उस साप को शपष्टा देज देती है कि वेबभाट को दसके मार डाले.
  38. 3:39–3:42यानी उसने पुरी तरा से उसकी मुद्ट की साजिष रच्ली.
  39. 3:42–3:48आा, मुझे तो ये पूरी स्तिती किसी क्लासिक ट्रूएम डोक्युमेंट्री की तरह लगरे है.
  40. 3:48–3:52लेकिन यहा रथ्या का रथ्यार कोई बन्दू क्या जेहर नहीं,
  41. 3:52–3:54बलकी एक जिन्दा प्रेमी साप है.
  42. 3:54–3:55बलकुल.
  43. 3:55–3:57और यहा जो बाद सबसे दिल्चस्प है,
  44. 3:57–4:03वह यह की लोक कत्फाँ में एक जेहरीले साप से प्रेम करना महस कोई फैंटिसी नहीं है।
  45. 4:03–4:06अच्छा तो यह किस चीस का प्रतीक है।
  46. 4:06–4:12यह दर सल नेटिक पतन और अथ्यदिक क्रूर्ता का एक बहुत ही शक्तिषारी रूपक है।
  47. 4:12–4:17इक साप यहां उस जेहरीली मानसिक्ता का प्रतीक है, जो भातिन के भीतर गर कर चुकी है.
  48. 4:17–4:20यानी यह सरफ एक जानवर से प्रेम की बात नहीं है.
  49. 4:20–4:27नहीं, बलकल नहीं. यह दरषाता है कि कैसे विष्वास गात अन्सान को पुरी तरा अंदा और आमानविय बना देता है.
  50. 4:27–4:29वापने पती को सफ मारना नहीं चाती
  51. 4:29–4:32बलकी उसे तिल तिल कर खत्म कर रही है
  52. 4:32–4:34आाा, वो बासी भोजन वाली बातने
  53. 4:34–4:38ये दीमक की तरा है जो एक मस्वूथ पेड को अंदर यंदर खोखला कर रही है
  54. 4:38–4:40एक दम सही उदारन दिया
  55. 4:40–4:43उसे जान्बूचकर भासी खाना देना सरव भोजन की बात नहीं है
  56. 4:43–4:47यह मनो वैग्ज्यानिक रूप से शक्तिहीं करना
  57. 4:47–4:48और उसकी गरीमा को कुछलना है
  58. 4:48–4:52यह एक तरा का अट्यंत दीमा और क्रूर जेहर है
  59. 4:52–4:55पती को जान्बूचकर इतना कमजोर कर देना
  60. 4:55–4:59के अन्तिम्वार के समय उसके पास बचने की कोई ताकत ना रहे.
  61. 4:59–5:03आप या शरीरिक हत्या से पहले आत्मा की हत्या करने जैसा है.
  62. 5:03–5:08साप से उसका वाजीबोगरे प्रेम दरसल सत्ता और पूल नियंतरन से उसका प्रेम है.
  63. 5:08–5:10वो खुद को सरुषक्ति मान समझ रही है.
  64. 5:10–5:16लेकिन कहानी यहां जो करवड लेती है, उ किसी त्रिलर किस सब से बहत्रीं सीन जैसा है.
  65. 5:16–5:21साप उस बबत को मारने किलिये उसके पना यहनी उसकी जूते मिच्षुपकर बैट जाता है.
  66. 5:21–5:24औ, जूते में. यह तो बहुती कभतर नाएकस्तिती है.
  67. 5:24–5:32अब ज़रा कलपना कीजे, बफत अपना जूता पहनेवाला है, और एक कदम, बस एक कदम और उसका केल वही कदम.
  68. 5:32–5:37लिकिन शाएद उसकी आदत थी, वो जूता पहनेवे शे वहले उसे जोर से जधकता है.
  69. 5:37–5:39और साप बहर गर जाता होगा?
  70. 5:39–5:45बिल्कुल, जैसे ही वह जूतच चटकता है, वो जान लेवा कोब्रा बाहर गिर जाता है.
  71. 5:45–5:52और भद्, जो इस पूरी साजिच से अंजान है, आत्मरक्षा में तुरन तुस साब को मार डालता है.
  72. 5:52–5:55यानी अंजाने में ही उसने अपनी जान बचाली?
  73. 5:55–6:00अग, और इसके बाद वो जो करता है, वो और भी हैरान्दंगा है.
  74. 6:00–6:06वह उस मरे हुए साम्को एक बरगत काच, यानी बरगत के पीरद पर लत्का देता है.
  75. 6:06–6:09बरगत के पीरद पर, जो की जीवन का प्रतिक मान चाता है?
  76. 6:09–6:17वही तो और फिर वह खुशी खुशी गर आखर बडे उद्साह से अपनी को यबाहदुरी की कहानी सूनाता है
  77. 6:17–6:20उस पतनी को जो उसकी मुद की खवर का अंतदार कर रही थी
  78. 6:20–6:22या उसके आंकार पर बहुत गेरी चोट रही हो गी
  79. 6:22–6:27और इसके बाज जब भट्टेन अपने पती के साथ उस पेड के पास जाती है,
  80. 6:27–6:30और अपने प्रेमी सामप को मरा हुए देखती है,
  81. 6:30–6:32तो वो गेरे सद में से बहुष हो जाती है.
  82. 6:32–6:35उसकी तो पूरी दून्या हूँज़ दी एक पल में?
  83. 6:35–7:05आप दब बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड�
  84. 7:05–7:11अज़्ाँ बावक ता दिमाग इस बाद को सुगिकार ही नहीं कर सकता कि उसकी पतनी उसे मारना चाती है।
  85. 7:11–7:14वद्बदी की मासुम्यत उसके लिए द्धाल भी ती, और एक अन्दापन भी?
  86. 7:14–7:18बलकु, मनोविग्यान में यसे संगनात्मक विसंगती या
  87. 7:18–7:48कोगनेटिट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्�
  88. 7:48–7:51बगन सर्फ रोती या शोक नहीं मनाती
  89. 7:51–7:54वड शुपकर उस बरगत के पेड से
  90. 7:54–7:56उस मरेवे साप को उतार लाती है
  91. 7:56–8:00और फिर वा उस साप के थीक नोड उक्डे करती है
  92. 8:00–8:03नोड उक्डे, ये तो काफी क्रमबद और क्रूर्ट्रीगा है
  93. 8:03–8:33आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  94. 8:33–8:37बज़ालीवा पहेली रकती है, वो कैती है कि बताओ एं जगगवों पर क्या चुपा है?
  95. 8:38–8:39और अगर उनहीं बतापाया तो
  96. 8:40–8:44तो वहे उसे बखाखासी जुंका का, यानी उसका गला काटकर मार डालेगी
  97. 8:45–8:47ये किसी होरर एसकेप्रूम जैसल अगता है ना
  98. 8:47–8:50ज़ाई पहेली के सुराग किसी के मरेवे प्रेमी की तुकले है?
  99. 8:50–8:53ये अब महज हत्या की साजिष नहीं रही
  100. 8:53–8:55ये पुरी तरह से मनोवेग्यानिक पताडना है
  101. 8:55–8:57बागतें अपने गेहरे दुक
  102. 8:57–8:59और हार को एक जटल बडले की योजना में बडल रही है
  103. 8:59–9:04मतलव वहे उसे सर्फ मारना नहीं चाहती, वहे उसे तदपाना चाहती है.
  104. 9:04–9:07रख, साप की मुझत से उसे लगा कि उसकी ताकत चीन गई है.
  105. 9:07–9:13अब वह पने पती को मनोवे ज्याने करुब से शकती हीन और पूरी तरह आसाहाए मैजूस कराकर मारना चाहती है.
  106. 9:13–9:16बाप्रे ये क्रुर्ता की चरम सीमा है
  107. 9:16–9:19बाखतें को भी अपनी मोड्सामने नजर आगी ती
  108. 9:19–9:22इसले वो दो दिन की महलत या अपकाश मागता है
  109. 9:22–9:25ताकी मरने से पहले अपनी बहन से मिल सके
  110. 9:25–9:28बहाँी का रिष्ता वैसे भी लोग कतावा में बहुत महत्वोपून होता है
  111. 9:28–9:38अग, और ज़ वो बहन के पास पहुचता है, तो बहन उसकी आयु या बहाग गिर, जिसे आर्दा कहा गया है, वो जोडने का प्रैयास कर रही होती है.
  112. 9:38–9:42बहाई की स्तिती जानकर, वो तुरन तुसके साथ चल पडती है.
  113. 9:42–9:46लोग कत्हाँ में अकसर जब मुख्य पात्र सब से असहाय होता है
  114. 9:47–9:50तब ही कोई पारिवारेक या बहारी हस्तक शेप उसे बचाने आता है
  115. 9:50–9:51वही होता है
  116. 9:51–9:54रास्ते में वेग ध्रमशाला में रुकते है
  117. 9:54–9:56रात में बहन छिंता के मारे सो नहीं पाती
  118. 9:56–9:58अर तभी एक अधबुद गटन होती हैं
  119. 9:58–9:59कैसी गटन?
  120. 9:59–10:05उस दरमशाला के सारे दिये अपनी जगगसे उटकर एक जगे एकट्टा होते हैं
  121. 10:05–10:07और आपस में बाते करने लकते हैं
  122. 10:07–10:09दिये बाते करने लकते हैं
  123. 10:09–10:10ये काफी जादूई लगरा है
  124. 10:10–10:15अगर आपक संदरप से जोड़कर देखें तो यह दोनो हो सकते हैं.
  125. 10:15–10:18दिये यहा रोशनी और सकते के प्रतिक हैं,
  126. 10:18–10:22जो बाटेन के अंद्कार और दोखे को मिताने का काम करते हैं.
  127. 10:22–10:25यहनी सच्चाई बहार आही जाते हैं.
  128. 10:25–10:28अगर वह दोनो हो सकते हैं.
  129. 10:28–10:34तो यहाँ दोनो हो सकते हैं. दिये यहाँ रोशनी और सकते के प्रतीक हैं,
  130. 10:34–10:38जो बाटिन के अंदकार और दोखे को मिताने का का खाम करते हैं.
  131. 10:38–10:40यानी सच्चाई बहार आई ही जाता है.
  132. 10:40–10:45बलकल. और मनो वैज्यानिक द्रिष्टिकूर से यहा बहन की वहा इंटूशन है.
  133. 10:45–10:47उस्ट्ये की रोश्ट्टीने अंद्कार को हराद्या
  134. 10:47–10:49अब अब अगले दिन सुभबहाई बहीं गाँपुच्टेः है
  135. 10:49–10:51अब भहीं के पास सच्चाई का हत्यार है
  136. 10:51–10:53अब भहीं अबनी भोजी यानी भाटिन की चुनोती देती है
  137. 10:53–10:55ये बहुत इखुबसुरत व्याख्या है
  138. 10:55–10:58सत्ये की रोष्नी ने अंद्कार को हरादिया
  139. 10:58–11:00अब अब अगले दिन सुभा बहाई बहन गाँ पूछते हैं
  140. 11:00–11:03अब बहन के पास सच्चाई का हत्यार है
  141. 11:03–11:07अब बहन अपनी भोजी यानी बाटिन के चुनाती देती है
  142. 11:07–11:11वै केती है, अगर मैं पहेली भूज ग़ेई, तो मैं तुमारा गला कार दूंगी.
  143. 11:11–11:13और भहीतिन कैस के ले राजी हूँजाती है?
  144. 11:13–11:16आहंकार में अंदी भहीतिन तुरन्त मान जाती है.
  145. 11:16–11:20उसे लकता था कि उसके इस रास को को इनसान जानी नही चकता.
  146. 11:20–11:23यही वो बिन्दू है कहां आंकार विनाश का कारन बनता है.
  147. 11:23–11:24बिल्कुल.
  148. 11:24–11:28बहन तुरन साप के नाद तुक़ों को एक-गर के बहर निकाल देती है.
  149. 11:28–11:31बिल्कुल सती कुट्टर और अपनी प्रतिग्या क्या नूसार
  150. 11:31–11:35वा बना कोई हिचकि चाहर दिखाए, बहीतिन का गला कारत टी है.
  151. 11:35–11:37एक ख्रूर विश्वास गाती का अंथ?
  152. 11:37–11:38तो इस सब का क्या मतलब है?
  153. 11:38–11:41बाजी किनी तेजी से पलड़ट कै है ना?
  154. 11:41–11:43जो शिकारी ती वो खोड शिकार बन गए.
  155. 11:43–11:49ये इस बाद पर प्रकाष डालता है, कि बहाई बहन का बन्दन, कितना पवित्र और शक्तिषाली होता है.
  156. 11:49–11:52आप, और उसने कोई तल्वार नहीं उठाए थी शुर्वात में.
  157. 11:52–11:55वही तो, बही तिन को किसी शारी रिख ताकत से नहीं,
  158. 11:55–12:02बलकी बहें की बुद्दी, निदरता, और सतीक जानकारी की शकती से हराया गयान ही आज़़ सब से बड़ा हत्यार सावित हुए
  159. 12:02–12:09और उस बहें का निदर रूप, वो उसी कठोर भाशा और क्रूर तरीके से जवाब देती हैं जिस में बद्तिन बात कर रही थे
  160. 12:09–12:13बिल्ल्खुड, इसे हम न्याय के एक असी कविता के सकते हैं,
  161. 12:13–12:16जहां अप्रादी अपनी सजाता तैकरता है,
  162. 12:16–12:21बद्तिन ने जो क्रुडता रची ती वही पलट्गर उसके अंद्का कारन वनी.
  163. 12:21–12:23तो इस पुरी चर्चा को समेटते हुए,
  164. 12:23–12:26यह सपष्ट है की आज सर्फ एक लोग कता नहीं है
  165. 12:26–12:30यह एक तरव विनाशकारी गुप्तिच्छाँ को दर्षाती है
  166. 12:30–12:34तो दूसरी तरव बुद्दी और पारिवारिक निष्टा की जीट को
  167. 12:34–12:34सबी गहा
  168. 12:34–12:37यह मानव सुबहाव के सबसे अंदेरे
  169. 12:37–12:40अर सब से उजाले पक्षों का तक्राव है
  170. 12:40–12:42और ये आज भी उतना ही प्रसंगेख है
  171. 12:42–12:42है ना?
  172. 12:42–12:45यी कहानी आज भी हम से बहुत कुछ गयती है
  173. 12:45–12:51योंकी अगा इंसान की प्रवित्तिया लालच और दोखा समें के साथ कभी नहीं बड़लते
  174. 12:51–12:55और यही हमें हमें हमारे अन्तिम विचार कि अगर लेजाता है
  175. 12:55–12:58क्या हमारे आदूनिक त्रिलर और सस्पन्स कहानिया
  176. 12:58–13:00जिन में दोखे और माइन गेम्स होते है
  177. 13:00–13:04असल में इनहीं प्राचीन लोग कतागो किमनीव पर नहीं कडी हैं
  178. 13:04–13:08यह यह ज़ानकारी ही वो अकेला दिया नहीं है,
  179. 13:08–13:11तो सबसे गेरे श़्यान्त्रो का परदाफाश कर सकता है।
  180. 13:11–13:16बर तरफ अफवाई है, सही जानकारी ही वो अकेला दिया नहीं है,
  181. 13:16–13:19जो सबसे गेरे शव्यंट्रो का परदाफाश कर सकता है।
  182. 13:19–13:21दिलको, जानकारी ही सबसे बढी रोषनी है।
  183. 13:21–13:25या एक आईक आज्ँविचार है, जिस पर सभी को गेराए से सोचना चाही है।
  184. 13:25–13:29कुई कभी कभी सब से अंदेरे रास्तो को रोशन करने के लिए
  185. 13:29–13:32बस सत्ते के चोटी सिदिये की ही जरुरत होती है

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कल्पना कीजे की राद का गेरा सननाटा है, और जिसके साथ जीवन बिताने की कस्में खाई गये है, वो उसी चत के नीचे किसी और पर अपना सारा प्रेम लडा रहा है. वह, यह तो किसी भी अनसान किलिए बहुत ही दरावना खयाल है? बिल्कुल! और सब से आजीब बात यहे कि यह कोई और कोई सामाने प्रेमी नहीं है. बलकी एक बेहत जहरीला और जान लेवा कोब्रा साप है. बाप ब्रे! एक साप? रहां! जबकि तुस्रा साति इस भ्यानक विष्वाज गाथ से बिल्कुल बेखबर उसी मुद्के साये में गेरी नीन सोरा है. अब देखे जब हम आम तोर पर किसी भीमारी या चोट की बात करते है, तो चिकिटसा विग्यान हमें बहुत इस पष्ट तस्वीर दे देता है, है ना? हा, वहां चीजें काफी क्रमबद होती है. सहीं कहा. रड्यों की जाँच होती है और चित्र सामने आता है तूटीव ही सबएद रेखा देखकर कोई बी बता सकता है कि समस्स्या कहा है इनसान को ये सबष्ट्त्ता बहुत पसन्डाती है क्योंकी इस सिद दून्या को समजना आसान हो जाता है योंकी योंकी योंकी योंकी योंकी योंकी जागाई बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्टा बाश्ट्ट अदित और विदेहा एपत्रिका से लीगे एक बेहद रहेस्यमएई और दार्क मेठली लोक कतापर बात करने अले है। औग ये दु कापी दिल्च्यास्प लग रहा है। आप इस कताप का नाम है बभद भटन ये सर्फ एक सामान ये कहानी नहीं है यह विश्वाज गहात एक बेहत अजीबो गरीब गुप्त प्रेम और नयाए की एक आजी कहानी है, जो शाएद किसी आदूनिक ख्छिलर को भी माथ दे दे. यह नी इस में वो सब कुछ है, जो किसी को भी हेरान कर दे. पिलकुल हमारा मुखे मिशन आज प्राछीन कता की पर्टो को खोलना है यह कहानी एक बध यहनी जो पारम पर एक लोग गायक होते है और उसकी पतनी बध्टिन के एडद गुड गुमती है यहां दोके की शिर्वात किसी बहारी दूशमन से नहीं अद्र नायक लेग ताईग नायक लेग ताईग नायक लेग ताईग नायक ताईग नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नायक नाय तो उगर बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा बदा या ना बाप्रे ये तो खुली क्रूर्ता है बिल्कुल इसका परनाम ये होता है कि पती दिरे दिरे शारीरिक रूप से कमजोर या जिसे कता में दुबगर पतर कहा गया है वैसा हो जाता है और क्रूर्ता की सारी हदे तब पारो जाती है अर क्रुर्ता की सारी हदे तब पारो जाती है, जब भाटिन उस साप को शपष्टा देज देती है कि वेबभाट को दसके मार डाले. यानी उसने पुरी तरा से उसकी मुद्ट की साजिष रच्ली. आा, मुझे तो ये पूरी स्तिती किसी क्लासिक ट्रूएम डोक्युमेंट्री की तरह लगरे है. लेकिन यहा रथ्या का रथ्यार कोई बन्दू क्या जेहर नहीं, बलकी एक जिन्दा प्रेमी साप है. बलकुल. और यहा जो बाद सबसे दिल्चस्प है, वह यह की लोक कत्फाँ में एक जेहरीले साप से प्रेम करना महस कोई फैंटिसी नहीं है। अच्छा तो यह किस चीस का प्रतीक है। यह दर सल नेटिक पतन और अथ्यदिक क्रूर्ता का एक बहुत ही शक्तिषारी रूपक है। इक साप यहां उस जेहरीली मानसिक्ता का प्रतीक है, जो भातिन के भीतर गर कर चुकी है. यानी यह सरफ एक जानवर से प्रेम की बात नहीं है. नहीं, बलकल नहीं. यह दरषाता है कि कैसे विष्वास गात अन्सान को पुरी तरा अंदा और आमानविय बना देता है. वापने पती को सफ मारना नहीं चाती बलकी उसे तिल तिल कर खत्म कर रही है आाा, वो बासी भोजन वाली बातने ये दीमक की तरा है जो एक मस्वूथ पेड को अंदर यंदर खोखला कर रही है एक दम सही उदारन दिया उसे जान्बूचकर भासी खाना देना सरव भोजन की बात नहीं है यह मनो वैग्ज्यानिक रूप से शक्तिहीं करना और उसकी गरीमा को कुछलना है यह एक तरा का अट्यंत दीमा और क्रूर जेहर है पती को जान्बूचकर इतना कमजोर कर देना के अन्तिम्वार के समय उसके पास बचने की कोई ताकत ना रहे. आप या शरीरिक हत्या से पहले आत्मा की हत्या करने जैसा है. साप से उसका वाजीबोगरे प्रेम दरसल सत्ता और पूल नियंतरन से उसका प्रेम है. वो खुद को सरुषक्ति मान समझ रही है. लेकिन कहानी यहां जो करवड लेती है, उ किसी त्रिलर किस सब से बहत्रीं सीन जैसा है. साप उस बबत को मारने किलिये उसके पना यहनी उसकी जूते मिच्षुपकर बैट जाता है. औ, जूते में. यह तो बहुती कभतर नाएकस्तिती है. अब ज़रा कलपना कीजे, बफत अपना जूता पहनेवाला है, और एक कदम, बस एक कदम और उसका केल वही कदम. लिकिन शाएद उसकी आदत थी, वो जूता पहनेवे शे वहले उसे जोर से जधकता है. और साप बहर गर जाता होगा? बिल्कुल, जैसे ही वह जूतच चटकता है, वो जान लेवा कोब्रा बाहर गिर जाता है. और भद्, जो इस पूरी साजिच से अंजान है, आत्मरक्षा में तुरन तुस साब को मार डालता है. यानी अंजाने में ही उसने अपनी जान बचाली? अग, और इसके बाद वो जो करता है, वो और भी हैरान्दंगा है. वह उस मरे हुए साम्को एक बरगत काच, यानी बरगत के पीरद पर लत्का देता है. बरगत के पीरद पर, जो की जीवन का प्रतिक मान चाता है? वही तो और फिर वह खुशी खुशी गर आखर बडे उद्साह से अपनी को यबाहदुरी की कहानी सूनाता है उस पतनी को जो उसकी मुद की खवर का अंतदार कर रही थी या उसके आंकार पर बहुत गेरी चोट रही हो गी और इसके बाज जब भट्टेन अपने पती के साथ उस पेड के पास जाती है, और अपने प्रेमी सामप को मरा हुए देखती है, तो वो गेरे सद में से बहुष हो जाती है. उसकी तो पूरी दून्या हूँज़ दी एक पल में? आप दब बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड़ बवाड� अज़्ाँ बावक ता दिमाग इस बाद को सुगिकार ही नहीं कर सकता कि उसकी पतनी उसे मारना चाती है। वद्बदी की मासुम्यत उसके लिए द्धाल भी ती, और एक अन्दापन भी? बलकु, मनोविग्यान में यसे संगनात्मक विसंगती या कोगनेटिट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्� बगन सर्फ रोती या शोक नहीं मनाती वड शुपकर उस बरगत के पेड से उस मरेवे साप को उतार लाती है और फिर वा उस साप के थीक नोड उक्डे करती है नोड उक्डे, ये तो काफी क्रमबद और क्रूर्ट्रीगा है आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � बज़ालीवा पहेली रकती है, वो कैती है कि बताओ एं जगगवों पर क्या चुपा है? और अगर उनहीं बतापाया तो तो वहे उसे बखाखासी जुंका का, यानी उसका गला काटकर मार डालेगी ये किसी होरर एसकेप्रूम जैसल अगता है ना ज़ाई पहेली के सुराग किसी के मरेवे प्रेमी की तुकले है? ये अब महज हत्या की साजिष नहीं रही ये पुरी तरह से मनोवेग्यानिक पताडना है बागतें अपने गेहरे दुक और हार को एक जटल बडले की योजना में बडल रही है मतलव वहे उसे सर्फ मारना नहीं चाहती, वहे उसे तदपाना चाहती है. रख, साप की मुझत से उसे लगा कि उसकी ताकत चीन गई है. अब वह पने पती को मनोवे ज्याने करुब से शकती हीन और पूरी तरह आसाहाए मैजूस कराकर मारना चाहती है. बाप्रे ये क्रुर्ता की चरम सीमा है बाखतें को भी अपनी मोड्सामने नजर आगी ती इसले वो दो दिन की महलत या अपकाश मागता है ताकी मरने से पहले अपनी बहन से मिल सके बहाँी का रिष्ता वैसे भी लोग कतावा में बहुत महत्वोपून होता है अग, और ज़ वो बहन के पास पहुचता है, तो बहन उसकी आयु या बहाग गिर, जिसे आर्दा कहा गया है, वो जोडने का प्रैयास कर रही होती है. बहाई की स्तिती जानकर, वो तुरन तुसके साथ चल पडती है. लोग कत्हाँ में अकसर जब मुख्य पात्र सब से असहाय होता है तब ही कोई पारिवारेक या बहारी हस्तक शेप उसे बचाने आता है वही होता है रास्ते में वेग ध्रमशाला में रुकते है रात में बहन छिंता के मारे सो नहीं पाती अर तभी एक अधबुद गटन होती हैं कैसी गटन? उस दरमशाला के सारे दिये अपनी जगगसे उटकर एक जगे एकट्टा होते हैं और आपस में बाते करने लकते हैं दिये बाते करने लकते हैं ये काफी जादूई लगरा है अगर आपक संदरप से जोड़कर देखें तो यह दोनो हो सकते हैं. दिये यहा रोशनी और सकते के प्रतिक हैं, जो बाटेन के अंद्कार और दोखे को मिताने का काम करते हैं. यहनी सच्चाई बहार आही जाते हैं. अगर वह दोनो हो सकते हैं. तो यहाँ दोनो हो सकते हैं. दिये यहाँ रोशनी और सकते के प्रतीक हैं, जो बाटिन के अंदकार और दोखे को मिताने का का खाम करते हैं. यानी सच्चाई बहार आई ही जाता है. बलकल. और मनो वैज्यानिक द्रिष्टिकूर से यहा बहन की वहा इंटूशन है. उस्ट्ये की रोश्ट्टीने अंद्कार को हराद्या अब अब अगले दिन सुभबहाई बहीं गाँपुच्टेः है अब भहीं के पास सच्चाई का हत्यार है अब भहीं अबनी भोजी यानी भाटिन की चुनोती देती है ये बहुत इखुबसुरत व्याख्या है सत्ये की रोष्नी ने अंद्कार को हरादिया अब अब अगले दिन सुभा बहाई बहन गाँ पूछते हैं अब बहन के पास सच्चाई का हत्यार है अब बहन अपनी भोजी यानी बाटिन के चुनाती देती है वै केती है, अगर मैं पहेली भूज ग़ेई, तो मैं तुमारा गला कार दूंगी. और भहीतिन कैस के ले राजी हूँजाती है? आहंकार में अंदी भहीतिन तुरन्त मान जाती है. उसे लकता था कि उसके इस रास को को इनसान जानी नही चकता. यही वो बिन्दू है कहां आंकार विनाश का कारन बनता है. बिल्कुल. बहन तुरन साप के नाद तुक़ों को एक-गर के बहर निकाल देती है. बिल्कुल सती कुट्टर और अपनी प्रतिग्या क्या नूसार वा बना कोई हिचकि चाहर दिखाए, बहीतिन का गला कारत टी है. एक ख्रूर विश्वास गाती का अंथ? तो इस सब का क्या मतलब है? बाजी किनी तेजी से पलड़ट कै है ना? जो शिकारी ती वो खोड शिकार बन गए. ये इस बाद पर प्रकाष डालता है, कि बहाई बहन का बन्दन, कितना पवित्र और शक्तिषाली होता है. आप, और उसने कोई तल्वार नहीं उठाए थी शुर्वात में. वही तो, बही तिन को किसी शारी रिख ताकत से नहीं, बलकी बहें की बुद्दी, निदरता, और सतीक जानकारी की शकती से हराया गयान ही आज़़ सब से बड़ा हत्यार सावित हुए और उस बहें का निदर रूप, वो उसी कठोर भाशा और क्रूर तरीके से जवाब देती हैं जिस में बद्तिन बात कर रही थे बिल्ल्खुड, इसे हम न्याय के एक असी कविता के सकते हैं, जहां अप्रादी अपनी सजाता तैकरता है, बद्तिन ने जो क्रुडता रची ती वही पलट्गर उसके अंद्का कारन वनी. तो इस पुरी चर्चा को समेटते हुए, यह सपष्ट है की आज सर्फ एक लोग कता नहीं है यह एक तरव विनाशकारी गुप्तिच्छाँ को दर्षाती है तो दूसरी तरव बुद्दी और पारिवारिक निष्टा की जीट को सबी गहा यह मानव सुबहाव के सबसे अंदेरे अर सब से उजाले पक्षों का तक्राव है और ये आज भी उतना ही प्रसंगेख है है ना? यी कहानी आज भी हम से बहुत कुछ गयती है योंकी अगा इंसान की प्रवित्तिया लालच और दोखा समें के साथ कभी नहीं बड़लते और यही हमें हमें हमारे अन्तिम विचार कि अगर लेजाता है क्या हमारे आदूनिक त्रिलर और सस्पन्स कहानिया जिन में दोखे और माइन गेम्स होते है असल में इनहीं प्राचीन लोग कतागो किमनीव पर नहीं कडी हैं यह यह ज़ानकारी ही वो अकेला दिया नहीं है, तो सबसे गेरे श़्यान्त्रो का परदाफाश कर सकता है। बर तरफ अफवाई है, सही जानकारी ही वो अकेला दिया नहीं है, जो सबसे गेरे शव्यंट्रो का परदाफाश कर सकता है। दिलको, जानकारी ही सबसे बढी रोषनी है। या एक आईक आज्ँविचार है, जिस पर सभी को गेराए से सोचना चाही है। कुई कभी कभी सब से अंदेरे रास्तो को रोशन करने के लिए बस सत्ते के चोटी सिदिये की ही जरुरत होती है

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